Category: Health

  • क्या बरसात में दही खाने से बढ़ सकता है इंफेक्शन का खतरा? जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट..​​​

    क्या बरसात में दही खाने से बढ़ सकता है इंफेक्शन का खतरा? जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट..​​​

    क्या बरसात में दही खाने से बढ़ सकता है इंफेक्शन का खतरा? जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट..​​​

    आयुर्वेद में ऋतु अनुसार खाने की सलाह दी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार चरकसंहिता में बताया गया है कि दही को तीन ऋतुओं में नहीं खाना चाहिए। शरद्ग्रीष्मवसन्तेषु प्रायशो दधि गर्हितम्। अर्थात् शरद् यानि सितंबर-अक्टूबर, ग्रीष्म और बसंत यानि मार्च, अप्रैल, मई, जून में भी दही खाना निषेध बताया गया है। दही की तासीर गरम होती है, पर जब आप इसका मठ्ठा बनाकर पीते है या इसमें पानी मिलाकर पीते है तो यह आपके पेट को अंदर से ठंडा रखता है। दही को पतला करके खाने से एसिडिटी नहीं होती और डिहाइड्रेशन दूर होता है। इसलिए इसका सेवन गर्मियों में लाभदायक माना जाता है। लेकिन मानसून के मौसम में दही क्यों हानिकारक बन जाता है। आयुर्वेद क्या कहता है आइये डॉक्टर शर्मा से जानते हैं। मानसून में दही खानी चाहिए या नहीं?

    क्या बारिश के मौसम में दही नहीं खानी चाहिए?

    आशा आयुर्वेदा की डॉक्टर चंचल शर्मा ने बताया कि मॉनसून के दौरान हमारी पाचन शक्ति कम हो जाती है। इसका मतलब है कि बहुत ज़्यादा ठंडा और भारी दही खाने से गैस और कफ बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। दही की प्रकृति अम्लीय होती है और सादा दही का सेवन आपके खून को भी दूषित कर सकता है। अगर आप रात में दही खाते है तो अभी रुक जाइए, क्योंकि रात में दही खाने से बलगम बन सकता है और गले में खराश हो सकती है।

    दही खाने के फायदे

    • दही हमारे पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है
    • दही खाने से इम्यून सिस्टम बेहतर होता है
    • दही से हड्डियों को भी स्वस्थ रख जाता है
    • वजन को नियंत्रित रखने में भी दही मदद करती है

    मानसून में दही सेवन के नुकसान

    अगर आप मानसून के मौसम में दही खा रहे हैं, तो इसे सीमित मात्रा में और सही तरीके से खाएं। आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार, गर्मी और मानसून के मौसम में दही में मीठा मिलाकर खाना चाहिए। इस तरह इसकी तासीर बहुत गर्म नहीं होगी और इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होगा। बरसातों में ज्यादा दही खाने से पेट से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे-

    दही की तासीर एसिडिक होना, त्वचा से जुड़ी कुछ समस्याएं होने का खतरा, पाचन क्रिया की कमजोरी।

    मानसून में दही खाने का सही तरीका

    आयुर्वेद में दही को देर से पचने वाला आहार माना जाता है, लेकिन इसे दूसरी चीजों के साथ मिलाकर खाएं तो नुकसान कम होगा। दही में थोड़ा सा भुना जीरा पाउडर और काला नमक डालकर खाएं। इससे पाचन बेहतर होता है। घी, चीनी या आंवला जैसी चीजों के साथ खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। फ्रिज से निकालते ही न खाएं। इसे सामान्य तापमान पर आने के बाद खाएं। बारिश के मौसम में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और पाचन शक्ति कम हो जाती है। इससे दही देर से पचती है और इसका सेवन करने से अपच की समस्या हो सकती है। लोगों को बरसात में हल्का खाना खाना चाहिए, जो आसानी से पच जाए। जो लोग अपच की समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें दही से दूरी बना लेनी चाहिए।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • डिटॉक्स से लेकर हाइड्रेशन तक, जानिए खाली पेट खीरा-पुदीना जूस पीने के फायदे..​​​

    डिटॉक्स से लेकर हाइड्रेशन तक, जानिए खाली पेट खीरा-पुदीना जूस पीने के फायदे..​​​

    डिटॉक्स से लेकर हाइड्रेशन तक, जानिए खाली पेट खीरा-पुदीना जूस पीने के फायदे..​​​

    सुबह की शुरुआत अगर एक फ्रेश और हेल्दी ड्रिंक से हो, तो पूरा दिन एनर्जेटिक बना रहता है। आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी और असंतुलित खानपान के बीच खुद को डिटॉक्स करना बेहद ज़रूरी है। ऐसे में सुबह खाली पेट खीरा और पुदीने का जूस पीना आपके शरीर के लिए वरदान साबित हो सकता है। यह न सिर्फ आपको ताजगी देता है, बल्कि शरीर को अंदर से साफ कर कई बीमारियों से दूर रखता है। ऐसे में यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि सुबह खाली पेट खीरे और पुदीना का जूस पीने से क्या होता है।

