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  • खाने में मंडराती हैं मक्खियां? एक बार अपना लें ये आसान घरेलू उपाय… कभी नहीं आएंगी वापस..?

    खाने में मंडराती हैं मक्खियां? एक बार अपना लें ये आसान घरेलू उपाय… कभी नहीं आएंगी वापस..?

    खाने में मंडराती हैं मक्खियां? एक बार अपना लें ये आसान घरेलू उपाय… कभी नहीं आएंगी वापस..?

    बारिश का मौसम आते ही घर में मक्खियों का आतंक बढ़ जाता है. किचन, डाइनिंग टेबल और खाने की चीजों के आसपास मंडराती मक्खियां सिर्फ परेशानी ही नहीं, बल्कि कई बीमारियों की वजह भी बन सकती हैं. अगर आप भी इनसे छुटकारा पाने के लिए केमिकल स्प्रे का इस्तेमाल करते-करते परेशान हो चुके हैं, तो कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी बड़ी समस्या को मिनटों में कम कर सकते हैं. तो चलिए आपको बताते हैं कुछ ऐसे उपायों के बारे में जिससे आपके घर से मक्खियां गायब हो जाएंगी.

    सिरका
    मक्खियां खमीर जैसी गंध की ओर जल्दी आकर्षित होती हैं. इसके लिए एक छोटे बर्तन में सेब का सिरका डालें और उसमें एक बूंद डिशवॉश लिक्विड मिला दें. अब बर्तन को प्लास्टिक रैप से ढककर उसमें छोटे-छोटे छेद कर दें. मक्खियां अंदर तो चली जाएंगी, लेकिन बाहर नहीं निकल पाएंगी.

    नींबू और लौंग
    एक नींबू को दो हिस्सों में काट लें और उसमें 6 से 10 लौंग लगा दें. इसे खिड़की, डाइनिंग टेबल या किचन काउंटर पर रखें. नींबू और लौंग की तेज खुशबू मक्खियों को दूर रखने में मदद करती है.

    तुलसी या पुदीना
    तुलसी और पुदीने की खुशबू मक्खियों को पसंद नहीं होती. इसलिए इन पौधों को घर के दरवाजों, खिड़कियों या रसोई के पास रखें. इससे मक्खियां कम आएंगी और घर का वातावरण भी ताजा बना रहेगा.

    कपूर
    कपूर की तेज गंध मक्खियों को दूर रखने में मदद करती है. इसे किसी कटोरी में रखकर या कपड़े में बांधकर खिड़कियों और दरवाजों के पास रखा जा सकता है. बरसात के मौसम में यह उपाय काफी उपयोगी माना जाता है.

    सफाई का रखें खास ध्यान
    घरेलू उपाय तभी पूरी तरह असर दिखाते हैं, जब घर की साफ-सफाई का भी ध्यान रखा जाए. खाने को हमेशा ढककर रखें. किचन की सतहों को नियमित रूप से साफ करें और डस्टबिन समय पर खाली करें. इससे मक्खियां घर की ओर कम आकर्षित होंगी और परिवार भी संक्रमण के खतरे से सुरक्षित रहेगा.

  • पाइप में पानी का प्रेशर है कम, तो प्लंबर के खर्च को कहें टाटा..

    पाइप में पानी का प्रेशर है कम, तो प्लंबर के खर्च को कहें टाटा..

    पाइप में पानी का प्रेशर है कम, तो प्लंबर के खर्च को कहें टाटा..

    अगर घर के नल से पानी बहुत धीरे आने लगे, तो रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में कई लोग बिना वजह तुरंत प्लंबर को बुला लेते हैं. जबकि कई बार यह परेशानी बहुत छोटी होती है और इसे कुछ आसान तरीकों से घर पर ही ठीक किया जा सकता है. इन तरीकों से आप प्लंबर पर खर्च होने वाले पैसे भी बच सकते हैं और पानी का प्रेशर भी पहले जैसा कर सकते हैं.

    एयर बैंड से मिलेगी मदद

    अगर आपके घर की पाइपलाइन पहले से लगी हुई है और उसे बदलना नहीं चाहते, तो एयर बैंड एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. इसे पाइप के मोड़ वाली जगह पर लगाया जाता है. कई मामलों में इससे पानी का बहाव बेहतर हो जाता है और नल से पानी पहले की तुलना में तेज आने लगता है. यह तरीका आसान भी है और ज्यादा खर्चीला भी नहीं होता.

