Category: Dharam

  • मौसम विभाग नहीं, इस मंदिर का पत्थर देता है बारिश का संकेत! 7 दिन पहले टपकने लगती हैं बूंदें..

    मौसम विभाग नहीं, इस मंदिर का पत्थर देता है बारिश का संकेत! 7 दिन पहले टपकने लगती हैं बूंदें..

    मौसम विभाग नहीं, इस मंदिर का पत्थर देता है बारिश का संकेत! 7 दिन पहले टपकने लगती हैं बूंदें..

    आज के इस हाई टेक जमाने में हमारे पास मौसम का हाल जानने के लिए बड़े बड़े सैटेलाइट और मोबाइल ऐप्स मौजूद हैं. वैज्ञानिक आसमान को देखकर बता देते हैं कि बारिश कब होगी. लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जो आधुनिक विज्ञान को सीधे चुनौती देता है.

    इस मंदिर की छत पर लगा एक खास पत्थर वैज्ञानिकों के लिए आज भी एक बहुत बड़ा रहस्य बना हुआ है. ये मंदिर मौसम विभाग से भी पहले और बिल्कुल सटीक भविष्यवाणी कर देता है. स्थानीय लोग और दूर दूर से आने वाले श्रद्धालु इसे भगवान का एक अनोखा और सच्चा चमत्कार मानते हैं.

    क्या है मंदिर की खासियत?

    हम बात कर रहे हैं कानपुर के भीतरगांव ब्लॉक में स्थित भगवान जगन्नाथ के बेहद प्राचीन मंदिर की. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहां मानसून आने से ठीक सात दिन पहले ही मंदिर की छत के पत्थरों से पानी की बूंदें टपकने लगती हैं.

    जब देश के बाकी हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ रही होती है और आसमान में बादल का एक टुकड़ा भी नहीं होता, तब इस मंदिर के गर्भगृह की छत गीली हो जाती है. पत्थरों से पानी की बूंदें ऐसे नीचे गिरती हैं जैसे सचमुच बारिश हो रही हो. इस अनोखे नजारे को देखने के लिए हर साल यहां लोगों का तांता लग जाता है.

    मानसून का अंदाजा

    इस मंदिर की भविष्यवाणी का तरीका भी बेहद दिलचस्प और सटीक है. छत से गिरने वाली बूंदों के आकार को देखकर लोग समझ जाते हैं कि इस साल देश में मानसून कैसा रहेगा. अगर पत्थर से गिरने वाली बूंदें बहुत बड़ी बड़ी होती हैं, तो माना जाता है कि उस साल बहुत भारी बारिश होगी.

    वहीं अगर बूंदें छोटी और कम गिरती हैं, तो लोग समझ जाते हैं कि इस बार सूखा पड़ेगा या बारिश बहुत कम होगी. हैरान करने वाली बात यह भी है कि जैसे ही बाहर असलियत में आसमान में बादल छाते हैं और बारिश शुरू होती है, वैसे ही मंदिर की छत के अंदर से पानी टपकना बिल्कुल बंद हो जाता है.

    किसी वरदान से कम नहीं है ये मंदिर

    आसपास के गांवों के किसानों के लिए ये मंदिर किसी वरदान से कम नहीं है. यहां के किसान मौसम विभाग की खबरों पर नहीं, बल्कि अपने इस जगन्नाथ मंदिर के पत्थरों पर पूरा भरोसा करते हैं.

    जैसे ही मंदिर की छत से पानी की बूंदें टपकती हैं, किसान अपनी खेती बाड़ी की तैयारियों में जुट जाते हैं. वे अपने खेतों को जोतना और बीजों का इंतजाम करना शुरू कर देते हैं.

    सदियों से चली आ रही यह कुदरती भविष्यवाणी आज तक कभी गलत साबित नहीं हुई है. इसी वजह से इस इलाके के लोग इसे अपना सच्चा वेदर फोरकास्ट सेंटर मानते हैं.

    पुरातत्व विभाग ने की जांच पड़ताल

    वैज्ञानिकों और पुरातत्व विभाग की टीमों ने इस रहस्य को सुलझाने की कई बार कोशिश की है. कई बार एक्सपर्ट्स की टीम ने मंदिर की दीवारों और छत की जांच पड़ताल की, ताकि पता चल सके कि यह पानी कहां से आता है.

    लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी विज्ञान के पास इसका कोई जवाब नहीं है कि बिना बादलों के पत्थरों से पानी कैसे टपक सकता है. मंदिर की बनावट बौद्ध स्तूप जैसी है और इसकी दीवारें बहुत मोटी हैं.

