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  • बिहार के 4 कलाकार जिन्होंने बॉलीवुड में बनाई खास पहचान..

    बिहार के 4 कलाकार जिन्होंने बॉलीवुड में बनाई खास पहचान..

    बिहार को प्रतिभाओं की धरती कहा जाता है। कला, सिनेमा और मनोरंजन के क्षेत्र में भी बिहार से कई ऐसे कलाकार निकले हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और शानदार अभिनय के दम पर देशभर में पहचान बनाई। इनमें से कुछ कलाकारों ने बॉलीवुड में अपनी अलग छाप छोड़ी है।

    आइए जानते हैं बिहार से जुड़े उन 4 कलाकारों के बारे में, जिन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में खास मुकाम हासिल किया।

    1. प्रकाश झा

    बिहार के चंपारण क्षेत्र से जुड़े प्रकाश झा भारतीय सिनेमा के चर्चित फिल्म निर्देशक, निर्माता और अभिनेता हैं। सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों के लिए उन्हें खास पहचान मिली। गंगाजल, अपहरण, राजनीति, आरक्षण और सत्याग्रह जैसी फिल्मों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।

    2. सोनाक्षी सिन्हा

    सोनाक्षी सिन्हा का जन्म पटना, बिहार में हुआ था। उन्होंने दबंग से बॉलीवुड में शानदार शुरुआत की और इसके बाद राउडी राठौर, अकीरा, फोर्स 2 और इत्तेफाक जैसी फिल्मों में काम किया। अपने अलग अंदाज और अभिनय के कारण उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में मजबूत पहचान बनाई।

    3. मनोज बाजपेयी

    बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से आने वाले मनोज बाजपेयी हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेताओं में गिने जाते हैं। सत्या, गैंग्स ऑफ वासेपुर, अलीगढ़, स्पेशल 26 और सत्याग्रह जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहा गया। वे अपनी दमदार और सहज अदाकारी के लिए जाने जाते हैं।

    4. नेहा शर्मा

    भागलपुर, बिहार में जन्मी नेहा शर्मा ने हिंदी फिल्मों के साथ-साथ अन्य मनोरंजन परियोजनाओं में भी काम किया है। क्रुक, तेरी मेरी कहानी, जयंता भाई की लव स्टोरी और यमला पगला दीवाना 2 जैसी फिल्मों में नजर आ चुकी नेहा शर्मा ने बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई है।

    बिहार की प्रतिभा की अलग पहचान

    बिहार से आने वाले कलाकारों ने हिंदी सिनेमा में अपनी मेहनत, अभिनय और रचनात्मकता के दम पर जगह बनाई है। इन कलाकारों की सफलता यह दिखाती है कि छोटे शहर और साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली प्रतिभाएं भी बड़े मंच पर अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।

  • बारिश में अचानक क्यों निकल आते हैं सांप? सावन से जुड़ी इस वजह से 90% लोग हैं अनजान

    बारिश में अचानक क्यों निकल आते हैं सांप? सावन से जुड़ी इस वजह से 90% लोग हैं अनजान

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    सावन का महीना शुरू होते ही खेतों, सड़कों और कई बार घरों के आसपास भी सांप दिखाई देने की घटनाएं बढ़ जाती हैं. सोशल मीडिया पर भी इस मौसम में सांपों के वीडियो और तस्वीरें खूब वायरल होती हैं. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या सावन में सचमुच सांप ज्यादा निकलते हैं और क्या इसका संबंध नाग पंचमी से है? तो चलिए आपको बताते हैं इसका सही जवाब…

    बारिश के कारण बिलों से बाहर आते हैं सांप
    सांप आमतौर पर जमीन के अंदर बने बिलों, दरारों, झाड़ियों और घास के बीच छिपकर रहते हैं. सावन के दौरान तेज बारिश होने से इनके बिलों में पानी भर जाता है. ऐसे में सांप सुरक्षित जगह की तलाश में बाहर निकलने को मजबूर हो जाते हैं. यही वजह है कि इस मौसम में खेतों, सड़कों और रिहायशी इलाकों में इनके दिखने की घटनाएं बढ़ जाती हैं.

    तापमान और नमी बनाते हैं अनुकूल माहौल
    सांप ठंडे खून वाले जीव होते हैं. उनके शरीर का तापमान वातावरण के अनुसार बदलता रहता है. गर्मियों में तेज गर्मी और डिहाइड्रेशन के खतरे की वजह से वे कम सक्रिय रहते हैं. वहीं बरसात के मौसम में तापमान कम और नमी अधिक होने से उनके लिए बाहर निकलना आसान हो जाता है. इसलिए सावन में उनकी गतिविधियां सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा दिखाई देती हैं.

