Lakhisarai Murder Case: बिहार के लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा थाना क्षेत्र स्थित अलीनगर गांव में बुधवार को एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. एक पति ने अपनी पत्नी की बेरहमी से हत्या करने के बाद उसके शव को घर के अंदर ही दफना दिया और पूरे दिन ऐसे व्यवहार करता रहा मानो कुछ हुआ ही न हो. हालांकि देर शाम ग्रामीणों के संदेह और पुलिस की पूछताछ ने इस खौफनाक वारदात का पर्दाफाश कर दिया. मृतका की पहचान सहोदरी देवी के रूप में हुई है, जबकि आरोपी पति नागेश्वर बिंद उर्फ नागो बिंद को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने घर के अंदर जमीन खुदवाकर शव बरामद किया और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लखीसराय भेज दिया.
सुबह साथ गए थे पूजा करने, दोपहर में बदल गया सब कुछ
पुलिस और ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह करीब 10 बजे पति-पत्नी गांव स्थित चंडिका स्थान में पूजा-अर्चना करने गए थे. पूजा करने के बाद दोनों घर लौटे और साथ बैठकर मुर्गा-चावल तैयार किया. खाना खाने के बाद सहोदरी देवी सो गईं. इसी दौरान नागेश्वर बिंद ने शराब का सेवन किया. बताया जा रहा है कि शराब के नशे में धुत होने के बाद उसने अपनी पत्नी पर जानलेवा हमला कर दिया.
कुल्हाड़ी और धारदार हथियार से की निर्मम हत्या
प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी ने पहले धारदार हथियार से पत्नी का गला रेता. इसके बाद भी उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ और उसने चेहरे तथा हाथों पर कई वार किए. हमले में सहोदरी देवी की मौके पर ही मौत हो गई. हत्या के बाद आरोपी ने साक्ष्य मिटाने की योजना बनाई और शव को ठिकाने लगाने का फैसला किया.
घर के अंदर शव दफना
पत्नी की हत्या करने के बाद नागेश्वर बिंद ने मिट्टी के घर के अंदर ही एक गड्ढा खोदा. इसके बाद शव को उसी गड्ढे में दफना दिया. वारदात को छिपाने के लिए उसने पूरे दिन सामान्य व्यवहार करने की कोशिश की. बाहर से देखने पर किसी को अंदाजा नहीं था कि घर के अंदर एक हत्या हो चुकी है और शव जमीन के नीचे दफन है. शाम होने पर आरोपी घर के बाहर ताला लगाकर निकलने की तैयारी कर रहा था. इसी दौरान पड़ोसियों ने सहोदरी देवी के बारे में पूछा. नागेश्वर बिंद ने लोगों को बताया कि उसकी पत्नी मायके चली गई है. हालांकि उसकी यह कहानी ज्यादा देर तक नहीं चल सकी. ग्रामीणों को उसकी बात पर भरोसा नहीं हुआ क्योंकि सहोदरी देवी बिना किसी को बताए कहीं जाने वाली महिला नहीं थीं.
बकरियों की मिमियाहट से बढ़ा शक
ग्रामीणों के संदेह की एक बड़ी वजह घर में बंधी बकरियां भी बनीं. बताया गया कि बकरियां लंबे समय से भूखी-प्यासी थीं और लगातार मिमिया रही थीं. ग्रामीणों का कहना था कि अगर सहोदरी देवी मायके गई होतीं तो घर और पशुओं की व्यवस्था करके जातीं. इसी बात ने लोगों के मन में संदेह पैदा कर दिया. इसके बाद ग्रामीणों ने नागेश्वर बिंद को गांव में ही रोक लिया और पुलिस को सूचना दे दी.
पुलिस की पूछताछ में टूट गया आरोपी
सूचना मिलने के बाद सूर्यगढ़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घर की तलाशी ली. शुरुआती जांच में महिला का कोई सुराग नहीं मिला. जब पुलिस ने आरोपी से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया और पूरी वारदात स्वीकार कर ली. आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने घर के अंदर खुदाई कराई, जहां से सहोदरी देवी का शव बरामद हुआ. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने रात में खोजी कुत्तों की मदद भी ली. जांच टीम ने यह पता लगाने की कोशिश की कि कहीं इस अपराध में किसी और व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी. पुलिस विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी तथ्यों को खंगाल रही है.
निःसंतान होने की बात बताई वजह, पुलिस कर रही जांच
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि दंपती की कोई संतान नहीं थी और इसी बात को लेकर वह परेशान रहता था. उसने इसी कारण पत्नी की हत्या करने की बात कही है. हालांकि पुलिस केवल इसी बयान पर निर्भर नहीं है. जांच अधिकारी हत्या के वास्तविक कारण, पारिवारिक परिस्थितियों और अन्य संभावित वजहों की भी गहन पड़ताल कर रहे हैं. सूर्यगढ़ा थानाध्यक्ष रोहित कुमार ने बताया कि आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया गया है. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है. जानकारी के अनुसार मृतका के मायके में केवल उनके वृद्ध पिता रहते हैं, जबकि उनके भाई दूसरे प्रदेश में हैं. पुलिस और प्रशासन परिजनों के आने का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.
Bengaluru Crime News: बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे पर एक परिवार पर बदमाशों में हमला कर दिया. एक पति-पत्नी और उनका 10 महीने का बच्चा यात्रा कर रहे थे कि कुछ बदमाशों ने उन पर अटैक कर दिया.
