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  • भिंडी के साथ इन चीजों का सेवन कर सकते हैं पाचन की परेशानी, जानिए सही फूड कॉम्बिनेशन…

    भिंडी के साथ इन चीजों का सेवन कर सकते हैं पाचन की परेशानी, जानिए सही फूड कॉम्बिनेशन…

    भिंडी के साथ इन चीजों का सेवन कर सकते हैं पाचन की परेशानी, जानिए सही फूड कॉम्बिनेशन…

    हरी सब्जियों में भिंडी (Lady Finger/Okra) अधिकांश लोगों की पसंदीदा होती है। यह न सिर्फ स्वादिष्ट होती है, बल्कि फाइबर, विटामिन और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने के कारण सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद मानी जाती है। लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक आहार विज्ञान के अनुसार, हर सब्जी या खाद्य पदार्थ की अपनी एक तासीर होती है। यदि इसके साथ गलत चीजों का तालमेल कर लिया जाए, तो यह फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकती है। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अक्सर यह चर्चा होती है कि भिंडी के साथ कुछ चीजों का सेवन शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकता है। लेकिन क्या वाकई कुछ चीजें भिंडी के साथ खाने से पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं? विज्ञान और आयुर्वेद इस पर क्या राय रखते हैं?

    आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर सलीम जैदी के मुताबिक अगर आप भी गर्मी में भिंडी खाते हैं तो कुछ फूड्स का सेवन कॉम्बिनेशन करके नहीं खाएं। आयुर्वेद में ‘विरुद्ध आहार’ (Wrong Food Combinations) को लेकर नियम बताए गए हैं। आयुर्वेद के मुताबिक कुछ विरुद्ध आहार का सेवन अगर भिंडी के साथ किया जाए तो पाचन बिगड़ सकता है,  सफेद दाग, एलर्जी और बॉडी में कई तरह की परेशानियां हो सकती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि भिंडी के साथ कौन से फूड्स का सेवन करने से बचना चाहिए।

    भिंडी और दूध का सेवन एक साथ नहीं करें

    आयुर्वेद के अनुसार भिंडी और दूध का कॉम्बिनेशन कुछ लोगों में पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। भिंडी में मौजूद फाइबर और कुछ प्राकृतिक यौगिक दूध के पाचन को प्रभावित कर सकते हैं जिससे गैस, पेट फूलना और भारीपन महसूस हो सकता है। जिन लोगों का पाचन तंत्र संवेदनशील है उन्हें भिंडी के साथ दूध का सेवन करने से परहेज करना चाहिए।

    भिंडी खाने के तुरंत बाद चाय न पिएं

    अक्सर लोगों की आदत होती है कि वो खाना खाते ही चाय पीते हैं। अगर आप भिंडी खाते ही चाय का सेवन करेंगे तो आपकी सेहत बिगड़ सकती है। चाय में मौजूद टैनिन कुछ पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रभावित कर सकता हैं। भिंडी जैसी पोषक तत्वों से भरपूर सब्जी का सेवन करने के बाद चाय पीने से शरीर को कुछ पोषक तत्वों का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। बेहतर होगा कि भोजन और चाय के बीच कम से कम 30 से 60 मिनट का अंतर रखें।

    भिंडी और भारी मांसाहारी भोजन को एक साथ न लें

    भिंडी में घुलनशील फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जबकि लाल मांस या भारी नॉन-वेज भोजन को पचने में अधिक समय लगता है। दोनों का एक साथ अधिक मात्रा में सेवन करने पर कुछ लोगों को अपच, गैस और पेट में भारीपन की शिकायत हो सकती है। इसलिए संतुलित मात्रा में इनका सेवन करना बेहतर माना जाता है।