    भोजन की तलाश भी है बड़ी वजह
    मानसून में मेंढक, चूहे और कीड़े-मकोड़े तेजी से बढ़ते हैं. यही जीव सांपों का मुख्य भोजन हैं. जब भोजन आसानी से मिलने लगता है तो सांप भी ज्यादा सक्रिय होकर शिकार की तलाश में बाहर निकलते हैं. इसलिए बारिश के मौसम में उनका दिखना स्वाभाविक माना जाता है.

    प्रजनन काल का भी पड़ता है असर
    जानकारों के मुताबिक कई प्रजातियों के सांपों का प्रजनन काल भी मानसून के दौरान होता है. इस समय वे साथी की तलाश में अधिक दूरी तय करते हैं. इससे भी लोगों को सांप पहले की तुलना में ज्यादा नजर आते हैं.

    नाग पंचमी और धार्मिक मान्यता
    सावन में ही नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है, जो नाग देवता और भगवान शिव को समर्पित है. इस दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे सर्पदंश के भय से रक्षा होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. हालांकि, इसी समय सांप प्राकृतिक कारणों से ज्यादा दिखाई देते हैं, इसलिए लोगों को लगता है कि उनका संबंध सीधे नाग पंचमी से है.

  • दिन में था 10 करोड़ की लागत से बना पुल… रात में हो गया गायब… लोग हैरान..

    दिन में था 10 करोड़ की लागत से बना पुल… रात में हो गया गायब… लोग हैरान..

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    छत्तीसगढ़ के सूरजुपर जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम धोंधा स्थित नदी पर बना पुल रातभर हुई बारिश में बह गया. पुल का निर्माण 10 करोड़ रुपए की लागत से किया गया था. निर्माण के बाद से ही इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे थे. पुल पर जहां-तहां दरारें दिखाई दे रही थीं. इसी बीच गुरुवार को रातभर बारिश हुई. सुबह जब लोगों की आंखें खुलीं और नदी की ओर गए तो पुल बह चुका था. यह नजारा देखते ही लोग हैरान रह गए. जिस पुल से होकर दर्जनों गांवों के लोगों की आवाजाही होती थी, वह देखते ही देखते पानी की तेज धारा में गायब हो चुका था. कहीं पिलर उखड़े पड़े थे, कहीं स्लैब पानी में समा गई थी और पुल का लंबा हिस्सा नदी की धार में बह चुका था. अब लोग निर्माण एजेंसी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं.

    निर्माण में अनियमितता का आरोप  
    ग्रामीणों का दावा है कि निर्माण में कथित तौर पर भारी अनियमितता और घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण पुल पहले से ही कमजोर हो चुका था. वाहनों की आवाजाही के साथ पुल के अलग-अलग हिस्सों में दरारें दिखाई देने लगी थीं और समय के साथ इसकी स्थिति लगातार खराब होती चली गई. गुरुवार देर रात हुई बारिश से पानी का दबाव बढ़ते ही पुल भरभराकर गिर पड़ा और देखते ही देखते तेज धार में बह गया.

    आवागमन में परेशानी
    ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण की मजबूती सिर्फ कागजों पर ही रही. पुल ध्वस्त होने से दर्जनों गांवों के ग्रामीणों के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. इससे नदी के दोनों ओर रहने वाले लोग प्रभावित हुए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले ही जिम्मेदार विभाग ने इसकी स्थिति का गंभीरता से परीक्षण किया होता तो शायद आज यह नौबत नहीं आती.

    स्थानीय लोगों ने लगाए आरोप
    पुल टूटने की घटना ने प्रतापपुर क्षेत्र में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में सड़क, पुल, रपटा और अन्य निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के बजाय कागजी प्रक्रिया को अधिक महत्व दिया जाता है. उनका कहना है कि कहीं सड़क खराब हो रही है तो कहीं पुल और रपटा पहली ही बारिश में जवाब दे रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्यों में कथित मिलीभगत और लापरवाही के कारण सरकारी राशि का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है.

    कार्रवाई की मांग
    ग्रामीणों का कहना है कि करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से पुल निर्माण कराए जाने की बात कही जा रही है. इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी पुल इतनी जल्दी कैसे जर्जर हो गया, यह बड़ा सवाल है. उन्होंने निर्माण एजेंसी, ठेकेदार, विभागीय अधिकारियों और गुणवत्ता परीक्षण की भूमिका की जांच की मांग शुरू कर दी है. उनका कहना है कि जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.

