Category: Madhya Pradesh

  • करोड़ों में टेस्टिकल्स बिकने का झूठा दावा, खौफनाक साजिश और भोपाल मर्डर… मास्टरमाइंड छात्र की पूरी कहानी!​​​​​​

    करोड़ों में टेस्टिकल्स बिकने का झूठा दावा, खौफनाक साजिश और भोपाल मर्डर… मास्टरमाइंड छात्र की पूरी कहानी!​​​​​​

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    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 16 साल के एक लड़के की हत्या के मामले ने पुलिस को भी हैरान कर दिया है. पुलिस के मुताबिक इस वारदात के पीछे इंसानी अंडकोष (Testicles) को करोड़ों रुपये में बेचने का झूठा दावा था. सोशल मीडिया पर वायरल एक रील में कथित तौर पर दावा किया गया था कि खाड़ी देशों में टेस्टिकल्स की कीमत करोड़ों रुपये हो सकती है. इसी फर्जी जानकारी से प्रभावित होकर आरोपियों ने एक नाबालिग को अपना निशाना बनाया.

    पुलिस ने इस मामले में 20 साल के BBA छात्र जोहेब खान को कथित मास्टरमाइंड बताया है. जांच के अनुसार जोहेब ने खुद को मेडिकल स्टूडेंट बताकर अपने साथियों के बीच इस झूठे दावे को सच साबित करने की कोशिश की थी. उसने चार लोगों को कथित तौर पर समझाया कि टेस्टिकल्स को 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये तक में बेचा जा सकता है. हैरानी की बात यह है कि हत्या के वक्त जोहेब मौके पर मौजूद नहीं था, बल्कि वीडियो कॉल के जरिए आरोपियों को निर्देश देता रहा.

    पुलिस के मुताबिक इस वारदात को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने दो बार किसी लड़के को अपने जाल में फंसाने की कोशिश की थी. पहली कोशिश में एक लड़के को 100 रुपये देने का लालच देकर झगड़े में मदद करने के बहाने बुलाने की योजना बनाई गई, लेकिन वह वहां पहुंचा ही नहीं. इसके बाद दूसरी कोशिश में एक अन्य लड़के को इसी तरह निशाना बनाने की कोशिश हुई.

    वह युवक आरोपियों से भिड़ गया और किसी तरह वहां से भाग निकला, जिसके बाद उसके खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हुआ. इन दोनों कोशिशों के बाद आरोपियों ने 16 साल के उस लड़के को निशाना बनाया, जो भोपाल के इकबाल मैदान और मोती मस्जिद इलाके में पेन और की-रिंग बेचकर अपना गुजारा करता था. पुलिस के अनुसार 6 अगस्त को दो नाबालिग आरोपी उसके पास पहुंचे.

    उन्होंने उसे खटलापुरा के पास झगड़े में मदद करने के बहाने अपने साथ चलने के लिए तैयार किया. इसके बाद उसे धोबी घाट की तरफ ले जाया गया, जहां कथित तौर पर उसकी हत्या कर दी गई. पुलिस की जांच के मुताबिक लड़के को धोबी घाट के पास ले जाने के बाद आरोपियों ने उस पर चाकू से हमला किया. गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई.

    इसके बाद आरोपियों ने ब्लेड की मदद से उसके टेस्टिकल्स निकाल लिए. पुलिस का कहना है कि पूरी वारदात के पीछे यही सोच थी कि इन अंगों को किसी खरीदार को बेचकर बड़ी रकम हासिल की जा सकती है. हत्या के बाद आरोपी शव को वहीं छोड़कर फरार हो गए. 10 अगस्त को धोबी घाट के पास लोअर लेक से किशोर का सड़ा-गला शव बरामद किया गया.

    पोस्टमार्टम में शरीर पर घातक चोटों की पुष्टि हुई और यह भी सामने आया कि उसके टेस्टिकल्स निकाल दिए गए थे. पुलिस के सामने मृतक की पहचान भी तुरंत नहीं हो सकी. करीब पांच दिन बाद उसकी मां की गुमशुदगी की शिकायत और शरीर पर बने टैटू की मदद से उसकी पहचान की गई. पुलिस के मुताबिक हत्या के बाद आरोपियों ने निकाले गए अंगों को करीब दो दिन तक एक मकान की छत पर बर्फ में पैक करके रखा.

    उनका कथित मकसद किसी ऐसे व्यक्ति को तलाशना था, जो इन अंगों को खरीद सके. लेकिन जल्द ही पूरी योजना बुरी तरह फेल हो गई. आरोपियों को न तो कोई खरीदार मिला और न ही उन्हें यह जानकारी थी कि मानव ऊतक को किस तरह सुरक्षित रखा जाए या उसकी बिक्री कैसे की जाए.

    जांच में पुलिस को पता चला कि इसके बाद जोहेब खान ने अपने साथियों को इन अंगों को अलग-अलग जलाशयों में फेंकने के लिए कहा. आरोपियों ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया कि टेस्टिकल्स को भोपाल की अपर लेक और लोअर लेक में फेंका गया. अब पुलिस इन दोनों झीलों में संभावित जगहों की तलाश कर रही है, ताकि सबूत बरामद किए जा सकें.

    मामले की जांच कर रहे ACP संतोष पटेल के मुताबिक आरोपियों को रिमांड पर लेकर उनसे उन जगहों की जानकारी जुटाई जा रही है, जहां कथित तौर पर अंग फेंके गए थे. पुलिस बुधवार को अपर लेक और लोअर लेक में गोताखोरों की मदद से तलाशी अभियान चलाने की तैयारी में है. हालांकि दोनों झीलों का पानी गहरा और काफी गंदा होने की वजह से तलाशी आसान नहीं होगी.

    जांच एजेंसियों का मानना है कि अगर निकाले गए अंग बरामद हो जाते हैं तो इससे वारदात की कड़ियों को जोड़ने में काफी मदद मिल सकती है. इससे पुलिस आरोपियों के बयानों की भी पुष्टि कर सकेगी. फिलहाल जांच टीम उन लोगों की भी पहचान कर चुकी है, जिनसे आरोपियों ने कथित तौर पर अंग बेचने के लिए संपर्क किया था. पुलिस इन लोगों से पूछताछ कर रही है कि क्या वास्तव में किसी तरह की खरीद-फरोख्त की योजना बनाई गई थी.

    पुलिस के मुताबिक इस साजिश को विश्वसनीय दिखाने के लिए जोहेब खान ने खुद को मेडिकल स्टूडेंट बताया था. उसने ऑनलाइन एक एप्रन, स्टेथोस्कोप और थर्मामीटर खरीदे थे. इन चीजों का इस्तेमाल वह अपने साथियों के सामने डॉक्टर या मेडिकल स्टूडेंट जैसा दिखने के लिए करता था. जांचकर्ताओं को शक है कि उसने इन्हीं सामानों के जरिए साथियों को मानव शरीर और कथित अंग निकालने की प्रक्रिया के बारे में प्रभावित करने की कोशिश की.

    पुलिस ने एप्रन, स्टेथोस्कोप और थर्मामीटर समेत संबंधित सामान बरामद कर लिया है. जांच के मुताबिक जोहेब ने अपने साथियों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि टेस्टिकल्स की कीमत करोड़ों रुपये मिल सकती है. हत्या के समय वह घटनास्थल पर नहीं था, लेकिन वीडियो कॉल के जरिए आरोपियों के संपर्क में था और कथित तौर पर उन्हें निर्देश दे रहा था.

    पुलिस को अभी तक इस मामले में किसी संगठित ऑर्गन ट्रैफिकिंग रैकेट से सीधे जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला है. जांच में सामने आया है कि वारदात की शुरुआती वजह सोशल मीडिया पर फैला एक फर्जी दावा था. पुलिस के अनुसार मानव टेस्टिकल्स को खाड़ी देशों में करोड़ों रुपये में बेचे जाने की बात एक सोशल मीडिया होक्स है और इसका कोई आधार नहीं है.

    फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने जिन लोगों से संपर्क किया था, क्या वे वास्तव में अंग खरीदने के लिए तैयार थे या फिर पूरी योजना केवल आरोपियों की गलत जानकारी और भ्रम पर आधारित थी. पुलिस के लिए सबसे अहम कड़ी उन कथित अंगों की बरामदगी है, जिन्हें आरोपियों ने अपर लेक और लोअर लेक में फेंकने की बात कही है. मामले की जांच जारी है और पुलिस आरोपियों के बयानों की तस्दीक कर रही है.

  • एक हिंदू, एक मुस्लिम… विदिशा में एक ही फंदे पर लटके मिले दो जिगरी दोस्त, परिवार ने जताया हत्या का शक, गांव में पसरा मातम..​​​​​​

    एक हिंदू, एक मुस्लिम… विदिशा में एक ही फंदे पर लटके मिले दो जिगरी दोस्त, परिवार ने जताया हत्या का शक, गांव में पसरा मातम..​​​​​​

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    मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां आदमपुर गांव के पास खेत में दो जिगरी दोस्तों के शव एक ही पेड़ पर एक ही रस्सी के सहारे लटके मिले. मृतकों की पहचान 22 साल के आकाश मीणा और 21 साल के आरिफ उर्फ बाबू के रूप में हुई है. दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे और बेहद करीबी दोस्त बताए जा रहे हैं. इस घटना के बाद आदमपुर गांव में मातम पसर गया और दोनों परिवारों में चीख-पुकार मच गई.

    जानकारी के मुताबिक, आकाश और आरिफ शनिवार रात अपने-अपने घर से विदिशा घूमने जाने की बात कहकर निकले थे. देर रात तक दोनों वापस नहीं लौटे तो परिवार के लोग परेशान हो गए और उनकी तलाश शुरू कर दी. परिजन रातभर दोनों को आसपास के इलाकों में तलाशते रहे, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला. रविवार सुबह पास के केवट गांव के एक खेत में दो युवकों के शव मिलने की सूचना मिली. मौके पर पहुंचे परिजनों और ग्रामीणों ने शवों की पहचान आकाश और आरिफ के रूप में की.

    दोनों दोस्तों की उम्र कम थी और वे लंबे समय से एक-दूसरे के साथ रहते और काम करते थे. ग्रामीणों के मुताबिक, आकाश और आरिफ अक्सर खेतों में साथ काम करते थे. वे अपने खेतों में काम करने के अलावा दूसरे किसानों के खेतों में भी मजदूरी करते थे. गांव वालों का कहना है कि दोनों का किसी से कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया था. ऐसे में दोनों की एक साथ मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

    मृतक आकाश मीणा, उदय सिंह मीणा का बेटा था और दो भाइयों में बड़ा था. उसकी शादी कुछ महीने पहले ही हुई थी. परिवार के पास अपनी जमीन नहीं है और वे मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं. वहीं आरिफ उर्फ बाबू, शहजाद अली का बेटा था और तीन भाइयों में सबसे छोटा था. उसके परिवार में एक बहन भी है और परिवार के पास करीब चार बीघा जमीन बताई गई है, जबकि खेती के साथ कृषि मजदूरी से भी परिवार की आय होती है.

    घटना की जानकारी मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने दोनों शवों को पेड़ से नीचे उतरवाया और पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया. मौके पर फॉरेंसिक टीम और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी पहुंचकर जांच की. पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ आसपास के ग्रामीणों से पूछताछ की. अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत की असली वजह और हालात का पता लगाने की कोशिश की जा रही है.

    इस घटना को लेकर दोनों परिवारों ने हत्या की आशंका जताई है. परिवार वालों का कहना है कि घर में किसी तरह का विवाद नहीं था और उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि दोनों दोस्त एक साथ इतना बड़ा कदम क्यों उठाएंगे. आकाश के पिता ने बताया कि दोनों घर से घूमने जाने की बात कहकर निकले थे और रातभर वापस नहीं आए. सुबह बच्चों की मौत की खबर मिली, जिसके बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.

    कुछ ग्रामीणों ने दावा किया है कि दोनों शवों पर चोट के निशान दिखाई दे रहे थे और जब शव मिले तो उनके पैर जमीन को छू रहे थे. हालांकि पुलिस ने इन दावों की अभी पुष्टि नहीं की है. पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है. यह भी पता लगाया जा रहा है कि मौत से पहले दोनों किन लोगों के संपर्क में थे और रात में उनके साथ क्या हुआ था?

    पुलिस अब दोनों युवकों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और उनके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी जुटा रही है. परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों से भी पूछताछ की जा रही है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों की मौत आत्महत्या है या इसके पीछे कोई और वजह है. फिलहाल, आत्महत्या की वजह भी पुलिस के लिए पहेली बनी हुई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.

    एक ही गांव के दो जिगरी दोस्तों की एक साथ मौत से पूरे आदमपुर में गम का माहौल है, जिन दो दोस्तों को ग्रामीण अक्सर साथ देखते थे, उनकी अर्थियां भी एक साथ उठीं. परिवारों के लिए यह घटना जिंदगी भर का दर्द बन गई है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर रात में घूमने निकले आकाश और आरिफ खेत तक कैसे पहुंचे और उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई. पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही इस दर्दनाक घटना की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी.

  • सरकारी दफ्तर में ‘राजा बाबू’, शाही बर्थडे मनाने हाथी पर चढ़कर पहुंचे ऑफिस..​​​​​​

    सरकारी दफ्तर में ‘राजा बाबू’, शाही बर्थडे मनाने हाथी पर चढ़कर पहुंचे ऑफिस..​​​​​​

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    उज्जैन में बिजली कंपनी के एक सरकारी कार्यालय में जन्मदिन का जश्न सुर्खियों में आ गया है. यहां नियम-कायदों को ताक पर रखकर सहायक यंत्री का जन्मदिन मनाया गया. ढोल-नगाड़ों के साथ हाथी पर सवार होकर अधिकारी की एंट्री हुई और कार्यालय के भीतर केक काटकर पार्टी मनाई गई. अब इस जश्न का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभागीय कार्रवाई की बात कही जा रही है.

    मामला उज्जैन के मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के वल्लभ नगर जोन का है. यहां पदस्थ सहायक यंत्री रविकांत मालवीय के जन्मदिन समारोह के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं.

    कार्यालय के अंदर काटा गया केक
     वायरल वीडियो में सहायक यंत्री ढोल-धमाकों के बीच हाथी पर सवार होकर कार्यालय परिसर में प्रवेश करते दिखाई दे रहे हैं. इसके बाद कर्मचारी ढोल की थाप पर नाचते नजर आए. इतना ही नहीं, कार्यालय के अंदर ही केक काटकर जन्मदिन का जश्न मनाया गया.

    बताया जा रहा है कि रविकांत मालवीय का जन्मदिन रविवार को था, लेकिन सोमवार को समारोह के फोटो और वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया. सरकारी कार्यालय में इस तरह जश्न मनाए जाने को लेकर विभागीय नियमों और कार्यालय की गरिमा पर सवाल उठने लगे हैं.

    सहायक यंत्री को नोटिस जारी
    कार्यालय में इस तरह जन्मदिन मनाना उचित और कार्यालय की गरिमा के अनुरूप नहीं है. मामले में सहायक यंत्री को नोटिस जारी किया जाएगा. साथ ही भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सभी कर्मचारियों को भी स्पष्ट हिदायत दी जाएगी.

    वहीं, सहायक यंत्री रविकांत मालवीय ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनका जन्मदिन रविवार को कार्यालय की कॉलोनी परिसर में मनाया गया था. उनका कहना है कि कार्यालय 24 घंटे खुला रहता है और पार्टी के लिए अलग से कार्यालय नहीं खुलवाया गया. अब देखना होगा कि वायरल वीडियो के बाद बिजली कंपनी इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और सरकारी कार्यालय की गरिमा से जुड़े इस जश्न पर विभाग किस तरह का फैसला लेता है.

  • बच्चों को स्कूल भेजकर पत्नी की हत्या, टीवी की आवाज तेज कर छिपाए खून के निशान; फिर बच्चों को ही थमा गया मां का सामान, घर लौटे तो सामने पड़ा लहूलुहान शव..​​​​​​

    बच्चों को स्कूल भेजकर पत्नी की हत्या, टीवी की आवाज तेज कर छिपाए खून के निशान; फिर बच्चों को ही थमा गया मां का सामान, घर लौटे तो सामने पड़ा लहूलुहान शव..​​​​​​

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    इंदौर के पास स्थित डाक विभाग की ‘डाक कॉलोनी’ में 11 जुलाई 2026 की सुबह एक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने एक परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। घर में रहने वाली असिस्टेंट पोस्ट मास्टर उर्मिला सैनी की उसके पति अखिलेश ने कथित तौर पर चाकू से हत्या कर दी।

    सबसे दर्दनाक बात यह थी कि वारदात के समय घर में सिर्फ पति-पत्नी थे। दोनों बच्चे स्कूल जा चुके थे। अखिलेश ने कथित तौर पर इसी मौके को हत्या के लिए चुना, ताकि घर में कोई मौजूद न हो।

    उसे शायद अंदाजा था कि अगर बच्चों को कुछ पता चला तो उसकी योजना बिगड़ सकती है।

    बच्चों के स्कूल जाते ही घर में छाया खौफ

    उस सुबह रोज की तरह दोनों बच्चे स्कूल चले गए थे। उर्मिला घर पर थी और अखिलेश भी वहीं मौजूद था।

    पुलिस जांच के अनुसार, अखिलेश ने कथित तौर पर पहले से पत्नी की हत्या की योजना बना रखी थी।

    आरोप है कि बच्चों के घर से निकलते ही उसने उर्मिला पर चाकू से हमला कर दिया।

    उर्मिला ने बचने की कोशिश की और चीख-पुकार मचाई होगी, लेकिन अखिलेश ने कथित तौर पर उसकी आवाज दबाने के लिए घर में टीवी की आवाज बहुत तेज कर दी।

    बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था, जबकि घर के भीतर एक महिला की जिंदगी खत्म हो रही थी।

    हत्या के बाद भी नहीं घबराया आरोपी

    उर्मिला की हत्या के बाद अखिलेश ने कथित तौर पर खुद को बचाने की तैयारी शुरू कर दी।

    उसने खून से सने कपड़े घर के पास बने एक चेंबर में छिपा दिए।

    इसके बाद वह वापस घर आया और सामान्य तरीके से नहाया।

    कपड़े बदले, माथे पर टीका लगाया और ऐसा व्यवहार किया जैसे घर में कुछ हुआ ही न हो।

    लेकिन उसके अगले कदम ने इस पूरी घटना को और भी विचलित करने वाला बना दिया।

    पत्नी का सामान लेकर बच्चों के स्कूल पहुंचा

    अखिलेश ने कथित तौर पर उर्मिला का कीमती हार, एटीएम कार्ड, स्कूटी और घर की चाबी एक पॉलीथिन बैग में रख ली।

    इसके बाद वह अपने बच्चों के स्कूल पहुंच गया।

    वहां उसने बेटी को वह बैग देते हुए कहा कि इसमें उसकी मां का कीमती सामान रखा है और इसे संभालकर रखना।

    बैग में घर की चाबी और एटीएम कार्ड के पिन से जुड़ा कागज भी होने की बात उसने बच्चों को बताई।

    इसके बाद उसने बच्चों से कहा कि वह और उनकी मां जरूरी काम से भोपाल जा रहे हैं और अगले दिन तक वापस लौट आएंगे।

    बच्चों को दिया ऐसा निर्देश, जिसका सच उन्हें बाद में पता चला

    अखिलेश ने बच्चों से कहा कि स्कूल की छुट्टी के बाद वे छोटे भाई को साथ लेकर सीधे अपनी पूजा मौसी के घर चले जाएं।

    यह कहकर वह वहां से निकल गया।

    बच्चों के लिए उस समय यह सिर्फ पिता की कही एक सामान्य बात थी। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनकी मां घर में अकेली नहीं बल्कि हमेशा के लिए खामोश हो चुकी है।

    दोपहर में बच्चे घर लौटे तो पैरों तले जमीन खिसक गई

    स्कूल की छुट्टी के बाद दोनों बच्चे बताए गए निर्देश के मुताबिक मौसी के घर जाने के बजाय अपने कपड़े बदलने के लिए घर पहुंच गए।

    जैसे ही उन्होंने घर में कदम रखा, उनकी नजर उस दृश्य पर पड़ी जिसे वे जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे।

    घर में उनकी मां उर्मिला का खून से लथपथ शव पड़ा था।

    दोनों बच्चे घबरा गए और जोर-जोर से रोने लगे।

    उनकी आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे।

    पड़ोसियों ने जब घर के अंदर जाकर उर्मिला का शव देखा तो वे भी स्तब्ध रह गए।

    कुछ ही देर पहले जिस घर में एक मां अपने बच्चों के लौटने का इंतजार कर रही होगी, उसी घर में अब उसका शव पड़ा था।

    पति पर था पत्नी के चरित्र को लेकर शक

    इस मामले में पुलिस के सामने पति अखिलेश के कथित शक की बात भी सामने आई।

    बताया गया कि वह पत्नी को लेकर काफी शंकालु रहता था। पति के इसी संदेह और वैवाहिक तनाव ने कथित तौर पर रिश्ते को बेहद खराब कर दिया था।

    हालांकि, किसी भी हत्या के पीछे वास्तविक कारण और आरोपी की भूमिका पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर ही तय होती है।

    लेकिन जिस तरह वारदात को अंजाम देने के बाद बच्चों को गुमराह करने की कोशिश की गई, उससे जांचकर्ताओं के सामने कई सवाल खड़े हो गए।

    वारदात के बाद भी खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश

    इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह था कि हत्या के बाद अखिलेश ने कथित तौर पर खुद को सामान्य दिखाने की पूरी कोशिश की।

    खून से सने कपड़े छिपाना, नहाकर कपड़े बदलना, माथे पर टीका लगाना और फिर बच्चों के स्कूल पहुंचना—ये सभी कदम कथित तौर पर इस तरह उठाए गए जैसे कुछ हुआ ही न हो।

    लेकिन घर में पड़ा उर्मिला का शव उसके बनाए पूरे झूठ को सामने ले आया।

    दो बच्चों से एक साथ छिन गया पूरा परिवार

    इस घटना का सबसे बड़ा खामियाजा दोनों बच्चों को भुगतना पड़ा।

    एक तरफ उनकी मां की हत्या हो चुकी थी और दूसरी तरफ उनके पिता पर ही उस हत्या का आरोप लगा।

    जिन बच्चों को उस सुबह स्कूल भेजते समय शायद यह पता भी नहीं था कि शाम तक उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाएगी, वे दोपहर में घर लौटे तो उनके सामने उनकी मां की लाश थी।

    यह सिर्फ एक हत्या नहीं थी, बल्कि एक परिवार के टूट जाने की घटना थी।

    शक जब रिश्ते पर भारी पड़ जाए

    पति-पत्नी के बीच किसी भी तरह का शक रिश्ते में तनाव पैदा कर सकता है। लेकिन जब शक हिंसा का रूप ले लेता है तो उसका परिणाम बेहद भयावह हो सकता है।

    उर्मिला और अखिलेश की यह कहानी भी इसी सवाल को सामने रखती है कि रिश्ते में पैदा हुए संदेह और विवाद को समय रहते बातचीत, परिवार या उचित सहायता के जरिए सुलझाना कितना जरूरी है।

    एक परिवार, जिसमें मां नौकरी करती थी, पिता साथ था और दो बच्चे स्कूल जाते थे, कुछ ही घंटों में बिखर गया।

    नोट: यह कहानी उपलब्ध सामग्री के आधार पर कहानी शैली में पुनर्लिखी गई है। हत्या और आरोपी की भूमिका से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगी।

  • पहले एयर होस्टेस, फिर बनीं DSP… अब लटकी गिरफ्तारी की तलवार, कौन हैं नेहा पच्चीसिया, जिन पर हुई FIR..?

    पहले एयर होस्टेस, फिर बनीं DSP… अब लटकी गिरफ्तारी की तलवार, कौन हैं नेहा पच्चीसिया, जिन पर हुई FIR..?

    पहले एयर होस्टेस, फिर बनीं DSP... अब लटकी गिरफ्तारी की तलवार, कौन हैं नेहा पच्चीसिया, जिन पर हुई FIR?

    एक वक्त था जब नेहा पच्चीसिया आसमान में उड़ान भरती थीं. नौकरी थी एयर होस्टेस की. फिर उन्होंने MPPSC का एग्जाम दिया, पुलिस सेवा में आईं और खाकी वर्दी पहन ली. लेकिन अब कहानी का सीन पूरी तरह बदल गया है. मध्य प्रदेश के कटनी में पदस्थ CSP नेहा पच्चीसिया के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है. आरोप जमीन के एक सौदे में दबाव बनाने, धोखाधड़ी और आपराधिक सांठगांठ से जुड़े हैं. उनके साथ दो और लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है.

    ये FIR कटनी के कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है. यह कार्रवाई विभागीय जांच के बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर हुई. कटनी SP अभिनय विश्वकर्मा ने FIR दर्ज होने की पुष्टि की है. यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई. इसके पीछे शिकायतों, विभागीय जांच और एक हत्या के केस से जुड़ी जमीन की पूरी कहानी है. एयर होस्टेस से DSP बनीं नेहा पच्चीसिया की कहानी FIR तक कैसे पहुंची? नेहा पच्चीसिया ने अपने करियर की शुरुआत पुलिस से नहीं की थी.

    नेहा पहले एयर होस्टेस थीं. लेकिन बाद में उन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी का फैसला किया. MPPSC की परीक्षा पास की और पुलिस सेवा में आ गईं. साल 2016 में उन्होंने MPPSC में 20वीं रैंक हासिल की. इसके बाद उनका सफर पुलिस विभाग में आगे बढ़ता गया.

    यानी एक तरफ एविएशन की ग्लैमर वाली नौकरी से खाकी वर्दी तक का सफर था. लेकिन साल 2026 आते-आते उनके नाम के साथ विवादों की खबरें जुड़ने लगीं. जुलाई में एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी ने नेहा पच्चीसिया पर अवैध वसूली का आरोप लगाया.

    शिकायत के बाद कटनी पुलिस ने कार्रवाई की. उनके ड्राइवर केशव सिंह को सस्पेंड कर दिया गया. नेहा पच्चीसिया से तीन थानों का प्रभार भी वापस ले लिया गया. मामले की जांच एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को दी गई. अब तक कहानी एक शिकायत और विभागीय कार्रवाई तक थी. लेकिन इसके बाद एक दूसरा मामला सामने आया.

    एक युवक की हत्या के मामले में आकाश लोधी नाम के शख्स को गिरफ्तार किया गया था. बाद में उसे डिफॉल्ट बेल मिल गई. आरोप लगा कि हत्या के मामले में समय सीमा के भीतर चालान पेश नहीं किया गया था. जेल से बाहर आने के बाद आकाश लोधी ने एक और गंभीर आरोप लगाया. उसका कहना था कि गिरफ्तारी के बाद उसकी जमीन को लेकर उसके परिवार पर दबाव बनाया गया. और यहीं से कहानी पुलिस की कार्रवाई से निकलकर जमीन के सौदे तक पहुंचती है.

    82 लाख की जमीन, रजिस्ट्री 18 लाख में?

    मामला कटनी के कुठला थाना क्षेत्र के कन्हवारा गांव की जमीन से जुड़ा है. शिकायत और विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, जमीन की सरकारी गाइडलाइन कीमत करीब 82 लाख 86 हजार रुपये थी. लेकिन आरोप है कि इसकी रजिस्ट्री सिर्फ 18 लाख 20 हजार रुपये में कराई गई. कागजों में करीब 15 लाख रुपये चेक से और 3.20 लाख रुपये नकद भुगतान दिखाया गया. अब यहां एक और रकम सामने आती है.

    शिकायतकर्ता आकाश लोधी का दावा है कि जमीन का सौदा करीब 1 करोड़ 7 लाख रुपये में हुआ था. लेकिन रजिस्ट्री के वक्त उसे सिर्फ 15 लाख रुपये का चेक दिया गया और बाकी रकम सात दिन में देने की बात कही गई. लेकिन जब बाकी पैसा नहीं मिला तो परिवार ने शिकायत की.

    आकाश लोधी का आरोप है कि उसके पिता रमेश लोधी को CSP नेहा पच्चीसिया के घर दो दिन तक बैठाकर रखा गया. इसके बाद सरकारी वाहन से उन्हें जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए ले जाया गया. परिवार का आरोप है कि पुलिसिया दबाव की वजह से जमीन का सौदा कराया गया. लेकिन जांच में पैसों का एक लेनदेन सामने आया, जिसने इस कहानी को और पेचीदा बना दिया.

    जांच के मुताबिक, जमीन के खरीदार मारूफ अहमद हनफी के खाते में 15 लाख रुपये क्षितिज राज के अकाउंट से ट्रांसफर किए गए. शिकायत में क्षितिज राज को नेहा पच्चीसिया का कथित पार्टनर बताया गया है. यानी जमीन का खरीदार अलग, पैसा भेजने वाला अलग और आरोपों के केंद्र में पुलिस अधिकारी अलग. जांच करने वालों के सामने सवाल था- जमीन के इस सौदे में पैसा आखिर किसका था और किसके कहने पर ट्रांसफर हुआ?

    रमेश लोधी ने पैसे नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की. जमीन के नामांतरण पर भी आपत्ति दर्ज कराई. इसके बाद शिकायतों का दायरा बढ़ा और मामले की जांच जबलपुर रेंज के IG के निर्देश पर IPS अनु बेनीवाल को सौंपी गई. जांच में जमीन के सौदे, पैसों के लेनदेन और दबाव बनाने के आरोपों को देखा गया. इसके साथ ही नेहा पच्चीसिया से जुड़े दूसरे मामलों की भी जांच चल रही थी.

    अब 22 अगस्त से पहले की कार्रवाई में कहानी यहां पहुंची कि कटनी के कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई. नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज और मारूफ अहमद हनफी को भी आरोपी बनाया गया है. कटनी SP अभिनय विश्वकर्मा ने FIR दर्ज होने की पुष्टि की है.

  • ‘मैं सिर्फ एक बार उससे बात करना चाहती थी…’, मंगेतर ने शादी से किया इनकार, तो युवती ने उठाया खौफनाक कदम..

    ‘मैं सिर्फ एक बार उससे बात करना चाहती थी…’, मंगेतर ने शादी से किया इनकार, तो युवती ने उठाया खौफनाक कदम..

    'मैं सिर्फ एक बार उससे बात करना चाहती थी…', मंगेतर ने शादी से किया इनकार, तो युवती ने उठाया खौफनाक कदम

    इंदौर के विजय नगर क्षेत्र में सगाई टूटने के बाद 19 वर्षीय युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। स्वर्ण बाग कॉलोनी निवासी मारिया ने गुरुवार देर रात कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया। तबीयत बिगड़ने पर छोटी बहन ने उससे वजह पूछी तो उसने जहर खाने की बात बताई। परिजन उसे तुरंत एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    मृतका के पिता उमर शेख के अनुसार, मारिया की सगाई 15 जून 2025 को आजाद नगर निवासी सोहेल उर्फ साहिल से हुई थी। परिवार इस साल दोनों की शादी कराने की तैयारी कर रहा था। हालांकि करीब आठ दिन पहले सोहेल ने फोन पर मारिया से कहा कि वह अब शादी नहीं करना चाहता और सगाई खत्म कर रहा है। परिजनों ने जब सोहेल के परिवार से संपर्क किया तो उन्होंने भी लड़के के फैसले का हवाला देते हुए मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

    परिवार का कहना है कि सगाई टूटने के बाद से मारिया मानसिक तनाव में थी। वह पिछले आठ दिनों से सोहेल से कम से कम एक बार मिलकर बात करना चाहती थी, लेकिन कथित तौर पर सोहेल ने मिलने और बातचीत करने से इनकार कर दिया। बताया गया है कि सोहेल आजाद नगर इलाके में जूस की दुकान चलाता है। लगातार संपर्क की कोशिश और शादी टूटने के सदमे के बीच मारिया ने यह कदम उठाया।

    परिजनों ने यह भी बताया कि सोहेल ने मारिया पर किसी दूसरे युवक से मोबाइल पर बातचीत और चैटिंग करने का आरोप लगाया था। उसका कहना था कि मारिया उसे पर्याप्त समय नहीं देती थी। परिवार की ओर से दोनों के बीच विवाद सुलझाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन मामला नहीं सुलझ सका।

    पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया है। फिलहाल मामले में मर्ग दर्ज कर लिया गया है। पुलिस परिवार के बयानों और सामने आए आरोपों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। मौत की वास्तविक परिस्थितियों और इसके पीछे की वजहों का पता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • जिसे बेटी की तरह पाला, उसकी मौत पर किया 13वीं का भोज! 600 लोगों को बुलाकर किसान ने रचा अनोखा उदाहरण..

    जिसे बेटी की तरह पाला, उसकी मौत पर किया 13वीं का भोज! 600 लोगों को बुलाकर किसान ने रचा अनोखा उदाहरण..

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    मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने इंसानियत और बेजुबान जानवरों के प्रति अटूट प्रेम की एक अनूठी और भावुक मिसाल कायम कर दी है. अमूमन शोक सभाएं और तेहरवीं के आयोजन अपनों और परिजनों के जाने पर किए जाते हैं, लेकिन यहां एक किसान ने अपनी 20 साल पुरानी पालतू बकरी के लिए वो सब किया जो अमूमन सगे परिजनों के देहांत पर किया जाता है.

    सिरोंज के भवानी नगर निवासी किसान नवल सिंह मालवीय की पालतू बकरी, जिसे पूरा परिवार और गांव प्यार से ‘कटोरी’ उर्फ ‘चमेली’ कहता था, 3 अगस्त को इस दुनिया को अलविदा कह गई. किसान नवल सिंह मालवीय के लिए ‘कटोरी’ महज एक मवेशी या जानवर नहीं थी, बल्कि परिवार की एक सदस्य और औलाद जैसी थी. कटोरी बीते 20 सालों से नवल सिंह के घर का अहम हिस्सा बनी हुई थी.

    घर की रानी: वह आम मवेशियों की तरह खूंटे से नहीं बांधी जाती थी, बल्कि बाकायदा घर के अंदर पलंग पर सोती थी और पूरे परिवार के सुख-दुख की साझीदार थी. जब 3 अगस्त को उसकी सांसे थमीं, तो पूरा मालवीय परिवार गमगीन हो गया और घर में चूल्हा तक नहीं जला.

    प्रशासन से अनुमति लेकर अंतिम संस्कार, पवित्र गंगा में अस्थि विसर्जन

    नवल सिंह ने अपनी ‘कटोरी’ को अंतिम विदाई देने में कोई कमी नहीं छोड़ी. स्थानीय प्रशासन से बाकायदा अनुमति लेकर कटोरी का पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया. अंतिम संस्कार के बाद नवल सिंह खुद कटोरी की अस्थियां संचित कर पवित्र गंगा नदी पहुंचे और पूरे विधि-विधान के साथ अस्थि विसर्जन का कर्मकांड पूरा किया. रिश्तेदारों, परिचितों और ग्रामीणों को तेहरवीं में आमंत्रित करने के लिए बाकायदा शोक संदेश के कार्ड छपवाकर बांटे गए.

    तेहरवीं पर 600 लोगों का महाभोज, उमड़ा पूरा गांव

    13 दिनों के शोक के बाद 15 अगस्त को गंगाजली खोलने के साथ तेहरवीं का आयोजन किया गया. नवल सिंह ने अपनी प्यारी कटोरी की आत्मशांति और याद में एक विशाल भोज का आयोजन किया. इस तेहरवीं में रिश्तेदार, दोस्त और गांव के लगभग 600 लोग शामिल हुए. कार्यक्रम में पहुंचे हर एक व्यक्ति की आंखें इस दृश्य को देखकर नम हो गईं और सबने एक बेजुबान के प्रति नवल सिंह के इस असीम समर्पण और प्यार की जमकर तारीफ की.

    संवेदना की मिसाल बना नवल का यह कदम

    आज के आधुनिक दौर में जहां इंसान के पास इंसानों के लिए समय और संवेदनाएं कम पड़ती जा रही हैं, वहीं नवल सिंह मालवीय का यह कदम समाज के लिए एक आईना है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि नवल सिंह का यह प्रयास दिखाता है कि जब प्यार सच्चा हो, तो बेजुबान और इंसान का रिश्ता रूहानी बन जाता है.

  • एक साल से सरकारी रिकॉर्ड में ‘मुर्दा’ था शख्स, कलेक्टर के पास पहुंचकर बोला- साहब, मैं जिंदा हूं..

    एक साल से सरकारी रिकॉर्ड में ‘मुर्दा’ था शख्स, कलेक्टर के पास पहुंचकर बोला- साहब, मैं जिंदा हूं..

    मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक अनोखा मामले सामने आया है. मर चुका युवक एक अचानक जिंदा हो गया और कलेक्ट्रेट ऑफिस पहुंच गया. युवक ने कलेक्टर से गुहार लगाई कि साहब, मैं जिंदा हूं. दरअसल ये शख्स जिंदा हैं, लेकिन कागजों में इनको मृत घोषित कर दिया गया है. जिसकी वजह से इनको तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. इतना ही नहीं, जमीन जायदाद का काम भी अटका हुआ है.

    पिता की जगह बेटे का मृत्यु प्रमाण पत्र-
    शिवपुरी जिले की रन्नौद नगर परिषद की एक लापरवाही ने जिंदा इंसान को कागजों में मृत घोषित कर दिया. मामला सेसई निवासी गिटला आदिवासी का है. पिता के निधन के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने गए तो अधिकारियों ने पिता की जगह बेटे गिटला का ही मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिया.

    ‘साहब, मैं जिंदा हूं…’
    गिटला ने शिवपुरी कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर को आवेदन सौंपा. उसने बताया कि मेरे पिताजी का निधन 2022 में हो गया था. नामांतरण करवाने गया तो पता चला कि नगर परिषद रन्नौद ने गलती से मेरा मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिया है. ये प्रमाण पत्र 1 साल पहले बना था. गिटला का कहना है कि नगर परिषद में कई बार शिकायत की, सुनवाई नहीं हुई. अब जमीन-जायदाद के काम अटक गए हैं. बैंक, राशन, सरकारी योजनाएं सब बंद. जिंदा होते हुए भी सिस्टम ने उसे मृत मान लिया. बड़ा सवाल यह है कि रन्नौद नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों की गलती का खामियाजा पीड़ित युवक भुगत रहा है.

    उचित कार्रवाई होगी- एडीएम
    हालांकि प्रशासन भी इस मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिला रहा है. लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इस पूरे मामले को लेकर एडीएम दिनेश चंद शुक्ला का कहना है कि यह पूरा मामला मीडिया के द्वारा उनके संज्ञान में लाया गया है इस पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी.

  • दुष्कर्म के बाद मासूम की हत्या से दहला नरसिंहपुर, स्निफर डॉग ने पहुंचाया आरोपित तक; ग्रामीणों ने की फांसी व बुलडोजर कार्रवाई की मांग

    दुष्कर्म के बाद मासूम की हत्या से दहला नरसिंहपुर, स्निफर डॉग ने पहुंचाया आरोपित तक; ग्रामीणों ने की फांसी व बुलडोजर कार्रवाई की मांग

    दुष्कर्म के बाद मासूम की हत्या से दहला नरसिंहपुर, स्निफर डॉग ने पहुंचाया आरोपित तक; ग्रामीणों ने की फांसी व बुलडोजर कार्रवाई की मांग

    मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में आठ वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के बाद 22 वर्षीय आरोपित को गिरफ्तार किया गया है। ग्रामीणों ने आरोपित को फांसी देने, …और पढ़ें

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में आठ वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या किए जाने की सनसनीखेज घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पुलिस ने इस मामले में 22 वर्षीय आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। घटना के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। लोगों ने आरोपित को फांसी देने, उसका मकान बुलडोजर से ध्वस्त करने और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। पुलिस ने मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की बात कही है।

    स्कूल से बहाने से ले गया, फिर जंगल में मिला शव

    पुलिस के अनुसार आरोपित बुधवार को लंच ब्रेक के दौरान बच्ची के स्कूल पहुंचा और यह कहकर उसे अपने साथ ले गया कि उसके पिता ने घर बुलाया है। स्कूल की छुट्टी के बाद जब बच्ची घर नहीं पहुंची तो परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी की सूचना दी।

    करीब आठ घंटे तक चले संयुक्त सर्च अभियान के बाद बच्ची का शव गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर जंगल में एक गड्ढे से बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद गला घोंटकर हत्या किए जाने की बात सामने आई है।

    तलाशी अभियान में शामिल होकर करता रहा गुमराह

    नरसिंहपुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा ने बताया कि बच्ची की तलाश में लगभग 40-50 पुलिसकर्मी और 60 ग्रामीण जुटे थे। इस दौरान आरोपित युवक भी लोगों के साथ बच्ची को खोजने का नाटक करता रहा ताकि किसी को उस पर संदेह न हो।

    हालांकि कुछ स्कूली छात्राओं से मिली अहम जानकारी के आधार पर पुलिस ने स्निफर डॉग की मदद ली। डॉग स्क्वॉड सीधे आरोपित के घर तक पहुंचा, जिसके बाद उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।

    ग्रामीणों का प्रदर्शन, बुलडोजर कार्रवाई और फांसी की मांग

    घटना के बाद पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर आरोपित को फांसी की सजा देने, उसका मकान बुलडोजर से गिराने और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की।

    कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने बच्ची के शव को वैकल्पिक मार्ग से गांव पहुंचाया। वहीं पूरे गांव में बाजार बंद रहा और ग्रामीणों ने घटना के विरोध में कैंडल मार्च निकालकर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

    गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात

    स्थानीय लोगों में व्याप्त आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच तेजी से की जा रही है और अभियोजन पक्ष फास्ट ट्रैक कोर्ट में शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करेगा।

  • देवास में पत्नी की हत्या का आरोप: मारपीट के बाद शव को फंदे से लटकाकर आत्महत्या दिखाने की कोशिश, पोस्टमार्टम में हुआ खुलासा..

    देवास में पत्नी की हत्या का आरोप: मारपीट के बाद शव को फंदे से लटकाकर आत्महत्या दिखाने की कोशिश, पोस्टमार्टम में हुआ खुलासा..

    देवास में पत्नी की हत्या का आरोप: मारपीट के बाद शव को फंदे से लटकाकर आत्महत्या दिखाने की कोशिश, पोस्टमार्टम में हुआ खुलासा..

    देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले के कांटाफोड़ क्षेत्र में घरेलू हिंसा का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एक व्यक्ति पर शराब के नशे में अपनी पत्नी की पीट-पीटकर हत्या करने और बाद में घटना को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फंदे से लटकाने का आरोप है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया गया है।

    आत्महत्या की सूचना पर पहुंची थी पुलिस

    पुलिस के मुताबिक, 4 अगस्त को सूचना मिली थी कि वार्ड नंबर-14 निवासी 32 वर्षीय सुनीता भील ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर मर्ग कायम कर जांच शुरू की।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बदला जांच का रुख

    जांच के दौरान महिला के शरीर पर चोटों के कई निशान मिलने से पुलिस को मामला संदिग्ध लगा। इसके बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि मौत का कारण फांसी नहीं, बल्कि मारपीट से आई गंभीर चोटें थीं। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने हत्या के एंगल से जांच आगे बढ़ाई।

    बेटी के बयान और सबूतों से खुली साजिश

    पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही परिजनों और घटना के समय घर में मौजूद बच्ची के बयान भी दर्ज किए। जांच में आरोप है कि पति जितेंद्र भील ने शराब के नशे में पत्नी के साथ बुरी तरह मारपीट की, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसने साड़ी का फंदा बनाकर शव को लटका दिया ताकि मामला आत्महत्या जैसा लगे।

    आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी

    पुलिस का कहना है कि भौतिक साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।