    1. शरीर को करता है डिटॉक्स

    रात भर में हमारे शरीर में कई तरह के हानिकारक टॉक्सिन्स जमा हो जाते हैं। खीरे में भरपूर मात्रा में पानी और फाइबर होता है, जबकि पुदीना अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है। जब आप खाली पेट इसका सेवन करते हैं, तो यह लिवर और किडनी को साफ करने में मदद करता है और शरीर के सारे गंदे टॉक्सिन्स को बाहर निकाल फेंकता है।

    2. वजन घटाने में मददगार
    अगर आप बढ़ते वजन या पेट की चर्बी से परेशान हैं, तो यह जूस आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। खीरे और पुदीने के जूस में कैलोरी की मात्रा बेहद कम होती है और पानी की मात्रा बहुत अधिक। इसे सुबह पीने से आपका मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है, जिससे फैट बर्न होने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। साथ ही, यह लंबे समय तक आपका पेट भरा रखता है, जिससे आप ओवरईटिंग से बच जाते हैं।

    3. पाचन तंत्र के लिए
    गैस, एसिडिटी, कब्ज और ब्लोटिंग जैसी पेट की समस्याओं के लिए यह जूस रामबाण साबित होता है। पुदीने में मौजूद ‘मेंथॉल’ पाचक एंजाइम्स को सक्रिय करता है, जिससे खाना आसानी से पचता है। वहीं, खीरे की ठंडी तासीर पेट की जलन और एसिडिटी को तुरंत शांत करती है। सुबह खाली पेट इसे पीने से आपका पेट पूरी तरह साफ रहता है।

    4. नेचुरल ग्लोइंग स्किन
    कहा जाता है कि आपकी स्किन वैसी ही दिखती है, जैसा आपका पेट होता है। जब यह जूस आपके खून को साफ करता है और शरीर को हाइड्रेट रखता है, तो इसका सीधा असर आपकी त्वचा पर दिखता है। खीरे में मौजूद सिलिका और पुदीने के एंटी-बैक्टीरियल गुण मुंहासों, दाग-धब्बों को कम करते हैं और त्वचा को अंदर से चमकदार और बेदाग बनाते हैं।

    5. डिहाइड्रेशन से बचाए
    गर्मियों के मौसम में शरीर में पानी की कमी होना आम बात है। खीरे में लगभग 95% पानी होता है। सुबह खाली पेट इस जूस को पीने से शरीर का इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बना रहता है, जिससे आप दिनभर हाइड्रेटेड और फ्रेश महसूस करते हैं। यह शरीर के तापमान को भी नियंत्रित रखता है।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • मानसून में क्या नहीं खाना चाहिए, सबसे ज्यादा इंफेक्शन का रहता है खतरा..​​​

    मानसून में क्या नहीं खाना चाहिए, सबसे ज्यादा इंफेक्शन का रहता है खतरा..​​​

    मानसून में क्या नहीं खाना चाहिए, सबसे ज्यादा इंफेक्शन का रहता है खतरा..​​​

    गीली मिट्टी की खुशबू, ठंडी हवाएं और बारिश की बूंदों की आवाज, ये मानसून के मौसम को सुहावना बना देती हैं। ये मौसम भीषण गर्मी से राहत दिलाता है और हवा में ठंडक लेकर आता है। बारिश के दिनों में लोग तला भुना बहुत खाने लगते हैं। चाय के साथ पकौड़े, समोसे-कचौड़ी खाना लोगों को खूब पसंद होता है। लेकिन आप ये नहीं जानते कि ये मौसम बीमारियों और इंफेक्शन का भी है। इस मौसम में बाहर का खाना सबसे जल्दी खराब होता है। जिससे बीमार पड़ने में देर नहीं लगती। इसलिए बाहर की ये कुछ चीजें आपकी सेहत के लिए खतरा हो सकती हैं।

    बारिश के मौसम में अगर गरम-गरम पकौड़े, चाय और भुने हुए भुट्टे मिल जाएं, तो दिन बन जाता है। लेकिन आशा आयुर्वेद क्लीनिक की डॉक्टर शर्मा ने बताया कि यही मौसम अपने साथ कुछ ऐसे बदलाव लाता है जो आपके शरीर पर प्रभाव डालते हैं। पहले उन बदलावों को जान लेना जरूरी है। मानसून का मौसम वातावरण में नमी और ठंडक लाता है। आयुर्वेद के अनुसार यही मौसम आपके शरीर में वात और पित्त के असंतुलन का कारण बनता है।

    वात असंतुलन- नमी और ठंडी हवा के कारण शरीर में वात बढ़ जाता है, जिससे जोड़ों में दर्द, अकड़न, बदन दर्द और थकान होती है।

    पित्त असंतुलन- गर्मी के बाद बारिश का मौसम जमीन से भाप छोड़ता है जो प्रकृति में एसिडिक होता है। इससे शरीर में पित्त बढ़ता है। पेट में जलन और एसिडिटी की परेशानी होती है, जिसका सीधा असर आपकी पाचन क्रिया पर पड़ता है। इससे खाना पचाने में भी समय लगता है।

    कफ असंतुलन- अगर आपको हल्की सी सर्दी लगने पर सर्दी, खांसी और कफ की समस्या होती है, तो इसका कारण आपका बढ़ा हुआ कफ दोष है।

    मानसून में क्या नहीं खाना चाहिए?