महिला ने अपने पति और बच्चे को बचाने के लिए अपने सोने को भी पेशकश की, लेकिन हमलावरों पर कोई असर नहीं हुआ और उन्होंने बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे पर कार में यात्रा कर रहे महिला के पति और बच्चों को पीटना जारी रखा.
पुलिस ने किया गिरफ्तार
पुलिस ने बताया कि रविवार रात करीब 10.30 बजे मांड्या जिले के मद्दूर के पास हुए कथित हमले के सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है. यह घटना पीड़ितों के पीछे चल रहे एक वाहन के डैशकैम में कैद हो गई थी. पीड़ित सागर कुमार ने एनडीटीवी को बताया कि लगभग नौ लोगों ने राजमार्ग पर उन पर और उनके परिवार पर हमला किया, और कहा कि इस क्रूर हमले से उनकी पत्नी गहरे सदमे में हैं. उन्होंने कहा, “उन्होंने मुझ पर, मेरी पत्नी पर और मेरे 10 महीने के बच्चे पर हमला किया. मेरी पत्नी ने हाथ जोड़कर उनसे हमें बख्शने की भीख मांगी क्योंकि हम एक शिशु के साथ यात्रा कर रहे थे. उसने उनसे यह भी कहा, ‘मेरा सोना ले लो, जो चाहो ले लो, लेकिन कृपया हमें जाने दो।’ लेकिन उन्होंने मुझ पर हमला करना बंद नहीं किया.” घटनास्थल से मिले एक वीडियो में सागर की कार को हाईवे के बीचोंबीच रोककर, उसे घेरकर, बाहर खींचकर सड़क पर ही उसके साथ मारपीट करते हुए दिखाया गया है. उसकी पत्नी उसे बचाने के लिए बाहर आती है, जबकि एक अन्य वाहन में सवार व्यक्ति स्थिति को शांत करने का प्रयास करता है. हालांकि, मारपीट जारी रहती है.
क्यों हुई मारपीट
पुलिस ने बताया कि यह झड़प तब शुरू हुई जब एक्सप्रेसवे पर भारी ट्रैफिक के बीच सागर की कार कथित तौर पर एक अन्य वाहन से टकरा गई. टक्कर को लेकर दोनों वाहनों में सवार लोगों के बीच बहस हुई जो जल्द ही हिंसा में तब्दील हो गई. इस हमले में घायल सागर ने सोमवार को पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. बेंगलुरु निवासी इस पीड़ित ने व्यवस्थागत सुधारों की मांग करते हुए इस बात पर जोर दिया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर निगरानी को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है.
Darbhanga BDO Wife Death Case: बिहार के दरभंगा जिले में तैनात प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) मनोज कुमार की पत्नी अमृता कुमारी की मौत का मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है. शुरुआती दौर में यह मामला दहेज हत्या के आरोपों के इर्द-गिर्द घूम रहा था, लेकिन अब जांच का केंद्र कथित प्रेम संबंध, डिजिटल साक्ष्य और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जुड़ी जानकारी बन गई है. मुजफ्फरपुर पुलिस ने इस मामले में BDO मनोज कुमार के साथ बेगूसराय में तैनात ASI अनु कुमारी को भी गिरफ्तार किया था. दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से मनोज कुमार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि ASI अनु कुमारी को पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया.
मोबाइल चैट और कॉल डिटेल ने बदली जांच की दिशा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान कई तकनीकी साक्ष्य सामने आए हैं. इनमें मोबाइल चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और CCTV फुटेज शामिल हैं. इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने BDO मनोज कुमार और ASI अनु कुमारी को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की. सूत्रों के मुताबिक शुरुआत में दोनों ने कई सवालों के जवाब में इनकार किया, लेकिन जब उन्हें तकनीकी सबूत दिखाए गए तो दोनों के बीच लंबे समय से संपर्क और कथित रिश्ते से जुड़े तथ्य सामने आए. जांच एजेंसियां अब इन डिजिटल साक्ष्यों का गहन विश्लेषण कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका अमृता कुमारी की मौत से कोई सीधा संबंध है या नहीं.
परिजनों का आरोप- रिश्ते का विरोध करती थीं अमृता
मृतका अमृता कुमारी के भाई राजकुमार ने गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि अमृता को अपने पति मनोज कुमार और ASI अनु कुमारी के कथित रिश्ते की जानकारी हो गई थी. परिवार का आरोप है कि अमृता इस संबंध का लगातार विरोध करती थीं. इसी वजह से उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा. शिकायत में यह भी कहा गया है कि दहेज की मांग और कथित रिश्ते का विरोध करने के कारण अमृता को जहर देकर मार दिया गया. हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.
मौत वाले दिन दोनों के पटना में होने की जांच
पुलिस जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है. सूत्रों के अनुसार अमृता कुमारी की मौत वाले दिन BDO मनोज कुमार और ASI अनु कुमारी कथित रूप से पटना में मौजूद थे. जांच एजेंसियां इस पहलू की भी बारीकी से पड़ताल कर रही हैं. उस दिन की लोकेशन हिस्ट्री, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है. पुलिस यह भी जांच रही है कि घटना वाले दिन किन-किन लोगों से बातचीत हुई और घटनाक्रम के दौरान कौन-कौन संपर्क में था.
वीडियो कॉल रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में
जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि अमृता को मौत वाले दिन वीडियो कॉल किए गए थे. पुलिस अब वीडियो कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और डिजिटल कम्युनिकेशन की जांच कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि इन रिकॉर्ड्स से घटना से पहले और बाद के घटनाक्रम की महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है.