    विज्ञान भले ही इसे कोई भौगोलिक घटना कहे, लेकिन भक्तों के लिए यह भगवान जगन्नाथ की असीम शक्ति का जीवंत सबूत है जो आज भी सबको हैरान कर देता है.

  • रावण की इस बहन का नाम शायद ही सुना होगा, श्रीराम की बहन शांता से जुड़ा है दिलचस्प कनेक्शन..

    रावण की इस बहन का नाम शायद ही सुना होगा, श्रीराम की बहन शांता से जुड़ा है दिलचस्प कनेक्शन..

    रामायण की जब भी बात होती है, तो रावण की बहन के रूप में सिर्फ शूर्पणखा का नाम दिमाग में आता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि लंकापति रावण की एक और सगी बहन थी, जिसका जिक्र पौराणिक कथाओं में बहुत कम मिलता है.

    इस बहन का नाम कुंभिनी था, जो रावण की सगी और बेहद चतुर बहन थी. इसके साथ ही, इस पूरी कथा में भगवान श्रीराम के परिवार से जुड़ा एक और अनोखा रिश्ता सामने आता है.

    श्री राम की भी एक बड़ी बहन थीं जिनका नाम शांता था. आइए इतिहास के पन्नों को पलटते हैं और रावण की इस गुप्त बहन और श्रीराम की बड़ी बहन शांता के अनोखे रिश्तों की पूरी कहानी को सरल शब्दों में समझते हैं.

    रावण की दूसरी सगी बहन

    रावण की इस गुप्त बहन का नाम कुंभिनी था. वह रावण, कुंभकर्ण और विभीषण की सगी बहन थी. शूर्पणखा की तरह कुंभिनी का स्वभाव चंचल या क्रोधी नहीं था, बल्कि वह काफी समझदार मानी जाती थी.

    कुंभिनी की शादी मथुरा के प्रतापी राजा मधु दैत्य से हुई थी. मधु दैत्य एक शक्तिशाली राजा था और उसके पास भगवान शिव का दिया हुआ एक त्रिशूल था, जिससे वह अजेय बन गया था.

    रावण अपनी इस बहन से बहुत स्नेह करता था, लेकिन एक समय ऐसा आया जब दामाद और साले के बीच भयंकर युद्ध की नौबत आ गई थी.

    जब रावण से टकराया जीजा

    राजा रावण अपनी दिग्विजय यात्रा पर निकला हुआ था और वह पूरी दुनिया को जीतना चाहता था. इसी दौरान वह अपनी बहन कुंभिनी के राज्य मथुरा भी पहुंच गया. वहां रावण ने अपनी ताकत के घमंड में आकर अपनी ही बहन के पति यानी राजा मधु दैत्य को युद्ध के लिए ललकार दिया.

    जब कुंभिनी को इस बात का पता चला, तो वह दोनों के बीच आ गई. उसने रावण को समझाया और अपने पति के प्राणों की भीख मांगी. बहन के आंसुओं को देखकर रावण का दिल पिघल गया और उसने युद्ध का विचार टाल दिया.

    बाद में इसी मधु दैत्य के बेटे लवणासुर का वध भगवान राम के छोटे भाई शत्रुघ्न ने किया था.

    श्रीराम की बड़ी बहन शांता

    अब बात करते हैं भगवान श्रीराम के परिवार के एक छुपे हुए सच की. राजा दशरथ और माता कौशल्या के चार पुत्रों से पहले एक पुत्री हुई थी, जिनका नाम शांता था. 
    शांता चारों भाइयों में सबसे बड़ी थीं और बेहद गुणी और शांत स्वभाव की थीं. लोक कथाओं के अनुसार, अंग देश के राजा रोमपद की कोई संतान नहीं थी और वे राजा दशरथ के गहरे मित्र थे.

    अपने मित्र का दुख दूर करने के लिए राजा दशरथ ने अपनी बेटी शांता को उन्हें गोद दे दिया था. इस तरह शांता अंग देश की राजकुमारी बनीं और उनका पालन पोषण वहीं हुआ.

    ऋषि ऋष्यश्रृंग से विवाह और पुत्रेष्टि यज्ञ

    राजकुमारी शांता का विवाह महान तपस्वी ऋषि ऋष्यश्रृंग से हुआ था. जब राजा दशरथ को कोई पुत्र नहीं हो रहा था और रघुवंश का आगे बढ़ना मुश्किल लग रहा था, तब राजा दशरथ बेहद चिंतित रहने लगे थे.

