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  • अंग्रेजों के होश उड़ाने वाले चंद्रशेखर आजाद कैसे कम उम्र में बने सटीक निशानेबाज?..

    अंग्रेजों के होश उड़ाने वाले चंद्रशेखर आजाद कैसे कम उम्र में बने सटीक निशानेबाज?..

    अंग्रेजों के होश उड़ाने वाले चंद्रशेखर आजाद कैसे कम उम्र में बने सटीक निशानेबाज?..

    चंद्रशेखर आज़ाद का बचपन भील समुदाय के बीच बीता जो तीरंदाजी में माहिर थे.

    23 जुलाई 1906 को जन्मे और महज 24-25 साल की उम्र में देश के लिए शहीद हो गए. वे आजादी के ऐसे दीवाने थे कि नाम के आगे भी आजाद लगा लिया. अंग्रेज उनसे थर-थर कांपते थे. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे चर्चित क्रांतिकारियों में थे. वे साहसी थे. तेज़ निर्णय लेते थे. अपने साथियों की सुरक्षा को बहुत महत्व देते थे. उनकी एक खास पहचान उनका सटीक निशाना भी था. ऐसे ही थे भारतीयों के रग-रग में बसे चंद्रशेखर आजाद.

    आइए, उनकी जन्म जयंती के बहाने जानते हैं कि वे निशानेबाजी में महारथ हासिल करने में कैसे कामयाब हुए? किस उम्र में पिस्टल-गोलियों से खेलने लगे?

    कम उम्र में ही पक्के निशानेबाज हो गए थे

    आज़ाद की निशानेबाजी केवल प्राकृतिक प्रतिभा नहीं थी. इसके पीछे बचपन का अभ्यास, मजबूत शरीर, धैर्य, सतर्कता और कठिन परिस्थितियों में शांत रहने की क्षमता थी. क्रांतिकारी जीवन में पिस्तौल उनके लिए शौक की वस्तु नहीं थी. वह आत्मरक्षा, साथी-सुरक्षा और संगठन की जिम्मेदारी का साधन थी.

    चंद्रशेखर आज़ाद का बचपन मध्य भारत के भाबरा क्षेत्र में बीता. यह क्षेत्र वन, पहाड़ और आदिवासी जीवन से जुड़ा था. वहां भील समुदाय के लोग रहते थे. भील समुदाय को तीर-कमान चलाने की पारंपरिक कला के लिए जाना जाता है. आज़ाद ने बचपन में भील बच्चों के साथ तीर चलाने का अभ्यास किया. यह अभ्यास उनके लिए बहुत उपयोगी बना. तीरंदाजी में आंख, हाथ और लक्ष्य के बीच सही तालमेल चाहिए होता है. निशाना लगाते समय सांस, शरीर और ध्यान को नियंत्रित रखना पड़ता है. यही गुण आगे चलकर पिस्तौल चलाने में भी उनके काम आए. तीर-कमान से मिला अभ्यास उनके हाथों की स्थिरता और नजर की एकाग्रता का आधार बना.

    क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद.

    इसलिए रखते थे पिस्तौल और गोलियां

    जब आज़ाद क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े, तब परिस्थितियां बदल गईं. अंग्रेज़ी शासन के खिलाफ संघर्ष बहुत कठिन था. पुलिस, खुफिया तंत्र और सरकारी बल लगातार क्रांतिकारियों की तलाश में रहते थे. ऐसी स्थिति में क्रांतिकारियों को अपनी रक्षा करनी पड़ती थी. साथियों को सुरक्षित निकालना भी जरूरी होता था, इसलिए आज़ाद ने तीर-कमान के स्थान पर पिस्तौल और गोलियां रखना शुरू किया. लेकिन इसे केवल हथियार रखने की कहानी नहीं मानना चाहिए. आज़ाद के लिए पिस्तौल जिम्मेदारी का प्रतीक थी. उन्हें कई बार संगठन के वरिष्ठ साथियों की रक्षा करनी होती थी. वे खतरे के समय पीछे हटने वाले व्यक्ति नहीं थे. उनका उद्देश्य अंधाधुंध गोली चलाना नहीं था. वे परिस्थितियों को समझकर फैसला लेते थे. यही बात उन्हें सामान्य हथियारबंद व्यक्ति से अलग बनाती है.

    नियमित शारीरिक अभ्यास उनकी पहचान

    आज़ाद का शरीर बहुत मजबूत था. वे नियमित रूप से दंड-बैठक करते थे. उनका शरीर गठा हुआ था. उनकी मांसपेशियां मजबूत थीं. वे पेड़ों पर चढ़ने में भी कुशल थे. शारीरिक फिटनेस का निशानेबाजी से गहरा संबंध है. मजबूत शरीर का मतलब केवल ताकत नहीं होता. इसका अर्थ है बेहतर संतुलन. निशाना लगाते समय हाथ कांपना नहीं चाहिए. शरीर का नियंत्रण जरूरी है. तनाव में भी शरीर को स्थिर रखना पड़ता है. आज़ाद कठिन जीवन जीते थे. वे कम साधनों में रहते थे. कई बार जमीन पर अखबार बिछाकर सो जाते थे. फिर भी उनका अनुशासन नहीं टूटता था. यह अनुशासन उनकी मानसिक और शारीरिक क्षमता को मजबूत करता था.

    अपने मन पर जबरदस्त काबू रखते थे आजाद

    अच्छा निशानेबाज केवल अच्छी आंख वाला व्यक्ति नहीं होता. उसे डर और दबाव में भी शांत रहना पड़ता है. आज़ाद इस गुण के लिए प्रसिद्ध थे. वे लंबे समय तक अंग्रेज पुलिस से बचते रहे. वे लगातार अपना भेष बदलते. कभी व्यापारी तो कभी कुली बनते. कभी साधु का रूप धारण करते थे तो कभी अंग्रेज़ी पहनावे में दिखाई देते थे. इस जीवन में हर समय पकड़े जाने का खतरा था. ऐसी स्थिति में घबराहट स्वाभाविक थी, लेकिन आज़ाद में मानसिक संतुलन था. वे खतरे के बीच भी स्थिति को पढ़ते थे. वे समझते थे कि कब रुकना है, कब आगे बढ़ना है और कब अपने साथी को बचाना है. यह मानसिक स्थिरता उनके निशाने को मजबूत बनाती थी.

    साथियों की सुरक्षा पहली जिम्मेदारी समझते थे आजाद

    चंद्रशेखर आज़ाद की निशानेबाजी का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष साथियों की सुरक्षा था. वे अक्सर अपने साथियों को बचाने के लिए पीछे रहते थे. उनका काम केवल हमला करना नहीं था. उनका पीछा कर रहे लोगों को रोकना भी था. लाहौर में सांडर्स की हत्या के बाद ऐसा ही एक प्रसंग सामने आता है. योजना में भगत सिंह और राजगुरु मुख्य भूमिका में थे. आज़ाद को पीछे से सुरक्षा देने की जिम्मेदारी मिली थी. घटना के बाद भगत सिंह और राजगुरु वहां से निकल रहे थे. हेड कॉन्स्टेबल चानन सिंह उनका पीछा कर रहा था. आज़ाद ने उसे रुकने की चेतावनी दी. जब उसने पीछा जारी रखा, तो आज़ाद ने गोली चलाई. यह घटना बताती है कि आज़ाद केवल निशाना लगाने में कुशल नहीं थे. वे संकट में अपने साथियों की रक्षा करने के लिए तैयार रहते थे. उनके लिए संगठन और साथियों की जान बहुत महत्वपूर्ण थी.

    अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजों से हुई अंतिम लड़ाई

    चंद्रशेखर आज़ाद की निशानेबाजी की चर्चा उनकी अंतिम लड़ाई के कारण भी होती है. 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के अल्फ्रेड पार्क में पुलिस ने उन्हें घेर लिया. आज यह पार्क चंद्रशेखर आज़ाद के नाम से ही जाना जाता है. उस समय वे अकेले नहीं थे. उनके साथ सुखदेव भी थे. आज़ाद ने पहले अपने साथी को सुरक्षित निकलने का अवसर दिया. उसके बाद वे पुलिस का सामना करते रहे.

