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  • बारिश में बेजान हो गया है चेहरा? अपनाएं ये आदतें… त्वचा रहेगी हेल्दी और ग्लोइंग!

    बारिश में बेजान हो गया है चेहरा? अपनाएं ये आदतें… त्वचा रहेगी हेल्दी और ग्लोइंग!

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    देश के कई राज्यों में इस समय मानसून का असर देखने को मिल रहा है. बारिश जहां गर्मी से राहत देती है, वहीं बढ़ी हुई नमी त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं की वजह भी बन सकती है. इस मौसम में पसीना, तेल और धूल-मिट्टी त्वचा पर जल्दी जमा हो जाती है. इससे ऑयली स्किन, पिंपल्स, रैशेज, खुजली और फंगल इंफेक्शन जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं. ऐसे में सिर्फ चेहरा धोना ही काफी नहीं है, बल्कि सही स्किनकेयर रूटीन, संतुलित खानपान और साफ-सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है. कुछ आसान आदतें अपनाकर मानसून में भी त्वचा को स्वस्थ, साफ और चमकदार रखा जा सकता है. चलिए जानते हैं कैसे…

    मानसून में ऐसे रखें त्वचा का ख्याल
    बारिश के मौसम में दिन में दो बार हल्के फेस वॉश से चेहरा साफ करें. इससे त्वचा पर जमा पसीना, अतिरिक्त तेल और गंदगी आसानी से हट जाती है. चेहरा धोने के बाद हल्का मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं, क्योंकि ऑयली स्किन को भी नमी की जरूरत होती है. बाहर निकलते समय सनस्क्रीन लगाना ना भूलें.

    अगर ज्यादा पसीना आता है, तो चेहरे को साफ टिश्यू या मुलायम कपड़े से हल्के हाथों से पोंछें. बारिश में भीगने के बाद चेहरा और शरीर साफ पानी से धो लें. साथ ही लंबे समय तक मेकअप लगाए रखने से बचें और रात में सोने से पहले मेकअप पूरी तरह साफ कर लें.

    इन गलतियों से करें परहेज
    मानसून में गंदे तौलिये, मेकअप ब्रश और तकिए के कवर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इनमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे स्किन इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़ों में ज्यादा देर तक न रहें. चेहरे पर बार-बार हाथ लगाने या पिंपल्स फोड़ने से भी बचें, क्योंकि इससे संक्रमण और दाग की समस्या हो सकती है. बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी क्रीम या दवा का इस्तेमाल न करें.

    डाइट का भी रखें ध्यान
    स्वस्थ त्वचा के लिए मौसमी फल, हरी सब्जियां, सलाद, दालें, दही और सूखे मेवे अपनी डाइट में शामिल करें. संतरा, अमरूद और आंवला जैसे विटामिन सी से भरपूर फल त्वचा के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. दिनभर पर्याप्त पानी पीएं और तली-भुनी व ज्यादा मीठी चीजों का सेवन कम करें.

    कब लें डॉक्टर की सलाह
    अगर त्वचा पर लगातार खुजली, लालपन, रैशेज, सूजन, दर्द, पानी वाले दाने या बार-बार इंफेक्शन हो रहा है, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है. वहीं, यदि पिंपल्स लगातार बढ़ रहे हों या घरेलू देखभाल के बाद भी समस्या ठीक न हो, तो समय रहते डॉक्टर से जांच कराना बेहतर रहता है. इससे त्वचा की परेशानी गंभीर होने से बच सकती है.

  • सुबह खाली पेट फल खाना पड़ सकता है भारी! इन फलों से बनाएं दूरी, जानें क्यों..

    सुबह खाली पेट फल खाना पड़ सकता है भारी! इन फलों से बनाएं दूरी, जानें क्यों..

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    फल शरीर के लिए जरूरी विटामिन, मिनरल, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत हैं. इसलिए डॉक्टर और एक्सपर्ट रोजाना फल खाने की सलाह देते हैं. लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर फल को खाली पेट खाना सभी लोगों के लिए फायदेमंद हो. कुछ फलों में मौजूद प्राकृतिक एसिड या ज्यादा मात्रा में प्राकृतिक शुगर कुछ लोगों में एसिडिटी, गैस, पेट फूलने, सीने में जलन या ब्लड शुगर में तेजी से उतार-चढ़ाव जैसी दिक्कतें पैदा कर सकती है. आइए जानते हैं ऐसे 6 फलों के बारे में जिन्हें भूलकर भी खाली पेट नहीं खाना चाहिए.

    संतरा और खट्टे फल
    संतरा, मौसंबी और दूसरे खट्टे फलों में विटामिन C भरपूर मात्रा में होता है. हालांकि इनमें प्राकृतिक एसिड भी मौजूद होता है. जिन लोगों को एसिडिटी या गैस्ट्रिक समस्या रहती है, उन्हें खाली पेट इनका सेवन करने से सीने में जलन या पेट में असहजता महसूस हो सकती है.

