लुधियाना: शादी के नाम पर पति और उसके परिवार से करीब 50 लाख रुपये लेने और बाद में कनाडा जाकर संपर्क तोड़ने के आरोप में एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी महिला करीब सात साल बाद पासपोर्ट संबंधी काम के लिए भारत लौटी थी। उसके खिलाफ पहले से लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी था। दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने के बाद पंजाब पुलिस उसे लुधियाना ले आई। अदालत ने महिला को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
कनाडा भेजने को लेकर हुआ था लिखित समझौता
मामला पंजाब के रायकोट क्षेत्र के गांव बोपाराए खुर्द के रहने वाले हरप्रीत सिंह की शिकायत से जुड़ा है। हरप्रीत रोजगार के सिलसिले में दुबई में रहता था। शिकायत के अनुसार, साल 2019 में संगरूर जिले के गांव दुग्गा निवासी परमजीत सिंह ने अपनी बेटी जसप्रीत कौर का रिश्ता हरप्रीत के साथ तय करवाया था।
बताया गया कि शादी से पहले दोनों परिवारों के बीच यह सहमति बनी थी कि हरप्रीत का परिवार जसप्रीत को स्टडी वीजा पर कनाडा भेजने का खर्च उठाएगा। इसके बाद जसप्रीत अपने पति को स्पाउसल वीजा के माध्यम से कनाडा बुलाने में मदद करेगी। इस समझौते को लेकर रायकोट की अदालत में 500 रुपये के स्टांप पेपर पर लिखित इकरारनामा भी किया गया था।
जमीन बेचकर परिवार ने खर्च किए 50 लाख रुपये
शिकायतकर्ता के अनुसार, जसप्रीत कौर और हरप्रीत सिंह की शादी 1 सितंबर 2019 को हुई थी। इसके बाद 30 नवंबर 2019 को जसप्रीत कनाडा चली गई। आरोप है कि उसे विदेश भेजने के लिए हरप्रीत के परिवार ने जमीन बेचकर कॉलेज की फीस, वीजा, शादी, गहनों और विदेशी मुद्रा समेत अलग-अलग मदों में करीब 50 लाख 61 हजार रुपये खर्च किए थे।
परिवार को उम्मीद थी कि कनाडा पहुंचने के बाद जसप्रीत तय समझौते के अनुसार अपने पति को भी वहां बुलाने की प्रक्रिया शुरू करेगी। लेकिन शिकायत में आरोप लगाया गया कि कनाडा पहुंचने के बाद उसने कॉलेज बदलने की बात कहकर अतिरिक्त पैसे मांगे।
भारत आने से किया इनकार, पति का नंबर भी किया ब्लॉक
हरप्रीत की शिकायत के मुताबिक, जब शादी के पंजीकरण से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करने के लिए जसप्रीत को भारत बुलाने की योजना बनाई गई, तो उसने आने से इनकार कर दिया। आरोप है कि बाद में उसने हरप्रीत का फोन नंबर भी ब्लॉक कर दिया और परिवार से संपर्क लगभग खत्म कर लिया।
इसके बाद हरप्रीत सिंह ने पुलिस से शिकायत की। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और अदालत की कार्यवाही के आधार पर ही होगी।
2020 में दर्ज हुआ था धोखाधड़ी का मामला
पुलिस के अनुसार, हरप्रीत सिंह की शिकायत पर थाना सदर रायकोट में साल 2020 में जसप्रीत कौर, उसके माता-पिता और मामले से जुड़े बिचौलियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था। आरोपी महिला के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी करवाया गया था, ताकि विदेश से भारत लौटने पर उसके बारे में संबंधित एजेंसियों को सूचना मिल सके।
बताया गया है कि पासपोर्ट की अवधि समाप्त होने के बाद उसे नवीनीकरण संबंधी काम के लिए भारत आना पड़ा। दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचने पर सुरक्षा एजेंसियों ने उसे हिरासत में लिया और पंजाब पुलिस को सूचना दी।
दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेजी गई आरोपी
इसके बाद रायकोट पुलिस महिला को पंजाब ले आई और अदालत में पेश किया। अदालत ने पूछताछ के लिए उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। पुलिस अब मामले से जुड़े आर्थिक लेन-देन, कथित समझौते और अन्य आरोपों की जांच कर रही है।
फिलहाल यह मामला शिकायत और पुलिस जांच के आधार पर सामने आया है। आरोपी महिला के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्टों और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है; आरोपी को दोषी मानने से पहले न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।
मांसपेशियां मजबूत बनाने, शरीर की मरम्मत और फिटनेस बनाए रखने के लिए प्रोटीन बेहद जरूरी पोषक तत्व है। जिम जाने वाले लोगों से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी में सक्रिय रहने वालों तक, कई लोग अपनी प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए प्रोटीन पाउडर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या प्रोटीन पाने के लिए सप्लीमेंट लेना जरूरी है? ऐसा नहीं है। कई शाकाहारी खाद्य पदार्थ भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं और संतुलित डाइट के जरिए शरीर की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं।
बादाम, पनीर, ग्रीक योगर्ट, दालें, क्विनोआ और मूंगफली जैसे खाद्य पदार्थ प्रोटीन के साथ दूसरे जरूरी पोषक तत्व भी देते हैं। हालांकि, इनमें प्रोटीन की मात्रा अलग-अलग होती है। यह भी जरूरी है कि केवल एक या दो खाद्य पदार्थों पर निर्भर रहने के बजाय दिनभर का भोजन संतुलित रखा जाए।
क्या प्रोटीन पाउडर की जगह प्राकृतिक खाद्य पदार्थ ले सकते हैं?