    वॉटर प्रेशर बूस्टर पंप

    अगर सिर्फ एयर बैंड से काम नहीं बनता, तो वॉटर प्रेशर बूस्टर पंप का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह एक ऑटोमैटिक मशीन होती है, जिसे पानी की लाइन या ओवरहेड टैंक से जोड़ा जाता है. जैसे ही आप नल खोलते हैं, यह अपने आप चालू हो जाती है और पानी का प्रेशर बढ़ाने में मदद करती है. इससे बाथरूम, किचन और दूसरे नलों में भी पानी का बहाव बेहतर हो सकता है.

    क्यों कम होता है पानी का प्रेशर?

    पानी का प्रेशर कम होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. सबसे आम कारण पाइपलाइन में लीकेज होना है. अगर कहीं से पानी बाहर निकल रहा है, तो नल तक पूरा प्रेशर नहीं पहुंच पाता.

    इसके अलावा पाइप के अंदर मिट्टी, कचरा या दूसरी गंदगी जमा होने से भी पानी का रास्ता रुक सकता है. कई बार नल का एरेटर जाम हो जाता है, जिससे पानी कम निकलता है. वहीं अगर घर की पानी की टंकी में पानी का लेवल कम हो, तब भी नल का प्रेशर घट सकता है.

    कब बुलाएं प्लंबर को?

    अगर बार-बार पानी का प्रेशर कम हो रहा है और आसान तरीके अपनाने  के बाद भी परेशानी लगातार बनी रहती है, तो प्लंबर की मदद लेना सही रहेगा. अगर पानी की मोटर ठीक से काम कर रही है, फिर भी नल से पानी कम आ रहा है, तो पाइपलाइन की जांच जरूरी हो सकती है. इसी तरह अगर पाइप में लीकेज हो या किसी हिस्से में बड़ी खराबी हो, तो खुद ठीक करने की बजाय किसी प्लंबर को बुलाना बेहतर रहेगा.

  • प्राचीन काल की ईंटें, मिट्टी की सुराही, हैंडल वाली धूपदानी… रायबरेली में मिली रहस्यमयी सुरंग

    प्राचीन काल की ईंटें, मिट्टी की सुराही, हैंडल वाली धूपदानी… रायबरेली में मिली रहस्यमयी सुरंग

    प्राचीन काल की ईंटें, मिट्टी की सुराही, हैंडल वाली धूपदानी… रायबरेली में मिली रहस्यमयी सुरंग

    उत्तर प्रदेश में रायबरेली जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र के ओई गांव में मिली रहस्यमयी सुरंग और प्राचीन अवशेष मिले हैं. पिछले हफ्ते ओई गांव में बारिश के बाद अचानक जमीन धंस गई. जमीन धंसने से वहां एक रहस्यमयी सुरंग और पक्की दीवार जैसी संरचना दिखाई दी है. इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है.

    अचानक खेत में हो गया गड्ढा-
    मामला रायबरेली जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र का है, यहां स्थित ओई गांव में एक निजी खेत के अंदर अचानक एक मीटर चौड़ा गड्ढा हो गया. जब लोगों ने पास जाकर देखा, तो वहां पक्की दीवार से बनी एक प्राचीन सुरंग जैसी आकृति नजर आई. इस अनोखी संरचना को देखने के लिए देखते ही देखते पूरे गांव की भीड़ जमा हो गई.

    कई ऐतिहासिक चीजें मिली-
    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन तुरंत एक्शन में आया. एसडीएम महराजगंज और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI लखनऊ मंडल की टीम मौके पर पहुंची. सहायक पुरातत्वविद डॉ. मनोज कुमार यादव के नेतृत्व में टीम सीढ़ी के सहारे इस रहस्यमयी सुरंग के अंदर उतरी. उन्हें बताया की सुरंग के अंदर जांच के दौरान पुरातत्व विभाग की टीम को कई ऐतिहासिक चीजें मिली हैं. यहां से प्राचीन काल की पुरानी ईंटें, मिट्टी की सुराही और एक हैंडल वाली धूपदानी बरामद की गई है.

    कुषाण कालीन अवशेष मिले-
    एक्सपर्ट्स के शुरुआती आकलन के मुताबिक, ये सभी अवशेष कुषाण कालीन बताए जा रहे हैं. इतना ही नहीं, इस मामले में आज एक बड़ा अपडेट सामने आया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लखनऊ मंडल की टीम ने आज गांव के ही निवासी अशोक प्रताप मौर्य के घर पहुंचकर उनके पास मौजूद प्राचीन अवशेषों का बारीकी से निरीक्षण किया. गौरतलब है कि अशोक प्रताप मौर्य 1985 से इन ऐतिहासिक अवशेषों को सहेज कर रख रहे हैं. उनके दावे के अनुसार, यह ओई भीट पुरातत्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज एक ऐतिहासिक स्थल है.

