गर्मियों में तेज धूप, पसीना और प्रदूषण का असर सबसे ज्यादा बालों पर पड़ता है। इससे बाल रूखे, बेजान और कमजोर होने लगते हैं। ऐसे में एलोवेरा एक बेहतरीन प्राकृतिक उपाय साबित हो सकता है। इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट बालों को गहराई से पोषण देने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं एलोवेरा से बने कुछ आसान और असरदार हेयर मास्क के बारे में।
एलोवेरा, शहद और नारियल तेल हेयर मास्क
यह हेयर मास्क स्कैल्प को पोषण देने, डैंड्रफ कम करने और बालों की ग्रोथ बढ़ाने में मदद कर सकता है। इसके लिए 2 चम्मच एलोवेरा जेल, 2 चम्मच शहद, 2 चम्मच नारियल तेल और 1 चम्मच नींबू का रस मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इसे बालों पर 30 मिनट तक लगाकर रखें और फिर धो लें।
एलोवेरा और दही का हेयर मास्क
दही और एलोवेरा का मिश्रण बालों को नमी देने और रूखेपन को कम करने में मदद करता है। 3-4 चम्मच एलोवेरा जेल में 2 बड़े चम्मच दही मिलाकर स्कैल्प और बालों पर लगाएं। 30 से 40 मिनट बाद माइल्ड शैंपू से बाल धो लें।
एलोवेरा और प्याज का रस
बाल झड़ने की समस्या से परेशान लोगों के लिए यह मास्क फायदेमंद माना जाता है। 4 चम्मच प्याज के रस में 2 चम्मच एलोवेरा जेल मिलाकर स्कैल्प पर लगाएं और हल्की मसाज करें। लगभग एक घंटे बाद शैंपू से बाल धो लें।
एलोवेरा और मेथी का हेयर पैक
रातभर भिगोई हुई मेथी को पीसकर उसमें 2-3 चम्मच एलोवेरा जेल मिलाएं। इस मिश्रण को बालों पर लगाकर एक घंटे बाद धो लें। यह बालों को मजबूत और घना बनाने में मदद कर सकता है।
एलोवेरा, केले और तेलों का पोषण
केले और एलोवेरा का हेयर मास्क बालों को मुलायम बनाने में मदद करता है। वहीं एलोवेरा, अरंडी का तेल और ऑलिव ऑयल का मिश्रण बालों को हाइड्रेट कर उन्हें सिल्की और चमकदार बना सकता है।
रूसी और खुजली के लिए एलोवेरा-विनेगर मास्क
एलोवेरा जेल, एप्पल साइडर विनेगर और शहद का मिश्रण स्कैल्प की खुजली, रूसी और पपड़ी की समस्या को कम करने में सहायक हो सकता है। इसे 20 मिनट तक लगाकर रखने के बाद बाल धो लें।
Sleep Disorder:
ये नींद क्या है ? क्यों आती है नींद ? रात को जागने से लंबी बीमारियों से कैसे मौत के मुंह में जाता है इंसान ? जानिए नींद का वैज्ञानिक रहस्य. आजकल विज्ञान , कम्प्यूटर और नेट का जमाना है और पूरी दुनियां इंटरनेट से जुड़ गयी है. इसलिए मनुष्य रात और दिन काम करने लगा है. कॉल सेंटर और रात की शिफ्ट में काम करने वाले लोगों का बुरा हाल है. जवान बच्चे बहुत जल्दी नपुंसक और बूढ़े हो रहे हैं. दिनरात काम करने के कारण मनुष्य डिप्रेशन की भयंकर बीमारी और मानसिक रोगों का शिकार होने लगा है. बीमारियां कुकुरमुत्ते की तरह बढ़ रही हैं. रातभर जागना और दिन में सोना प्रकृति के नियमों के विरुद्ध है. जब-जब भी हम प्रकृति के नियमों का उल्लंघन करेंगे तब-तब तबाही के कगार पर आ जाएंगे.
रातभर जागने के नुकसान
आखिर क्यों रात को जागने से शुगर , उच्च रक्तचाप, किडनी फैलोर, कम उम्र में हार्ट अटैक , डिप्रेशन , सिरदर्द , बुद्धि का कमजोर होना , याद न रहना , और बुढ़ापा तथा हिजडापन जैसी बीमारियां आ रही हैं. नींद शरीर का एक ऑटोमैटिक सेंसर है, जो अपान प्राण के द्वारा संचालित है. पांचों प्राणों का संबंध शरीर की ऊर्जा शक्ति के साथ होता है. नींद का संबंध शरीर की ऊर्जा शक्ति के साथ साथ 72,72 ,10,202 नस-नाड़ियों के साथ होता है. जब शरीर में ऊर्जा की कमी होनी शुरू हो जाती है तो अपान प्राण नींद को संकेत कर देता है कि शरीर से काम लेना बंद कर दें और ऊर्जा की खपत को बंद कर दें क्योंकि शरीर थक चुका है. अन्यथा शरीर के अंगों पर दुष्प्रभाव पड़ेगा. प्राण सूर्य की किरणों से संचालित होते हैं. प्राण दिन में सूर्य से ऊर्जा एकत्रित कर लेते हैं.
क्यों होती हैं बीमारियां?