    इमली
    इमली का स्वाद खट्टा होता है और इसमें एसिड की मात्रा अधिक होती है. खाली पेट इमली खाने से कुछ लोगों में एसिडिटी बढ़ सकती है और सीने में जलन की शिकायत हो सकती है.

    कच्चा अमरूद
    अमरूद पोषण से भरपूर फल है, लेकिन बिल्कुल कच्चा या अधिक मात्रा में खाली पेट खाने से कुछ लोगों को गैस, पेट फूलने या भारीपन की समस्या हो सकती है.

    लीची
    लीची स्वादिष्ट और रसीला फल है, लेकिन इसे खाली पेट ज्यादा मात्रा में खाने से बचना चाहिए. खासकर बच्चों के लिए इसे सीमित मात्रा में और भोजन के साथ या बाद में खाना बेहतर माना जाता है.

    अनानास
    अनानास में ब्रोमेलैन नाम का एंजाइम और प्राकृतिक एसिड मौजूद होते हैं. कुछ लोगों को खाली पेट इसका सेवन करने से पेट में जलन, बेचैनी या असहजता महसूस हो सकती है.

    अंगूर
    अंगूर में प्राकृतिक शुगर अच्छी मात्रा में होती है. खाली पेट ज्यादा अंगूर खाने से कुछ लोगों का ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है, जिससे थोड़ी देर बाद फिर से भूख महसूस होने लगती है.

  • महंगे स्किन केयर को भूल जाइए! चावल का पानी बना सकता है चेहरे को Glass Skin जैसा चमकदार..

    महंगे स्किन केयर को भूल जाइए! चावल का पानी बना सकता है चेहरे को Glass Skin जैसा चमकदार..

    चेहरे को ग्लोइंग और साफ रखने के लिए लोग कई घरेलू नुस्खे आजमाते हैं. इन्हीं में चावल का पानी यानी राइस वॉटर भी शामिल है. माना जाता है कि इसमें मौजूद कुछ पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट स्किन के लिए फायदेमंद हो सकते हैं. यही वजह है कि कई स्किन केयर प्रोडक्ट्स में भी राइस वॉटर का इस्तेमाल किया जाता है. तो चलिए आपको बताते हैं कि रोजाना राइस वॉटर से फेस वॉश करने के फायदे के बारे में.

    कोलेजन को मिल सकता है सपोर्ट
    चावल के पानी पर हुई कुछ रिसर्च में इसके स्किन के लिए फायदेमंद होने के संकेत मिले हैं. साल 2013 की एक स्टडी में कुछ समय तक चेहरे पर फर्मेंटेड राइस वॉटर का इस्तेमाल किया गया था. इसमें स्किन की सूजन कम होने और कोलेजन से जुड़े कुछ फायदे देखने को मिले. कोलेजन त्वचा को हेल्दी और जवां बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है.

    एजिंग के निशान कम करने में मदद
    चावल के पानी में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं. ये एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से स्किन को बचाने में मदद कर सकते हैं. इसके चलते फाइन लाइंस और झुर्रियों जैसे एजिंग के कुछ निशान कम नजर आ सकते हैं. हालांकि, इसे किसी पक्के एंटी-एजिंग इलाज के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.

    ड्राई स्किन को मिल सकती है राहत
    अगर आपकी स्किन अक्सर रूखी और खिंची-खिंची रहती है, तो राइस वॉटर कुछ राहत दे सकता है. इसका इस्तेमाल स्किन में नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है. इससे त्वचा पहले के मुकाबले सॉफ्ट और फ्रेश नजर आ सकती है.

    घर पर कैसे बनाएं चावल का पानी
    चावल का पानी बनाने के लिए सबसे पहले चावल को अच्छी तरह धो लें. इसके बाद साफ चावल में पानी डालकर करीब 30 मिनट के लिए छोड़ दें. अब चावल को छानकर पानी को एक साफ कंटेनर में रख लें. इसी पानी का इस्तेमाल चेहरा धोने के लिए किया जा सकता है. अगर आपके पास समय कम है, तो चावल उबालने के बाद बचे हुए पानी को भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इस्तेमाल करने से पहले पानी को पूरी तरह ठंडा कर लें.

    इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान
    राइस वॉटर घरेलू नुस्खा है और हर व्यक्ति की स्किन पर इसका असर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है. पहली बार इस्तेमाल करने से पहले थोड़ा सा पानी त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाकर पैच टेस्ट कर लें. अगर जलन, लालिमा या खुजली हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें. अगर चेहरे पर ज्यादा एक्ने, पिंपल या कोई दूसरी स्किन समस्या है, तो घरेलू नुस्खे आजमाने से पहले स्किन एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर है. साथ ही, राइस वॉटर को स्किन केयर रूटीन का हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन इससे तुरंत ग्लो मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

  • हेयर फॉल और डैंड्रफ से हैं परेशान… तो बालों पर लगाएं फिटकरी… और फिर देखें कमाल..

