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  • शादी का रिश्ता कराने: के बहाने 53 वर्षीय व्यक्ति से 5.65 लाख की ठगी, फर्जी नर्स बनकर WhatsApp पर करती थी बात; 4 महिलाएं और एक युवक गिरफ्तार.

    शादी का रिश्ता कराने: के बहाने 53 वर्षीय व्यक्ति से 5.65 लाख की ठगी, फर्जी नर्स बनकर WhatsApp पर करती थी बात; 4 महिलाएं और एक युवक गिरफ्तार.

    शादी का रिश्ता कराने: के बहाने 53 वर्षीय व्यक्ति से 5.65 लाख की ठगी, फर्जी नर्स बनकर WhatsApp पर करती थी बात; 4 महिलाएं और एक युवक गिरफ्तार.

    छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में शादी कराने का झांसा देकर एक व्यक्ति से 5.65 लाख रुपये से अधिक की ठगी करने का मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर शादी के विज्ञापन के जरिए लोगों से संपर्क किया जाता था। इसके बाद WhatsApp पर बातचीत कर शादी का भरोसा दिलाया जाता और इलाज या दूसरी परेशानियों का हवाला देकर पैसे मांगे जाते थे। इस मामले में पुलिस ने चार महिलाओं और एक युवक को गिरफ्तार किया है।

    पुलिस के अनुसार, पीड़ित 53 वर्षीय रेशम लाल साहू नवागढ़ क्षेत्र के निवासी हैं और अपने लिए शादी का रिश्ता तलाश रहे थे। इसी दौरान उनके मोबाइल पर शादी से जुड़ा एक विज्ञापन आया। विज्ञापन के माध्यम से संपर्क करने पर उन्हें महासमुंद की पदमा नाम की युवती के बारे में बताया गया। युवती ने कथित तौर पर खुद को सरकारी अस्पताल में नर्स बताया और शादी का रिश्ता तय कराने का भरोसा दिया।

    पहले दिलाया शादी का भरोसा, फिर शुरू हुई पैसों की मांग

    शिकायत के अनुसार, एक मध्यस्थ ने युवती का मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने के बदले पैसे लिए। नंबर मिलने के बाद रेशम लाल और युवती के बीच WhatsApp पर बातचीत होने लगी। धीरे-धीरे युवती ने कथित तौर पर अलग-अलग कारण बताकर उनसे रुपये मांगने शुरू कर दिए।

    कभी मां के इलाज, कभी खुद की बीमारी और कभी दुर्घटना का हवाला देकर पैसे मांगे गए। शादी की उम्मीद में पीड़ित उसकी बातों पर भरोसा करते रहे और रकम भेजते गए।

    बताया गया है कि पीड़ित ने अपनी जमीन की बिक्री से बचे पैसे के साथ-साथ दूसरे लोगों से उधार लेकर भी रकम जुटाई। इस तरह उन्होंने कुल 5,65,355 रुपये भेज दिए।

    मिलने की बात पर टालती रही युवती

    जब पीड़ित ने युवती से आमने-सामने मिलने की बात कही, तो वह कथित तौर पर अलग-अलग बहाने बनाने लगी। संदेह होने पर रेशम लाल महासमुंद के सरकारी अस्पताल पहुंचे और वहां पदमा नाम की नर्स के बारे में जानकारी ली। लेकिन उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में इस नाम की कोई युवती नहीं मिली।

    इसके बाद पीड़ित को ठगी का शक हुआ और उन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। मामले में साइबर थाना में अपराध क्रमांक 10/26 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की गई।

    जांच में सामने आया नाम बदलकर ठगी करने का मामला

    पुलिस ने साइबर पोर्टल और बैंक से जुड़ी जानकारी के आधार पर संदिग्ध खातों, मोबाइल नंबरों तथा लेनदेन की जांच की। जांच के दौरान आरोपियों के राजनांदगांव से जुड़े होने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां कार्रवाई कर आरोपियों को पकड़ा।

    पुलिस के अनुसार, जांच में पता चला कि पदमा नाम से पीड़ित से बातचीत करने वाली महिला की असली पहचान भूमिका रंगारी है। पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि वह पहले वर्ष 2025 में एक मैरिज ब्यूरो में काम करती थी। नौकरी छोड़ने के बाद उसने कथित रूप से अपनी अलग फर्जी संस्था शुरू की और मोबाइल पर शादी के विज्ञापन चलाकर लोगों को रिश्ते का भरोसा देकर पैसे वसूलने लगी।

    बैंक खातों के जरिए रकम ट्रांसफर करने का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, भूमिका ने पूछताछ में रोहित कुमार गुप्ता, नसीम बानो, तय्यबा बानो और शायना बानो के सहयोग की बात बताई। आरोप है कि ये लोग कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे और ठगी से मिली रकम का कुछ हिस्सा उनके खातों में ट्रांसफर किया जाता था।

    पुलिस ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया है। पुलिस का यह भी कहना है कि भूमिका रंगारी के खिलाफ साइबर पोर्टल पर शादी के नाम पर रिश्ता कराने और पैसे लेने से जुड़ी अन्य शिकायतें भी दर्ज हैं। इन शिकायतों की जांच और सत्यापन किया जाना बाकी है।

    शादी के ऑनलाइन विज्ञापनों से रहें सावधान

    इस मामले के बाद पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मोबाइल पर दिखाई देने वाले शादी या खरीदारी से जुड़े विज्ञापनों पर आंख बंद करके भरोसा न करें। किसी अनजान व्यक्ति को रिश्ता तय करने, रजिस्ट्रेशन, इलाज या अन्य बहानों से पैसे भेजने से पहले उसकी पहचान और दावों की पुष्टि जरूर करें।

    यदि किसी के साथ ऑनलाइन ठगी होती है, तो जल्द से जल्द साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। बैंक लेनदेन से जुड़े संदेश, भुगतान की रसीदें और बातचीत के रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना जांच में मददगार हो सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध पुलिस संबंधी जानकारी और रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

  • UP में 25 फरवरी के बाद: होंगे विधानसभा चुनाव? यूपी बोर्ड की परीक्षा तारीखों से क्यों तेज हुई अटकलें, जानिए पूरा गणित.

    UP में 25 फरवरी के बाद: होंगे विधानसभा चुनाव? यूपी बोर्ड की परीक्षा तारीखों से क्यों तेज हुई अटकलें, जानिए पूरा गणित.

    UP में 25 फरवरी के बाद: होंगे विधानसभा चुनाव? यूपी बोर्ड की परीक्षा तारीखों से क्यों तेज हुई अटकलें, जानिए पूरा गणित.

    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होने लगी है। सभी की नजर इस बात पर है कि चुनाव कब होंगे और नई सरकार का गठन किस समय तक होगा। इसी बीच यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। परीक्षाएं 5 फरवरी से शुरू होकर 24 फरवरी 2027 तक चलेंगी। इसके बाद सवाल उठने लगा है कि क्या उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 25 फरवरी के बाद कराए जा सकते हैं?

