धमतरी। जिले में लूट का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। बदमाशों ने पहले चाकू की नोक पर पीड़ित पिता-पुत्र से 50 हजार रुपये नगद लूट लिए और इसके बाद उन्हें धमकाकर क्यूआर (QR) कोड के जरिए 28 हजार 500 रुपये अपने बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर भी करा लिए। मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक नाबालिग बालक को भी पकड़कर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, घटना 6 जुलाई की रात करीब 10 बजे की है। मनीष सोनवानी अपने पिता के साथ छोटा हाथी वाहन से मवेशियों को ग्राम रिवागहन लेकर जा रहे थे। इसी दौरान ग्राम दर्री और गुजरा के बीच एक तूफान वाहन में सवार चार लोगों ने उनका रास्ता रोक लिया।
आरोपियों ने पहले गाली-गलौज करते हुए पिता-पुत्र के साथ मारपीट की। इसके बाद चाकू दिखाकर जान से मारने की धमकी दी और उनके पास मौजूद 50 हजार रुपये नगद लूट लिए। वारदात यहीं नहीं रुकी। बदमाशों ने पीड़ित को डराकर क्यूआर कोड के माध्यम से 28 हजार 500 रुपये भी अपने बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए और मौके से फरार हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही थाना भखारा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आर्म्स एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर लगातार दबिश दी। जांच के दौरान पुलिस चारों आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।
पूछताछ में आरोपियों ने लूट की वारदात स्वीकार कर ली। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने घटना में प्रयुक्त तूफान वाहन, एक धारदार चाकू, तीन मोबाइल फोन तथा लूटी गई रकम में से 30 हजार रुपये नगद बरामद किए हैं।
पुलिस ने आरोपी नागेंद्र साहू, नीरज ध्रुवंशी और विनय ध्रुवंशी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा जा रहा है। वहीं, मामले में शामिल एक विधि से संघर्षरत बालक को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। कानूनी प्रावधानों के तहत उसकी पहचान गोपनीय रखी गई है।
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से एक बेहद गंभीर और झकझोरने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने शौहर और ससुराल पक्ष के लोगों पर उत्पीड़न के संगीन आरोप मढ़े हैं. पीड़िता का दावा है कि निकाह के बाद से ही उसे लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके बाद उसके साथ मारपीट कर उसे तीन तलाक दे दिया गया. इतना ही नहीं, आरोप है कि दोबारा निकाह कराने का झांसा देकर उसे वापस ससुराल बुलाया गया और फिर कथित तौर पर हलाला की आड़ में उसके सगे जेठ ने उसके साथ रेप की वारदात को अंजाम दिया. इस पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए स्थानीय पुलिस ने पति, जेठ और अन्य ससुराल वालों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा कायम कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है.
निकाह के बाद से ही शुरू हुआ जुल्म का सिलसिला
पूरा वाकया शेरकोट कस्बे का है. यहां की रहने वाली पीड़िता का निकाह करीब एक साल पहले नहटौर के मोहल्ला सादात निवासी नदीम के साथ हुआ था. महिला के मुताबिक, उसकी शादी में मायके वालों ने हैसियत के मुताबिक फ्रिज, वाशिंग मशीन, सोफा सेट, डबल बेड, फर्नीचर, मोटरसाइकिल, सोने-चांदी के जेवरात और दो लाख रुपये कैश समेत तमाम घरेलू सामान दिया था. इसके बावजूद ससुराल के लोग इस दान-दहेज से नाखुश थे और शादी के बाद से ही उसे शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे. पीड़िता का आरोप है कि बीती 19 मई की रात करीब 11 बजे उसके पति नदीम ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की. महिला ने बताया कि पेट पर लात मारे जाने के कारण उसके ऑपरेशन के टांकों में भी तेज दर्द शुरू हो गया और इसी गहमा-गहमी के बीच पति ने उसे तीन बार तलाक बोलकर आधी रात को घर से बाहर खदेड़ दिया.
थाने के बाहर समझौता और हलाला की घिनौनी शर्त
पीड़िता के अनुसार, अगले दिन वह न्याय की गुहार लेकर नहटौर थाने पहुंची और पुलिस को शिकायत दी. आरोप है कि थाने के बाहर ही उसका पति और ससुराल के अन्य लोग मिल गए, जिन्होंने दोबारा निकाह करके साथ रखने का भरोसा दिया और उसे समझा-बुझाकर वापस घर ले आए. महिला का दावा है कि 30 मई को दोबारा निकाह संपन्न होने से ठीक पहले उसके पति ने एक घिनौनी शर्त सामने रख दी. पति ने साफ कहा कि दोबारा निकाह करने से पहले उसे उसके बड़े भाई (जेठ) वसीम के साथ हलाला की प्रक्रिया से गुजरना होगा, तभी वह उसे दोबारा अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करेगा.