    फिलहाल, सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने पूरे इलाके को सील कर दिया है. मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और ग्रामीणों को गड्ढे के पास जाने से साफ मना किया गया है. एएसआई की विस्तृत वैज्ञानिक रिपोर्ट आने के बाद ही इस प्राचीन और ऐतिहासिक सुरंग का पूरा सच सामने आ सकेगा.


    डॉ कुमार ने बताया कि निरीक्षण के दौरान हम लोगों ने यहां पर देखा कि तकरीबन 15 से 20 फीट की जमीन धंसी हुई है. जिसके अंदर कुछ ईंटों के संरचना मिले, जिनका ओरियंटेशन उत्तर से लेकर दक्षिण की तरफ है और जब हम लोगों ने नीचे जाकर ईंटों को देखा तो उनकी साइज 40 /28 /8 सेंटीमीटर है, जो कुषाण कालीन संरचना से मिलती-जुलती है और बहुत सारे अवशेष देखने को मिले, जो सरफेस पर भी है और यहां के स्थानीय लोगों के द्वारा संग्रह भी किया गया है और इन्हें बनाने में जो ड्राइव है, जो मूर्तियां हैं, कुछ अवशेष हैं, जो यह सारी संरचनाओं हैं, कुषाण कल के समय जो बनती थी, यह उससे मिलती-जुलती हैं. यह 2000 साल पहले का है और अभी इसकी रिपोर्ट सबमिट की जाएगी. फिर उसके बाद जैसे शासन निर्देश करेगी, उसी हिसाब से कार्यवाही की जाएगी.

  • Aadhaar Bometric Lock: कर लें इस सेटिंग को ऑन… नहीं कर पाएगा कोई आधार का गलत इस्तेमाल, बायोमेट्रिक रहेंगे पूरी तरह सेफ

    Aadhaar Bometric Lock: कर लें इस सेटिंग को ऑन… नहीं कर पाएगा कोई आधार का गलत इस्तेमाल, बायोमेट्रिक रहेंगे पूरी तरह सेफ

    Aadhaar Bometric Lock: कर लें इस सेटिंग को ऑन… नहीं कर पाएगा कोई आधार का गलत इस्तेमाल, बायोमेट्रिक रहेंगे पूरी तरह सेफ

    आधार कार्ड आज बैंक, सरकारी स्कीम, सिम कार्ड खरीदने और कई जरूरी कामों में इस्तेमाल होता है. ऐसे में अगर आपके आधार का गलत इस्तेमाल हो जाए तो बड़ी परेशानी हो सकती है. इसी खतरे को कम करने के लिए नए Aadhaar App में एक खास फीचर दिया गया है. अब यूजर अपने फिंगरप्रिंट और आइरिस (आंखों की पहचान) को जब चाहें लॉक और जरूरत पड़ने पर अनलॉक कर सकते हैं. इससे आपकी बायोमेट्रिक जानकारी ज्यादा सेफ रहती है.

    बायोमेट्रिक लॉक क्यों जरूरी है?

    आधार से जुड़ी बायोमेट्रिक जानकारी में आपके फिंगरप्रिंट और आइरिस की जानकारी होती है. अगर यह जानकारी लॉक रहती है, तो कोई भी व्यक्ति आपकी पर्मिशन के बिना बायोमेट्रिक से आधार का इस्तेमाल नहीं कर सकता. इससे धोखाधड़ी की आशंका काफी कम हो जाती है.

    नए Aadhaar App से कैसे करें लॉक?

    अगर आप अपने फिंगरप्रिंट और आइरिस को लॉक करना चाहते हैं, तो सबसे पहले नया Aadhaar App खोलें. इसके बाद अपने आधार खाते में लॉग इन करें. ऐप के होम पेज पर आपको Biometric Lock का ऑप्शन दिखाई देगा. इस पर टैप करें और स्क्रीन पर दी गई जानकारी को पूरा करें. प्रोसेस पूरा होते ही आपका बायोमेट्रिक डेटा लॉक हो जाएगा. इसके बाद किसी भी बायोमेट्रिक जांच के लिए पहले इसे अनलॉक करना जरूरी होगा.

    जरूरत पड़ने पर ऐसे करें अनलॉक

    जब आपको बैंक, आधार सेवा केंद्र या किसी अन्य जगह फिंगरप्रिंट या आइरिस से पहचान करानी हो, तब Aadhaar App खोलें. फिर Biometric Unlock ऑप्शन चुनें और पहचान की प्रोसेस पूरी करें. आपका बायोमेट्रिक कुछ समय के लिए अनलॉक हो जाएगा. काम पूरा होने के बाद आप इसे दोबारा लॉक भी कर सकते हैं.

