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  • दुनिया के 13 ऐसे इंसान जिनके पास थीं असली ‘सुपरपावर’, जानकर रह जाएंगे हैरान

    दुनिया के 13 ऐसे इंसान जिनके पास थीं असली ‘सुपरपावर’, जानकर रह जाएंगे हैरान

    दुनिया के 13 ऐसे इंसान जिनके पास थीं असली ‘सुपरपावर’, जानकर रह जाएंगे हैरान

    क्या सुपरपावर सिर्फ फिल्मों और कॉमिक्स तक ही सीमित हैं? आमतौर पर हम सुपरहीरो को उड़ते, भारी वजन उठाते या असाधारण ताकत दिखाते हुए देखते हैं। लेकिन दुनिया में कुछ ऐसे वास्तविक लोग भी हुए हैं, जिनकी क्षमताएं किसी सुपरपावर से कम नहीं थीं। किसी को अत्यधिक ठंड का असर नहीं होता, कोई बिना आंखों के भी रास्ता पहचान लेता है, तो किसी की याददाश्त कंप्यूटर से भी तेज होती है।

    आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ असाधारण लोगों के बारे में।

    1. विम हॉफ (Wim Hof) – द आइसमैन

    नीदरलैंड के विम हॉफ को “द आइसमैन” के नाम से जाना जाता है। उन्होंने अत्यधिक ठंड में रहने के कई विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं। बर्फ से ढके वातावरण में लंबी दूरी तक दौड़ना, ठंडे पानी में लंबे समय तक रहना और कठिन परिस्थितियों में पर्वतारोहण करना उनकी पहचान है। उनकी विशेष श्वास तकनीक और मानसिक नियंत्रण ने उन्हें दुनिया भर में प्रसिद्ध बना दिया।

    2. वेलु रथाकृष्णन (Velu Rathakrishnan)

    मलेशिया के वेलु रथाकृष्णन ने अपने दांतों की ताकत से भारी ट्रेन खींचकर लोगों को हैरान कर दिया। उन्होंने अपने दांतों की मदद से सैकड़ों टन वजन वाली ट्रेन को कई फीट तक खींचने का रिकॉर्ड बनाया।

    3. बेन अंडरवुड (Ben Underwood)

    महज दो साल की उम्र में आंखों की रोशनी खोने के बावजूद बेन ने हार नहीं मानी। उन्होंने चमगादड़ों की तरह Echolocation तकनीक विकसित कर ली, जिसमें जीभ से आवाज निकालकर आसपास की वस्तुओं का पता लगाया जाता है। इसी क्षमता की मदद से वे साइकिल चलाते, फुटबॉल खेलते और सामान्य जीवन जीते थे।

    4. डेनियल ब्राउनिंग स्मिथ (Daniel Browning Smith)

    डेनियल को दुनिया का सबसे लचीला इंसान माना जाता है। उनका शरीर इतनी आसानी से मुड़ जाता है कि लोग उन्हें “रबर बॉय” के नाम से जानते हैं। यह क्षमता एक दुर्लभ चिकित्सीय स्थिति के कारण विकसित हुई।

    5. स्टीफन विल्टशायर (Stephen Wiltshire)

    ब्रिटेन के स्टीफन विल्टशायर की याददाश्त बेहद असाधारण है। वे किसी शहर को कुछ मिनट देखने के बाद उसकी बेहद सटीक और विस्तृत पेंटिंग बना सकते हैं। उनकी यह प्रतिभा पूरी दुनिया में सराही जाती है।

    6. लियाम होएक्स्ट्रा (Liam Hoekstra)

    अमेरिका के लियाम बचपन से ही असाधारण शारीरिक ताकत के लिए प्रसिद्ध हुए। कम उम्र में ही उनके शरीर में सिक्स-पैक दिखाई देने लगे थे। डॉक्टरों के अनुसार उन्हें एक दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति थी, जिसके कारण उनके शरीर में सामान्य से अधिक मांसपेशियां विकसित होती थीं।

    7. मिशेल लोटिटो (Michel Lotito)

    फ्रांस के मिशेल लोटिटो अपनी अनोखी खाने की आदत के कारण दुनिया भर में मशहूर हुए। वे धातु, कांच, रबर और कई ऐसी चीजें खा लेते थे जिन्हें सामान्य इंसान खा ही नहीं सकता। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार उनके पाचन तंत्र की संरचना सामान्य लोगों से अलग थी।

    8. प्रहलाद जानी (Prahlad Jani)

    भारत के प्रहलाद जानी ने दावा किया था कि उन्होंने कई दशकों तक बिना भोजन और पानी के जीवन बिताया। इस दावे की जांच के लिए उन पर चिकित्सकीय निगरानी में कई परीक्षण किए गए, जिनकी काफी चर्चा हुई। हालांकि, उनके दावों को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में अलग-अलग मत रहे हैं।

    9. थाई न्गोक (Thai Ngoc)

    वियतनाम के थाई न्गोक ने दावा किया कि वे कई दशकों तक सोए बिना सामान्य जीवन जीते रहे। यह मामला चिकित्सा जगत में भी चर्चा का विषय बना रहा।

    10. शकुंतला देवी (Shakuntala Devi)

    भारत की महान गणितज्ञ शकुंतला देवी को “ह्यूमन कंप्यूटर” कहा जाता था। वे बेहद कठिन गणितीय सवालों का जवाब कुछ ही सेकंड में मानसिक गणना से दे देती थीं। उनकी इस अद्भुत प्रतिभा के कारण उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ।

    11. लियू थाउ लिन (Liew Thow Lin)