कॉम्पिटिशन की तैयारी के दौरान हुई थी पहचान
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक मनोज कुमार और अनु कुमारी की पहचान मुजफ्फरपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान हुई थी. समय के साथ दोनों के बीच संपर्क बना रहा. दूसरी ओर अमृता और अनु कुमारी भी कॉलेज की सहेलियां बताई जा रही हैं. दिसंबर 2022 में मनोज कुमार और अमृता की शादी हुई थी, लेकिन पुलिस का कहना है कि शादी के बाद भी मनोज और अनु के बीच बातचीत और संपर्क जारी रहा. यही वजह है कि पुलिस इस रिश्ते के पूरे घटनाक्रम को समझने का प्रयास कर रही है.
CCTV फुटेज ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
जांच के दौरान पुलिस के हाथ एक CCTV फुटेज भी लगा है. अधिकारियों के अनुसार फुटेज में अमृता के साथ मारपीट दिखाई देने का दावा किया गया है. इसी फुटेज के आधार पर पुलिस ने कई अन्य पहलुओं की जांच शुरू की है. पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो और CCTV फुटेज में कुछ अन्य नामजद आरोपी भी दिखाई दे रहे हैं. इन लोगों की पहचान और भूमिका को लेकर जांच जारी है तथा उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.
गायब मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप की तलाश
पुलिस की जांच अब अमृता कुमारी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर भी केंद्रित हो गई है. मृतका के परिजनों का आरोप है कि अमृता के दो मोबाइल फोन, एक टैबलेट और एक लैपटॉप में प्रताड़ना और पूरे घटनाक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत मौजूद थे. उनका दावा है कि इन उपकरणों को गायब कर दिया गया है. पुलिस तकनीकी सर्विलांस और अन्य माध्यमों से इन उपकरणों की तलाश कर रही है. जांच एजेंसियों का मानना है कि इन डिवाइसों से कई अहम जानकारियां मिल सकती हैं.
मोबाइल फोन की होगी फॉरेंसिक जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए BDO मनोज कुमार और ASI अनु कुमारी के मोबाइल फोन भी फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जा रहे हैं. विशेषज्ञ कॉल रिकॉर्ड, मैसेज, चैट हिस्ट्री, लोकेशन डेटा और अन्य डिजिटल गतिविधियों की जांच करेंगे. इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि घटना से पहले और बाद में क्या गतिविधियां हुई थीं.
परिवार के अन्य सदस्य भी नामजद
इस मामले में केवल BDO मनोज कुमार ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता, भाई और बहन को भी नामजद आरोपी बनाया गया है. पुलिस का कहना है कि इन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. जांच एजेंसियां सभी पक्षों के बयान, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और फॉरेंसिक रिपोर्ट का मिलान कर रही हैं.
इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर टिकी पूरी जांच
फिलहाल यह मामला केवल पारिवारिक विवाद या दहेज उत्पीड़न तक सीमित नहीं रह गया है. मोबाइल डेटा, चैट रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, वीडियो कॉल, फॉरेंसिक जांच और गायब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अब जांच के सबसे अहम आधार बन चुके हैं. पुलिस का कहना है कि सभी डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों की जांच पूरी होने, फॉरेंसिक रिपोर्ट आने और अन्य आरोपियों से पूछताछ के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी. फिलहाल जांच कई स्तरों पर जारी है और हर नए साक्ष्य के साथ मामला और भी संवेदनशील होता जा रहा है.
मध्य प्रदेश के जिला टीकमगढ़ से बुआ का बवाल सामने आय़ा है। जिले के खरगापुर थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले से सभी को हैरान कर दिया है। माता-पिता की मृत्यु के बाद रिश्तेदारों के संरक्षण में रह रहे 15 वर्षीय नाबालिग ने अपनी ही सगी बुआ और परिवार के अन्य सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाया है। टीकमगढ़ एसपी के पास पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।
बुआ ने करवा दी विधवा बहू से शादी 15 साल के रिश्तेदार का शादी
दरअसल माता-पिता की मौत के बाद 15 साल का नाबालिग लड़का बुआ के घर पर रहने लगा था। किशोर का आरोप है कि उसकी बुआ ने अपने दिवंगत बेटे की विधवा बहू की मांग उससे जबरन भरवाई। बाद में उसे उसी महिला के साथ पति-पत्नी की तरह रहने के लिए लगातार दबाव बनाया। मामले में पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए जांच शुरू कर दी है।
सगी बुआ के पास रह रहा था नाबालिग
पीड़ित ने टीकमगढ़ एसपी को दिए आवेदन में कहा है कि माता-पिता के निधन के बाद वह अपनी सगी बुआ के पास रह रहा था। इसी दौरान बुआ और परिवार के अन्य सदस्यों ने कथित रूप से उसे मंदिर ले जाकर अपनी विधवा बहू की मांग जबरन भरवा दी। नाबालिग का कहना है कि उसे बताया गया कि अब उसका विवाह हो चुका है और उसे उसी महिला के साथ पति की तरह रहना होगा।
अपनी उम्र को लेकर दिया हवाला
किशोर का आरोप है कि उसने कई बार अपनी उम्र का हवाला देते हुए इसका विरोध किया, लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। उसने कहा कि विरोध करने पर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उसके साथ जबरन शारीरिक शोषण कराने का भी प्रयास किया गया। पीड़ित का कहना है कि उसकी बुआ का बेटा अब इस दुनिया में नहीं है और इसी कारण वह अपनी विधवा बहू को उसके साथ रखने का दबाव बना रही है। उसका कहना है कि इस पूरी घटना ने उसके बचपन, शिक्षा और भविष्य को संकट में डाल दिया है।