विरोध करने पर बंधक बनाया और जबरन बनाए शारीरिक संबंध
महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि उसने इस कुप्रथा और शर्त का पुरजोर विरोध किया, लेकिन इसके बावजूद उसके जेठ वसीम ने हलाला के नाम पर उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए. पीड़िता का यह भी संगीन आरोप है कि इस वारदात के बाद उसे घर के भीतर ही कैद कर दिया गया, ताकि वह बाहर न निकल सके और अपने मायके वालों से किसी भी तरह का संपर्क न साध पाए. जब भी उसने इस कैद का विरोध किया, तो उसके साथ दोबारा मारपीट की गई और उसे बंधक बनाकर रखा गया. कुछ समय बीतने के बाद उसने किसी तरह गुपचुप तरीके से अपने परिवार को आपबीती बताई, जिसके बाद उसकी भाभी ससुराल पहुंची और उसे अपने साथ मायके ले आई.
एसपी के हस्तक्षेप के बाद जेठ, पति और जेठानी पर मुकदमा दर्ज
पीड़िता का आरोप है कि मायके आने के बाद जब उसने दोबारा नहटौर थाने में शिकायत देकर मुकदमा दर्ज कराने का प्रयास किया, तो स्थानीय स्तर पर केस दर्ज नहीं किया गया. इसके बाद उसने हार न मानते हुए बिजनौर पहुंचकर पुलिस अधीक्षक (SP) से मुलाकात की और लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा. एसपी के कड़े निर्देश के बाद नहटौर पुलिस हरकत में आई और पति नदीम के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट व अन्य संबंधित कानूनी धाराओं के तहत केस दर्ज किया. वहीं, मुख्य आरोपी जेठ वसीम के खिलाफ दुष्कर्म (रेप) सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज हुआ है. इस पूरे कृत्य में सहयोग करने के आरोप में जेठानी नगमा को भी मुकदमे में नामजद किया गया है.
इस पूरे घटनाक्रम पर जानकारी देते हुए सीओ अफजलगढ़ आलोक कुमार ने एफआईआर दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि पीड़िता द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है. पुलिस टीम इस पूरे मामले की हर एक पहलू से बारीकी से तफ्तीश कर रही है और जांच के दौरान जो भी नए साक्ष्य या तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक व कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से खाकी को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक दरोगा पर शादी और पुलिस में नौकरी लगवाने का झांसा देकर महिला के यौन शोषण, जबरन गर्भपात कराने और लाखों के जेवर ठगने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित महिला ने खुद को दरोगा की ‘दूसरी पत्नी’ बताते हुए कई आपत्तिजनक तस्वीरें और इनसाइड वीडियो सबूत के तौर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और एडीजी को सौंपे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी अनुराग आर्य ने आरोपी दरोगा नरेश बाबू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
केस की जांच के बहाने घर आना-जाना, फिर करवाचौथ पर खुद को बताया पति
मिली जानकारी के अनुसार, बारादरी क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता का साल 2022 से अपने पति से विवाद चल रहा था। साल 2025 में जब वह अपनी शिकायत लेकर बारादरी थाने पहुंची, तो उस समय के विवेचक दरोगा नरेश बाबू ने केस की जांच के बहाने पीड़िता के घर आना-जाना शुरू कर दिया। आरोप है कि दरोगा ने अपनी पहली पत्नी को तलाक देकर उससे शादी करने और पुलिस में नौकरी लगवाने का लालच दिया। इसके बाद दोनों पति-पत्नी की तरह रहने लगे। महिला ने आरोप लगाया कि साल 2025 में करवाचौथ के मौके पर दरोगा अपनी पहली पत्नी के पास जाने के बजाय उसके घर आया था और बकायदा पति के रूप में पूजा करवाई थी, जिसके फोटो-वीडियो अब सामने आए हैं।
8 लाख के जेवर हड़पे और गर्भवती होने पर दी गर्भपात की दवा
पीड़िता ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि फरवरी 2026 में दरोगा ने अपने बेटे की शादी का बहाना बनाकर उससे करीब आठ लाख रुपये के सोने के जेवर ले लिए और वापस नहीं किए। हद तो तब हो गई जब महिला गर्भवती हो गई। आरोप है कि इसकी जानकारी मिलते ही बीती 12 मई को दरोगा उसे प्रेमनगर के एक नामी अस्पताल ले गया और वहां उसे धोखे से गर्भपात की दवा खिला दी। दवा खाने के बाद जब महिला की तबीयत बिगड़ी, तो उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। महिला का आरोप है कि रिटायरमेंट नजदीक आते देख दरोगा ने उससे पीछा छुड़ाने के लिए अपना तबादला सिरौली थाने करवा लिया था।