  • 16 साल की उम्र में तालाब ही बना घर! पानी के अंदर खाता-पीता और सोता है इकबाल, वजह चौंकाने वाली..

    16 साल की उम्र में तालाब ही बना घर! पानी के अंदर खाता-पीता और सोता है इकबाल, वजह चौंकाने वाली..

    5 साल से तालाब में रह रहा 16 साल का इकबाल, पानी से बाहर आते ही शरीर जलने लगता है; खाना-पीना और सोना सब पानी में

    इकबाल शेख के लिए पानी ही बन गया है जिंदगी

    इकबाल शेख के लिए पानी ही बन गया है जिंदगी

    शरीर में होती है जलन

    शरीर में होती है जलन

    मुर्शिदाबाद के बेलडांगा का रहने वाला 16 वर्षीय इकबाल शेख इन दिनों अपनी अनोखी जीवनशैली के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है. एक-दो दिन नहीं, बल्कि लगातार चार से पांच दिन, कभी-कभी सात दिनों तक भी वह पानी में ही रहकर समय बिताता है. इसलिए स्थानीय लोगों का कहना है कि उसके लिए “जल ही जीवन” नहीं, बल्कि “जल में ही जीवन” है.

    तालाब में 5 साल से रह रहा इकबाल स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले लगभग पांच वर्षों से इकबाल घर छोड़कर बेलडांगा शहर के विभिन्न तालाबों में दिन-रात पानी में तैरते हुए रहता है. यह न तो किसी शौक का परिणाम है और न ही किसी रिकॉर्ड बनाने की कोशिश.

    पानी से निकलने पर शरीर में होती है जलन इकबाल का कहना है कि उसके शरीर में लगातार जलन होती है. उसका दावा है कि उस पर जिन्न, परी या किसी अदृश्य शक्ति का साया है. जैसे ही वह पानी से बाहर निकलता है, शरीर में तेज जलन शुरू हो जाती है, जबकि पानी में उतरते ही उसे राहत मिलती है.

    इलाज में नहीं मिली मदद लगातार कई दिनों तक पानी में रहने के कारण उसके हाथ-पैर और पूरे शरीर की त्वचा सफेद पड़ गई है. लंबे समय तक पानी में रहने से वह सर्दी-खांसी से भी पीड़ित हो गया है. इकबाल का आरोप है कि इलाज के लिए वह स्थानीय ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गया था, लेकिन उसे उचित सहायता नहीं मिली. आर्थिक तंगी के कारण उसका परिवार निजी अस्पताल में इलाज कराने में भी असमर्थ है.

    हालांकि, स्थानीय लोग अब उसके इलाज के लिए आगे आ रहे हैं. रोज़ बड़ी संख्या में स्कूली छात्र और आम लोग तालाब के किनारे उसे देखने के लिए जुटते हैं. कई लोग उसे चिउड़ा, बिस्कुट और अन्य खाद्य सामग्री भी देते हैं. लेकिन कोई भी उसे घर में रोक नहीं पाता.

    चर्चा का विषय बनी इकबाल की कहानी इकबाल की यह असामान्य स्थिति देखकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है. उनका सवाल है कि आखिर इस तरह वह कब तक जीवित रह पाएगा. वहीं, 16 वर्षीय इकबाल की यह कहानी अब पूरे इलाके में कौतूहल और चर्चा का विषय बन गई है.

  • कार के गुजरते ही मलबे में बदला मकान! कैमरे में कैद हुई दिल दहला देने वाली तस्वीर..

    कार के गुजरते ही मलबे में बदला मकान! कैमरे में कैद हुई दिल दहला देने वाली तस्वीर..

    कार के गुजरते ही मलबे में बदला मकान! कैमरे में कैद हुई दिल दहला देने वाली तस्वीर..

    हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में बुधवार को एक मकान ढहने का मामला सामने आया है. हादसे में मां और मायके आई गर्भवती बेटी की मलबे में दबकर मौत हो गई. इस हादसे में दो बच्चियां भी घायल हुई है. जमीन धंसने की वजह से पलभर में ही मकान जमींदोज हो गया. मकान गिरने की आवाज सुनते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया.

    हादसे का वीडियो सामने आया है. उसमें देखा जा सकता है कि सड़क से एक कार उस घर के आगे से निकलती है और अचानक घर नीचे गिर जाता है. घर के नीचे गिरने की जोर से आवाज आती है और कुछ लोगों की चीख भी सुनाई देती है. इसके बाद आस पास से लोग उस और भागते दिखाई देते हैं. फिर युवाओं ने मलबे में दबे परिवार के सदस्यों को बाहर निकाला और उन्हें उपचार के लिए सिविल अस्पताल राजगढ़ पहुंचाया.