प्राण शरीर को इन्वर्टर की तरह चार्ज कर देते हैं. रात को प्राणों को ऊर्जा की सप्लाई नहीं हो पाती है, फिर भी रात भर जागने से शरीर तो काम करता है और ऊर्जा की खपत भी करता है. ऐसी स्थिति में समान प्राण शरीर को ऊर्जा की पूर्ति के लिए शरीर के चलायमान अंगो से ( लीवर, किडनी, फेफड़े, आंते, हृदय, मस्तिष्क , पेनक्रिया तथा पेट ) से ऊर्जा लेना शुरू कर देता है. शरीर में ऊर्जा की सप्लाई का काम समान प्राण के पास होता है. जब पूरी रात जागते हैं तो 1 हफ्ते में शरीर के ये अंग बहुत कमजोर हो जाते हैं और इन अंगो की ऊर्जा शक्ति समाप्त हो जाती है, जिसके कारण उपर लिखी हुई बीमारियां पैदा हो जाती हैं. जब ये शरीर के अंग कमजोर हो जाते हैं तो फिर समान प्राण शरीर के बाहरी हिस्से से ऊर्जा लेना शुरू कर देता है, जिसके कारण मनुष्य पहले अन्दर के अंगों से कमजोर होता है उसके बाद शरीर के बाहरी हिस्से से अंगो ( हिप्स , जांघे , हाथ , गाल , गर्दन ) से कमजोर होकर दुबला होना शुरू हो जाता है.
रात को जागना क्यों हैं घातक?
ज्यादा काम करने वाले लोगों को ज्यादा नींद आती है, क्योंकि शरीर में ऊर्जा की खपत ज्यादा हो जाती है और शरीर थक जाता है. शरीर में दुबारा ऊर्जा की आपूर्ति के लिए नींद शरीर को निष्क्रिय अवस्था में कर देती है या हम यह कह सकते हैं कि (Non Working Mode) पर डाल देती है, जिसके कारण शरीर अचेतन अवस्था में चला जाता है और सो जाता है . इसलिए नींद शरीर का एक ऑटोमैटिक ऊर्जा मापक यंत्र है, जो आपको समय-समय पर संकेत देता है कि अब आप सो जाओ अन्यथा अंग बीमार हो जाएंगे. अगर आप नींद की नहीं मानोगे तो वह आपके शरीर के अंगो को नुकसान (damage) कर देगी, इसलिए रात को जागने वाले और दिन को सोने वाले लोग की उम्र आधी रह जाती है और लंबी बीमारी के कारण अचानक जल्दी म्रत्यु को प्राप्त हो जाते हैं. इसलिए स्वस्थ रहने के लिए मनुष्य को रात को पूरी नींद करनी चाहिए. गहरी नींद लेने का समय 10 से 4 बजे तक ही होता है.
कर्नाटक के रायचूर जिले में महज ₹10 के विवाद ने एक व्यक्ति की जान ले ली। पेट्रोल भरवाने पहुंचे एक ग्राहक और कर्मचारियों के बीच पैसों को लेकर शुरू हुई कहासुनी कुछ ही देर में हिंसक झड़प में बदल गई। विवाद शांत कराने पहुंचे एक व्यक्ति पर कथित तौर पर पेट्रोल पंप कर्मचारियों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
विवाद सुलझाने पहुंचे व्यक्ति पर किया हमला
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पेट्रोल पंप पर पैसों को लेकर विवाद हो रहा था। इसी दौरान बीच-बचाव करने पहुंचे व्यक्ति को कर्मचारियों ने घेर लिया। आरोप है कि पहले उसके साथ गाली-गलौज की गई और फिर लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा गया। सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण वह मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़ा। झगड़ा रोकने की कोशिश कर रहे दो अन्य लोगों के साथ भी मारपीट की गई।
गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां सर्जरी के बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
CCTV में कैद हुई पूरी घटना
घटना पेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई। फुटेज में कथित तौर पर कर्मचारियों द्वारा किए गए हमले की पूरी घटना दिखाई दे रही है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
छह आरोपी गिरफ्तार
मृतक के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने हत्या सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। सभी से पूछताछ की जा रही है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
इलाके में आक्रोश
महज ₹10 के विवाद में हुई इस हत्या से स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि छोटी-सी कहासुनी का इस तरह जानलेवा हिंसा में बदल जाना बेहद चिंताजनक है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गंजम: ओडिशा के गंजम जिले के दिगपहंडी थाना क्षेत्र से ब्लैकमेलिंग और दुष्कर्म का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 26 वर्षीय महिला की अंतरंग (Intimate) तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर एक राजमिस्त्री द्वारा बार-बार दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगा है। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान गंजम जिले के सनखेमुंडी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले चिंताखली गांव के रहने वाले शंकर नायक उर्फ साहेब के रूप में हुई है, जो पेशे से एक राजमिस्त्री है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, दिगपहंडी ब्लॉक की रहने वाली पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपी शंकर नायक ने महिला की जानकारी के बिना चुपके से मोबाइल फोन में कुछ अंतरंग तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर लिए थे।
इन संवेदनशील वीडियो और तस्वीरों को अपने पास सुरक्षित रखने के बाद आरोपी ने महिला को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। वह लगातार उन तस्वीरों को सार्वजनिक करने की धमकी देकर महिला को जबरन शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करता रहा।
अलग-अलग मोबाइल नंबरों से देता था धमकी
पीड़िता ने बताया कि जब भी वह आरोपी की इस करतूत का विरोध करती थी, तो शंकर अलग-अलग मोबाइल नंबरों से उसे फोन कर डराता-धमकाता था। उसने साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि अगर महिला ने उसकी बात मानने से इनकार किया तो वह उन सभी आपत्तिजनक फोटो और वीडियो को फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल कर उसे समाज में बदनाम कर देगा।
आरोपी की आए दिन की प्रताड़ना और धमकियों से तंग आकर आखिरकार महिला ने दिगपहंडी पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की। इसके बाद पुलिस टीम ने दबिश देकर आरोपी शंकर नायक को गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेश किए जाने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की आगे की जांच और सबूत जुटाने की प्रक्रिया जारी है।
भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला करी पत्ता (Curry Leaves) केवल खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि यह कई औषधीय गुणों से भी भरपूर माना जाता है। आयुर्वेद में इसे लंबे समय से स्वास्थ्यवर्धक जड़ी-बूटी के रूप में उपयोग किया जाता रहा है।
करी पत्ते में विटामिन A, विटामिन C, आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस और कई शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि रोजाना करी पत्ते का सेवन करने से क्या-क्या फायदे हो सकते हैं।
1. वजन कम करने में मददगार
करी पत्ते में मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व शरीर के मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट कर सकते हैं। नियमित रूप से सीमित मात्रा में इसका सेवन वजन नियंत्रण में सहायक माना जाता है।
2. ब्लड शुगर कंट्रोल करने में सहायक
करी पत्ते में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं। इसलिए डायबिटीज के मरीज इसे डॉक्टर की सलाह के बाद अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।
3. कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद
करी पत्ता खराब (LDL) कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे (HDL) कोलेस्ट्रॉल को बनाए रखने में सहायक हो सकता है, जिससे दिल की सेहत को फायदा मिल सकता है।
4. लिवर को स्वस्थ रखने में मदद
करी पत्ते में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और प्राकृतिक यौगिक लिवर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद कर सकते हैं।
5. पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है
अगर आपको गैस, कब्ज या अपच जैसी समस्याएं रहती हैं, तो सीमित मात्रा में करी पत्ते का सेवन पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
6. एनीमिया में लाभदायक
करी पत्ते में आयरन और फोलेट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।
7. इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद
करी पत्ते में मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में योगदान दे सकते हैं।
8. आंखों के लिए फायदेमंद
करी पत्ते में विटामिन A पाया जाता है, जो आंखों की सामान्य कार्यक्षमता और दृष्टि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
9. त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद
इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं।
10. बालों के लिए लाभदायक
करी पत्ते का तेल या हेयर पैक बालों की जड़ों को पोषण देने, समय से पहले सफेद होने की समस्या को कम करने और बालों की चमक बनाए रखने में मदद कर सकता है।
11. संक्रमण से बचाव
करी पत्ते में प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को कुछ प्रकार के संक्रमणों से बचाने में मदद कर सकते हैं।
12. सूजन कम करने में सहायक
करी पत्ते में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर में होने वाली सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।
13. दिल की सेहत के लिए फायदेमंद
कोलेस्ट्रॉल और ऑक्सीडेटिव तनाव को नियंत्रित रखने में मदद मिलने के कारण करी पत्ता हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक माना जाता है।
करी पत्ता खाने का सही तरीका
सुबह खाली पेट 8–10 ताजे करी पत्ते चबाए जा सकते हैं।
दाल, सब्जी, सांभर और चटनी में इस्तेमाल करें।
करी पत्ते की चाय बनाकर पी सकते हैं।
नारियल के तेल में उबालकर बालों में लगा सकते हैं।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
डायबिटीज की दवा लेने वाले लोग।
किसी भी पौधे से एलर्जी वाले लोग।
गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं।
जो नियमित रूप से कोई गंभीर बीमारी की दवा ले रहे हैं।
ऐसे लोगों को नियमित सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
करी पत्ता एक साधारण लेकिन बेहद पौष्टिक हर्ब है, जिसे नियमित और संतुलित मात्रा में अपनी डाइट का हिस्सा बनाकर कई स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। हालांकि, इसे किसी भी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली के साथ इसका सेवन अधिक लाभदायक हो सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी बीमारी के इलाज या दवा के विकल्प के रूप में इसे न अपनाएं। यदि आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं या नियमित दवाइयां लेते हैं, तो डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
रसोई में इस्तेमाल होने वाली छोटी-सी कलौंजी (Nigella Seeds) सिर्फ मसाला ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग की जाने वाली एक महत्वपूर्ण औषधीय सामग्री भी मानी जाती है। इसे कई जगहों पर ब्लैक सीड्स या ब्लैक क्यूमिन भी कहा जाता है।
कलौंजी में थाइमोक्विनोन (Thymoquinone), एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, मिनरल्स और कई जैव सक्रिय तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचा सकते हैं। हालांकि, इसका सेवन सही मात्रा में करना जरूरी है।
आइए जानते हैं कलौंजी के फायदे, नुकसान और सेवन का सही तरीका।
कलौंजी में पाए जाने वाले पोषक तत्व
कलौंजी में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जैसे—
एंटीऑक्सीडेंट
थाइमोक्विनोन
फाइबर
प्रोटीन
आयरन
कैल्शियम
पोटैशियम
मैग्नीशियम
हेल्दी फैटी एसिड
यही कारण है कि इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।
कलौंजी खाने के फायदे
1. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद
कुछ शोध बताते हैं कि नियमित और सीमित मात्रा में कलौंजी का सेवन अच्छे (HDL) कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने और खराब (LDL) कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक हो सकता है। इससे हृदय स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है।
2. वजन कम करने में मददगार
कलौंजी शरीर के मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट कर सकती है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ इसका सेवन वजन नियंत्रण में मदद कर सकता है।
3. ब्लड शुगर को संतुलित रखने में सहायक
कलौंजी में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि डायबिटीज के मरीज इसे डॉक्टर की सलाह के बाद ही नियमित रूप से लें।
4. हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद
कुछ अध्ययनों के अनुसार कलौंजी का सेवन रक्तचाप को संतुलित रखने में सहायक हो सकता है। इसमें मौजूद सक्रिय तत्व रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में योगदान दे सकते हैं।
5. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक
कलौंजी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं।
6. लिवर और किडनी के लिए लाभदायक
कलौंजी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट लिवर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद कर सकते हैं। कुछ शोधों में इसके किडनी स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव बताए गए हैं।
7. सूजन कम करने में मदद
कलौंजी में प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में होने वाली सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं।
8. त्वचा के लिए फायदेमंद
कलौंजी का तेल मुंहासे, दाग-धब्बे और त्वचा की सूजन जैसी समस्याओं में सहायक माना जाता है। इसके एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं।
9. पुरुषों की प्रजनन क्षमता में सहायक
कुछ शुरुआती अध्ययनों में पाया गया है कि कलौंजी के एंटीऑक्सीडेंट गुण स्पर्म की गुणवत्ता और संख्या में सुधार करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है।
10. पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद
कलौंजी गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक हो सकती है। इसलिए कई लोग इसे भोजन में मसाले के रूप में शामिल करते हैं।
कलौंजी का सेवन कैसे करें?
सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ।
एक चम्मच शहद में मिलाकर।
सब्जी, अचार और दाल में मसाले के रूप में।
कलौंजी के तेल का सीमित मात्रा में उपयोग।
सलाद या दही में मिलाकर।
एक दिन में कितनी कलौंजी खानी चाहिए?
आमतौर पर 1 से 2 ग्राम (लगभग आधा से एक चम्मच) कलौंजी पर्याप्त मानी जाती है। अधिक मात्रा में सेवन करने से बचें।
कलौंजी खाने के नुकसान
हालांकि सामान्य मात्रा में कलौंजी सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन अधिक सेवन करने से कुछ लोगों में समस्याएं हो सकती हैं।
लो ब्लड शुगर की समस्या हो सकती है।
ब्लड प्रेशर जरूरत से ज्यादा कम हो सकता है।
कुछ लोगों को एलर्जी या त्वचा पर रिएक्शन हो सकता है।
अधिक मात्रा में खाने से पेट में जलन या अपच हो सकती है।
ब्लड थिनर या डायबिटीज की दवा लेने वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
किन लोगों को कलौंजी नहीं खानी चाहिए?
गर्भवती महिलाएं (डॉक्टर की सलाह के बिना)
स्तनपान कराने वाली महिलाएं
ब्लड प्रेशर या डायबिटीज की दवा लेने वाले लोग
जिनकी सर्जरी होने वाली हो
जिन्हें किसी भी प्रकार की एलर्जी हो
निष्कर्ष
कलौंजी एक छोटा लेकिन बेहद गुणकारी मसाला है, जो सही मात्रा में सेवन करने पर हृदय स्वास्थ्य, ब्लड शुगर, इम्यूनिटी, पाचन और वजन नियंत्रण सहित कई क्षेत्रों में लाभ पहुंचा सकता है। हालांकि इसे किसी भी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। यदि आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं या नियमित दवाइयां लेते हैं, तो कलौंजी का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी बीमारी के उपचार या दवा के विकल्प के रूप में इसे न अपनाएं। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी निर्णय से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
खांसी (Cough) एक सामान्य समस्या है, लेकिन यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं होती। यह शरीर का एक सुरक्षा तंत्र (Protective Reflex) है, जो गले और श्वसन मार्ग में मौजूद धूल, वायरस, बैक्टीरिया या बलगम को बाहर निकालने का काम करता है। हालांकि, जब खांसी बार-बार होने लगे, कई दिनों तक बनी रहे या इसके साथ बुखार, सांस लेने में तकलीफ या खून आने जैसी समस्या हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इस लेख में जानिए खांसी के प्रकार, घरेलू उपाय, क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए और किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
खांसी कितने प्रकार की होती है?
1. सूखी खांसी (Dry Cough)
इस प्रकार की खांसी में बलगम नहीं निकलता। गले में खराश, खुजली या जलन महसूस होती है। यह वायरल संक्रमण, एलर्जी, धूल, धुएं या एसिड रिफ्लक्स के कारण हो सकती है।
2. बलगम वाली खांसी (Wet/Productive Cough)
इसमें खांसी के साथ बलगम निकलता है। यह वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण, ब्रोंकाइटिस या अन्य श्वसन संक्रमण के कारण हो सकती है।
3. एलर्जिक खांसी
यह धूल, परागकण (Pollen), पालतू जानवरों के बाल, धुआं या अन्य एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थों के संपर्क में आने से होती है।
खांसी का घरेलू इलाज
सूखी खांसी का घरेलू इलाज
1 चम्मच शहद में चुटकीभर हल्दी मिलाकर लें। (एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शहद न दें।)
दिन में 2-3 बार भाप (Steam) लें।
गुनगुना पानी पीते रहें।
धूल, धुआं और ठंडी हवा से बचें।
बलगम वाली खांसी का घरेलू इलाज
गुनगुने नमक वाले पानी से गरारे करें।
अदरक, तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा पी सकते हैं।
पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएं।
दिन में 2 बार भाप लें, जिससे बलगम पतला होकर आसानी से बाहर निकल सके।
रात में खांसी ज्यादा क्यों होती है?
कई लोगों की खांसी रात में बढ़ जाती है। इसके मुख्य कारण हैं—
लेटने पर गले में नाक का स्राव (Post Nasal Drip) आना।
एसिड रिफ्लक्स (Acid Reflux)।
कमरे की सूखी हवा।
एलर्जी।
बचाव कैसे करें?
सिर थोड़ा ऊंचा रखकर सोएं।
सोने से पहले हल्का भोजन करें।
पर्याप्त पानी पिएं।
जरूरत हो तो कमरे में ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें।
खांसी में क्या खाना चाहिए?
✔️ गुनगुना पानी
✔️ हल्दी वाला दूध (यदि दूध से परेशानी न हो)
✔️ अदरक
✔️ तुलसी
✔️ शहद (1 वर्ष से अधिक उम्र में)
✔️ गर्म सूप
✔️ विटामिन C युक्त फल
खांसी में क्या नहीं खाना चाहिए?