नाबालिग ने यह भी बताया कि उसने पहले संबंधित थाना पुलिस और 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उसे कोई प्रभावी राहत नहीं मिली। इसके बाद उसने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर विस्तृत आवेदन सौंपा और निष्पक्ष जांच, अपनी सुरक्षा तथा आरोपियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
इस संबंध में टीकमगढ़ के एएसपी विक्रम सिंह ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले को विवेचना में ले लिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
उत्तर प्रदेश के सतर्कता अधिष्ठान ने आय के ज्ञात स्रोतों के अनुपात में अधिक संपत्ति अर्जित करने के एक मामले में आगरा में तैनात रहे पूर्व सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ललित कुमार के लखनऊ स्थित घर पर छापेमारी करके भारी मात्रा में सोना-चांदी और…
लखनऊ:
उत्तर प्रदेश के सतर्कता अधिष्ठान ने आय के ज्ञात स्रोतों के अनुपात में अधिक संपत्ति अर्जित करने के एक मामले में आगरा में तैनात रहे पूर्व सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ललित कुमार के लखनऊ स्थित घर पर छापेमारी करके भारी मात्रा में सोना-चांदी और नकदी बरामद की।
सतर्कता अधिष्ठान की ओर से बुधवार को जारी एक बयान के मुताबिक अदालत से तलाशी वारंट मिलने बाद मंगलवार और बुधवार को अलीगंज की चंद्रलोक कॉलोनी में स्थित कुमार के घर पर की गई छापेमारी के दौरान एक करोड़ 62 लाख रुपये नकदी, 13 किलोग्राम सोना और नौ किलोग्राम चांदी के गहने बरामद किये गए। बयान में कहा गया है कि इसके अलावा चल—अचल संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी मिले, जिनकी कुल कीमत लगभग 35 करोड़ रुपये आंकी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान कथित तौर पर पता चला था कि कुमार ने आय के ज्ञात स्रोतों के अनुताप में कहीं अधिक संपत्ति जमा की है, जिसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान इस मामले की जांच कर रहा है। बयान के अनुसार छापेमारी के दौरान मिले एक करोड़ 62 लाख रुपये घर के अंदर अलग-अलग स्थानों पर पैकेट में छुपाकर रखे गए थे, वहीं लगभग 13 किलो सोना और लगभग नौ किलो चांदी भी जब्त की गयी है।
अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के दौरान कई चल और अचल संपत्तियों में निवेश से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किये गये हैं। बयान के मुताबिक, ये दस्तावेज लखनऊ में कई रिहायशी मकानों और भूखंड, लखनऊ, बाराबंकी और रायबरेली जिलों में कृषि भूमि और लखनऊ व नोएडा में फ्लैट की बुकिंग से संबंधित हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 13 करोड़ रुपये है। बयान के अनुसार छापेमारी में बैंक में जमा राशि, डाकघर में निवेश, म्यूचुअल फंड और सावधि जमा में एक करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। अधिकारियों ने बताया कि मौके से दो कीमतें कारें और एक रिवॉल्वर भी बरामद की गई। उन्होंने बताया कि बरामद नकदी, कीमती धातुओं, गहनों, चल-अचल संपत्ति और निवेश की कुल कीमत लगभग 35 करोड़ रुपये आंकी गई है। बयान में यह भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान के महानिदेशक ने यह छापेमारी और बरामदगी करने वाली टीम को एक लाख रुपये इनाम देने की घोषणा की है।
बीते दिनों जयपुर में एक बेटे द्वारा मां की हत्या करवाने की बात सामने आई थी. अब राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक बेटे ने अपनी मां को चाकू से गोदकर मौत के घाट उतार दिया. आरोपी बेटा लोक निर्माण विभाग (PWD) में यूडीसी (UDC) के पद पर कार्यरत है और उसे पिता की मौत के बाद अनुकंपा नौकरी मिली थी. झुंझुनूं में पीडब्लूडी में सीनियर क्लर्क बेटे द्वारा मां की हत्या की घटना में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है. आरोपी ने मां की हत्या के बाद अपनी बहन को फोन करके कहा कि मैंने मां को मार दिया है. फिलहाल पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया और हत्या की जांच में जुट गई है.
चाकू मारकर बेटे ने की मां की हत्या
जानकारी के मुताबिक, हत्या की यह वारदात झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ कस्बे में बुधवार-गुरुवार देर रात में हुई है. कृषि उपज मंडी क्षेत्र के सामने स्थित एक मकान में बेटे ने अपनी ही मां की चाकू से गोदकर हत्या कर दी. वारदात के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. सूचना मिलते ही नवलगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची, आरोपी बेटे को हिरासत में लिया और जांच शुरू कर दी. पुलिस के अनुसार, मृतका की पहचान प्रभाती देवी, पत्नी स्वर्गीय शीशराम के रूप में हुई है.
परिवार मूल रूप से गुढ़ा थाना क्षेत्र के सिंगनोर गांव का रहने वाला है, लेकिन वर्तमान में नवलगढ़ में कृषि उपज मंडी के सामने निवास कर रहा था. आरोपी बेटा राजवीर PWD में यूडीसी के पद पर कार्यरत है. पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि देर रात किसी बात को लेकर मां-बेटे के बीच विवाद हुआ. इसके बाद आरोपी ने चाकू से मां पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. वारदात के बाद आरोपी ने अपनी एक बहन को फोन कर कहा कि मैंने मां को मार दिया है.