    मलेशिया के लियू थाउ लिन को “मैग्नेट मैन” कहा जाता था। वे अपने शरीर पर धातु की भारी वस्तुएं चिपका लेते थे। वैज्ञानिकों के अनुसार यह किसी चुंबकीय शक्ति की वजह से नहीं, बल्कि उनकी त्वचा की विशेष सतह के कारण संभव होता था।

    12. डीन कार्नाजेस (Dean Karnazes)

    अमेरिका के अल्ट्रा मैराथन धावक डीन कार्नाजेस अपनी अद्भुत सहनशक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने बिना रुके सैकड़ों किलोमीटर तक दौड़ पूरी कर दुनिया को चौंका दिया। उन्हें दुनिया के सबसे बेहतरीन एंड्यूरेंस एथलीट्स में गिना जाता है।

    13. वेरोनिका साइडर (Veronica Seider)

    जर्मनी की वेरोनिका साइडर की दृष्टि सामान्य इंसानों की तुलना में कई गुना अधिक तेज बताई जाती है। कहा जाता है कि वे बहुत दूर मौजूद वस्तुओं को भी स्पष्ट रूप से पहचान सकती थीं।

    क्या ये सचमुच सुपरपावर हैं?

    इन सभी लोगों की क्षमताएं किसी फिल्मी सुपरहीरो जैसी जरूर लगती हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश मामलों के पीछे जैविक विशेषताएं, वर्षों की मेहनत, अभ्यास या दुर्लभ चिकित्सीय स्थितियां थीं। इसलिए इन्हें जादुई शक्तियां नहीं, बल्कि असाधारण मानवीय क्षमताएं कहना अधिक उचित होगा।

    निष्कर्ष

    मानव शरीर और मस्तिष्क की क्षमता हमारी कल्पना से कहीं अधिक है। इतिहास में कई ऐसे लोग हुए हैं जिन्होंने अपनी अनोखी प्रतिभा, कड़ी मेहनत या दुर्लभ शारीरिक विशेषताओं से दुनिया को हैरान कर दिया। यही वजह है कि आज भी इन लोगों को वास्तविक जीवन के “सुपरह्यूमन” के रूप में याद किया जाता है।

  • शाहजहांपुर के मंदिर; में डबल मर्डर, साधुओं को मारकर जलाया! अधजले शव मिलने के बाद गांव में तनाव’

    शाहजहांपुर के मंदिर; में डबल मर्डर, साधुओं को मारकर जलाया! अधजले शव मिलने के बाद गांव में तनाव’

    शाहजहांपुर के मंदिर; में डबल मर्डर, साधुओं को मारकर जलाया! अधजले शव मिलने के बाद गांव में तनाव’

    उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले स्थित खुदागंज थाना क्षेत्र का सूथा गांव देर रात दोहरी हत्या की वारदात से दहल उठा. गांव के मंदिर की देखभाल करने वाले दो वृद्ध साधुओं- बाबा गोपाल दास और बाबा बिहारी दास की अज्ञात हमलावरों ने बेरहमी से हत्या कर दी. हत्यारों ने वारदात के साक्ष्य मिटाने की नीयत से दोनों साधुओं के शवों को आग के हवाले कर दिया.

    सुबह ग्रामीणों ने देखा खौफनाक मंजर

    सुबह जब स्थानीय लोग रोजाना की तरह मंदिर पहुंचे, तो वहां का मंजर देखकर सन्न रह गए. मंदिर परिसर के पास से दोनों साधुओं के अधजले अवशेष बरामद हुए. खबर फैलते ही मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई. तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए गांव में एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात किया गया है.

    फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य, एक आरोपी हिरासत में

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे. फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए. त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सुमित नाम के एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है. पुलिस उससे कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि वारदात के पीछे की असल वजह और अन्य संभावित सहयोगियों का पता लगाया जा सके.

    स्थान पाने की चाहत में रची खौफनाक साजिश

    पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि हिरासत में लिया गया सुमित मंदिर परिसर में अपनी जगह बनाना चाहता था. इसी मंशा के चलते उसने दोनों साधुओं की हत्या कर उनके शवों को जला दिया. अधिकारियों के मुताबिक सुमित मानसिक रूप से अस्वस्थ (मेंटली डिस्टर्ब) है. फिलहाल पुलिस हर पहलू से मामले की तफ्तीश कर रही है.

  • गामा पहलवान की कहानी: रोज 5,000 बैठक, 3,000 दंड और अभ्यास में 40 पहलवानों को पटकने वाला ‘रुस्तम-ए-हिंद’

    गामा पहलवान की कहानी: रोज 5,000 बैठक, 3,000 दंड और अभ्यास में 40 पहलवानों को पटकने वाला ‘रुस्तम-ए-हिंद’

    गामा पहलवान की कहानी: रोज 5,000 बैठक, 3,000 दंड और अभ्यास में 40 पहलवानों को पटकने वाला ‘रुस्तम-ए-हिंद’

    भारतीय कुश्ती के इतिहास में जब भी महान पहलवानों का जिक्र होता है, तो सबसे पहले जिन नामों में एक नाम लिया जाता है, वह है गामा पहलवान। उनका असली नाम गुलाम मोहम्मद बख्श बट (प्रचलित रूप से गुलाम हुसैन बख्श के नाम से भी उल्लेख मिलता है) था। अपनी असाधारण ताकत, अनुशासन और अजेय प्रदर्शन के कारण उन्हें ‘रुस्तम-ए-हिंद’, ‘रुस्तम-ए-जमां’ और ‘द ग्रेट गामा’ जैसे खिताब मिले।