बहुत ठंडा पानी
आइसक्रीम
कोल्ड ड्रिंक
अत्यधिक तला-भुना भोजन
ज्यादा मसालेदार खाना
धूम्रपान और शराब
क्या खांसी में एंटीबायोटिक लेनी चाहिए?
नहीं। अधिकांश मामलों में खांसी वायरल संक्रमण के कारण होती है, जिनमें एंटीबायोटिक असर नहीं करती। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेने से नुकसान हो सकता है और भविष्य में दवाएं कम प्रभावी हो सकती हैं।
एलर्जी की खांसी का इलाज
यदि खांसी बार-बार एलर्जी के कारण होती है, तो सबसे पहले एलर्जी के कारण की पहचान करना जरूरी है।
धूल और धुएं से बचें।
घर की नियमित सफाई करें।
आवश्यकता होने पर एलर्जी विशेषज्ञ से जांच कराएं।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लें।
टीबी की खांसी कैसे पहचानें?
यदि आपको निम्न लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें—
2–3 सप्ताह से अधिक लगातार खांसी
खांसी में खून आना
रात में ज्यादा पसीना आना
लगातार बुखार
तेजी से वजन कम होना
ऐसी स्थिति में जांच कराना जरूरी होता है।
डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
निम्न परिस्थितियों में घरेलू उपचार पर निर्भर न रहें—
खांसी 2–3 सप्ताह से अधिक रहे।
तेज बुखार हो।
सांस लेने में तकलीफ हो।
सीने में दर्द हो।
खून वाली खांसी आए।
छोटे बच्चों, बुजुर्गों या गर्भवती महिलाओं में लगातार खांसी हो।
निष्कर्ष
खांसी का सही इलाज उसकी वजह पर निर्भर करता है। सामान्य वायरल खांसी में आराम, पर्याप्त पानी, भाप और कुछ घरेलू उपाय राहत दे सकते हैं। लेकिन यदि खांसी लंबे समय तक बनी रहे, बार-बार लौटे या गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत योग्य डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। बिना सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन करने से बचें।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी भी दवा या उपचार को शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।
झालावाड़.
जिले के सारोला थाना क्षेत्र के नूरजी गाडरवाड़ा गांव में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है. यहां आपसी पारिवारिक विवाद के चलते एक भतीजे ने अपने ही चाचा पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया. हमले में गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग की इलाज के दौरान मौत हो गई. घटना के बाद आरोपी भतीजा मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है.
सारोला थाना पुलिस के अनुसार नूरजी गाडरवाड़ा गांव निवासी बुजुर्ग जगन्नाथ बैरवा का परिवार के कुछ सदस्यों के साथ किसी घरेलू बात को लेकर विवाद चल रहा था. इसी विवाद को लेकर परिवार के बीच बहस शुरू हो गई. देखते ही देखते कहासुनी इतनी बढ़ गई कि आरोपी भतीजे कुलदीप ने अपना आपा खो दिया और अपने काका जगन्नाथ बैरवा पर धारदार हथियार से हमला कर दिया. हमले के बाद जगन्नाथ बैरवा गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना के बाद आसपास के लोगों और परिजनों में हड़कंप मच गया. परिजन तत्काल घायल अवस्था में उन्हें उपचार के लिए झालावाड़ जिला अस्पताल लेकर पहुंचे.
इलाज के दौरान बुजुर्ग ने तोड़ा दम
जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने जगन्नाथ बैरवा की गंभीर हालत को देखते हुए उपचार शुरू किया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया. घटना की सूचना मिलते ही सारोला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है. मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा. पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि घटना के पीछे पारिवारिक विवाद मुख्य कारण हो सकता है. पुलिस घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है. फिलहाल सारोला थाना पुलिस आरोपी भतीजे कुलदीप की तलाश में जुटी हुई है. पुलिस का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों और पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
भारतीय भोजन में दही को बहुत पौष्टिक माना जाता है। रायता, लस्सी और छाछ के रूप में लोग इसका सेवन रोजाना करते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या रात को दही खाना सही है?
आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों के अनुसार, रात में दही खाने के कुछ फायदे भी हैं और कुछ नुकसान भी। आइए आसान भाषा में समझते हैं।
रात को दही खाने के फायदे
1. पाचन बेहतर बनाने में मददगार
दही में प्रोबायोटिक्स यानी अच्छे बैक्टीरिया पाए जाते हैं, जो पेट को स्वस्थ रखने और भोजन पचाने में मदद करते हैं।
2. कैल्शियम से भरपूर
दही में कैल्शियम और फॉस्फोरस अच्छी मात्रा में होता है, जिससे हड्डियां और दांत मजबूत रहते हैं।
3. अच्छी नींद में मदद
दही में मौजूद पोषक तत्व शरीर को रिलैक्स महसूस कराने में मदद कर सकते हैं, जिससे नींद बेहतर हो सकती है।
4. शरीर को ठंडक देना
गर्मी के मौसम में सीमित मात्रा में दही खाने से शरीर को ठंडक मिल सकती है।
रात को दही खाने के नुकसान
1. सर्दी और बलगम बढ़ सकता है
जिन लोगों को जल्दी सर्दी-जुकाम या खांसी होती है, उन्हें रात में दही खाने से परेशानी हो सकती है।
2. पेट भारी लगना
रात में ज्यादा मात्रा में दही खाने से अपच या पेट भारी होने की समस्या हो सकती है।
3. जोड़ों के दर्द में परेशानी
कुछ लोगों में रात के समय दही खाने से जोड़ों के दर्द या सूजन की समस्या बढ़ सकती है।
रात में दही खाने का सही तरीका
बहुत ठंडी दही न खाएं
दही में भुना जीरा या काली मिर्च मिला सकते हैं
कम मात्रा में सेवन करें
खट्टा दही रात में खाने से बचें
सर्दी-जुकाम होने पर दही न खाएं
निष्कर्ष
रात में दही खाना हर व्यक्ति के शरीर पर अलग असर कर सकता है। अगर आपको दही खाने से कोई परेशानी नहीं होती, तो सीमित मात्रा में सही तरीके से इसका सेवन किया जा सकता है। लेकिन जिन लोगों को खांसी, सर्दी या बलगम की समस्या रहती है, उन्हें रात में दही खाने से बचना चाहिए।
नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय चाइल्ड ट्रैफिकिंग सिंडिकेट का खुलासा किया है, जो गरीब और मजबूर परिवारों से नवजात बच्चों को लेकर उन्हें लाखों रुपये में निसंतान दंपतियों या बेटा चाहने वाले परिवारों को बेचता था. पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें बिचौलिए, अस्पताल संचालक, लैब टेक्नीशियन, आशा वर्कर, ड्राइवर, बच्चों के सप्लायर, खरीदार दंपति और यहां तक कि कुछ मामलों में बच्चों के जैविक माता-पिता भी शामिल थे.
