गोरखपुर में पिता की डांट से नाराज 9वीं का छात्र स्कूल ड्रेस में साइकिल से वाराणसी भाग गया. सोशल मीडिया पर फोटो शेयर होने और पुलिस में शिकायत के बाद, वह अगले दिन खुद घर लौट आया. शुरुआत में उसने किडनैपिंग की झूठी कहानी गढ़ी, लेकिन पुलिस पूछताछ में सच उगल दिया.
यूपी के गोरखपुर में हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां पिता की डांट से नाराज एक 9वीं कक्षा का छात्र घर से भाग गया. उसकी ‘गुमशुदगी’ ने पुलिस और परिवार दोनों को खूब छकाया. बाद में जब वो वापस लौटा तो किडनैप होने की फर्जी कहानी भी सुनाई.
दरअसल, पिता की डांट से नाराज होकर नाबालिग बेटा ऐसा कदम उठाएगा कोई सोच भी नहीं सकता. बता दें कि रमेश यादव गोरक्षनाथ थाने में तहरीर लेकर पहुंचे थे. उन्होंने बताया कि उनका बेटा सुबह घर से स्कूल के लिए निकला और लापता हो गया. तहरीर दर्ज हुई लेकिन दूसरे दिन बुधवार को छात्र सुबह-सुबह खुद ही घर आ गया. परिजन खुशी से लिपटकर रोने लगे. उसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी कि बच्चा घर लौट आया है.
परिजन के पूछने पर छात्र ने एक झूठी कहानी बनाई और बताया कि अपहरण कर कुछ लोग उसे वाराणसी लेकर चले गए थे. लेकिन जब पुलिस ने पूछताछ की तो उसने बताया कि पिता की डांट से नाराज होकर वह खुद ट्रेन से वाराणसी चला गया था. बाद में काशी विश्वनाथ के दर्शन कर लौट आया. इस दौरान उसकी साइकिल गायब हो गई.
जानकारी के मुताबिक, रमेश यादव जिला महाराजगंज के नौतनवा थाना क्षेत्र के मुंडेहरा के रहने वाले हैं. वो अपने बेटे को पढ़ाने के लिए परिवार के साथ गोरखपुर में एक कमरा किराए पर लेकर रहते हैं. उन्होंने अपने बेटे का नौवीं कक्षा में गोरक्षनाथ थाना क्षेत्र के एक स्कूल में दाखिला कराया था. वह रोजाना साइकिल से स्कूल आता जाता है.
बीते दिनों रमेश ने किसी बात को लेकर बेटे को फटकार लगाई थी. इस फटकार से नाराज होकर बेटा ड्रेस पहनकर साइकिल से स्कूल तो निकला लेकिन वापस नहीं लौटा. जब देर शाम हो गई और बेटा घर नहीं पहुंचा तो काफी इंतजार और खोजबीन के बाद रिश्तेदारों ने सोशल मीडिया का सहारा लिया और बच्चों को ढूंढने के लिए फोटो शेयर की. पुलिस को सूचना दी.
मामले में गोरक्षनाथ थाने के प्रभारी विजय प्रताप सिंह ने बताया कि नौवीं का छात्र लापता हो गया था. पुलिस भी छानबीन में जुटी थी. लेकिन दूसरे दिन वह खुद ही घर लौट आया. उससे पूछताछ की गई तो उसने बताया कि पिता से नाराज होकर वह वाराणसी गया था.