    भिंडी और मूली का कॉम्बिनेशन विरुद्ध आहार है

    मूली में सल्फर यौगिक होते हैं जो कुछ लोगों में गैस बनने की समस्या बढ़ा सकते हैं। यदि इसे भिंडी के साथ अधिक मात्रा में खाया जाए तो पेट फूलना, गैस और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों को पहले से पाचन संबंधी परेशानी रहती है, उन्हें इस फूड कॉम्बिनेशन से परहेज करना चाहिए।

    भिंडी और दही एक साथ नहीं

    कुछ आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार भिंडी की चिकनाई और दही की गुरु यानी भारी प्रकृति पाचन को धीमा कर सकती है। इससे कुछ लोगों को गैस या पेट में भारीपन महसूस हो सकता है।

    भिंडी और अत्यधिक खट्टे खाद्य पदार्थ

    भिंडी के साथ बहुत अधिक खट्टी चीजें जैसे सिरका, इमली या अत्यधिक खट्टे अचार लेने से कुछ लोगों में पाचन संबंधी असुविधा हो सकती है।

    डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। भिंडी या किसी भी भोजन के साथ असंगत कॉम्बिनेशन का असर हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति (जैसे वात, पित्त, कफ) और पाचन शक्ति के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। अपने आहार में किसी भी बड़े बदलाव या पेट से जुड़ी किसी समस्या के समाधान के लिए हमेशा किसी योग्य डाइटिशियन या डॉक्टर से परामर्श लें।

  • हेल्दी समझकर न करें ये गलती! ये 5 फूड्स बन सकते हैं दिल की बीमारी की वजह..

    हेल्दी समझकर न करें ये गलती! ये 5 फूड्स बन सकते हैं दिल की बीमारी की वजह..

    हेल्दी समझकर न करें ये गलती! ये 5 फूड्स बन सकते हैं दिल की बीमारी की वजह..

    क्या आप भी अपनी रोजमर्रा की डाइट में कुछ फूड्स को ‘हेल्थ फ्रेंडली’ या सेहतमंद मानकर शामिल कर रहे हैं तो तुरंत अपनी आदत बदल लें। आधुनिक लाइफस्टाइल और आकर्षक पैकेजिंग के दौर में जिन चीजों को हम दिल के लिए फायदेमंद समझते हैं, उनमें से कई चीजें असल में हमारी कार्डियोवैस्कुलर सेहत यानी हार्ट हेल्थ को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रही होती हैं। बिना डॉक्टरी सलाह और सही वैज्ञानिक समझ के इन फूड्स का लगातार सेवन नसों के ब्लॉक होने, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने या सीधे तौर पर दिल की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है।

    मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट, एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के संस्थापक एवं निदेशक Dr. Bimal Chhajer के अनुसार, दिल को स्वस्थ बनाए रखने के लिए केवल पौष्टिक चीजें खाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना भी जरूरी है जो हार्ट हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकती हैं। कई बार लोग कुछ फूड्स को हेल्दी समझकर नियमित रूप से खाते हैं, जबकि वे धीरे-धीरे हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकते हैं। ऐसे में कुछ खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट से कम या पूरी तरह बाहर करना दिल की सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कि किन फूड्स से परहेज करके आप अपने दिल को लंबे समय तक हेल्दी रख सकते हैं।

    अखरोट का सेवन सीमित करें

    डॉ. बिमल झाजर के अनुसार, अखरोट में फैट की मात्रा काफी अधिक होती है। हालांकि इसे आमतौर पर पौष्टिक माना जाता है, लेकिन दिल के रोगियों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। किसी भी ड्राई फ्रूट का अत्यधिक सेवन कैलोरी और फैट बढ़ा सकता है, इसलिए संतुलित मात्रा में ही सेवन करना बेहतर है।