दिल्ली पुलिस के मुताबिक इस मामले में अब तक 23 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें अस्पताल संचालक, बच्चे सप्लाई करने वाले एजेंट, खरीदार दंपति, बिचौलिए और जैविक माता-पिता शामिल हैं. वहीं, 9 मासूम बच्चों को इस नेटवर्क से मुक्त कराया गया है. पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.
एक आम नागरिक की सूचना से खुला पूरा नेटवर्क
डीसीपी रोहित राजबीर सिंह के मुताबिक पूरे मामले की शुरुआत किसी बड़ी एजेंसी की सूचना से नहीं बल्कि एक आम नागरिक की सतर्कता से हुई. एक व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि पहाड़गंज इलाके में एक महिला अक्सर अलग-अलग नवजात बच्चों के साथ दिखाई देती है. कभी उसके पास लड़का होता, कभी लड़की. कुछ दिनों बाद वही महिला फिर किसी दूसरे बच्चे के साथ नजर आती थी. उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो सूचना पुलिस तक पहुंची.
सूचना मिलते ही सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की ऑपरेशन यूनिट सक्रिय हो गई. पुलिस ने सबसे पहले पहाड़गंज और आसपास के इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की. कई दिनों तक फुटेज देखने के बाद महिला की पहचान ज्योति उर्फ कमलेश के रूप में हुई.
सीसीटीवी के बाद शुरू हुई गुप्त निगरानी
महिला की पहचान होने के बाद पुलिस ने जल्दबाजी में कार्रवाई नहीं की. उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई. उसके मिलने-जुलने वाले लोगों की जानकारी जुटाई गई और यह पता लगाने की कोशिश की गई कि वह बच्चों के साथ आखिर करती क्या है. जांच के दौरान पता चला कि वह नवजात बच्चों के सौदे में शामिल है. इसके बाद पुलिस ने उसे रंगे हाथों पकड़ने के लिए डिकॉय ऑपरेशन की योजना बनाई.
पुलिस बनी ग्राहक, 20 हजार में तय हुई पहली डील
एक पुलिसकर्मी को ग्राहक बनाकर ज्योति से संपर्क कराया गया. बातचीत के दौरान ज्योति ने दावा किया कि वह नवजात बच्चा उपलब्ध करा सकती है. दोनों के बीच सौदा तय हुआ और आरोपी ने 20 हजार रुपये एडवांस मांगे. इसके बाद पुलिस ने पूरी योजना तैयार की और तय समय पर आर.के. आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास जाल बिछा दिया.
5 जून को रंगे हाथों पकड़े गए आरोपी
5 जून 2026 को ज्योति उर्फ कमलेश अपने दो साथियों शालू और ललित के साथ चार से पांच दिन के एक नवजात लड़के को लेकर आर.के. आश्रम मेट्रो स्टेशन पहुंची. जैसे ही बच्चे को ग्राहक के हवाले किया जाने लगा, पहले से मौजूद पुलिस टीम ने तीनों को घेर लिया. मौके से चार-पांच दिन का नवजात सुरक्षित बरामद कर लिया गया. पुलिस ने 20 हजार रुपये की टोकन राशि भी बरामद की. इसी मामले में पहाड़गंज थाने में बीएनएस और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई.
पूछताछ में खुला करोड़ों के नेटवर्क का राज
शुरुआत में पुलिस को लगा कि यह सिर्फ एक बच्चे की खरीद-बिक्री का मामला है. लेकिन जैसे-जैसे तीनों आरोपियों से पूछताछ आगे बढ़ी, पुलिस के सामने हैरान करने वाली जानकारी आती गई. पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह कई राज्यों में सक्रिय है और पिछले करीब डेढ़ साल से बच्चों की खरीद-फरोख्त कर रहा है.
इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल डीसीपी-2 प्रशांत चौधरी की अगुवाई में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया. इस टीम में एसीपी, एसएचओ, स्पेशल स्टाफ, महिला पुलिस अधिकारी और कानूनी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया, ताकि जांच के दौरान किसी भी कानूनी पहलू की अनदेखी न हो.
सात राज्यों तक फैला था नेटवर्क
एसआईटी ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में एक साथ जांच शुरू की. मोबाइल लोकेशन, बैंक खातों, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल भुगतान और तकनीकी निगरानी के जरिए एक-एक कड़ी जोड़ी गई धीरे-धीरे पुलिस के सामने पूरा नेटवर्क खुलता चला गया.
हर सदस्य की अलग जिम्मेदारी
जांच में पता चला कि गिरोह पूरी तरह संगठित तरीके से काम करता था.
कुछ लोग गरीब परिवारों की तलाश करते थे.
कुछ लोग गर्भवती महिलाओं पर नजर रखते थे.
कुछ लोग अस्पतालों से संपर्क रखते थे.