    किनके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद?

    अगर आपका आधार कई सेवाओं से जुड़ा है, आप अक्सर बैंक या सरकारी काम करते हैं या आपको आधार के गलत इस्तेमाल की चिंता रहती है, तो यह सुविधा आपके लिए काफी फायदेमंद है. जरूरत न होने पर बायोमेट्रिक लॉक रखने से सेफ्टी बढ़ जाती है और आपकी निजी जानकारी सेफ रहती है. नए Aadhaar App में यह सुविधा अब पहले से ज्यादा आसान और तेज तरीके से होती है.

  • AI कैमरों को भी कर सकते हैं कन्फ्यूज ये खास कपड़े! आखिर क्यों बढ़ रही है इनकी चर्चा?

    AI कैमरों को भी कर सकते हैं कन्फ्यूज ये खास कपड़े! आखिर क्यों बढ़ रही है इनकी चर्चा?

    AI कैमरों को भी कर सकते हैं कन्फ्यूज ये खास कपड़े! आखिर क्यों बढ़ रही है इनकी चर्चा?

    सोचिए, आपने एक ऐसी टी-शर्ट या जैकेट पहन रखी हो जिसे देखकर AI कैमरे आपकी पहचान करने में मुश्किल महसूस करें. सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन अब ऐसे खास कपड़ों की चर्चा हो रही है. इन्हें Adversarial Clothing कहा जाता है. इन कपड़ों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि कुछ फेस रिकग्निशन सिस्टम के लिए किसी व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल हो सकता है.

    Adversarial Clothing ऐसे कपड़े होते हैं जिन पर खास तरह के पैटर्न और डिजाइन बनाए जाते हैं. इनका मकसद कुछ AI कैमरों और फेस रिकग्निशन सिस्टम को भ्रम में डालना है. कुछ डिजाइनर ऐसे जैकेट भी बना रहे हैं जिनमें इंफ्रारेड LED का इस्तेमाल किया जाता है. दावा है कि इससे कुछ कैमरों के लिए चेहरा साफ पहचानना कठिन हो सकता है. लेकिन, यह तकनीक हर जगह एक जैसी असरदार नहीं मानी जाती.

    आखिर लोग क्यों खरीदना चाहते हैं ऐसे कपड़े?

    आज दुनिया के कई शहरों में AI कैमरों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मॉल और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर फेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में कई लोग अपनी प्राइवेसी को लेकर चिंता जताते हैं. इसी वजह से कुछ लोग ऐसे कपड़ों को सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि अपनी निजता से जोड़कर भी देख रहे हैं.

    क्या सच में AI कैमरों को धोखा दे सकते हैं?

    इस सवाल का जवाब पूरी तरह ‘हां’ नहीं है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक अलग-अलग कंपनियों के कैमरे और AI सिस्टम अलग तरीके से काम करते हैं. इसलिए कोई भी कपड़ा हर जगह या हर सिस्टम को चकमा दे देगा, ऐसा कहना सही नहीं होगा. कई बार कैमरे फिर भी व्यक्ति की पहचान कर सकते हैं.

    क्या आगे बढ़ेगा यह ट्रेंड?

    फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर बड़े फैशन ब्रांड और मशहूर लोग ऐसे डिजाइन अपनाते हैं, तो यह ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो सकता है. वहीं, अगर भविष्य में ऐसे कपड़े निगरानी तकनीक को बड़े स्तर पर प्रभावित करने लगते हैं, तो सरकारें इनके इस्तेमाल को लेकर नए नियम भी बना सकती हैं.

  • धनबाद की दो बहनों ने गीता के श्लोक पाठ से बनाया विश्व रिकॉर्ड, Guinness World Records में नाम हुआ दर्ज..

    धनबाद की दो बहनों ने गीता के श्लोक पाठ से बनाया विश्व रिकॉर्ड, Guinness World Records में नाम हुआ दर्ज..

    धनबाद की दो बहनों ने गीता के श्लोक पाठ से बनाया विश्व रिकॉर्ड, Guinness World Records में नाम हुआ दर्ज..

    आज के दौर में बच्चों का काफी समय मोबाइल और सोशल मीडिया पर गुजर रहा है लेकिन धनबाद के धैय्या की रहने वाली दो बहनों ने अपनी प्रतिभा और संस्कारों के दम पर एक खास पहचान बनाई है. प्रांजल मित्तल और आन्या मित्तल ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का नियमित पाठ करते हुए विश्व स्तर पर अपनी पहचान कायम की है. दोनों बहनों की इस उपलब्धि को Guinness World Records में दर्ज किया गया है. इस खास सफलता के लिए उन्हें आधिकारिक प्रमाण पत्र के साथ गोल्ड मेडल भी प्रदान किया गया है. इस उपलब्धि के पीछे परिवार के संस्कार और उनकी मां प्रीति अग्रवाल की अहम भूमिका रही है.