    हेयर फॉल और डैंड्रफ से हैं परेशान… तो बालों पर लगाएं फिटकरी… और फिर देखें कमाल..

    Get Rid of Hair Fall with Alum: आज के समय में शायद ही ऐसा कोई हो, जो बालों के झड़ने की समस्या से परेशान न हों. बारिश के मौसम में तो हेयर फॉल और डैंड्रफ की समस्या और बढ़ जाती है. यदि आप हेयर फॉल और डैंड्रफ से हैं परेशान तो आपकी परेशानी एक छोटी सी फिटकरी दूर कर सकती है. जी हां, बालों के लिए फिटकरी को रामबाण मना जाता है. आपको मालूम हो कि फिटकरी में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं, जो स्कैल्प पर मौजूद बैक्टीरिया और फंगस को कम करने में मदद कर सकते हैं. फिटकरी में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण स्कैल्प पर जमा गंदगी और एक्स्ट्रा ऑयल को साफ करने के साथ डैंड्रफ और खुजली जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी मदद कर सकती है. हम आपको बता रहे हैं फिटकरी को बालों में कैसे लगाना है?

    ऐसे लगाएं बालों में फिटकरी 
    1. फिटकरी और गुलाब जाल

    आप फिटकरी को गुलाब जल में मिलाकर बालों पर लगा सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले आप फिटकरी का पाउडर लें. इसके बाद गुलाब जल दें. अब फिटकरी और गुलाब जल को मिलाकर पतला पेस्ट बना लें. फिर इस फिटकरी और गुलाब जल के पेस्ट को स्कैल्प पर हल्के हाथों से लगाएं. इस पेस्ट को 15 से 20 मिनट तक लगा रहने दें. इसके बाद नॉर्मल पानी से बालों को अच्छी तरह से धो लें. आपको मालूम हो कि इस दिन बालों में शैंपू न लगाएं आप अगले दिन बालों में शैंपू लाकर स्नान कर सकते हैं.

    2. फिटकरी और नारियल तेल
    यदि आपके बाल झड़ रहे हैं और डैंड्रफ की समस्या है तो आप फिटकरी और नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आपको सबसे पहले फिटकरी का पाउडर और नारियल तेल लेना होगा. अब आप दो बड़े चम्मच हल्के गर्म नारियल तेल में एक छोटा चम्मच फिटकरी पाउडर मिलाएं. फिर इस पेस्ट को स्कैल्प पर अच्छी तरह लगाएं. अब इस पेस्ट को 30 से 40 मिनट के लिए छोड़ दें. फिर बालों को शैंपू से अच्छी तरह धो लें. ऐसा महीने में कुछ दिन करने से हेयर फॉल नहीं होगा और डैंड्रफ की समस्या से भी छुटकारा मिल जाएगा.

    3. फिटकरी और अंडा
    यदि आपके बाल झड़ रहे हैं और डैंड्रफ की समस्या है तो आप फिटकरी और अंड़ा का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आप फिटकरी के पाउडर में एक अंडा मिलाकर अच्छी तरह फेंट लें. फिर इस मिश्रण को स्कैल्प और बालों पर लगाएं. इसको लगाने के 20 से 30 मिनट बाद बालों को पानी से धो लें और फिर शैंपू कर लें. ऐसा कुछ दिन करने से हेयर फॉल की समस्या दूर हो जाएगी. डैंड्रफ भी दूर हो जाएंगे.

    फिटकरी लगाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

    • फिटकरी कुछ लोगों के स्कैल्प को रूखा या इरिटेट कर सकती है. ऐसे में इसे पूरे सिर पर लगाने से पहले हाथ या स्कैल्प के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट कर लेना चाहिए.
    • बालों पर फिटकरी का इस्तेमाल हफ्ते में एक से दो बार से ज्यादा करने से बचें.
    • डैंड्रफ लगातार बना रहता है, स्कैल्प पर ज्यादा खुजली, लालिमा या घाव हो रहे हैं तो डॉक्टर या डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह लिए बिना बालों में फिटकरी न लगाएं.
  • पनीर खरीदने वालो हो जाएं सावधान! व्हाइटनिंग एजेंट से बनाया जा रहा ..

    पनीर खरीदने वालो हो जाएं सावधान! व्हाइटनिंग एजेंट से बनाया जा रहा ..