    American Journal of Clinical Nutrition और Circulation की रिसर्च के अनुसार, जब कोई हार्ट का मरीज मुट्ठी भर-भर कर मेवे खाता है, तो शरीर की जरूरत से ज्यादा कैलोरी लिवर में जाकर ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides) में बदल जाती है। ट्राइग्लिसराइड्स खून में मौजूद एक प्रकार का फैट है। रिसर्च साबित करती है कि खून में ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ा हुआ स्तर सीधे तौर पर धमनियों की दीवारों को मोटा और सख्त बनाता है, जिसे चिकित्सा विज्ञान में एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) कहते हैं। यही स्थिति आगे चलकर हार्ट अटैक की वजह बनती है।

    बादाम ज्यादा न खाएं

    बादाम प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स का अच्छा स्रोत है, लेकिन इसमें फैट और कैलोरी भी मौजूद होती हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि हृदय रोगियों को बादाम का सेवन जरूरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए। संतुलित मात्रा में सेवन करने से पोषण मिलता है, जबकि अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है।

    मछली और चिकन का सेवन सोच-समझकर करें

    दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए मछली और चिकन का सेवन भी सीमित मात्रा में करना चाहिए। खासकर प्रोसेस्ड या ज्यादा तेल-मसाले में बने नॉनवेज फूड्स हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। हेल्दी कुकिंग और नियंत्रित मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।

    The Harvard T.H. Chan School of Public Health की एक व्यापक रिसर्च के अनुसार, जब चिकन या मछली को भारतीय तरीके से तेल, बटर या मसालों में पकाया जाता है, तो हाई टेम्परेचर पर इनमें मौजूद कोलेस्ट्रॉल ऑक्सीडाइज्ड कोलेस्ट्रॉल (Oxidized LDL) में बदल जाता है। नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल के मुकाबले ऑक्सीडाइज्ड कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा चिपचिपा होता है। यह धमनियों की अंदरूनी परत (Endothelium) को डैमेज करता है और वहां जाकर चिपक जाता है, जिससे नसों में ब्लॉकेज (Plaque) बहुत तेजी से बढ़ने लगती है।

    अलसी के बीज अधिक मात्रा में न लें

    अलसी के बीज फाइबर और कई पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। एक्सपर्ट के मुताबिक, हृदय रोगियों को अलसी का सेवन अपनी स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना चाहिए ताकि किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके।

    घी का सेवन कंट्रोल रखें

    घी भारतीय भोजन का अहम हिस्सा है, लेकिन इसमें सैचुरेटेड फैट मौजूद होता है। अगर किसी व्यक्ति को हृदय संबंधी समस्या है, तो उसे घी का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। संतुलित आहार और कम फैट वाले विकल्प अपनाकर दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखा जा सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई सलाह विशेषज्ञ के विचारों पर आधारित है। किसी भी खाद्य पदार्थ को अपनी डाइट से पूरी तरह हटाने या स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और पोषण संबंधी जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए किसी भी सलाह को व्यक्तिगत चिकित्सा परामर्श का विकल्प न मानें।

  • पपीता क्यों है पाचन के लिए फायदेमंद? आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने बताया सेवन का सही तरीका..

    पपीता क्यों है पाचन के लिए फायदेमंद? आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने बताया सेवन का सही तरीका..

    पपीता क्यों है पाचन के लिए फायदेमंद? आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने बताया सेवन का सही तरीका..

    क्या आप भी आए दिन पेट फूलने, कब्ज या अपच जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं? अगर हां, तो पपीता इसका एक बेहतरीन और सरल समाधान हो सकता है। पपीते में मौजूद खास एंजाइम भोजन को तेजी से तोड़ने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने का काम करते हैं। मगर सेहत के लिहाज से इसके फायदे यहीं खत्म नहीं होते। ये फल स्किन में निखार लाने से लेकर इम्यूनिटी बढ़ाने तक शरीर के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। पानी से भरपूर पपीता में फाइबर, विटामिन A, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं जो पाचन को दुरुस्त करते हैं और इम्यूनिटी को बूस्ट करते हैं।