अस्पताल में पहली पत्नी और बेटों ने की पिटाई, तब खुला राज
इस पूरे मामले का हाई-वोल्टेज ड्रामा तब सामने आया जब 5 जुलाई 2026 की रात ड्यूटी से लौटते समय दरोगा नरेश बाबू की बाइक का एक्सीडेंट हो गया और उसका कंधा फ्रैक्चर हो गया। महिला ने उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया और इलाज का खर्च भी उठाया। लेकिन अगले दिन जब दरोगा की पहली पत्नी और उसके बेटे अस्पताल पहुंचे, तो उन्होंने पीड़ित महिला के साथ जमकर गाली-गलौज और मारपीट की। महिला ने जब डायल 112 पर सूचना दी, तो आरोपी उसे जान से मारने की धमकी देकर भाग निकले। इसके बाद महिला ने वकीलों के साथ एसएसपी दफ्तर पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। एसएसपी ने बताया कि एसपी ग्रामीण को मामले की विस्तृत जांच सौंपी गई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी दरोगा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नालंदा।
बिहार के नालंदा जिले में एक हत्या की जांच करते हुए पुलिस के सामने रिश्तों को उलझा देने वाला मामला सामने आया है। हरनौत थाना क्षेत्र के मूढ़ाढ़ी गांव में पैथोलॉजी कर्मी सोनू कुमार की हत्या के मामले में पुलिस ने उसके कथित हत्यारे को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया कि हत्या का आरोपी कोई बाहरी नहीं, बल्कि मृतक का रिश्तेदार दामाद था। पुलिस के अनुसार, दोस्तों के तानों और सामाजिक दबाव से परेशान होकर आरोपी ने यह कदम उठाया।
चाकू से हमला कर की गई थी हत्या
37 वर्षीय सोनू कुमार चेरण गांव का रहने वाला था और हरनौत बाजार स्थित एक पैथोलॉजी सेंटर में काम करता था। कुछ दिन पहले उसकी चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद गुस्साए लोगों ने रजौली-बख्तियारपुर NH-20 को जाम कर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद पुलिस पर जल्द खुलासे का दबाव बढ़ गया था।
जांच के दौरान पुलिस ने मृतक की मोबाइल कॉल डिटेल खंगाली। इसी आधार पर पुलिस हरनौत बाजार निवासी मुकेश कुमार तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।
सास के साथ संबंधों के शक ने बढ़ाई दुश्मनी
पुलिस पूछताछ में मुकेश ने बताया कि उसकी शादी करीब ढाई साल पहले हुई थी। उसके ससुर की मौत करीब 10 साल पहले हो चुकी थी। शादी के बाद जब वह पहली बार ससुराल गया तो वहां सोनू कुमार से मुलाकात हुई। परिवार ने उसे पड़ोसी और करीबी व्यक्ति बताया था।
मुकेश के मुताबिक, सोनू अक्सर ससुराल में मौजूद रहता था और परिवार के सदस्य की तरह व्यवहार करता था। शुरुआत में उसने इसे सामान्य माना, लेकिन बाद में उसकी मौजूदगी और व्यवहार को लेकर उसे शक होने लगा।
दोस्तों के तानों से परेशान होकर बनाया प्लान
मुकेश ने पुलिस को बताया कि उसके दोस्तों ने उसे सोनू और उसकी सास के बीच कथित संबंधों के बारे में बताया। इसके बाद दोस्त उसे लेकर ताने मारने लगे, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगा।
उसने सास, पत्नी और सालों के सामने इस रिश्ते का विरोध किया और सोनू से दूरी बनाने की बात कही। इसी बात को लेकर विवाद भी हुआ और दोनों पक्षों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
बहाने से बुलाकर किया हमला
पुलिस के अनुसार, मुकेश ने सोनू को फोन कर शिवाजी मोहल्ला बुलाया। वहां पहले से मौजूद होकर उसने सोनू पर चाकू से हमला कर दिया। आरोप है कि उसने सिर, गर्दन और पीठ पर कई वार किए। इसके बाद लोहे की रॉड से भी हमला किया गया।
गंभीर रूप से घायल सोनू को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान पीएमसीएच में उसकी मौत हो गई।
कॉल डिटेल से खुला हत्या का राज
एसडीपीओ-2 संजय कुमार जायसवाल ने बताया कि मोबाइल कॉल डिटेल की जांच के बाद आरोपी की पहचान हुई। पूछताछ में मुकेश ने प्रतिशोध की भावना से हत्या करने की बात स्वीकार की है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई ग्लैमर मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि सोनू अविवाहित था और ससुर की मौत के बाद वह परिवार के काफी करीब हो गया था। बताया जा रहा है कि वह परिवार की आर्थिक मदद भी करता था। इसी वजह से कई लोग उसका विरोध नहीं कर पाते थे। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