    बीबीसी ने अपनी एक रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के आईजी रहे हॉलिंस के हवाले से आज़ाद के निशाने की प्रशंसा का उल्लेख मिलता है. हॉलिंस ने लिखा कि आज़ाद की पहली गोली नॉट बावर के कंधे में लगी थी. पुलिस इंस्पेक्टर विशेश्वर सिंह को भी गंभीर चोट लगी थी. हॉलिंस के अनुसार आज़ाद की गोलियां पेड़ पर इंसान की औसत ऊंचाई के आसपास लगी थीं. दूसरी ओर पुलिस की कई गोलियां काफी ऊपर लगी थीं. इस विवरण से यह संकेत मिलता है कि घिर जाने और घायल होने के बाद भी आज़ाद का नियंत्रण खुद पर बना हुआ था. यह उनके धैर्य और अभ्यास की बड़ी मिसाल है.

    आजाद के लिए पिस्तौल का अर्थ क्या था?

    आज़ाद के जीवन में पिस्तौल का अर्थ हिंसा का प्रदर्शन नहीं था. वह औपनिवेशिक दमन के दौर में आत्मरक्षा और प्रतिरोध का साधन थी. उस समय अनेक क्रांतिकारियों का मानना था कि अंग्रेज़ी शासन के सामने केवल अपील से आज़ादी नहीं मिलेगी. हालांकि, स्वतंत्रता आंदोलन में कई विचारधाराएं थीं. महात्मा गांधी अहिंसा और जन-आंदोलन के पक्षधर थे. दूसरी ओर आज़ाद, भगत सिंह और उनके साथी क्रांतिकारी प्रतिरोध का रास्ता चुन रहे थे. दोनों धाराओं का लक्ष्य भारत की आज़ादी था, लेकिन तरीके अलग थे. आज़ाद की पिस्तौल उनके चुने हुए रास्ते का हिस्सा थी. फिर भी उनका व्यक्तिगत जीवन अनुशासन, सादगी और साथियों के प्रति समर्पण से भरा था.

    कम शब्दों में कहें तो चंद्रशेखर आज़ाद निशानेबाजी में इसलिए पक्के थे क्योंकि उन्होंने बचपन से लक्ष्य साधने का अभ्यास किया था. भील बच्चों के साथ तीरंदाजी ने उनकी नजर और हाथों को प्रशिक्षित किया. क्रांतिकारी जीवन ने उन्हें पिस्तौल का कुशल उपयोग सिखाया. उनकी शारीरिक शक्ति, मानसिक संतुलन और अनुशासन ने इस कौशल को और मजबूत बनाया. वे निशानेबाज जरूर थे, लेकिन उनकी पहचान केवल इसी तक सीमित नहीं थी. उनका जीवन यह बताता है कि किसी भी कौशल के पीछे अभ्यास, अनुशासन और स्पष्ट उद्देश्य का बड़ा महत्व है.

  • बिन मारे घर से रफूचक्कर हो जाएंगे छछूंदर! बस कोने में रख दें रसोई की यह 1 चीज..?

    बिन मारे घर से रफूचक्कर हो जाएंगे छछूंदर! बस कोने में रख दें रसोई की यह 1 चीज..?

    बिन मारे घर से रफूचक्कर हो जाएंगे छछूंदर! बस कोने में रख दें रसोई की यह 1 चीज..?

    बरसात के दिनों में बिलों में पानी भर जाने पर अक्सर कई जीव-जंतु बाहर निकलकर लोगों के घरों में घुसने लगते हैं. ऐसा ही एक जीव छछूंदर है, जो बरसात के सीजन में बहुत परेशान करता है. उसकी गंदी स्मेल और अजीब लोग हर किसी को परेशान करता है. जब वह अजीब आवाज निकालता हुआ घरों में घुसता है तो बच्चे उससे डर जाते हैं. वह ऐसा जीव है, जो आसानी से पिंजरे में भी नहीं घुसता. ऐसे में लोग इस बात से परेशान हो जाते हैं कि उसे बिना मारे घर से कैसे दूर भगाया जाए. आइए, आज हम आपको ऐसा ही एक घरेलू नुस्खा बताने जा रहे हैं. जिसे आजमाकर आप छछूंदर की समस्या से हमेशा के लिए निजात पा सकते हैं.

    घर से छछूंदरों को भगाने का उपाय

    छछूंदर भगाने के लिए आप घर में ही देसी उपाय (Chuchundar Bhagane Ke Upay) कर सकते हैं. इसके लिए आप पुदीने की पत्तियों या उसकी डंडियों का इस्तेमाल करें. असल में पुदीने की खास गंध छछूंदरों को बिल्कुल रास नहीं आती है. वे इसकी गंध महसूस करते ही दूर भाग खड़े होते हैं. ऐसे में आप अपने घर के अंदर, बाहर, खिड़की, रसोई और प्रमुख जगहों पर पुदीने को रख दें. ऐसा करने से छछूंदर आपके घर में घुसने की कभी सोचेंगे भी नहीं.

    पुदीने की पत्तियों का करें इस्तेमाल

    इस ट्रिक को इस्तेमाल करने के लिए आप पुदीने की ताजा पत्तियां लें. इसके बाद उन्हें घर के हर कोने पर एक-एक पत्ता रख दें. आप चाहें तो पुदीने की पत्तियों को सुखाकर उसका पाउडर भी घर की प्रमुख जगहों पर रख सकते हैं. इन दो तरीकों के अलावा तीसरा तरीका स्प्रे बनाने का है. आप पुदीने की पत्तियों और डंडियों को उबालकर उसके गर्म पानी को स्प्रे बोतल में भर लें.

    स्प्रे से दूर भागते हैं छछूंदर

    इसके बाद आप घर के तमाम एंट्री पॉइंट्स पर समय-समय पर इस स्प्रे को छिड़कते रहें. खासकर उन जगहों पर जरूर छिड़कें, जहां से चूहों और छछूंदरों के आने का अंदेशा हो. इस ट्रिक की वजह से उनके आवागमन के सारे रास्ते ब्लॉक हो जाएंगे और वे आपके घर की ओर झांकेंगे भी नहीं. इस उपाय से आपको छछूंदरों के साथ ही चूहों से भी निजात मिल जाएगी.

    घर में पनपने न दें गंदगी

    इसके साथ ही आप छछूंदरों से निजात पाने के लिए कुछ ओर भी उपाय कर सकते हैं. सबसे पहले तो आप दरवाजों और खिड़कियों के आसपास जाली लगवा लें. दरवाजे के नीचे इतनी जगह न छोड़ें कि वहां से चूहे या छछूंदर अंदर घुस सकें. घर में कूड़ा इकट्ठा न होने दें. कूड़े की गंध चूहों और छछूंदरों को बहुत आकर्षित करती है. अगर गंदगी नहीं होगी तो उनका आना भी काफी हद तक रुक जाएगा.

  • हैकर्स की नई चाल! होटल वाई-फाई से चुरा रहे आपका पर्सनल वीडियो और ऑडियो, जानिए ‘CaptiveCrunch’ का काला सच..

    हैकर्स की नई चाल! होटल वाई-फाई से चुरा रहे आपका पर्सनल वीडियो और ऑडियो, जानिए ‘CaptiveCrunch’ का काला सच..

    हैकर्स की नई चाल! होटल वाई-फाई से चुरा रहे आपका पर्सनल वीडियो और ऑडियो, जानिए ‘CaptiveCrunch’ का काला सच..

