एक दिल, 20 KM और सिर्फ 16 मिनट… आर्मी अफसर की आखिरी इच्छा बनी किसी की नई जिंदगी, मिनटों में धड़कता दिल पहुंचा अस्पताल..

एक दिल, 20 KM और सिर्फ 16 मिनट… आर्मी अफसर की आखिरी इच्छा बनी किसी की नई जिंदगी, मिनटों में धड़कता दिल पहुंचा अस्पताल..
एक दिल, 20 KM और सिर्फ 16 मिनट… आर्मी अफसर की आखिरी इच्छा बनी किसी की नई जिंदगी, मिनटों में धड़कता दिल पहुंचा अस्पताल..

चंडीगढ़ के एक आर्मी अफसर के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए हृदय दान किया, जिसे ग्रीन कॉरिडोर बनाकर महज 16 मिनट में नोएडा के फोर्टिस अस्पताल पहुंचाया गया.

चंडीगढ़ के एक आर्मी अफसर ने दुनिया से विदा होने के बाद भी किसी जरूरतमंद को नई जिंदगी देने की मिसाल पेश की. ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिवार ने अफसर की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके अंगदान का फैसला लिया. उनका दिल नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती एक मरीज के हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए भेजा गया. दिल को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए पुलिस ने ऐसा ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे करीब 20 किलोमीटर का सफर सिर्फ 16 मिनट में पूरा हो गया.

हिंडन एयरपोर्ट से ग्रीन कॉरिडोर के जरिए पहुंचा दिल अफसर का हृदय चंडीगढ़ से हवाई जहाज के जरिए गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट लाया गया. यहां से इसे नोएडा के फोर्टिस अस्पताल, सेक्टर-62 तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती थी. अंगदान के मामलों में हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है, इसलिए गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर पुलिस ने आपसी तालमेल से ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया. नोएडा पुलिस के मुताबिक, 9 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 2:03 बजे हृदय को लेकर एंबुलेंस हिंडन एयरपोर्ट से रवाना हुई. ट्रैफिक पुलिस की टीम ने पूरे रास्ते यातायात को नियंत्रित किया और एंबुलेंस के लिए रास्ता साफ रखा.20 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 16 मिनट में तय पुलिस की निगरानी में एंबुलेंस बिना किसी बड़ी रुकावट के हिंडन एयरपोर्ट से फोर्टिस अस्पताल पहुंची. करीब 20 किलोमीटर की दूरी महज 16 मिनट में पूरी की गई. इस दौरान ट्रैफिक पुलिस की टीम लगातार एंबुलेंस की सुरक्षित और तेज आवाजाही सुनिश्चित करती रही.

अस्पताल पहुंचते ही शुरू हुआ ट्रांसप्लांट हृदय के अस्पताल पहुंचने से पहले ही डॉक्टरों की टीम ट्रांसप्लांट के लिए तैयार थी. एंबुलेंस के अस्पताल पहुंचते ही हृदय को मेडिकल टीम को सौंप दिया गया और हार्ट ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू कर दी गई. इस ग्रीन कॉरिडोर की मदद से मरीज को समय पर नया जीवन मिलने की उम्मीद मजबूत हुई. नोएडा पुलिस ने इसे कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर में सुरक्षित हृदय ट्रांसप्लांट के लिए बनाए गए पहले ग्रीन कॉरिडोर की कार्रवाई बताया है. इस पूरे अभियान में ट्रैफिक पुलिस की भूमिका बेहद अहम रही.

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