जयपुर अपराध: संपत्ति के लालच और सरकारी नौकरी की सनक ने कन्नाप्रेमा का जीवन दांव पर लगा दिया। एक बेटी, जिसे उम्मीद थी कि मां को मार डालने से उसे उसकी सरकारी नौकरी और करोड़ों रुपये की संपत्ति मिल जाएगी, उसने अपने ससुर और ससुराल वालों के साथ मिलकर अपनी मां को ट्रकों से कुचलकर मारने की योजना बनाई। जयपुर पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल हत्या के मामले को सुलझा लिया है, जिसे एक दुर्घटना दिखाने की कोशिश की गई थी। बेटी समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
असल में क्या हुआ था? – सड़क दुर्घटना के पीछे की सच्चाई
जयपुर की एक अदालत में लोअर डिवीजन क्लर्क (एलडीसी) नीरज शर्मा (45) 3 जुलाई की शाम को अपने बेटे को कोचिंग सेंटर छोड़ने के बाद स्कूटी से घर लौट रहे थे। इसी दौरान, शाम करीब 4:45 बजे, पीछे से आ रही एक स्कॉर्पियो एसयूवी ने करीब 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि नीरज शर्मा सौ फीट दूर जा गिरे और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। दुर्घटना के बाद चालक गाड़ी छोड़कर फरार हो गया। हालांकि शुरू में इसे साधारण हिट-एंड-रन का मामला माना गया, लेकिन घटनास्थल से सीसीटीवी फुटेज की जांच करने पर पुलिस को चौंकाने वाली बातें पता चलीं। पुलिस ने पाया कि गाड़ी तेज रफ्तार से आई थी और जानबूझकर उन्हें टक्कर मारी गई थी। पुलिस ने सटीक स्केच के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि यह हत्या का मामला है।
अनुकंपा नियुक्ति के लिए 7 लाख सुपारी का घोटाला – साजिश
पूर्वी जयपुर की डीसीपी रंजीता शर्मा ने हत्या के पीछे परिवार के सदस्यों की साजिश की गहन जांच की और उसका पर्दाफाश किया। एक साल पहले नीरज शर्मा के पति की मृत्यु के बाद, उन्हें अनुकंपा नियुक्ति के तहत अदालत में सरकारी नौकरी मिली। हालांकि, उनकी बेटी आयुषी शर्मा खुद वह नौकरी पाना चाहती थी। उसे अपनी मां का नौकरी करना पसंद नहीं था। इसके अलावा, पिछले दो सालों से दोनों के बीच संपत्ति का विवाद चल रहा था। आयुषी ने योजना बनाई कि अगर वह अपनी मां की हत्या कर देगी, तो उसे अनुकंपा नियुक्ति के तहत सरकारी नौकरी और सारी संपत्ति मिल जाएगी। इसके लिए उसने अपने चाचा मोहन स्वरूप और देवर बलराम के साथ हाथ मिलाया। उसने भरतपुर के हेमंत शर्मा नामक एक कुख्यात अपराधी को 7 लाख रुपये की सुपारी दी और उसे अपनी मां की हत्या का जिम्मा सौंपा।
जयपुर अपराध: एक महीने तक लोकेशन ट्रैक करने के बाद लोग पागल हो गए
हत्या के लिए, आरोपियों ने पहले एक ‘थार’ गाड़ी किराए पर ली और एक महीने तक नीरज शर्मा की गतिविधियों पर नज़र रखी (रेकी की)। 3 जुलाई को, उन्हें पुख्ता जानकारी मिली और वे मौके पर पहुंचे। जब मोहित शर्मा नाम के आरोपी ने नीरज शर्मा की लाइव लोकेशन ट्रैक की और सूचना दी, तो आकाश शर्मा और अरविंद शर्मा एक स्कॉर्पियो कार में तेज रफ्तार से आए और पीछे से उन्हें टक्कर मार दी। बाद में, वे कार वहीं छोड़कर पहले से तैयार की गई बाइक पर सवार होकर फरार हो गए।
मृतक के भाई राकेश कुमार शर्मा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की कार्यवाही में तेजी ला दी है। उन्होंने बताया कि नीरज शर्मा ने पहले उन्हें बताया था कि उनकी बहन को उसकी बेटी और ससुराल वाले संपत्ति के लिए परेशान कर रहे थे और जान से मारने की धमकी दे रहे थे। पुलिस ने अब मुख्य आरोपी आयुषी शर्मा के साथ मोहन स्वरूप, मोहित शर्मा, आकाश शर्मा, अरविंद शर्मा, हेमंत शर्मा और रोहित जाटव को गिरफ्तार कर रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस मामले में फरार एक अन्य मुख्य आरोपी बलराम की तलाश कर रही है।
अगर आप डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए जिम में घंटों पसीना बहाते हैं तो जान लें सही टाइम पर की गई 10 मिनट की वॉक भी उससे कहीं ज्यादा असरदार हो सकती है। जी हां ये सुनकर भले ही आपको विश्वास न हो, लेकिन साइंस ऐसा कहती है। खाना खाते ही शरीर में ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है। खासतौर से हाई कार्ब्स वाली डाइट शुगर स्पाइक का कारण बनती है। इसलिए सबसे ज़रूरी चीज़ है खाना खाने की टाइमिंग और उसके बाद की गई एक्टिविटी।