कुछ नवजात बच्चों को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाते थे.
कुछ लोग खरीदार ढूंढते थे.
कुछ बैंक खातों के जरिए पैसों का लेनदेन संभालते थे.
जबकि कुछ लोग फर्जी दस्तावेज तैयार कराने का काम करते थे.
यानी पूरे नेटवर्क में हर व्यक्ति की भूमिका पहले से तय थी.
ज्योति थी पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी
पुलिस जांच में सामने आया कि ज्योति उर्फ कमलेश इस पूरे नेटवर्क की सबसे महत्वपूर्ण सदस्य थी. वह हरियाणा में आशा वर्कर के रूप में काम करती थी. लेकिन पुलिस के मुताबिक उसकी असली भूमिका बच्चों की खरीद-फरोख्त कराना थी. वह अलग-अलग राज्यों से बच्चों की व्यवस्था करती और फिर उन्हें खरीदने वाले परिवारों तक पहुंचाती थी. दिल्ली पुलिस के मुताबिक ज्योति पहले भी मानव तस्करी के मामलों में गिरफ्तार हो चुकी है. उसके खिलाफ पंजाबी बाग थाने में आईपीसी की धारा 363, 370, 370A और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज है.
प्रतिभा और विपिन की गिरफ्तारी से मिले नए सुराग
ज्योति से पूछताछ के बाद पुलिस ने प्रतिभा और विपिन को गिरफ्तार किया. दोनों एक और बच्चे की डील करने जा रहे थे. जब पुलिस ने उन्हें पकड़ा तो उनके पास से 2 लाख 92 हजार 400 रुपये नकद मिले. पूछताछ में पता चला कि यह रकम नवजात बच्चे की खरीद के लिए रखी गई थी. प्रतिभा पेशे से फ्रीलांस लैब टेक्नीशियन थी और हीरा मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल से जुड़ी हुई थी. वहीं विपिन पूरे नेटवर्क का ड्राइवर था. वह बच्चों और आरोपियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम करता था.
अस्पताल से लेकर आदिवासी गांवों तक फैला था नेटवर्क
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस के सामने सबसे चौंकाने वाला खुलासा दिल्ली के बेगमपुर स्थित हीरा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल को लेकर हुआ. पुलिस का आरोप है कि यह अस्पताल सिर्फ इलाज का केंद्र नहीं था, बल्कि नवजात बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त के इस नेटवर्क की एक अहम कड़ी बन चुका था. जांच के मुताबिक अस्पताल की संचालक डॉ. विवेकी कपूर गिरोह के अन्य सदस्यों के संपर्क में थी. आरोप है कि अस्पताल में ऐसे नवजात बच्चों को रखा जाता था, जिन्हें गिरोह विभिन्न राज्यों से लेकर आता था.
पुलिस का दावा है कि अस्पताल में इलाज या आईवीएफ और स्त्री रोग संबंधी परामर्श के लिए आने वाले निसंतान दंपतियों की पहचान की जाती थी और बाद में उन्हें अवैध तरीके से बच्चे उपलब्ध कराने की पेशकश की जाती थी. पुलिस का आरोप है कि अस्पताल के जरिए कई सौदे तय हुए और बच्चों के जन्म से जुड़े दस्तावेज, अस्पताल रिकॉर्ड और अन्य कागजात तैयार कर उनकी पहचान बदलने की कोशिश भी की गई. फिलहाल अस्पताल से बरामद दस्तावेजों, जन्म रिकॉर्ड और मेडिकल फाइलों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है.
गुरुग्राम से गुजरात तक फैला था सप्लाई नेटवर्क
जांच में सामने आया कि गिरोह का सबसे बड़ा सप्लायर साहिबा उर्फ कालिया गमार और उसका सहयोगी शंकर गमार थे. दोनों गुजरात और राजस्थान के गरीब तथा आदिवासी इलाकों में जाकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की तलाश करते थे. पुलिस के मुताबिक कई परिवारों को कुछ लाख रुपये का लालच देकर उनके नवजात बच्चे ले लिए जाते थे. इसके बाद बच्चों को दिल्ली और अन्य राज्यों में भेज दिया जाता था, जहां पहले से तैयार खरीदार उनका इंतजार करते थे.
तकनीकी निगरानी और लगातार पीछा करने के बाद पुलिस ने शंकर गमार और अन्य आरोपियों तक पहुंच बनाई. गुजरात के साबरकांठा जिले से जैविक माता-पिता कांतीभाई गमार और सुग्नाबेन गमार को भी गिरफ्तार किया गया. जांच में सामने आया कि उन्होंने पैसों के बदले अपना नवजात बच्चा गिरोह को सौंप दिया था. बाद में उसी बच्चे को कई गुना अधिक कीमत पर दूसरे परिवार को बेच दिया गया. पुलिस का दावा है कि कालिया गमार अब तक 30 से अधिक बच्चों को इस नेटवर्क तक पहुंचा चुका है. उसके पूरे नेटवर्क की जांच अभी जारी है.
गरीबी, मजबूरी और सामाजिक दबाव का उठाया जाता था फायदा
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह केवल गरीब परिवारों को ही निशाना नहीं बनाता था, बल्कि उन महिलाओं की भी पहचान करता था जो अविवाहित थीं या किसी कारणवश बच्चे का पालन-पोषण नहीं करना चाहती थीं. ऐसे ही एक मामले में दिल्ली की रहने वाली एक युवती ने अविवाहित होने के कारण बच्चा अपने पास रखने से इनकार कर दिया. पुलिस के मुताबिक डिलीवरी के बाद बच्चे को मां को वापस देने के बजाय गिरोह के कब्जे में रखा गया और बाद में उसे दूसरे परिवार को बेच दिया गया. जैविक मां को कोई पैसा भी नहीं दिया गया.