    कहा जाता है कि अपने लंबे कुश्ती करियर में गामा पहलवान किसी भी आधिकारिक मुकाबले में पराजित नहीं हुए। यही वजह है कि आज भी उन्हें दुनिया के सबसे महान पहलवानों में गिना जाता है।

    बचपन से ही शुरू हो गई थी पहलवानी

    गामा पहलवान का जन्म 22 मई 1878 को तत्कालीन ब्रिटिश भारत के पंजाब क्षेत्र में हुआ था। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उनका पालन-पोषण परिवार के अन्य सदस्यों ने किया। कम उम्र से ही उन्हें कुश्ती और व्यायाम का प्रशिक्षण मिलने लगा। उनकी लगन और मेहनत ने उन्हें किशोरावस्था में ही पहचान दिलानी शुरू कर दी थी।

    ऐसी थी गामा पहलवान की ट्रेनिंग

    गामा की फिटनेस आज भी लोगों के लिए प्रेरणा है। विभिन्न ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, उनकी रोजाना की ट्रेनिंग बेहद कठिन होती थी।

    • प्रतिदिन लगभग 5,000 बैठक (Squats) लगाते थे।
    • करीब 3,000 दंड (Push-ups) करते थे।
    • अभ्यास के दौरान रोज लगभग 40 पहलवानों से कुश्ती लड़ते थे।
    • कई किलोमीटर दौड़ लगाना और भारी पत्थरों व लोहे के उपकरणों से अभ्यास उनकी दिनचर्या का हिस्सा था।

    उनका मानना था कि लगातार अभ्यास ही किसी पहलवान की सबसे बड़ी ताकत होता है।

    गामा पहलवान की ताकत के चर्चे

    गामा की शारीरिक क्षमता को लेकर कई किस्से मशहूर हैं। कहा जाता है कि वे लगभग 95 किलोग्राम के भारी व्यायाम चक्र से अभ्यास करते थे। एक लोकप्रिय कथा के अनुसार, उन्होंने एक बार लगभग 1,200 किलोग्राम वजनी पत्थर को भी उठाया था। हालांकि, इस दावे के ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन यह उनकी असाधारण ताकत की लोकप्रिय कहानियों में शामिल है।

    क्या खाते थे गामा पहलवान?

    उनकी भारी-भरकम ट्रेनिंग के लिए भरपूर पोषण भी जरूरी था। विभिन्न स्रोतों में उनकी डाइट का उल्लेख इस प्रकार मिलता है—

    • कई लीटर दूध
    • देसी घी
    • मक्खन
    • मांस
    • बादाम और अन्य सूखे मेवे
    • ताजे मौसमी फल और फलों का रस

    उनका भोजन शरीर की ताकत और ऊर्जा बनाए रखने के लिए तैयार किया जाता था।

    विदेशी पहलवानों को भी दी मात

    गामा पहलवान ने भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इंग्लैंड सहित कई देशों में उन्होंने प्रसिद्ध पहलवानों को चुनौती दी और कई मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज की। उनकी तकनीक, ताकत और फुर्ती ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान दिलाया।

    क्यों कहलाए ‘रुस्तम-ए-हिंद’?

    भारत के कई दिग्गज पहलवानों को हराने के बाद गामा को ‘रुस्तम-ए-हिंद’ की उपाधि दी गई। यह सम्मान उस दौर में किसी भी पहलवान के लिए सबसे प्रतिष्ठित माना जाता था। इसके बाद उनका नाम पूरी दुनिया में ‘द ग्रेट गामा’ के रूप में प्रसिद्ध हो गया।

    विभाजन के बाद का जीवन

    भारत के विभाजन के बाद गामा पाकिस्तान चले गए। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बावजूद उन्होंने लंबे समय तक युवा पहलवानों को प्रशिक्षण दिया। बाद में उन्हें अस्थमा और हृदय रोग जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ा।

    23 मई 1960 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी उपलब्धियां आज भी कुश्ती प्रेमियों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।

    गामा पहलवान से जुड़ी रोचक बातें

    • अपने पूरे आधिकारिक कुश्ती करियर में अजेय रहने के लिए प्रसिद्ध हैं।
    • रोज हजारों दंड और बैठक लगाने के लिए जाने जाते थे।
    • अभ्यास के दौरान कई पहलवानों से लगातार कुश्ती लड़ते थे।
    • उनकी फिटनेस और अनुशासन आज भी पहलवानों के लिए प्रेरणा माने जाते हैं।
    • उन्हें भारतीय कुश्ती इतिहास के सबसे महान पहलवानों में गिना जाता है।

    निष्कर्ष

    गामा पहलवान सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास की जीती-जागती मिसाल थे। उनकी कड़ी ट्रेनिंग, अद्भुत ताकत और कभी हार न मानने वाले जज्बे ने उन्हें विश्वभर में पहचान दिलाई। आज भी जब महान पहलवानों की बात होती है, तो ‘द ग्रेट गामा’ का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।

  • देहरादून में BJP ‘पार्षद’ के घर से नौकर ने उड़ाए लाखों के गहने और कैश, खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर सबको किया था बेहोश

    देहरादून में BJP ‘पार्षद’ के घर से नौकर ने उड़ाए लाखों के गहने और कैश, खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर सबको किया था बेहोश

    देहरादून में BJP ‘पार्षद’ के घर से नौकर ने उड़ाए लाखों के गहने और कैश, खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर सबको किया था बेहोश

    देहरादून के बल्लीवाला इलाके में बीजेपी पार्षद के घर हुई लूट की वारदात से हड़कंप मच गया है. आरोप है कि घर में काम करने वाले एक नौकर ने परिवार के सदस्यों के खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया. खाना खाने के बाद पार्षद और उनके परिवार की तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोशी की हालत में पहुंच गए. इसी दौरान आरोपी घर से लाखों रुपये के गहने और नकदी लेकर फरार हो गया.