इंस्टाग्राम पर केयरयाया के डॉक्टर नील के शाह ने एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें वो बता रहे हैं कि कार्ब्स लेने के बाद आपका ब्लड शुगर बढ़ जाता है। आपका शरीर उस शुगर को ब्लडस्ट्रीम से हटाने के लिए इंसुलिन रिलीज़ करता है। अगर लंबे समय तक खाने के बाद शुगर लेवल स्पाइक करे तो इसका असर आपकी सेहत और मेटाबॉलिक हेल्थ पर पड़ता है। लेकिन अच्छी बात ये है कि अगर आप खाने का बाद वॉक करते हैं तो आपकी मसल्स को फ्यूल की जरूरत होती है। इस स्थिति में मसल्स शुगर से एनर्जी खींचती हैं और इसके लिए ज्यादा इंसुलिन की जरूरत भी नहीं होती है।
रात के खाने के बाद 10 मिनट की वॉक है फायदेमंद
रात के खाने के ठीक बाद जब आपका ब्लड शुगर बढ़ रहा हो, तब हल्की वॉक एक रिलीज़ वाल्व की तरह काम करती है। यह शुगर के उछाल को होने से पहले ही कम कर देती है। यह रात के खाने के बाद एक अच्छी आदत है जिसे सभी को अपनाना चाहिए। इसीलिए यहां इंटेंसिटी से ज़्यादा टाइमिंग मायने रखती है। सुबह 7 बजे जिम में हार्ड वर्कआउट कई वजहों से बहुत अच्छा है, लेकिन यह रात 8 बजे आपके खाने से होने वाले ब्लड शुगर के उछाल के लिए कुछ नहीं करता। वॉक इसलिए काम करती है क्योंकि आप इसे खाने के ठीक बाद करते हैं, जब शुगर आपके खून में मिल रही होती है।
10 मिनट की वॉक से कम होता है शुगर स्पाइक
स्टडीज़ में यह भी पाया गया है कि खाने के बाद 10 से 15 मिनट की हल्की वॉक खाने के बाद होने वाले शुगर के उछाल को काफी कम कर देती है। इसका मतलब यह नहीं है कि जिम न जाएं। जिम आपकी ताकत, दिल की सेहत और बहुत कुछ बेहतर बनाता है। लेकिन यह अलग काम के लिए एक अलग टूल है। रोजाना ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव को मैनेज करने के लिए, खाने के बाद थोड़ी देर टहलना सबसे आसान और असरदार चीजों में से एक है।
खाना खत्म करने के 30 मिनट के अंदर सिर्फ़ 10 से 15 मिनट टहलने का टारगेट रखें। आपको आराम से टहलना है, बस इतना ही आपके लिए काफी है। बहुत ज़्यादा तेज वॉक की जरूरत नहीं है। रात के खाने के बाद ऐसा करना सबसे ज़्यादा असरदार होता है, लेकिन यह किसी भी खाने के बाद काम करता है।
यानि अब से आप खाना खाते ही बैठ जाते हैं या लेट जाते हैं तो ऐसा बिल्कुल भी न करें। अगली बार खाना खाने के बाद बस बैठे न रहें, बल्कि थोड़ी देर टहलें। इससे आप खुद को काफी एनर्जेटिक महसूस करेंगे।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
Etah Mudit Gupta Arrest:
उत्तर प्रदेश के एटा जिले में साइबर पुलिस ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े ऑनलाइन अपराधों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए घुंघरू कारोबारी मुदित गुप्ता को गिरफ्तार किया है. पुलिस का दावा है कि आरोपी के दो मोबाइल फोन की डिजिटल जांच में 1000 से अधिक पॉर्न और अन्य आपत्तिजनक फोटो-वीडियो मिले हैं. जांच के दौरान पांच साल की एक बच्ची के कथित यौन शोषण से जुड़ा वीडियो भी मिलने का दावा किया गया है. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.
Google की सूचना के बाद शुरू हुई जांच
एटा पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई की शुरुआत NCRP पोर्टल पर प्राप्त NCMEC साइबर टिपलाइन के जरिए हुई सूचना के आधार पर की गई. पुलिस को Google की ओर से ईमेल के माध्यम से संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों की जानकारी मिली थी. इसके बाद साइबर क्राइम थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की और जलेसर क्षेत्र से आरोपी मुदित गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया.
मोबाइल और Google Drive में मिला आपत्तिजनक कंटेंट
पुलिस के अनुसार, आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए. फॉरेंसिक और डिजिटल जांच में करीब 1000 आपत्तिजनक फोटो और वीडियो मिलने का दावा किया गया है. पुलिस का कहना है कि यह सामग्री Google Drive में भी सेव थी.