    पनीर खरीदने वालो हो जाएं सावधान! व्हाइटनिंग एजेंट से बनाया जा रहा नकली पनीर, 1038 किलो माल नष्ट

    आमतौर पर प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत माने जाने वाले पनीर को लोग सेहतमंद भोजन समझकर परिवार की थाली में शामिल करते हैं, लेकिन मोदीनगर के नाहली गांव में पनीर के नाम पर जिस तरह का खेल सामने आया है, वह खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं की सेहत दोनों के लिए गंभीर चिंता पैदा करता है. यहां तीन डेयरियों में दूध और क्रीम से प्राकृतिक तरीके से पनीर-खोया तैयार करने के बजाय वनस्पति, स्किम्ड मिल्क पाउडर, रिफाइंड पामोलीन ऑयल, एसिटिक एसिड, सफेद चूर्ण और रानीपाल जैसे पदार्थों के इस्तेमाल से पनीर तैयार किए जाने के प्रमाण मिले हैं. खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी में मौके से 868 किलोग्राम पनीर और 170 किलोग्राम खोया, यानी कुल 1038 किलोग्राम खाद्य सामग्री, नष्ट कराई गई.

    उत्पादन परिसर में मिली भारी गंदगी आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश और जिलाधिकारी के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग तथा पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने कल बीती 12 अगस्त की रात करीब 11 बजे ग्राम नाहली में मैसर्स तोमर डेयरी, कलवा डेयरी और शकील डेयरी पर एक साथ छापा मारा. जांच के दौरान तीनों इकाइयों के उत्पादन परिसर में न केवल भारी गंदगी और अस्वच्छता मिली, बल्कि पनीर और खोया निर्माण में ऐसे पदार्थों के इस्तेमाल के प्रमाण भी मिले, जिनका इस तरह खाद्य पदार्थ तैयार करने में इस्तेमाल उपभोक्ताओं के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है.

    मिल्क पाउडर, वनस्पति और रानीपाल से बना रहे थे नकली पनीर जांच में सामने आया कि शकील डेयरी में मिल्क पाउडर, वनस्पति और रानीपाल समेत अन्य अपमिश्रक रसायन मिले. कलवा डेयरी में रिफाइंड पामोलीन ऑयल और अन्य अपमिश्रक रसायन पाए गए, जबकि तोमर डेयरी में वनस्पति और सफेद पाउडर बरामद हुआ. इन पदार्थों का इस्तेमाल पनीर निर्माण में किए जाने की बात सामने आई. यानी जिस पनीर को उपभोक्ता दूध की मलाई और प्रोटीन से तैयार प्राकृतिक खाद्य पदार्थ समझकर खरीदता है, उसकी जगह लागत घटाकर और मात्रा बढ़ाकर तैयार किए जाने वाले मिश्रण का इस्तेमाल किया जा रहा था. खाद्य सुरक्षा टीम ने तीनों इकाइयों से पनीर, खोया, वनस्पति, स्किम्ड मिल्क पाउडर, रिफाइंड पाम ऑयल, एसिटिक एसिड, सफेद चूर्ण, रानीपाल, दूध और क्रीम समेत कुल 20 नमूने लिए हैं. इन नमूनों को जांच के लिए भेजा गया है. प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन खाद्य पदार्थों में किस स्तर तक मिलावट और अपमिश्रण किया गया था.कपड़े चमकाने वाले रसायन तक का खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल इस कार्रवाई में सबसे गंभीर पहलू रानीपाल की बरामदगी है.

    रानीपाल का इस्तेमाल सामान्य तौर पर डिटर्जेंट पाउडर, लिक्विड डिटर्जेंट और फैब्रिक व्हिटनर जैसे उत्पादों में कपड़ों का पीलापन दूर कर उन्हें अधिक सफेद दिखाने के लिए किया जाता है. ऐसे पदार्थ के खाद्य निर्माण में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आना ही खाद्य सुरक्षा व्यवस्था और उपभोक्ता स्वास्थ्य के लिए बेहद गंभीर चेतावनी है. खाद्य पदार्थ को देखने में सफेद और आकर्षक बनाने के लिए यदि किसी औद्योगिक व्हाइटनिंग एजेंट का सहारा लिया जाए तो उपभोक्ता के साथ छल के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी पैदा हो सकता है.

    868 किलोग्राम पनीर जब्त अस्वच्छ परिस्थितियों और खाद्य सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघन के चलते टीम ने मौके पर ही 868 किलोग्राम पनीर, जिसकी अनुमानित कीमत 2.11 लाख रुपये है, तथा 170 किलोग्राम खोया, जिसकी कीमत करीब 50,800 रुपये बताई गई, नष्ट करा दिया. इसके अलावा पनीर और खोया बनाने के लिए रखे गए 25 किलो सफेद पाउडर, चार किलो वनस्पति और 153 किलो रिफाइंड पामोलीन ऑयल को जब्त किया गया.