    उस समय राजा दशरथ के मंत्रियों ने उन्हें एक विशेष यज्ञ कराने की सलाह दी थी. इस यज्ञ को कराने के लिए राजा दशरथ ने अपने दामाद ऋषि ऋष्यश्रृंग और बेटी शांता को अयोध्या आमंत्रित किया था.

    ऋषि ऋष्यश्रृंग की देखरेख में ही वह प्रसिद्ध पुत्रेष्टि यज्ञ संपन्न हुआ था, जिसके बाद प्रभु श्री राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ.

    रिश्तों का यह अनोखा ताना बाना

    इस तरह देखा जाए तो रामायण की इस महागाथा में पर्दे के पीछे कई ऐसे रिश्ते थे, जो मुख्य कहानी को आगे बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे थे. एक तरफ रावण की बहन कुंभिनी थी, जिसके परिवार का अंत आगे चलकर श्रीराम के भाई शत्रुघ्न के हाथों हुआ.

    वहीं दूसरी तरफ भगवान राम की बड़ी बहन शांता थीं, जिनके पति के आशीर्वाद और यज्ञ के कारण ही राम जी का इस धरती पर अवतार संभव हो सका. इतिहास की ये दो बहनें भले ही मुख्य चर्चाओं से दूर रहीं, लेकिन इनका वजूद अपने अपने कुलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण और आदरणीय था.

  • बाथरूम में आईना लगाने को लेकर क्या कहता है वास्तु? जानिए शुभ-अशुभ मान्यताएं..

    बाथरूम में आईना लगाने को लेकर क्या कहता है वास्तु? जानिए शुभ-अशुभ मान्यताएं..

    बाथरूम में आईना लगाने को लेकर क्या कहता है वास्तु? जानिए शुभ-अशुभ मान्यताएं..

    Bathroom Mirror Vastu: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का बाथरूम घर का एक ऐसा भाग होता है जहां पर सबसे ज्यादा नकारात्मक उर्जा का वास होता है. ये एक ऐसी जगह होती है जिसकी साफ-सफाई से लेकर अन्य लापरवाहियां बरती गईं तो तुरंत पूरे घर में नकारात्मक ऊर्जा फैल सकती है. ऐसे में जरूरी है कि बाथरूम को साफ रखा जाए और उससे जुड़े वास्तु नियमों का पालन किया जाए. जब बात बाथरूम से जुड़े वास्तु नियमों की आती है तो एक सवाल जरूर मन में आता है कि क्या घर के बाथरूम में आईना यानी शीशा लगाएं या नहीं.

    आजकल के घरों में जो बाथरूम बनाए जा रहे हैं उसमें विशेष रूप से शीशा या आईना लगवाया जा रहा है. मन में सवाल उठता है कि वास्तु अनुसार ऐसा करवाना शुभ या अशुभ है? आइए इस बारे में जानें और इससे जुड़े एक-एक वास्तु नियमों के बारे में भी जानें.

    बाथरूम में शीशा लगवाना सही या गलत

    वास्तु अनुसार, बाथरूम में शीशा लगवाना सही माना गया है. हालांकि अगर आप बाथरूम में शीशा लगवा रहे हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इसे हमेशा साफ रखते हों और इसकी दिशा वास्तु के अनुसार सही हो. बाथरूम में शीशा लगाते समय किन वास्तु नियमों पर ध्यान देना सबसे ज्यादा जरूरी है, आइए इसे भी जान लें.

    बाथरूम में शीशा लगवाने की सही दिशा

    वास्तु शास्त्र अनुसार बाथरूम में शीशे को हमेशा सही दिशा में ही लगाएं. बथरूम में कभी भी उत्तर या पूर्व दिशा में शीशा कभी न लगाएं. ध्यान रहे कि  शीशे के कभी भी बाथरूम के प्रवेश द्वार के पास न लगाएं. ऐसे करने से पूरे घर में बाथरूम से नकारात्मक ऊर्जा फैल सकती है.

    बाथरूम में किस तरह का शीशा लगाएं

    बाथरूम में आयताकार या चौकोर शीशा लगवाना शुभ माना गया है. गोल या अंडाकार शीशा लगाने से बाथरूम में वास्तु दोष लग सकता है. आयताकार शीशा बाथरूम में सकारात्मकता बनाए रखता है.