    आयुर्वेदिक विशेषज्ञ आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, पपीता औषधीय गुणों से भरपूर फल है, जो पेट से लेकर आंतों तक की सफाई करता है। जिन लोगों को खाना आसानी से पचता नहीं है वो रोजाना खाने के बाद 100 ग्राम पपीता खा लें। जिन लोगों का पाचन खराब रहता है वो पपीता का सेवन सुबह खाली पेट करें फायदा होगा। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि पपीता का सेवन सेहत को कौन कौन से फायदे पहुंचाता है।

    पपीता कैसे पाचन के लिए होता है अमृत

    पपीते में पेपेन (Papain) नामक एंजाइम पाया जाता है, जो भोजन को पचाने में मदद करता है। जिन लोगों को अपच, गैस या कब्ज की समस्या रहती है, उनके लिए पपीता फायदेमंद साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित रूप से पपीता खाने से पुरानी कब्ज की समस्या में भी राहत मिल सकती है।

    journal of Medicinal Food और U.S. National Institutes of Health (NIH) की रिसर्च में क्रोनिक कॉन्स्टिपेशन यानी पुरानी कब्ज और इरिटेबल बोवेल सिंड्रोम (IBS) से पीड़ित मरीजों पर किए गए एक क्लिनिकल ट्रायल में पाया गया, जिन मरीजों को नियमित रूप से पपीते का अर्क दिया गया उनमें नतीजे चौंकाने वाले थे। Medical News Today के मुताबिक पपीते के सेवन से मरीजों का पेट साफ होने की फ्रीक्वेंसी में सुधार हुआ। मल का कड़ापन दूर हुआ और गंभीर कब्ज व पेट फूलने (Bloating) की समस्या में 70% तक की कमी दर्ज की गई।

    पपीते के सेहत के लिए फायदे

    पपीता का सेवन शरीर को हाइड्रेट करता है। गर्मी में बॉडी को पानी से तर रखने वाला ये फल शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है। पपीते में लगभग 88 प्रतिशत पानी होता है, इसलिए यह गर्मियों में शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता। इसका सेवन शरीर को ठंडक पहुंचाने और डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद कर सकता है।

    विटामिन C और विटामिन A से भरपूर पपीता शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करता है। इसका सेवन करने से बीमारियों से लड़ने की क्षमता मजबूत होती है। इसका नियमित सेवन संक्रमण और मौसमी बीमारियों के खतरे को कम कर सकता है। जिन लोगों का वजन ज्यादा है और वो वेट को कंट्रोल करना चाहते हैं तो वो पपीता का सेवन करें। पपीता कम कैलोरी और अधिक फाइबर वाला फल है। यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और वजन कंट्रोल रखने में मदद मिल सकती है।

    पपीते में मौजूद फाइबर, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं। इससे दिल की सेहत में सुधार होपता है और दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम कम हो सकता है। विटामिन A से भरपूर पपीता आंखों की सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है। इसका सेवन आंखों की सामान्य कार्यक्षमता बनाए रखने और आंखों को हेल्दी रखने में मदद कर सकता है।
    पपीता खाने का सही समय क्या है?

    विशेषज्ञों के अनुसार, अगर पपीता पाचन सुधारने के उद्देश्य से खा रहे हैं तो सुबह खाली पेट इसका सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। वहीं कुछ लोग इसे नाश्ते में या दोपहर के भोजन के बाद भी खा सकते हैं।

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी बीमारी या स्वास्थ्य समस्या के इलाज के लिए डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

  • ड्राई फ्रूट्स के शौकीन हैं? गर्मियों में इन्हें डाइट में शामिल करने से पहले जान लें ये जरूरी बातें..

    ड्राई फ्रूट्स के शौकीन हैं? गर्मियों में इन्हें डाइट में शामिल करने से पहले जान लें ये जरूरी बातें..

    ड्राई फ्रूट्स के शौकीन हैं? गर्मियों में इन्हें डाइट में शामिल करने से पहले जान लें ये जरूरी बातें..