    सिविल अस्पताल राजगढ़ में 60 वर्षीय निर्मला पत्नी भीम सिंह और 32 वर्षीय पूजा पत्नी अमित राणा को डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया. बताया जा रहा है कि हादसे में जख्मी डेढ़ वर्षीय ईरा की हालत नाजुक है उसे सोलन रेफर किया गया है. इसके अलावा डेढ़ साल की अबियाना का राजगढ़ अस्पताल में इलाज किया जा रहा है.

    इसके अलावा उत्तरकाशी के सौली गांव में जमीन धंसने से कई मकानों में दरारें आई हैं. प्रशासन ने असुरक्षित मकानों के परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है. बारिश होने पर अन्य मकानों में भी दरारें बढ़ने की आशंका आई है. भूवैज्ञानिक टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया है. बारिश के पानी के जमीन में रिसाव से भू-धंसाव बढ़ने की आशंका जताई गई है.

    चीड़ के पेड़ों में भी ढाल की दिशा में झुकाव देखने मिला है. भू-धंसाव के चलते क्षेत्र में लगातार मूवमेंट की आशंका है. ग्रामीणों का दावा – एनएच कटान के बाद भू-धंसाव शुरू हुआ है. भूवैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर अति संवेदनशील परिवारों के विस्थापन पर फैसला होगा और विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी उत्तरकाशी को भेजी जाएगी.

  • अंतरिक्ष से आया बुलावा तो मचेगी तबाही, 97 देशों के 1000 वैज्ञानिकों की चेतावनी..

    अंतरिक्ष से आया बुलावा तो मचेगी तबाही, 97 देशों के 1000 वैज्ञानिकों की चेतावनी..

    अंतरिक्ष से आया बुलावा तो मचेगी तबाही, 97 देशों के 1000 वैज्ञानिकों की चेतावनी..

    अब तक एलियंस की मौजूदगी को लेकर सवाल उठते रहे हैं. कुछ लोगों का दावा है कि उनकी मुलाकात दूसरे ग्रहों के परग्रहियों से हुई तो कुछ लोग कहते हैं कि एलियंस ने उन्हें किडनैप कर लिया था. हालांकि, इन तमाम बातों का कोई सबूत नहीं है. लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों के एक समूह ने एलियंस को लेकर सनसनीखेज खुलासा किया है. वैज्ञानिकों ने इंसानों को सख्त हिदायत दी है कि ब्रह्मांड के किसी सुदूर कोने से अगर एलियंस पृथ्वी के इंसानों से संपर्क साधने की कोशिश करते हैं, तो हमें तुरंत पलटकर उन्हें कोई जवाब नहीं देना चाहिए. एलियंस के संदेश को शुरुआत में पूरी तरह नजरअंदाज करें और उनसे रुखा बर्ताव करें. यह चौंकाने वाली सलाह वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किए गए एक विशेष ‘8 सूत्रीय प्लान’ का हिस्सा है, जिसमें विस्तार से बताया गया है कि अगर कभी किसी वास्तविक एक्स्ट्रा-टेरेस्ट्रियल सभ्यता का पता चलता है, तो मानव जाति को कदम-दर-कदम क्या कदम उठाने चाहिए.

    डेली स्टार के रिपोर्ट के मुताबिक, इन दिशा-निर्देशों को ‘इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एयरोनॉटिक्स’ ने प्रकाशित किया है, जो 97 देशों के 1,000 से अधिक शीर्ष वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का एक प्रतिष्ठित वैश्विक समूह है. यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल से जुड़ी तथाकथित ‘यूएफओ फाइल्स’ के सार्वजनिक होने के बाद से एलियंस और यूएफओ को लेकर दुनिया भर में बहस और जांच-पड़ताल काफी तेज हो गई है. इस पूरी रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य उन वैज्ञानिकों के लिए “सबसे बेहतर तौर-तरीके” स्थापित करना है, जो एक्स्ट्रा-टेरेस्ट्रियल सिग्नलों या जीवों की खोज में जुटे हैं. साथ ही इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि आम जनता को इस ऐतिहासिक खोज के बारे में कब और कैसे सूचित किया जाएगा. बता दें कि धरती को लेकर एलियंस की सोच क्या है, कोई नहीं जानता. ऐसे में वो महाविनाश भी कर सकते हैं.