कई लोगों के लिए भोजन से ही पर्याप्त प्रोटीन मिल सकता है। दालें, दूध से बने खाद्य पदार्थ, सोया, मेवे, बीज और साबुत अनाज को सही मात्रा में शामिल करके प्रोटीन की जरूरत पूरी की जा सकती है।
प्रोटीन पाउडर अपने आप में हर किसी के लिए नुकसानदायक नहीं है। जिन लोगों की प्रोटीन की जरूरत ज्यादा है या जो भोजन से पर्याप्त प्रोटीन नहीं ले पाते, उनके लिए यह सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। लेकिन सप्लीमेंट चुनते समय उसकी सामग्री, गुणवत्ता और जरूरत पर ध्यान देना जरूरी है।
सभी प्रोटीन पाउडर में हानिकारक तत्व होते हैं या सामान्य मात्रा में प्रोटीन लेने से किडनी और लिवर को नुकसान पहुंचता है, ऐसा कहना सही नहीं है। स्वस्थ लोगों में सामान्य जरूरत के अनुसार प्रोटीन लेना आमतौर पर सुरक्षित होता है। हालांकि, पहले से किडनी या लिवर की बीमारी होने पर प्रोटीन की मात्रा डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह से तय करनी चाहिए।
1. बादाम: प्रोटीन के साथ विटामिन ई भी
बादाम में प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम और विटामिन ई पाया जाता है। यह पोषक तत्वों से भरपूर स्नैक है और संतुलित आहार का हिस्सा बन सकता है।
लगभग 28 ग्राम बादाम यानी एक छोटी मुट्ठी में करीब 6 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है। इसमें हेल्दी फैट भी होता है, इसलिए यह ऊर्जा देने में मदद करता है।
बादाम को नाश्ते के साथ या दिन में स्नैक के रूप में खाया जा सकता है। इन्हें भिगोकर खाना जरूरी नहीं है; अपनी पसंद और पाचन के अनुसार खा सकते हैं। ध्यान रखें कि बादाम में कैलोरी भी अधिक होती है, इसलिए मात्रा का ध्यान रखना बेहतर है।
2. पनीर: मांसपेशियों और हड्डियों के लिए उपयोगी
पनीर शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। इसमें प्रोटीन के साथ कैल्शियम और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व भी मिलते हैं, जो मांसपेशियों और हड्डियों के सामान्य स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं।
पनीर में प्रोटीन की मात्रा उसकी किस्म और नमी के स्तर के अनुसार बदलती है। इसलिए हर एक कप पनीर में एक समान मात्रा में प्रोटीन मिलेगा, ऐसा नहीं है। सामान्य तौर पर 100 ग्राम पनीर में लगभग 15–20 ग्राम प्रोटीन हो सकता है, लेकिन पैकेट पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी देखना बेहतर है।
पनीर को सब्जी, सलाद या हल्के मसालों के साथ भोजन में शामिल किया जा सकता है। यदि आप वजन या कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, तो कम फैट वाले विकल्प और पकाने में इस्तेमाल होने वाले तेल की मात्रा पर ध्यान दें।
3. चीज: प्रोटीन और कैल्शियम का स्रोत
चीज में प्रोटीन और कैल्शियम पाया जाता है। इसकी मात्रा चीज की किस्म के अनुसार अलग हो सकती है। हालांकि, कई प्रकार के चीज में संतृप्त वसा और सोडियम भी काफी होता है।
इसलिए इसे प्रोटीन का मुख्य स्रोत बनाने के बजाय सीमित मात्रा में भोजन का हिस्सा बनाना बेहतर है। सैंडविच या सलाद में थोड़ी मात्रा में चीज शामिल किया जा सकता है।
अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल या हृदय रोग का जोखिम है, तो चीज चुनते समय सोडियम और संतृप्त वसा की मात्रा पर ध्यान दें। प्रोटीन बढ़ाने के लिए दालें, बीन्स, कम फैट वाला दही और अन्य विकल्प भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
4. ग्रीक योगर्ट: प्रोटीन के साथ कैल्शियम भी
ग्रीक योगर्ट को सामान्य दही की तुलना में अधिक प्रोटीन वाला विकल्प माना जाता है, क्योंकि इसे बनाने की प्रक्रिया में अतिरिक्त तरल हटाया जाता है। हालांकि, प्रोटीन की मात्रा ब्रांड और उत्पाद के अनुसार अलग हो सकती है।
लगभग 200 ग्राम ग्रीक योगर्ट में करीब 15–20 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है, लेकिन सही मात्रा के लिए उत्पाद का लेबल देखें। इसमें कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व भी मिल सकते हैं।
इसे नाश्ते में, फल या थोड़े मेवों के साथ खाया जा सकता है। बिना अतिरिक्त चीनी वाला विकल्प चुनना बेहतर है, क्योंकि फ्लेवर्ड योगर्ट में कई बार काफी मात्रा में चीनी होती है।
दही में मौजूद जीवित लाभकारी बैक्टीरिया कुछ उत्पादों में पाचन स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, सभी योगर्ट में प्रोबायोटिक्स की मात्रा और प्रकार समान नहीं होते।
5. दालें: शाकाहारी डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा
मूंग, मसूर, अरहर, उड़द और चना दाल जैसे विकल्प शाकाहारी भोजन में प्रोटीन के अहम स्रोत हैं। इनमें फाइबर, आयरन, फोलेट और अन्य पोषक तत्व भी मिलते हैं।
एक कप पकी हुई दाल में किस्म और गाढ़ेपन के अनुसार लगभग 12–18 ग्राम प्रोटीन हो सकता है। दालों को चावल, रोटी या अन्य साबुत अनाज के साथ खाने से भोजन में अलग-अलग अमीनो एसिड मिलते हैं और संतुलित पोषण पाने में मदद मिलती है।
दालों में मौजूद फाइबर पेट की सेहत और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में मदद कर सकता है। मांस के कुछ विकल्पों की जगह दालें और बीन्स खाने से हृदय के लिए बेहतर आहार पैटर्न अपनाने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, केवल दाल खाने से हृदय रोग या फैटी लिवर का इलाज होने की गारंटी नहीं है।
दालों को रोजाना के भोजन में शामिल करना आसान है। इन्हें सब्जियों, सूप या सलाद के साथ भी खाया जा सकता है।
6. क्विनोआ और मूंगफली: प्रोटीन बढ़ाने के दो और विकल्प
क्विनोआ: यह एक बीज है, जिसे अनाज की तरह खाया जाता है। इसमें सभी नौ आवश्यक अमीनो एसिड मौजूद होते हैं, इसलिए इसे संपूर्ण प्रोटीन के स्रोतों में गिना जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि यह प्रोटीन की मात्रा या मांसपेशियां बनाने के प्रभाव में हर तरह से मांस के बराबर है।
एक कप पके हुए क्विनोआ में लगभग 8 ग्राम प्रोटीन हो सकता है। इसे सलाद, सब्जियों या दालों के साथ खाया जा सकता है। क्विनोआ उपलब्ध न हो, तो दालें, बीन्स, सोया और दूसरे साबुत अनाज भी अच्छे विकल्प हैं।
मूंगफली और पीनट बटर: मूंगफली में प्रोटीन, असंतृप्त वसा और कुछ फाइबर होता है। लगभग 28 ग्राम मूंगफली में करीब 7 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है। पीनट बटर भी प्रोटीन का स्रोत है, लेकिन उसकी पोषण मात्रा ब्रांड के अनुसार बदलती है।
पीनट बटर खरीदते समय ऐसा विकल्प चुनें जिसमें अतिरिक्त चीनी और नमक कम हो। इसकी मात्रा का भी ध्यान रखें, क्योंकि मूंगफली और पीनट बटर में कैलोरी काफी होती है। मूंगफली से एलर्जी वाले लोगों को इनसे पूरी तरह बचना चाहिए।
रोजाना कितने प्रोटीन की जरूरत होती है?