    हालांकि, अभी चुनाव की तारीखों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। भारत निर्वाचन आयोग ही चुनाव कार्यक्रम तय करेगा। बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों और पिछले विधानसभा चुनावों के समय को देखते हुए लगाए जा रहे कयास फिलहाल अनुमान हैं, किसी तय चुनाव कार्यक्रम की पुष्टि नहीं।

    24 फरवरी को खत्म होंगी यूपी बोर्ड की परीक्षाएं

    उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक, वर्ष 2027 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएं 5 फरवरी से शुरू होंगी और 24 फरवरी को समाप्त होंगी।

    बोर्ड परीक्षाओं के दौरान स्कूलों, शिक्षकों और प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी भूमिका रहती है। वहीं, विधानसभा चुनाव के लिए भी स्कूलों और अन्य सरकारी संस्थानों का इस्तेमाल मतदान केंद्रों के रूप में किया जा सकता है। चुनाव में शिक्षकों और दूसरे सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई जाती है।

    इसी वजह से बोर्ड परीक्षाओं और विधानसभा चुनाव की तारीखों के बीच तालमेल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन केवल परीक्षाएं समाप्त होने के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि चुनाव अगले ही दिन से शुरू हो जाएंगे।

    2027 में कब तक होना है नई सरकार का गठन?

    उत्तर प्रदेश में मौजूदा सरकार ने 25 मार्च 2022 को शपथ ली थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरी बार प्रदेश की कमान संभाली थी। 18वीं विधानसभा का पहला सत्र 23 मई 2022 को आयोजित हुआ था।

    संविधान के अनुच्छेद 172 के मुताबिक, किसी राज्य की विधानसभा सामान्य परिस्थितियों में अपनी पहली बैठक के लिए निर्धारित तारीख से पांच साल तक बनी रहती है, जब तक उसे पहले भंग न कर दिया जाए। इसलिए उत्तर प्रदेश की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल और नई विधानसभा के गठन की संवैधानिक समयसीमा चुनाव कार्यक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    नई विधानसभा का गठन निर्धारित संवैधानिक समयसीमा के भीतर होना जरूरी है। इसी कारण चुनाव आयोग को मतदान, मतगणना और सरकार गठन की प्रक्रिया को समय पर पूरा करने के लिए कार्यक्रम तय करना होगा।

    2012, 2017 और 2022 में कब हुए थे चुनाव?

    पिछले विधानसभा चुनावों और यूपी बोर्ड की परीक्षाओं की तारीखों को देखकर मौजूदा चुनाव को लेकर लगाए जा रहे अनुमानों को समझा जा सकता है।

    2012 का विधानसभा चुनाव: उत्तर प्रदेश में मतदान फरवरी और मार्च के बीच हुआ था। उस साल यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 16 मार्च से शुरू हुई थीं। यानी मतदान की प्रक्रिया बोर्ड परीक्षाओं से पहले पूरी हो गई थी।

    2017 का विधानसभा चुनाव: इस साल विधानसभा चुनाव 11 फरवरी से 8 मार्च के बीच हुए थे। बोर्ड परीक्षाएं 16 मार्च से शुरू हुईं। इस बार भी मतदान की प्रक्रिया पहले पूरी हुई और उसके बाद परीक्षाएं शुरू हुईं।

    2022 का विधानसभा चुनाव: उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी से 7 मार्च तक मतदान हुआ था। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 24 मार्च से शुरू हुई थीं। इस साल भी चुनाव और बोर्ड परीक्षाओं के कार्यक्रम के बीच अंतर रखा गया था।

    इन तीनों चुनावों में मतदान की प्रक्रिया बोर्ड परीक्षाओं से पहले पूरी हुई थी। इसी पुराने पैटर्न के आधार पर कुछ लोग अनुमान लगा रहे हैं कि 2027 में भी चुनाव और बोर्ड परीक्षाओं के बीच

  • कंजूस कहने पर जैन: व्यापारी ने बना दिया अनोखा मंदिर! राजस्थान की इस धरोहर में लगा था 40 हजार किलो घी

    कंजूस कहने पर जैन: व्यापारी ने बना दिया अनोखा मंदिर! राजस्थान की इस धरोहर में लगा था 40 हजार किलो घी

    कंजूस कहने पर जैन: व्यापारी ने बना दिया अनोखा मंदिर! राजस्थान की इस धरोहर में लगा था 40 हजार किलो घी

    राजस्थान: किसी ने कंजूस कहकर मजाक उड़ाया, तो एक अमीर जैन व्यापारी ने ऐसा कदम उठाया कि उनकी कहानी सदियों बाद भी लोगों को हैरान करती है। राजस्थान के बीकानेर में स्थित भांडाशाह जैन मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसके निर्माण में पानी की जगह करीब 40 हजार किलो देसी घी का इस्तेमाल किया गया था। लगभग 550 साल पुराने इस मंदिर की कहानी जितनी अनोखी है, इसकी कलाकारी और बनावट भी उतनी ही आकर्षक है।

    आमतौर पर किसी इमारत को बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले मसाले में पानी मिलाया जाता है। लेकिन बीकानेर के इस ऐतिहासिक जैन मंदिर से जुड़ी लोककथा में घी के इस्तेमाल का जिक्र मिलता है। कहा जाता है कि व्यापारी भांडाशाह ने अपने मंदिर के निर्माण में घी का इस्तेमाल कराकर सबको चौंका दिया था।

    कैसे शुरू हुई मंदिर के निर्माण की कहानी?

    भांडाशाह जैन मंदिर राजस्थान के बीकानेर में स्थित है। यह मंदिर भगवान सुमतिनाथ को समर्पित है, जिन्हें जैन धर्म का पांचवां तीर्थंकर माना जाता है। मंदिर के निर्माण का संबंध 15वीं सदी से बताया जाता है। इसका निर्माण भांडाशाह नाम के एक धनी ओसवाल जैन व्यापारी ने करवाया था।

    उस दौर में बीकानेर और आसपास के रेगिस्तानी इलाकों में पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती थी। ऐसे वातावरण में मंदिर निर्माण और उससे जुड़ी परंपराओं को लेकर कई रोचक कथाएं प्रचलित हुईं। इन्हीं में से एक कथा मंदिर के निर्माण में देसी घी के इस्तेमाल से जुड़ी है।

    स्थानीय मान्यता के अनुसार, मंदिर के निर्माण में करीब 40 हजार किलो घी इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, इस मात्रा और निर्माण से जुड़ी पूरी कहानी को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य के बजाय प्रचलित मान्यता के रूप में समझना चाहिए।

    कंजूस कहने पर व्यापारी ने लिया बड़ा फैसला?

    इस मंदिर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाया जाता है। कहा जाता है कि एक बार व्यापारी भांडाशाह ने जमीन पर गिरी घी की एक बूंद को बचाने की कोशिश की। इसे देखकर निर्माण कार्य से जुड़े एक व्यक्ति ने उनका मजाक उड़ाया और उन्हें कंजूस कह दिया।

    कहानी के मुताबिक, यह बात व्यापारी को इतनी बुरी लगी कि उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया। इसके बाद उन्होंने मंदिर के निर्माण में पानी की जगह घी का इस्तेमाल कराने का फैसला किया और बड़ी मात्रा में घी उपलब्ध कराया।

    यह किस्सा सुनने में भले ही किसी फिल्म की कहानी जैसा लगे, लेकिन यही लोककथा मंदिर को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ाती है। ध्यान रहे कि इस घटना के सभी विवरणों की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

    मंदिर की खूबसूरत कलाकारी कर देती है हैरान

    भांडाशाह जैन मंदिर सिर्फ अपनी अनोखी निर्माण-कथा के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी स्थापत्य कला के लिए भी जाना जाता है। मंदिर में लाल और पीले रंग के पत्थरों का इस्तेमाल हुआ है। इसकी बनावट और अंदर की सजावट राजस्थान की पारंपरिक कला की झलक पेश करती है।

    मंदिर की दीवारों और छतों पर खूबसूरत चित्रकारी, सजावटी आकृतियां और बारीक नक्काशी देखने को मिलती है। यहां की कलाकारी में बीकानेर की प्रसिद्ध उस्ता कला का प्रभाव भी दिखाई देता है। इस कला में सतहों पर बारीक सजावट और सुनहरे रंगों का विशेष महत्व रहा है।

    मंदिर की दीवारों पर जैन धर्म से जुड़ी धार्मिक आकृतियां और चित्र इसे आध्यात्मिक महत्व के साथ-साथ कलात्मक दृष्टि से भी खास बनाते हैं। इसकी सजावट देखने के लिए दूर-दूर से लोग बीकानेर पहुंचते हैं।

    क्या आज भी दीवारों से आती है घी की महक?