    Image Credit: AI Generated Image

    अगर आप अक्सर ट्रैवल करते हैं और होटल या एयरपोर्ट पर फ्री वाई-फाई का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. माइक्रोसॉफ्ट की थ्रेट इंटेलिजेंस टीम ने एक खतरनाक साइबर अटैक अभियान ‘CaptiveCrunch’ को लेकर दुनिया भर के यात्रियों को अलर्ट जारी किया है. रूसी हैकर्स का एक ग्रुप होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के वाई-फाई नेटवर्क को निशाना बना रहा है. यह हैकिंग हमला इतना खतरनाक है कि हैकर्स आपके लैपटॉप या फोन का पासवर्ड चुराने के साथ-साथ ऑडियो और वीडियो भी रिकॉर्ड कर सकते हैं.

    क्या है ‘CaptiveCrunch’ और यह कैसे काम करता है?

    माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, इस हैकिंग अभियान को Storm-2945 नाम का ग्रुप चला रहा है, जो रूस के कुख्यात हैकर ग्रुप ‘माइडनाइट ब्लिजार्ड’ (APT29 या Cozy Bear) से जुड़ा हुआ है. यह हमला मुख्य रूप से कॉर्पोरेट ट्रैवलर्स को निशाना बनाकर किया जा रहा है.

    • नेटवर्क हैक करना:
      हैकर्स सबसे पहले होटल के राउटर या उस सिस्टम को हैक करते हैं जिससे वाई-फाई का लॉगिन पेज (Captive Portal) खुलता है.
    • नकली लॉगिन पेज:
      जब कोई यूजर वाई-फाई से कनेक्ट करता है, तो उसके सामने गूगल या माइक्रोसॉफ्ट 365 जैसा दिखने वाला फर्जी लॉगिन पेज आ जाता है.
    • पासवर्ड चोरी:
      यूजर जैसे ही अपना पासवर्ड डालता है, उसकी ईमेल, वनड्राइव फाइल्स और कंपनी के डेटा का एक्सेस सीधे हैकर्स के पास चला जाता है.

    फर्जी अपडेट के नाम पर मालवेयर का जाल

    • इस हमले की सबसे खतरनाक बात यह है कि हैकर्स यूजर्स को धोखा देने के लिए कई तरह के फर्जी पॉप-अप और यूटिलिटीज का सहारा लेते हैं.
    • यूजर के स्क्रीन पर ‘ब्राउजर अपडेट’, ‘विंडोज सिक्योरिटी चेक’ या ‘डायरेक्टएक्स/विजुअल सी++ इंस्टॉल’ करने के मैसेज आते हैं.
    • ये मैसेज बिल्कुल असली विंडोज या गूगल सर्विस की तरह दिखाई देते हैं.
    • जैसे ही यूजर इन फर्जी अपडेट्स पर क्लिक करता है, उसके डिवाइस में खतरनाक मालवेयर (Malware) डाउनलोड हो जाता है.

    हैकर्स आपके डिवाइस में क्या-क्या कर सकते हैं?

    माइक्रोसॉफ्ट ने चेतावनी दी है कि इस मालवेयर के जरिए हैकर्स आपके कंप्यूटर पर लगभग पूरा कंट्रोल हासिल कर लेते हैं.

    • ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग:
      हैकर्स आपके वेबकैम और माइक को चालू करके आपकी बातें और वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं.
    • पासवर्ड और कुकीज चोरी:
      ब्राउजर में सेव किए गए सभी पासवर्ड और बैंकिंग कुकीज चुरा सकते हैं.
    • स्क्रीनशॉट और की-स्ट्रोक्स:
      आप कीबोर्ड पर क्या टाइप कर रहे हैं (Keylogging), हैकर्स उसे ट्रैक कर सकते हैं और आपकी स्क्रीन के स्क्रीनशॉट ले सकते हैं.

    होटल वाई-फाई अटैक से कैसे बचें?

    माइक्रोसॉफ्ट ने यात्रियों और कंपनियों के लिए कुछ बेहद जरूरी सुरक्षा उपाय बताए हैं:

    • पब्लिक वाई-फाई से बचें:
      जब भी संभव हो, होटल या एयरपोर्ट के वाई-फाई के बजाय अपने फोन का पर्सनल मोबाइल हॉटस्पॉट इस्तेमाल करें.
    • कोई अपडेट न डाउनलोड करें:
      वाई-फाई कनेक्ट करते ही अगर कोई ब्राउजर या सॉफ्टवेयर अपडेट करने का मैसेज आए, तो उस पर भूलकर भी क्लिक न करें.
    • ऑफिशियल वेबसाइट का इस्तेमाल करें:
      किसी भी अपडेट के लिए हमेशा सॉफ्टवेयर की आधिकारिक वेबसाइट या सिस्टम सेटिंग्स का ही उपयोग करें.
    • एन्क्रिप्टेड प्राइवेट कनेक्शन (VPN):
      अगर पब्लिक वाई-फाई इस्तेमाल करना बहुत जरूरी हो, तो हमेशा एक सुरक्षित और भरोसेमंद VPN का उपयोग करें.

  • बारिश शुरू होते ही क्यों स्लो हो जाता है आपका Internet? Wi-Fi से 5G तक पर पड़ता है असर, जानें बचने का तरीका..

    बारिश शुरू होते ही क्यों स्लो हो जाता है आपका Internet? Wi-Fi से 5G तक पर पड़ता है असर, जानें बचने का तरीका..

    बारिश शुरू होते ही क्यों स्लो हो जाता है आपका Internet? Wi-Fi से 5G तक पर पड़ता है असर, जानें बचने का तरीका..

    मानसून का मौसम जहां एक ओर चिलचिलाती गर्मी से राहत दिलाता है, तो वहीं दूसरी तरफ कई बार यह आपके इंटरनेट और WiFi नेटवर्क की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा देता है. बारिश के मौसम में कई बार जब तेज बरसात होती है, तो स्मार्टफोन से लेकर ब्रॉडबैंड की इंटरनेट स्पीड अचानक कम हो जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बादलों के बरसते ही आपका इंटरनेट अचानक सुस्त क्यों हो जाता है?

    टेक्नोलॉजी की दुनिया में इस समस्या को रेन फेड कहते हैं. आइए जानते हैं इस समस्या के पीछे क्या कारण होता है और इससे बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए.

    बारिश में इंटरनेट स्लो होने के कारण

    रेन फेड
    वाई-फाई, सैटेलाइट और मोबाइल नेटवर्क रेडियो तरंगों के जरिए काम करते हैं. जब हवा में बारिश की बूंदें होती हैं, तो वे इन तरंगों के रास्ते में बाधा बनती हैं. पानी की बूंदें सिग्नल को सोख लेती हैं और उन्हें फैला देती हैं, जिससे सिग्नल कमजोर होने लगता है.

    वहीं 5G और वाई-फाई सिग्नल काफी हाई फ्रीक्वेंसी पर काम करते हैं. ये सिग्नल बहुत तेज स्पीड तो देते हैं, लेकिन बारिश और नमी के संपर्क में आते ही सबसे जल्दी प्रभावित होते हैं.

    भारी बारिश के कारण अंडरग्राउंड या बाहरी केबलों में पानी घुसने का भी खतरा बना रहता है. तारों में नमी आने से न सिर्फ स्पीड स्लो होती है, बल्कि नेटवर्क में बार-बार रुकावट भी आने लगती है.

    तेज आंधी-तूफान और बारिश के कारण इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के बाहरी डिवाइसों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे पूरे इलाके का नेटवर्क प्रभावित हो जाता है.

    कौन-सा कनेक्शन है बारिश में बेस्ट?

    फाइबर ऑप्टिक
    बारिश के मौसम में फाइबर इंटरनेट सबसे ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है. इसमें डेटा रेडियो वेव की जगह लाइट सिग्नल के जरिए केबल से यात्रा करता है, जिस पर बारिश या हवा का कोई असर नहीं पड़ता.

    5G और 4G मोबाइल डेटा
    बारिश के दिनों में मोबाइल डेटा की स्पीड में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. 5G की फ्रीक्वेंसी ज्यादा होने के कारण यह बारिश से जल्दी प्रभावित होता है.

    सैटेलाइट इंटरनेट
    खराब मौसम में सैटेलाइट कनेक्शन सबसे ज्यादा कमजोर साबित होते हैं, क्योंकि बादलों और बारिश के बीच से सिग्नल आने-जाने में भारी रुकावट होती है.