    इस मौसम में आपको विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि आप बारिश का मज़ा उठा सके और बीमार न पड़े। आप सिर्फ अपने खान पान को सुधार कर सेहतमंद रह सकते है। इसके लिए कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखना होगा।

    तला भुना बाहर का खाना छोड़ दें- आयुर्वेद में इसे अभक्ष्य कहते हैं। इसमें तला भुना खाना शामिल होती है। बाहर सड़क पर खुले में बिकने वाले खाने से इस मौसम में संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इससे एसिडिटी, गैस और सीने में जलन भी हो सकती है। इसलिए बरसात में चाट पकोड़े, गोल गप्पे, भुने हुए भुट्टे, शकरकंद बाहर से खरीदकर न खाएं।

    नॉन वेज खाना छोड़ दें- बरसात के मौसम में मांसाहारी भोजन से परहेज करें क्योंकि उच्च आर्द्रता बैक्टीरिया को पनपने में मदद करती है। इस मौसम में पाचन क्रिया भी धीमी हो जाती है। अधिक मांस या खराब सी फूड खाने से पेट में गंभीर संक्रमण और फूड इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

    ठंडे पेय और खाना छोड़ दें- इस मौसम में आपको ठंडे भोजन से दूर रहना चाहिए। पाचन शक्ति कमजोर हो सकती है, जिससे खाना ठीक से पचाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए ठंडा पेय या ठंडा भोजन खाने से बचें। हर्बल टी, अदरक का पानी या सूप जैसी गर्म चीजें पीएं। इससे पाचन बेहतर होगा।

    मसालेदार खाना न खाएं- मसालेदार खाना पेट की अंदरूनी परत में जलन पैदा कर सकता है और पाचन से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है, खासकर मानसून के मौसम में जब पाचन क्रिया स्वाभाविक रूप से धीमी हो जाती है। इसके बजाय, अपने पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए हल्का और आसानी से पचने वाला खाना चुनें, जिसमें तेल और मसाले कम हों।

    पत्तेदार सब्जियों और कटे हुए सलाद से बचें- हरी सब्जियों की नमी में कीड़े और बैक्टीरिया चिपके होते हैं। इसे खाने से पेट खराब हो सकता है। बाहर बिकने वाले कटे हुए सलाद या जूस में मक्खियां बैठ सकती हैं। हमेशा घर में ताजा कटा सलाद ही खाएं।

    मानसून के मौसम में अपना ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इस मौसम में वातावरण में पनपने वाले कीटाणुओं की संख्या बढ़ जाती है ऐसे में आप बाहर के खाने से बचें, घर का शुद्ध सात्विक भोजन ही खाएं। मानसून में ताजा और हल्का गर्म खाना खाएं। इसके अलावा सौंफ और जीरे का पानी पीएं ताकि आपका पेट साफ हो सके और इंफेक्शन से बचें।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • ज्यादा आम खाना पड़ सकता है भारी! जानिए एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोज कितने आम पर्याप्त..​​​

    ज्यादा आम खाना पड़ सकता है भारी! जानिए एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोज कितने आम पर्याप्त..​​​

    ज्यादा आम खाना पड़ सकता है भारी! जानिए एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोज कितने आम पर्याप्त..​​​

    आम को यूं ही फलों का राजा नहीं कहा जाता, भले ही कुछ महीनों के लिए आम बाजार में आता हो, लेकिन इसकी डिमांड सबसे ज्यादा रहती है। लोग सीजन में इतने आम खा लेते हैं जितने दूसरे फल पूरे साल में खाते हैं। आम बहुत ही रसीली, मीठा और स्वादिष्ट फल है। ये जितना स्वादिष्ट है उतना ही गुणवान भी है। अगर आप सही मात्रा में आम खाते हैं तो इससे शरीर को कई फायदे मिलते हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा आम खाना नुकसान भी पहुंचा सकता है। जी हां जो लोग बिना सोचे समझे सीजन पर एक दिन में 10-12 आम तक खा जाते हैं उन्हें आम के फायदे और नुकसान जरूर पता होने चाहिए। आइये जानते हैं एक आदमी को 1 दिन में कितने आम खाने चाहिए और ज्यादा आम खाने से क्या नुकसान होता है?

    1 दिन में कितने आम खाने चाहिए?

    डाइटिशियन सिंह के मुताबिक एक स्वस्थ आदमी 1 दिन में 1-2 आम आसानी से खा सकता है। आप सही मात्रा में आम खाएंगे तो ये फायदेमंद साबित होगा, लेकिन किसी भी फल की अति आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। डायबिटीज के मरीज दिनभर में 1-2 पीस आम खा सकते हैं। अगर शुगर कंंट्रोल रहता है तो पूरे दिन में खाने के बाद 100 ग्राम आम तक भी खा सकते हैं।

    1 आम में कितनी कैलोरी होती हैं?