    मंदिर से जुड़ी कुछ लोकप्रिय कहानियों में दावा किया जाता है कि गर्मियों के दौरान इसकी दीवारों या फर्श से घी जैसी महक महसूस होती है। लेकिन इस दावे की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती। इसलिए इसे प्रमाणित तथ्य की तरह पेश करना सही नहीं होगा।

    इसी तरह, निर्माण में 40 हजार किलो घी इस्तेमाल किए जाने की बात भी मुख्य रूप से प्रचलित मान्यता और लोककथा के रूप में सामने आती है। मंदिर की ऐतिहासिकता, इसकी स्थापत्य कला और धार्मिक महत्व को इन कथाओं से अलग समझना जरूरी है।

    बीकानेर की ऐतिहासिक धरोहर है यह मंदिर

    राजस्थान अपनी हवेलियों, किलों, मंदिरों और समृद्ध कला परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। भांडाशाह जैन मंदिर भी बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसकी धार्मिक पहचान भगवान सुमतिनाथ से जुड़ी है, जबकि इसकी अनोखी निर्माण-कथा इसे आम लोगों के बीच विशेष लोकप्रियता दिलाती है।

    यह मंदिर दिखाता है कि किसी ऐतिहासिक धरोहर की पहचान केवल उसकी इमारत से नहीं बनती, बल्कि उससे जुड़ी परंपराएं, लोककथाएं और कला भी उसे खास बनाती हैं। घी के इस्तेमाल की कहानी को लेकर भले ही ऐतिहासिक पुष्टि की सीमाएं हों, लेकिन मंदिर की कलाकारी और धार्मिक महत्व इसे राजस्थान की उल्लेखनीय धरोहरों में शामिल करते हैं।

    डिस्क्लेमर: मंदिर में 40 हजार किलो घी के इस्तेमाल और व्यापारी से जुड़ा किस्सा प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है। इन दावों की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की गई है।

  • छोटे भाई के सामने मासूम बच्ची से दुष्कर्म, बिहार की घटना से इलाके में आक्रोश.

    छोटे भाई के सामने मासूम बच्ची से दुष्कर्म, बिहार की घटना से इलाके में आक्रोश.

    छोटे भाई के सामने मासूम बच्ची से दुष्कर्म, बिहार की घटना से इलाके में आक्रोश.

    खगड़िया: बिहार के खगड़िया जिले के मानसी थाना क्षेत्र में एक नाबालिग बच्ची के साथ यौन हिंसा का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि खेत के पास बकरी चरा रही बच्ची को पड़ोस में रहने वाला एक नाबालिग लड़का सुनसान जगह पर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के समय बच्ची का छोटा भाई भी वहां मौजूद था। उसने घर पहुंचकर परिजनों को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है।

    खेत के पास बकरी चरा रही थी बच्ची

    मिली जानकारी के अनुसार, बच्ची घर से कुछ दूरी पर खेत की तरफ बकरी चरा रही थी। उसके साथ उसका छोटा भाई भी था। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला एक नाबालिग लड़का वहां पहुंचा। आरोप है कि वह बच्ची को खींचकर एक सुनसान जगह पर ले गया और उसके साथ यौन हिंसा की।

    घटना के दौरान बच्ची का छोटा भाई वहीं मौजूद था। बताया गया कि वह घबरा गया और वहां से घर पहुंचकर अपने परिजनों को पूरी बात बताई। जानकारी मिलते ही परिवार के लोग खेत की ओर पहुंचे और बच्ची की तलाश शुरू की।

    घायल हालत में मिली बच्ची, अस्पताल में इलाज जारी

    परिजनों को बच्ची कुछ समय बाद घायल हालत में मिली। वे उसे घर लेकर आए और फिर पुलिस को सूचना दी। मामले की जानकारी मिलने पर मानसी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

    पुलिस ने बच्ची को चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल भेजा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बच्ची का इलाज चल रहा है और डॉक्टरों ने उसकी हालत खतरे से बाहर बताई है।

    आरोपी नाबालिग हिरासत में

    खगड़िया के पुलिस अधीक्षक पुष्कर आनंद के मुताबिक, मामले में आरोपित लड़का भी नाबालिग है। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

    इस मामले में पॉक्सो अधिनियम के तहत केस दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच के दौरान पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की पड़ताल कर रही है।

    गांव में नाराजगी, बच्ची की सुरक्षा पर चिंता

    घटना की जानकारी सामने आने के बाद गांव में आक्रोश बताया जा रहा है। स्थानीय लोग मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ऐसी घटनाएं बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

    मामले में पीड़िता की पहचान और निजता की रक्षा करना बेहद जरूरी है। नाबालिग से जुड़े यौन अपराधों के मामलों में कानून भी पीड़ित बच्चे की पहचान सार्वजनिक करने पर रोक लगाता है।

    डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचार जानकारी और पुलिस के बयान पर आधारित है। मामले की जांच जारी है; आरोपों से जुड़े अंतिम निष्कर्ष कानूनी प्रक्रिया के तहत तय होंगे।

  • मेरठ: 8 दिन के बेटे के साथ मां की दर्दनाक मौत, गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक ने बाइक को कुचला; पति बचा, ग्रामीणों ने लगाया जाम.

    मेरठ: 8 दिन के बेटे के साथ मां की दर्दनाक मौत, गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक ने बाइक को कुचला; पति बचा, ग्रामीणों ने लगाया जाम.

    मेरठ: 8 दिन के बेटे के साथ मां की दर्दनाक मौत, गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक ने बाइक को कुचला; पति बचा, ग्रामीणों ने लगाया जाम.

    मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के लावड़ कस्बे में एक दर्दनाक सड़क हादसे में मां और उसके महज आठ दिन के नवजात बेटे की मौत हो गई। परिवार बच्चे को पीलिया की दवा दिलाकर बाइक से घर लौट रहा था। इसी दौरान गैस सिलेंडरों से लदे ट्रक की चपेट में आने से यह हादसा हो गया। दुर्घटना में महिला का पति बाल-बाल बच गया। मां और नवजात की मौत से इलाके में शोक फैल गया, वहीं आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर विरोध जताया।

    दवा दिलाकर लौट रहा था परिवार

    यह हादसा दौराला-मसूरी मार्ग पर लावड़ की सब्जी मंडी के पास काली माता मंदिर के सामने हुआ। जानकारी के अनुसार, महल गांव निवासी संजय सैनी अपनी पत्नी प्रिया और आठ दिन के बेटे को पीलिया की दवा दिलाने के लिए लावड़ आए थे।

    दवा दिलाने के बाद तीनों बाइक से घर लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी बाइक गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक की चपेट में आ गई। टक्कर लगने के बाद बाइक सवार सड़क पर गिर गए। बताया गया कि ट्रक का पहिया प्रिया और नवजात बच्चे के ऊपर से गुजर गया, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

    इस हादसे में संजय की जान बच गई, लेकिन पत्नी और नवजात बेटे को खोने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

    मां-बेटे की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने लगाया जाम

    हादसे की खबर फैलते ही घटनास्थल पर ग्रामीणों और राहगीरों की भीड़ जुट गई। मां और बच्चे की मौत से नाराज लोगों ने सड़क पर जाम लगा दिया। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने मामले में कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की।

    शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने के दौरान भी विरोध की स्थिति बनी रही। सड़क जाम होने के कारण मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हुआ।

    ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद देने के साथ परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग भी उठाई।

    एंबुलेंस के शीशे तोड़े जाने की सूचना

    हादसे के बाद घटनास्थल पर लोगों का आक्रोश बढ़ गया। इस दौरान एंबुलेंस में तोड़फोड़ किए जाने और उसके शीशे तोड़े जाने की सूचना भी सामने आई। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाने और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

    ट्रक चालक हिरासत में, पुलिस कर रही जांच

    दुर्घटना के बाद ट्रक चालक के मौके से भागने की कोशिश करने की बात सामने आई, लेकिन उसे पकड़ लिया गया। पुलिस ने चालक को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। मां और नवजात के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

    पुलिस हादसे के कारणों और घटनाक्रम की जांच कर रही है। दुर्घटना की पूरी परिस्थितियां जांच के बाद स्पष्ट होंगी। ग्रामीणों की मांग है कि पीड़ित परिवार को उचित सहायता दी जाए और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। हादसे से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदारी की पुष्टि पुलिस जांच तथा आधिकारिक जानकारी के आधार पर की जानी चाहिए।

  • क्या 120W फास्ट चार्जिंग से खराब हो जाती है फोन की बैटरी? जानिए कितनी सुरक्षित है यह तकनीक और कैसे बढ़ाएं बैटरी की उम्र

    क्या 120W फास्ट चार्जिंग से खराब हो जाती है फोन की बैटरी? जानिए कितनी सुरक्षित है यह तकनीक और कैसे बढ़ाएं बैटरी की उम्र

    क्या 120W फास्ट चार्जिंग से खराब हो जाती है फोन की बैटरी? जानिए कितनी सुरक्षित है यह तकनीक और कैसे बढ़ाएं बैटरी की उम्र

    आजकल स्मार्टफोन में फास्ट चार्जिंग एक आम सुविधा बन गई है। कई कंपनियां 67W, 90W और यहां तक कि 120W तक की चार्जिंग तकनीक वाले फोन बाजार में उतार रही हैं। इसकी मदद से फोन को कम समय में चार्ज किया जा सकता है। लेकिन तेज चार्जिंग के साथ लोगों के मन में एक सवाल भी उठता है—क्या 120W का चार्जर इस्तेमाल करने से फोन की बैटरी जल्दी खराब हो जाती है?

    इसका जवाब है कि सिर्फ 120W फास्ट चार्जिंग होने का मतलब यह नहीं है कि फोन की बैटरी जरूर खराब होगी। बैटरी की उम्र पर तापमान, चार्जिंग की आदतें, बैटरी की गुणवत्ता और फोन में इस्तेमाल की गई तकनीक का भी असर पड़ता है। सही चार्जर और उचित सावधानियों के साथ फास्ट चार्जिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    कैसे काम करती है 120W फास्ट चार्जिंग?

    सामान्य चार्जिंग की तुलना में फास्ट चार्जिंग तकनीक फोन की बैटरी तक अधिक तेजी से ऊर्जा पहुंचाने के लिए बनाई जाती है। इसके लिए फोन, चार्जर और चार्जिंग सर्किट के बीच तालमेल जरूरी होता है।

    हालांकि, 120W लिखा होने का मतलब यह नहीं है कि फोन पूरी चार्जिंग प्रक्रिया के दौरान लगातार 120 वॉट बिजली लेता रहेगा। वास्तविक चार्जिंग पावर फोन की स्थिति, बैटरी के तापमान और चार्ज के स्तर के अनुसार बदलती रहती है। बैटरी का स्तर बढ़ने पर चार्जिंग की गति आमतौर पर कम हो जाती है, ताकि उसे सुरक्षित तरीके से चार्ज किया जा सके।

    यही वजह है कि अलग-अलग कंपनियों के 120W चार्जिंग वाले फोन का वास्तविक चार्जिंग समय एक जैसा नहीं होता।

    क्या तेज चार्जिंग से बैटरी की सेहत पर असर पड़ता है?

    स्मार्टफोन में आमतौर पर लिथियम-आयन या लिथियम-पॉलिमर बैटरी इस्तेमाल की जाती है। समय के साथ इन बैटरियों की क्षमता कम होना स्वाभाविक है। इसे बैटरी का पुराना होना या उसकी सेहत में गिरावट आना कहा जाता है।

    तेज चार्जिंग के दौरान बैटरी में गर्मी पैदा हो सकती है। यदि बैटरी बार-बार बहुत अधिक तापमान पर रहती है, तो उसकी क्षमता घटने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी बैटरी के लिए नुकसानदायक होती है।

    लेकिन आधुनिक स्मार्टफोन में तापमान की निगरानी, चार्जिंग पावर को नियंत्रित करने और बैटरी की सुरक्षा के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं होती हैं। कुछ फोन में दोहरी बैटरी और विशेष चार्जिंग तकनीक भी इस्तेमाल की जाती है।

    इसलिए केवल चार्जर की वॉट क्षमता देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि बैटरी कितनी जल्दी खराब होगी। फोन का डिजाइन और कंपनी की चार्जिंग तकनीक भी महत्वपूर्ण हैं।

    क्या 120W चार्जिंग से बैटरी सिर्फ 800 साइकल तक चलती है?

    बैटरी के बारे में अक्सर 800 चार्जिंग साइकल का आंकड़ा बताया जाता है, लेकिन इसे सभी स्मार्टफोन पर लागू नहीं किया जा सकता। अलग-अलग बैटरियों की क्षमता, निर्माण गुणवत्ता और परीक्षण मानक अलग होते हैं।

    चार्जिंग साइकल का अर्थ हर बार चार्जर लगाने से नहीं है। उदाहरण के लिए, यदि आप एक बार बैटरी की कुल क्षमता का 50 प्रतिशत इस्तेमाल करते हैं और बाद में दोबारा 50 प्रतिशत इस्तेमाल करते हैं, तो यह कुल मिलाकर लगभग एक पूरा चार्जिंग साइकल माना जा सकता है।

    किसी फोन की बैटरी कितने साइकल के बाद अपनी मूल क्षमता का कितना हिस्सा बनाए रखेगी, यह उसके मॉडल और निर्माता की निर्धारित शर्तों पर निर्भर करता है। इसलिए 120W चार्जिंग वाले हर फोन की बैटरी 800 साइकल तक ही ठीक रहेगी, ऐसा कहना सही नहीं है।

    फोन की बैटरी लंबे समय तक चलाने के 6 आसान तरीके

    1. फोन के अनुकूल चार्जर इस्तेमाल करें

    फोन के साथ मिलने वाले या निर्माता द्वारा प्रमाणित चार्जर और केबल का इस्तेमाल करें। केवल सस्ते चार्जर पर भरोसा न करें, खासकर यदि उसकी सुरक्षा और गुणवत्ता की जानकारी उपलब्ध न हो।