    बारिश के मौसम में स्लो इंटरनेट की समस्या को कैसे ठीक करें?

    अगर बारिश के दौरान आपका वाई-फाई ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो आप कुछ आसान टिप्स की मदद से इंटरनेट स्पीड को तेज कर सकते हैं-

    5GHz बैंड पर स्विच करें
    अगर आपका राउटर डुअल-बैंड है, तो अपने डिवाइस को 2.4GHz की जगह 5GHz बैंड से कनेक्ट करें. यह कम भीड़भाड़ वाला बैंड है और बेहतर स्पीड देता है.

    राउटर को रीस्टार्ट करें
    किसी भी तकनीकी गिल्च या अस्थाई सिग्नल समस्या को दूर करने के लिए अपने मोडेम और राउटर को कुछ सेकेंड के लिए बंद करके फिर से ऑन करें.

    राउटर की जगह बदलें
    राउटर को किसी ऊंची जगह पर रखें. इसे मोटी दीवारों, धातु की चीजों और बंद कोनों से दूर रखें जिससे सिग्नल घर में सही तरीके से फैल सके.

    गैर-जरूरी डिवाइसेज को हटाएं
    नेटवर्क पर लोड कम करने के लिए उन फोन, टीवी या गैजेट्स का वाई-फाई बंद कर दें जिनका आप उस समय इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.

    वाई-फाई एक्सटेंडर
    अगर घर के किसी हिस्से में सिग्नल कमजोर आ रहा है, तो सिग्नल रेंज बढ़ाने के लिए एक्सटेंडर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

  • फिल्मों में ताजमहल बिकता था, प्रयागराज में तो पूरा पहाड़ ही बेच दिया… जानिए कैसे हुआ करोड़ों की सरकारी जमीन का खेल..

    फिल्मों में ताजमहल बिकता था, प्रयागराज में तो पूरा पहाड़ ही बेच दिया… जानिए कैसे हुआ करोड़ों की सरकारी जमीन का खेल..

    फिल्मों में ताजमहल बिकता था, प्रयागराज में तो पूरा पहाड़ ही बेच दिया… जानिए कैसे हुआ करोड़ों की सरकारी जमीन का खेल..
    • सरकारी रिकॉर्ड में कैसे हुई हेराफेरी?

    • ‘पहाड़’ की जमीन इतनी खास क्यों होती है?

    बॉलीवुड फिल्मों में आपने कई बार सुना होगा कि जालसाजों ने ताजमहल, लाल किला तक बेच दिया. ऐसी बातें पर्दे पर मजेदार लगती हैं, लेकिन प्रयागराज में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हकीकत और फिल्मों के बीच की दूरी कम कर दी. यहां भू-माफियाओं ने राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी ‘पहाड़’ के नाम दर्ज करोड़ों रुपये की जमीन को पहले अपने नाम कराया और फिर उसे बेच भी दिया. मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस दोनों हरकत में आ गए हैं.

    क्या है पूरा मामला?
    यह मामला प्रयागराज की बारा तहसील के गोल्हैया गांव का है. यहां आराजी संख्या-1 की करीब 83 बीघा 19 बिस्वा (लगभग 19.16 हेक्टेयर) जमीन राजस्व रिकॉर्ड में ‘पहाड़’ यानी सार्वजनिक सरकारी भूमि के रूप में दर्ज थी. आरोप है कि कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर इस सरकारी जमीन को अपने नाम दर्ज करा लिया. इसके बाद जमीन की खरीद-फरोख्त भी शुरू कर दी गई.

    सरकारी रिकॉर्ड में कैसे हुई हेराफेरी?
    जमीन किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि सरकारी खाते में दर्ज थी. लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर राजस्व अभिलेखों में बदलाव कर खुद को जमीन का मालिक दिखा दिया. जब रिकॉर्ड में नाम दर्ज हो गए, तो उसी आधार पर जमीन की रजिस्ट्री और बिक्री भी होती रही. यानी कागजों पर सरकारी पहाड़ निजी संपत्ति बन गया.

    मामला सामने कैसे आया?
    प्रशासन को जमीन में गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद जांच शुरू हुई. जांच में पाया गया कि जमीन को गलत तरीके से निजी खातों में दर्ज कराया गया था.इसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी फर्जी नाम निरस्त कर दिए और जमीन को दोबारा सरकारी खाते में दर्ज कर दिया.

    कितने लोगों पर केस दर्ज हुआ?
    लेखपाल प्राची सिंह परिहार की शिकायत पर लालापुर थाने में 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. इनमें पूर्व खाताधारक, जमीन खरीदने वाले लोग और एके ड्रीम सिटी प्राइवेट लिमिटेड नाम की निजी कंपनी के निदेशक भी शामिल हैं. पुलिस ने सभी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी संपत्ति से जुड़े गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया है.

    ‘पहाड़’ की जमीन इतनी खास क्यों होती है?
    राजस्व रिकॉर्ड में ‘पहाड़’ के रूप में दर्ज जमीन सार्वजनिक संपत्ति मानी जाती है. इसका इस्तेमाल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सार्वजनिक हित के लिए होता है. ऐसी जमीन को कोई व्यक्ति अपने नाम नहीं करा सकता और न ही उसकी खरीद-बिक्री की जा सकती है. इसलिए इस तरह की हेराफेरी को गंभीर अपराध माना जाता है.

    अब आगे क्या होगा?
    पुलिस का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है. जांच में राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण (म्यूटेशन), रजिस्ट्री, जमीन के हस्तांतरण और सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच होगी. यदि किसी सरकारी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है.

    पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
    देश के अलग-अलग राज्यों में पहले भी सरकारी जमीन, तालाब, चारागाह और ग्राम समाज की जमीन पर फर्जी तरीके से कब्जा करने या रिकॉर्ड बदलने के मामले सामने आते रहे हैं. हालांकि किसी ‘पहाड़’ को ही कागजों में निजी संपत्ति बनाकर बेचने का मामला बेहद दुर्लभ माना जा रहा है. यही वजह है कि प्रयागराज का यह मामला चर्चा में है.

  • रोबोटिक्स की जंग में अमेरिका को पछाड़ेगा चीन? क्या ड्रैगन बनेगा सिकंदर, जानिए भारत की स्थिति..

    रोबोटिक्स की जंग में अमेरिका को पछाड़ेगा चीन? क्या ड्रैगन बनेगा सिकंदर, जानिए भारत की स्थिति..

    रोबोटिक्स की जंग में अमेरिका को पछाड़ेगा चीन? क्या ड्रैगन बनेगा सिकंदर, जानिए भारत की स्थिति..

    चीन अपनी टेक ताकत और सस्ती मैन्युफैक्चरिंग के दम पर ह्यूमनॉइड रोबोट्स यानी इंसानों जैसे दिखने और काम करने वाले रोबोट्स के ग्लोबल हब बनने की अंधी दौड़ में शामिल हो चुका है. फैक्ट्रियों की असेंबली लाइन से लेकर बड़े-बड़े वेयरहाउस तक चीन इन मशीनी इंसानों को असल दुनिया के कामों में उतार रहा है. इसी बूम के बीच चीन की दिग्गज रोबोटिक्स कंपनी Unitree अब IPO की रेस में है. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि आखिर चीन रोबोट्स पर इतना बड़ा दांव क्यों लगा रहा है? क्या वो अमेरिका की टेस्ला जैसी कंपनियों को पछाड़कर रोबोटिक्स का दुनिया में किंग बनने की कोशिश कर रहा है? और क्या ये रोबोट्स सच में हमारी फैक्ट्रियों और आम जिंदगी में एंट्री करने के बहुत ही करीब आ चुके हैं?