    इंसानों के लिए सबसे बड़ी चेतावनी
    इस वैज्ञानिक रिपोर्ट की सबसे दिलचस्प और महत्वपूर्ण सिफारिश यह है कि यदि एलियंस किसी रेडियो सिग्नल या माध्यम से वैज्ञानिकों से संपर्क करते हैं, तो पृथ्वी से तब तक कोई जवाबी संदेश नहीं भेजा जाना चाहिए, जब तक कि इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक विचार-विमर्श न हो जाए. रिपोर्ट में कहा गया है कि वैज्ञानिकों को आपस में और वैश्विक स्तर पर इस बात को लेकर पूरा सहयोग और चर्चा करनी चाहिए कि क्या एलियंस को कोई जवाब दिया जाना चाहिए या नहीं, और यदि जवाब देना भी है, तो उस संदेश में क्या होना चाहिए. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पूरी परामर्श प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र और अन्य बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों के जरिए ही संचालित की जानी चाहिए. रिपोर्ट में साफ लिखा है, “जब तक इस तरह की अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं का कोई ठोस परिणाम नहीं निकल जाता, तब तक अंतरिक्ष में हमारी तरफ से कोई भी जवाबी संदेश नहीं भेजा जाना चाहिए.”

    वैज्ञानिकों ने संकेत दिया है कि भविष्य में एलियंस को दिए जाने वाले संभावित जवाबों के सटीक तौर-तरीकों को तय करने के लिए एक अलग से वैश्विक समझौता, घोषणापत्र या व्यवस्था तैयार की जाएगी, ताकि पूरी मानव जाति का दृष्टिकोण इस संवेदनशील मुद्दे पर एकजुट और जिम्मेदार बना रहे. एलियंस और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रेमियों के लिए राहत की बात यह है कि इस गाइडलाइन में किसी भी एलियन एनकाउंटर या खोज को दुनिया से छिपाने या दबाने की बात नहीं कही गई है. रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि वैज्ञानिकों पर एलियंस से संपर्क करने के शुरुआती प्रयासों को सार्वजनिक करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है, लेकिन एक बार जब खोज पक्की हो जाएगी, तो संबंधित वैज्ञानिक संस्थानों को पूरी दुनिया के सामने पूरी तरह ईमानदार और पारदर्शी होना पड़ेगा. दिशानिर्देशों के अनुसार, वैज्ञानिक संस्थानों और संगठनों को समाचार एजेंसियों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य सार्वजनिक संचार माध्यमों के सभी जायज सवालों का जवाब देना होगा.

    वैज्ञानिकों द्वारा जारी किए गए एलियन प्रोटोकॉल के 8 पॉइंट्स
    1. खोज की सत्यता की जांच (Authenticate and substantiate): अंतरिक्ष से मिलने वाले किसी भी सिग्नल की बारीकी से जांच की जाए कि वह वाकई एलियंस का है या नहीं.
    2. सावधानी से सूचना का प्रबंधन (Handle information with care): खोजी गई संवेदनशील जानकारियों और डेटा को बेहद सतर्कता के साथ संभाला जाए.
    3. सटीकता और ईमानदारी (Be prompt, accurate and honest): जनता और दुनिया को दी जाने वाली कोई भी जानकारी पूरी तरह सच्ची और बिना किसी देरी के होनी चाहिए.
    4. पूर्ण प्रकटीकरण (Report conclusions fully): एलियंस से जुड़ी खोज के निष्कर्षों को पूरी तरह, खुले तौर पर और बिना कुछ छिपाए रिपोर्ट किया जाए.
    5. डेटा का संरक्षण (Preserve and disseminate all data): खोज से जुड़े सभी वैज्ञानिक डेटा और सिग्नलों के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए और शोध के लिए साझा किया जाए.
    6. साक्ष्यों की सुरक्षा (Protect evidence): एलियंस की मौजूदगी साबित करने वाले भौतिक या डिजिटल सबूतों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए.
    7. जवाबी संदेश पर रोक (No reply should be sent): बिना वैश्विक सहमति और संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी के अंतरिक्ष में कोई भी जवाबी संदेश न भेजा जाए.
    8. उच्चतम नैतिक मानक (Adhere to highest ethical standards): इस पूरी प्रक्रिया के दौरान विज्ञान और मानवता के उच्चतम नैतिक मूल्यों का पालन किया जाए.

  • बिहार में दो अलग-अलग धर्मों की छात्राओं ने मंदिर में रचाई समलैंगिक शादी.

    बिहार में दो अलग-अलग धर्मों की छात्राओं ने मंदिर में रचाई समलैंगिक शादी.

    बिहार में दो अलग-अलग धर्मों की छात्राओं ने मंदिर में रचाई समलैंगिक शादी.