    वारदात के बाद बीजेपी पार्षद अमिता सिंह, उनके पति महिपाल सिंह और बेटे शुभम की तबीयत बिगड़ गई. तीनों को इलाज के लिए देहरादून के सिनर्जी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी. पुलिस को आशंका है कि वारदात में घर के नौकर के अलावा कुछ अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं.

    इस पूरी घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. फुटेज में कुछ लोग पार्षद के घर के अंदर दाखिल होते दिखाई दे रहे हैं. पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के साथ घटनास्थल से मिले दूसरे सुरागों को भी खंगाल रही है. इन्हीं सबूतों के आधार पर पुलिस आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका का पता लगाने की कोशिश कर रही है.

    शुरुआती जांच में घर में काम करने वाले नौकर की भूमिका सामने आई है, जो वारदात के बाद से फरार है. बताया जा रहा है कि आरोपी नेपाल का रहने वाला है और उसे पार्षद की बेटी मेघा ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए घरेलू काम के लिए रखा था. मेघा दिल्ली में रहती हैं और करीब 25 दिन पहले ही इस नौकर को काम पर रखा गया था. परिवार के मुताबिक ऑनलाइन माध्यम से उसकी जानकारी जुटाने के बाद उसे नौकरी पर रखा गया था.

    परिवार का कहना है कि इतने कम समय में ही नौकर ने उनका भरोसा हासिल कर लिया था. आरोप है कि बुधवार को उसने परिवार के सदस्यों के खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया. खाना खाने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए. इसी दौरान आरोपी ने घर में रखी नकदी और लाखों रुपये के सोने के जेवरात समेत अन्य सामान समेट लिया और मौके से फरार हो गया.

    पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती फरार नौकर तक पहुंचना है. पुलिस उसके मोबाइल नंबर, ऑनलाइन संपर्क और संभावित ठिकानों की जानकारी जुटा रही है. इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि घटना के समय उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे. सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस वारदात में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान करने की कोशिश कर रही है.

    मामले की जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए देहरादून पुलिस ने तीन टीमों का गठन किया है. पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और घटना से जुड़े हर पहलू की पड़ताल की जा रही है. ऑनलाइन माध्यम से नौकर की नियुक्ति, उसके पिछले रिकॉर्ड और घटना के बाद उसके संपर्कों की भी जांच की जा रही है. पुलिस का कहना है कि जल्द ही मामले का खुलासा करने के लिए जरूरी कार्रवाई की जा रही है.

    देहरादून में हुई इस वारदात ने घरों में घरेलू काम के लिए ऑनलाइन माध्यम से रखे जाने वाले कर्मचारियों के सत्यापन को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि पुलिस अभी मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की भूमिका पूरी तरह जांच के बाद ही साफ होगी. फिलहाल पार्षद और उनके परिवार का अस्पताल में इलाज चल रहा है, जबकि पुलिस फरार नौकर और उसके संभावित साथियों की तलाश में जुटी है.

  • हर मॉल, होटल और ऑफिस की लिफ्ट में शीशा क्यों होता है? जानिए इसका साइंस

    हर मॉल, होटल और ऑफिस की लिफ्ट में शीशा क्यों होता है? जानिए इसका साइंस

    हर मॉल, होटल और ऑफिस की लिफ्ट में शीशा क्यों होता है? जानिए इसका साइंस

    ऑफिस, अस्पताल, होटल, मॉल या किसी ऊंची इमारत की लिफ्ट में आपने एक बात जरूर नोटिस की होगी अंदर लगभग हमेशा शीशा लगा होता है। पहली नजर में यह केवल सजावट का हिस्सा लगता है, लेकिन वास्तव में इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। यह न सिर्फ लिफ्ट को आकर्षक बनाता है, बल्कि सुरक्षा, सुविधा और लोगों की मानसिक सहजता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है। आइए जानते हैं कि लिफ्ट में शीशा लगाने के पीछे क्या-क्या वजहें हैं।

    व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए आसान आवागमन

    छोटी लिफ्ट में व्हीलचेयर को घुमाना या पीछे की ओर निकालना आसान नहीं होता। ऐसे में शीशा पीछे का दृश्य दिखा देता है, जिससे बिना बार-बार मुड़े व्यक्ति आसानी से दिशा बदल सकता है और सुरक्षित तरीके से बाहर निकल सकता है। यह विशेष रूप से दिव्यांगजनों के लिए काफी उपयोगी सुविधा है।

    बंद जगह का डर कम करने में मदद

    कुछ लोगों को बंद या संकरी जगहों में घबराहट महसूस होती है, जिसे क्लॉस्ट्रोफोबिया कहा जाता है। शीशा लिफ्ट के अंदर की जगह को देखने में अधिक बड़ी और खुली महसूस कराता है। इससे मानसिक दबाव कम होता है और यात्रा अधिक आरामदायक लगती है।

    बढ़ाता है सुरक्षा की भावना

    शीशे की मदद से लिफ्ट के भीतर मौजूद सभी लोगों और आसपास की गतिविधियों पर आसानी से नजर रखी जा सकती है। इससे पीछे खड़े व्यक्ति या दरवाजे के पास मौजूद लोगों को देखना आसान हो जाता है। यह पारदर्शिता लोगों को अधिक सुरक्षित महसूस कराती है और असहज परिस्थितियों की संभावना भी घटाती है।