डिमांड पहले, बच्चा बाद में
पुलिस की जांच में सबसे अहम खुलासा यह हुआ कि यह गिरोह पहले बच्चे नहीं ढूंढता था, बल्कि पहले ग्राहक तलाशता था. जिन दंपतियों की संतान नहीं थी, या जिनके घर पहले से बेटियां थीं और वे बेटा चाहते थे, उनसे संपर्क किया जाता था. जब खरीदार तैयार हो जाता था, तब गिरोह अपने नेटवर्क के जरिए नवजात बच्चे की व्यवस्था करता था. यानी पूरा कारोबार डिमांड एंड सप्लाई के मॉडल पर चल रहा था.
बच्चों की कीमत कैसे तय होती थी?
पुलिस जांच के मुताबिक गिरोह गरीब परिवारों से नवजात बच्चों को डेढ़ से दो लाख रुपये में हासिल करता था. इसके बाद वही बच्चा 6 से 8 लाख रुपये में बेच दिया जाता था. कुछ मामलों में कीमत 9 लाख रुपये तक पहुंच जाती थी. कीमत इस बात पर निर्भर करती थी कि बच्चा कितना छोटा है, लड़का है या लड़की, खरीदार कितना संपन्न है और उसकी जरूरत कितनी ज्यादा है.
बेटे की चाह में बने आरोपी
पुलिस जांच में कई ऐसे परिवार सामने आए जो वर्षों से निसंतान थे, जबकि कुछ परिवारों के पास पहले से बेटी थी, लेकिन वे बेटा चाहते थे. रोहिणी निवासी गरिमा जैन और उसके परिवार पर आरोप है कि उन्होंने करीब 8 लाख रुपये देकर नवजात बच्चा लिया.
ऋषिकेश की केतकी गुप्ता ने कथित तौर पर लगभग 4 लाख रुपये देकर एक बच्चा खरीदा.
हरिद्वार के अमित प्रताप सिंह और उनकी पत्नी अभा सिंह पर लगभग 5 लाख रुपये देकर बेटा खरीदने का आरोप है.
ग्वालियर निवासी मुकेश पाल और रीमा पाल को दो बच्चों की खरीद के आरोप में गिरफ्तार किया गया.
पानीपत के सनी अरोड़ा, रितु अरोड़ा और सरिता के खिलाफ भी बच्चों की खरीद के आरोप में कार्रवाई की गई.
पुलिस ने साफ किया है कि बच्चों की खरीद-फरोख्त में शामिल खरीदारों को भी आरोपी बनाया गया है.
चार और बच्चों का रेस्क्यू, कुल 9 मासूम सुरक्षित
ताजा कार्रवाई में पुलिस ने चार और बच्चों को सुरक्षित बरामद किया. रोहिणी से 16 दिन का एक नवजात लड़का, ऋषिकेश से एक महीने का नवजात. मथुरा से लगभग एक साल एक महीने का बच्चा और हरिद्वार से करीब आठ महीने का बच्चा बरामद किया गया है.
इससे पहले भी पांच बच्चों को हरियाणा, पानीपत और ग्वालियर समेत विभिन्न स्थानों से मुक्त कराया जा चुका था. इनमें 27 दिन के जुड़वां बच्चों सहित कई नवजात शामिल थे. पुलिस के अनुसार रेस्क्यू किए गए चार बच्चे आदिवासी परिवारों से जुड़े हुए हैं.
अब तक कुल 9 बच्चों को सुरक्षित बचाया जा चुका है. सभी बच्चों को CWC की निगरानी में भेजा गया है. रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) के समक्ष पेश किया गया. समिति के निर्देश पर सभी बच्चों की देखभाल, चिकित्सा, सुरक्षा और पुनर्वास की व्यवस्था की गई है. पुलिस जैविक माता-पिता की पहचान, डीएनए मिलान और कानूनी प्रक्रिया भी पूरी कर रही है.
IVF और सरोगेसी का एंगल नहीं मिला
जांच के दौरान पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक आईवीएफ या सरोगेसी से जुड़े किसी संगठित रैकेट के सबूत नहीं मिले हैं. पुलिस के अनुसार आरोपी सीधे जैविक माता-पिता से बच्चे लेकर उन्हें जरूरतमंद दंपतियों को बेचते थे. यानी पूरा नेटवर्क केवल अवैध खरीद-फरोख्त पर आधारित था.
बैंक खातों से खुल रही है करोड़ों की मनी ट्रेल
पुलिस को जांच के दौरान कई बैंक खातों में लाखों रुपये के लेनदेन के सबूत मिले हैं. अब इन खातों की गहन जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे नेटवर्क से किसने कितना पैसा कमाया और रकम किन-किन लोगों तक पहुंची. मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, व्हाट्सऐप चैट, डिजिटल पेमेंट, अस्पताल रिकॉर्ड और जन्म प्रमाणपत्र से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं.
अभी और बढ़ सकती है गिरफ्तारियों की संख्या
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है. कई अन्य राज्यों में भी इस गिरोह के तार मिलने की संभावना है. पुलिस उन अस्पतालों, एजेंटों, ट्रांसपोर्टरों, दस्तावेज तैयार करने वालों और अन्य सहयोगियों की पहचान कर रही है जो इस नेटवर्क का हिस्सा रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. साथ ही कई और बच्चों को इस गिरोह के चंगुल से मुक्त कराए जाने की संभावना है.
दिल्ली पुलिस का मानना है कि यह हाल के सालों में सामने आए नवजात बच्चों की तस्करी के सबसे संगठित और बड़े मामलों में से एक है, जिसमें गरीबी, सामाजिक दबाव, बेटे की चाह और अवैध कमाई की लालच ने मिलकर मासूम बच्चों को खरीद-फरोख्त का सामान बना दिया था.