    फिटनेस कोच के अनुसार, आम खाने में समस्या नहीं है, बल्कि आम ज्यादा मात्रा में खाने से परेशानी हो सकती है। अगर आप करीब 100 ग्राम आम खाते हैं तो इससे शरीर को 60 कैलोरी और 14 ग्राम चीनी मिलती है। वहीं 100 ग्राम केला में 89 कैलोरी और 12 ग्राम चीनी होती है। इतने ही अंगूर में करीब 69 कैलोरी और 16 ग्राम चीनी होती है।

    ज्यादा आम खान से क्या नुकसान होता है?

    अगर आप रोजाना जरूरत से ज्यादा आम खाते हैं तो इससे पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा ज्यादा आम खाने से आपका वजन बढ़ सकता है। आम खाने से मोटापा तेजी से बढ़ता है। चूंकि आम की तासीर गर्म होती है और इसकी मिठास भी ज्यादा होती है, इसलिए ज्यादा आम खाने से ज्यादा त्वचा पर दाने निकलने लगते हैं। रैश, मुंहासे, खुजली जैसी त्वचा से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • डायबिटीज कंट्रोल करनी है? डॉक्टर ने बताया क्यों 10 मिनट की वॉक है 1 घंटे की जिम से ज्यादा असरदार​​​

    डायबिटीज कंट्रोल करनी है? डॉक्टर ने बताया क्यों 10 मिनट की वॉक है 1 घंटे की जिम से ज्यादा असरदार​​​

    डायबिटीज कंट्रोल करनी है? डॉक्टर ने बताया क्यों 10 मिनट की वॉक है 1 घंटे की जिम से ज्यादा असरदार​​​

    अगर आप डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए जिम में घंटों पसीना बहाते हैं तो जान लें सही टाइम पर की गई 10 मिनट की वॉक भी उससे कहीं ज्यादा असरदार हो सकती है। जी हां ये सुनकर भले ही आपको विश्वास न हो, लेकिन साइंस ऐसा कहती है। खाना खाते ही शरीर में ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है। खासतौर से हाई कार्ब्स वाली डाइट शुगर स्पाइक का कारण बनती है। इसलिए सबसे ज़रूरी चीज़ है खाना खाने की टाइमिंग और उसके बाद की गई एक्टिविटी।

    इंस्टाग्राम पर केयरयाया के डॉक्टर नील के शाह ने एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें वो बता रहे हैं कि कार्ब्स लेने के बाद आपका ब्लड शुगर बढ़ जाता है। आपका शरीर उस शुगर को ब्लडस्ट्रीम से हटाने के लिए इंसुलिन रिलीज़ करता है। अगर लंबे समय तक खाने के बाद शुगर लेवल स्पाइक करे तो इसका असर आपकी सेहत और मेटाबॉलिक हेल्थ पर पड़ता है। लेकिन अच्छी बात ये है कि अगर आप खाने का बाद वॉक करते हैं तो आपकी मसल्स को फ्यूल की जरूरत होती है। इस स्थिति में मसल्स शुगर से एनर्जी खींचती हैं और इसके लिए ज्यादा इंसुलिन की जरूरत भी नहीं होती है।

    रात के खाने के बाद 10 मिनट की वॉक है फायदेमंद

    रात के खाने के ठीक बाद जब आपका ब्लड शुगर बढ़ रहा हो, तब हल्की वॉक एक रिलीज़ वाल्व की तरह काम करती है। यह शुगर के उछाल को होने से पहले ही कम कर देती है। यह रात के खाने के बाद एक अच्छी आदत है जिसे सभी को अपनाना चाहिए। इसीलिए यहां इंटेंसिटी से ज़्यादा टाइमिंग मायने रखती है। सुबह 7 बजे जिम में हार्ड वर्कआउट कई वजहों से बहुत अच्छा है, लेकिन यह रात 8 बजे आपके खाने से होने वाले ब्लड शुगर के उछाल के लिए कुछ नहीं करता। वॉक इसलिए काम करती है क्योंकि आप इसे खाने के ठीक बाद करते हैं, जब शुगर आपके खून में मिल रही होती है।

    10 मिनट की वॉक से कम होता है शुगर स्पाइक

    स्टडीज़ में यह भी पाया गया है कि खाने के बाद 10 से 15 मिनट की हल्की वॉक खाने के बाद होने वाले शुगर के उछाल को काफी कम कर देती है। इसका मतलब यह नहीं है कि जिम न जाएं। जिम आपकी ताकत, दिल की सेहत और बहुत कुछ बेहतर बनाता है। लेकिन यह अलग काम के लिए एक अलग टूल है। रोजाना ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव को मैनेज करने के लिए, खाने के बाद थोड़ी देर टहलना सबसे आसान और असरदार चीजों में से एक है।

    खाना खत्म करने के 30 मिनट के अंदर सिर्फ़ 10 से 15 मिनट टहलने का टारगेट रखें। आपको आराम से टहलना है, बस इतना ही आपके लिए काफी है। बहुत ज़्यादा तेज वॉक की जरूरत नहीं है। रात के खाने के बाद ऐसा करना सबसे ज़्यादा असरदार होता है, लेकिन यह किसी भी खाने के बाद काम करता है।