    किया गया सम्मानित
    प्रांजल मित्तल और आन्या मित्तल ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों के नियमित पाठ को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया और इसी साधना ने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई. गीता के श्लोकों के पाठ में उनकी निरंतरता और लगन का परिणाम है कि दोनों बहनों की भागीदारी Guinness World Records में दर्ज हुई है. इस उपलब्धि के लिए उन्हें आधिकारिक प्रमाण पत्र और गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया है.

    सिर्फ 5 मिनट में पूरा किया पाठ
    प्रांजल और आन्या की इस सफलता में उनके परिवार के संस्कारों की बड़ी भूमिका रही है. खास तौर पर उनकी मां प्रीति अग्रवाल ने दोनों बेटियों को नियमित रूप से गीता पाठ के लिए प्रेरित किया और उनका हौसला बढ़ाया. आज दोनों बहनों की यह उपलब्धि सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि धनबाद के लिए भी गर्व का विषय है. आधुनिक दौर में जहां बच्चों का रुझान तेजी से दूसरी चीजों की ओर बढ़ रहा है, वहीं इन दोनों बहनों ने भारतीय संस्कृति, संस्कार और श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति अपनी आस्था को अपनी पहचान बनाया है. प्रांजल और आन्या की कहानी यह संदेश देती है कि अगर संस्कार, अनुशासन और निरंतर मेहनत साथ हों, तो छोटी-सी शुरुआत भी दुनिया के मंच तक पहुंच सकती है. प्रांजल मित्तल और प्रांजल मित्तल ने बताया कि उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय का पाठ करीब पांच मिनट में पूरा किया. गीता के श्लोकों का सही उच्चारण हो, इसके लिए उन्होंने लगातार अभ्यास किया. प्रांजल अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देती हैं. उनका कहना है कि मां बचपन से ही उन्हें गीता का पाठ सिखाती थीं. घर में गीता के श्लोकों की ऑडियो रिकॉर्डिंग चलती रहती थी और वह लगातार उन्हें सुनती थीं. इसी तरह सुनते-सुनते श्लोक याद होते चले गए.

    श्रीमद्भगवद्गीता सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं
    आन्या मित्तल ने कहा कि गीता का पाठ उनके लिए कोई नई चीज नहीं है. उन्होंने बचपन से ही अपनी मां से गीता के श्लोक सीखना शुरू कर दिया था. मां को देखकर उनमें भी गीता पढ़ने और उसके श्लोकों का सही उच्चारण करने की रुचि पैदा हुई.आज यही अभ्यास उनकी पहचान बन चुका है. प्रीति अग्रवाल का कहना है कि श्रीमद्भगवद्गीता में 700 श्लोक हैं और यह सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की सीख भी देती है. उनका मानना है कि बच्चों को गीता से जोड़ने से उनमें अनुशासन, संस्कार और अपनी संस्कृति के प्रति समझ विकसित होती है.पिता सुनील अग्रवाल के कहते हैं कि प्रांजल और आन्या की उपलब्धि आज उन अभिभावकों के लिए भी एक उदाहरण है, जो अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना चाहते हैं. मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में इन दोनों बहनों ने गीता के श्लोकों को अपना साथी बनाया और अपनी मेहनत के दम पर विश्व स्तर पर पहचान बनाई. धैय्या की गलियों से शुरू हुई यह यात्रा अब Guinness World Records तक पहुंच चुकी है.

  • पत्थर पर चढ़ाए गए प्रसाद को अपनी जीभ से चाटते हैं इस गांव के लोग…बारिश लाने की इस परंपरा के बारे में सुना है आपने?

    पत्थर पर चढ़ाए गए प्रसाद को अपनी जीभ से चाटते हैं इस गांव के लोग…बारिश लाने की इस परंपरा के बारे में सुना है आपने?

    पत्थर पर चढ़ाए गए प्रसाद को अपनी जीभ से चाटते हैं इस गांव के लोग…बारिश लाने की इस परंपरा के बारे में सुना है आपने?

    तेलंगाना में कमजोर मानसून और सूखे जैसे हालात के बीच गांव ने सदियों पुरानी परंपरा को फिर से जीवित किया है. महबूबाबाद जिले के गुंडमराजुपल्ली गांव के लोगों ने अच्छी बारिश की कामना के लिए करीब 20 साल बाद ‘वरदापाशम’ नाम की अनोखी धार्मिक रस्म निभाई. इस परंपरा में गांव के बच्चे, महिलाएं और पुरुष एक बड़े पत्थर पर चढ़ाए गए प्रसाद को अपनी जीभ से चाटते हैं. ग्रामीणों का मानना है कि ऐसा करने से वर्षा के देवता प्रसन्न होते हैं और अच्छी बारिश होती है.