    पटना: बिहार में दो लड़कियों ने समलैंगिक विवाह रचा ली। दोनों के बीच प्यार इस कदर था उन्होंने धार्मिक बंधनों को भी तो़ड़ दिया। दोनों ही लड़कियां दो अलग-अलग धर्मों की थीं लेकिन इसके बावजूद उन्होंने मंदिर में शादी रचा ली। पटना में अदालतगंज की दो छात्राओं ने तीन साल की दोस्ती के बाद एक-दूसरे के साथ रहने का फैसला किया और घर से भागकर खगड़िया पहुंच गईं। दोनों ने वहां मंदिर में शादी करने का दावा भी किया है। दोनों ही लड़कियों के घर से गायब होने पर परिजनों ने पटना के कोतवाली थाने में सात अगस्त को शिकायत दर्ज कराई थी।

    इसके बाद पुलिस दोनों को बरामद कर पटना ले आई। यहां पहुंचने के बाद भी दोनों ने एक-दूसरे से अलग होने से मना कर दिया। दोनों ही लड़कियां परिजनों के साथ जाने को तैयार नहीं हुईं। एक लड़की 10वीं में तो दूसरी 12वीं में पढ़ती है। 10वीं की छात्रा के पिता सीआईडी में बताए जा रहे हैं। दोनों अलग-अलग धर्मों से हैं। पुलिस के अनुसार, दोनों एक-दूसरे की पड़ोसी भी हैं। छात्राओं ने पुलिस को बताया है कि वे अपने रिश्ते को शादी का रूप देना चाहती थीं। इसीलिए 7 अगस्त को घर से निकल गईं। उनके पास 3500 रुपये थे। दोनों इसके बाद खगड़िया पहंच गईं। दोनों ने खगड़िया के ही एक मंदिर में शादी करने का दावा किया। इसके बाद दोनों होटल में ठहरीं थीं।

    कोतवाली थाने की महिला पुलिस पदाधिकारी पूनम कुमारी के नेतृत्व में टीम दोनों को खगड़िया स्टेशन के पास से बरामद किया। थानेदार अजय कुमार ने कहा कि एक के बालिग और दूसरी के नाबालिग होने की बात सामने आई है। दोनों को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया है। नाबालिग को रिमांड होम भेजने का आदेश मिला है। दूसरी बालिग है उसे अपने मर्जी से कहीं भी जाने को कहा गया है।

    बाल गृह के बच्चे चारपहिया से कोर्ट, अस्पताल जाएंगे
    इधर बिहार में समाज कल्याण विभाग के तहत संचालित बाल गृहों में रहने वाले बच्चों को समय-समय पर अस्पताल या न्यायालय में पेशी के लिए ले जाने के लिए चार पहिया वाहन की सुविधा मिलेगी। अबतक ऑटो या रिक्शा या अन्य वाहनों से ले जाया जाता था। विभाग के संयुक्त सचिव सुशील कुमार ने बताया कि 40 विभिन्न गृहों को एक-एक चारपहिया वाहन की सुविधा मिलेगी। सभी 40 गृहों के लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से सातों दिन 24 घंटे चार पहिया वाहन की सुविधा मिलेगी। हरेक वाहन के लिए प्रति माह 75 हजार रुपये की दर से भुगतान किया जाएगा। समाज कल्याण विभाग ने एक वर्ष के लिए इसकी मंजूरी दी है। विभाग इस पर 3 करोड़ 60 लाख रुपये खर्च करेगा।

  • लाल रंग की बिल्ली देख कांप गए लोग, अमेरिका के इस शहर..

    लाल रंग की बिल्ली देख कांप गए लोग, अमेरिका के इस शहर..

    लाल रंग की बिल्ली देख कांप गए लोग, अमेरिका के इस शहर..

    अमेरिका के टेक्सस राज्य के लीग सिटी से एक बेहद अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां सड़कों पर चमकीले गहरे लाल रंग की एक बिल्ली घूमती हुई देखी गई है. पहली नजर में खून से सनी या लाल रंग में रंगी दिखाई देने वाली इस बिल्ली को देखकर स्थानीय निवासी दहशत में आ गए हैं. सोशल मीडिया पर लोगों ने इस अजीबोगरीब जीव को ‘नरक की बिल्ली’ और ‘लूसिफर (यमराज)’ तक का नाम दे दिया है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पशु संरक्षण विभाग ने आपातकालीन अलर्ट जारी कर आम जनता को इस बिल्ली से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है. लीग सिटी एनिमल केयर की टीम इस लाल रंग की बिल्ली को सुरक्षित पकड़ने के लिए लगातार रेस्क्यू अभियान चला रही है.

    अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे बिल्ली को खुद पकड़ने या उसके पास जाने की कोशिश बिल्कुल न करें, क्योंकि इससे बिल्ली डरकर भाग सकती है और रेस्क्यू टीम के प्रयासों में बाधा आ सकती है. संस्था ने बयान जारी कर बताया कि वे आसपास के कैट-केयरगिवर्स की मदद से पिंजरा लगाकर बिल्ली को सुरक्षित हिरासत में लेने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उसके शरीर पर लगे खतरनाक केमिकल या डाई का इलाज किया जा सके. सोशल मीडिया पर इस लाल बिल्ली की तस्वीरें वायरल होते ही लोगों ने जानवर के प्रति क्रूरता और अवैध गतिविधियों से जुड़े कई गंभीर दावे किए हैं.

    कुछ स्थानीय लोगों का आशंका जताई है कि इस बिल्ली को किसी अवैध डॉग-फाइटिंग रिंग (कुत्तों की खूनी लड़ाई) का शिकार बनाने या टारगेट प्रैक्टिस के लिए लाल रंग से रंगा गया हो सकता है. लोगों का मानना है कि बिल्ली किसी तरह वहां से भाग निकली है. ऐसे में पुलिस को इस इलाके में जानवरों की क्रूरता से जुड़े गिरोहों की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए. वहीं, कुछ कैट लवर्स ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. हालांकि, पुलिस ने अभी तक किसी औपचारिक आपराधिक जांच या एनिमल क्रुएल्टी केस दर्ज करने की घोषणा नहीं की है. फिलहाल रेस्क्यू टीम का पूरा ध्यान बिल्ली को सुरक्षित पकड़कर उसका मेडिकल चेकअप करने और उसे एक सुरक्षित घर दिलाने पर टिका हुआ है.

  • ब्रिज पर नन्हें बच्चे को अकेला छोड़ मां बेशर्मी से बनाती दिखी रील, हरकत देख औरत से उठ जाएगा भरोसा!

    ब्रिज पर नन्हें बच्चे को अकेला छोड़ मां बेशर्मी से बनाती दिखी रील, हरकत देख औरत से उठ जाएगा भरोसा!

    ब्रिज पर नन्हें बच्चे को अकेला छोड़ मां बेशर्मी से बनाती दिखी रील, हरकत देख औरत से उठ जाएगा भरोसा!

    Viral Video: सोशल मीडिया पर एक महिला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वो अपने बच्चे को छोड़कर रील बनाने में लग जाती है। बच्चा सड़क की तरफ बढ़ने लगता है। ले किन तभी वहां पर कर आदमी बच्चे को बचाता है। हैरानी की बात ये है कि, महिला को फिर भी कोई होश नहीं रहता है।

    Viral Video: इंस्टाग्राम रील का भूत लोगों के सिर पर कुछ तरह से सवार हो चुका है कि, वो ना तो अपनी जान की परवाह करते हैं और ना ही किसी और की। सोशल मीडिया एक ऐसी ही लापरवाह मां का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें महिला बच्चे को ब्रिज के ऊपर छोड़कर रील बनाने में इतनी बिजी हो जाती है कि,  बच्चे को ही भूल जाती है।  मां का अब यही बर्ताव लोगों को परेशान भी कर रहा है और गुस्सा भी दिला रहा है।

    रील के चक्कर में बच्चे को भूली मां

    बच्चे को छोड़कर रील बनाती महिला के वायरल वीडियो को Nitin Prajapati नाम के एक्स हैंडल से अपलोड किया गया है। इसके साथ ही कैप्शन में लिखा है, ‘इस महिला को REEL की फिक्र है लेकिन बच्चे की नहीं है। बताइए कितनी असंवेदनशीलता आ चुकी है! ‘ वायरल हो रहे इस वीडियो में देखा जा सकता है कि एक महिला एक ऊंचे पुल पर खड़ी होकर रील बना रही है।

    खुद को कैमरे में कैद करने और अच्छा वीडियो बनाने की धुन में वह इतनी खोई हुई है कि उसे अपने आस-पास की कोई सुध नहीं है।हद तो तब हो गई जब महिला ने अपने नन्हें बच्चे को ब्रिज पर बिल्कुल अकेला छोड़ दिया। पुल जैसी खतरनाक जगह पर, जहां से तेज रफ्तार गाड़ियां गुजरती हैं और नीचे गिरने का भारी खतरा होता है, वहां एक छोटे बच्चे को इस तरह अकेला छोड़ना किसी बड़े हादसे को दावत देने जैसा था। जब महिला बेशर्मी से अपने वीडियो में व्यस्त थी, तभी वहां पर खड़े आदमी ने बच्चे को गोद में उठा लिया और प्यार करने लगा। अब इसी घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।अगर वह शख्स सही समय पर वहां नहीं पहुंचता, तो बच्चे के साथ कोई भी अनहोनी घट सकती थी।