    2. फोन को ज्यादा गर्म न होने दें

    चार्जिंग के दौरान फोन बहुत गर्म हो रहा हो, तो भारी गेम खेलने या लंबे समय तक ज्यादा संसाधन इस्तेमाल करने वाले काम से बचें। यदि गर्मी असामान्य लगे, तो चार्जिंग रोककर फोन को सामान्य तापमान पर आने दें।

    3. हर बार बैटरी को शून्य तक न पहुंचाएं

    फोन को बार-बार पूरी तरह डिस्चार्ज करके बंद होने देना जरूरी नहीं है। सामान्य इस्तेमाल में बैटरी का स्तर बहुत कम होने से पहले चार्ज करना एक व्यावहारिक आदत है।

    4. 20 से 80 प्रतिशत का नियम समझें

    बैटरी को लगभग 20 से 80 प्रतिशत के बीच रखना कई परिस्थितियों में उसकी लंबी उम्र के लिए मददगार हो सकता है। हालांकि, हर बार इसी सीमा का पालन करना जरूरी नहीं है। जरूरत पड़ने पर फोन को पूरी तरह चार्ज करना भी सामान्य है।

    5. चार्जिंग के दौरान गर्मी बढ़ाने वाली चीजों से बचें

    फोन को धूप में, गर्म जगह पर या ऐसी सतह पर रखकर चार्ज न करें जहां गर्मी बाहर निकलने में परेशानी हो। यदि फोन गर्म हो रहा हो, तो मोटा कवर हटाने से कुछ स्थितियों में मदद मिल सकती है।

    6. बैटरी प्रोटेक्शन फीचर चालू करें

    कई स्मार्टफोन में ऑप्टिमाइज्ड चार्जिंग, बैटरी प्रोटेक्शन या चार्जिंग लिमिट जैसे विकल्प मिलते हैं। अपने फोन में उपलब्ध सुविधा के अनुसार इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

    क्या रातभर फोन चार्ज करना गलत है?

    आधुनिक स्मार्टफोन बैटरी पूरी होने पर चार्जिंग को नियंत्रित करते हैं। इसलिए रातभर चार्जर से जुड़ा रहने का अर्थ यह नहीं है कि बैटरी लगातार पूरी ताकत से चार्ज होती रहेगी। फिर भी फोन को लंबे समय तक गर्म वातावरण में चार्ज करना उचित नहीं है।

    यदि आपके फोन में चार्जिंग लिमिट या ऑप्टिमाइज्ड चार्जिंग की सुविधा है, तो उसे चालू करना उपयोगी हो सकता है। रात में चार्ज करते समय फोन को तकिए या बिस्तर के नीचे रखने से भी बचें, क्योंकि इससे गर्मी जमा हो सकती है।

    कब फास्ट चार्जिंग से बचना बेहतर है?

    यदि फोन चार्जिंग के दौरान असामान्य रूप से गर्म हो रहा है, बार-बार तापमान की चेतावनी दे रहा है या चार्जिंग में कोई गड़बड़ी दिखाई दे रही है, तो समस्या को नजरअंदाज न करें। चार्जर और केबल की जांच करें तथा जरूरत पड़ने पर अधिकृत सर्विस सेंटर से सहायता लें।

    यदि आपके फोन में धीमी चार्जिंग का विकल्प है और आपको तुरंत चार्जिंग की जरूरत नहीं है, तो उसका इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, धीमी चार्जिंग हर स्थिति में बैटरी की उम्र बढ़ाएगी, इसकी गारंटी नहीं है—तापमान और चार्जिंग की कुल आदतें भी महत्वपूर्ण हैं।

    आखिर 120W चार्जर इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं?

    यदि आपका स्मार्टफोन 120W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है और आप उसके अनुकूल, प्रमाणित चार्जर का इस्तेमाल करते हैं, तो सामान्य परिस्थितियों में इस सुविधा का उपयोग किया जा सकता है। केवल ज्यादा वॉट होने के कारण चार्जर को बैटरी के लिए नुकसानदायक मानना सही नहीं है।

    बैटरी की उम्र लंबे समय तक बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी है कि फोन को अत्यधिक गर्म होने से बचाया जाए, अच्छी गुणवत्ता वाले चार्जिंग उपकरण इस्तेमाल किए जाएं और निर्माता के निर्देशों का पालन किया जाए।

    महत्वपूर्ण सूचना: बैटरी की उम्र और चार्जिंग की गति फोन के मॉडल, बैटरी तकनीक और इस्तेमाल की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। किसी विशेष फोन के लिए निर्माता की आधिकारिक सलाह को प्राथमिकता दें।

  • लाल मिर्च के कारोबार में 90: दिन में पैसा डबल? अनाज मंडी के व्यापारी ने बताया कमाई का पूरा खेल

    लाल मिर्च के कारोबार में 90: दिन में पैसा डबल? अनाज मंडी के व्यापारी ने बताया कमाई का पूरा खेल

    लाल मिर्च के कारोबार में 90: दिन में पैसा डबल? अनाज मंडी के व्यापारी ने बताया कमाई का पूरा खेल

    लाल मिर्च के कारोबार में 90 दिन में पैसा डबल? अनाज मंडी के व्यापारी ने बताया कमाई का पूरा खेल

    लाल मिर्च का इस्तेमाल लगभग हर भारतीय रसोई में होता है। इसी वजह से मसालों के कारोबार में इसकी मांग बनी रहती है। अब लाल मिर्च के व्यापार को लेकर 90 दिनों में पैसा दोगुना करने का दावा चर्चा में है। अनाज मंडी के एक व्यापारी के हवाले से इस कारोबार में मुनाफे के तरीके और बाजार की संभावनाओं की बात सामने आई है।

    लाल मिर्च के कारोबार में कैसे होता है मुनाफा?

    लाल मिर्च का व्यापार किसानों, थोक कारोबारियों, मसाला निर्माताओं और खुदरा दुकानदारों से जुड़ा होता है। व्यापारी मंडियों से मिर्च खरीदकर उसकी गुणवत्ता, किस्म और बाजार की मांग के अनुसार आगे बिक्री करते हैं। खरीद और बिक्री के भाव में अंतर से कमाई होती है।

    हालांकि, मुनाफा केवल सस्ती मिर्च खरीदने पर निर्भर नहीं करता। मिर्च की गुणवत्ता, नमी, रंग, तीखापन, भंडारण और परिवहन की लागत भी कारोबार की कमाई को प्रभावित करती है।

    क्या 90 दिन में पैसा दोगुना हो सकता है?