    चीन की रोबोटिक्स कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स ह्यूमनॉइड रोबोट की रेस में एक बड़ा नाम बनकर उभर रही है. भले ही चीन से बाहर लोग इस कंपनी का नाम ज्यादा न जानते हों, लेकिन इसके रोबोट्स के वीडियो इंटरनेट पर छाए हुए हैं. सुपरह्यूमन जैसे स्टंट और बैकफ्लिप करते यूनिट्री के रोबोट्स को करोड़ों लोग देख चुके हैं. अब यूनिट्री रोबोटिक्स एक बड़ा फाइनेंसियल कदम उठाने जा रही है. अब ये कंपनी शंघाई स्टॉक एक्सचेंज में अपना IPO लाने की तैयारी में है. द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, गुरुवार को यूनिट्री ने अपने शेयरों की कीमत लगभग 22 डॉलर प्रति शेयर तय की है, जिससे वह करीब 900 मिलियन डॉलर जुटाने की योजना बना रही है.

    9 अरब डॉलर की वैल्यूएशन

    इस डील के साथ ही यूनिट्री रोबोटिक्स की वैल्यूएशन करीब 9 अरब डॉलर पहुंच जाएगी. हालांकि, टेक जगत के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह टेक्नोलॉजी सच में एक बड़े बिजनेस में बदल सकती है? भले ही यूनिट्री के रोबोट तेजी से बेहतर हो रहे हैं, लेकिन क्या आने वाले समय में आम लोग और कंपनियां लाखों की संख्या में ये रोबोट खरीदेंगी, यह अभी साफ नहीं है.

    रिसर्च फर्म Omdia के एक्सपर्ट्स लियान जी सू के मुताबिक, यूनिट्री का यह स्टॉक सेल पूरे रोबोटिक्स सेक्टर के लिए एक बड़ा टेस्ट साबित होगा. इससे यह समझ आएगा कि शेयर मार्केट ह्यूमनॉइड रोबोट्स जैसे उभरते और शुरुआती टेक सेक्टर को किस नजरिए से देखता है.

    फिजिकल AI का बढ़ता मार्केट

    रोबोट्स को इंसानों, सामानों, कमरों और डेली के कामों को समझने के लिए असल दुनिया में सीखना पड़ता है. इस टेक्नोलॉजी को एम्बॉडीड एआई या फिजिकल एआई कहा जाता है.

    इन्वेस्टमेंट रिसर्च फर्म CLSA की हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोट मार्केट साल 2030 तक 69 अरब डॉलर का हो सकता है, जो इस साल मात्र 2 अरब डॉलर के करीब है.

    बढ़ती टक्कर और घटता मुनाफा

    2026 के पहले क्वाटर में कड़ी टक्कर और कम मांग के कारण यूनिट्री की ग्रोथ थोड़ी धीमी रही. बढ़ती टक्कर और रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर ज्यादा खर्च करने की वजह से पहली तिमाही में कंपनी का मुनाफा 55% तक कम हो गया.

    चीन बनाम अमेरिका: रोबोटिक्स की जंग

    यूनिट्री की यह लिस्टिंग इसलिए खास है क्योंकि यह चीन के मेनलैंड स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने वाली पहली ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स कंपनी है.

    चीन रोबोट्स के मास प्रोडक्शन में काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है:

    Omdia के अनुमान के अनुसार, चीनी निर्माताओं ने इस साल की पहली छमाही में करीब 18,500 ह्यूमनॉइड रोबोट बेचे.

    वहीं इस पीरियड में अमेरिकी कंपनियों ने सिर्फ 4,000 रोबोट शिप किए.

    अगर चीन इसी रफ्तार से कम लागत में रोबोट बनाता रहा, तो वह अमेरिकी कंपनियों के मास प्रोडक्शन में पहुंचने से पहले ही एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग बेस तैयार कर लेगा. लेकिन, अमेरिका की टेस्ला, Figure AI, एजिलिटी रोबोटिक्स जैसी कंपनियां बड़ा निवेश कर रही हैं. वहीं Nvidia फिजिकल एआई के लिए जरूरी चिप्स और एआई सिस्टम का नेतृत्व कर रही है.

    चीन ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स में इतना भारी निवेश क्यों कर रहा है?

    चीन रोबोटिक्स सेक्टर में दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनना चाहता है. ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोट मार्केट 2026 में करीब 2 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 69 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है, जैसा पहले बताया गया है. चीन चाहता है कि अमेरिका के बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन शुरू करने से पहले पहले वह कम लागत और तेज स्पीड में रोबोट बनाकर दुनिया के बाजार पर बढ़त बना ले.

    यूनिट्री दूसरे चीनी रोबोटिक्स कंपनियों से अलग क्यों है?

    यूनिट्री चीन के शेयर मार्केट में लिस्ट होने वाली पहली ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स कंपनी रेस में है. इसके रोबोट्स के वायरल स्टंट्स इंटरनेट पर काफी चर्चा का विषय बने हैं. इसके साथ ही बीते साल 2025 में यूनिट्री ने दुनिया में सबसे ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट्स बेचे, इसका रेवेन्यू 4 गुना बढ़कर 250 मिलियन डॉलर पहुंचा और यह एक प्रॉफिटेबल यानी लाभ कमाने वाली कंपनी बन गई है.

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    फैक्ट्रियों और दूसरे बिजनेस में ह्यूमनॉइड रोबोट्स बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने के कितने करीब हैं?

    रोबोट्स का हुनर और AI तेजी से सुधर रहा है, लेकिन बड़े पैमाने पर इनका इस्तेमाल होने में अभी समय लग सकता है. हालांकि चीन ने 2026 की पहली छमाही में 18,500 रोबोट्स की डिलीवरी की है, लेकिन कंपनियां और दूसरे कस्टमर्स इन्हें महंगे दामों में खरीदने और रोजाना के काम में इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं या नहीं, यह टेस्ट होना बाकी है.

    क्या चीनी कंपनियां अमेरिकी फर्मों को पीछे कर सकती हैं?

    चीन के पास प्रोडक्शन की तेजी और सस्ती मैन्युफैक्चरिंग जैसी शक्ति है. इसका उदाहरण है कि साल 2026 के पहले 6 महीनों में चीन ने 18,500 रोबोट बनाए, वहीं अमेरिका ने सिर्फ 4,000. लेकिन अमेरिका के पास बेहतर AI और एडवांस्ड चिप्स की ताकत है. अगर चीन इसी रफ्तार से प्रोडक्शन बढ़ाता रहा, तो वह मैन्युफैक्चरिंग में अमेरिका को पीछे छोड़ सकता है, लेकिन एआई और सॉफ्टवेयर में अमेरिका अभी भी कड़ी टक्कर दे रहा है.

    ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स की दौड़ में भारत कहां खड़ा है?

    ग्लोबल ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स की रेस में भारत फिलहाल उभरते हुए फेस में है. अमेरिका और चीन जैसे देश एडवांस फिजिकल AI, हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग और बड़े पैमाने पर फंडिंग के कारण इस सेक्टर में आगे हैं.  हालांकि, भारत सॉफ्टवेयर टैलेंट, स्पेस टेक्नोलॉजी और सर्विस रोबोटिक्स में तेजी से कदम बढ़ा रहा है.  
    इस सेक्टर में भारत ने ISRO के गगनयान मिशन के लिए AI-संचालित हाफ-ह्यूमनॉइड रोबोट व्योममित्र तैयार किया है, जो गगनयान के अनक्रू टेस्ट मिशनों में हिस्सा लेगा. भारत के पास विश्वस्तरीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और AI रिसर्चर्स का नेटवर्क है, जो Embodied AI तैयार करने में मदद करेगा.

    भारत का लक्ष्य तुरंत पश्चिमी या चीनी कंपनियों से सीधे एडवांस दो पैरों वाले इंडस्ट्रियल ह्यूमनॉइड्स में टक्कर लेने के जगत पर अपने स्पेशल तकनीक वाले रोबोट तैयार करना है. IndiaAI मिशन, PLI योजनाओं और IITs में R&D हब्स के विस्तार के साथ भारत इस अंतर को तेजी से छोटा कर रहा है.