शराब का आदी है आरोपी
सूचना मिलने पर मृतका के दामाद और अन्य परिजन मौके पर पहुंचे और महिला को अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. नवलगढ़ थानाधिकारी अजय सिंह ने बताया कि रात करीब 12 बजे घटना की सूचना मिली थी. पुलिस तुरंत अस्पताल और घटनास्थल पहुंची. मृतका के दामाद शिवकुमार की रिपोर्ट पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है. शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवाया गया है. पुलिस के अनुसार, आरोपी शराब का आदी बताया जा रहा है.
उसकी पत्नी से भी लंबे समय से मनमुटाव चल रहा था और वह अपने पांच वर्षीय बच्चे के साथ पीहर गई हुई थी. घटना के समय घर में केवल मां और बेटा ही मौजूद थे. घटनास्थल को सुरक्षित कर घर को सील कर दिया गया है. एफएसएल और एमओबी टीम को मौके पर बुलाकर साक्ष्य जुटाए जायेंगे हैं. पुलिस का कहना है कि हत्या के वास्तविक कारणों का खुलासा जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगा.
Interpol Operation First Light 2026:
ऑनलाइन ठगी और सोशल इंजीनियरिंग स्कैम के खिलाफ इंटरपोल ने भारत समेत 97 देशों के साथ मिलकर ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026 चलाया. करीब साढ़े तीन महीने चले अभियान में 5,811 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, 15,606 संदिग्धों की पहचान हुई और 31,014 बैंक खाते ब्लॉक किए गए. कार्रवाई के दौरान 293 मिलियन डॉलर यानी लगभग 2,500 करोड़ रुपये की अवैध रकम अपराधियों तक पहुंचने से पहले रोक दी गई. फर्जी पुलिस अधिकारी, निवेश ठगी, रोमांस स्कैम और क्रिप्टो नेटवर्क इस ऑपरेशन के प्रमुख निशाने रहे.
क्या है मामला?
अगर आपके मोबाइल पर कभी बैंक अधिकारी, पुलिस अफसर, किसी सरकारी एजेंसी या निवेश कंपनी के नाम पर फोन आया हो और आपसे पैसे ट्रांसफर करने या बैंक डिटेल साझा करने के लिए कहा गया हो, तो समझ लीजिए कि यह उसी तरह के अपराध हैं जिनके खिलाफ इंटरपोल ने दुनिया का सबसे बड़ा अभियान चलाया है.
ऑनलाइन ठगी अब केवल किसी एक देश की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का रूप ले चुकी है. इसी खतरे से निपटने के लिए इंटरपोल ने भारत समेत 97 देशों की पुलिस और जांच एजेंसियों के साथ मिलकर *ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026* चलाया, जिसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले रहे. करीब साढ़े तीन महीने तक चले इस अभियान में दुनिया भर में फैले साइबर ठगी के नेटवर्क पर एक साथ शिकंजा कसा गया.
फर्जी पुलिस, निवेश और रोमांस स्कैम नेटवर्क का भंडाफोड़, 5,811 गिरफ्तार
इंटरपोल के मुताबिक इस दौरान 5,811 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, 15,606 संदिग्धों की पहचान हुई, 31,014 बैंक खातों को ब्लॉक किया गया, 99 इंटरपोल नोटिस और डिफ्यूजन जारी किए गए और 293 मिलियन अमेरिकी डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 2,500 करोड़ रुपये की अवैध रकम को अपराधियों के हाथों में पहुंचने से रोक दिया गया.
इंटरपोल के मुताबिक यह अभियान 15 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक चला. लेकिन इसकी तैयारी इससे पहले ही शुरू हो गई थी. सबसे पहले कई देशों की पुलिस और जांच एजेंसियों ने साइबर अपराधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा की.
अलग-अलग देशों में सक्रिय गैंग, उनके बैंक खाते, क्रिप्टो वॉलेट, फोन नंबर, फर्जी कंपनियां और डिजिटल नेटवर्क की पहचान की गई. इसके बाद एक तय रणनीति के तहत सभी देशों ने लगभग एक ही समय पर कार्रवाई शुरू की. इस दौरान हजारों जगहों पर छापेमारी की गई, संदिग्ध परिसरों को खंगाला गया, बैंक खातों को फ्रीज किया गया, क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट ब्लॉक किए गए और कई बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया गया.
साइबर अपराधियों पर सबसे बड़ी कार्रवाई
इंटरपोल का यह पूरा अभियान मुख्य रूप से सोशल इंजीनियरिंग स्कैम के खिलाफ था. यह साइबर अपराध का ऐसा तरीका है जिसमें अपराधी किसी तकनीकी कमजोरी का फायदा नहीं उठाते, बल्कि इंसान के भरोसे, डर, लालच या भावनाओं का इस्तेमाल करके उसे ठगते हैं. उदाहरण के तौर पर अपराधी खुद को बैंक मैनेजर, पुलिस अधिकारी, आयकर विभाग का कर्मचारी, कोर्ट का अधिकारी, सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि, निवेश सलाहकार या किसी रिश्तेदार के रूप में पेश करते हैं. कई मामलों में अपराधी वीडियो कॉल पर फर्जी वर्दी पहनकर बात करते हैं ताकि सामने वाले को यकीन हो जाए कि वह किसी सरकारी अधिकारी से बात कर रहा है.
