
आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में मानव जीवन से जुड़े तमाम पहलुओं का वर्णन किया है। चाणक्य की नीतियां आज भी लोगों के बीच प्रासंगिक है और इन्हें अपनाकर सफलता का रास्ता आसान बनाते हैं। चाणक्य नीति के लिए कहा जाता है कि इसे अपनाना मुश्किल होता है, लेकिन जिसने भी अपना लिया उसे सफलता जरूर प्राप्त होती है। चाणक्य ने नीति शास्त्र में बताया है कि व्यक्ति को किन लोगों से दुश्मनी मोल लेना चुनौतीपूर्ण सिद्ध हो सकता है। चाणक्य कहते हैं कि जीवन में सही रणनीति वही है जहां व्यक्ति को पता होता है कि कौन उसका हितैषी है और कौन दुश्मन। जानें चाणक्य नीति के अनुसार किनसे दुश्मनी नहीं करनी चाहिए।
1. अग्नि, सर्प, राजा और मूर्ख व्यक्ति:
श्लोक: राजा अग्निर्महासर्पो मूर्खश्च बहुनायकः।
अहर्निशं न सेव्यन्तः शीघ्रं कुर्वन्ति सङ्क्षयम्॥
श्लोक का अर्थ:
चाणक्य के अनुसार, राजा (प्रशासनिक शक्ति), अग्नि, विषैला सर्प और मूर्ख लोगों से कभी बैर या असावधानी नहीं रखनी चाहिए। यह किसी भी पल विनाश का कारण बन सकते हैं।
2. भेद को जानने वाला मित्र या रिश्तेदार
श्लोक: परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।
वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम्॥
श्लोक का अर्थ:
चाणक्य कहते हैं कि ऐसा व्यक्ति जो सामने मीठी-मीठी बातें करता हो, लेकिन पीठ पीछे काम बिगाड़ता हो, ऐसे लोगों से शत्रुता या लड़ाई नहीं करना परेशानी भरा हो सकता है। चाणक्य कहते हैं कि ऐसे लोग दूध से ढके विष के घड़े के समान हैं। चाणक्य कहते हैं कि जब कोई व्यक्ति आपका भेद जानता हो, तो उससे सीधे तौर पर बैर करने की बजाए उचित दूरी बना लेना समझदारी भरा होता है।
3. ज्ञानी, वैद्य और शस्त्रधारी:
चाणक्य कहते हैं कि कभी भी ज्ञानी व्यक्ति, वैद्य और जिस व्यक्ति के पास शस्त्र हो उससे शत्रुता नहीं करनी चाहिए। चाणक्य के अनुसार, वैद्य या डॉक्टर आपकी स्वास्थ्य की हर कमजोरी जानता है और आपके मर्ज के हिसाब से दवा देता है। लेकिन जब आप शत्रुता मान लेते हैं, तो वैद्य के पास जाना छोड़ सकते हैं, जिससे सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। चाणक्य कहते हैं कि ज्ञानी व्यक्ति से दुश्मनी मोल लेना अच्छा नहीं होता है, क्योंकि हो सकता है वह आपको ज्ञान की बातें बताना बंद कर दे। इसी तरह जिस व्यक्ति के पास तुरंत नुकसान या हानि पहुंचाने का साधन या बल हो, उससे टकराव करना आत्मघाती हो सकता है।

Leave a Reply