    यानि अब से आप खाना खाते ही बैठ जाते हैं या लेट जाते हैं तो ऐसा बिल्कुल भी न करें। अगली बार खाना खाने के बाद बस बैठे न रहें, बल्कि थोड़ी देर टहलें। इससे आप खुद को काफी एनर्जेटिक महसूस करेंगे।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है तो सावधान! इन सब्जियों का ज्यादा सेवन कर सकता है नुकसान..​​​

    ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है तो सावधान! इन सब्जियों का ज्यादा सेवन कर सकता है नुकसान..​​​

    ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है तो सावधान! इन सब्जियों का ज्यादा सेवन कर सकता है नुकसान..​​​

    डायबिटीज के मरीजों को अपनी डाइट का बहुत ज़्यादा ध्यान रखना पड़ता है। खानपान को लेकर ज़रा सी लापरवाही ब्लड शुगर बहुत तेजी से बढ़ाती है। डायबिटीज के ज़्यादातर मरीजों लगता है कि उन्हें सिर्फ मीठे से परहेज करना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं है, ऐसी कई सब्जियां हैं जो हैं तो हेल्दी लेकिन उनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स ज़्यादा होता है जों डायबिटीज के मरीजों के लिए किसी ज़हर से कम नहीं है। डॉक्टर ने अपने यू ट्यूब पेज पर वडियो शेयर कर के बताया है कि डायबिटीज में किन सब्जियों को नहीं खाना चाहिए?

    डायबिटीज इन सब्जियों का नहीं करना चाहिए सेवन

    • आलू
      : डायबिटीज के मरीजों को आलू का सेवन नहीं करना चाहिए। एक पकाए हुए आलू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग 111 तक हो सकता है जो चीनी से भी ज़्यादा है। वहीं, उबाले हुए आलू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 78 से लेकर 89 तक होता है। उबले हुए आलू का सेवन करने से शुगर उतना ही बढ़ता है जितना एक कोल्ड ड्रिंक पीने से बढ़ता है।

    • कॉर्न
      : बारिश के मौसम में लोग भुट्टा खूब खाते हैं लेकिन यही मक्का डायबिटीज के मरीजों के लिए ज़हर समान है। आधी कटोरी मक्का में 21 ग्राम कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं और सिर्फ 2 ग्राम फाइबर होते हैं। स्वीट कॉर्न का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 60 के ऊपर होता है जो हाई रेंज में आता है। आपका ब्लड शुगर कंट्रोल में रहे इसलिए कॉर्न को अपनी डाइट से हमेशा दूर रखें।

    • वेजिटेबल जूस
      : डायबिटीज मरीजों के लिए सिर्फ फ्रूट जूस ही हानिकारक नहीं है बल्कि गाजर, बीटरूट और टमाटर जूस जैसे मिक्स जूस भी नुकसानदायक माने जाते हैं। दरअसल, जब आप सब्जी का जूस निकालते हैं तो उसका फायबर चला जाता है और उसमें सिर्फ शुगर रह जाता है। हालांकि, आपके लिए करेले का जूस फायदेमंद है

    • शकरकंदी
      : शकरकंदी का सेवन भी डायबिटीज के मरीजों को नहीं करना चाहिए। शकरकंदी को अगर आप बेक या रोस्ट कर खा रहे हैं तो इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 90 तक जा सकता है। हालांकि, अगर आप इसे उबालकर खाते हैं तो इसका जीआई 40 तक रहता है। तो आप इसका सेवन उबालकर कर सकते हैं लेकिन बहुत ज़्यादा नहीं।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • गट हेल्थ खराब होने पर शरीर देता है कई संकेत, डॉक्टर से जानिए किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए..​​​

    गट हेल्थ खराब होने पर शरीर देता है कई संकेत, डॉक्टर से जानिए किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए..​​​

    गट हेल्थ खराब होने पर शरीर देता है कई संकेत, डॉक्टर से जानिए किन लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए..​​​

    अगर आपको लगता है कि खराब गट हेल्थ का असर सिर्फ पेट तक सीमित रहता है, तो ऐसा नहीं है। MD (Anesthesiology – Pain Medicine) डॉ के अनुसार, गट हेल्थ बिगड़ने पर आपके शरीर में कई संकेत दिखाई दे सकते हैं। उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए बताया है कि ख़राब गट हेल्थ होने पर शरीर में कौन से लक्षण नज़र आ सकते हैं

    खराब गट हेल्थ होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण

    • बदबूदार मल
      : सड़े हुए अंडे जैसी बदबू का मतलब हो सकता है कि आपके पेट के बैक्टीरिया का बैलेंस बिगड़ गया है। कुछ बैक्टीरिया सल्फर गैस बनाते हैं जिनकी बदबू खराब होती है और ये क्रोहन (Crohn’s) या पोषक तत्वों के ठीक से न पचने जैसी पेट की समस्याओं से जुड़े होते हैं।

    • खाने के बाद पेट फूलना
      : अगर खाना खाने के बाद आपका पेट फूल जा रहा है तो यह भी एक गंभीर लक्षण है। हालांकि, यह हमेशा इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपने कितना खाया है। यह कब्ज या पेट के खाली होने में दिक्कत के कारण भी हो सकता है।