5 साल की बच्ची के यौन शोषण का आरोप
पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आया कि आरोपी ने करीब नौ महीने पहले पांच साल की बच्ची को कथित तौर पर अश्लील वीडियो दिखाकर उसका यौन शोषण किया था. पुलिस का दावा है कि इस घटना से जुड़े वीडियो भी आरोपी के मोबाइल में मिले हैं. इस आधार पर उसके खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई है.
पूछताछ में क्या सामने आया?
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह राह चलती लड़कियों और महिलाओं की फोटो तथा वीडियो रिकॉर्ड करता था. बाद में घर जाकर उन्हें मॉर्फ कर अश्लील रूप में देखता था. उसने यह भी बताया कि कई बार वह अलग-अलग वेबसाइटों से भी इस तरह की सामग्री डाउनलोड करता था.
पुलिस का कहना है कि पूछताछ में आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि उसका उद्देश्य इस सामग्री से आर्थिक लाभ कमाना नहीं था, बल्कि वह इसे अपनी शारीरिक संतुष्टि के लिए इस्तेमाल करता था.
विदेश तक फैला है कारोबार
पुलिस के अनुसार, आरोपी मुदित गुप्ता घुंघरू और पीतल की घंटियों का कारोबारी है. उसका कारोबार विदेशों तक फैला हुआ है.
पुलिस कर रही नेटवर्क की जांच
डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी का किसी बड़े नेटवर्क से संबंध था या नहीं और आपत्तिजनक सामग्री का स्रोत एवं प्रसार किन माध्यमों से किया जा रहा था.
जरूरी बात:
इस मामले में पुलिस की जांच जारी है. आरोपी पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही होगी.
उत्तराखंड का रुद्रप्रयाग जिला अपने प्राचीन मंदिरों और धार्मिक महत्व के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां स्थित केदारनाथ, तुंगनाथ, मद्महेश्वर, ओंकारेश्वर, त्रियुगीनारायण, कालीमठ, कोटेश्वर महादेव, अगस्त्यमुनि, रुद्रनाथ, धारी देवी और कई अन्य प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। इन्हीं पवित्र धामों के बीच स्थित है कार्तिक स्वामी मंदिर, जिसे पूरे उत्तर भारत में भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय को समर्पित सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक माना जाता है। स्थानीय लोगों के लिए यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि उनके कुलदेवता का पवित्र धाम भी है।
कार्तिक स्वामी मंदिर कहां स्थित है?
कार्तिक स्वामी मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में कनकचौरी गांव के पास क्रौंच पर्वत की ऊंची चोटी पर स्थित है। रुद्रप्रयाग से इसकी दूरी लगभग 38 किलोमीटर है। मंदिर तक पहुंचने के लिए कनकचौरी से करीब 2.5 से 3 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करना पड़ता है। यह ट्रेक भले ही छोटा हो, लेकिन रास्ते में दिखने वाले घने जंगल, पहाड़ी मोड़ और हिमालय के अद्भुत नज़ारे यात्रा को यादगार बना देते हैं।
मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता
कार्तिक स्वामी मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां भगवान कार्तिकेय की पारंपरिक मूर्ति स्थापित नहीं है। यहां एक पवित्र शिला की पूजा की जाती है, जिसे भगवान कार्तिकेय की अस्थियों का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इस मंदिर का धार्मिक महत्व अन्य मंदिरों से अलग और बेहद विशेष माना जाता है।
कार्तिक स्वामी मंदिर की पौराणिक कथा
इस मंदिर से जुड़ी एक अत्यंत प्रसिद्ध पौराणिक कथा प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों, कार्तिकेय और गणेश, की परीक्षा लेने के लिए उन्हें पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करने का कार्य सौंपा।