    कारोबार में 90 दिनों के भीतर पैसा दोगुना होने का दावा आकर्षक लग सकता है, लेकिन इसे हर व्यापारी या निवेशक के लिए निश्चित कमाई नहीं माना जा सकता। कृषि उपज के दाम मौसम, उत्पादन, मांग और आपूर्ति के कारण बदलते रहते हैं।

    अगर खरीद के बाद बाजार भाव गिर जाए, माल खराब हो जाए या बिक्री में देरी हो, तो नुकसान भी हो सकता है। इसलिए कारोबार शुरू करने से पहले लागत, संभावित बिक्री मूल्य और जोखिम का हिसाब लगाना जरूरी है।

    कारोबार शुरू करने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

    लाल मिर्च का व्यापार शुरू करने की योजना बना रहे लोगों को कुछ जरूरी पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए:

    • मंडी भाव: अलग-अलग मंडियों में मिर्च की किस्म और गुणवत्ता के अनुसार कीमतों की तुलना करें।
    • माल की गुणवत्ता: नमी, रंग, तीखापन और भंडारण की स्थिति जांचें।
    • खर्च का हिसाब: खरीद, ढुलाई, मजदूरी, पैकिंग और भंडारण की लागत जोड़ें।
    • खरीदारों की उपलब्धता: पहले से थोक व्यापारियों, मसाला निर्माताओं या दुकानदारों से संपर्क बनाएं।
    • जोखिम का आकलन: केवल तेजी की उम्मीद में बड़ी मात्रा में माल खरीदने से बचें।

    सही जानकारी और बाजार की समझ है जरूरी

    लाल मिर्च का कारोबार कमाई का अवसर दे सकता है, लेकिन इसमें लाभ की कोई गारंटी नहीं है। सफल व्यापार के लिए बाजार की जानकारी, सही गुणवत्ता की पहचान, पूंजी का प्रबंधन और भरोसेमंद खरीदारों का नेटवर्क जरूरी है।

     

     

     

    डिस्क्लेमर: 90 दिनों में पैसा दोगुना होने का दावा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है। वास्तविक मुनाफा बाजार की परिस्थितियों, लागत और बिक्री मूल्य पर निर्भर करता है।

  • रजनीकांत: 75 साल की उम्र में भी खुद को बस कंडक्टर मानते हैं सुपरस्टार, खाकी वर्दी देखकर आज भी हो जाते हैं भावुक

    रजनीकांत: 75 साल की उम्र में भी खुद को बस कंडक्टर मानते हैं सुपरस्टार, खाकी वर्दी देखकर आज भी हो जाते हैं भावुक

    रजनीकांत: 75 साल की उम्र में भी खुद को बस कंडक्टर मानते हैं सुपरस्टार, खाकी वर्दी देखकर आज भी हो जाते हैं भावुक

    साउथ सिनेमा के सुपरस्टार रजनीकांत आज 75 साल की उम्र में भी फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभा रहे हैं। उनकी आने वाली फिल्म ‘जेलर 2’ को लेकर प्रशंसकों में काफी उत्साह है। इस बीच अभिनेता ने अपने पुराने दिनों, सिनेमा के प्रति लगाव और जिंदगी से मिली सीख के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि आज भी वह खुद को दिल से बस कंडक्टर ही मानते हैं और अपनी पुरानी नौकरी को याद करते हैं।

    रजनीकांत की जिंदगी किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं है। फिल्मों में बड़ा मुकाम हासिल करने से पहले उन्होंने बेंगलुरु में बस कंडक्टर के रूप में काम किया था। शोहरत और सफलता मिलने के बावजूद वह अपने पुराने दिनों को नहीं भूले हैं। हाल ही में ‘जेलर 2’ से जुड़े एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि कंडक्टर के रूप में बिताए पांच साल आज भी उनके दिल के बेहद करीब हैं।

    अभिनय से प्यार, लेकिन बस कंडक्टर की नौकरी की याद भी आती है

    रजनीकांत ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि उन्हें अभिनय से बहुत प्यार है, लेकिन बस कंडक्टर के रूप में बिताया समय भी उनके लिए बेहद खास था। उन्होंने बताया कि उस नौकरी के दौरान बिताए पांच साल शानदार रहे और आज भी उन्हें उन दिनों की याद आती है।

    अभिनेता के मुताबिक, वह भले ही दुनिया भर में सुपरस्टार के नाम से पहचाने जाते हों, लेकिन अंदर से खुद को अब भी एक साधारण बस कंडक्टर ही मानते हैं। उनके लिए पुरानी नौकरी सिर्फ रोजी-रोटी का जरिया नहीं, बल्कि जिंदगी का एक ऐसा हिस्सा है, जिससे उनका भावनात्मक जुड़ाव आज भी बना हुआ है।

    उन्होंने बताया कि वह कभी-कभी बेंगलुरु जाते हैं और उस बस को देखकर खुश होते हैं, जिसमें कभी उन्होंने काम किया था। खाकी वर्दी देखने पर वह भावुक हो जाते हैं और उनकी आंखों में आंसू तक आ जाते हैं।

    रजनीकांत की यह बात बताती है कि इंसान कितनी भी बड़ी सफलता हासिल कर ले, अपने संघर्ष और पुराने दिनों को याद रखना उसके लिए कितना मायने रखता है।

    75 साल की उम्र में भी मुख्य भूमिकाएं निभाने का राज

    रजनीकांत ने इस उम्र में भी फिल्मों में लीड रोल करने का श्रेय अपने प्रशंसकों को दिया। उन्होंने कहा कि तमिल दर्शकों का प्यार और समर्थन ही उन्हें लगातार काम करने की प्रेरणा देता है।

    अभिनेता ने भावुक अंदाज में कहा कि कई लोग उनसे पूछते हैं कि 75 साल की उम्र में भी वह मुख्य भूमिकाएं कैसे निभा रहे हैं। उनके मुताबिक, यह सब प्रशंसकों की बदौलत संभव है, जिन्हें वह भगवान के समान मानते हैं।

    उन्होंने कहा कि दर्शकों के समर्थन की वजह से ही बड़े प्रोडक्शन हाउस उनके साथ काम करने के लिए आगे आते हैं और निर्देशक नेल्सन जैसे फिल्मकार उनके साथ परियोजनाएं बनाते हैं। रजनीकांत ने प्रशंसकों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि वह उनके प्यार का कर्ज कैसे चुकाएं।

    उनकी बातों से साफ झलकता है कि वह अपनी सफलता को केवल अपनी उपलब्धि नहीं मानते, बल्कि उसमें दर्शकों के योगदान को भी अहम मानते हैं।

    काम को बोझ नहीं, खेल की तरह लें

    रजनीकांत ने काम को लेकर अपना नजरिया भी साझा किया। उनका मानना है कि जब इंसान अपने काम से प्यार करने लगता है, तो वही काम उसे बोझ लगने के बजाय आनंद देने लगता है।

    उन्होंने समझाया कि किसी काम को केवल जिम्मेदारी मानकर करने के बजाय उसे खेल की तरह लेना चाहिए। जिस तरह लोग खेलते समय थकान या समय की परवाह कम करते हैं, उसी तरह अपने पसंदीदा काम में भी मन लगाकर काम किया जा सकता है।

    अभिनेता ने कहा कि उन्हें सिनेमा से बहुत प्यार है। यही वजह है कि फिल्मी दुनिया में काम करना उनके लिए केवल पेशा नहीं, बल्कि जुनून भी है।

    उनकी यह सीख सिर्फ फिल्मी दुनिया तक सीमित नहीं है। किसी भी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए अपने काम में रुचि और लगन बनाए रखना प्रेरणा का स्रोत हो सकता है।

    के. बालाचंदर की सीख आज भी याद रखते हैं रजनीकांत

    रजनीकांत ने अपने गुरु और दिग्गज निर्देशक के. बालाचंदर को भी याद किया। उन्होंने बताया कि बालाचंदर ने उन्हें अभिनय को गंभीरता से लेने और अपने किरदार को गहराई से समझने की सीख दी थी।

    उनके अनुसार, किसी फिल्म के लिए हामी भरने के बाद कलाकार की जिम्मेदारी केवल शूटिंग के समय अभिनय करना नहीं होती। उसे अपने किरदार के बारे में लगातार सोचना चाहिए, ताकि वह उस भूमिका को बेहतर तरीके से समझ सके।

    रजनीकांत ने बताया कि जब वह और कमल हासन के. बालाचंदर के निर्देशन में काम करते थे, तो निर्देशक उनकी गलतियों पर ध्यान देते थे। अगर अभिनय करते समय कोई कलाकार बिना सोचे कुछ कर देता था, तो बालाचंदर उससे सवाल करते और समझाते थे कि किरदार की प्रकृति को समझना कितना जरूरी है।

    रजनीकांत के मुताबिक, किसी किरदार में पूरी तरह डूबने के लिए उसके व्यवहार, सोच और परिस्थितियों को समझना जरूरी है। यही सीख उनके अभिनय सफर का अहम हिस्सा रही है।

    सकारात्मक सोच को जिंदगी का जरूरी हिस्सा मानते हैं अभिनेता

    रजनीकांत ने बातचीत के दौरान सकारात्मक सोच के महत्व पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि इंसान के विचार उसके व्यवहार और नजरिए को प्रभावित करते हैं। इसलिए परिस्थितियां कैसी भी

  • हार्ट अटैक का खतरा कम: करने के लिए अपनाएं ये 10 आदतें, खराब खानपान से लेकर स्मोकिंग तक दिल की धमनियों को पहुंच सकता है नुकसान

    हार्ट अटैक का खतरा कम: करने के लिए अपनाएं ये 10 आदतें, खराब खानपान से लेकर स्मोकिंग तक दिल की धमनियों को पहुंच सकता है नुकसान

    हार्ट अटैक का खतरा कम: करने के लिए अपनाएं ये 10 आदतें, खराब खानपान से लेकर स्मोकिंग तक दिल की धमनियों को पहुंच सकता है नुकसान

    आजकल कम उम्र में भी हार्ट अटैक के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। इसकी वजहों में खराब खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल शामिल हो सकते हैं। कई बार दिल की धमनियों में समस्या लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ती रहती है और गंभीर स्थिति पैदा होने पर ही इसका पता चलता है।

    कार्डियोलॉजिस्ट और साओल हार्ट सेंटर के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. बिमल छाजer ने दिल की सेहत के लिए खानपान और जीवनशैली पर ध्यान देने की जरूरत बताई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और समय पर स्वास्थ्य जांच हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

    हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हार्ट अटैक का कारण सिर्फ खराब डाइट नहीं है। इसके पीछे कई जोखिम कारक हो सकते हैं। आइए जानते हैं दिल को स्वस्थ रखने और हार्ट अटैक का खतरा कम करने के लिए किन 10 बातों का ध्यान रखना चाहिए।

    1. कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर रखें नजर

    खून में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने पर धमनियों की दीवारों में प्लाक जमा हो सकता है। इससे धमनियां संकरी हो सकती हैं और दिल तक खून पहुंचने में परेशानी पैदा हो सकती है।

    कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित आहार लें, नियमित शारीरिक गतिविधि करें और डॉक्टर की सलाह पर लिपिड प्रोफाइल टेस्ट करवाएं। अगर कोलेस्ट्रॉल ज्यादा है, तो केवल खानपान पर निर्भर न रहें। कुछ लोगों को दवाओं की भी जरूरत पड़ सकती है।

    2. ट्राइग्लिसराइड बढ़ाने वाली आदतों से बचें

    ट्राइग्लिसराइड खून में पाया जाने वाला एक प्रकार का फैट है। इसका स्तर बढ़ना, खासकर कम HDL या ज्यादा LDL कोलेस्ट्रॉल के साथ, हृदय रोगों के जोखिम से जुड़ा हो सकता है।

    अधिक मात्रा में मीठे पेय, मिठाइयां, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और कैलोरी से भरपूर प्रोसेस्ड फूड खाने से ट्राइग्लिसराइड बढ़ सकता है। इसे नियंत्रित रखने के लिए चीनी का सेवन सीमित करें, साबुत अनाज और फाइबर वाले खाद्य पदार्थ चुनें तथा जरूरत के अनुसार वजन नियंत्रित करें।

    3. रोजाना टहलें और नियमित व्यायाम करें

    शारीरिक गतिविधि दिल की सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। नियमित व्यायाम ब्लड प्रेशर, वजन और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है।

    स्वस्थ वयस्कों के लिए सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाला व्यायाम, जैसे तेज चलना, एक सामान्य लक्ष्य है। आप इसे सप्ताह के अलग-अलग दिनों में बांट सकते हैं। शुरुआत धीरे-धीरे करें और अपनी क्षमता के अनुसार गतिविधि बढ़ाएं।

    अगर आपको पहले से हृदय रोग है या व्यायाम के दौरान सीने में दर्द, सांस फूलने या चक्कर आने की समस्या होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही व्यायाम करें।

    4. योग और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करें

    योग और सांस से जुड़े अभ्यास तनाव कम करने, मन को शांत रखने और कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। इन्हें हल्की शारीरिक गतिविधि और संतुलित जीवनशैली के साथ अपनाया जा सकता है।

    ध्यान रखें कि योग या प्राणायाम धमनियों में जमा प्लाक को हटाने या हार्ट अटैक को पूरी तरह रोकने का प्रमाणित विकल्प नहीं हैं। इन्हें डॉक्टर की सलाह, जरूरी दवाओं और अन्य स्वस्थ आदतों के साथ ही अपनाएं।

    5. तनाव को संभालने के तरीके सीखें

    लंबे समय तक तनाव रहने से नींद, खानपान, ब्लड प्रेशर और रोजमर्रा की आदतें प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी दिल की देखभाल का हिस्सा है।

    तनाव कम करने के लिए नियमित नींद लें, टहलें, पसंदीदा गतिविधियों के लिए समय निकालें और भरोसेमंद लोगों से बातचीत करें। ध्यान या योग भी कुछ लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

    अगर तनाव लगातार बना रहता है या दैनिक जीवन प्रभावित होने लगता है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेने में संकोच न करें।

    6. गुस्से और भावनात्मक तनाव को नजरअंदाज न करें

    बार-बार तीव्र गुस्सा या भावनात्मक तनाव होने पर शरीर में अस्थायी शारीरिक बदलाव हो सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में तीव्र भावनात्मक तनाव हृदय संबंधी घटनाओं का जोखिम भी बढ़ा सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से हृदय रोग है।

    गुस्सा आने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ पल रुकें, धीरे-धीरे सांस लें और जरूरत पड़ने पर स्थिति से थोड़ी देर के लिए दूर हो जाएं। लगातार चिड़चिड़ापन या भावनात्मक परेशानी होने पर पेशेवर सहायता लेना भी फायदेमंद हो सकता है।

    7. हार्ट अटैक के लक्षणों की जानकारी रखें

    हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। सीने में दबाव, जकड़न या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, मतली, चक्कर और हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े में दर्द इसके संभावित संकेत हो सकते हैं। कुछ लोगों में, खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज से पीड़ित लोगों में, लक्षण कम स्पष्ट भी हो सकते हैं।

    अगर हार्ट अटैक का संदेह हो, तो तुरंत स्थानीय आपातकालीन चिकित्सा सेवा से संपर्क करें। खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने की कोशिश न करें और लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें।

    8. नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं

    हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के मौजूद रहते हैं। नियमित स्वास्थ्य जांच से इनका समय रहते पता लगाने में मदद मिल सकती है।

    डॉक्टर से अपनी उम्र, पारिवारिक इतिहास, वजन और अन्य जोखिम कारकों के अनुसार ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल की जांच के बारे में पूछें। हर व्यक्ति को एक ही तरह के टेस्ट या एक ही अंतराल पर जांच की जरूरत नहीं होती।

    बिना डॉक्टर की सलाह के अनावश्यक जांच करवाने या केवल किसी एक टेस्ट के आधार पर अपने दिल की सेहत का निष्कर्ष निकालने से बचें।

    9. धूम्रपान और तंबाकू से बनाएं दूरी

    धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और हृदय रोग का जोखिम बढ़ाता है। तंबाकू के अन्य उत्पाद भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हैं। इसलिए सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और दूसरे तंबाकू उत्पादों से दूर रहना दिल की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

    अगर आप धूम्रपान छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, तो डॉक्टर से सहायता लें। काउंसलिंग और कुछ प्रमाणित उपचार छोड़ने की प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं। धूम्रपान छोड़ने से स्वास्थ्य को किसी भी उम्र में फायदा हो सकता है।

    10. डॉक्टर की सलाह और दवाओं का पालन करें

    अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल या पहले से हृदय रोग है, तो नियमित इलाज बेहद जरूरी है। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं समय पर लें और बिना सलाह के उन्हें बंद न करें या उनकी खुराक न बदलें।

    एंजियोग्राफी जैसे टेस्ट हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होते। डॉक्टर लक्षणों, जांच के नतीजों और व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर तय करते हैं कि किस तरह की जांच या उपचार की जरूरत है।

    दिल को स्वस्थ रखने के लिए डाइट में क्या बदलाव करें?

    दिल की सेहत के लिए केवल कुछ चीजें छोड़ना ही नहीं, बल्कि सही खाद्य पदार्थों को नियमित रूप से शामिल करना भी जरूरी है।

    • फल और सब्जियां: रोजाना अलग-अलग तरह के फल और सब्जियां खाएं।
    • साबुत अनाज: ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस और साबुत गेहूं जैसे विकल्प चुनें।
    • स्वस्थ फैट: मेवे, बीज और असंतृप्त वसा वाले तेल सीमित व संतुलित मात्रा में लें।
    • नमक और चीनी: अधिक नमक, मीठे पेय और ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।
    • तली-भुनी चीजें: बार-बार डीप फ्राई किए गए और ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
    • संतुलित भोजन: दालें, फलियां और उपयुक्त प्रोटीन स्रोतों को भोजन में शामिल करें।

    दिल की धमनियों में प्लाक बनने की प्रक्रिया पर खानपान का असर पड़ता है, लेकिन इसमें उम्र, आनुवंशिकता, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और धूम्रपान जैसे अन्य कारक भी भूमिका निभाते हैं। इसलिए किसी एक खाद्य पदार्थ को हार्ट अटैक का अकेला कारण या बचाव का पक्का उपाय मानना सही नहीं है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार जांच, आहार, व्यायाम और उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श लें। हार्ट अटैक के संभावित लक्षण दिखाई देने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।

  • खुद को नगर निगम अधिकारी: बताकर महिला ने की 1.88 करोड़ के जेवरों की ठगी, गलत हस्ताक्षर वाला चेक देकर फरार हुई; एक आरोपी गिरफ्तार.

    खुद को नगर निगम अधिकारी: बताकर महिला ने की 1.88 करोड़ के जेवरों की ठगी, गलत हस्ताक्षर वाला चेक देकर फरार हुई; एक आरोपी गिरफ्तार.

    खुद को नगर निगम अधिकारी: बताकर महिला ने की 1.88 करोड़ के जेवरों की ठगी, गलत हस्ताक्षर वाला चेक देकर फरार हुई; एक आरोपी गिरफ्तार.

    रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ज्वेलरी कारोबारी से करीब 1.88 करोड़ रुपये के सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक महिला ने खुद को नगर निगम के आवास विभाग में कार्यरत बताकर दुकान संचालक का भरोसा जीता और फिर अपनी एक साथी के साथ मिलकर लाखों-करोड़ों रुपये के जेवर ले लिए। भुगतान के लिए दिए गए चेक पर गलत हस्ताक्षर होने के कारण रकम नहीं मिल सकी। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी बताई जा रही महिला को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसकी दूसरी साथी की तलाश जारी है।

    पहले 37 लाख के जेवर लिए, फिर किया बड़ा सौदा

    पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, भाठागांव निवासी रिखब बरडिया की सदर बाजार में विधि ज्वेलर्स एंड बुलियन नाम से दुकान है। शिकायत में बताया गया कि 24 अगस्त 2026 को किरण साहू नाम की महिला अपनी एक साथी के साथ दुकान पर पहुंची। उसने खुद को नगर निगम के आवास विभाग में काम करने वाली बताया, जिससे दुकानदार को उस पर भरोसा हो गया।

    आरोप है कि दोनों महिलाओं ने पहली बार में करीब 37 लाख रुपये के आभूषण खरीदे। इसके बदले 250 ग्राम सोने का बिस्कुट और 7 लाख रुपये नकद दिए गए। बाकी 15 लाख रुपये के भुगतान के लिए एक चेक सौंपा गया।

    दूसरी बार में खरीदे 1.73 करोड़ रुपये के आभूषण

    शिकायत के अनुसार, 26 अगस्त 2026 को दोनों महिलाएं फिर दुकान पर पहुंचीं। इस बार उन्होंने करीब 1.73 करोड़ रुपये के सोने, चांदी और हीरे के आभूषण लिए। भुगतान के लिए 1,73,37,630 रुपये का चेक दिया गया। साथ ही, दो से तीन दिनों के भीतर सोने के बिस्कुट देने का आश्वासन भी दिया गया।

    दुकान संचालक ने 1 सितंबर को पहले सौदे के दौरान मिला 15 लाख रुपये का चेक बैंक में जमा किया, लेकिन गलत हस्ताक्षर होने के कारण चेक अस्वीकार हो गया। इसके बाद कारोबारी ने महिला से संपर्क कर भुगतान की मांग की। आरोप है कि महिला लगातार टालमटोल करती रही और न तो बकाया रकम चुकाई गई और न ही आभूषणों का हिसाब दिया गया।

    शिकायतकर्ता के मुताबिक, दोनों सौदों में कुल 1,88,37,630 रुपये मूल्य के आभूषण प्राप्त किए गए। इसी आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कर जांच शुरू की।

    पुलिस ने एक महिला को किया गिरफ्तार

    मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए। इसके बाद एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और कोतवाली थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने शिकायतकर्ता से पूछताछ की और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर आरोपी महिला की तलाश शुरू की।

    पुलिस के मुताबिक, किरण साहू को पकड़ने के बाद पूछताछ की गई। पुलिस का कहना है कि महिला ने अपनी साथी के साथ मिलकर घटना को अंजाम देने की बात स्वीकार की है। धोखाधड़ी से प्राप्त आभूषणों और उनसे जुड़े अन्य तथ्यों के संबंध में उससे पूछताछ की जा रही है।

    दूसरी आरोपी की तलाश जारी

    पुलिस ने बताया कि मामले में शामिल दूसरी महिला अभी फरार है और उसकी तलाश की जा रही है। शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 336(3), 338, 340(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर लिए गए आभूषण कहां हैं और इस मामले में दूसरी आरोपी की क्या भूमिका रही। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम और बरामदगी से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आ सकेगी।

    डिस्क्लेमर: यह खबर पुलिस में दर्ज शिकायत और उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।