    हम सभी जानते हैं कि ड्राई फ्रूट्स का सेवन सर्दियों में शरीर को गर्म रखने और एनर्जी देने में मदद करता है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अगर ड्राई फ्रूट्स की तासीर गर्म होती है, तो क्या गर्मियों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए? अधूरी जानकारी और सोशल मीडिया पर किए जाने वाले कई दावों के कारण लोग या तो गर्मियों में ड्राई फ्रूट्स खाना पूरी तरह बंद कर देते हैं या फिर उनका गलत तरीके से सेवन करते हैं। इससे कुछ लोगों को पेट खराब होना, एसिडिटी, अपच या शरीर में अत्यधिक गर्मी महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आपको गर्मियों में ड्राई फ्रूट्स से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर ड्राई फ्रूट्स गर्मियों में भी शरीर को जरूरी पोषक तत्व, ऊर्जा और कई तरह के फायदे पहुंचा सकते हैं।

    यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के कंसल्टेंट जनरल फिजिशियन एवं डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. रंगा संतोष कुमार के अनुसार, ड्राई फ्रूट्स केवल सर्दियों के लिए ही फायदेमंद नहीं होते, बल्कि गर्मियों में भी सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर ये शरीर को कई फायदे पहुंचा सकते हैं। उनका कहना है कि सूखे मेवे शरीर को जरूरी पोषक तत्व देते हैं साथ ही साथ कमजोरी और थकान को दूर करते हैं। बॉडी में एनर्जी के स्तर को बनाएं रखने के लिए और ओवरऑल हेल्थ को बेहतर करने के लिए गर्मी में भी ड्राई फ्रूट्स का सेवन करना जरूरी है। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कि ड्राई फ्रूट्स के सेवन से सेहत को क्या-क्या फायदे मिलते हैं और गर्मियों में इन्हें खाने का सही तरीका क्या है।

    गर्मी में बादाम खाएं

    गर्मी में भीगे हुए बादाम खाना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। बादाम में विटामिन ई, मैग्नीशियम, फाइबर और प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। Journal of Food Science and Technology और European Journal of Nutrition के अनुसार, बादाम के छिलके में टैनिन (Tannin) होता है, जो प्रोटीन और आयरन का अवशोषण रोकता है। जब बादाम को 8 से 12 घंटे भिगोया जाता है, तो इसका फाइटिक एसिड का स्तर कम हो जाता है और लाइपेज (Lipase) नामक एंजाइम एक्टिव होता है, जो शरीर को फैट्स और विटामिन-ई को आसानी से पचाने में मदद करता है।

    पिस्ता और पिस्ता खाएं

    पिस्ता प्रोटीन, हेल्दी फैट, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत है। भीगा हुआ पिस्ता शरीर में सूजन को कम करने और पोषण की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है। काजू में हेल्दी फैट, फाइबर और कई जरूरी मिनरल्स मौजूद होते हैं। इसमें पाए जाने वाले कॉपर और जिंक जैसे पोषक तत्व इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मददगार हो सकते हैं। गर्मियों में काजू को भिगोकर खाने से इसे पचाना आसान हो जाता है।

    Food Chemistry और International Journal of Food Sciences and Nutrition काजू और पिस्ता में जिंक, कॉपर और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स का जटिल ढांचा होता है। गर्मियों में इन्हें बिना भिगोए खाने से पेट में गर्मी और भारीपन हो सकता है। रिसर्च साबित करती है कि भिगोने से इनके स्टार्च और डेंस फैट्स का ब्रेकडाउन हो जाता है, जिससे यह आंतों (Gut) के लिए हल्के हो जाते हैं और इम्यून सिस्टम को तुरंत जिंक की आपूर्ति करते हैं।