  • लोगों से कहा पति घर छोड़कर चला गया, बच्चों को भेजा मौसी के घर, और फिर प्रेमी संग मिलकर की पति की हत्या, 11 महीने बाद खुला राज..

    लोगों से कहा पति घर छोड़कर चला गया, बच्चों को भेजा मौसी के घर, और फिर प्रेमी संग मिलकर की पति की हत्या, 11 महीने बाद खुला राज..

    लोगों से कहा पति घर छोड़कर चला गया, बच्चों को भेजा मौसी के घर, और फिर प्रेमी संग मिलकर की पति की हत्या, 11 महीने बाद खुला राज..

    नवी मुंबई के ऐरोली स्थित यादव नगर में करीब 11 महीने पहले हुई एक सनसनीखेज हत्या का राबले एमआईडीसी पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि दोनों ने मिलकर पति की हत्या की, शव के टुकड़े किए और सबूत मिटाने के लिए उन्हें जंगल में अलग-अलग जगह फेंक दिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुनीता कुशवाहा (40) और दशरथ प्रजापति (30) के रूप में हुई है. स्थानीय अदालत ने दोनों को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

    प्रेम संबंध का विरोध बना हत्या की वजह
    पुलिस जांच के अनुसार, मृतक बलिराम सूर्यनाथ कुशवाहा (50) अपनी पत्नी सुनीता और राहुल के कथित प्रेम संबंध का विरोध करता था. इसी कारण दोनों ने उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची. वारदात से पहले की रात दंपति के दोनों बच्चों को उनकी मौसी के घर भेज दिया गया ताकि हत्या के समय वे घर में मौजूद न रहें.

    सोते समय गला घोंटा, फिर सिर धड़ से अलग किया
    जांच में सामने आया कि बलिराम की पहले सोते समय गला घोंटकर हत्या की गई. इसके बाद तेज धारदार हथियार से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया गया. पहचान छिपाने और सबूत मिटाने के इरादे से शव के तीन टुकड़े किए गए. आरोपियों ने शव के हिस्सों को अलग-अलग बोरियों और चादरों में लपेटा और राहुल के ऑटो रिक्शा से गावली देव पहाड़ी के जंगल में तीन अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया.

    लोगों से कहा- पति घर छोड़कर चला गया
    हत्या के बाद सुनीता अपने बच्चों को लेकर घंसोली चली गई और राहुल के साथ रहने लगी. पड़ोसियों और परिचितों को बताया गया कि बलिराम घर छोड़कर कहीं चला गया है. इस कहानी के चलते कई महीनों तक किसी को हत्या की भनक नहीं लगी.


  • Gen Z की डिक्शनरी के दिमाग घुमा देने वाले 60 शब्द और उनका मतलब समझें…

    Gen Z की डिक्शनरी के दिमाग घुमा देने वाले 60 शब्द और उनका मतलब समझें…

    Gen Z की डिक्शनरी के दिमाग घुमा देने वाले 60 शब्द और उनका मतलब समझें…
    • दुनियाभर में जेन-जी अपनी ताकत का लोहा मनवा रही है
    • इसके साथ उनके कई खास शब्‍द भी पॉपुलर हो रहे हैं
    • Rizz, Delulu, Gyat…ये Gen-Z के बोलचाल के शब्द हैं
    • हर साल 12 अगस्‍त को इंटरनेशनल यूथ डे मनाया जाता है
    • इस मौके पर जानिए जेन-जी की डिक्‍शनरी के 60 शब्‍द और उनके मायने

    अगर आपको कोई CEO कहे तो इसका सीधा का मतलब समझेंगे कि वो आपको चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर कह रहा है. अगर कोई आपके लिए G.O.A.T. शब्द का इस्तेमाल करे तो शायब आप भी इसका मतलब बकरी समझेंगे. लेकिन Gen-Z की भाषा में इनका यह मतलब नहीं है. इनकी भाषा में अगर आपको किसी चीज का CEO बताया जाता है तो इसका मतलब है कि आप उस क्षेत्र में माहिर है. वहीं, G.O.A.T. द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम का शॉर्ट फॉर्म है. इसका इस्तेमाल किसी अविश्वसनीय इंसान के बारे में बताने में किया जाता है. आज Gen-Z की डिक्शनरी की चर्चा इसलिए क्योंकि हर साल 12 अगस्त को दुनियाभर में इंटरनेशनल यूथ डे मनाया जाता है.

    दुनियाभर में जेन-जी अपनी ताकत का लोहा मनवा रही है. सरकार पर सवाल खड़ा कर रही है. अपनी आवाज बुलंद कर रही है. आइए इंटरनेशनल यूथ डे के बहाने जानें जेन-जी की डिक्शनरी के 60 खास शब्द और उनका मतलब.