अगरतला । अधिकारियों ने बताया कि डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने गुरुवार को अगरतला रेलवे स्टेशन पर बिहार से आई एक मालगाड़ी से 6.54 करोड़ रुपए से अधिक कीमत का प्रतिबंधित कफ सिरप का बड़ा जखीरा जब्त किया। त्रिपुरा में पिछले साल अक्टूबर में हुई बड़ी बरामदगी के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी कार्रवाई है। डीआरआई ने मालगाड़ी से एस्कुफ और फेयरडिल कफ सिरप की 100-100 मिलीलीटर की 55,626 बोतलें जब्त की हैं। इन दोनों कफ सिरप का अक्सर नशे के लिए गलत इस्तेमाल किया जाता है। एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि खुफिया जानकारी के आधार पर डीआरआई अधिकारियों ने असम राइफल्स, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के जवानों की मदद से खेप को रोका और सुब्रत देब (34) नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। त्रिपुरा के खोवाई जिले में एक प्राइवेट बिजनेस फर्म के मैनेजर बताए जा रहे देब कथित तौर पर राजधानी के बाहरी इलाके में स्थित अगरतला रेलवे स्टेशन पर गैर-कानूनी खेप लेने आए थे। अधिकारियों के अनुसार, यह खेप बिहार के कटिहार से बुक की गई थी और इसे मालगाड़ी से जुड़ी हाई-कैपेसिटी पार्सल वैन में भेजा गया था। एस्कुफ और फेयरडिल कफ सिरप में कोडीन फॉस्फेट और ट्रिप्रोलिडिन हाइड्रोक्लोराइड होते हैं। इन दवाओं का भारत, पड़ोसी देश बांग्लादेश और कुछ अन्य देशों में अक्सर नशे के रूप में गलत इस्तेमाल किया जाता है। डीआरआई ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 के तहत मामला दर्ज किया है, और तस्करी के इस रैकेट में शामिल सोर्स, इसे पाने वालों और इससे जुड़े बड़े नेटवर्क का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है। पिछले साल 17 अक्टूबर को त्रिपुरा पुलिस क्राइम ब्रांच (टीपीसीबी) ने अन्य सुरक्षा एजेंसियों की मदद से एक मालगाड़ी से लगभग 5.4 करोड़ रुपए की कीमत का प्रतिबंधित ‘एस्कफ’ कफ सिरप का बड़ा खेप जब्त किया। यह मालगाड़ी मुर्गियों का दाना, चावल और अन्य सामान लेकर 16 अक्टूबर को दिल्ली से पश्चिम त्रिपुरा के जिरानिया रेलवे स्टेशन पहुंची थी। इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें राजीव दासगुप्ता (42) भी शामिल थे, जिन्हें इस रैकेट के मुख्य सरगनाओं में से एक माना जाता है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि दासगुप्ता कई पूर्वोत्तर राज्यों में चल रहे ड्रग तस्करी के एक बड़े नेटवर्क में अहम भूमिका निभाते थे। आरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने कई बार त्रिपुरा और देश के अन्य हिस्सों के बीच चलने वाली ट्रेनों से गांजा (मारिजुआना) समेत नशीले और प्रतिबंधित पदार्थ जब्त किए हैं। इससे पता चलता है कि तस्कर अवैध सामान की तस्करी के लिए रेलवे नेटवर्क का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। –
तमिलनाडु में टीवीके प्रमुख विजय थलापति को सरकार बनाए दो महीने भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन सियासी उठा-पटक जारी है. राज्य में सियासी भूचाल तब आ गया, जब हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर टीवीके और डीएमके के बीच आर-पार की स्थिति बन गई. बुधवार (1 जुलाई) को दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे पर विधायकों की खरीद फरोख्त का आरोप लगाया है. हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर बीजेपी ने भी विजय थलापति की पार्टी पर तीखा हमला बोला है.
चेन्नई पुलिस ने बुधवार (1 जुलाई) को सरकार के विधायकों को पार्टी छोड़ने के लिए उकसाने की कथित साजिश के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें एक यूट्यूबर और करूर के दो डीएमके पदाधिकारी शामिल हैं. गिरफ्तारी के बाद यह मामला और बढ़ गया है. एन. एलैयाराजा की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है, जो कृष्णगिरि जिले के उथंगराई विधानसभा सीट से टीवीके से विधायक हैं.
उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि उन्हें सत्ताधारी पार्टी छोड़ने के लिए मनाने की बार-बार कोशिशें की गईं. उन्होंने यह भी दावा किया कि यूट्यूबर आई.पी.डी.एस. थिरुनावुक्करसु ने उनसे बार-बार संपर्क किया, बातचीत की और उनका समर्थन हासिल करने के लिए उन्हें धमकाया. शिकायत के आधार पर चेन्नई की ट्रिपलिकेन पुलिस ने मामला दर्ज किया और थिरुनावुक्करसु को गिरफ्तार कर लिया.
सरकार को अस्थिर करने की साजिश – मंत्री निर्मल कुमार
यह गिरफ्तारी मंत्री निर्मल कुमार के उस आरोप के एक दिन बाद हुई है, जिसमें कहा गया था कि टीवीके विधायकों को लालच देकर सरकार को अस्थिर करने की कोशिशें की जा रही थीं. जांचकर्ता उन दावों की जांच कर रहे हैं कि तीन टीवीके विधायकों को निशाना बनाया गया था और उनमें से सभी को पाला बदलने के लिए कथित तौर पर 15 करोड़ रुपए की पेशकश की गई थी.
पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी के करीबी माने जाने वाले दो डीएमके पदाधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद मामले ने राजनीतिक हलचल मचा दी है, पुलिस ने कहा कि इस कथित साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए आगे की जांच जारी है.
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DMK ने किया पलटवार
उधर, डीएमके ने राज्यपाल आरवी अर्लेकर को पत्र देकर मुख्यमंत्री थलापति विजय के खिलाफ जांच की मांग की है. डीएमके ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि एमडीएमके प्रमुख वाइको ने स्वीकार किया है कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने दो विधायकों को खरीदने की कोशिश की थी. एमडीएमके के दोनों विधायक, कडायनालूर से टीएम राजेंद्रन और सिरकाझी से एस. सेंथिल सेल्वन डीएमके के सिंबर पर चुनाव जीते हैं.
बीजेपी ने टीवीके पर साधा निशाना
हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों पर तमिलनाडु बीजेपी के प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने कहा, ‘टीवीके अलायंस अवसरवादी गठबंधन है. चाहे सीपीआईएम हो, कांग्रेस हो, आईयूएमएल हो, डीएमके गठबंधन का हिस्सा होने के चलते जनता ने सभी को नकार दिया. टीवीके ने विधायकों की खरीद-फरोख्त में जमकर हाथ बटाया. यह एक अवसरवादी और भ्रष्ट गठबंधन है.’
बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने भारत के साथ रिश्तों और तीस्ता नदी परियोजना को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ भरोसे, बराबरी और आपसी सम्मान के आधार पर संबंध चाहता है. साथ ही साफ किया कि तीस्ता मास्टर प्लान जैसे घरेलू प्रोजेक्ट्स पर फैसला लेने का पूरा अधिकार बांग्लादेश का है और वह अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेगा.
तीस्ता प्रोजेक्ट पर बांग्लादेश का रुख
तीस्ता मास्टर प्लान को लेकर रहमान ने कहा कि यह पूरी तरह बांग्लादेश का आंतरिक मामला है. उनका कहना था कि देश अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से इस परियोजना को आगे बढ़ाएगा और इसमें किसी दूसरे देश को परेशान होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस परियोजना के पक्ष में मजबूती से खड़ी है और इसका मकसद सिर्फ बांग्लादेश के लोगों का विकास और भलाई है.
‘अगर कोई नाराज होगा तो आम भेज देंगे’
शफीकुर रहमान ने बातचीत के दौरान हल्के अंदाज में कहा कि तीस्ता परियोजना से किसी को नाराज होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, ‘हम अपने देश के हित में यह योजना लागू करेंगे. हमारे दोस्त इससे खुश होंगे, दुखी होने की कोई वजह नहीं है. अगर कोई नाराज होता है तो हम उन्हें राजशाही के मशहूर आम भेजकर खुश करने की कोशिश करेंगे.’
भारत क्यों जता रहा है चिंता?
तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से गुजरते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है. इस नदी के पानी के बंटवारे और प्रबंधन को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से बातचीत चलती रही है. भारत की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि प्रस्तावित परियोजना सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब स्थित है. यह रणनीतिक इलाका भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है और इसे ‘चिकन नेक’ के नाम से भी जाना जाता है.
शेख हसीना से लेकर अब तक क्या बदला?
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार तीस्ता परियोजना पर भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छुक थी. हालांकि, अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद उनकी सरकार गिर गई. इसके बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार और अब तारिक रहमान के नेतृत्व वाली पूर्ण बहुमत की सरकार ने इस परियोजना में चीन के साथ सहयोग की दिशा में ज्यादा रुचि दिखाई है. इसी वजह से यह मुद्दा भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है.
वॉशिंगटन/हैमडेन:
अमेरिका के ओहायो राज्य में पुलिस ने एक जर्जर घर से एक ही परिवार के 16 बच्चों को बचाया है। अधिकारियों के मुताबिक, ये बच्चे बेहद ज्यादा गंदगी में रह रहे थे और बुरी तरह कुपोषित थे। कई बच्चे ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे, जबकि 18 साल की एक मानसिक रूप से दिव्यांग लड़की अपना नाम तक नहीं लिख सकती थी। इस मामले में बच्चों के माता-पिता और दादा-दादी समेत 4 वयस्कों पर बच्चों को गंभीर खतरे में डालने का मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने साफ किया है कि यह मामला केवल एक ही परिवार से जुड़ा है।
कैसे हुआ इस पूरे मामले का खुलासा?