    अखरोट

    ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर अखरोट मस्तिष्क और हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। भीगे हुए अखरोट का सेवन शरीर में सूजन को कम करने और ब्रेन हेल्थ को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है। The American Journal of Clinical Nutrition और Nutrients Journal की रिसर्च के मुताबिक अखरोट अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (ALA) यानी प्लांट-बेस्ड ओमेगा-3 फैटी एसिड का सबसे बड़ा स्रोत है। क्लिनिकल ट्रायल्स में पाया गया है कि भीगे हुए अखरोट का सेवन धमनियों की सूजन को कम करता है, जिससे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली (Cognitive Function) बेहतर होती है और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) घटता है।

    किशमिश और अंजीर खाएं

    भीगी हुई किशमिश फाइबर, आयरन और पोटैशियम का अच्छा स्रोत होती है। इसका सेवन पाचन को बेहतर बनाने, ऊर्जा बढ़ाने और शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति करने में मदद कर सकता है। अंजीर को पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है। फाइबर से भरपूर भीगी हुई अंजीर पाचन को दुरुस्त रखने, शरीर की कमजोरी दूर करने और ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकती है। Journal of Agricultural and Food Chemistry और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी रिपोर्ट्स के मुताबिक किशमिश और अंजीर में अघुलनशील और घुलनशील फाइबर का बेहतरीन  कॉम्बिनेशन होता है। जब इन्हें भिगोया जाता है, तो ये पानी सोखकर फूल जाते हैं और आंतों में जाकर एक नेचुरल लैक्सेटिव (Laxative) की तरह काम करते हैं। रिसर्च के अनुसार, भीगी हुई किशमिश से शरीर नॉन-हीम आयरन (Non-heme Iron) को बिना भीगी किशमिश की तुलना में 40% ज्यादा तेजी से अवशोषित करता है।

    खजूर

    खजूर में फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। सीमित मात्रा में इसका सेवन शरीर को ऊर्जा देने और पाचन को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है। International Journal of Food Sciences and Nutrition की एक समीक्षा के मुताबिक खजूर पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसी प्राकृतिक शर्करा का पावर हाउस है। गर्मियों में पसीने के जरिए शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं। सीमित मात्रा में भीगे खजूर का सेवन शरीर में तुरंत ग्लाइकोजन के स्तर को रीस्टोर करता है, जिससे गर्मियों में होने वाली सुस्ती और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है।

    कैसे करें सेवन?

    विशेषज्ञों के अनुसार, ड्राई फ्रूट्स को रातभर पानी में भिगोकर सुबह सेवन करना बेहतर माना जाता है। गर्मियों के मौसम में ड्राई फ्रूट्स को भिगोकर (Soaking) खाना आधुनिक न्यूट्रिशन साइंस और क्लिनिकल रिसर्च के मानकों पर सबसे सही और वैज्ञानिक तरीका माना गया है। सूखे मेवों में प्राकृतिक रूप से फाइटिक एसिड (Phytic Acid) और एंजाइम इन्हिबिटर्स (Enzyme Inhibitors) होते हैं, जो शरीर को इनके पोषक तत्व पूरी तरह सोखने से रोकते हैं। भिगोने से ये तत्व निकल जाते हैं, इनकी तासीर सामान्य होती है और ये आसानी से पच जाते हैं। हालांकि, इनका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि अधिक मात्रा में खाने से कैलोरी का सेवन बढ़ सकता है। गर्मियों में सही तरीके से और संतुलित मात्रा में खाए गए ड्राई फ्रूट्स शरीर को पोषण, ऊर्जा और कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकते हैं।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी और एक्सपर्ट की सलाह पूरी तरह से सामान्य जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। जर्नल रिसर्च और डॉक्टर के सुझावों के बावजूद, हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति, पाचन तंत्र और स्वास्थ्य स्थितियां अलग हो सकती हैं। गर्मियों में अपनी डाइट में किसी भी प्रकार का बड़ा बदलाव करने या औषधीय रूप में मेवों का सेवन शुरू करने से पहले अपने व्यक्तिगत डॉक्टर या प्रमाणित डाइटिशियन (Nutritionist) से परामर्श जरूर लें।