    • कम एनर्जी:
      लीकी गट की वजह से एंडोटॉक्सिन ब्लड सर्कुलेशन में पहुंच जाते हैं, जिससे शरीर में इन्फ्लेमेशन होती है और एनर्जी मेटाबॉलिज़्म पर बुरा असर पड़ता है। गट में असंतुलन से विटामिन B12, आयरन, फोलेट और मैग्नीशियम के एब्ज़ॉर्प्शन में भी रुकावट आ सकती है, जो एनर्जी के लिए बहुत ज़रूरी हैं।

    • पिंपल्स निकलना:
      अगर आपके चेहरे पर बार बार एक्ने की समस्या हो रही हो तो इसका कनेक्शन आपकी गट हेल्थ से भी हो सकता है। जब पेट के माइक्रोबायोम में असंतुलन होता है तो यह शरीर में पुरानी सूजन को बढ़ावा देता है, जिससे मुँहासे (acne) बढ़ सकते हैं। मुँहासे वाले मरीज़ों में अक्सर लैक्नोस्पिरेसी की कमी और बैक्टेरॉइड्स की अधिकता देखी जाती है, जो पेट से जुड़ी समस्या की ओर इशारा करती है।

    • फूड इनटॉलरेंस
      : अगर कुछ खास तरह के खाने, जैसे डेयरी या ग्लूटेन से आपको अचानक परेशानी होने लगती है, तो हो सकता है कि आपका पेट उन पर ठीक से प्रतिक्रिया न कर रहा हो, क्योंकि उन्हें पचाने में मदद करने वाले बैक्टीरिया या तो गायब हैं या सही ढंग से काम नहीं कर रहे हैं।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • पेट की जलन और गैस से राहत दिलाने में कारगर है इलायची, जानें सेवन का सही तरीका

    पेट की जलन और गैस से राहत दिलाने में कारगर है इलायची, जानें सेवन का सही तरीका

    पेट की जलन और गैस से राहत दिलाने में कारगर है इलायची, जानें सेवन का सही तरीका

    सुबह सुबह पेट की जलन और गैस आज के समय में एक बेहद आम समस्या बन चके हैं। खराब खानपान, देर तक बैठना और तनाव इसके मुख्य कारण हैं। इस तकलीफ से राहत पाने के लिए लोग अक्सर दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन शायद आपको मालूम नहीं है कि हमारी रसोई में कुछ ऐसे मसाले हैं जो गैस औप पेट की जलन से आसानी से छुटकारा दिला सकते हैं। हम जिस मसाले की बात कर रहे हैं उसका नाम इलायची है। हरी इलायची सिर्फ स्वाद और खुशबू बढ़ाने के काम नहीं आती, बल्कि आयुर्वेद में इसे पेट की कई समस्याओं की अचूक दवा माना गया है। ऐसे में यहां हम जानने की कोशिश करेंगे कि पेट से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा दिलाने में इलायची किस तरह कारगर है।

    इलायची क्यों है पेट के लिए फायदेमंद?

    इलायची की तासीर ठंडी होती है, जो पेट में बन रहे एसिड को शांत करने में मदद करती है। इसमें मौजूद एसेंशियल ऑयल्स पाचन तंत्र की को आराम पहुंचाते हैं, जिससे पेट की ऐंठन कम होती है। इसके अलावा, इलायची पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करती है, जिससे खाना जल्दी पचता है और गैस व ब्लोटिंग की समस्या नहीं होती।

    इलायची इस्तेमाल करने के 4 सबसे सही तरीके

    1. खाना खाने के बाद चबाएं
    यह सबसे आसान और तुरंत असर दिखाने वाला तरीका है। भारी या मसालेदार खाना खाने के बाद 1 से 2 हरी इलायची को मुंह में रखकर धीरे-धीरे चबाएं। इसका रस जब आपके पेट में जाएगा, तो एसिडिटी की वजह से होने वाली सीने और पेट की जलन में तुरंत आराम मिलेगा। यह माउथ फ्रेशनर का काम भी करती है।

    2. इलायची का गुनगुना पानी
    गैस और भारीपन से छुटकारा पाने के लिए इलायची का पानी बेहद फायदेमंद है। इसके लिए एक गिलास पानी में 2 से 3 कुचली हुई इलायची डालकर अच्छी तरह उबाल लें। जब पानी आधा रह जाए, तो इसे छान लें। इस पानी को गुनगुना होने पर चाय की तरह घूंट-घूंट करके पिएं। सुबह खाली पेट इसका सेवन करने से पूरे दिन पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है।

    3. इलायची और सौंफ का मिश्रण
    सौंफ और इलायची दोनों की ही तासीर ठंडी होती है, इसलिए इनका कॉम्बिनेशन गैस और एसिडिटी पर अच्छा असर करता है। आप भुनी हुई सौंफ और इलायची के दानों को मिलाकर एक डिब्बे में रख सकते हैं। खाना खाने के बाद आधा चम्मच इस मिश्रण का सेवन करने से अपच की समस्या दूर हो जाती है।