    कम उबाऊ बनाता है सफर

    लिफ्ट की यात्रा भले ही कुछ सेकंड की हो, लेकिन कई बार यह लंबी लग सकती है। ऐसे में लोग अनायास ही अपने प्रतिबिंब को देखने लगते हैं, जिससे उनका ध्यान समय पर कम जाता है। परिणामस्वरूप सफर अधिक सहज और कम नीरस महसूस होता है।

    रोशनी और सुंदरता में इजाफा

    शीशा प्रकाश को परावर्तित करता है, जिससे लिफ्ट का केबिन अधिक उजला और खुला दिखाई देता है। इससे छोटी जगह भी बड़ी और साफ-सुथरी महसूस होती है। यही कारण है कि आधुनिक इमारतों में शीशे का उपयोग इंटीरियर को बेहतर बनाने के लिए भी किया जाता है।

    रोजमर्रा की छोटी जरूरतों में मददगार

    बहुत से लोग लिफ्ट में प्रवेश करते ही अपने कपड़े, बाल या चेहरे को एक बार देख लेते हैं। यह एक छोटी लेकिन उपयोगी सुविधा है। साथ ही, शीशे के कारण लोग एक-दूसरे की स्थिति आसानी से देख पाते हैं, जिससे टकराने या धक्का लगने की संभावना भी कम हो जाती है।

  • चित्रकूट: लिव-इन में रह रही महिला के साथ गैंगरेप, पड़ोसी बहला-फुसलाकर ले गया था जंगल

    चित्रकूट: लिव-इन में रह रही महिला के साथ गैंगरेप, पड़ोसी बहला-फुसलाकर ले गया था जंगल

    चित्रकूट: लिव-इन में रह रही महिला के साथ गैंगरेप, पड़ोसी बहला-फुसलाकर ले गया था जंगल

    चित्रकूट के मानिकपुर में पति से विवाद के बाद बाहर निकली लिव-इन में रह रही महिला से तीन लोगों ने गैंगरेप किया. पड़ोसी छैला बहला-फुसलाकर उसे जंगल ले गया, जहां छुटकू और पुरुषोत्तम के साथ वारदात को अंजाम दिया. पुलिस ने मुख्य आरोपी छैला को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो फरार आरोपियों की तलाश जारी है.

    यूपी के चित्रकूट में लिव-इन में रह रही महिला के साथ तीन युवकों ने गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया. पति से विवाद के बाद पड़ोसी युवक महिला को बहला-फुसलाकर जंगल ले गया था. पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है.

    पड़ोसी ने रची साजिश

    पूरा मामला जिले के मानिकपुर थाना क्षेत्र स्थित एक गांव का है, जहां 30 सितंबर को लिव-इन में रह रही महिला के साथ तीन लोगों ने दुष्कर्म किया. पति का पहली पत्नी से विवाद सुलझाने के दौरान नाराज होकर बाहर निकली महिला को गांव के पड़ोसी छैला ने पति से मिलाने के बहाने बहलाया. वह महिला को रेलवे लाइन पार महुवा के पेड़ के पास ले गया, जहां पहले से मौजूद छुटकू और पुरुषोत्तम के साथ मिलकर तीनों ने बारी-बारी से वारदात को अंजाम दिया.

    पुलिस ने एक आरोपी को दबोचा, दो की तलाश

    घटना के बाद पीड़िता ने घर पहुंचकर पति को आपबीती सुनाई, जिसके बाद पुलिस स्टेशन में तहरीर दी गई. पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की और मुख्य आरोपी छैला को गिरफ्तार कर लिया. एसपी अरुण कुमार सिंह के अनुसार प्रारंभिक जांच में घटना सत्य पाई गई है. बाकी दो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगी हुई हैं और फॉरेंसिक टीम ने मौके से सैंपल कलेक्ट किए हैं.

    एक अरेस्ट, दो फरार

    बताया जा रहा है कि पति-पत्नी और रिलेशन शिप में रह रही ‘वो’ के बीच विवाद हुआ तो पड़ोसी युवक ने इसका फायदा उठाकर महिला को जंगल में ले जाकर गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया. इस कांड में उसके दो साथी भी शामिल थे. फिलहाल, पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. बाकी दो की तलाश में दबिश जारी है.

  • मॉल और सिनेमा हॉल के टॉयलेट में नीचे गैप रखने की वजह जानकर आप भी कहेंगे- ‘ओह, इसलिए!’

    मॉल और सिनेमा हॉल के टॉयलेट में नीचे गैप रखने की वजह जानकर आप भी कहेंगे- ‘ओह, इसलिए!’

    मॉल और सिनेमा हॉल के टॉयलेट में नीचे गैप रखने की वजह जानकर आप भी कहेंगे- ‘ओह, इसलिए!’