    20 साल बाद दोबारा निभाई गई परंपरा
    महबूबाबाद जिले के चिन्नागुडूर मंडल के गुंडमराजुपल्ली गांव में यह परंपरा तब निभाई जाती है, जब लंबे समय तक बारिश नहीं होती. ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले करीब 20 सालों से इस रस्म की जरूरत नहीं पड़ी थी, क्योंकि हर साल पर्याप्त बारिश हो जाती थी. लेकिन इस बार मानसून कमजोर रहने और फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ने के बाद गांव वालों ने फिर से इस प्राचीन परंपरा का सहारा लिया.

    पहले देवी की पूजा, फिर पत्थर पर चढ़ाया प्रसाद
    इस अनोखी रस्म की शुरुआत गांव के तालाब के पास स्थित कट्टा मैसम्मा देवी की विशेष पूजा-अर्चना से हुई. इसके बाद गांव वालों ने चावल, गुड़ और दूध से एक मीठा प्रसाद तैयार किया. इस प्रसाद को एक बड़े पवित्र पत्थर पर फैलाया गया. फिर गांव के पुरुष, महिलाएं और बच्चे बिना हाथ लगाए केवल अपनी जीभ से उस प्रसाद को चाटते हैं. ग्रामीणों का मानना है कि यह प्रकृति, धरती माता और वर्षा के देवता भगवान वरुण के प्रति श्रद्धा और विनम्रता प्रकट करने का प्रतीक है.

    पीढ़ियों से चली आ रही है मान्यता
    गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है. इसे केवल तब किया जाता है, जब गांव में लंबे समय तक बारिश नहीं होती और सूखे जैसी स्थिति बन जाती है. इस बार गांव के कई युवाओं ने पहली बार इस अनोखी रस्म को अपनी आंखों से देखा. उनके लिए यह सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपने गांव की सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का भी अवसर बना.

    गांव में आज भी जीवित हैं पारंपरिक रीति-रिवाज
    ग्रामीणों ने बताया कि ‘वरदापाशम’ के अलावा गांव में ‘वनभोजनालु’ की भी परंपरा है. इसमें अलग-अलग समुदाय जंगल में सामूहिक भोज का आयोजन करते हैं. यह आयोजन सामाजिक एकता और पारंपरिक संस्कृति को मजबूत करने का माध्यम माना जाता है.

  • भारत के इस शहर को कहा जाता है ‘इत्र की राजधानी’, जहां घर-घर से आती है इत्र की खुशबू

    भारत के इस शहर को कहा जाता है ‘इत्र की राजधानी’, जहां घर-घर से आती है इत्र की खुशबू

    भारत के इस शहर को कहा जाता है ‘इत्र की राजधानी’, जहां घर-घर से आती है इत्र की खुशबू

    आज के दौर में जहां ज्यादातर परफ्यूम फैक्ट्रियों में मशीनों से बनते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश का कन्नौज आज भी सदियों पुराने तरीके से प्राकृतिक अत्तर तैयार करता है. यहां हर खुशबू के पीछे पीढ़ियों का अनुभव और पारंपरिक कारीगरी छिपी है. इसी वजह से कन्नौज को भारत की ‘परफ्यूम कैपिटल’ कहा जाता है.

    कन्नौज में इत्र बनाने का काम सदियों से किया जा रहा है. यहां कई परिवार ऐसे हैं, जो अपने खास इत्र के नुस्खे और बनाने की तकनीक को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाते हैं. इन पारंपरिक तरीकों की वजह से कन्नौज के अत्तर की पहचान देश ही नहीं, विदेशों तक बनी हुई है.

    फूलों और प्राकृतिक चीजों से तैयार होता है अत्तर
    यहां बनने वाले अत्तर में गुलाब, चमेली, केवड़ा और कई तरह के सुगंधित फूलों का इस्तेमाल किया जाता है. इन प्राकृतिक सामग्री से तैयार इत्र अपनी लंबे समय तक टिकने वाली खुशबू के लिए जाना जाता है. यही वजह है कि प्राकृतिक अत्तर आज भी लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं.