ओहायो के अटॉर्नी जनरल एंडी विल्सन ने बताया कि पुलिस किसी दूसरे मामले की जांच के सिलसिले में तलाशी वारंट लेकर इस घर पहुंची थी। अधिकारियों को पहले से यह जानकारी नहीं थी कि घर के अंदर 16 बच्चे मौजूद हैं। जांच के दौरान जब पुलिस घर में दाखिल हुई तो वहां का दृश्य देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। बताया गया कि बच्चों का स्कूल में कभी दाखिला नहीं कराया गया था और परिवार के बाहर शायद ही किसी को उनके बारे में जानकारी थी।
किस हालत में कैद किए गए थे बच्चे?
जांच अधिकारियों के अनुसार, बच्चों की उम्र डेढ़ साल से लेकर 18 साल तक थी। इनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि पिछले करीब 4 साल से बच्चों को घर के एक छोटे से कमरे में ही रखा जा रहा था। यह कमरा लगभग 12 फीट × 12 फीट का था। कमरे और घर के आसपास मानव मल फैला हुआ था और हर तरफ गंदगी का अंबार लगा था। विंटन काउंटी के शेरिफ रयान केन ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा। उनके शब्दों में,
हालांकि अधिकारियों को घर में कोई पिंजरा नहीं मिला, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि बच्चों को कमरे के अंदर किस तरह रखा जाता था।
बच्चों को कमरे में बेहद गंदे तरीके से रखा गया था।
अधिकारियों ने बच्चों के बारे में क्या कहा?
अटॉर्नी जनरल एंडी विल्सन ने बताया कि कई बच्चे सामान्य रूप से बातचीत नहीं कर पा रहे थे। 18 साल की मानसिक रूप से दिव्यांग एक लड़की अपना नाम तक नहीं लिख सकती थी। उन्होंने कहा कि बच्चों की हालत ऐसी थी कि वे ‘लगभग जंगली जानवरों जैसे दिखाई दे रहे थे।’ बच्चों को बचाने के तुरंत बाद 7 बच्चों को इलाज के लिए कोलंबस के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इनमें से 2 बच्चों को हेलिकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार को एक बच्चे की हालत बेहद गंभीर थी, जबकि अन्य बच्चों को भी इलाज और विशेष देखभाल की जरूरत पड़ी।
पुलिस जब बच्चों के कमरे में पहुंची तो हैरान रह गई थी।
क्या हैं इस केस के आरोपियों के नाम?
विंटन काउंटी के अभियोजक विलियम आर्चर ने बताया कि बच्चों को गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचाने के आरोप में चारों वयस्कों पर सेकेंड-डिग्री फेलोनी चाइल्ड एंडेंजर्मेंट का मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल सभी बच्चों को ओहायो डिपार्टमेंट ऑफ जॉब्स एंड फैमिली सर्विसेज की अस्थायी देखरेख में रखा गया है।
आरोपियों के नाम हैं:
गैरी साइडर्स जूनियर
गैरी साइडर्स सीनियर
क्रिस्टीना साइडर्स
एलिजाबेथ साइडर्स
बुधवार को सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उनकी ओर से दोषी न होने की दलील दर्ज की और प्रत्येक की जमानत 3 लाख अमेरिकी डॉलर तय की। अभी तक किसी आरोपी के लिए वकील नियुक्त नहीं किया गया है।
पुलिस ने इस मामले में बच्चों के 4 परिजनों को आरोपी बनाया है।
बच्चों को दुनिया से कैसे छिपा पाए आरोपी?