    Viral Video लोगों को दिला रहा गुस्सा

    ये घटना कब और कहां की है?  इसकी कोई भी आधिकारिक जानकारी तो मौजूद नहीं है। लेकिन इसे एक्स  पर 7 अगस्त 2026 को अपलोड किया गया था। इस पर 86000 से ज्यादा व्यूज आ चुके हैं। वहीं, तमाम सारे लोगों के कमेंट भी आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि चंद लाइक्स और व्यूज के लिए अपने सगे बच्चे की जान जोखिम में डालना बेहद शर्मनाक है। कई यूजर्स ने पुलिस और प्रशासन से मांग की है कि ऐसी लापरवाह मां के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि दूसरों को सबक मिल सके। मां की इस हरकत ने लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

    डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो /पोस्ट पर आधारित है। लेखक किसी भी प्रकार के दावे और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

  • आखिरी सांस तक बेटे का इंतजार करती रही बुजुर्ग मां, मौत के बाद भी नहीं पहुंचा बेटा; समाजसेवियों ने किया अंतिम संस्कार..

    आखिरी सांस तक बेटे का इंतजार करती रही बुजुर्ग मां, मौत के बाद भी नहीं पहुंचा बेटा; समाजसेवियों ने किया अंतिम संस्कार..

    आखिरी सांस तक बेटे का इंतजार करती रही बुजुर्ग मां, मौत के बाद भी नहीं पहुंचा बेटा; समाजसेवियों ने किया अंतिम संस्कार..

    बस्ती: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक ऐसी मार्मिक घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत और पारिवारिक रिश्तों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 70 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला अपने बेटे का इंतजार करते-करते दुनिया से विदा हो गईं। दुखद बात यह रही कि उनकी मौत के बाद भी बेटा अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंचा। आखिरकार एक सामाजिक संस्था ने बेटे का फर्ज निभाते हुए पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कराया।

    बेसहारा हालत में मिली थीं बुजुर्ग महिला

    जानकारी के अनुसार, हर्रैया नगर पंचायत स्थित आसरा आवास में रहने वाली बुजुर्ग महिला और एक वृद्ध पुरुष कई दिनों से बिना भोजन और इलाज के असहाय अवस्था में पड़े थे। पड़ोसियों की सूचना मिलने पर सामाजिक संस्था ‘सेवा समर्पण भाव परिवार’ की टीम मौके पर पहुंची और पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की मदद से दोनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

    अस्पताल में बेटे को पुकारती रहीं

    अस्पताल में इलाज के दौरान बुजुर्ग महिला की हालत लगातार गंभीर बनी रही। संस्था के कार्यकर्ता उनकी देखभाल करते रहे, लेकिन उनकी जुबान पर बार-बार सिर्फ अपने बेटे का नाम था। हर बार दरवाजे की आहट सुनकर उन्हें उम्मीद होती कि बेटा उन्हें लेने आएगा, लेकिन उनका यह इंतजार कभी पूरा नहीं हो सका। 29 जुलाई को उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली।

    पांच दिन तक नहीं पहुंचा कोई परिजन

    महिला की मौत के बाद प्रशासन और समाजसेवी संस्था ने परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए कोई सामने नहीं आया। शव करीब पांच दिनों तक मर्चरी में रखा रहा, फिर भी बेटा या परिवार का कोई सदस्य अंतिम विदाई देने नहीं पहुंचा।

    समाजसेवियों ने निभाया बेटे का फर्ज

    जब कोई अपना नहीं आया, तब ‘सेवा समर्पण भाव परिवार’ संस्था ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली। संस्था के प्रमुख दिलीप पाण्डेय ने बस्ती के पौराणिक मुड़घाट पर वैदिक रीति-रिवाज से बुजुर्ग महिला को मुखाग्नि दी। इस दौरान संस्था के सदस्य और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। यह भावुक दृश्य देखकर कई लोगों की आंखें नम हो गईं।

    समाज के सामने छोड़ गई कई सवाल

    यह घटना सिर्फ एक बुजुर्ग महिला की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलते पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक मूल्यों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस मां ने अपने बेटे के लिए पूरी जिंदगी समर्पित कर दी, उसे अंतिम समय में अपनों का साथ नहीं मिला। वहीं, एक सामाजिक संस्था ने यह संदेश दिया कि सच्चे रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि संवेदनाओं और इंसानियत से भी बनते हैं।