    जब भी हम किसी सिनेमा हॉल, शॉपिंग मॉल, एयरपोर्ट या बड़े सार्वजनिक स्थान के टॉयलेट का उपयोग करते हैं, तो अक्सर एक बात ध्यान में आती है—टॉयलेट के दरवाज़े के नीचे थोड़ा खाली स्थान यानी गैप होता है। कई लोगों को यह डिज़ाइन अजीब लगता है और वे सोचते हैं कि पूरी तरह बंद दरवाज़े क्यों नहीं लगाए जाते। दरअसल, इसके पीछे कई व्यावहारिक और सुरक्षा से जुड़े कारण होते हैं।

    सफाई में आसानी

    पब्लिक टॉयलेट्स में हर दिन बड़ी संख्या में लोग ok? आते हैं, इसलिए उनकी नियमित सफाई जरूरी होती है। दरवाज़े के नीचे गैप होने से सफाई कर्मचारी आसानी से mop या पानी का इस्तेमाल करके पूरे फर्श को साफ कर सकते हैं। इससे हर केबिन का दरवाज़ा खोलने की जरूरत नहीं पड़ती और सफाई तेजी से हो जाती है।

    इमरजेंसी स्थिति में मदद

    अगर कोई व्यक्ति टॉयलेट के अंदर बेहोश हो जाए, गिर जाए या दरवाज़ा लॉक हो जाए, तो नीचे का गैप बहुत काम आता है। बाहर मौजूद लोग स्थिति का अंदाज़ा लगा सकते हैं और तुरंत मदद पहुंचाई जा सकती है। यह सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

    वेंटिलेशन और बदबू कम करना

    टॉयलेट में नमी और बदबू की समस्या आम होती है। नीचे का खुला हिस्सा हवा के बेहतर सर्कुलेशन में मदद करता है, जिससे बदबू और उमस कम होती है। इससे टॉयलेट का वातावरण अधिक साफ और आरामदायक बना रहता है।

    कम लागत और आसान इंस्टॉलेशन

    पूरी तरह बंद दरवाज़ों की तुलना में इस तरह के पार्टिशन सस्ते होते हैं और जल्दी लगाए जा सकते हैं। बड़े मॉल और सिनेमा हॉल में कई टॉयलेट बनाए जाते हैं, इसलिए यह डिज़ाइन लागत कम करने में मदद करता है।

    सुरक्षा और मॉनिटरिंग

    यह डिज़ाइन गलत गतिविधियों जैसे धूम्रपान, तोड़फोड़ या अन्य दुरुपयोग को रोकने में भी मदद करता है। साथ ही, बाहर खड़े लोगों को यह पता चल जाता है कि टॉयलेट ओक्यूपाइड है या खाली।

  • भरोसा किया तो गए! झांसी GRP के हत्थे चढ़ा गुजरात का हाईटेक ‘ट्रेन लुटेरा’ परिवार, सफर में हंसते-बोलते करते थे चोरी.

    भरोसा किया तो गए! झांसी GRP के हत्थे चढ़ा गुजरात का हाईटेक ‘ट्रेन लुटेरा’ परिवार, सफर में हंसते-बोलते करते थे चोरी.

    भरोसा किया तो गए! झांसी GRP के हत्थे चढ़ा गुजरात का हाईटेक ‘ट्रेन लुटेरा’ परिवार, सफर में हंसते-बोलते करते थे चोरी.

    झांसी GRP ने ट्रेनों में परिवार बनकर यात्रियों का सामान साफ करने वाले गुजरात के भावनगर निवासी 7 रिश्तेदारों को गिरफ्तार किया है. इनमें 3 महिलाएं भी शामिल हैं. आरोपी यात्रियों, खासकर सोती हुई महिलाओं से घुल-मिलकर जेवरात, नकदी और मोबाइल चुराते थे. इनके कब्जे से सोने-चांदी के जेवर और नकदी बरामद हुई है. पुलिस इनके पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है.

    ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को अगर आसपास बैठे किसी परिवार पर भरोसा हो जाए, तो यही भरोसा उनके लिए भारी पड़ सकता था. यूपी के झांसी में जीआरपी ने ऐसे ही एक गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो पति-पत्नी और रिश्तेदारों के साथ परिवार की तरह ट्रेनों में सफर करता था और मौका मिलते ही यात्रियों के बैग से मोबाइल, नकदी और जेवरात पार कर देता था. जीआरपी ने गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया है. इनमें चार पुरुष और तीन महिलाएं शामिल हैं. सभी आरोपी गुजरात के भावनगर जिले के पालीताना क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं.

    पुलिस के मुताबिक, गिरोह की खास रणनीति यह थी कि महिलाएं और पुरुष साथ-साथ ट्रेन में सफर करते थे, जिससे देखने वालों को वे सामान्य परिवार नजर आएं और किसी को उनके इरादों पर शक न हो. भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म और चलती ट्रेनों में गिरोह के सदस्य यात्रियों पर नजर रखते थे. खासकर ऐसे यात्री इनके निशाने पर रहते थे, जो सीट पर सो जाते थे या जिनके बैग उनके पास रखे होते थे.

    जीआरपी को गिरोह की गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम ने झांसी रेलवे स्टेशन यार्ड में माल गोदाम की तरफ बने ग्रुप-डी गेस्ट हाउस के पीछे पटरी के पास घेराबंदी की. पुलिस ने मौके से सातों आरोपियों को पकड़ लिया. पूछताछ में उनके झांसी के अलावा दूसरे रेलवे रूटों पर भी यात्रियों को निशाना बनाने की जानकारी सामने आई है.

    पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर उनके पूरे नेटवर्क और पुराने मामलों का रिकॉर्ड खंगाल रही है. जीआरपी यह भी पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने झांसी के अलावा दूसरे रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में कितनी वारदातों को अंजाम दिया है.

    महिलाओं को बनाते थे खास निशाना

    जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य ट्रेन में यात्रियों के बीच घुल-मिलकर चलते थे. महिलाओं के बैग और सामान पर विशेष नजर रखी जाती थी. जब महिला यात्री सो जाती या उसका ध्यान दूसरी तरफ होता, तभी मौका देखकर बैग खोलकर उसमें रखे जेवरात और अन्य कीमती सामान निकाल लिया जाता था.