    इन बातों का रखें ध्यान

    बाथरूम में लगा शीशा समय-समय पर साफ करते रहें. ध्यान रखें कि उस पर पानी के छीटें या किसी तरह का दाग न हो. गंदे शीशे में चेहरा देखकर दिन की शुरुआत करना अशुभ सिद्ध हो सकता है. इसके अलावा बाथरूम में टूटा शीशा कतई न लगाएं. इससे वास्तु दोष लगता है और बनता काम भी बिगड़ जाता है.

    शीशे की ऊंचाई

    बाथरूम में शीश लगवा रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि शीशे की ऊंचाई ज्यादा न हो और न तो यह बहुत नीचे लगा हो. शीशा ऐसे लगवाएं कि उसमें आपका चेहरा पूरा दिखता हो. शीशे में आधा चेहरा दिखना अशुभ माना जाता है.

    (डिस्क्लेमर- यह जानकारी पारंपरिक वास्तु एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है. बताए गए उपायों के प्रभाव और परिणाम व्यक्ति विशेष की परिस्थितियों, आस्था, स्थान तथा अन्य कारकों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं.)

  • शनि नक्षत्र परिवर्तन का असर: 2 जुलाई से इन 4 राशियों के लिए कठिन समय के संकेत..

    शनि नक्षत्र परिवर्तन का असर: 2 जुलाई से इन 4 राशियों के लिए कठिन समय के संकेत..

    शनि नक्षत्र परिवर्तन का असर: 2 जुलाई से इन 4 राशियों के लिए कठिन समय के संकेत..

    जुलाई के शुरुआत में ही शनि देव नक्षत्र परिवर्तन करेंगे।  2 जुलाई 2026 को सुबह 8 बजकर 22 मिनट पर शनि देव रेवती नक्षत्र के दूसरे पद में गोचर करेंगे। ज्योतिषों के अनुसार, शनि गोचर अत्यंत ही प्रभावी और महत्वपूर्ण घटना होती है। शनि का नक्षत्र परिवर्तन इन राशियों के मुश्किलों भरा रहेगा। इन 4 राशि के जातकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। तो चलिए जानते हैं कि किन राशियों को 2 जुलाई से सावधान रहने की जरूरत है।

    1. मेष राशि

    शनि का नक्षत्र परिवर्तन मेष राशि वालों के लिए कई चुनौतियां लेकर आएगा। आर्थिक स्थिति डगमगा सकती है। धन हानि की प्रबल संभावना है इसलिए इस समय निवेश करने से बचें। इसके अलावा बजट बनाकर खर्च करें वरना पानी की तरह पैसे बह सकते हैं। मानसिक तनाव भी हो सकता है।  तो मेष राशि के जातक इस समय अधिक सावधानी बरतें।

    2. सिंह राशि

    शनि का नक्षत्र गोचर सिंह राशि वालों के लिए अच्छा नहीं रहेगा। नौकरी पेशा लोगों को कार्यस्थल पर साथी कर्मचारियों के साथ बहस हो सकती है। इसके अलावा काम का दबाव भी रहेगा। करियर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इस समय आपको अपने गुस्से और वाणी पर कंट्रोल रखना होगा। कारोबार में घाटा देखने को मिलेगा, जिससे आर्थिक हानि हो सकती है।

    3. वृश्चिक राशि

    वृश्चिक राशि वालों पर शनि नक्षत्र परिवर्तन का नकारात्मक असर देखने को मिलेगा। आपका मानसिक तनाव बढ़ सकता है। पैसों के मामले में किसी पर भी भरोसा न करें वरना भारी धन हानि हो सकती है। इस समय उधार देने और निवेश करने से भी बचें। धन हानि की संभावना है इसलिए सर्तक रहें।

    4. कुंभ राशि

    कुंभ राशि के स्वामी शनि देव है लेकिन इन पर भी शनि नक्षत्र गोचर का प्रभाव देखने को मिलेगा। इनके खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है। इस राशि के कारोबारी कोई भी डील फाइनल करने से पहले अच्छे से सोच-विचार कर लें। किसी से वाद-विवाद हो सकता है इसलिए बहस करने से बचें।

    शनि देव को प्रसन्न करने के उपाय

    • शनिवार के दिन शनि मंदिर जाकर शनि देव को सरसों तेल और तिल अर्पित करें।
    • प्रतिदिन या हर शनिवार ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
    • शनि देव के प्रकोप से बचने के लिए हनुमान जी की आराधना करें। मंगलवार और शनिवार को बजरंगबली की पूजा के साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करें।
    • शनिवार के दिन पीपल पेड़ में जल अर्पित करें और शाम के समय सरसों तेल का दीया जलाएं।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।