प्रोटीन की जरूरत हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती। यह उम्र, शरीर के वजन, शारीरिक गतिविधि, गर्भावस्था, स्वास्थ्य की स्थिति और व्यायाम के लक्ष्य पर निर्भर करती है।
स्वस्थ वयस्कों के लिए सामान्य संदर्भ के तौर पर प्रतिदिन लगभग 0.8 ग्राम प्रोटीन प्रति किलोग्राम शरीर के वजन की जरूरत मानी जाती है। उदाहरण के लिए, 60 किलोग्राम वजन वाले वयस्क के लिए यह लगभग 48 ग्राम प्रतिदिन होता है। हालांकि, यह हर व्यक्ति के लिए अंतिम लक्ष्य नहीं है। नियमित ताकत बढ़ाने वाला व्यायाम करने वाले लोगों की जरूरत अधिक हो सकती है, जबकि कुछ बीमारियों में प्रोटीन की मात्रा अलग तरीके से तय करनी पड़ती है।
प्रोटीन को दिनभर के भोजन में बांटकर लेना उपयोगी हो सकता है। नाश्ते में दही या दूध, दोपहर में दाल या पनीर और अन्य भोजन में बीन्स, सोया या मेवे शामिल करने से अलग-अलग स्रोतों से प्रोटीन मिल सकता है।
क्या मांसपेशियां बनाने के लिए प्रोटीन पाउडर जरूरी है?
नहीं, हर व्यक्ति को मांसपेशियां बनाने के लिए प्रोटीन पाउडर की जरूरत नहीं होती। नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, पर्याप्त भोजन, प्रोटीन का सही सेवन और अच्छी नींद मांसपेशियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यदि भोजन से आपकी प्रोटीन की जरूरत पूरी हो रही है, तो केवल ट्रेंड या विज्ञापन देखकर सप्लीमेंट लेना जरूरी नहीं है। दूसरी ओर, यदि व्यस्त दिनचर्या, भूख की कमी या अधिक प्रोटीन की जरूरत के कारण भोजन से पर्याप्त मात्रा नहीं मिल पा रही, तो डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटीशियन की सलाह से उपयुक्त सप्लीमेंट चुना जा सकता है।
निष्कर्ष: बादाम, पनीर, ग्रीक योगर्ट, दालें, क्विनोआ और मूंगफली जैसे शाकाहारी खाद्य पदार्थ प्रोटीन की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन किसी एक फूड को प्रोटीन पाउडर का हर व्यक्ति के लिए पूरा विकल्प नहीं माना जा सकता। सही मात्रा और विविध खाद्य पदार्थों से युक्त संतुलित डाइट सबसे महत्वपूर्ण है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जागरूकता के लिए है। प्रोटीन की जरूरत व्यक्ति की उम्र, वजन, गतिविधि और स्वास्थ्य के अनुसार बदलती है। यदि आपको किडनी या लिवर की बीमारी है, खाद्य एलर्जी है या प्रोटीन सप्लीमेंट लेने की योजना बना रहे हैं, तो डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन से सलाह लें।
वाराणसी: भगवान शिव की नगरी काशी में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनका संबंध रामायण काल की धार्मिक कथाओं और सदियों पुरानी परंपराओं से बताया जाता है। इन्हीं में एक प्रमुख तीर्थ है रामेश्वर महादेव मंदिर। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने काशी की पंचक्रोशी यात्रा के दौरान वरुणा नदी के तट पर एक मुट्ठी रेत से शिवलिंग की स्थापना की थी। इसी वजह से इस स्थान को रामेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।
सावन के महीने में काशी के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इस दौरान भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और सुख-शांति की कामना करते हैं। रामेश्वर महादेव मंदिर भी अपनी धार्मिक मान्यताओं, प्राचीन परंपराओं और भगवान श्रीराम से जुड़ी कथा के कारण विशेष महत्व रखता है।
भगवान श्रीराम ने क्यों की थी शिवलिंग की स्थापना?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम का काशी के रामेश्वर महादेव मंदिर से गहरा संबंध है। कथा में बताया जाता है कि रावण का वध करने के बाद भगवान श्रीराम ने ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए ऋषि-मुनियों से मार्गदर्शन लिया था। इसी क्रम में काशी की पंचक्रोशी यात्रा और भगवान शिव की आराधना का प्रसंग जुड़ा है।
मान्यता है कि यात्रा के दौरान भगवान श्रीराम वरुणा नदी के शांत तट पर पहुंचे। यहां उन्होंने अपने हाथों से एक मुट्ठी रेत लेकर शिवलिंग बनाया और भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। इसके बाद से यह स्थान रामेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
यह कथा धार्मिक परंपराओं में प्रचलित है। इसे आस्था से जुड़ी मान्यता के रूप में देखा जाता है।
काशी की पंचक्रोशी यात्रा में क्यों खास है रामेश्वर धाम?
काशी की पंचक्रोशी यात्रा को हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है। इस यात्रा में श्रद्धालु काशी के निर्धारित तीर्थस्थलों और शिवालयों के दर्शन करते हैं। परंपरागत रूप से यात्रा के अलग-अलग पड़ावों पर पूजा-अर्चना और विश्राम किया जाता है।
रामेश्वर महादेव मंदिर को इस यात्रा का तीसरा प्रमुख पड़ाव माना जाता है। इससे पहले श्रद्धालु कर्दमेश्वर और भीमचंडी जैसे धार्मिक स्थलों के दर्शन करते हैं। इसके बाद रामेश्वर पहुंचकर भगवान शिव की आराधना करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि पंचक्रोशी यात्रा श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, भक्ति और आध्यात्मिक शांति का अवसर देती है। इसी कारण हर साल बड़ी संख्या में भक्त इस यात्रा में शामिल होते हैं।
रामेश्वर महादेव के दर्शन से जुड़ी है मोक्ष की मान्यता
काशी को मोक्षदायिनी नगरी कहा जाता है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में मान्यता है कि यहां भगवान शिव की आराधना करने और पवित्र तीर्थों के दर्शन करने से आध्यात्मिक कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
रामेश्वर महादेव मंदिर में भी श्रद्धालु जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और पूजा-अर्चना करते हैं। कुछ धार्मिक परंपराओं में यहां रुककर विशेष नियमों का पालन करने और पितरों के निमित्त तर्पण करने का भी उल्लेख मिलता है।
मान्यता के अनुसार, श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भक्तों को पुण्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है। हालांकि, कष्टों से मुक्ति और मोक्ष से जुड़ी बातें धार्मिक आस्था का हिस्सा हैं, जिन्हें निश्चित परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मंदिर परिसर में हैं कई अन्य देवी-देवताओं के मंदिर
रामेश्वर महादेव मंदिर परिसर और आसपास के धार्मिक क्षेत्र में कई अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी बताए जाते हैं। इनमें भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान, गणेश, नरसिंह, कालभैरव और सूर्यदेव से जुड़े मंदिर शामिल हैं।
इसके अलावा, धार्मिक परंपराओं में लक्ष्मणेश्वर, भरतेश्वर, शत्रुघ्नेश्वर और अन्य शिवलिंगों का भी उल्लेख मिलता है। इन धार्मिक स्थलों के कारण यह क्षेत्र केवल एक शिव मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न देवी-देवताओं की उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
श्रद्धालु यहां भगवान शिव के साथ अन्य देवी-देवताओं के दर्शन कर अपनी धार्मिक यात्रा पूरी करते हैं।
वरुणा नदी के तट से जुड़ी है प्राचीन आस्था
रामेश्वर महादेव मंदिर की पहचान वरुणा नदी के तट से जुड़ी धार्मिक परंपरा के कारण भी खास है। कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने इसी क्षेत्र में शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी। इस वजह से यह स्थान रामभक्तों और शिवभक्तों दोनों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।
सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे में काशी के इस प्राचीन तीर्थ पर पहुंचकर श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
रामेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी कथा यह संदेश देती है कि भगवान शिव और भगवान श्रीराम की भक्ति हिंदू धार्मिक परंपरा में एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई है। यही वजह है कि काशी का यह तीर्थ आज भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष स्थान रखता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में मंदिर से जुड़ी कथाएं और धार्मिक मान्यताएं प्रचलित परंपराओं पर आधारित हैं। भगवान श्रीराम द्वारा शिवलिंग स्थापना का प्रसंग धार्मिक आस्था से जुड़ा है, जिसकी ऐतिहासिक पुष्टि अलग से स्थापित नहीं है।
बेतिया: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची पुलिस टीम को विरोध का सामना करना पड़ा। योगापट्टी थाना क्षेत्र के रुदलपुर गांव में छापेमारी के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने जिन घरों से देशी शराब बरामद की थी, वहां मौजूद लोगों ने जब्त शराब भी छीन ली। घटना में कुछ पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आने की जानकारी सामने आई है।
मामला सोमवार रात का बताया जा रहा है। घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन महिलाओं और तीन पुरुषों समेत छह संदिग्धों को हिरासत में लिया है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है और मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
गुप्त सूचना के आधार पर गांव पहुंची पुलिस
जानकारी के मुताबिक, सोमवार शाम करीब सात बजे पुलिस को सूचना मिली थी कि रुदलपुर गांव के दो घरों में अवैध रूप से देशी शराब की बिक्री की जा रही है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम छापेमारी के लिए गांव पहुंची।
गांव में रास्ता संकरा होने के कारण पुलिसकर्मियों को अपना वाहन कुछ दूरी पर ही छोड़ना पड़ा। इसके बाद टीम पैदल संबंधित घरों तक पहुंची और तलाशी ली। पुलिस ने इस दौरान दोनों घरों से थोड़ी मात्रा में देशी शराब बरामद की।
शराब बरामदगी के दौरान बढ़ा विवाद
पुलिस के अनुसार, शराब बरामद किए जाने के दौरान कुछ ग्रामीण उग्र हो गए। आरोप है कि लोगों ने पुलिस अधिकारियों और जवानों के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी। इसी दौरान पुलिस की ओर से जब्त की गई शराब छीन लिए जाने की बात भी सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावरों ने महिलाओं को आगे कर पुलिस टीम पर हमला किया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिसकर्मियों को पीछे हटना पड़ा। इस दौरान कुछ जवानों को मामूली चोटें आईं।
अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर छह लोगों को पकड़ा
घटना की सूचना मिलने के बाद अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों के पहुंचने के बाद गांव में दोबारा कार्रवाई की गई। पुलिस ने तीन महिलाओं और तीन पुरुषों को हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया।
फिलहाल हिरासत में लिए गए सभी छह लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना में कौन-कौन शामिल था और जब्त शराब छीने जाने के आरोपों में किन लोगों की भूमिका रही।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी जानकारी
घटना के बाद योगापट्टी थाना पुलिस मामले की जांच में जुटी है। प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, स्थानीय पुलिस अधिकारियों की ओर से अभी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।
सदर-2 एसडीपीओ राकेश कुमार भास्कर ने बताया कि मामले की पूरी जानकारी लेने के बाद मीडिया को विवरण दिया जाएगा। फिलहाल घटना से जुड़े आरोपों की जांच जारी है और हिरासत में लिए गए लोगों की भूमिका की पुष्टि होना बाकी है।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। घटना और आरोपों से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। जांच पूरी होने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
नई दिल्ली: दिल्ली के सराय रोहिल्ला इलाके में एक नाइटक्लब के अंदर बीयर गिरने को लेकर शुरू हुआ विवाद एक युवक की मौत तक पहुंच गया। आरोप है कि एक महिला पर बीयर गिरने के बाद क्लब के बाउंसरों और वेटरों ने 29 वर्षीय ड्राइवर दलजीत और उसके दोस्तों के साथ मारपीट की। इस घटना में दलजीत गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मामले में कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश और घटना की जांच जारी है।
बीयर गिरने के बाद शुरू हुआ विवाद
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, घटना शनिवार देर रात सराय रोहिल्ला थाना क्षेत्र के एक नाइटक्लब में हुई। रघुवीर नगर निवासी दलजीत अपने दोस्तों के साथ क्लब गया था। वहां उसके एक दोस्त की बीयर कथित तौर पर एक महिला पर गिर गई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई।
आरोप है कि विवाद बढ़ने पर क्लब के बाउंसरों ने दलजीत और उसके दोस्तों के साथ मारपीट शुरू कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक, दलजीत ने माफी मांगकर मामला शांत करने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद मारपीट जारी रही। आरोप है कि इस दौरान क्लब के कुछ वेटर भी इसमें शामिल हो गए।
डंडों और कांच की बोतलों से हमला करने का आरोप
मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, दलजीत और उसके दोस्तों को डंडों तथा कांच की बोतलों से पीटा गया। हमले में दलजीत को गंभीर चोटें आईं। आरोप है कि जब युवक वहां से निकलने की कोशिश करने लगे, तो हमलावरों ने उन्हें वापस अंदर खींच लिया और दोबारा मारपीट की।
इस घटना में दलजीत को सबसे गंभीर चोटें लगने की बात सामने आई है। हालांकि, मारपीट के दौरान किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी, यह पुलिस जांच का विषय है।
घर पहुंचने के बाद बिगड़ी हालत
रिपोर्ट के मुताबिक, दलजीत के दोस्त उसे रघुवीर नगर स्थित घर लेकर पहुंचे। बताया गया कि घर के प्रवेश द्वार के पास ही वह गिर पड़ा। इसके बाद उसे गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
29 वर्षीय दलजीत की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वह अपने पीछे पत्नी, आठ साल के बेटे और पिता को छोड़ गया है। घटना के बाद परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है।
पुलिस ने गिरफ्तारियां कीं, सीसीटीवी रिकॉर्डर जब्त
पुलिस ने मामले में कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है और अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है। जांच के तहत नाइटक्लब का सीसीटीवी डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर भी जब्त किया गया है। पुलिस फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है, ताकि विवाद शुरू होने से लेकर मारपीट और युवक की मौत तक की घटनाओं का क्रम स्पष्ट किया जा सके।
जांच में यह पता लगाने की भी कोशिश की जा रही है कि मारपीट में कौन-कौन शामिल था और किसकी भूमिका कितनी थी। आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी।
मामूली विवाद से मौत तक पहुंचा मामला
बीयर गिरने जैसी बात से शुरू हुआ कथित विवाद एक युवक की जान जाने तक पहुंच गया। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियां और जिम्मेदार लोगों की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद है।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचार जानकारी पर आधारित है। मारपीट से जुड़े आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
दिल्ली: जंतर-मंतर पर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया पर एक महिला की तस्वीरों और क्लिप को लेकर चर्चा शुरू हो गई। ऑनलाइन साझा की जा रही पोस्ट में महिला बस के पास खड़ी होकर कैमरे के सामने पोज देती नजर आती है। उसकी ड्रेस और अंदाज को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। हालांकि, इस पोस्ट को लेकर एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह वास्तविक घटना की तस्वीरें हैं या फिर एआई की मदद से तैयार किया गया कंटेंट।
क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट को एक एक्स अकाउंट से साझा किया गया था। इसके कैप्शन में महिला के लिए आपत्तिजनक और मजाकिया शब्दों का इस्तेमाल किया गया। पोस्ट में महिला स्लीवलेस टॉप और डेनिम शॉर्ट्स पहने बस के पास खड़ी दिखाई देती है। वह कैमरे की तरफ देखकर मुस्कुराती और पोज देती नजर आती है।
पोस्ट को जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन से जोड़कर साझा किया जा रहा है। इसी वजह से महिला की मौजूदगी, उसके पहनावे और वहां आने के कथित उद्देश्य को लेकर तरह-तरह की बातें की जा रही हैं। हालांकि, केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि महिला वास्तव में प्रदर्शन में शामिल होने आई थी या उसका वहां आने का कोई दूसरा कारण था।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने क्या कहा?
पोस्ट सामने आने के बाद कुछ यूजर्स ने महिला के पहनावे पर टिप्पणी की। कुछ लोगों ने इसे पब्लिसिटी पाने की कोशिश बताया, जबकि कुछ ने अंदाजा लगाया कि महिला किसी सोशल मीडिया अकाउंट के प्रचार के लिए वहां पहुंची होगी। कुछ प्रतिक्रियाओं में उसके कपड़ों को लेकर मजाक भी किया गया।
वहीं, कुछ यूजर्स ने पोस्ट की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए इसे एआई से तैयार किया गया या भ्रामक कंटेंट होने की आशंका जताई। इस तरह सोशल मीडिया पर चर्चा केवल महिला के पहनावे तक सीमित नहीं रही, बल्कि इस बात पर भी सवाल उठे कि वायरल पोस्ट को बिना पुष्टि के वास्तविक घटना मान लेना कितना सही है।
क्या है वायरल पोस्ट की सच्चाई?
इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि उपलब्ध जानकारी से महिला की पहचान, प्रदर्शन से उसके संबंध और पोस्ट की वास्तविकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं होती। सोशल मीडिया पर किसी तस्वीर या क्लिप का तेजी से फैलना अपने आप में उसकी प्रामाणिकता का प्रमाण नहीं है।
यह पता लगाने के लिए कि पोस्ट वास्तविक है या एआई की मदद से बनाई गई है, मूल सामग्री, उसके प्रकाशित होने का संदर्भ और अन्य विश्वसनीय प्रमाणों की जांच जरूरी है। इसी तरह, महिला के वहां आने के उद्देश्य के बारे में भी बिना ठोस सबूत कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। लेकिन वायरल पोस्ट के आधार पर किए जा रहे दावों को पुष्टि के बिना सच मानने से बचना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर साझा की गई पोस्ट और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। महिला की पहचान, पोस्ट की प्रामाणिकता और प्रदर्शन से उसके संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्लोइंग और जवां त्वचा पाने के लिए दुनियाभर में कई तरह के ब्यूटी ट्रेंड अपनाए जाते हैं। कोरियन स्किन केयर से जुड़े ट्रेंड्स के बीच इन दिनों स्नेल मसाज यानी घोंघे से त्वचा की मसाज को लेकर भी दिलचस्पी देखी जा रही है। इस प्रक्रिया में जीवित घोंघे को चेहरे पर चलने दिया जाता है, जिससे निकलने वाला म्यूकस त्वचा पर फैल जाता है। इसे त्वचा को नमी देने और मुलायम बनाने वाला माना जाता है।
इस ट्रेंड को लेकर कुछ दावे ऐसे भी किए जाते हैं कि घोंघे का हल्का स्पर्श तनाव कम कर सकता है, शरीर में ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन के स्तर को बढ़ा सकता है और त्वचा के टिश्यू की मरम्मत में मदद कर सकता है। लेकिन इन सभी दावों के लिए वैज्ञानिक प्रमाण एक जैसे मजबूत नहीं हैं। स्नेल म्यूकिन युक्त स्किन केयर प्रोडक्ट्स पर कुछ शुरुआती शोध जरूर हुए हैं, लेकिन जीवित घोंघे से मसाज कराने के फायदे और सुरक्षा को लेकर पर्याप्त उच्च गुणवत्ता वाले अध्ययन उपलब्ध नहीं हैं।
क्या है स्नेल मसाज और यह कैसे की जाती है?
स्नेल मसाज एक ऐसी ब्यूटी प्रक्रिया है, जिसमें प्रशिक्षित व्यक्ति त्वचा पर कुछ समय के लिए जीवित घोंघे को चलने देता है। इस दौरान घोंघे से निकलने वाला चिपचिपा पदार्थ, जिसे म्यूकस या म्यूकिन कहा जाता है, त्वचा पर लग जाता है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य त्वचा को नम और मुलायम बनाना बताया जाता है। हालांकि, जीवित घोंघे से मसाज कराना और स्नेल म्यूकिन से बना कॉस्मेटिक उत्पाद इस्तेमाल करना दो अलग-अलग चीजें हैं। किसी क्रीम या सीरम में मौजूद शुद्ध और प्रोसेस किए गए स्नेल सेक्रेशन के संभावित लाभों को सीधे जीवित घोंघे से मसाज के लाभों का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
स्नेल म्यूकिन में कौन-से तत्व पाए जाते हैं?
स्नेल सेक्रेशन फिल्ट्रेट (Snail Secretion Filtrate) का इस्तेमाल कुछ स्किन केयर उत्पादों में किया जाता है। इसकी संरचना घोंघे की प्रजाति और उत्पाद को तैयार करने की प्रक्रिया के अनुसार अलग हो सकती है। इसमें विभिन्न प्रकार के म्यूसिन, प्रोटीन और दूसरे जैविक घटक पाए जा सकते हैं।
कुछ उत्पादों में त्वचा की देखभाल से जुड़े ऐसे घटक होते हैं, जो नमी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, किसी घटक की मौजूदगी अपने आप यह साबित नहीं करती कि वह त्वचा की हर समस्या को ठीक कर सकता है।
स्नेल म्यूकिन से जुड़े संभावित फायदे इस प्रकार बताए जाते हैं:
त्वचा को नमी देना: कुछ स्नेल म्यूकिन उत्पाद त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
त्वचा को मुलायम बनाना: मॉइस्चराइजिंग प्रभाव के कारण त्वचा अस्थायी रूप से अधिक स्मूद महसूस हो सकती है।
त्वचा की बाहरी परत को सहारा देना: कुछ कॉस्मेटिक फॉर्मूलेशन त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
फाइन लाइन्स कम दिखाई देना: त्वचा में नमी बढ़ने से बारीक रेखाएं कुछ समय के लिए कम स्पष्ट दिख सकती हैं।
लेकिन इन प्रभावों का मतलब यह नहीं है कि स्नेल म्यूकिन निश्चित रूप से कोलेजन बढ़ाता है, गहरे निशान मिटाता है या त्वचा की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को तेजी से ठीक कर देता है।
क्या स्नेल मसाज से त्वचा के टिश्यू रिपेयर होते हैं?
त्वचा की मरम्मत एक जटिल जैविक प्रक्रिया है, जिसमें त्वचा की बाहरी परत, कोशिकाएं और कोलेजन जैसे संरचनात्मक प्रोटीन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्नेल म्यूकिन में मौजूद कुछ घटकों को लेकर प्रयोगशाला और शुरुआती शोध में संभावित लाभों का अध्ययन किया गया है।
हालांकि, प्रयोगशाला में किसी घटक का उपयोगी दिखाई देना और वास्तविक लोगों की त्वचा पर उसका सुरक्षित एवं प्रभावी साबित होना अलग-अलग बातें हैं। अभी यह कहने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं कि जीवित घोंघे से मसाज कराने से त्वचा के टिश्यू की मरम्मत तेज होती है या घाव जल्दी भरते हैं।
अगर त्वचा पर घाव, संक्रमण, गंभीर मुंहासे या सूजन है, तो स्नेल मसाज को इलाज के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
क्या घोंघे से मसाज कराने पर बढ़ते हैं हैप्पी हार्मोन?
ऑक्सीटोसिन को अक्सर ‘हैप्पी हार्मोन’ कहा जाता है, हालांकि शरीर में इसकी भूमिका इससे कहीं अधिक जटिल है। यह सामाजिक जुड़ाव और कुछ प्रकार की भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से जुड़ा होता है। दूसरी ओर, कोर्टिसोल शरीर की तनाव प्रतिक्रिया में भूमिका निभाने वाला हार्मोन है।
हल्का स्पर्श, आरामदायक माहौल और कुछ प्रकार की मसाज लोगों को शांत महसूस कराने में मदद कर सकती हैं। लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि घोंघे की त्वचा पर होने वाली हलचल से ऑक्सीटोसिन निश्चित रूप से बढ़ता है या कोर्टिसोल घटता है।
विशेष रूप से स्नेल मसाज के दौरान हार्मोन में होने वाले बदलावों और तनाव कम करने के प्रभाव को साबित करने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे तनाव या एंग्जायटी का प्रमाणित उपचार मानना सही नहीं होगा।
क्या स्नेल मसाज से झुर्रियां और मुंहासों के निशान कम हो सकते हैं?
स्नेल म्यूकिन वाले कुछ उत्पादों को एंटी-एजिंग और त्वचा की नमी से जुड़े फायदों के लिए बेचा जाता है। त्वचा में पर्याप्त नमी होने पर उसकी सतह अधिक मुलायम दिख सकती है, जिससे बारीक रेखाएं कुछ कम नजर आ सकती हैं।
लेकिन गहरी झुर्रियों, पुराने मुंहासों के गड्ढों, गहरे दाग-धब्बों या त्वचा की गंभीर क्षति को ठीक करने के लिए स्नेल मसाज की प्रभावशीलता स्थापित नहीं हुई है। ऐसे परिणामों के लिए त्वचा की समस्या के अनुसार अलग उपचार की जरूरत हो सकती है।
त्वचा की देखभाल के लिए नियमित मॉइस्चराइजर, रोजाना ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन और त्वचा के प्रकार के अनुसार चुने गए उत्पाद अधिक व्यावहारिक विकल्प हैं।
स्नेल मसाज के क्या जोखिम हो सकते हैं?
जीवित घोंघे को सीधे चेहरे पर चलने देने में कुछ जोखिम हो सकते हैं, खासकर जब घोंघे की प्रजाति, उसकी देखभाल और स्वच्छता की स्थिति स्पष्ट न हो।
1. एलर्जी और त्वचा में जलन: घोंघे के म्यूकस या इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पाद के किसी घटक से कुछ लोगों को खुजली, लालिमा, जलन या एलर्जी हो सकती है।
2. संक्रमण का जोखिम: जीवित घोंघे और उनके आसपास की सतहों पर मौजूद सूक्ष्मजीव त्वचा के संपर्क में आ सकते हैं। जोखिम का स्तर परिस्थितियों पर निर्भर करता है, लेकिन केवल किसी स्पा या क्लीनिक में प्रक्रिया कराने से संक्रमण का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता।
3. संवेदनशील या क्षतिग्रस्त त्वचा पर परेशानी: जिन लोगों की त्वचा पर घाव, सक्रिय संक्रमण, सूजन या एक्जिमा जैसी समस्या है, उनके लिए ऐसी प्रक्रिया अधिक जोखिमपूर्ण हो सकती है।
4. परिणामों को लेकर अनिश्चितता: हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है और जीवित घोंघे से मसाज कराने के लाभों तथा दीर्घकालिक सुरक्षा के बारे में पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
विशेष रूप से बगीचे या खुले वातावरण में मिलने वाले घोंघों को चेहरे पर इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। उनमें परजीवी या अन्य रोग पैदा करने वाले जीव हो सकते हैं। साफ-सफाई का ध्यान रखने पर भी जीवित घोंघे के इस्तेमाल को पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं माना जा सकता।
क्या स्नेल म्यूकिन वाली क्रीम इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है?
यदि आप इस ट्रेंड के कारण स्नेल म्यूकिन आजमाना चाहते हैं, तो जीवित घोंघे से मसाज कराने के बजाय किसी विश्वसनीय निर्माता का कॉस्मेटिक उत्पाद चुनना तुलनात्मक रूप से अधिक व्यावहारिक हो सकता है। फिर भी उत्पाद की गुणवत्ता, उसके दूसरे घटकों और आपकी त्वचा की संवेदनशीलता का ध्यान रखना जरूरी है।
उत्पाद इस्तेमाल करने से पहले उसकी सामग्री पढ़ें और सीमित हिस्से पर पैच टेस्ट करें। ध्यान रहे कि पैच टेस्ट से हर तरह की एलर्जी या प्रतिक्रिया का पता नहीं चलता। जलन, खुजली या लालिमा होने पर इस्तेमाल बंद कर दें।
अगर आपकी त्वचा बहुत संवेदनशील है, आपको पहले से एलर्जी की समस्या है या त्वचा पर कोई
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच हुई कथित झड़प के बाद महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी चर्चा में हैं। यह विवाद उस समय सामने आया, जब प्रदेश कांग्रेस की नई अध्यक्ष आराधना मिश्रा और नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद के कार्यभार संभालने की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान ममता चौधरी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बीच तीखी बहस होने की बात सामने आई।
ममता चौधरी ने आरोप लगाया कि अजय राय के साथ आए कुछ समर्थकों ने महिला कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें धक्का दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि विवाद के दौरान जूते-चप्पल फेंके गए। हालांकि, घटना से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है और सभी पक्षों की बात सामने आना बाकी है।
‘अपनी औकात में बात करो’ टिप्पणी के बाद बढ़ा विवाद
घटना के सामने आए दृश्य में ममता चौधरी और अजय राय के बीच तीखी नोकझोंक सुनाई देने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ममता चौधरी ने कहा कि वह अजय राय का चेहरा नहीं देखना चाहतीं। इसके जवाब में अजय राय की ओर से कथित तौर पर कहा गया, “अपनी औकात में बात करो।”
ममता चौधरी ने एक समाचार पत्र से बातचीत में कहा कि वह महिला कर्मचारियों को धक्का दिए जाने का विरोध कर रही थीं। उनके अनुसार, वह सीधे अजय राय से बात नहीं कर रही थीं और उन्हें समझ नहीं आया कि बहस इतनी आगे कैसे बढ़ गई।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उनसे कोई गलती हुई थी, तो वरिष्ठ नेता उन्हें समझा सकते थे। उनके मुताबिक, महिला कार्यकर्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार और जूते-चप्पल फेंके जाने जैसी घटनाएं स्वीकार नहीं की जा सकतीं।
ममता चौधरी ने इस पूरे मामले को महिलाओं की गरिमा और दलितों के सम्मान से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व पर भरोसा है और उम्मीद है कि मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
कौन हैं ममता चौधरी?
ममता चौधरी उत्तर प्रदेश कांग्रेस की महिला नेता हैं और लंबे समय से लखनऊ के शहरी संगठन में सक्रिय रही हैं। उन्होंने वर्ष 2006 में लखनऊ नगर निगम के मालवीय नगर क्षेत्र से पार्षद का चुनाव लड़कर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह लगातार चार बार पार्षद चुनी गईं।
वर्ष 2017 और 2023 में उन्होंने नगर निगम सदन में कांग्रेस नेता के रूप में भी भूमिका निभाई। संगठन में लंबे समय तक काम करने के कारण उनकी पहचान स्थानीय राजनीति में सक्रिय नेता के तौर पर बनी।
ममता चौधरी वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान के तहत चुनी गई उम्मीदवारों में भी शामिल थीं। उन्होंने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित मोहनलालगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उन्हें इस चुनाव में 2,990 वोट मिले थे।
विधानसभा चुनाव के करीब एक साल बाद उन्हें उत्तर प्रदेश महिला कांग्रेस के सेंट्रल जोन का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वह संगठन में अपनी बेबाक राय रखने के लिए जानी जाती हैं।
वाराणसी: भगवान शिव की नगरी काशी में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनका धार्मिक महत्व सदियों से श्रद्धालुओं के बीच बना हुआ है। इन्हीं में एक खास मंदिर महासिद्धिश्वर महादेव का भी है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के दर्शन और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से साधक को आध्यात्मिक उन्नति और सिद्धियों की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में कई ऋषि-मुनियों और राजा जनक जैसे महान व्यक्तित्वों ने इस क्षेत्र में तपस्या की थी।
काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां भगवान शिव अलग-अलग स्वरूपों में भक्तों का कल्याण करते हैं। कोई सुख और समृद्धि की कामना लेकर महादेव के दरबार में पहुंचता है, तो कोई मानसिक शांति और आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश में उनकी आराधना करता है। महासिद्धिश्वर महादेव का मंदिर भी इसी आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है।
कहां स्थित है महासिद्धिश्वर महादेव का मंदिर?
महासिद्धिश्वर महादेव का मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भेलूपुर क्षेत्र के शाकुंभरी चौराहे के पास स्थित बताया जाता है। यह स्थान काशी के प्राचीन धार्मिक क्षेत्रों में शामिल है। मंदिर का उल्लेख काशीखंड से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में मिलता है।
मान्यता है कि यहां भगवान शिव के दर्शन करने से साधक को अपनी आध्यात्मिक साधना में सफलता प्राप्त करने का आशीर्वाद मिलता है। इसी वजह से महासिद्धिश्वर महादेव को समस्त सिद्धियां प्रदान करने वाले शिव स्वरूप के रूप में पूजा जाता है।
सिद्धकुंड में स्नान और शिव दर्शन का क्या है महत्व?
महासिद्धिश्वर महादेव की महिमा से जुड़ी कथाओं में सिद्धकुंड का विशेष उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में शंकुलधारा का क्षेत्र ऋषि-मुनियों की तपस्या का प्रमुख स्थान हुआ करता था। साधक सिद्धकुंड में स्नान करने के बाद भगवान शिव की आराधना और तपस्या करते थे।
मान्यता है कि इस साधना से ऋषियों को आध्यात्मिक सिद्धियां प्राप्त हुई थीं। इसी परंपरा के कारण सिद्धकुंड में स्नान और महासिद्धिश्वर महादेव के दर्शन को विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
हालांकि, इन मान्यताओं को धार्मिक ग्रंथों और स्थानीय परंपराओं के संदर्भ में समझना चाहिए। सिद्धियों की प्राप्ति से जुड़ी बातों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है।
इन ऋषियों और महान व्यक्तित्वों ने की थी तपस्या
महासिद्धिश्वर महादेव से जुड़े धार्मिक विवरणों में कई ऋषियों और महान व्यक्तित्वों का उल्लेख किया गया है। मान्यता के अनुसार, कोहल ऋषि, असित ऋषि, कात्यायन ऋषि, जांगल ऋषि और विभांड ऋषि ने इस क्षेत्र में तपस्या की थी। राजा जनक का नाम भी इस साधना परंपरा से जोड़ा जाता है।
इसके अलावा, संत कीनाराम और गोस्वामी तुलसीदास की साधना परंपराओं का संबंध भी काशी के इस धार्मिक क्षेत्र से बताया जाता है। इन महान संतों और ऋषियों के नामों के उल्लेख से इस स्थान की धार्मिक महत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
काशी लंबे समय से संतों, साधकों और विद्वानों की भूमि रही है। यहां अनेक धार्मिक परंपराओं ने जन्म लिया और विकसित हुईं। महासिद्धिश्वर महादेव का मंदिर भी इसी आध्यात्मिक विरासत का हिस्सा माना जाता है।
काशीखंड में भी मिलता है महासिद्धिश्वर महादेव का उल्लेख
काशीखंड में काशी के विभिन्न शिवलिंगों, तीर्थों और धार्मिक स्थलों का वर्णन मिलता है। महासिद्धिश्वर महादेव की महिमा बताते हुए एक श्लोक में सिद्धकुंड में स्नान और शिव दर्शन के महत्व का उल्लेख किया गया है।
धार्मिक भावार्थ के अनुसार, जो व्यक्ति सिद्धकुंड में स्नान करके महासिद्धिश्वर महादेव के दर्शन करता है, वह समस्त सिद्धियों की प्राप्ति के मार्ग पर आगे बढ़ता है। इसी मान्यता के कारण इस शिवलिंग को विशेष महत्व दिया जाता है।
काशीखंड में वर्णित धार्मिक स्थलों की पहचान और उनके वर्तमान स्थानों को लेकर स्थानीय परंपराओं में कुछ अंतर हो सकते हैं। इसलिए प्राचीन वर्णनों को समझते समय धार्मिक ग्रंथों के संदर्भ और स्थानीय इतिहास, दोनों को ध्यान में रखना उचित है।
क्यों खास माने जाते हैं महासिद्धिश्वर महादेव?
भगवान शिव को हिंदू धर्म में तप, वैराग्य, ज्ञान और मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनके विभिन्न स्वरूप भक्तों को अलग-अलग आध्यात्मिक संदेश देते हैं। महासिद्धिश्वर महादेव का स्वरूप विशेष रूप से साधना और सिद्धि की धार्मिक अवधारणा से जुड़ा है।
श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि काशी की प्राचीन साधना परंपरा को याद करने का माध्यम भी है। यहां की धार्मिक मान्यताएं यह संदेश देती हैं कि सच्ची साधना, अनुशासन, श्रद्धा और आत्मचिंतन जीवन को नई दिशा दे सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध धार्मिक विवरणों, काशीखंड से जुड़ी मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं पर आधारित है। सिद्धियों की प्राप्ति से संबंधित दावों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है।
बेतिया: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर ले जाए जा रहे युवक की मौत के बाद मामला गरमा गया है। मृतक की पहचान दिलशाद अंसारी के रूप में हुई है। परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई और युवक की मौत की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि दिलशाद चलती गाड़ी से कूदकर घायल हो गए थे और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। फिलहाल घटना की जांच की जा रही है।
रात में घर से ले गई थी पुलिस
परिजनों के मुताबिक, बानूछापर और सहोदरा थाने की पुलिस रात करीब दो बजे दिलशाद को उनके घर से अपने साथ ले गई थी। सुबह लगभग पांच बजे परिवार को फोन आया कि दिलशाद की तबीयत बिगड़ गई है।
परिवार के सदस्य जब अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें दिलशाद की मौत की जानकारी मिली। इसके बाद घर में मातम छा गया। परिजनों ने दावा किया कि दिलशाद के सिर पर गंभीर चोट थी और माथा फटा हुआ था। उनका कहना है कि वे युवक की मौत की असली वजह जानना चाहते हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
दिलशाद की पत्नी नगमा खातून और पिता अकबर अंसारी ने घटना को लेकर सवाल उठाए हैं। परिवार के मुताबिक, दिलशाद की महज चार महीने की बेटी है, जिसके सिर से पिता का साया उठ गया है।
पुलिस ने बताई अलग कहानी
बेतिया पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर घटना के संबंध में अपना पक्ष रखा है। पुलिस के अनुसार, दिलशाद अंसारी सहोदरा थाना कांड संख्या 65/25 में आरोपी थे। यह मामला 2 अगस्त 2025 को एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज किया गया था।
पुलिस का कहना है कि दिलशाद को बानूछापर से गिरफ्तार करने के बाद सहोदरा थाने ले जाया जा रहा था। इसी दौरान प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शिकारपुर थाना क्षेत्र में वह चलती पुलिस गाड़ी से कूद गए। पुलिस के मुताबिक, इस घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं।
नरकटियागंज से बेतिया अस्पताल किया गया रेफर
पुलिस के अनुसार, घायल दिलशाद को मौके पर मौजूद जवानों ने तत्काल अनुमंडलीय अस्पताल, नरकटियागंज पहुंचाया। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए जीएमसीएच, बेतिया रेफर कर दिया।
पुलिस का दावा है कि बेतिया अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने दिलशाद को मृत घोषित कर दिया। हालांकि, परिजनों के आरोप और पुलिस के बयान के बीच घटना की परिस्थितियों को लेकर सवाल बने हुए हैं।
मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत जांच
बेतिया पुलिस ने कहा है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप मामले में निष्पक्ष जांच के लिए विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है।
फिलहाल मौत की वास्तविक वजह और घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने आना बाकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय तथ्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों से यह स्पष्ट होने में मदद मिल सकती है कि युवक को चोटें किन परिस्थितियों में लगीं।
परिजन मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े आरोपों और पुलिस के दावे की पुष्टि हो सकेगी।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट और पुलिस के आधिकारिक पक्ष के आधार पर तैयार की गई है। परिजनों के आरोपों और पुलिस के दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। मौत की परिस्थितियों का अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।