    चोरी करने के बाद जेवरों को बेचने अथवा अपने ठिकाने तक पहुंचाने की बात भी पुलिस पूछताछ में सामने आई है. जीआरपी के मुताबिक, आरोपी मुख्य रूप से झांसी से आगरा, मथुरा, हाथरस और बरेली की ओर जाने वाली ट्रेनों में सक्रिय रहते थे. कभी-कभी अयोध्या की तरफ जाने वाली ट्रेनों में भी वारदात करने की बात सामने आई है.

    सभी आरोपी आपस में रिश्तेदार

    गिरफ्तार आरोपियों में कृष्णा अमर भाई (20), अमर भाई (45), मनोज भाई (45), सोलंकी अमित दिलीप भाई (34), संगीता (42), ज्योति (42) और ऊषा (32) शामिल हैं. पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी आपस में रिश्तेदार हैं और गुजरात के भावनगर जिले के पालीताना क्षेत्र के रहने वाले हैं.

    जीआरपी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ झांसी जीआरपी थाने में चोरी से संबंधित दो मुकदमे दर्ज हैं. अब दूसरे जिलों और राज्यों के रेलवे थानों से भी आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है.

    सोने-चांदी के जेवर और नकदी बरामद

    पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो कड़े, एक मंगलसूत्र, एक अंगूठी और करीब पांच हजार रुपये नकद बरामद किए हैं. जीआरपी बरामद जेवरात को पहले दर्ज चोरी के मामलों से जोड़कर देख रही है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद सामान किन यात्रियों का है और इनसे जुड़ी अन्य घटनाओं का कोई रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं.

    कई रेलवे रूटों पर फैले नेटवर्क की जांच

    सात आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब जीआरपी की जांच का दायरा बढ़ गया है. पुलिस यह पता लगा रही है कि गुजरात से झांसी आने वाला यह गिरोह केवल झांसी और आसपास के रेल मार्गों तक सीमित था या देश के दूसरे रेलवे स्टेशनों पर भी इसी तरीके से यात्रियों को निशाना बनाता था.

    पुलिस आरोपियों से उनके पुराने ठिकानों, चोरी के माल को खपाने वाले लोगों और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों के बारे में भी पूछताछ कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ पूरी होने के बाद चोरी की और घटनाओं का खुलासा हो सकता है.

    एसपी जीआरपी विपुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि यात्रियों के सामान और जेवरात चोरी करने वाले सात पुरुष-महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है. आरोपियों के पास से मंगलसूत्र, सोने के दो कड़े, अंगूठी और नकदी बरामद हुई है. पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी परिवार की तरह ट्रेनों में सफर करते थे और खासकर महिलाओं के बैग से जेवरात चोरी करते थे. चोरी के बाद जेवर बेच दिए जाते थे या सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचा दिए जाते थे. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने झांसी के अलावा और किन-किन रेलवे स्टेशनों तथा ट्रेनों में वारदात की है.

  • टाइटैनिक की विरासत से जुड़ी जैकेट 9 करोड़ में बिकी, जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी..

    टाइटैनिक की विरासत से जुड़ी जैकेट 9 करोड़ में बिकी, जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी..

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    Titanic Survivors Life Jacket Auction: समंदर की गहराइयों में दबी कहानियां पूरी तरह खत्म नहीं होतीं, बल्कि समय-समय पर सामने आकर दर्द, डर और उम्मीद की याद दिलाती रहती हैं। ऐसा ही एक बार फिर हुआ जब टाइटैनिक जहाज से जुड़ी एक छोटी-सी वस्तु ने दुनिया का ध्यान खींच लिया। टाइटैनिक, जिसे इतिहास के सबसे दुखद समुद्री हादसों में गिना जाता है, उससे जुड़ी एक लाइफ जैकेट हाल ही में ब्रिटेन की नीलामी में चर्चा का विषय बन गई। यह जैकेट लॉरा माबेल फ्रैंकाटेली की थी, जो उस हादसे में जीवित बच गई थीं। नीलामी ‘हेनरी एल्ड्रिज एंड सन’ द्वारा आयोजित की गई थी, और सभी को हैरानी तब हुई जब एक अज्ञात खरीदार ने फोन पर बोली लगाकर करीब 9 करोड़ रुपये में इसे खरीद लिया।

    लाइफबोट नंबर 1 से जुड़ा अब भी बना हुआ विवाद

    यह लाइफ जैकेट केवल एक सुरक्षा साधन नहीं, बल्कि उस भयावह रात की एक जीवंत याद है। इस पर लॉरा और उनके साथ लाइफबोट में सवार अन्य लोगों के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं, जिन्होंने मौत को बेहद करीब से देखा था। लॉरा उस समय प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर लूसी डफ गॉर्डन के साथ काम करती थीं और लाइफबोट नंबर 1 में सवार थीं। यही नाव आज भी सवालों के घेरे में रहती है, क्योंकि इसमें 40 लोगों की क्षमता होने के बावजूद उस रात केवल 12 लोग ही सवार हुए थे।