    1. Glow Up:
      इसका अर्थ है बुरे से अच्छे में चीजों का बदलना.
    2. CEO:
      अगर आप किसी चीज के सीईओ हैं, तो इसका मतलब है कि आपने उसमें महारत हासिल कर ली है, या आप उस क्षेत्र में माहिर हैं.
    3. Fam:
      ‘फैम’ परिवार का शॉर्ट फॉर्म है, लेकिन इसका इस्तेमाल दोस्तों के लिए किया जाता है. या जिस तरह से मिलेनियल्स “ब्रो” का इस्तेमाल करते हैं, उस तरह से किया जा सकता है.
    4. Cancel Culture:
      कैंसल कल्चर किसी बड़ी हस्ती, कंपनी या संगठन के कामों या विचारों को शर्मिंदा करने का एक रूप है.
    5. स्टैन:
      यह स्टेनली का शॉर्ट फॉर्म नहीं है. यह “स्टॉकर” और “फैन” का कॉम्बिनेशन है. अगर आप किसी को ‘स्टैन’ कहते हैं, तो इसका मतलब है कि आप उसके प्रति जुनूनी हैं.
    6. E-boy or E-girl:
      ये ऐसे यंगस्टर्स होते हैं जो एक खास “एस्थेटिक” फॉलो करते हैं जिसमें एनीमे, गोथ, पंक, स्केटर और K-pop कल्चर का मिक्स दिखता है.
    7. W:
      ज्यादातर लोगों के लिए यह सिर्फ वर्णमाला का एक अक्षर है, लेकिन जेन-जी के लिए इसका सीधा सा मतलब है विन यानी “जीत”.
    8. Dank:
      अगर कोई चीज डैंक है, तो वह हाई क्वालिटी वाली चीज है.
    9. Ghosting: रिश्ते की शुरुआती बातचीत के दौरान यह शब्द आम है. घोस्टिंग का मतलब है कि आप उन्हें नजरअंदाज करना शुरू कर देते हैं या उनके संदेशों का जवाब देना बंद कर देते हैं.
    10. Salty:
      Gen Z इस शब्द का इस्तेमाल तब करते हैं जब उन्हें जलन महसूस होती है।
    11. Finna:
      फिन्ना, “मैं जा रहा हूं” कहने का एक संक्षिप्त रूप है.
    12. Big Yikes:
      इस मुहावरे में बोलचाल की भाषा अपने आप में सब कुछ बयां करती है. ‘बिग यिक्स’ का इस्तेमाल तब किया जाता है जब आप इतने शर्मिंदा हों कि ‘यिक्स’ शब्द उसे पूरी तरह से व्यक्त न कर पाए.
    13. Boujee:
      इस शब्द का प्रयोग तब किया जा सकता है जब आप किसी ऐसी चीज या व्यक्ति को बयां कर रहे हों जो असाधारण या दिखावटी हो.
    14. Cap:
      कैप एक पुराना लेकिन आज भी प्रासंगिक शब्द है, जिसका अर्थ है झूठ बोलना. यदि आप “नो कैप” कहते हैं, तो इसका मतलब है कि आप सच्चे हैं.
    15. High-Key:
      हाई-की होना लो-की होने का ठीक विपरीत है.
    16. Cheugy:
      जो चीज भद्दी होती है और बिल्कुल भी चलन में नहीं होती.
    17. Simp:
      कोई ऐसा व्यक्ति जो अपने क्रश के लिए हद से ज्यादा कुछ करता है.
    18. Camp:
      कोई बहुत ओवर-द-टॉप, ड्रामैटिक फैशन आउटफिट जो जानबूझकर “बहुत एक्स्ट्रा” लगे, उसे “camp” कहा जा सकता है.
    19. Woke:
      ‘वोके’ का अर्थ है राजनीतिक रूप से जागरूक होना.
    20. TFW:
      इसका मतलब है “वह एहसास जब.” यानी जब आपको शुक्रवार को काम से जल्दी छुट्टी मिल जाती है.
    21. Snack:
      स्नैक वह व्यक्ति होता है जो आपको आकर्षक लगता है.
    22. Sip Tea:
      चाय की चुस्की लेना “गपशप फैलाने” का एक विकल्प है, जिसका अर्थ है कि आप गपशप में भाग लेने के बजाय आराम से बैठकर उसे सुन रहे हैं.
    23. L: इसका मतलब है हार.
    24. Take Several Seats:
      अगर कोई आपको वाकई परेशान कर रहा है, तो आप उनसे कह सकते हैं कि वे कुछ देर के लिए बैठ जाएं.
    25. Drip:
      स्वैग कहने का एक और तरीका है. ड्रिप कूल या सेक्सी ट्रेंड/स्टाइल के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है.
    26. Bop:
      जब कोई गाना या एल्बम असाधारण रूप से अच्छा हो.
    27. Sheesh:
      अगर कोई अच्छा दिख रहा हो या कुछ अच्छा कर रहा हो तो उसकी तारीफ करने के लिए ‘शीश’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है.
    28. Iykyk:
      यह संक्षिप्त रूप “अगर आप जानते हैं, तो आप जानते हैं” का संक्षिप्त रूप है. इसका प्रयोग आमतौर पर किसी मजाक या ऐसी बात के संदर्भ में किया जाता है जिसे केवल एक विशिष्ट समुदाय ही समझ सकता है.
    29. Living Rent-Free:
      अगर कोई चीज आपके दिमाग में “बिना किराए के रह रही है”, तो इसका मतलब है कि आप उसके बारे में सोचना बंद नहीं कर सकते.
    1. Bet:
      सरल शब्दों में कहें तो, इस बोलचाल के शब्द का अर्थ है “हां”। इसका प्रयोग किसी बात की पुष्टि करने के लिए किया जा सकता है और इसकी तुलना मिलेनियल्स के शब्द “वर्ड” से की जा सकती है.
    2. Vibe Check:
      किसी व्यक्ति की एनर्जी या सायकोलॉजी की जांच करना.
    3. Hits Different:
      जब कोई चीज अनोखी हो या सामान्य से बेहतर हो.
    4. Periodt:
      किसी कथन के अंत में इसका प्रयोग करने से कही गई बात पर जोर या तीव्रता आती है.
    5. Catch These Hands:
      झगड़ा शुरू करना. यह शब्द आम तौर पर विवादपूर्ण मामले में प्रयोग किया जाता है.
    1. Drag:
      किसी को घसीटना या उसका मजाक उड़ाना, ये सब उसकी आलोचना या उपहास करने जैसा है। इसे किसी को चिढ़ाने के बराबर माना जा सकता है।
    2. Finesse:
      का मतलब है किसी व्यक्ति या परिस्थिति को धोखा देना या हेरफेर करना ताकि आप जो चाहते हैं वह हासिल कर सकें.
    1. Im Weak:
      मैं मर गया की तरह ही, यह भी एक ऐसा ही मुहावरा है जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब आपको कोई बात बेहद मजेदार लगती है.
    2. Main Character:
      यह मुहावरा किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में बयां करने के लिए प्रयोग किया जाता है जो आमतौर पर लोकप्रिय और आकर्षक पर्सनैलिटी वाला होता है. इसका प्रयोग किसी ऐसे व्यक्ति के लिए भी किया जा सकता है जो हंगामा कर रहा हो, लेकिन जरूरी नहीं कि वह बुरे तरीके से ही हो.
    3. Sis:
      “बहन” का संक्षिप्त रूप , इस शब्द का प्रयोग आमतौर पर किसी मित्र का अभिवादन करने के लिए किया जाता है, चाहे वह पुरुष हो या महिला.
    4. Sending Me:
      अगर आपको कोई बात बेहद मजेदार लगे तो आप इस शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं.
    5. Slaps:
      किसी चीज की असाधारणता का वर्णन करने के लिए प्रयोग किया जाता है.
    6. Bussin:
      किसी स्वादिष्ट चीज का स्वाद चखने पर इस्तेमाल करने के लिए एक अनोखा शब्द.
    7. Sus:
      “सस्पिशियस” का संक्षिप्त रूप, सस का आमतौर पर मतलब होता है कि कुछ उम्मीद के मुताबिक नहीं है, या संदिग्ध है.
    8. Snatched:
      अगर कोई व्यक्ति आकर्षक दिख रहा है, तो वह वाकई में बहुत अच्छा लग रहा है, खासकर उसका पहनावा.
    9. Guap:
      पैसा, और वो भी बहुत सारा.
    10. Smol:
      कोई ऐसी चीज जो छोटी हो और ज्यादातर मामलों में बेहद प्यारी हो.
    11. This Aint It, Chief:
      किसी बात के प्रति असहमति व्यक्त करने का एक और तरीका.
    12. Extra:
      कोई ऐसा व्यक्ति जो सबसे अलग हो और चीजों को एक नए स्तर की भव्यता तक ले जाने का आनंद लेता हो.
    13. Clapback:
      किसी बात पर आलोचना होने के बाद दिया गया जवाब या पलटवार.
    14. G.O.A.T.:
      द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम का संक्षिप्त रूप है. एक ऐसा शॉर्ट फॉर्म जिसका उपयोग किसी अविश्वसनीय व्यक्ति का वर्णन करने के लिए किया जाता है.
    15. Gatekeep:
      किसी जानकारी को छिपाकर रखना या किसी प्रवृत्ति, स्थान या वस्तु को दूसरों से गुप्त रखना ताकि उसकी विशिष्टता बनी रहे.
    16. Red Flag:
      यहएक चेतावनी संकेत जो बताता है कि किसी व्यक्ति (आमतौर पर प्रेम संबंध में दिलचस्पती रखने वाले व्यक्ति) में समस्याग्रस्त लक्षण या व्यवहार मौजूद है.
    17. Situationship:
      एक ऐसा रोमांटिक रिश्ता जो दोस्ती से बढ़कर तो है , लेकिन एक निश्चित, प्रतिबद्ध रिश्ते से कम है.
    18. Delulu:
      भ्रमित का संक्षिप्त रूप. इसका प्रयोग अक्सर हास्यपूर्ण ढंग से अवास्तविक आशाओं या कल्पनाओं से चिपके रहने का वर्णन करने के लिए किया जाता है (जैसे, भ्रमित होना ही एकमात्र तरीका है या भ्रमित होना ही जीने का एकमात्र तरीका है).
    19. Pick Me:
      एक ऐसा व्यक्ति जो किसी विशिष्ट समूह (आमतौर पर विपरीत लिंग) से मान्यता या स्वीकृति पाने के लिए बेताब रहता है और ऐसा व्यवहार करता है जैसे वह “अन्य लड़कियों/लड़कों जैसा नहीं है”.
    20. Touch Grass:
      यह एक ऐसा वाक्यांश है जिसका इस्तेमाल किसी को इंटरनेट से दूर रहने और वास्तविक दुनिया से फिर से जुड़ने के लिए कहने के लिए किया जाता है, आमतौर पर इसलिए क्योंकि वे अलग तरह से व्यवहार कर रहे होते हैं या ऑनलाइन ड्रामा के प्रति जुनूनी होते हैं.
    21. Era:
      जीवन में एक ऐसे समय को बताना करना जो किसी विशिष्ट लक्ष्य, सौंदर्यबोध या माहौल द्वारा परिभाषित हो (उदाहरण के लिए, “मैं अपने स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती के दौर में हूं”)
    22. Ick:
      किसी ऐसे व्यक्ति के प्रति अचानक घृणा या अरुचि की भावना, जिसके प्रति आप पहले आकर्षित थे, अक्सर किसी छोटी सी आदत या क्रिया के कारण उत्पन्न होती है.
    23. Its Giving:
      किसी चीज़ के माहौल या खूबसूरती का वर्णन करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला यह शब्द है.
    24. Real:
      किसी दूसरे व्यक्ति की बात से पूरी तरह सहमति या समर्थन व्यक्त करने का एक संक्षिप्त तरीका, जिसका अर्थ है “मैं समझता हूं और मैं भी ऐसा ही महसूस करता हूंं.”
  • घर में चोरी और खुद बेहोश होने का किया नाटक, प्रेमी संग भागने की थी प्लानिंग! पुलिस ने ऐसे पकड़ा झूठ..​​​​