कार्तिकेय अपने वाहन पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल पड़े, जबकि गणेश जी ने अपनी बुद्धि और भक्ति का परिचय देते हुए माता-पिता की ही परिक्रमा कर ली। शास्त्रों के अनुसार माता-पिता की परिक्रमा संपूर्ण संसार की परिक्रमा के समान मानी जाती है। इसी कारण गणेश जी को प्रथम पूज्य होने का सम्मान प्राप्त हुआ।
जब कार्तिकेय को इस निर्णय का पता चला, तो वे अत्यंत दुखी और आहत हुए। लोकमान्यता के अनुसार उन्होंने अपने शरीर का मांस माता-पिता को अर्पित कर दिया और सांसारिक जीवन से विरक्त होकर तपस्या के लिए क्रौंच पर्वत पर चले गए। कहा जाता है कि उन्होंने यहीं कठोर साधना की और अंततः उनका यह तपस्थल आज कार्तिक स्वामी मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
इसी वजह से यह स्थान त्याग, तपस्या, समर्पण और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
आध्यात्मिक महत्व
यह मंदिर केवल दर्शन का स्थान नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिक अनुभव का केंद्र भी माना जाता है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु प्राकृतिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करते हैं। कई भक्त मानते हैं कि यहां मन से की गई प्रार्थना अवश्य सुनी जाती है।
मंदिर की प्राकृतिक सुंदरता
ऊंची पहाड़ी पर स्थित होने के कारण कार्तिक स्वामी मंदिर से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियां, चौखंभा पर्वत श्रृंखला और दूर-दूर तक फैली घाटियों का अत्यंत मनमोहक दृश्य दिखाई देता है।
सूर्योदय के समय जब पहली किरणें हिमालय की चोटियों पर पड़ती हैं और सूर्यास्त के समय पूरा आकाश सुनहरे रंग में रंग जाता है, तब यह स्थान किसी दिव्य लोक जैसा प्रतीत होता है। बादलों के बीच स्थित यह मंदिर प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
यहां होने वाले प्रमुख धार्मिक आयोजन
मंदिर में पूरे वर्ष नियमित पूजा, दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान होते रहते हैं। विशेष अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
प्रमुख आयोजनों में शामिल हैं—
कार्तिक पूर्णिमा पर विशेष पूजा और दीपदान
वैकुंठ चतुर्दशी का धार्मिक आयोजन
जून माह में आयोजित महायज्ञ
प्रतिदिन होने वाली संध्या आरती
संध्या आरती के समय मंदिर परिसर घंटियों की मधुर ध्वनि और भजनों से गूंज उठता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
घंटी बांधने की अनोखी परंपरा
कार्तिक स्वामी मंदिर की एक विशेष परंपरा घंटी चढ़ाने की भी है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की कामना से मंदिर परिसर में घंटियां बांधते हैं। इसी कारण यहां हजारों घंटियां दिखाई देती हैं, जो इस मंदिर की अलग पहचान बन चुकी हैं।
कार्तिक स्वामी मंदिर कैसे पहुंचें?
यदि आप ऋषिकेश से यात्रा शुरू कर रहे हैं, तो सबसे पहले सड़क मार्ग से रुद्रप्रयाग पहुंचना होगा। वहां से कनकचौरी गांव की ओर जाना होता है, जो मंदिर का आधार बिंदु माना जाता है। इसके बाद लगभग 2.5 से 3 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करके मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
दूरी
ऋषिकेश से कनकचौरी – लगभग 181 किलोमीटर
सड़क यात्रा – लगभग 7 घंटे
रुद्रप्रयाग से कनकचौरी – लगभग 38 किलोमीटर
रास्ते में क्या-क्या देखने को मिलेगा?
यात्रा के दौरान कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थल और सुंदर प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलते हैं। घुमावदार पहाड़ी सड़कें, घने जंगल, शांत वातावरण और हिमालय की भव्य पर्वत श्रृंखलाएं इस सफर को बेहद यादगार बना देती हैं।
यात्रा का आसान प्लान
सुबह जल्दी ऋषिकेश से यात्रा शुरू करें।
सड़क मार्ग से रुद्रप्रयाग पहुंचें।
वहां से कनकचौरी गांव जाएं।
कनकचौरी से लगभग 3 किलोमीटर का ट्रेक कर मंदिर तक पहुंचें।
दर्शन के साथ हिमालय की मनमोहक सुंदरता और शांत वातावरण का आनंद लें।
क्या है इस कथा की प्रामाणिकता?