    नीलामी में 5 करोड़ में बिका एक और ऐतिहासिक सामान

    नीलामी में सिर्फ लाइफ जैकेट ही नहीं, बल्कि उसी लाइफबोट से जुड़ा एक पुराना सीट कुशन भी करीब 5 करोड़ रुपये में खरीदा गया। विशेषज्ञों के मुताबिक टाइटैनिक से जुड़ी वस्तुओं की इतनी ज्यादा कीमत इसलिए लगती है क्योंकि ये उस ऐतिहासिक हादसे के आखिरी पलों की झलक दिखाती हैं, जहां सामाजिक असमानता भी साफ नजर आती थी। अब तक टाइटैनिक से जुड़ी सबसे महंगी वस्तु एक सोने की घड़ी मानी जाती है, जिसे बचाव अभियान में शामिल एक कैप्टन को सम्मानस्वरूप दिया गया था और जिसकी कीमत लगभग 1.56 मिलियन पाउंड तक पहुंची थी।

    भले ही टाइटैनिक का मलबा समय के साथ समुद्र में धीरे-धीरे खत्म हो रहा है, लेकिन उससे जुड़ी निशानियां आज भी उस दुखद घटना को जीवित रखे हुए हैं। यह लाइफ जैकेट अब किसी संग्रहालय या निजी कलेक्शन का हिस्सा बनेगी, लेकिन इसकी कहानी हमेशा उस ठंडी, अंधेरी रात की याद दिलाती रहेगी। करोड़ों की यह बोली इस बात का प्रमाण है कि टाइटैनिक की रहस्यमयी और दर्दभरी कहानी आज भी लोगों को उतनी ही गहराई से प्रभावित करती है।

  • बाइक रोकी तो 9 किलो ‘गांजा’ मिला, कार में 100 और गाड़ी में 263 KG… तेलंगाना में पकड़ी गई 1.82 करोड़ की खेप!

    बाइक रोकी तो 9 किलो ‘गांजा’ मिला, कार में 100 और गाड़ी में 263 KG… तेलंगाना में पकड़ी गई 1.82 करोड़ की खेप!

    बाइक रोकी तो 9 किलो ‘गांजा’ मिला, कार में 100 और गाड़ी में 263 KG… तेलंगाना में पकड़ी गई 1.82 करोड़ की खेप!

    तेलंगाना के भद्राचलम और खम्मम जिले में एक्साइज अधिकारियों ने तीन ऑपरेशनों में 372.2 किलो गांजा जब्त किया है. इसकी कीमत करीब 1.82 करोड़ रुपये है. कार्रवाई के दौरान ओडिशा के चार लोगों को गिरफ्तार किया गया. अधिकारियों के मुताबिक, पहले बाइक और फिर कार से गांजा बरामद होने के बाद पूछताछ में महाराष्ट्र की ओर जा रही एक गाड़ी में खेप का पता चला.

    बाइक रोकी तो 9 किलो गांजा मिला. लगा, मामला इतना ही है. लेकिन तभी पीछे आ रही एक कार पर नजर पड़ी. कार खुली तो 100 किलो गांजा निकला. पूछताछ हुई तो कहानी एक और गाड़ी तक पहुंच गई. जब उसकी तलाशी ली गई तो उसमें 263.2 किलो गांजा मिला. एक कार्रवाई के बीच 372.2 किलो गांजा मिला. तेलंगाना में हुई इस कार्रवाई में ओडिशा के चार लोगों को पकड़ा गया है. बरामद गांजे की कीमत 1.82 करोड़ रुपये से ज्यादा है.

    ये कहानी भद्राचलम की है. यहां वीरभद्र फंक्शन हॉल के पास एक्साइज और डीटीएफ की टीम वाहनों की जांच कर रही थी. इसी दौरान एक बाइक को रोका गया. बाइक सवार की तलाशी ली गई तो करीब 9 किलो गांजा मिला. बाइक सवार का नाम दिवाकर मंडल बताया गया. टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

    अधिकारियों को शक हुआ कि बाइक के पीछे एक कार भी चल रही थी. टीम ने कार को भी रोक लिया. तलाशी हुई तो कार से करीब 100 किलो गांजा बरामद हुआ. कार चला रहे 22 साल के सुमन पाल को भी गिरफ्तार कर लिया गया. अब पुलिस के सामने सवाल था कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में गांजा कहां से आ रहा है और कहां ले जाया जा रहा है.

    पूछताछ में आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर टीम ने एक और कार्रवाई की. बताया गया कि गांजे की एक और खेप एक गाड़ी में लादकर महाराष्ट्र की तरफ ले जाई जा रही है. इसके बाद एक्साइज टीम ने खम्मम जिले के करुणागिरी इलाके में गाड़ी को रोक लिया. तलाशी ली गई तो उसमें 263.2 किलो गांजा मिला. गाड़ी के ड्राइवर राजशेखर मार्गी और क्लीनर ब्रिजान नासा को गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों की उम्र 22 और 20 साल बताई गई है.

    इस तरह तीन कार्रवाइयों में कुल 372.2 किलो गांजा बरामद हुआ. अधिकारियों के मुताबिक, बरामद गांजे की अनुमानित कीमत 1.82 करोड़ रुपये से ज्यादा है. पकड़े गए चारों आरोपी ओडिशा के रहने वाले हैं. उनके पास से गांजे के अलावा एक बाइक, एक कार और एक गाड़ी भी जब्त की गई है.

    अब एक्साइज विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि गांजा आखिर आया कहां से था और इसकी सप्लाई कहां की जानी थी. महाराष्ट्र का नाम सामने आने के बाद जांच इस एंगल से भी की जा रही है कि क्या यह खेप किसी बड़े सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा थी. अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की जानकारी जुटाई जा रही है. टीम यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. पूरी कार्रवाई में कोठागुडेम और भद्राचलम डीटीएफ के साथ खम्मम एक्साइज टीम शामिल रही. फिलहाल इस मामले में चार लोग गिरफ्तार हैं और तीन वाहन जब्त किए गए हैं.