Operation First Light 2026 Interpol: पकड़े गए आरोपी
इसके बाद पीड़ित को यह कहकर डराया जाता है कि उसके खिलाफ कोई केस दर्ज हो गया है, उसका बैंक खाता बंद होने वाला है, उसका आधार कार्ड किसी अपराध में इस्तेमाल हुआ है या फिर उसे किसी निवेश योजना में मोटा मुनाफा मिलेगा. जैसे ही व्यक्ति उनके झांसे में आता है, उससे पैसे ट्रांसफर करवा लिए जाते हैं या उसकी गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर ली जाती है.
ऑपरेशन फर्स्ट लाइट के दौरान इंटरपोल और सदस्य देशों की एजेंसियों ने 1,42,000 से अधिक पीड़ितों की पहचान की. यानी केवल तीन महीने के दौरान ही इतनी बड़ी संख्या में लोग इन साइबर ठगों के निशाने पर आए थे.
जांच के दौरान 1,52,808 मामलों का विश्लेषण किया गया. इनमें से 23,715 मामलों को सुलझा लिया गया, जबकि 15,606 लोगों की पहचान संदिग्ध के रूप में हुई. इससे साफ है कि साइबर फ्रॉड का नेटवर्क बेहद संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है.
नकली पुलिस स्टेशन से लेकर क्रिप्टो ठगी तक, इंटरपोल ने खोले बड़े राज
इस अभियान में इंटरपोल ने अपने विशेष सिस्टम I-GRIP (Global Rapid Intervention of Payments) का भी इस्तेमाल किया. यह ऐसा अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है जिसके जरिए यदि किसी देश में साइबर ठगी की रकम दूसरे देश में भेजी जा रही हो, तो संबंधित देशों की एजेंसियां तुरंत अलर्ट होकर उस रकम को बैंक या क्रिप्टो वॉलेट तक पहुंचने से पहले ही रोक सकती हैं. यानी अगर किसी भारतीय के साथ ऑनलाइन ठगी होती है और पैसा कुछ मिनटों में किसी दूसरे देश के खाते में ट्रांसफर होने वाला हो, तो I-GRIP की मदद से उस रकम को समय रहते ब्लॉक किया जा सकता है.
इस ऑपरेशन का सबसे हैरान करने वाला खुलासा अफ्रीकी देश इस्वातिनी में हुआ. यहां पुलिस ने 82 लोगों को गिरफ्तार किया और एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया जिसने ठगी के लिए पूरा का पूरा नकली ब्राजीलियन पुलिस स्टेशन तैयार कर रखा था.
इस फर्जी पुलिस स्टेशन में ब्राजील पुलिस जैसी वर्दियां, नेम प्लेट, सरकारी बोर्ड, ऑफिस का सेटअप और वीडियो कॉल की पूरी व्यवस्था मौजूद थी. जब किसी विदेशी नागरिक को फोन किया जाता था तो वीडियो कॉल पर सामने पुलिस की वर्दी पहने लोग दिखाई देते थे. पीड़ित को बताया जाता था कि उसका नाम किसी अपराध में सामने आया है और जांच पूरी होने तक उसे अपने पैसे सरकारी सुरक्षा खाते में जमा कराने होंगे. जैसे ही व्यक्ति पैसे ट्रांसफर करता, पूरी रकम अपराधियों के पास पहुंच जाती थी.
छापेमारी में 240 इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, विदेशी मुद्रा और बड़ी मात्रा में डिजिटल सबूत बरामद किए गए. डिजिटल साक्ष्यों की भारी मात्रा को देखते हुए इंटरपोल ने अपनी विशेष फॉरेंसिक टीम भी इस्वातिनी भेजी. थाईलैंड में जांच एजेंसियों ने दो लोगों को गिरफ्तार किया. इनमें एक आरोपी की उम्र केवल 20 साल थी.
जांच में सामने आया कि यह गिरोह रोमांस स्कैम के जरिए लोगों से ठगी करता था. बाद में इस पैसे को अलग-अलग क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर कई ब्लॉकचेन नेटवर्क के जरिए घुमाया जाता था ताकि जांच एजेंसियां असली स्रोत तक न पहुंच सकें. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस 20 साल के आरोपी के डिजिटल वॉलेट से केवल 10 महीनों में 122.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का लेनदेन हुआ था.
सिंगापुर और ओमान में बड़ी वारदात टली
ऑपरेशन के दौरान इंटरपोल के I-GRIP सिस्टम की सबसे बड़ी सफलता सिंगापुर और ओमान में देखने को मिली. यहां अपराधियों ने एक कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनी को निशाना बनाया. उन्होंने कंपनी के सप्लायर की फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर भुगतान अपने खाते में ट्रांसफर कराने की कोशिश की. लेकिन समय रहते दोनों देशों की एजेंसियां सक्रिय हो गईं और 6.6 मिलियन डॉलर की रकम ट्रांसफर होने से पहले ही रोक दी गई. चीन के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र मकाऊ में पुलिस साइबर फ्रॉड के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रही थी. इसी दौरान एक व्यक्ति वहां पहुंचा जो पहले से ही ऑनलाइन ठगों के झांसे में था.
अपराधी खुद को सरकारी अधिकारी बताकर उससे लगभग 3 लाख 72 हजार डॉलर ट्रांसफर कराने वाले थे. लेकिन पुलिस ने समय रहते उसे समझाया और ठगी होने से बचा लिया.
प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश पलाऊ में पुलिस ने दो होटलों में चल रहे साइबर स्कैम सेंटर का पर्दाफाश किया. यहां से 22 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार कर बाद में देश से डिपोर्ट किया गया. ये लोग क्रिप्टोकरेंसी, अवैध जुआ वेबसाइटों और ऑनलाइन निवेश योजनाओं के जरिए दूसरे देशों के नागरिकों को निशाना बना रहे थे.