    खाद्य पदार्थों में अपमिश्रकों के इस्तेमाल और खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए तीनों डेयरी संचालकों के खिलाफ थाना भोजपुर में भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया है. फिलहाल लिए गए 20 नमूनों की जांच रिपोर्ट इस पूरे मामले में अहम होगी. रिपोर्ट से यह भी सामने आएगा कि तैयार पनीर और खोया में इस्तेमाल किए गए पदार्थ किस स्तर तक खाद्य सुरक्षा मानकों के विपरीत थे.

  • हाइड्रेट रहने के लिए दिनभर में कितना पानी पीना चाहिए..?

    हाइड्रेट रहने के लिए दिनभर में कितना पानी पीना चाहिए..?

    हाइड्रेट रहने के लिए दिनभर में कितना पानी पीना चाहिए? जानें हाइड्रेट रहने के आसान टिप्स

    पानी हमारे शरीर की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है. शरीर के हर सेल, टिश्यू और अंग को सही से काम करने के लिए पानी चाहिए. यह शरीर का तापमान सामान्य रखता है, पोषक तत्वों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाता है और बेकार चीजों को बाहर निकालने में मदद करता है. सांस लेने, पसीना आने और पेशाब के जरिए दिनभर शरीर से पानी निकलता रहता है. अगर इसकी भरपाई न हो तो डिहाइड्रेशन हो सकता है,

    जिससे थकान, सिरदर्द और कमजोरी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. ऐसे में हमें पता होना चाहिए कि आखिर स्वस्थ रहने के लिए दिनभर में कितना पानी पीना चाहिए. चलिए हम आपको बताते हैं…दिनभर में कितना पानी पीना चाहिए? एक स्वस्थ व्यक्ति को दिनभर में करीब 2.7 से 3.7 लीटर फ्लूइड की जरूरत होती है. इसमें सिर्फ सादा पानी ही नहीं, बल्कि चाय, कॉफी, दूध, जूस और खाने से मिलने वाला पानी भी शामिल है. खाने से ही शरीर को करीब 20 प्रतिशत पानी मिल जाता है. इसलिए हर किसी को रोज 3 से 4 लीटर सिर्फ सादा पानी पीना ही जरूरी नहीं है.शरीर में पानी की कमी को कैसे पहचानें? जब शरीर में पानी कम होता है तो सबसे पहले प्यास लगती है और पेशाब का रंग गहरा पीला हो जाता है. पर्याप्त पानी पीने पर पेशाब का रंग हल्का पीला या साफ रहता है.

    पानी की कमी से सिरदर्द, थकान और चक्कर आना भी आम है. अगर डिहाइड्रेशन बहुत ज्यादा बढ़ जाए तो सोचने में परेशानी या घबराहट जैसी गंभीर समस्या भी हो सकती है.किन लोगों को ज्यादा पानी की जरूरत होती है? जो लोग रोज ज्यादा एक्सरसाइज करते हैं या जिन्हें बहुत पसीना आता है, उन्हें ज्यादा पानी पीना चाहिए. गर्म और नमी वाले मौसम में भी पानी की जरूरत बढ़ जाती है. उल्टी, दस्त या बुखार में शरीर से तेजी से पानी निकलता है, इसलिए ज्यादा फ्लूइड लेना जरूरी है. प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान भी महिलाओं को ज्यादा पानी की सलाह दी जाती है. कुछ किडनी और यूरिन की समस्याओं में भी डॉक्टर ज्यादा पानी पीने को कहते हैं.

  • पार्लर जाने की जरूरत नहीं! घर बैठे इस फुट सोक से पैरों को बनाएं सॉफ्ट और खूबसूरत..

    पार्लर जाने की जरूरत नहीं! घर बैठे इस फुट सोक से पैरों को बनाएं सॉफ्ट और खूबसूरत..

    Pedicure Tips: घर बैठे मुलायम पैर चाहिए? तो ये खास फुट सोक करें ट्राई... बेजान पैरों में आ जाएगी जान!

    पेडीक्योर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में स्क्रबिंग और डेड स्किन हटाने की बात आती है. लेकिन पैरों की अच्छी देखभाल के लिए सिर्फ स्क्रबिंग ही जरूरी नहीं है. पेडीक्योर में फुट सोक भी एक अहम स्टेप माना जाता है. इसमें कुछ खास चीजों को गुनगुने पानी में मिलाकर पैरों को कुछ देर भिगोया जाता है.