    आज भी अपनाई जाती है पारंपरिक डिस्टिलेशन तकनीक
    कन्नौज के कई इत्र निर्माता आज भी पारंपरिक ‘देग-भापका’ विधि का इस्तेमाल करते हैं. इस तकनीक में तांबे के बर्तनों में फूलों और अन्य प्राकृतिक सामग्री को धीमी आंच पर पकाकर उनकी खुशबू निकाली जाती है. इसके बाद इस सुगंध को चंदन के तेल में मिलाया जाता है, जिससे इत्र की खुशबू और भी गहरी और लंबे समय तक टिकने वाली बन जाती है.

    मिट्टी का अत्तर है सबसे अनोखी पहचान
    कन्नौज की सबसे खास पहचान ‘मिट्टी का अत्तर’ है. इसे इस तरह तैयार किया जाता है कि इसमें पहली बारिश के बाद सूखी धरती से उठने वाली सोंधी खुशबू महसूस होती है. यह अनोखा अत्तर दुनियाभर में अपनी अलग पहचान रखता है.

  • रगों के प्रयोग से भी चमका सकते हैं अपनी किस्मत… लेकिन कैसे… यहां जानिए..

    रगों के प्रयोग से भी चमका सकते हैं अपनी किस्मत… लेकिन कैसे… यहां जानिए..

    रगों के प्रयोग से भी चमका सकते हैं अपनी किस्मत… लेकिन कैसे… यहां जानिए..

    दुनिया में मुख्य रूप से दो ही शक्तियां काम करती हैं. एक रंग और दूसरा तरंग. इन्हीं शक्तियों से ही सारी सृष्टि चलती है. हर व्यक्ति, वस्तु यहां तक कि शब्दों और भावनाओं का भी रंग होता है. रंगों से ही हमारा मिलन होता है और रंग ही हमें दूर भी करते हैं. रंग के आधार पर ही सारे ग्रह, नक्षत्र और ज्योतिष काम करता है. सही और सटीक रंग हमारी किस्मत को मजबूत करते हैं और बाकी रंगों से किस्मत कमजोर होती है.

    क्या है लाल रंग की विशेषता
    अत्यंत ऊर्जा और शक्ति का रंग लाल है. ज्योतिष में इसको मंगल और सूर्य का रंग माना जाता है. अगर यह रंग शुभ हो तो आत्मविश्वास, साहस और अच्छे स्वास्थ्य की प्रप्ति होती है. इस रंग के नुकसान करने पर दुर्घटनाओं और चोट-चपेट की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. अगर मन जल्दी अशांत होता हो तो इस रंग का प्रयोग नहीं करना चाहिए.  मिथुन और कन्या राशी के लोगों को यह रंग आम तौर पर लाभ नहीं करता.

    क्या है पीला रंग की विशेषता
    पीला रंग शुभ चीज़ों और मंगल कार्यों से सम्बन्ध रखता है. ज्योतिष में इसको बृहस्पति का रंग माना जाता है. अगर यह रंग अनुकूल हो तो शिक्षा, संतान सुख और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है. अगर यह रंग नुकसान करे तो पेट और दाम्पत्य जीवन में समस्या आ जाती है. जो लोग स्वभाव से सात्विक न हों उन्हें इस रंग का प्रयोग नहीं करना चाहिए. यह रंग वृष, तुला और मकर राशी के लिए अनुकूल नहीं होता.

    हरा रंग की विशेषता
    हरा रंग अच्छे स्वास्थ्य और मूड से सीधा सम्बन्ध रखता है. ज्योतिष में यह बुध का रंग माना जाता है. अगर यह रंग लाभदायक हो तो मन और दिमाग को अच्छा करता है, स्वास्थ्य उत्तम कर देता है. अगर यह रंग नुकसान करे तो चिंताएं बढ़ा देता है तथा त्वचा की समस्या दे सकता है. जिन लोगों को दिमाग और वाणी का ज्यादा प्रयोग करना हो ऐसे लोगों को इस रंग का प्रयोग जरूर करना चाहिए. यह रंग कर्क और वृश्चिक राशी के लिए अनुकूल नहीं होता.

    नीला रंग
    यह रंग तीव्र आध्यात्म और भाग्य से सम्बन्ध रखता है. ज्योतिष में इसको शुभ शनि का रंग माना जाता है. यह रंग लाभ दे तो व्यक्ति की बुद्धि और कार्य की क्षमता को बढाता है, अंतर्ज्ञान की क्षमता बढ़ा देता है. अगर नुकसान करे तो वाणी ख़राब करता है और करियर को रोक देता है. जिन लोगों को आध्यात्मिक और मानसिक उन्नति करनी हो उनको हल्के नीले रंग का प्रयोग जरूर करना चाहिए. यह रंग मिथुन, तुला और कुम्भ राशी के लिए अत्यंत शुभ होता है.