भारत समेत 97 देशों की संयुक्त कार्रवाई, साइबर ठगी नेटवर्क को तगड़ा झटका
ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026 में भारत सहित 97 देशों और क्षेत्रों ने हिस्सा लिया. इसके अलावा यूरोपोल, ASEANAPOL और GCCPOL जैसी अंतरराष्ट्रीय पुलिस संस्थाओं ने भी इस अभियान में सहयोग किया. भारत पिछले कुछ सालों से डिजिटल अरेस्ट, निवेश ठगी, रोमांस स्कैम, फर्जी कॉल सेंटर, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर फ्रॉड के मामलों पर लगातार कार्रवाई कर रहा है. ऐसे में इंटरपोल के इस वैश्विक अभियान में भारत की भागीदारी को भी काफी अहम माना जा रहा है.
कोई भी देश अकेले इस समस्या से नहीं निपट सकता : टॉमोनोबू काया
इंटरपोल के फाइनेंशियल क्राइम एंड एंटी-करप्शन सेंटर के निदेशक टॉमोनोबू काया ने कहा कि साइबर ठग अब तकनीक से ज्यादा इंसानी सोच और भावनाओं का फायदा उठा रहे हैं. कोई भी देश अकेले इस समस्या से नहीं निपट सकता. इसलिए जरूरी है कि दुनिया भर की पुलिस एजेंसियां एक-दूसरे के साथ लगातार सूचना साझा करें और संयुक्त कार्रवाई करें. उन्होंने कहा कि इंटरपोल भविष्य में भी सदस्य देशों को तकनीकी सहायता, खुफिया जानकारी और समन्वित अभियान के जरिए ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क को खत्म करने में मदद करता रहेगा.
Sikar News:
सीकर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहाँ कुछ लोगों ने एक मानसिक रूप से कमजोर युवक की मजबूरी का फायदा उठाकर उसकी बेशकीमती जमीन और बैंक खाते पर कब्जा कर लिया. आरोपियों ने युवक के सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की और उसके खाते से लाखों रुपये उड़ा लिए. इस घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है.
कोतवाली पुलिस थाना क्षेत्र में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, दुर्गापुरा निवासी रणवीर सिंह ने शिकायत दर्ज कराई है कि उनका भाई मदन सिंह मानसिक रूप से कमजोर है. उसका पिछले कई वर्षों से उपचार चल रहा है. मदन सिंह के नाम पर गांव में तीन बीघा से अधिक भूमि है. रणवीर सिंह का आरोप है कि गांव के ही रहने वाले गजसिंह, भंवरलाल और सुरेश कुमार ने मदन की मानसिक स्थिति का गलत लाभ उठाया.
आधार कार्ड और बैंक खाते में की धोखाधड़ी
आरोप है कि आरोपी गजसिंह ने मदन के आधार कार्ड में अपने खुद के मोबाइल नंबर जुड़वा दिए, ताकि युवक को किसी भी प्रकार की सूचना न मिल सके. इसके बाद, आरोपियों ने बैंक स्टाफ की मिलीभगत से मदन का कोटक महिंद्रा बैंक में एक नया खाता खुलवाया. इस खाते में भी गजसिंह ने अपने ही मोबाइल नंबर अपडेट करवा दिए, जिससे खाते की सारी जानकारी सीधे उसके पास आने लगी.
डीएलसी की राशि पर डाला हाथ
धोखाधड़ी का सिलसिला तब और बढ़ गया जब 3 अप्रैल को मदन के खाते में डीएलसी का 3.50 लाख रुपये का चेक जमा हुआ. जैसे ही यह राशि खाते में आई, आरोपी गजसिंह ने तुरंत चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए पूरी रकम अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर लेनी. इससे पहले, आरोपियों ने 18 मार्च को मदन की मानसिक कमजोरी का फायदा उठाकर उसकी जमीन की रजिस्ट्री भी अपने नाम करवा ली थी. फिलहाल, पुलिस ने पीड़ित की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है.
इंदौर में दूसरी शादी की उम्मीद लेकर पहुंचे एक किसान के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. शादी कराने का झांसा देने वाले एक गिरोह ने किसान से पहले छह लाख रुपये वसूल लिए. इसके बाद अनुबंध के जरिए शादी कराई गई, लेकिन शादी के अगले ही दिन दुल्हन घर से फरार हो गई. पीड़ित की शिकायत और जांच के बाद पुलिस ने दुल्हन, उसकी मां, महिला दलाल समेत पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
मामला देवास जिले के बागली क्षेत्र के पिपलिया साहब गांव का है जहां एक 28 साल के हरिनारायण हजारीलाल परारिया ने एमजी रोड थाना में शिकायत दर्ज कराई है. जिसके अनुसार किसान हरिनारायण की पहली शादी साल 2007 में तारा बाई महिला से हुई थी लेकिन शादी नहीं चल सकी और दोनों की बीच तलाक हो गया. जिसके बाद किसान दोबारा विवाह करना चाहता था इसी को लेकर उसके भाई ने हसीना बाई से संपर्क किया और उसके लिए दुल्हन तलाशने की बात कही…
शादी के बाद गायब हुई दुल्हन
आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि वे उसकी शादी करा देंगे. इसके बदले उन्होंने किसान से कहा कि नंदनी की मां सुमन बाई लंबे समय से बीमार है और इलाज के लिए छह लाख रुपये की जरूरत है. शादी की जल्दबाजी और नई जिंदगी की उम्मीद में किसान आरोपियों की बातों में आ गया और तय रकम उन्हें दे दी.
एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित किसान ने आरोप लगाया है कि शादी के अगले ही दिन नंदनी बिना किसी को बताए घर से गायब हो गई. काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला. बाद में जानकारी जुटाने पर पता चला कि नंदनी और उसके साथी शादी के नाम पर लोगों को ठगने वाले गिरोह से जुड़े हैं.
शादी की खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक
30 जून को हरिनारायण अपने गांव के सरपंच जितेंद्र सिंह दरबार, मोहन जाट, ज्योति बाई जाट और अन्य लोगों के साथ इंदौर जिला कोर्ट पहुंचा. यहां एक लिखित एग्रीमेंट तैयार किया गया, एग्रीमेंट के बाद हरिनारायण ने आरोपियों को 6 लाख रुपये सौंप दिए. इसके बाद सभी लोग तुकोगंज क्षेत्र स्थित राम मंदिर पहुंचे, जहां धार्मिक रीति-रिवाज के साथ शादी की रस्में पूरी कराई गईं. शादी के बाद हरिनारायण ढोल-ताशों के साथ अपनी नई दुल्हन को गांव लेकर पहुंचा. परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी.
हरियाणा के हिसार से अजीबोगरीब प्रेम प्रसंग का एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है. हिसार के गंगवा गांव में रहने वाला 42 वर्षीय विजय अपने 5 बच्चों और पत्नी को बेसहारा छोड़कर अपनी 50 साल की प्रेमिका के साथ रफूचक्कर हो गया है. पीड़ित पत्नी अब अपने बच्चों का पेट पालने के लिए ई-रिक्शा चलाने को मजबूर है. यह घटना 20 जून की है, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी जब पति का कोई सुराग नहीं लगा, तो लाचार पत्नी ने पुलिस और मीडिया के सामने अपनी आपबीती बयां की है.
पीड़ित पत्नी माया देवी ने बताया कि उसकी शादी करीब 20 साल पहले विजय के साथ हुई थी. विजय पेशे से ड्राइवर है. पिछले कुछ समय से विजय का व्यवहार काफी बदल गया था. 20 जून को माया देवी को भनक लगी कि उसके पति का किसी दूसरी महिला के साथ चक्कर चल रहा है. जब वह अपने पति की गर्लफ्रेंड के घर ऋषिनगर पहुंची, तो वहां के पड़ोसियों ने बताया कि विजय पिछले कई महीनों से यहां आ रहा है और उस महिला ने आस-पास के लोगों को विजय को अपना पति बता रखा था.
बेटे को दी थी जानकारी
चौंकाने वाली बात यह है कि विजय ने यह बात अपने परिवार से भी नहीं छिपाई थी. वह अक्सर अपने बड़े बेटे और अपने भाई (माया के देवर) को कहता था कि “यह तेरी दूसरी मां है, यह मेरी सेटिंग है.” देवर को पिछले ढाई साल से इस बात की जानकारी थी, लेकिन विजय ने उसे जुबान खोलने पर जान से मारने की धमकी दे रखी थी.
रात 11 बजे घर से भागा पति; प्रेमिका के पहले से हैं दो पति
माया देवी ने जब 20 जून की रात को घर लौटे पति से उस महिला के बारे में पूछताछ की, तो दोनों के बीच विवाद हो गया. इसके बाद विजय रात करीब 11 बजे अपने घर से निकला और अपनी प्रेमिका कमलेश को साथ लेकर फरार हो गया. विजय अपना मोबाइल फोन घर पर ही छोड़ गया है, जबकि उसकी प्रेमिका का फोन लगातार बंद आ रहा है.
माया ने बताया कि जिस महिला कमलेश के साथ उसका पति भागा है, वह पहले ही दो शादियां कर चुकी है. उसका पहला पति मंदबुद्धि है और विजय उसकी जिंदगी में आने वाला तीसरा मर्द है. कमलेश की एक 18 साल की बेटी भी है, जिसे उसने भागने से ठीक पहले हरिद्वार भेज दिया था.
किराए का मकान, 5 बच्चे और ई-रिक्शा चलाने की मजबूरी
इस धोखे के बाद माया देवी के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. माया के 5 बच्चे हैं, जिनमें 3 बेटियां और 2 बेटे हैं. वह वर्तमान में ढाई हजार रुपये महीने के किराए के मकान में रहती है. पति के भाग जाने के बाद बच्चों के पालन-पोषण और घर के खर्च के लिए माया दिनभर हिसार की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाती है. माया ने रुआंसे मन से कहा कि उसकी मां हमेशा कहती थी कि उसका पति ठीक इंसान नहीं है, उसे छोड़ दे, लेकिन उसने कभी मां की बात नहीं मानी. हालांकि, आज भी वह अपने बच्चों के भविष्य के लिए अपने पति की हर खता माफ कर उसे अपनाने को तैयार है, बशर्ते वह घर लौट आए.
पुलिस पर लगाया लापरवाही का आरोप
माया देवी का आरोप है कि पति के लापता होने के बाद जब वह न्याय की गुहार लेकर आजाद नगर थाने पहुंची, तो पुलिस ने बेहद संवेदनहीन रवैया अपनाया. माया के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने उसकी शिकायत पर गंभीरता दिखाने के बजाय कह दिया कि “तेरा पति भाग गया तो भाग गया, हम इसमें क्या कर सकते हैं.” पुलिस के इस असहयोगात्मक रवैये के कारण परेशान महिला अब दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है.