    इससे पैरों की त्वचा मुलायम होती है और स्क्रबिंग के दौरान डेड स्किन और कैलस को हटाना आसान हो जाता है. इतना ही नहीं, सही फुट सोक पैरों की थकान और दर्द से राहत देने में भी मदद कर सकता है.फुट सोक क्या होता है और क्यों जरूरी है फुट सोक के लिए गुनगुने पानी में नमक, क्रिस्टल, जेली या अन्य सामग्री मिलाई जाती है. कई लोग पानी में सिर्फ शैंपू डालकर पैर भिगोते हैं, लेकिन इससे पैरों को खास फायदा नहीं मिलता.

    फुट सोक का इस्तेमाल करने से त्वचा ज्यादा मुलायम हो सकती है और पैरों की सफाई बेहतर तरीके से की जा सकती है.फुट सोक के फायदे ये हैं पैरों की त्वचा मुलायम होती है डेड स्किन हटाना आसान हो जाता है पैरों की थकान कम महसूस हो सकती है पैरों में आराम मिलता है हल्की सूजन में राहत मिल सकती है पैरों की बदबू कम करने में मदद मिल सकती है स्क्रबिंग के दौरान कैलस आसानी से हटाया जा सकता हैइप्सम सॉल्ट फुट सोक इप्सम सॉल्ट फुट सोक के लिए काफी लोकप्रिय है.

    गुनगुने पानी में करीब दो चम्मच इप्सम सॉल्ट डालकर लगभग 20 मिनट तक पैर भिगोए जा सकते हैं. इससे पैर मुलायम होने के साथ थकान कम महसूस हो सकती है. यह पैरों की मांसपेशियों को आराम देने और हल्की सूजन में राहत देने में भी मदद कर सकता है. जो लोग लंबे समय तक खड़े रहते हैं, जिम जाते हैं या ज्यादा शारीरिक मेहनत करते हैं, उनके लिए इप्सम सॉल्ट फुट सोक आराम देने वाला विकल्प हो सकता है.जेली पेडीक्योर जेली पेडीक्योर इन दिनों काफी पसंद किया जा रहा है.

    इसमें पानी में खास जेली सोक डालने पर पानी जेली जैसा हो जाता है. इसमें आमतौर पर सोडियम पॉलीएक्रिलेट के साथ ग्लिसरीन, एलोवेरा, एसेंशियल ऑयल और प्लांट एक्सट्रैक्ट जैसे तत्व हो सकते हैं. यह पैरों की त्वचा को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने और कैलस को मुलायम करने में मदद करता है. इससे स्क्रैपर की मदद से डेड स्किन हटाना आसान हो जाता है.किसके लिए है बेस्ट जिन लोगों के पैर बहुत रूखे रहते हैं या एड़ियां बार-बार फटती हैं,

    उनके लिए जेली पेडीक्योर एक अच्छा विकल्प हो सकता है. हालांकि फुट सोक अकेले कैलस या डेड स्किन को पूरी तरह नहीं हटाता. यह त्वचा को मुलायम करता है, जिसके बाद स्क्रबिंग से डेड स्किन हटाना आसान हो जाता है.

  • ग्रीन और ब्लैक टी में क्या है अंतर, रोज पीने के लिए कौन-सी चाय बेहतर?

    ग्रीन और ब्लैक टी में क्या है अंतर, रोज पीने के लिए कौन-सी चाय बेहतर?

    आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर काफी सजग हो गए हैं. लोग हेल्दी लाइफस्टाइल का ध्यान रख रहे हैं. फिटनेस बनाए रखने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं. वजन घटाना हो या इम्यूनिटी बेहतर करनी है, इसके लिए ग्रीन टी और ब्लैक टी इस समय काफी लोकप्रिय हो चुकी हैं. हालांकि, कई लोग इस बात को लेकर संशय में रहते हैं कि आखिर ग्रीन टी पिएं या ब्लैक टी. यदि आप भी किस चाय को पिएं, इसको तय नहीं कर पा रहे हैं तो हम आपको बता रहे हैं कि आखिर कौन-सी चाय ज्यादा फायदेमंद है.

    एक ही पौधे से तैयार होती हैं दोनों चाय आपको मालूम हो कि ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों ही एक ही पौधे से तैयार होती हैं. ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों कैमेलिया साइनेंसिस पौधे की पत्तियों से बनाई जाती हैं. बस इन्हें प्रोसेस करने का तरीका अलग होता है. इसी के चलते इन दोनों चाय का स्वाद, रंग से लेकर पोषक तत्वों में अंतर आ जाता है.

    ग्रीन टी कम प्रोसेस की जाती है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट खासकर कैटेचिन अधिक मात्रा में पाए जाते हैं. इसका स्वाद हल्का और थोड़ा कड़वा होता है. इस चाय में कैफीन की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है. उधर, ब्लैक टी पूरी तरह ऑक्सीडाइज की जाती है. इसका स्वाद गहरा होता है. इसमें कैफीन की मात्रा ग्रीन टी से अधिक होती है. ब्लैक टी में थियोफ्लेविन और थियोरूबिजिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं.