जांच में सामने आया है कि यह परिवार पिछले करीब 20 साल से दक्षिणी ओहायो के अलग-अलग इलाकों में रहता रहा। अधिकारियों का कहना है कि परिवार ने जानबूझकर बच्चों के मेडिकल रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेज तैयार नहीं होने दिए, ताकि किसी को उनके बारे में पता न चल सके। अभी यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस परिवार की शिकायत पहले कभी किसी बाल संरक्षण एजेंसी के पास पहुंची थी। बता दें कि हैमडेन गांव की आबादी एक हजार से भी कम है। यह ओहायो की राजधानी कोलंबस से लगभग 97 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
घर के बाहर टूटे टायर, बच्चों की टूटी साइकिलें, प्लास्टिक की मेज जैसी चीजें नजर आती थीं।
पड़ोसियों को भी नहीं थी बच्चों की जानकारी
जिस घर से बच्चों को बरामद किया गया, वह हैमडेन गांव में रेलवे लाइन के पास स्थित है। आसपास पेड़ और घनी झाड़ियां होने के कारण घर काफी अलग-थलग था, हालांकि सड़क से वह साफ दिखाई देता था। घर के बाहर टूटे टायर, बच्चों की टूटी साइकिलें, प्लास्टिक की मेज, हाई चेयर, शिशुओं को ले जाने वाले कैरियर और अन्य कबाड़ बिखरा हुआ मिला। पड़ोसी जोसेफ स्टीवर्ट ने बताया कि परिवार के यहां रहने आने के बाद उन्होंने कभी किसी बच्चे को बाहर खेलते नहीं देखा। उन्होंने कहा, ‘मैं रोज इस घर के सामने से गुजरता था, लेकिन यहां कभी कोई बच्चा दिखाई नहीं दिया।’
अमेरिका में पहले भी सामने आया है ऐसा केस
अमेरिका में इससे पहले भी परिवार के भीतर बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार का बड़ा मामला सामने आ चुका है। साल 2019 में कैलिफोर्निया के डेविड और लुईस टर्पिन ने अपने 13 बच्चों को सालों तक प्रताड़ित करने, उन्हें जंजीरों से बांधकर रखने, भूखा रखने और बेहद सीमित शिक्षा देने के आरोप स्वीकार किए थे। दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। उन्हें 2018 में तब गिरफ्तार किया गया था, जब उनकी 17 साल की बेटी घर से भागकर बाहर निकली और 911 पर फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी थी।
पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी. पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी ने वारदात से पहले उसका पूर्वाभ्यास किया था.
Ketan Aggrawal Murder: पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी. पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी ने वारदात से पहले उसका पूर्वाभ्यास किया था. पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड में पुलिस की जांच में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं. इस मामले में अब एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. जांच में पुणे ग्रामीण पुलिस को पता चला कि आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी ने 18 जून को लोहगढ़ किले की एक चट्टान से अग्रवाल को धक्का देने से पहले मार्केट यार्ड के पास एक पहाड़ी पर धक्का देने का पूर्वाभ्यास किया था.
हत्या करने से पहले दो बार किया था पूर्वाभ्यास
पुणे ग्रामीण पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सिया गोयल और चेतन ने केतन को लोहगढ़ किले से नीचे धकेलने से पहले पुणे के लुल्लानगर स्थित सेक्टर-37 में दो बार धक्का देकर मारने का पूर्वाभ्यास किया था. पुलिस का मानना है कि केतन की हत्या कई सप्ताह की सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी. दोनों ने पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान पहाड़ी पर इस काम की प्रैक्टिस करने की बात कबूल की.
केतन को हत्या से पहले सिया के प्रेम-प्रसंग का था शक
पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल को अपनी हत्या से पहले मंगेतर सिया गोयल पर गहरा शक हो गया था. केतन ने अपने परिवार से चिंता जताई थी कि सिया का किसी और के साथ प्रेम-प्रसंग चल रहा है. उसने पिता से पूछा था कि क्या शादी तय करने से पहले लड़की के बैकग्राउंड की ठीक से जांच-पड़ताल की गई है? पुलिस शिकायत के अनुसार केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने बताया कि सिया अक्सर बातचीत के दौरान अपने प्रेमी चेतन चौधरी का नाम लेती थी. जब भी केतन उसे फोन करता, उसका नंबर व्यस्त आता था. इससे पहले सिया ने बाली (इंडोनेशिया) में होने वाली प्री-वेडिंग ट्रिप को भी छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा कर रद्द कराया था. 6 जून को ट्रिप कैंसिल होने के बाद जब केतन ने पिता से शिकायत की तो पिता ने सिया को कम उम्र का बताकर बात संभाल ली थी. दोनों की शादी नवंबर में होनी थी. मगर, 18 जून को केतन की हत्या कर दी गई.
वकील ने सिया के भाई को भेजा 10 करोड़ का मानहानि नोटिस
इस हत्याकांड केस में अब नया कानूनी विवाद भी खड़ा हो गया है. आरोपी सिया गोयल का केस लड़ने को लेकर दो वकीलों, आशुतोष श्रीवास्तव और विपुल दुशिंग के बीच खींचतान शुरू हो गई है. 29 जून को वडगांव मावल कोर्ट में सुनवाई के दौरान सिया और उसके भाई साहिल गोयल ने कहा था कि उनके वकील विपुल दुशिंग हैं. आशुतोष श्रीवास्तव उन पर दबाव बना रहे हैं. इस बयान से नाराज होकर वकील आशुतोष श्रीवास्तव ने सिया के भाई साहिल को 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेज दिया है. नोटिस में मांग की गई है कि साहिल अपना बयान तुरंत वापस लें और सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगें.
महाराष्ट्र के सांगली जिले में 19 वर्षीय युवक की कथित आत्महत्या का मामला सामने आने के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है. इस घटना के बाद युवक की मां ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे पर धर्मांतरण का दबाव बनाया जा रहा था. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और अब तक उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है. पुलिस के अनुसार, मामले में एक आरोपी साहिल राजू बागवान को गिरफ्तार किया जा चुका है.
वहीं, जांच के दौरान जिस लड़की के साथ युवक की चैटिंग सामने आई है, उसकी उम्र 15 वर्ष बताई जा रही है. चूंकि वह नाबालिग है, इसलिए उसकी पहचान से जुड़ी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है.जांच एजेंसियां युवक के मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आत्महत्या से पहले किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था और परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है.
मृतक की मां की तहरीर पर शिकायत दर्ज
फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि धर्मांतरण के दबाव संबंधी आरोपों की भी जांच की जा रही है. अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी.पुलिस निरीक्षक अरुण सुगांवकर ने बताया कि दर्ज मामले में मृतक की मां भारती शेवाले की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया है.
आरोपियों ने धर्मांतरण का बनाया था दबाव
यह केस दो आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया गया है जिनमें से एक आरोपी का नाम साहिल बागवान है. मृतक के साथ आरोपी के चैट मिले है. जिसमें उन्होंने मृतक को उनके धर्म में आने के लिए कहा, जांच जारी है. कुल दो आरोपी हैं, एक महिला है. दोनों आरोपियों पर युवक को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है. दोनों के फोन की जांच की जा रही है. इस मामले में पुलिस सभी संबंधित पक्षों से पूछताछ कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
बेटे की मौत पर छलका मां का दर्द
भारती शेवाले, मृतक की मां ने बताया कि मेरा बेटा मुस्लिम लड़की के प्रेम में पड़ गया. उसकी उम्र 19 साल थी. उस पर साहिल बागवान और लड़की ने धर्मांतरण करने का दबाव बनाया. मेरा बेटा 23 तारीख को पुणे से घर आया था. बाद में वह अपने बेडरूम में गया. किसी का फोन आया था उसे और फिर उसने आत्महत्या कर ली. मेरा यही कहना कि मेरे बेटे को न्याय मिले. मेरा एक ही बेटा था.
नासिक का टीसीएस ऑफिस में धर्मांतरण केस
वहीं अभी हाल में ही महाराष्ट्र के नासिक में टीसीएस (TCS) कार्यालय में यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण का एक बड़ा मामला सामने आया था, जिसकी जांच SIT द्वारा की जा रही है. जांच में आरोप लगाया गया है कि कुछ मुस्लिम कर्मचारियों और एचआर (HR) द्वारा हिंदू कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बनाकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था. इस मामले में महिला कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया जाता था, नमाज पढ़ने की ट्रेनिंग दी जाती थी और बुर्का पहनने का दबाव बनाया जाता था. एसआईटी ने मामले की जांच करते हुए मुख्य आरोपी और एचआर मैनेजर निदा खान सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है.पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ नासिक कोर्ट में 1500 पन्नों की चार्जशीट भी दाखिल कर दी है.
शामली में आयुष मलिक का धर्मांतरण, फिर घर वापसी
उत्तर प्रदेश के शामली में चर्चित आयुष मलिक धर्मांतरण मामला सामने आया था जहां आयुष ने एक मुस्लिम युवती से विवाह के लिए इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था और अपना नाम मोहम्मद अली नाम रख लिया था. कुछ ही दिनों के बाद आयुष मलिक ने दोबारा सनातन धर्म में वापसी की थी और उसके बाद वीडियो जारी करके इस बात का ऐलान भी किया था. उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था.
आगरा में एक युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि पांच सितारा होटल में ट्रेनिंग के दौरान संपर्क में आया एक शेफ युवती पर दोस्ती का दबाव बना रहा था और लगातार उसे परेशान कर रहा था। इस मानसिक तनाव के चलते युवती अवसाद में चली गई थी। इलाज के बावजूद उसकी हालत बिगड़ती गई और मंगलवार सुबह एसएन मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
होटल ट्रेनिंग के दौरान हुई थी मुलाकात
मामला एकता थाना क्षेत्र के एक गांव का है। 24 वर्षीय युवती ने साल 2020 में होटल मैनेजमेंट का कोर्स पूरा किया था। इसके बाद उसने ताजगंज क्षेत्र स्थित एक पांच सितारा होटल में ट्रेनिंग की। इसी दौरान उसकी मुलाकात शेफ की ट्रेनिंग कर रहे एक युवक से हुई। युवती के भाई के अनुसार, बाद में बहन की नौकरी गुरुग्राम के एक होटल में लग गई, लेकिन आरोपी युवक ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और उस पर दोस्ती के लिए दबाव बनाने लगा।
मानसिक तनाव में नौकरी छोड़कर लौटी घर
परिजनों का कहना है कि युवक की हरकतों से परेशान होकर युवती मानसिक तनाव में रहने लगी। उसकी तबीयत बिगड़ने पर इलाज शुरू कराया गया। तनाव बढ़ने के बाद युवती नौकरी छोड़कर आगरा अपने घर लौट आई थी, लेकिन आरोपी ने उसे मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए परेशान करना जारी रखा।
दवाओं की अधिक मात्रा खाने से बिगड़ी हालत
भाई के मुताबिक, करीब 12 दिन पहले युवती ने मानसिक तनाव में आकर अपनी दवाओं की अधिक मात्रा खा ली। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे पहले निजी अस्पताल ले गए, जहां से बाद में एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान मंगलवार सुबह उसकी मौत हो गई।
मोबाइल चैट और वीडियो के आधार पर जांच
परिजनों ने युवती का मोबाइल देखने के बाद आरोप लगाया कि आरोपी शेफ ने इंस्टाग्राम और वाट्सएप पर खुद को नुकसान पहुंचाने से जुड़े वीडियो भेजे थे, जिससे युवती और अधिक अवसाद में चली गई। परिजनों ने मामले की शिकायत पुलिस से की है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है और मोबाइल व चैट के आधार पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
WhatsApp की सर्विस एक बार फिर से विवादों में घिरती हुई नजर आ रही है. वॉट्सऐप का यूजरनेम फीचर को भारत समेत दुनिया के कई देशों में जारी होने जा रहा है, उससे पहले ही भारत सरकार ने मेटा को एक नोटिस जारी किया और 3 दिनों के अंदर जवाब देने के निर्देश दिए हैं.
भारत सरकार ने बुधवार को वॉट्सऐप के विवादित यूजरनेम फीचर को लेकर Meta को नोटिस जारी किया है. साथ ही कंपनी को निर्देश दिए हैं कि जब तक इस मामले पर चर्चा और परामर्श की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, तब तक मेटा को वॉट्सऐप का यूजरनेम फीचर रोलआउट किया था.
भारत सरकार ने आशंका जताई है कि वॉट्सऐप के यूजरनेम फीचर का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. सरकार ने इस फीचर से पहचान की चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी बढ़ने की आशंका जताई है. Meta को निर्देश दिया है कि जब तक इस मुद्दे पर सरकार के साथ परामर्श प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर को भारत में रोलआउट न किया जाए.
केंद्र सरकार ने मेटा को बताया है कि वॉट्सऐप सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडियरी (SSMI) है और इसलिए उस पर आईटी एक्ट और आईटी नियमों के तहत निर्धारित सभी आवश्यक सावधानी लागू होती हैं.
WhatsApp ने क्या कहा?
WhatsApp के प्रवक्ता ने बताया है कि यूजरनेम फीचर अभी लाइव नहीं किया गया है. इस साल के अंत तक इसको जारी किया जाएगा. कंपनी के मुताबिक, फर्जी पहचान रोकने के लिए सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थाओं, सेलिब्रिटीज और Meta के वेरिफाइड अकाउंट्स से जुड़े यूजरनेम पहले से रिजर्व रखे हैं. इनके जैसे दिखने वाले कई अन्य नाम भी रिजर्व किए गए हैं.
भारत में वॉट्सऐप यूजरनेम के संभावित नुकसान क्या हैं?
फर्जी पहचान का खतरा
साइबर ठग वॉट्सऐप पर यूजरनेस का गलत इस्तेमाल करके किसी कंपनी, बैंक, सरकारी अधिकारी या किसी फेमस सेलिब्रिटी से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा दे सकते हैं. हालांकि कंपनी ने कहा है कि सेलिब्रिटी और जाने-माने नाम को रिजर्व रखा है.
साइबर फ्रॉड में होगा इजाफा
स्कैमर्स फोन नंबर छिपाकर लोगों से कॉन्टैक्ट करेंगे. इससे इनवेस्टमेंट स्कैम, फिशिंग, नौकरी स्कैम जैसे फ्रॉड में इजाफा होगा.
असली का पता लगाना होगा मुश्किल
वॉट्सऐप पर अभी मोबाइल नंबर दिखाई देता है, जिससे उसकी पहचान हो जाती है. अब यूजरनेम होने की वजह पहचानना मुश्किल हो जाएगा. ऐसे में अनजान लोगों पर भरोसना करना और भी मुश्किल हो जाएगा.
सरकारी जांच में चुनौती
वॉट्सऐप की मदद से होने पर ठगी में पहले नंबर आ जाता था, जिसकी वजह मोबाइल नंबर से पहचान करना आसान हो जाता था. अब यूजरनेम आधारित बातचीच से जांच एजेंसियों के लिए ट्रेस करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.
ब्रांड और बिजनेस की नकल
कस्टमर को बड़े ब्रांड के मिलते-जुलते नामों का इस्तेमाल करके ठगा जा सकता है. इसकी वजह न सिर्फ ब्रांड को बल्कि कस्टमर को भी भारी नुकसान हो सकता है.
भारत के जेलों की सिक्युरिटी बेहद टाइट होती है. कैदियों पर चौबीस घंटे नजर रखी जाती है. लेकिन फ़िनलैंड में एक ऐसी जेल है, जहां कैदी सजा काटते हैं या मजा लेते हैं, समझ नहीं आता. इस जेल में ना तो कोई गार्ड है और ना ही अपराधियों को जेल में बंद रखा जाता है.
दुनिया भर में जेलें सजा देने और अपराधियों को सुधारने का माध्यम मानी जाती हैं. लेकिन फिनलैंड ने जेल व्यवस्था को पूरी तरह नया रूप दे दिया है. यहां एक जेल ऐसी है जिसे देखकर लगता है कि कैदी सजा काटने नहीं बल्कि छुट्टियां मनाने आए हैं. फिनलैंड की कई जेलें ‘ओपन प्रिजन’ मॉडल पर चलती हैं. इन जेलों में ना तो ऊंची दीवारें हैं, ना बारबेड वायर और ना ही सख्त गार्ड. यहां कैदियों को हथकड़ियां नहीं पहनाई जातीं. उन्हें दिन के समय बाहर घूमने, काम करने और यहां तक कि कार चलाने की छूट होती है. सिर्फ रात में उन्हें जेल लौटना होता है.
कई कैदी लोकल टाउन में नौकरी करते हैं, दुकानों पर काम करते हैं या पढ़ाई जारी रखते हैं. वे परिवार से मिल सकते हैं और सामान्य जीवन जीते हैं. जेल प्रशासन कैदियों पर पूरा भरोसा करता है. अगर कोई नियम तोड़ता है तो उसे वापस क्लोज्ड जेल में भेज दिया जाता है.
क्यों अपनाया यह मॉडल? फिनलैंड का मानना है कि कैदियों को समाज से अलग करने की बजाय उन्हें समाज में वापस लाना चाहिए. सख्त जेलें अपराधी को और ज्यादा क्रूर बना सकती हैं. इसलिए यहां पुनर्वास (rehabilitation) पर जोर दिया जाता है. इस सिस्टम का नतीजा भी शानदार है. फिनलैंड में जेल से रिहा होने के बाद दोबारा अपराध करने की दर दुनिया में सबसे कम है– महज 20-30% जबकि कई देशों में यह 50-70% तक पहुंच जाती है.
एक दिन कैदी का सुबह कैदी उठते हैं, नाश्ता करते हैं और फिर काम पर निकल जाते हैं. कुछ फैक्ट्री में काम करते हैं, कुछ ऑफिस में. शाम को शॉपिंग, जिम या परिवार के साथ समय बिताने के बाद रात को जेल लौट आते हैं. कुछ कैदियों को सप्ताहांत पर घर जाने की भी अनुमति मिलती है. भारत में जेलें भारी भीड़ और कड़ी सुरक्षा वाली होती हैं. कैदियों को 24 घंटे नजर में रखा जाता है. ओपन जेल भारत में भी हैं लेकिन फिनलैंड जितनी आजादी नहीं मिलती. फिनलैंड का मॉडल दिखाता है कि विश्वास और सुधार से अपराध कम किया जा सकता है.