कार्तिक स्वामी मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व अत्यंत प्राचीन माना जाता है। मंदिर से जुड़ी जो कथा आज सबसे अधिक प्रचलित है, वह मुख्य रूप से लोकपरंपराओं, मंदिर की मान्यताओं और धार्मिक आस्था पर आधारित है। विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में भगवान कार्तिकेय और क्रौंच पर्वत का उल्लेख मिलता है, लेकिन इस कथा का वर्तमान स्वरूप मुख्यतः श्रद्धालुओं की पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही आस्था और स्थानीय परंपराओं से जुड़ा हुआ माना जाता है।
इसी कारण कार्तिक स्वामी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, भक्ति और हिमालय की दिव्य प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत संगम माना जाता है, जहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति और भगवान कार्तिकेय के आशीर्वाद की कामना लेकर पहुंचते हैं।
चिकन करी को लेकर शुरू हुआ झगड़ा… कुछ ही मिनटों में उजड़ गया पूरा परिवार
तेलंगाना के कामारेड्डी जिले की एक मामूली घरेलू कहासुनी ने ऐसा खौफनाक मोड़ लिया कि दो मासूम बच्चियों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। शनिवार रात घर में सिर्फ एक बात को लेकर बहस शुरू हुई थी—चिकन करी क्यों नहीं बनाई गई? लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह विवाद कुछ ही देर में एक परिवार की खुशियां छीन लेगा।
करीब 28 वर्षीय कोडंदम शिवाजी, जो कबाड़ का काम करता था, रात करीब 9 बजे घर पहुंचा। बताया जाता है कि उसने पत्नी लक्ष्मी से चिकन करी न बनाने को लेकर नाराजगी जताई। देखते ही देखते दोनों के बीच बहस तेज हो गई। शोर सुनकर पास में रहने वाले रिश्तेदार दादाया और शारदा मौके पर पहुंचे और दोनों को समझा-बुझाकर शांत करा दिया।
कुछ समय तक सब कुछ सामान्य दिखाई दिया, लेकिन घर के अंदर तनाव खत्म नहीं हुआ। थोड़ी देर बाद पति-पत्नी के बीच फिर से कहासुनी शुरू हो गई। इस बार बात सिर्फ चिकन करी तक सीमित नहीं रही, बल्कि दूसरे घरेलू मुद्दों को लेकर भी दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगे।
इसी दौरान गुस्से में लक्ष्मी ने घर में रखा हंसिया उठा लिया। आरोप है कि उसने शिवाजी की गर्दन पर वार कर दिया। अचानक हुए हमले से शिवाजी जमीन पर गिर पड़ा। गर्दन पर गहरी चोट लगने के साथ गिरने से उसके सिर में भी गंभीर चोट आई और अत्यधिक खून बहने के कारण उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कामारेड्डी पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में पता चला है कि गर्दन पर लगे घातक वार और अधिक रक्तस्राव के कारण शिवाजी की मौत हुई।
मृतक के बड़े भाई सूरी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि शिवाजी और लक्ष्मी की शादी करीब छह साल पहले हुई थी और उनकी दो छोटी बेटियां हैं। पिछले छह महीनों से दोनों अपने रिश्तेदार दादाया के किराए के मकान में रह रहे थे। परिवार का कहना है कि पति-पत्नी के बीच अक्सर घरेलू विवाद होते रहते थे और कई बार रिश्तेदारों को बीच-बचाव करना पड़ता था।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर लक्ष्मी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पोस्टमार्टम के बाद शिवाजी का शव परिजनों को सौंप दिया गया, जबकि आरोपी महिला को अदालत में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
एक छोटी-सी बहस ने देखते ही देखते पूरे परिवार की दुनिया बदल दी। अब दो मासूम बच्चियां अपने पिता के बिना रह गई हैं और एक घरेलू विवाद ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है।
इंदौर मे कलयुगी कपूत का एक काला कारनामा सामने आय़ा है,जहां मां जैसे रिश्ते के साथ धोखाधड़ी की गई.. मां अपने साथ हुई धोखाधड़ी की शिकायत लेकर कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंची है..
इंदौर मे कलयुगी कपूत का एक काला कारनामा सामने आय़ा है,जहां मां जैसे रिश्ते के साथ धोखाधड़ी की गई.. मां अपने साथ हुई धोखाधड़ी की शिकायत लेकर कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंची है.. इंदौर कलेक्टर जनसुनवाई में मंगलवार को एक 70 वर्षीय कैंसर पीड़ित बुजुर्ग महिला न्याय की गुहार लेकर पहुंचीं.. महिला ने आरोप लगाया कि उनके बेटे ने धोखे से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाकर मकान और स्कूल की संपत्ति अपने नाम गिफ्ट डीड करा ली… इतना ही नहीं, लाखों रुपये और गहने भी हड़प लिए… अब परिवार के अन्य लोगों ने भी उनका साथ छोड़ दिया है और वह बुनियादी जरूरतों के लिए भी तरस गई है..
सरस्वती गावड़े व्हीलचेयर पर अपने पोते के साथ कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचीं
70 वर्षीय कैंसर पीड़ित बुजुर्ग सरस्वती गावड़े व्हीलचेयर पर अपने पोते के साथ कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचीं.. महिला ने बताया कि उनके बेटे ने विश्वास में लेकर वसीयत बताकर कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए.. बाद में पता चला कि उन्हीं दस्तावेजों के जरिए मकान और स्कूल की संपत्ति अपने नाम गिफ्ट डीड करा ली गई.. शिकायत सुनने के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने बुजुर्ग महिला को न्याय का भरोसा दिलाया है..
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा के तत्काल कार्रवाई के निर्देश
कलेक्टर ने आरोपी बेटे को फोन कर कार्यालय बुलाने के निर्देश दिए हैं.. मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए… कलेक्टर ने कहा कि हाल के दिनों में बुजुर्गों से जुड़े ऐसे कई मामले सामने आए हैं, इसलिए जनसुनवाई में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग व्यवस्था की गई है और उनकी शिकायतों का प्राथमिकता से निराकरण किया जाएगा। लिहाजा ये मामला बेटे जैसे रिश्ते को शर्मसार कर रहा है.