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  • हर दिन टूट रहे हैं मुट्ठीभर बाल? आयुर्वेदाचार्य से जानिए बाल झड़ना रोकने के आसान उपाय..

    हर दिन टूट रहे हैं मुट्ठीभर बाल? आयुर्वेदाचार्य से जानिए बाल झड़ना रोकने के आसान उपाय..

    हर दिन टूट रहे हैं मुट्ठीभर बाल? आयुर्वेदाचार्य से जानिए बाल झड़ना रोकने के आसान उपाय..

    आजकल कम उम्र में ही बाल झड़ना एक आम समस्या बन गई है। लगातार हेयर फॉल के कारण कई लोग गंजेपन की चिंता से भी परेशान रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बाल झड़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें आनुवंशिकता, हार्मोनल बदलाव, तनाव, पोषण की कमी, कुछ दवाएं, टाइट हेयर स्टाइल और बार-बार केमिकल ट्रीटमेंट शामिल हैं।

    आयुर्वेद में मेथी को बालों की देखभाल के लिए उपयोगी माना जाता है। इसमें प्रोटीन, आयरन, पोटैशियम और कई पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं, जो बालों को पोषण देने और उनकी मजबूती बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

    बालों के लिए मेथी के संभावित फायदे

    • बालों की जड़ों को पोषण देने में मदद कर सकती है।
    • हेयर फॉल कम करने में सहायक हो सकती है।
    • रूसी (डैंड्रफ) की समस्या में राहत दिला सकती है।
    • बालों को मजबूत और मुलायम बनाने में मदद कर सकती है।
    • समय से पहले सफेद होने वाले बालों की समस्या में भी कुछ लोगों को लाभ मिल सकता है।

    मेथी और नारियल तेल का हेयर मास्क कैसे बनाएं?

    • 2–3 चम्मच मेथी दानों को पीसकर बारीक पाउडर बना लें।
    • इसमें 1–2 चम्मच शुद्ध नारियल तेल मिलाकर पेस्ट तैयार करें।
    • इस मिश्रण को बालों की जड़ों और स्कैल्प पर अच्छी तरह लगाएं।
    • 30–45 मिनट तक लगा रहने दें।
    • इसके बाद हल्के (माइल्ड) शैम्पू से बाल धो लें।

    इस हेयर मास्क का इस्तेमाल सप्ताह में 1–2 बार किया जा सकता है।

    ध्यान रखें

    यदि बाल बहुत तेजी से झड़ रहे हैं, सिर पर गोल-गोल पैच बन रहे हैं या अचानक गंजापन बढ़ रहा है, तो केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें। ऐसी स्थिति में त्वचा रोग विशेषज्ञ (Dermatologist) या योग्य चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि बाल झड़ने के पीछे कोई चिकित्सीय कारण भी हो सकता है।

    संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, तनाव पर नियंत्रण और सही हेयर केयर रूटीन अपनाने से भी बालों की सेहत बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।

  • दिखने में भले अजीब लगे, लेकिन पेट की सेहत के लिए किसी औषधि से कम नहीं है ये सब्जी..

    दिखने में भले अजीब लगे, लेकिन पेट की सेहत के लिए किसी औषधि से कम नहीं है ये सब्जी..

    दिखने में भले अजीब लगे, लेकिन पेट की सेहत के लिए किसी औषधि से कम नहीं है ये सब्जी..

    अरबी को अक्सर भारी और गैस बनाने वाली सब्जी मानकर लोग खाने से बचते हैं। लेकिन विशेषज्ञों और वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, सही मात्रा और सही तरीके से बनाई गई अरबी आंतों (Gut) की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हो सकती है। इसमें मौजूद रेजिस्टेंट स्टार्च, फाइबर और कई प्राकृतिक यौगिक पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

    अरबी क्यों है पेट के लिए फायदेमंद?

    विशेषज्ञों के मुताबिक, अरबी में मौजूद रेजिस्टेंट स्टार्च छोटी आंत में पूरी तरह पचता नहीं है। यह बड़ी आंत तक पहुंचकर वहां मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है। इससे आंतों का माइक्रोबायोम बेहतर रहता है और पाचन तंत्र मजबूत बनता है।

    1. रेजिस्टेंट स्टार्च से मिलते हैं ये फायदे

    अरबी में पाया जाने वाला रेजिस्टेंट स्टार्च फायदेमंद बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है। इसके परिणामस्वरूप शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (SCFAs) बनते हैं, जो आंतों की कोशिकाओं को ऊर्जा देने और उनकी सुरक्षा परत को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

    2. घुलनशील फाइबर से बेहतर पाचन

    अरबी में मौजूद घुलनशील फाइबर और प्राकृतिक म्यूसिलेज पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराते हैं। इससे पाचन प्रक्रिया संतुलित रहती है और कब्ज जैसी समस्याओं में भी राहत मिल सकती है।

    3. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

    कुछ किस्मों की अरबी में एंथोसायनिन, क्वेरसेटिन और क्लोरोजेनिक एसिड जैसे पॉलीफेनोल्स पाए जाते हैं। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव कम करने और आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं।

    किन लोगों के लिए हो सकती है फायदेमंद?

    • जिनकी पाचन शक्ति कमजोर रहती है।
    • जो फाइबर युक्त संतुलित आहार लेना चाहते हैं।
    • जो अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की जगह प्राकृतिक और पौष्टिक विकल्प अपनाना चाहते हैं।
    • जिनका लक्ष्य Gut Health को बेहतर बनाना है।

    अरबी खाते समय रखें ये बातें

    • अरबी को हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।
    • बहुत अधिक तेल या मसालों के साथ बनाने से इसके स्वास्थ्य लाभ कम हो सकते हैं।
    • यदि किसी को किडनी स्टोन, विशेष चिकित्सीय समस्या या विशेष डाइट का पालन करना हो, तो सेवन से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर है।

    संतुलित मात्रा में और सही तरीके से बनाई गई अरबी आपके आहार का पौष्टिक हिस्सा बन सकती है और पेट की सेहत को बेहतर रखने में मदद कर सकती है।

  • स्मोकर Vs नॉन-स्मोकर! वायरल स्कैन में दिखा फेफड़ों का डराने वाला अंतर,

    स्मोकर Vs नॉन-स्मोकर! वायरल स्कैन में दिखा फेफड़ों का डराने वाला अंतर,

    स्मोकर Vs नॉन-स्मोकर! वायरल स्कैन में दिखा फेफड़ों का डराने वाला अंतर,

    सिगरेट पीने की आदत धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला कर देती है। इसका असर सबसे पहले फेफड़ों पर पड़ता है, लेकिन कई लोगों को इसका नुकसान तब तक समझ नहीं आता, जब तक गंभीर समस्या सामने नहीं आ जाती। हाल ही में एक कंटेंट क्रिएटर द्वारा करवाए गए चेस्ट स्कैन ने स्मोकिंग के खतरों की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने रखी।

    कंटेंट क्रिएटर ने एक ऐसे व्यक्ति का चेस्ट स्कैन कराया, जो पिछले 10 वर्षों से नियमित रूप से स्मोकिंग कर रहा था। तुलना के लिए उन्होंने अपना भी स्कैन कराया, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। दोनों की रिपोर्ट में बड़ा अंतर देखने को मिला।

    स्कैन में क्या सामने आया?

    जिस व्यक्ति ने कभी धूम्रपान नहीं किया था, उसके फेफड़े सामान्य और स्वस्थ दिखाई दिए। वहीं लंबे समय से स्मोकिंग करने वाले व्यक्ति के फेफड़ों में कई जगह सिस्ट (Cysts) दिखाई दिए। डॉक्टरों के अनुसार, ये सिस्ट फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं।

    इसके अलावा स्मोकर के फेफड़े सामान्य से अधिक बड़े दिखाई दिए। विशेषज्ञों ने बताया कि यह लंग्स हाइपरइन्फ्लेशन (Lung Hyperinflation) का संकेत हो सकता है, जो तब होता है जब फेफड़े अपनी प्राकृतिक लचक खोने लगते हैं और पूरी तरह सिकुड़ नहीं पाते।

    क्या होते हैं एल्वियोलर सैक (Alveolar Sacs)?

    एल्वियोलर सैक फेफड़ों के सबसे अंतिम हिस्से में मौजूद बेहद छोटे-छोटे वायु थैले होते हैं। इन्हीं के जरिए शरीर में ऑक्सीजन पहुंचती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है। लगातार धूम्रपान करने से ये नाजुक संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं, जिससे सांस लेने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है।

    स्मोकिंग से होने वाले प्रमुख नुकसान

    • फेफड़ों की क्षमता कम हो सकती है।
    • बार-बार संक्रमण और लगातार खांसी की समस्या हो सकती है।
    • क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और एम्फायसीमा जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
    • लंबे समय तक धूम्रपान करने से फेफड़ों के कैंसर का जोखिम भी बढ़ जाता है।

    यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे छोड़ने की दिशा में उठाया गया हर कदम आपके फेफड़ों और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। सांस लेने में तकलीफ, लगातार खांसी या अन्य लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • बारिश में कौन-सी सब्जियां नहीं खानी चाहिए? एक्सपर्ट्स बताते हैं 4 सब्जियां जिनसे रखें परहेज..

    बारिश में कौन-सी सब्जियां नहीं खानी चाहिए? एक्सपर्ट्स बताते हैं 4 सब्जियां जिनसे रखें परहेज..

    बारिश में कौन-सी सब्जियां नहीं खानी चाहिए? एक्सपर्ट्स बताते हैं 4 सब्जियां जिनसे रखें परहेज..

    बारिश का मौसम आते ही चाय और पकौड़ों की याद अपने आप आने लगती है. ठंडी-ठंडी रिमझिम बरसते बादल गर्मी से राहत पहुंचाने हैं. लेकिन इस मौसम में बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. मानसून में हमारा डाइजेशन यानी पाचन तंत्र थोड़ा सुस्त हो जाता है. ऐसे में हम जो कुछ भी खाते हैं, उसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है. ​हरी सब्जियों को सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है और ये बात बिल्कुल सही है, लेकिन बरसात के मौसम में कुछ खास सब्जियों को खाने से बचना चाहिए. अगर आप इस मौसम में इन सब्जियों का परहेज नहीं करते, तो पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी परेशानी हो सकती है. तो ​आइए जानते हैं कि इस मौसम में आपको कौन सी 4 सब्जियां नहीं खानी चाहिए.

    ​1. हरी पत्तेदार सब्जियां-

    ​बारिश के मौसम में हवा में नमी यानी मॉइश्चर बहुत बढ़ जाता है. इस वजह से पत्तेदार सब्जियों के पत्तों पर छोटे-छोटे कीड़े, उनके अंडे और बैक्टीरिया आसानी से चिपक जाते हैं. कई बार ये कीड़े इतने बारीक होते हैं कि पानी से अच्छी तरह धोने के बाद भी नहीं निकलते. अगर आप इन्हें खा लेते हैं, तो ये पेट में जाकर इंफेक्शन फैला सकते हैं. इसलिए बरसात में पालक, लाल साग, मेथी और बंदगोभी जैसी चीजों से दूर रहना चाहिए.

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    बरसात में हरी सब्जियों को का सेवन नहीं करना चाहिए. Photo Credit: iStock

    ​2. फूलगोभी-

    ​बरसात के दिनों में फूलगोभी के गद्देदार हिस्सों में कीड़े छिपकर बैठ जाते हैं. अगर आप ध्यान से न देखें, तो ये कीड़े खाने में पक जाते हैं. इसके अलावा, इस मौसम में फूलगोभी खाने से गैस, एसिडिटी और पेट फूलने की समस्या भी हो सकती है.

    ​3. बैंगन-

    ​बैंगन में कीड़े लगना बहुत आम बात है, खासकर बरसात के मौसम में. इस मौसम में बैंगन के अंदर बारीक कीड़े और उनके अंडे आसानी से पनपते हैं. कई बार बाहर से बिल्कुल साफ दिखने वाला बैंगन अंदर से खराब निकलता है. कीड़े वाले बैंगन को खाने से पेट में तेज दर्द और फूड पॉइजनिंग हो सकती है.

    ​4. मशरूम-

    ​बरसात के दिनों में बाजार में मिलने वाले मशरूम में फंगस और बैक्टीरिया लगने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. मशरूम नमी वाली जगह पर उगते हैं, इसलिए बारिश के मौसम में इन पर बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं. खराब या ज्यादा दिन पुराना मशरूम खाने से आपको स्किन एलर्जी और पेट का भारी इंफेक्शन हो सकता है.

    क्या कहती है रिसर्च?

    FDA की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नमी वाले मौसम में खुली और पत्तेदार सब्जियों में ई-कोलाई और साल्मोनेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया बहुत तेजी से फैलते हैं, जो पेट के गंभीर इंफेक्शन का कारण बनते हैं.

  • क्या हर खाने के ऊपर नींबू निचोड़ना सही है? फायदे और नुकसान जानकर हो जाएंगे हैरान..

    क्या हर खाने के ऊपर नींबू निचोड़ना सही है? फायदे और नुकसान जानकर हो जाएंगे हैरान..

    क्या हर खाने के ऊपर नींबू निचोड़ना सही है? फायदे और नुकसान जानकर हो जाएंगे हैरान..

    अभी तक हमने सलाद, पोहा, आलू चाट और सूप जैसी चीजों में नींबू के रस का तड़का लगते हुए देखा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो सब्जी के ऊपर भी नींबू निचोड़कर खाना पसंद करते हैं? क्या आप भी ऐसा करते हैं? अगर हां, तो जान लें. आपकी ये आदत सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ा रही है, बल्कि शरीर को और भी कई तरह के फायदे पहुंचा रही है. खाने के ऊपर नींबू निचोड़कर खाने से क्या फायदे मिलते हैं, जानते हैं.

    दाल हो या कोई सब्जी, अगर आप सभी चीजों पर खाने के ऊपर नींबू निचोड़कर खा रहे हैं, तो समझ लें आपकी बॉडी को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं:

    पहला: पेट के लिए कमाल

    खाने के ऊपर नींबू का रस डालकर खाने से इसमें मौजूद विटामिन सी पाचन एंजाइम्स एक्टिव होते हैं, जिससे हैवी खाना आराम से पच जाता है. इतना ही नहीं, नींबू में पाया जाने वाला फाइबर पेट से जुड़ी दिक्कतें जैसे कब्ज, अपच और गैस को भी कम करने में मदद करता है. अगर आपका पेट खराब रहता है, तो आपको भी इस आदत को अपने डेली रूटीन में जरूर शामिल कर लेना चाहिए.

    दूसरा: आयरन का अवशोषण बढ़ाना

    अगर आप पालक, दाल या चने जैसी चीजों के ऊपर नींबू का रस निचोड़कर खाते हैं, तो ये आपके शरीर में आयरन के अवशोषण को डबल कर सकता है, जिससे कई तरह की बीमारियां जैसे एनीमिया से राहत पाई जा सकती है.

    क्या नहीं करना है?

    आपको एक बात का ध्यान रखना है कि नींबू को खाना पकाते समय नहीं, बल्कि पकने के बाद ऊपर से डालना है, नहीं तो आपके शरीर को विटामिन सी नहीं मिलेगा.

  • बार-बार डाई करने की जरूरत नहीं! सफेद बालों को नेचुरली काला दिखाने का आसान तरीका

    बार-बार डाई करने की जरूरत नहीं! सफेद बालों को नेचुरली काला दिखाने का आसान तरीका

    बार-बार डाई करने की जरूरत नहीं! सफेद बालों को नेचुरली काला दिखाने का आसान तरीका

    आज के समय में कम उम्र में ही लोगों के बाल सफेद हो रहे हैं. गलत खान-पान और बढ़ता प्रदूषण हमारे सफेद बालों की एक बड़ी वजह है. दरअसल जब बाल सफेद होने शुरू होते हैं, तो ज्यादातर लोग तुरंत बाजार में मिलने वाली हेयर डाई या मेहंदी का सहारा लेते हैं. ​लेकिन क्या आप जानते हैं कि केमिकल वाली डाई और बार-बार मेहंदी लगाने से बाल रूखे, बेजान और कमजोर हो सकते हैं, जी हां आपने बिल्कुल सही सुना. अगर आप भी सफेद बालों की वजह से परेशान हैं, तो ​आयुर्वेदाचार्य एवं योग गुरु डॉ. राम अवतार द्वारा बताए इस घरेलू उपाय को जरूर आजमाएं.

    ​क्यों खास है यह घरेलू नुस्खा?

    • करी पत्ता-
      करी पत्ते में विटामिन बी, बीटा-कैरोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं. यह बालों के प्राकृतिक रंग को बनाए रखने में मदद करते हैं और बालों को झड़ने से रोक सकते हैं.
    • ​मेथी के बीज-
      मेथी में प्रोटीन और निकोटिनिक एसिड होता है, जो बालों की जड़ों को पोषण देता है. इससे बाल मजबूत होते हैं, डैंड्रफ खत्म होता है और बालों में चमक आती है.
    • ​नारियल तेल-
       नारियल तेल बालों को अंदर तक नमी देता है. जब इसमें करी पत्ता और मेथी पकते हैं, तो इसके गुण कई गुना बढ़ जाते हैं.

    घर पर कैसे बनाएं ये तेल-

    ​इस तेल को बनाना बहुत ही आसान है. सबसे पहले आपको थोड़ा सा शुद्ध नारियल तेल लेना है. इसके साथ एक मुट्ठी ताजे करी पत्ते और 2 चम्मच मेथी दाना लें. एक लोहे की कढ़ाई या किसी बर्तन में नारियल तेल डालें. अब इसमें मेथी दाना और करी पत्ते मिला दें. तेल को धीमी आंच पर तब तक पकने दें जब तक कि मेथी दाना हल्का काला न हो जाए और करी पत्ते अपना रंग न छोड़ दें. जब तेल ठंडा हो जाए, तो इसे किसी कपड़े या छन्नी से छानकर कांच की शीशी में भर लें.

    कैसे ​इस्तेमाल करें?

    ​हफ्ते में कम से कम 2 से 3 बार इस तेल से अपने सिर और बालों की जड़ों में अच्छी तरह मालिश करें. ​तेल लगाने के बाद इसे कम से कम 1 से 2 घंटे तक बालों में लगा रहने दें. अगर चाहें तो इसे रात भर के लिए भी छोड़ सकते हैं. ​इसके बाद माइल्ड या हर्बल शैम्पू से बाल धो लें.

  • क्या घी सच में मोटापा और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है या फिर यह आयुर्वेद का एक छुपा हुआ अमृत है..

    क्या घी सच में मोटापा और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है या फिर यह आयुर्वेद का एक छुपा हुआ अमृत है..

    क्या घी सच में मोटापा और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है या फिर यह आयुर्वेद का एक छुपा हुआ अमृत है..

    आजकल बहुत से लोग घी से डरते हैं

    अक्सर कहा जाता है कि घी खाने से मोटापा बढ़ता है कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है और हार्ट की नसें ब्लॉक हो सकती हैं

    लेकिन आयुर्वेद में घी को अमृत तुल्य माना गया है सदियों से इसका उपयोग केवल भोजन के रूप में नहीं बल्कि स्वास्थ्य संरक्षण और कई पारंपरिक घरेलू प्रयोगों में भी किया जाता रहा है

    सवाल यह है कि क्या घी वास्तव में इतना नुकसानदायक है जितना आजकल माना जाता है या फिर हम इसके असली गुणों को भूल चुके हैं

    कब्ज और पेट साफ न होने की समस्या

    यदि सुबह पेट ठीक से साफ नहीं होता गैस रहती है या कब्ज की समस्या रहती है तो आयुर्वेद में घी को पाचन तंत्र के लिए उपयोगी माना गया है

    कुछ लोग रात को सोने से पहले या सुबह खाली पेट एक चम्मच देसी घी गुनगुने पानी या दूध के साथ लेते हैं

    कई लोगों को इससे मल त्याग में आसानी और पेट हल्का महसूस होने का अनुभव होता है

    गले की खराश और सूखी खांसी

    घी का उपयोग पारंपरिक रूप से गले की देखभाल में भी किया जाता रहा है

    कुछ लोग घी में हल्दी और काली मिर्च मिलाकर लेते हैं जबकि कुछ घी शहद और अदरक के रस का मिश्रण उपयोग करते हैं

    आयुर्वेद में घी और शहद को बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से बचने की सलाह दी गई है

    एसिडिटी और सीने की जलन

    बार बार एसिडिटी खट्टी डकारें या सीने में जलन की समस्या होने पर कुछ लोग सीमित मात्रा में घी का सेवन करते हैं

    आयुर्वेद में घी को पित्त शांत करने वाला माना गया है

    जोड़ों की अकड़न और दर्द

    उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों को घुटनों कलाई या अन्य जोड़ों में जकड़न महसूस होने लगती है

    आयुर्वेद के अनुसार घी वात दोष को संतुलित करने में सहायक माना जाता है

    कुछ लोग सीमित मात्रा में घी का सेवन करने के साथ बाहरी मालिश भी करते हैं

    महिलाओं के लिए विशेष महत्व

    आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से घी को स्त्री स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी माना गया है

    कई पारंपरिक परिवारों में महिलाओं को भोजन के साथ सीमित मात्रा में घी लेने की सलाह दी जाती रही है

    आंखों के नीचे डार्क सर्कल और रूखापन

    कुछ लोग रात में शुद्ध देसी घी से आंखों के नीचे हल्की मालिश करते हैं

    हालांकि इसका प्रभाव हर व्यक्ति में अलग अलग हो सकता है

    नाक की खुश्की और बंद नाक

    आयुर्वेद में नस्य की परंपरा का वर्णन मिलता है

    कुछ लोग नाक के सूखेपन या मौसमी परेशानी में सीमित मात्रा में घी का उपयोग करते हैं

    नाक में किसी भी प्रकार का पदार्थ डालने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर होता है

    अच्छी नींद के लिए

    कई परिवारों में आज भी सोने से पहले पैरों के तलवों पर घी की हल्की मालिश की जाती है

    आयुर्वेद के अनुसार इससे शरीर को आराम और शांति महसूस कराने में सहायता मिल सकती है

    कुछ जरूरी सावधानियां

    घी हमेशा सीमित मात्रा में लें

    शुद्ध और विश्वसनीय स्रोत का घी ही चुनें

    यदि आपको लिवर रोग गंभीर हृदय रोग पीलिया या कोई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही सेवन करें

    किसी भी घरेलू नुस्खे को इलाज का विकल्प न समझें

    आयुर्वेद घी को इतना महत्व क्यों देता है

    आयुर्वेद में घृत को केवल भोजन नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण अनुपान और रसायन माना गया है

    चरक संहिता अष्टांग हृदयम और अन्य आयुर्वेदिक ग्रंथों में घृत के अनेक उपयोगों का उल्लेख मिलता है

    यदि आप आयुर्वेद को उसके मूल ग्रंथों के संदर्भों सहित गहराई से समझना चाहते हैं तो हमारे पास सौ से अधिक दुर्लभ आयुर्वेदिक पुस्तकों और तीन सौ से अधिक सनातन ग्रंथों का डिजिटल संग्रह उपलब्ध है

    यदि आप इसकी जानकारी चाहते हैं तो कमेंट में केवल BOOK लिखें मैं उपलब्धता के अनुसार जानकारी साझा करने का प्रयास करूंगा

    अब आपकी बारी

    क्या आप रोज घी खाते हैं

    आपके घर में गाय का घी उपयोग होता है या भैंस का

    क्या आपने कभी घी का कोई घरेलू प्रयोग किया है

    आपके अनुसार घी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है या नुकसानदायक

    अपना अनुभव कमेंट में जरूर साझा करें आपका अनुभव दूसरे लोगों के लिए भी उपयोगी हो सकता है

    स्वास्थ्य संबंधी सूचना

    यह जानकारी केवल सामान्य शिक्षा और जागरूकता के उद्देश्य से साझा की गई है घी के संभावित लाभों से जुड़े कई दावे पारंपरिक आयुर्वेदिक मान्यताओं पर आधारित हैं और हर व्यक्ति पर समान रूप से लागू नहीं होते किसी भी स्वास्थ्य समस्या दवा या उपचार से संबंधित निर्णय लेने से पहले योग्य चिकित्सक या आयुर्वेदाचार्य से व्यक्तिगत परामर्श अवश्य लें

  • किडनी और लिवर को लंबे समय तक रखना है फिट? 30 की उम्र के बाद जरूर अपनाएं ये 5 देसी चीजें.

    किडनी और लिवर को लंबे समय तक रखना है फिट? 30 की उम्र के बाद जरूर अपनाएं ये 5 देसी चीजें.

    किडनी और लिवर को लंबे समय तक रखना है फिट? 30 की उम्र के बाद जरूर अपनाएं ये 5 देसी चीजें.

    हमारे शरीर में दो ऐसे अंग हैं जो दिन रात बिना रुके काम करते हैं किडनी और लिवर

    किडनी का काम शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना है जबकि लिवर भोजन को प्रोसेस करने पोषक तत्वों को संग्रहित करने और शरीर की अनेक महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद करता है

    समस्या यह है कि इन अंगों में होने वाला नुकसान अक्सर शुरुआती चरणों में कोई स्पष्ट संकेत नहीं देता जब तक जांच रिपोर्ट में बदलाव दिखाई देते हैं तब तक स्थिति काफी आगे बढ़ चुकी हो सकती है

    अच्छी बात यह है कि स्वस्थ जीवनशैली और कुछ पारंपरिक खाद्य पदार्थों को अपनी दिनचर्या में शामिल करके इन अंगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है

    जौ का पानी

    जौ को आयुर्वेद में महत्वपूर्ण माना गया है

    इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है जो मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को सहारा दे सकता है कई लोग जौ का पानी नियमित रूप से पीना पसंद करते हैं क्योंकि यह शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करता है

    सुबह और शाम हल्का जौ का पानी पीना एक अच्छा विकल्प हो सकता है

    खीरा और नींबू

    खीरे में पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है जिससे शरीर को पर्याप्त जल मिलता है

    नींबू में विटामिन सी और अन्य लाभकारी तत्व पाए जाते हैं पर्याप्त पानी और संतुलित आहार किडनी तथा संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं

    दोपहर में एक खीरा और सुबह गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीना कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा होता है

    आंवला

    आंवला आयुर्वेद का एक प्रसिद्ध रसायन माना जाता है

    यह एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी का अच्छा स्रोत है आयुर्वेदिक ग्रंथों में आंवला को दीर्घायु पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया गया है

    सुबह एक से दो ताजे आंवले या सीमित मात्रा में आंवला रस का सेवन किया जा सकता है

    हल्दी और काली मिर्च

    हल्दी भारतीय रसोई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है

    हल्दी में पाए जाने वाले तत्वों पर आधुनिक विज्ञान लगातार शोध कर रहा है पारंपरिक रूप से इसे सूजन कम करने और स्वास्थ्य को सहयोग देने वाला माना जाता है

    काली मिर्च के साथ लेने पर इसके कुछ सक्रिय तत्वों का अवशोषण बेहतर हो सकता है

    रात में हल्दी और एक चुटकी काली मिर्च वाला दूध या गुनगुना पानी लिया जा सकता है

    सहजन यानी मोरिंगा

    यदि किसी एक देसी पौधे को सुपरफूड कहा जाए तो सहजन उसका मजबूत दावेदार माना जाता है

    इसकी पत्तियां फलियां और पाउडर पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं आयुर्वेद में भी सहजन का विशेष महत्व बताया गया है

    सहजन की सब्जी दाल में इसकी पत्तियां या सीमित मात्रा में मोरिंगा पाउडर को आहार में शामिल किया जा सकता है

    लेकिन केवल ये पांच चीजें ही पर्याप्त नहीं हैं

    यदि आप वास्तव में किडनी और लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ रखना चाहते हैं तो कुछ आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है

    इन गलतियों से बचें

    अत्यधिक नमक का सेवन

    बिना डॉक्टर की सलाह के बार बार दर्द निवारक दवाओं का सेवन

    जरूरत से ज्यादा चाय और मीठे पेय पदार्थ पीना

    अक्सर लोग अच्छे खाद्य पदार्थ तो खाते हैं लेकिन इन आदतों को नहीं बदलते जिससे अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता

    आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार की नहीं बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा की भी बात करता है

    स्वास्थ्य संबंधी सूचना

    यह जानकारी केवल सामान्य शिक्षा और जागरूकता के उद्देश्य से साझा की गई है यदि आपको किडनी लिवर डायबिटीज हाई ब्लड प्रेशर या कोई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है तो किसी भी घरेलू उपाय या आहार में बदलाव करने से पहले योग्य चिकित्सक से व्यक्तिगत सलाह अवश्य लें

  • दांतों में सड़न बढ़ने से पहले जान लें ये 4 घरेलू नुस्खे, कैविटी से बचाव में हो सकते हैं असरदार..

    दांतों में सड़न बढ़ने से पहले जान लें ये 4 घरेलू नुस्खे, कैविटी से बचाव में हो सकते हैं असरदार..

    दांतों में सड़न बढ़ने से पहले जान लें ये 4 घरेलू नुस्खे, कैविटी से बचाव में हो सकते हैं असरदार..

    अक्सर लोग कहते हैं कि एक बार दांत में कैविटी बन जाए तो वह कभी ठीक नहीं हो सकती

    अधिकांश मामलों में यह बात सही होती है लेकिन यदि कैविटी शुरुआती अवस्था में हो तो कुछ उपाय दांतों को और अधिक खराब होने से बचाने तथा मुंह के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं

    सबसे बड़ी समस्या यह है कि कैविटी की शुरुआत में अक्सर कोई दर्द नहीं होता जब तक दर्द शुरू होता है तब तक कई बार दांत काफी प्रभावित हो चुका होता है और फिर फिलिंग रूट कैनाल या अन्य उपचार की जरूरत पड़ सकती है

    आयुर्वेद और आधुनिक शोध दोनों कुछ ऐसे सरल उपायों की ओर संकेत करते हैं जो मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया को नियंत्रित करने दांतों को मजबूत रखने और ओरल हेल्थ को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं

    मुलेठी यानी यष्टिमधु की दातून

    आयुर्वेद में यष्टिमधु का विशेष महत्व बताया गया है और पारंपरिक रूप से इसकी दातून मुख स्वास्थ्य के लिए उपयोग की जाती रही है

    मुलेठी में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं जो कैविटी पैदा करने वाले बैक्टीरिया की वृद्धि को कम करने में मदद कर सकते हैं

    यदि आपको नीम की दातून पसंद नहीं है तो मुलेठी एक अच्छा विकल्प हो सकती है

    सप्ताह में तीन से चार बार मुलेठी की दातून का उपयोग किया जा सकता है

    ग्रीन टी रिंस

    ग्रीन टी में पाए जाने वाले पॉलीफेनॉल मुंह के बैक्टीरिया और एसिड के प्रभाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं

    दोपहर या रात के भोजन के बाद गुनगुनी ग्रीन टी से लगभग तीस सेकंड तक कुल्ला करना ओरल हेल्थ के लिए लाभदायक हो सकता है

    ऑयल पुलिंग

    ऑयल पुलिंग आयुर्वेद की एक प्राचीन प्रक्रिया है

    सुबह खाली पेट एक चम्मच नारियल तेल को दस से पंद्रह मिनट तक मुंह में घुमाने से मुंह की सफाई बेहतर हो सकती है और बैक्टीरिया की मात्रा कम करने में मदद मिल सकती है

    शुरुआत में पांच मिनट से शुरू करके धीरे धीरे समय बढ़ाया जा सकता है

    चीज या पनीर

    बहुत से लोग यह सुनकर हैरान हो जाते हैं कि चीज और पनीर भी दांतों के लिए लाभदायक हो सकते हैं

    इनमें कैल्शियम फॉस्फेट और कैसीन जैसे तत्व पाए जाते हैं जो दांतों के एनामेल को मजबूत बनाए रखने में मदद कर सकते हैं

    भोजन के बाद थोड़ी मात्रा में चीज या ताजा पनीर चबाना लाभकारी माना जाता है

    यदि दांत में गड्ढा बन चुका है तेज दर्द है या संक्रमण है तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें और दंत चिकित्सक से जांच अवश्य कराएं

    आयुर्वेद क्या कहता है

    आयुर्वेद में दांतों की देखभाल केवल ब्रश करने तक सीमित नहीं मानी गई है

    दातून मुख शुद्धि संतुलित आहार और सही दिनचर्या को भी दंत स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना गया है

    स्वास्थ्य संबंधी सूचना

    यह जानकारी केवल सामान्य शिक्षा और जागरूकता के उद्देश्य से साझा की गई है यदि आपको दांतों में लगातार दर्द सूजन पस खून आना या कैविटी की समस्या है तो योग्य दंत चिकित्सक से जांच और उचित उपचार अवश्य कराएं

  • रोज खाएं ये 10 प्रोटीन फूड्स, 30 के बाद भी शरीर रहेगा दमदार और मसल्स मजबूत..

    रोज खाएं ये 10 प्रोटीन फूड्स, 30 के बाद भी शरीर रहेगा दमदार और मसल्स मजबूत..

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    आप चाहे 32 साल के हों या 52 साल के एक बात हमेशा याद रखिए

    इस समय जब आप यह पढ़ रहे हैं आपकी बॉडी के अंदर एक साइलेंट प्रक्रिया चल रही है

    30 साल की उम्र के बाद हर 10 साल में मसल्स का लगभग 3 से 5 प्रतिशत हिस्सा धीरे धीरे कम होने लगता है

    शुरुआत में इसका एहसास नहीं होता लेकिन समय के साथ सीढ़ियां चढ़ना कठिन लग सकता है हाथों की पकड़ कमजोर होने लगती है और छोटे छोटे काम भी थकाने लगते हैं

    मेडिकल भाषा में इसे सार्कोपीनिया कहा जाता है

    अच्छी बात यह है कि नियमित व्यायाम विशेष रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और पर्याप्त प्रोटीन के साथ संतुलित आहार अपनाकर इस प्रक्रिया की गति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है

    बहुत से लोग सोचते हैं कि प्रोटीन का मतलब केवल अंडा है जबकि कई शाकाहारी खाद्य पदार्थ भी प्रोटीन के बेहतरीन स्रोत हैं

    आइए जानते हैं ऐसे 10 प्रोटीन फूड्स के बारे में

    काला चना

    100 ग्राम सूखे काले चने में लगभग 20 से 22 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है

    इसमें आयरन फाइबर और मैग्नीशियम भी अच्छी मात्रा में होते हैं

    रातभर भिगोकर सुबह सेवन किया जा सकता है

    मूंग दाल

    100 ग्राम सूखी मूंग दाल में लगभग 24 ग्राम प्रोटीन होता है

    यह आसानी से पच जाती है इसलिए कई लोगों के लिए अच्छा विकल्प मानी जाती है

    पनीर

    100 ग्राम पनीर में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन और अच्छी मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है

    यह मांसपेशियों और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है

    सोयाबीन

    100 ग्राम सूखी सोयाबीन में लगभग 36 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है

    इसे पूर्ण प्रोटीन माना जाता है क्योंकि इसमें सभी आवश्यक अमीनो अम्ल मौजूद होते हैं

    दही

    दही प्रोटीन के साथ साथ प्रोबायोटिक्स का भी अच्छा स्रोत है

    स्वस्थ आंतें भोजन से पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण में मदद करती हैं

    बादाम

    बादाम में प्रोटीन विटामिन ई और मैग्नीशियम पाया जाता है जो शरीर के सामान्य कार्यों में सहायक होते हैं

    कद्दू के बीज

    कद्दू के बीज प्रोटीन मैग्नीशियम और जिंक से भरपूर होते हैं

    इन्हें सलाद या अन्य भोजन के साथ शामिल किया जा सकता है

    राजमा

    राजमा प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत है जो लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराने में मदद कर सकता है

    किनोवा

    किनोवा भी पूर्ण प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है और इसे चावल की तरह पकाकर खाया जा सकता है

    सबसे जरूरी बात

    बहुत से लोग एक साथ कई बदलाव करने की कोशिश करते हैं और कुछ दिनों बाद उन्हें छोड़ देते हैं

    बेहतर होगा कि आप एक या दो अच्छी आदतों से शुरुआत करें और धीरे धीरे अपनी डाइट तथा जीवनशैली में सुधार करें

    नियमित प्रोटीन का सेवन पर्याप्त नींद और सप्ताह में कम से कम दो से तीन दिन स्ट्रेंथ एक्सरसाइज मांसपेशियों को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं

    स्वास्थ्य संबंधी सूचना

    यह जानकारी केवल सामान्य शिक्षा और जागरूकता के उद्देश्य से साझा की गई है प्रोटीन की आवश्यकता हर व्यक्ति की उम्र वजन स्वास्थ्य और शारीरिक गतिविधि के अनुसार अलग हो सकती है यदि आपको किडनी की बीमारी या कोई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है तो आहार में बड़ा बदलाव करने से पहले योग्य चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें