पीलीभीत में पत्नी के बार-बार मायके जाने से नाराज दामाद महेंद्रपाल ने अपनी सास मोहनदेई की हत्या कर दी। उसने शव को उपलों के ढेर में जला दिया, जिसकी राख से चूड़ियां और हड्डियां मिली हैं।
बेटी को मायके बुलाकर सुख-दुख साझा करती थीं, नाराज था दामाद
पत्नी बीना के बार-बार मायके जाने से बौखलाए महेंद्रपाल ने बुजुर्ग सास मोहनदेई की हत्या कर दी। निर्दयी दामाद उनकी लालसा को समझ नहीं सका, जो बिटिया से अपना सुख-दुख साझा कर लेती थीं। घर का सूनापन छांटने के लिए उन्हें कुछ समय अपने पास बुला लेती थीं। बुढ़ापे में उनका सहारा बनने के बजाय दामाद लड़ाई करने लगा था।
इस बीच मौका मिलते ही उनकी हत्या कर शव उपलों के बीच जला दिया। शुक्रवार को राख के ढेर से उनकी चूड़ियां व हड्डियां मिलने के बाद आरोपित महेंद्र के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने आरोपित से पूछताछ शुरू कर दी है।
जिठनिया गांव निवासी 65 वर्षीय मोहनदेई कब्रिस्तान के पास मकान में अकेली रहती थीं। उनके बेटे सुरेश कुमार गांव के अंदर दूसरे मकान में रहते हैं। मां मोहनदेई अक्सर विवाहित बेटी बीना को अपने पास बुला लेती थीं। उनके बार-बार मायके जाने पर पति महेंद्रपाल आपत्ति जताता था।
यह कहासुनी धीरे-धीरे पारिवारिक कलह में बदल गई थी। महेंद्र ने सास मोहनदेई के पास जाकर भी नाराजगी जताई थी, मगर उन्होंने बीना का पक्ष लेते हुए कहा कि बेवजह कलह न करें। सुरेश कुमार के अनुसार, इसी बात पर बहनोई महेंद्रपाल कई बार मोहनदेई से लड़ाई-झगड़ा करके गया था।
वह नहीं चाहता था कि बीना मायके आएं। 31 जुलाई की रात को महेंद्रपाल अपने गांव हरहरपुर से मोहनदेई के पास पहुंचा। रात में वहां रुका, सुबह बिना सूचना चला गया। दोपहर तक मां मोहनदेई पर ध्यान नहीं गया। शाम तक वह घर में नहीं दिखीं तो तलाश शुरू की।
उस समय महेंद्रपाल पर शक नहीं था। सोचा कि कहीं रिश्तेदारी में चली गई होंगी। सुरेश बोले, शुक्रवार सुबह मां के मकान में जले उपलों का ढेर देखकर शक हुआ। वहां से राख हटाई तो उसमें हड्डियां व मां की चूड़ियां मिलीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि 31 जुलाई की रात को महेंद्रपाल ने उनकी हत्या कर शव उपलों के ढेर के बीच रखकर आग लगा दी। उस दिन के बाद उसने किसी तरह संपर्क भी नहीं किया।
सीओ सदर नताशा गोयल ने बताया कि सुरेश की शिकायत पर गांव पहुंची टीम ने राख से मिले अवशेष बरामद किए हैं। उनका डीएनए परीक्षण कराया जाएगा, इसके बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि अवशेष मोहनदेई के हैं या नहीं। आरंभिक रूप से सुरेश की तहरीर के आधार पर महेंद्रपाल के विरुद्ध हत्या, साक्ष्य मिटाने की धारा में प्राथमिकी पंजीकृत करा दी गई है। वह फरार है। घटनाक्रम से आहत बीना भी मायके पहुंचीं।
भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले में शाहपुर से भाजपा विधायक राकेश रंजन उर्फ राकेश रंजन ओझा की हत्या की कथित साजिश का मामला सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन में हलचल मच गई है। विधायक को डाक के माध्यम से मिले एक गुमनाम पत्र के आधार पर भागलपुर विशेष केंद्रीय कारा के जेल अधीक्षक समेत चार लोगों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।
गुमनाम पत्र में लगाए गए गंभीर आरोप
विधायक राकेश रंजन ओझा के अनुसार, 8 जुलाई को उनके पैतृक घर पर डाक से एक गुमनाम पत्र मिला था। पत्र में दावा किया गया था कि भागलपुर जेल में बंद कुछ आरोपी उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। साथ ही जेल अधीक्षक पर भी बंदियों की कथित मदद करने और साजिश में सहयोग देने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
चार लोगों के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी
विधायक के बयान के आधार पर करनामेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसमें भागलपुर विशेष केंद्रीय कारा के जेल अधीक्षक राजीव कुमार झा, आरा कोर्ट बम ब्लास्ट मामले के आरोपी लंबू शर्मा, बक्सर निवासी कुबेर मिश्रा और सोनबरसा निवासी हरीश मिश्रा को नामजद किया गया है। पुलिस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामले की जांच कर रही है।
पत्र में हैंड ग्रेनेड और शूटर का भी जिक्र
गुमनाम पत्र में यह भी दावा किया गया कि विधायक की हत्या के लिए हैंड ग्रेनेड की व्यवस्था की गई है और कथित शूटर के जरिए वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई गई है। पत्र मिलने के बाद विधायक ने तत्काल पुलिस को इसकी जानकारी दी और पूरा पत्र जांच के लिए सौंप दिया।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गुमनाम पत्र में लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है। फिलहाल किसी भी दावे की पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां पत्र की प्रामाणिकता, उसमें दर्ज आरोपों और नामजद लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
पहले भी निशाने पर रह चुका है विधायक का परिवार
विधायक राकेश रंजन ओझा के परिवार का पहले भी आपराधिक घटनाओं से सामना हो चुका है। वर्ष 2016 में उनके पिता और भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष विशेश्वर ओझा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा अप्रैल 2025 में स्वयं विधायक पर भी फायरिंग की घटना हुई थी। ऐसे में इस नए मामले की जांच को पुलिस गंभीरता से आगे बढ़ा रही है।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा कदम उठाते हुए सागर सोनकर और उसके भाई साहिब को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों कथित हत्या की साजिश का हिस्सा थे। CBI की चार्जशीट में दोनों के नाम शामिल हैं और मामले में कथित आर्थिक लेनदेन समेत कई पहलुओं की जांच जारी है।
राजनीति से जुड़े रहे हैं सागर सोनकर
सागर सोनकर का परिवार लंबे समय से कोलकाता के श्यामपुकुर इलाके में रह रहा है और उसके कई सदस्य विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं। सागर ने पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) की विधायक शशि पांजा के कार्यालय में काम किया था। बाद में वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गया और कथित तौर पर नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव चंद्रनाथ रथ के साथ काम करने लगा।
CBI को साजिश के मिले कथित सुराग
CBI का दावा है कि जांच के दौरान सागर सोनकर की भूमिका संदिग्ध पाई गई। एजेंसी के अनुसार, भाजपा में शामिल होने के बाद भी उसके संपर्क एक प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल से बने हुए थे। जांच में इन संपर्कों और कथित बातचीत को हत्या की साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में सुनवाई और जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
40 लाख रुपये के कथित लेनदेन की जांच
जांच एजेंसी के मुताबिक, दिसंबर 2025 से हत्या की कथित योजना तैयार की जा रही थी। CBI का आरोप है कि इस साजिश के दौरान करीब 40 लाख रुपये के कथित लेनदेन के संकेत मिले हैं। एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि इस धन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।
11 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट
CBI ने इस मामले में कुल 11 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें कथित शूटर, बिचौलिये और अन्य संदिग्ध शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि सभी आरोपियों की भूमिका और उनके बीच संबंधों की विस्तृत जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि 6 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम आने के दो दिन बाद उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी चर्चित रहा है और इसकी जांच अब भी जारी है।
पूर्वी दिल्ली के गगन विहार में हुई एक महिला की हत्या ने सभी को झकझोर कर रख दिया है. पुलिस का दावा है कि 62 साल के सॉफ्टवेयर कंसल्टेंट कमल सिंह ने अपनी पत्नी कोमल सिंह की हत्या की पूरी साजिश एक क्राइम वेब सीरीज देखने के बाद रची. हत्या के बाद वह सबूत मिटाने की कोशिश करता रहा और करीब 12 लाख 75 हजार रुपये नकद लेकर नेपाल भागने की योजना बना ली. हालांकि दिल्ली पुलिस ने चार दिन बाद उसे मथुरा रेलवे स्टेशन के पास गिरफ्तार कर लिया.
एक घर में रहते थे, लेकिन रिश्ते टूट चुके थे
पुलिस के मुताबिक कमल और कोमल की शादीशुदा जिंदगी पिछले करीब एक साल से बेहद तनावपूर्ण चल रही थी. जांच में सामने आया कि मुंबई की एक यात्रा के दौरान कमल की किसी दूसरी महिला से नजदीकियां बढ़ गई थीं. इसके बाद वह पत्नी से अलग रहने लगा.
Delhi Murder Case: कमल सिंह
दोनों एक ही घर में रहते थे लेकिन घर को दो हिस्सों में बांट दिया गया था. यहां तक कि अलग-अलग बिजली के मीटर लगा दिए गए थे और कोमल को अपने हिस्से का बिजली बिल खुद भरना पड़ता था. पुलिस का कहना है कि कमल नहीं चाहता था कि पत्नी या बच्चे उसके हिस्से में आएं.
जांच में सामने आया कि कमल जगतपुरी में एक प्रॉपर्टी खरीदना चाहता था. वह चाहता था कि रजिस्ट्री अपने पिता के नाम हो, जबकि कोमल चाहती थीं कि उनका भी उसमें हिस्सा हो. इसी बात को लेकर दोनों के बीच लगातार झगड़े होते थे. पुलिस के मुताबिक इसी विवाद के बाद कमल ने जुलाई महीने में पत्नी की हत्या की योजना बना ली. उसने हरि नगर इलाके से एक तलवार खरीदी और उसे छिपाकर रख दिया.
Delhi Murder Case: कोमल सिंह
वेब सीरीज देखकर बनाया कथित प्लान
पुलिस जांच के मुताबिक कमल सिंह इन दिनों एचबीओ (HBO) की चर्चित क्राइम सीरीज द स्टेयरकेस (The Staircase) देख रहे थे. इस सीरीज की कहानी एक ऐसे हत्या के मामले पर आधारित है जिसमें पत्नी की हत्या तो होती है, लेकिन हत्या का हथियार कभी बरामद नहीं हो पाता. पुलिस का कहना है कि कमल ने भी इसी तरह हत्या का हथियार गायब करने की योजना बनाई ताकि उसके खिलाफ सबूत कमजोर पड़ जाएं.
10 मिनट में अंजाम दी गई वारदात
पुलिस के मुताबिक 30 जुलाई को दोपहर के समय घर में केवल कमल और कोमल मौजूद थे. बेटा लाइब्रेरी जा चुका था, बेटी कार्यालय में थी और घरेलू सहायिका भी घर छोड़कर जा चुकी थी. दोपहर करीब 12:45 बजे कमल उस स्थान पर पहुंचा जहां कोमल बालकनी में कपड़े सुखा रही थीं. पुलिस का आरोप है कि उसने पीछे से तलवार के हिस्से से उनके सिर पर हमला किया. हमले के बाद कोमल जान बचाने के लिए रसोई की ओर भागीं. आरोप है कि कमल ने उन्हें बाल पकड़कर बाहर घसीटा और फिर कैंची से लगातार कई वार किए. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर दस से अधिक गंभीर घाव पाए गए. पुलिस के अनुसार पूरी वारदात लगभग दस मिनट के भीतर अंजाम दी गई.
पूरे घर में गूंजती रहीं चीखें
पुलिस के अनुसार महिला की चीखें पूरे मकान में सुनाई दे रही थीं. पुलिस ने बताया कि कमल के पिता ने परिवार के अन्य सदस्य से जाकर देखने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर कहा कि रहने दो. किसी ने बीच-बचाव नहीं किया.
हत्या के बाद शुरू हुआ फरार होने का प्लान
वारदात के बाद आरोपी ने कथित रूप से खून से सने कपड़े और हथियार को एक बैग में रखा. तलवार का हिस्सा दिखाई देने पर उसे तकिए के कवर से ढंक दिया गया. इसके बाद वह करीब 15 मिनट तक नहाया और फिर स्कूटर लेकर घर से निकल गया. रास्ते में उसने हत्या से जुड़ा बैग सुनसान इलाके में फेंक दिया. पुलिस के मुताबिक उसने दो बैंकों से करीब 7 लाख रुपये निकाले. इसके अलावा घर से पहले ही लगभग 5 लाख रुपये ले चुका था. उसके पास कुल करीब 12.75 लाख रुपये नकद थे.
बेटे ने खोला दरवाजा, सामने था खौफनाक मंजर
कमल का 26 वर्षीय बेटा गौरव सिंह दिनभर नोएडा की लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहा था. मेडिकल पीजी प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे गौरव ने दिन में कई बार मां को फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. शाम करीब 9:15 बजे वह घर पहुंचा और दूसरी चाबी से दरवाजा खोला. अंदर पहुंचते ही उसने मां को खून से लथपथ हालत में लिविंग रूम में पड़ा देखा. पास में कैंची मिली, लेकिन कथित हत्या का मुख्य हथियार तलवार वहां मौजूद नहीं थी. वहीं पिता भी घर से फरार थे..
नेपाल के रास्ते घुमाया, मथुरा में पकड़ाया
दिल्ली पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपी की तलाश शुरू की. पुलिस के अनुसार उसने शुरुआत में गोरखपुर की दिशा में जाकर अपना मोबाइल सक्रिय किया ताकि जांच एजेंसियों को लगे कि वह नेपाल भाग गया है. बाद में उसने मोबाइल बंद कर दिया और मथुरा की ओर निकल गया. हालांकि यह प्लान ज्यादा देर तक काम नहीं आया. 2 अगस्त को पुलिस ने उसे मथुरा रेलवे स्टेशन के पास गिरफ्तार कर लिया.
अब भी नहीं मिला हत्या का हथियार
गिरफ्तारी के समय आरोपी के पास से 12.75 लाख रुपये नकद बरामद किए गए. वारदात में इस्तेमाल स्कूटर भी जब्त कर लिया गया है. हालांकि पुलिस अब तक हत्या में इस्तेमाल की गई तलवार बरामद नहीं कर पाई है. आरोप है कि कमल ने जानबूझकर उसे रास्ते में फेंक दिया ताकि हत्या का सबसे अहम सबूत पुलिस के हाथ न लग सके. दिल्ली पुलिस का कहना है कि आरोपी ने पूछताछ में हत्या की साजिश, पारिवारिक विवाद और फरार होने की पूरी योजना के बारे में जानकारी दी है. पुलिस अब हत्या में इस्तेमाल हथियार की तलाश कर रही है और मामले के सभी पहलुओं की जांच जारी है. फिलहाल आरोपी न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहा है.
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रायपुर में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही एक बीएड छात्रा की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस जांच में सामने आया है कि छात्रा ने घटना से एक दिन पहले अपनी बहन को फोन कर मारपीट की शिकायत की थी. अगले ही दिन उसकी मौत की खबर परिवार तक पहुंची. पुलिस के मुताबिक, आरोपी युवक ने पहले छात्रा के साथ मारपीट की और फिर उसका गला दबा दिया. मामले में हत्या का केस दर्ज कर आरोपी को हिरासत में ले लिया है.
मृतका की पहचान कांकेर जिले के कोकपुर गांव की निवासी के रूप में हुई है. छात्रा रायपुर के विकास महाविद्यालय में बीएड की पढ़ाई कर रही थी. जानकारी के अनुसार, वह पिछले छह से सात महीने से सावंत बघेल के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी. दोनों रायपुर के मुजगहन थाना क्षेत्र स्थित बोरियाकला हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में एक साथ रहते थे.
लंबे समय से थी दोनों की पहचान
पुलिस जांच में सामने आया है कि छात्रा और सावंत एक-दूसरे को काफी समय से जानते थे. बाद में दोनों ने साथ रहने का फैसला किया. आरोपी सावंत बघेल मूल रूप से कोंडागांव का रहने वाला है और डीएलएड
की पढ़ाई कर रहा है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, दोनों के बीच संबंधों को लेकर अक्सर विवाद होता था.
परिजनों और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या रिश्ते में बढ़ते तनाव ने इस वारदात
को जन्म दिया. बताया जा रहा है कि सावंत अक्सर छात्रा पर शक करता था. इसी बात को लेकर दोनों के बीच कई बार कहासुनी और विवाद भी हुआ था.
बहन को बताई थी मारपीट की बात
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि छात्रा ने घटना से एक दिन पहले अपनी बहन को फोन किया था. उसने बताया था कि सावंत ने उसके साथ मारपीट की है. परिवार का कहना है कि उन्हें अंदेशा नहीं था कि मामला इतनी गंभीर स्थिति तक पहुंच जाएगा. अब यही जानकारी पुलिस जांच का भी अहम हिस्सा बन गई है.
मारपीट के बाद गला दबाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, आरोपी युवक पर मारपीट के बाद भारती का गला दबाकर हत्या करने का आरोप है. घटना के बाद वह युवती को गंभीर हालत में अंबेडकर अस्पताल लेकर पहुंचा. अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद छात्रा को मृत घोषित कर दिया. युवती की मौत की जानकारी मिलते ही आरोपी अस्पताल से भाग निकला. हालांकि बाद में परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया और आरोपी को हिरासत में ले लिया.
पुलिस कर रही मामले की जांच
मुजगहन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और आरोपी के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना के पीछे वास्तविक वजह क्या थी और वारदात से पहले दोनों के बीच क्या हुआ था.
: सोनहा थाना क्षेत्र के सेखुई गांव में चोरों ने एक घर को निशाना बनाते हुए कमरे में रखा बक्सा खोलकर जेवरात और नगदी चोरी कर ली। घटना की जानकारी शुक्रवार सुबह परिजनों के जागने पर हुई, जिसके बाद परिवार में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार, सेखुई गांव निवासी केशराम चौधरी पुत्र भगवती के मकान में पीछे बनी घारी के रास्ते चोर घर के अंदर दाखिल हुए। चोरों ने कमरे में रखा बड़ा बक्सा खोलकर उसमें रखे जेवरात और नगदी पर हाथ साफ कर दिया।
शुक्रवार सुबह जब परिजन उठे तो कमरे का दरवाजा और बक्सा खुला मिला। बक्से में रखा सामान जमीन पर बिखरा पड़ा था। चोरी की जानकारी होते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए।
पीड़ित की सूचना पर यूपी-112 पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी।
केशराम चौधरी ने बताया कि गुरुवार रात भोजन करने के बाद परिवार के लोग बरामदे में सो गए थे। उनकी पत्नी और छोटी बेटी अंदर कमरे में सो रही थीं, जबकि बड़ी बेटी खुशबू ने कमरे में ताला लगाकर चाबी तकिये के नीचे रख दी थी।
आरोप है कि शुक्रवार भोर में चोर पीछे के रास्ते से घर में घुसे और चाबी निकालकर कमरे का ताला खोल दिया। इसके बाद बक्सा खोलकर उसमें रखे एक जोड़ी पायल, सोने की कान की बाली, चैन, मंगलसूत्र, कान का झाला, सुई-धागा सहित अनाज बेचकर रखे 30 हजार रुपये नकद चोरी कर ले गए। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और चोरों की तलाश में जुटी है।
अलीगढ़। मृतक आश्रित कोटे में नौकरी हासिल करने के लिए तथ्यों को छिपाने का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि मृतक कर्मचारी की पत्नी के जीवित होने के बावजूद उसके छोटे भाई ने खुद को आश्रित बताकर नौकरी प्राप्त कर ली। मामले में जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) ने नियुक्ति को निरस्त करने और आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
जिला पंचायत राज अधिकारी यतेंद्र सिंह के अनुसार, अकराबाद विकासखंड के ग्राम पंचायत अकबरपुर निवासी पंचायत कर्मचारी वीरपाल सिंह का 29 अगस्त 2022 को निधन हो गया था। इसके बाद उनके छोटे भाई केतपाल सिंह ने खुद को मृतक का आश्रित बताते हुए पंचायत राज विभाग में सफाई कर्मचारी के पद पर मृतक आश्रित कोटे से नियुक्ति हासिल कर ली।
जांच में सामने आया कि नियुक्ति के दौरान केतपाल सिंह ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया था। वह पहले से ही प्राथमिक विद्यालय दिहौली में शिक्षामित्र के पद पर कार्यरत था। वहीं, मृतक कर्मचारी की पत्नी ने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि वह जीवित हैं और नियमानुसार मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पाने की पहली पात्र वही थीं।
शिकायत के बाद कराई गई जांच में मृतक की पत्नी के जीवित होने की पुष्टि हुई। जांच अधिकारियों ने पाया कि केतपाल सिंह ने गलत जानकारी और भ्रामक तथ्यों के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी।
मामले में जिला विकास अधिकारी ने केतपाल सिंह की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं। साथ ही संबंधित अधिकारियों को उसके खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
शिमला : शिमला जिले के कुमारसैन थाना क्षेत्र में एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पीड़िता 11वीं कक्षा में पढ़ती है। आरोप है कि कुमारसेन के एक युवक ने पीड़िता से कई बार दुष्कर्म किया। पीड़िता के पिता की शिकायत पर कुमारसेन पुलिस ने आरोपित युवक के विरुद्ध केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी बड़ी बेटी 15 वर्ष की है और कक्षा 11 में पढ़ती है। बेटी ने अपनी मां को बताया कि कुमारसैन के एक गांव के आशीष नामक युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया तथा यौन उत्पीड़न किया। शिकायतकर्ता के अनुसार यह घटना पहले भी कई बार हुई थी।
पुलिस के मुताबिक मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(1) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के अंतर्गत दर्ज किया गया है और आरोपित के विरुद्ध कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
Hamirpur :
चार वर्ष पहले कक्षा नौ की छात्रा को दिल्ली ले जाने और दुष्कर्म करने के मामले पर जीजा, साले को सजा सुनाई गई है। गुरुवार को पॉक्सो कोर्ट के जज अनिल कुमार खरवार ने जीजा राजकुमार को 20 वर्ष और उसके साले अंकित कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एडीजीसी रुद्र प्रताप सिंह ने बताया कि दोनों को 29,500 का अर्थदंड भी लगाया गया है। बताया कि आरोपित अंकित स्कूल छोड़ने के बहाने छात्रा को सुमेरपुर से दिल्ली ले गया था, वहां से अपनी बड़ी बहन के घर ले आया। घर में अकेले पाकर जीजा राजकुमार ने उसके साथ दुष्कर्म किया, जिसके बाद आरोपी अंकित उसे अपने गांव महुआ ले गया।
पीड़िता को नौ महीने तक बंधक बनाकर रखा गया। इस बीच शादी करने का झांसा देता रहा, और गर्भवती होने पर जबरन गर्भपात करवाया। छात्रा के पिता को फोन पर आपत्तिजनक फोटो और वीडियो भेजता रहा। किसी को कुछ बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी। बताया कि पीड़िता के बयान के अनुसार अंकित ने बेल्टों से उसे कई बार मारा भी, और अंत में मारकर घर से भगा दिया।
जिसके बाद पीड़िता के पिता ने सुमेरपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। बताया कि मामले की निरंतर सुनवाई चल रही थी। दोष सिद्ध होने पर सजा सुनाई गई है। आरोपी अंकित को 19,500 का अर्थदंड और उसके जीजा राजकुमार को 20 वर्ष कठोर कारावास के साथ 10,000 का अर्थदंड भी लगाया गया है।
बेंगलुरु। पत्नी की फोन की लत और रील बनाने की आदत से परेशान पति ने ऐसा कदम उठा लिया, जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। उसने उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी।
कर्नाटक की कुंबलगोडु पुलिस की स्पेशल टीम ने बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रहने वाले धीरज कुमार को पत्नी रीमा कुमारी की हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया।
पत्नी की मोबाइल लत से परेशान होकर की हत्या
पुलिस के मुताबिक, दोनों को प्यार हुआ था और उन्होंने करीब 10 महीने पहले शादी की थी। इसके बाद वह रीमा के परिवार को बताए बिना उसे लेकर बेंगलुरु चला गया था। वे बेंगलुरु के गेरुपल्या में किराए के कमरे में रह रहे थे।
पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान, धीरज ने माना कि शादी के बाद रीमा की उसमें दिलचस्पी कम हो गई थी। रीमा ज्यादातर समय मोबाइल फोन पर लगी रहती थी।
अक्सर रील बनाती थी, उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने से मना करती थी। सिर्फ अपने लिए खाना बनाती थी और उसके काम से लौटने से पहले ही खाना खा लेती थी। उसने कहा कि वह खाना भी नहीं परोसती थी।
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पुलिस ने यह भी बताया कि रीमा, धीरज पर बेंगलुरु छोड़कर बिहार लौटने का लगातार दबाव बना रही थी, जो दोनों के बीच अक्सर होने वाली बहस की एक और वजह बन गया था।
आरोपित के कबूलनामे के मुताबिक, इन मुद्दों को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस हुई। बहस के दौरान, रीमा ने धीरज को डंडे से मारा।
गुस्से में आकर, धीरज ने उसके दुपट्टे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद, आरोपित ने उसके चेहरे को प्लास्टिक में लपेटा, शव को चादर से ढंका, उसे किराए के कमरे में ही छोड़ दिया और बिहार भाग गया।