    ग्रीन टी पीने के फायदे ग्रीन टी वजन नियंत्रित करने में सहायक होती है. यह चाय एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है. ऐसे में दिल की सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है. ग्रीन टी त्वचा के लिए फायदेमंद होती है. यह चाय शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद करती है.

    ब्लैक टी पीने के फायदे ब्लैक टी शरीर में ऊर्जा और सतर्कता बढ़ाने में मदद करती है. यह चाय मानसिक फोकस बेहतर करने में सहायक हो सकती है. इस चाय को पीने से पाचन तंत्र ठीक रहता है. यह टी हृदय के अच्छी मानी जाती है. इस चाय को सुबह में पीने से शरीर को ऊर्जा मिलेती है. ऐसे लोग इस चाय को सुबह में पीना पसंद करते हैं. सुबह की शुरुआत के लिए अच्छा विकल्प मानी जाती है।

    किसे पीनी चाहिए ग्रीन टी और किसे ब्लैक टी अब सवाल उठ रहा है कि किसी ग्रीन टी और किसे ब्लैक टी पीनी चाहिए क्योंकि दोनों चाय में कुछ न कुछ विशेषताएं हैं. वैसे लोग जो अपना वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें ग्रीन टी पीनी चाहिए. वैसे लोग जो कम कैफीन पसंद करते हैं, उनके लिए ग्रीन टी अच्छी है. वैसे लोग जो एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर पेय लेना चाहते हैं, उनके लिए ग्रीन टी अच्छी हो सकती है. उधर, ब्लैट की वे लोग पी सकते हैं, जिन्हें सुबह अधिक ऊर्जा और ताजगी चाहिए. वैसे लोग जो स्ट्रॉन्ग फ्लेवर पसंद करते हैं, वे ब्लैक टी पी सकते हैं. वैसे लोग जिन्हें किसी काम में पूरे दिन फोकस बनाए रखना है, वे ब्लैक टी पी सकते हैं.

    ग्रीन टी और ब्लैक टी दोनों में से क्या पिएं यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं और एंटीऑक्सीडेंट लेना चाहते हैं तो आपके लिए ग्रीन टी बेहतर विकल्प है. उधर, यदि आपको पूरे दिन ऊर्जा और बेहतर फोकस चाहिए तो ब्लैक टी उपयुक्त हो सकती है. ऐसे में आप किसी भी चाय का चुनाव अपनी सेहत की स्थिति, कैफीन सहनशीलता और डॉक्टर की सलाह को ध्यान में रखकर कर सकते हैं.

  • एक बार घर पर बनाएं गुलाब की पंखुड़ियों से नेचुरल लिप बाम… मिनटों में पाएं मुलायम होंठ

    एक बार घर पर बनाएं गुलाब की पंखुड़ियों से नेचुरल लिप बाम… मिनटों में पाएं मुलायम होंठ

    गुलाबी होठ चाहिए? एक बार घर पर बनाएं गुलाब की पंखुड़ियों से नेचुरल लिप बाम... मिनटों में पाएं मुलायम होंठ

    बदलते मौसम में होंठों का सूखना, फटना और परतदार होना आम समस्या है. खासकर मौसम में नमी कम होने पर होंठ जल्दी ड्राई होने लगते हैं. ऐसे में बाजार के लिप बाम पर निर्भर रहने के बजाय आप घर पर ही गुलाब की पंखुड़ियों से नेचुरल लिप बाम बना सकते हैं.

    इसे बनाने के लिए गुलाब की पंखुड़ियां, नारियल या बादाम का तेल, शहद और विटामिन ई जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है.गुलाब की पंखुड़ियां होंठों को फायदा गुलाब की पंखुड़ियां सिर्फ खुशबू और खूबसूरती के लिए ही नहीं जानी जातीं, बल्कि इनमें ऐसे प्राकृतिक तत्व भी पाए जाते हैं जो त्वचा को नमी देने में मदद कर सकते हैं. गुलाब की पंखुड़ियों से बना लिप बाम होंठों को मुलायम रखने के साथ उन्हें ताजगी भरा और हेल्दी लुक देने में मदद कर सकता है.लिप बाम बनाने का सामान घर पर गुलाब का लिप बाम बनाने के लिए 1 कप ताजी गुलाब की पंखुड़ियां, 2 बड़े चम्मच नारियल या बादाम का तेल, 1 बड़ा चम्मच बीजवैक्स या पेट्रोलियम जेली, आधा चम्मच शहद और 1 विटामिन ई कैप्सूल की जरूरत होगी. विटामिन ई का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है,