    घर में चोरी और खुद बेहोश होने का किया नाटक, प्रेमी संग भागने की थी प्लानिंग! पुलिस ने ऐसे पकड़ा झूठ..​​​​

    घर में चोरी और खुद बेहोश होने का किया नाटक, प्रेमी संग भागने की थी प्लानिंग! पुलिस ने ऐसे पकड़ा झूठ..​​​​

    उत्तर प्रदेश से रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ भागने के लिए अपने ही घर में लाखों रुपये के गहने और नकदी चोरी कराने की साजिश रच डाली. इतना ही नहीं, घटना को असली चोरी दिखाने के लिए उसने बेहोश होने का नाटक भी किया. लेकिन पुलिस की बारीकी से की गई जांच में पूरी सच्चाई सामने आ गई. पुलिस ने महिला और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर चोरी का सामान भी बरामद कर लिया है.

    पति ने दर्ज कराई थी चोरी की शिकायत
    यह मामला गोंडा जिले के खरगूपुर थाना क्षेत्र के विशुनापुर बाजार का है. पीड़ित लवकुश ने पुलिस को सूचना दी कि रात में अज्ञात चोर उनके घर में घुस आए. चोर सोने-चांदी के आभूषण, नकदी, मोबाइल और अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी.

    पूछताछ में पत्नी पर हुआ शक
    जांच के दौरान पुलिस ने घर के सभी लोगों से अलग-अलग पूछताछ की. इसी दौरान लवकुश की पत्नी पूनम कसौधन की गतिविधियां संदिग्ध लगीं. महिला पुलिसकर्मियों ने जब पूनम से अलग से पूछताछ की तो वह ज्यादा देर तक अपनी कहानी पर कायम नहीं रह सकी और पूरी साजिश कबूल कर ली.

    मौसेरे भाई से था प्रेम संबंध
    पुलिस जांच में पता चला कि पूनम का अपनी मौसी के बेटे विकास कसौधन से प्रेम संबंध था. दोनों साथ भागकर नई जिंदगी शुरू करना चाहते थे. इसके लिए उन्हें पैसों की जरूरत थी. इसी वजह से दोनों ने अपने ही घर में चोरी की योजना बनाई. योजना के मुताबिक, रात में पूनम ने विकास को घर बुलाया. दोनों ने मिलकर संदूक और बक्सों में रखे सोने-चांदी के आभूषण, नकदी और मोबाइल निकाल लिए. इसके बाद कमरे का सामान बिखेर दिया ताकि मामला असली चोरी जैसा लगे. चोरी का पूरा सामान विकास अपने साथ लेकर चला गया.

    बेहोशी का ड्रामा भी नहीं आया काम
    चोरी के बाद पूनम ने खुद को पीड़ित दिखाने के लिए बेहोश होने का नाटक किया. वह घर के बेड के नीचे जाकर लेट गई. अगली सुबह उसने परिवार वालों को बताया कि कुछ अज्ञात बदमाश घर में घुसे, उसके साथ मारपीट की और चोरी करके फरार हो गए. हालांकि पुलिस को उसकी कहानी पर शुरू से ही शक था. पूछताछ और घटनास्थल की जांच में कई ऐसे सुराग मिले, जिन्होंने पूरे मामले का खुलासा कर दिया.

    50 हजार नकद और गहने बरामद
    सीओ सिटी योगेश्वर सिंह ने बताया कि चोरी का पूरा सामान विकास कसौधन के घर से बरामद कर लिया गया है. पुलिस ने दोनों आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण और 50 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं. पुलिस ने पूनम कसौधन और विकास कसौधन को गिरफ्तार कर लिया है. दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर न्यायालय भेजा जा रहा है.

  • रातभर सोने के बाद भी सुबह नहीं जाती सुस्ती, अपना लें ये आदत..

    रातभर सोने के बाद भी सुबह नहीं जाती सुस्ती, अपना लें ये आदत..

    रातभर सोने के बाद भी सुबह नहीं जाती सुस्ती, अपना लें ये आदत..

    रातभर सोने के बाद भी सुबह उठते समय थकान और सुस्ती महूसस होती है. 7 से 8 घंटे सोने के बाद भी सुबह थकान महसूस होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. जैसे खराब स्लीव क्वालिटी, तनाव, हिहाइड्रेशन, अनहेल्दी लाइफस्टाइल और शरीर में पोषण की कमी.

    आप लाइफस्टाइल में कुछ आदतों में बदलाव करके सुबह उठने के बाद खुद को फ्रेश और एनर्जेटिक महसूस कर सकते हैं.  आइए जानते हैं सुबह की थकान दूर करने के लिए क्या करना चाहिए.

    सुबह उठने के बाद थकान क्यों महसूस होती है

    रात में बार-बार नींद टूटना 
    7 से 8 घंटे सोना केवल काफी नहीं होता है, खराब स्लीप क्वालिटी की वजह से भी सुबह के समय सुस्ती महसूस होती है. 
    शरीर में आयरन, विटामिन्स की कमी 
    तनाव और चिंता 
    देर रात तक लैपटॉप या मोबाइल का इस्तेमाल करना 
    शरीर में पानी की कमी 
    सोने और जागने का अलग-अलग समय

    थकान कैसे दूर करें

    रोज एक ही समय पर सोएं और जागें 
    अच्छी नींद के लिए रोज एक ही तय समय पर सोना और उठना चाहिए. इससे शरीर का बॉडी क्लॉक बैलेंस रहता है. ऐसा करने से नींद की गुणवत्ता अच्छी होती है. रोजाना एक ही समय सोने और उठने पर सुबह के साथ सुस्ती और थकान महसूस नहीं होती है. छुट्टी के दिन भी अपने स्लीप शेड्यूल में बदलाव ना करें.

    पानी पिएं

    रातभर सोने के दौरान शरीर में पानी की कमी हो सकती है. सुबह उठते ही 1 से 2 गिलास पानी का सेवन करना चाहिए. पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है. जिस वजह से मेटाबॉलिज्म काफी एक्टिव रहता है. आप दिन की शुरुआत गुनगुने पाने से भी कर सकते हैं.

    धूप

    रोजाना 15 से 20 मिनट की हल्की धूप लें. रोजाना हल्की धूप में बैठने से शरीर को विटामिन डी मिलता है. विटामिन डी की मदद से रात को अच्छी नींद आती है.

    हल्का वर्कआउट

    सुबह उठते ही हल्का वर्कआउट कर सकते हैं जैसे योग, वॉक, ब्रीदिंग एक्सरसाइज आदि. इन एक्सरसाइज को करने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है. जिससे मांसपेशियों में जकड़न कम होती है. पूरा दिन शरीर एक्टिव रहता है.

    हेल्दी ब्रेकफास्ट

    सुबह का नाश्ता नहीं छोड़ना चाहिए. नाश्ते में प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स जैसे अंडे, ओट्स, दही और फल का सेवन करना चाहिए. इससे शरीर को एनर्जी मिलती है. शरीर को सुस्ती भी कम होती है.