    4. इलायची की हर्बल चाय
    अगर आपको दूध वाली चाय पीने से गैस बनती है, तो उसकी जगह इलायची की हर्बल चाय पिएं। इसके लिए पानी में इलायची, थोड़ा सा अदरक और पुदीने की पत्तियां उबालकर काली चाय की तरह पिएं। यह पेट को ठंडक देगी और गैस को तुरंत बाहर निकालने में मदद करेगी। इलायची का सेवन सीमित मात्रा में ही करें। एक दिन में 2 से 3 इलायची से ज्यादा का सेवन करने से बचें, क्योंकि किसी भी चीज की अति नुकसानदेह हो सकती है। अगर आपको लंबे समय से क्रॉनिक एसिडिटी या पेट में अल्सर की शिकायत है, तो घरेलू नुस्खों के साथ-साथ डॉक्टर से संपर्क जरूर लें।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • बारिश के मौसम में स्वस्थ रहना है तो अपनाएं आयुर्वेदिक डाइट, जानें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं..

    बारिश के मौसम में स्वस्थ रहना है तो अपनाएं आयुर्वेदिक डाइट, जानें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं..

    बारिश के मौसम में स्वस्थ रहना है तो अपनाएं आयुर्वेदिक डाइट, जानें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं..

    मानसून में बारिश की वजह से आस-पास गंदगी जमा हो जाती है। जिससे मच्छर, मक्खियां और दूसरे कीड़े-मकोड़े बहुत बढ़ जाते हैं और संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। इस मौसम में होने वाली उमस से शरीर में वात दोष का असंतुलन होता है और पाचन शक्ति भी कमजोर हो जाती है। इसके अलावा वात के बिगड़ने और बारिश की वजह से पाचन क्रिया पर बुरा असर पड़ता है। बीच-बीच में होने वाली ड्राईनेस की वजह से शरीर में पित्त दोष भी बढ़ने लगता है।

    मानसून में होने वाले संक्रमणों के कारण मलेरिया, फाइलेरिया बुखार, सर्दी-जुकाम, दस्त, पेचिश, हैजा, कोलाइटिस, गठिया, जोड़ों का दर्द, हाई ब्लड प्रेशर, फोड़े-फुंसी, दाद और खुजली जैसी कई बीमारियां हो सकती हैं। मानसून का मौसम वातावरण में नमी और ठंडक लाता है, आयुर्वेद के अनुसार यही मौसम आपके शरीर में वात और पित्त का असंतुलन का कारण बनता है। जिसमें शामिल है।

    मानसून में आयुर्वेद में क्या खाना चाहिए?

    आशा आयुर्वेद की डॉक्टर शर्मा के मुताबिक मानसून में हल्का, आसानी से पचने वाला, ताज़ा और गर्म खाना खाना चाहिए। इस तरह के खाने से पाचन शक्ति बढ़ती है। ऐसे खाद्य पदार्थ खाने चाहिए जो वात को संतुलित रखें। पुराने अनाज जैसे गेहूं, जौ, शाली और साठी चावल और मक्का खाएं। इसके अलावा सरसों, खीरा, खिचड़ी, दही, लस्सी और हरी मूंग दाल खाएं। इस मौसम में मूंग और अरहर दाल का सेवन करें।

    मानसून में कौन से फल सब्जियां खाएं

    वहीं सब्जियों में आपको लौकी, भिंडी, तोरई, टमाटर और पुदीने की चटनी के साथ सब्जियों का सूप पीना चाहिए। फलों में सेब, केला, अनार, नाशपाती, पके हुए जामुन और पके हुए देसी आम खाने चाहिए। इस समय आम और दूध का सेवन बहुत फायदेमंद माना जाता है। जब इसे सही मात्रा में भोजन के विकल्प के तौर पर लिया जाता है, तो यह शारीरिक शक्ति और शरीर-यष्टि को बेहतर बनाने में मदद करता है।

    मानसून में पानी पीते वक्त बरतें सावधानी

    इस मौसम में पानी दूषित हो जाता है। इसलिए पानी का ध्यान रखें। पानी को किसी भी तरह की गंदगी या प्रदूषण से सुरक्षित रखने का ध्यान रखें। दूषित पानी से हैजा और फ़ूड पॉइज़निंग जैसी कई बीमारियों का कारण हो सकता है। बेहतर होगा कि इस मौसम में घर का उबला हुआ पानी पीएं या वॉटर फिल्टर का इस्तेमाल करें।

    आयुर्वेद के अनुसार 2 महीने तक जब तक बारिश की का पीक सीजन होता है आपको इन बातों का ख्याल रखना चाहिए। इसके साथ ही आपको ऐसी चीजें खानी चाहिए जिससे इम्यून सिस्टम मजबूत होती है और शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इस तरह आप खुद को और अपने परिवार को बीमार होने से बचा सकते हैं।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • क्या रोटी-चावल का कॉम्बिनेशन डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकता है? एक्सपर्ट की राय जानें..

    क्या रोटी-चावल का कॉम्बिनेशन डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकता है? एक्सपर्ट की राय जानें..

