
Strange Snake Village China : भारत में कहीं पर भी सांप को पालने का चलन नहीं है. महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में स्थित शेतफल गांव सांपों के प्रसिद्ध है. गांव के घरों में सांपों के आराम करने और आने-जाने के लिए एक खास जगह बनाई जाती है, जिसे ‘देवस्थानम’ कहा जाता है. दुनिया का एक ