एक साल से सरकारी रिकॉर्ड में ‘मुर्दा’ था शख्स, कलेक्टर के पास पहुंचकर बोला- साहब, मैं जिंदा हूं..

एक साल से सरकारी रिकॉर्ड में ‘मुर्दा’ था शख्स, कलेक्टर के पास पहुंचकर बोला- साहब, मैं जिंदा हूं..

मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक अनोखा मामले सामने आया है. मर चुका युवक एक अचानक जिंदा हो गया और कलेक्ट्रेट ऑफिस पहुंच गया. युवक ने कलेक्टर से गुहार लगाई कि साहब, मैं जिंदा हूं. दरअसल ये शख्स जिंदा हैं, लेकिन कागजों में इनको मृत घोषित कर दिया गया है. जिसकी वजह से इनको तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. इतना ही नहीं, जमीन जायदाद का काम भी अटका हुआ है.

पिता की जगह बेटे का मृत्यु प्रमाण पत्र-
शिवपुरी जिले की रन्नौद नगर परिषद की एक लापरवाही ने जिंदा इंसान को कागजों में मृत घोषित कर दिया. मामला सेसई निवासी गिटला आदिवासी का है. पिता के निधन के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने गए तो अधिकारियों ने पिता की जगह बेटे गिटला का ही मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिया.

‘साहब, मैं जिंदा हूं…’
गिटला ने शिवपुरी कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर को आवेदन सौंपा. उसने बताया कि मेरे पिताजी का निधन 2022 में हो गया था. नामांतरण करवाने गया तो पता चला कि नगर परिषद रन्नौद ने गलती से मेरा मृत्यु प्रमाण पत्र बना दिया है. ये प्रमाण पत्र 1 साल पहले बना था. गिटला का कहना है कि नगर परिषद में कई बार शिकायत की, सुनवाई नहीं हुई. अब जमीन-जायदाद के काम अटक गए हैं. बैंक, राशन, सरकारी योजनाएं सब बंद. जिंदा होते हुए भी सिस्टम ने उसे मृत मान लिया. बड़ा सवाल यह है कि रन्नौद नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों की गलती का खामियाजा पीड़ित युवक भुगत रहा है.

उचित कार्रवाई होगी- एडीएम
हालांकि प्रशासन भी इस मामले में उचित कार्रवाई का भरोसा दिला रहा है. लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इस पूरे मामले को लेकर एडीएम दिनेश चंद शुक्ला का कहना है कि यह पूरा मामला मीडिया के द्वारा उनके संज्ञान में लाया गया है इस पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी.

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