    सफेद रंग
    यह रंग वास्तव में सातों रंग का सटीक मिश्रण है. यह रंग चन्द्रमा और शुक्र का रंग माना जाता है. ईश्वर-आध्यात्म तथा सफलता की उच्चतम स्थिति का सम्बन्ध इस रंग से है. यह रंग जब स्वयं से अनुकूल लगने लगे या दिखने लगे तो ईश्वर की कृपा समझनी चाहिए. जिन लोगों को इस रंग का अनुभव होने लगता है, उनको जीवन में अपने व्यवहार और स्वभाव का ध्यान रखना चाहिए.

    काला रंग
    यह रंग वास्तव में कोई रंग नहीं है, जहां कोई रंग नहीं होता, वहां काला रंग होता है. यह रंग शनि के अशुभ प्रभाव को दर्शाता है. हालांकि इस रंग को नकारात्मक माना जाता है, पर आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत यहीं से होती है. यह रंग तभी ज्यादा प्रयोग करना चाहिए, जब जीवन सामान्य गति से चल रहा हो. अगर आप जिन्दगी के बुरे दौर से गुजर रहे हों तो भूल कर भी इस रंग का प्रयोग न करें.

  • गलती मानने पर इन लोगों को करें माफ, लेकिन अगर मानते हैं आचार्य चाणक्य को… तो गलती से भी इन्हें न दें माफी

    गलती मानने पर इन लोगों को करें माफ, लेकिन अगर मानते हैं आचार्य चाणक्य को… तो गलती से भी इन्हें न दें माफी

    गलती मानने पर इन लोगों को करें माफ, लेकिन अगर मानते हैं आचार्य चाणक्य को… तो गलती से भी इन्हें न दें माफी

    अक्सर लोग मानते हैं कि दूसरों को माफ करना एक क्वालिटी है, लेकिन आचार्य चाणाक्य कुछ और ही मानते हैं. आचार्य चाणक्य को भारत के सबसे महान विद्वानों में गिना जाता है. ऐसे में कई लोग उनकी बातों को मानते हैं.

    चाणक्य नीति में माफी को बहुत बड़ा गुण बताया गया है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा है कि हर व्यक्ति को हर गलती के लिए माफ करना समझदारी नहीं होती. कई बार जरूरत से ज्यादा नरमी आपकी कमजोरी बन सकती है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि किसे माफ करना चाहिए और किसे नहीं.

    जब अनजाने में हुई हो गलती

    अगर किसी व्यक्ति से पहली बार कोई गलती हुई है और उसका इरादा गलत नहीं था, तो उसे माफ कर देना चाहिए. इंसान से गलती होना आम बात है. अगर सामने वाला अपनी गलती स्वीकार करता है और उसे सच में पछतावा है, तो उसे सुधारने का एक मौका जरूर देना चाहिए.

    बच्चों और कमजोर लोगों की गलतियां

    चाणक्य कहते हैं, जो लोग आपसे छोटे हैं या आपके नीचे काम करते हैं, उनकी छोटी-छोटी गलतियों पर ज्यादा गुस्सा नहीं करना चाहिए. बच्चों, विद्यार्थियों या कर्मचारियों को डांटने के बजाय प्यार से समझाना ज्यादा अच्छा तरीका है.

    जब आपके पास सजा देने की ताकत हो

    चाणक्य नीति कहती है कि असली ताकत उसी की होती है जो चाहकर भी बदला लेने के बजाय सही समय पर माफ करना जानता है. अगर सामने वाला अपनी गलती मान चुका है और सच्चे मन से माफी मांग रहा है, तो उसे माफ करना आपकी कमजोरी नहीं बल्कि ताकत है.

    बुरे और धोखेबाज लोगों से रहें सावधान

    अगर कोई व्यक्ति स्वभाव से ही धोखेबाज है और हमेशा दूसरों का नुकसान करने की सोचता है, तो उसे बार-बार माफ करना सही नहीं है. ऐसे लोग आपकी अच्छाई को आपकी कमजोरी समझ लेते हैं और फिर दोबारा आपको नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं.

    जो बार-बार एक ही गलती दोहराए

    अगर कोई व्यक्ति हर बार वही गलती करता है और सिर्फ बचने के लिए माफी मांगता है, तो यह उसकी आदत बन चुकी है. ऐसे इंसान को बार-बार माफ करना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है.

    विश्वास तोड़ने वाले को दूसरा मौका न दें

    चाणक्य का मानना था कि विश्वास किसी भी रिश्ते की सबसे मजबूत नींव होता है. अगर कोई व्यक्ति आपका भरोसा तोड़ देता है या पीठ पीछे धोखा देता है, तो उस पर दोबारा आंख बंद करके भरोसा करना सही फैसला नहीं है.