    क्या रोटी-चावल का कॉम्बिनेशन डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकता है? एक्सपर्ट की राय जानें..

    Diabetes Management Tips: भारत में डायबिटीज मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और इसके साथ ही सोशल मीडिया पर खान-पान को लेकर कई तरह के भ्रम भी फैल रहे हैं। डायबिटीज फ्रेंडली डाइट को लेकर अक्सर मरीजों के मन में यह सवाल उठता है कि वो दोपहर या रात के भोजन में क्या खाएं? रोटी खाएं या चावल, किसे खाने से ब्लड शुगर का स्तर बढ़ता है। डाइटिशियन श्वेता जे पंचाल के अनुसार, डेली  और खानपान में किए गए साधारण बदलाव करके लंबे समय तक सकारात्मक असर डाल सकते हैं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि यदि परिवार में किसी को डायबिटीज है, तो लाइफस्टाइल और डाइट में किए गए कुछ आसान बदलाव सेहत पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। घर में किसी सदस्य को डायबिटीज है तो रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने या बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाती हैं।

    खाने के समय में बदलाव से लेकर खाद्य पदार्थों के कॉम्बिनेशन पर ध्यान देने तक एक्सपर्ट ने शुगर कंट्रोल करने के लाइफस्टाइल और डाइट से जुड़े बदलाव बताए है,जिन्हें आसानी से अपनाया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया फलों पर दालचीनी छिड़कें,  यह शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करती है। रात का खाना 7 बजे तक खत्म कर लें, देर से खाना खाने से ब्लड शुगर बढ़ सकता है। खाने के बाद 10 मिनट टहलें, भले ही घर पर ही क्यों न हो। चावल और रोटी को एक साथ न खाएं, इससे शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। हर भोजन की शुरुआत फाइबर से करें, यह शुगर के अवशोषण को धीमा करता है। आइए एक्सपर्ट की इस सलाह की तसदीक डॉक्टर से करते हैं। क्या सचमुच चावल और रोटी का सेवन सेहत के लिए खतरा है?

    चावल और रोटी साथ खाने से ब्लड शुगर पर क्या असर पड़ता है?

    कंसल्टेंट डाइटिशियन और डायबिटीज एजुकेटर कनिका मल्होत्रा ने बताया कि यदि ब्लड शुगर को एक बाल्टी माना जाए, तो एक ही भोजन में चावल और रोटी दोनों खाना ऐसा है जैसे एक साथ दो नलों से पानी बाल्टी में डाला जा रहा हो। दोनों ही कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होते हैं और साथ खाने पर ब्लड शुगर तेजी से बढ़ा सकते हैं। उन्होंने सलाह दी कि एक समय में केवल एक कार्ब स्रोत चुनें और प्लेट में अधिक मात्रा में सब्जियां या दाल शामिल करें। इससे ब्लड ग्लूकोज को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

    क्या छोटे बदलाव बड़े डाइट प्लान जितने प्रभावी हो सकते हैं?

    कनिका मल्होत्रा के अनुसार, भोजन के बाद टहलना और दालचीनी का सीमित उपयोग जैसी छोटी आदतों को असरदार बताया गया है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि इन आदतों की मदद से भोजन के बाद ब्लड शुगर में आने वाली तेजी को 15 से 30 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। हालांकि, यदि व्यक्ति की मूल खानपान की आदतें असंतुलित बनी रहती हैं तो इन छोटे बदलावों का असर एक सीमा तक ही रहता है। फिर भी नियमित रूप से अपनाए गए छोटे सुधार लंबे समय में ब्लड शुगर कंट्रोल में उतने ही प्रभावी साबित हो सकते हैं जितने बड़े डाइटरी बदलाव।

    डायबिटीज में भोजन का समय कितना महत्वपूर्ण है?

    कनिका मल्होत्रा बताती हैं कि जल्दी डिनर करने का फायदा इसलिए होता है क्योंकि इंसुलिन की कार्यक्षमता और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म हमारे शरीर की जैविक घड़ी (सर्कैडियन रिद्म) से जुड़े होते हैं। देर रात भोजन करने पर रात के समय ब्लड शुगर अधिक बढ़ सकता है और अगली सुबह फास्टिंग शुगर भी ज्यादा रह सकता है। उनके अनुसार, कई लोगों में रात 9 बजे की बजाय शाम 7 बजे डिनर करने से फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज 10 से 15 mg/dL तक कम हो सकता है।

    हर व्यक्ति के लिए भोजन का समय अलग हो सकता है

    विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति का मेटाबॉलिज्म और दिनचर्या अलग होती है। उदाहरण के लिए, नाइट शिफ्ट में काम करने वाले या देर से उठने वाले लोगों को अपने सोने-जागने के समय के अनुसार भोजन का समय निर्धारित करना पड़ सकता है। केवल घड़ी का समय ही नहीं, बल्कि भोजन का शरीर की डेली रूटीन के साथ तालमेल भी महत्वपूर्ण होता है। कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग (CGM) से भी यह देखा गया है कि भोजन का समय बदलने से ब्लड शुगर पर असर पड़ता है, भले ही भोजन एक जैसा ही क्यों न हो।