    इसे आप अपनी पसंद के अनुसार डाल सकते हैं.ऐसे बनाएं लिप बाम सबसे पहले गुलाब की पंखुड़ियों को अच्छी तरह धोकर पूरी तरह सुखा लें. अब इन्हें थोड़े से नारियल तेल या कच्चे दूध के साथ पीसकर पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को नारियल तेल के साथ धीमी आंच पर डबल बॉयलर की मदद से करीब 10 से 12 मिनट तक गर्म करें. इसके बाद मिश्रण को छानकर गुलाब से तैयार तेल अलग कर लें. अब इस तेल में पेट्रोलियम जेली डालकर हल्का गर्म करें, ताकि यह अच्छी तरह पिघलकर तेल में मिल जाए. इसमें आधा चम्मच शहद और विटामिन ई कैप्सूल का तेल डालकर अच्छी तरह मिलाएं. तैयार मिश्रण को साफ कंटेनर में डालकर 20 से 30 मिनट के लिए फ्रिज में रखें. ठंडा होने के बाद आपका होममेड लिप बाम तैयार है.

    ऐसे करें इस्तेमाल लिप बाम बनाने के लिए हमेशा साफ और ताजी गुलाब की पंखुड़ियों का इस्तेमाल करें. इसे साफ और एयरटाइट डिब्बे में रखें. पहली बार इस्तेमाल करने से पहले थोड़ा सा प्रोडक्ट लगाकर पैच टेस्ट जरूर करें. अगर होंठों पर जलन, लालिमा या किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें.

  • लंच के बाद क्यों आने लगती है तेज नींद? जानिए इसकी वजह और सुस्ती दूर करने के आसान तरीके..?

    लंच के बाद क्यों आने लगती है तेज नींद? जानिए इसकी वजह और सुस्ती दूर करने के आसान तरीके..?

    लंच के बाद क्यों आने लगती है तेज नींद? जानिए इसकी वजह और सुस्ती दूर करने के आसान तरीके

    दोपहर का खाना खाने के बाद अगर आपकी आंखें भारी होने लगती हैं और काम करने का मन नहीं करता, तो आप अकेले नहीं हैं. कई लोगों को लंच के बाद अचानक नींद और सुस्ती महसूस होती है. इसे पोस्ट मील स्लीपिनेस कहा जाता है. आमतौर पर यह किसी बीमारी का संकेत नहीं होती. हालांकि, अब सवाल उठता है कि आखिर खाने के बाद भयंकर नींद क्यों आती है? चलिए आपको इसका सही जवाब बताते हैं…दोपहर में क्यों बढ़ जाती है नींद दरअसल, हमारे शरीर में 24 घंटे की एक प्राकृतिक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है. दोपहर के समय इस घड़ी में ऐसा बदलाव आता है, जिससे कुछ समय के लिए जागे रहने का संकेत कम हो जाता है. यही वजह है कि कई लोगों को बिना खाना खाए भी दोपहर में सुस्ती महसूस होती है.

    खाना खाने के बाद यह असर और ज्यादा महसूस हो सकता है.ज्यादा और भारी खाना भी है वजह अगर लंच बहुत ज्यादा या भारी है, तो उसके बाद नींद और सुस्ती बढ़ सकती है. खासकर बहुत ज्यादा कैलोरी, तली-भुनी चीजें, मीठी चीजें और सफेद आटे से बनी चीजें खाने पर यह असर ज्यादा महसूस हो सकता है. खाना खाने के बाद शरीर में पाचन से जुड़े कई बदलाव होते हैं. ब्लड ग्लूकोज और पोषक तत्वों में बदलाव के साथ दिमाग के जागने और नींद से जुड़े संकेत भी बदलते हैं. इन सभी प्रक्रियाओं का मिलाजुला असर सुस्ती के रूप में दिखाई दे सकता है.

    रात में नींद पूरी न होना भी कारण अगर रात में आपकी नींद पूरी नहीं हुई है, तो दोपहर के खाने के बाद सुस्ती ज्यादा महसूस हो सकती है. लंबे समय तक जागने पर शरीर की नींद की जरूरत बढ़ती जाती है. इसलिए दिनभर एक्टिव रहने के लिए रात में पर्याप्त और अच्छी नींद लेना जरूरी है.सुस्ती कम करने के लिए क्या करें दोपहर में जरूरत से ज्यादा खाना खाने से बचें और संतुलित भोजन लें. खाने के बाद कुछ देर हल्की चाल से टहलना भी मददगार हो सकता है.

    पर्याप्त पानी पीना और रात में अच्छी नींद लेना भी जरूरी है. अगर हर दिन खाना खाने के बाद बहुत ज्यादा नींद, चक्कर या कमजोरी महसूस होती है या इसका असर रोजमर्रा के काम पर पड़ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लें. लगातार ज्यादा नींद कभी-कभी नींद की समस्या, खून की कमी, थायराइड या ब्लड शुगर से जुड़ी परेशानी का संकेत भी हो सकती है.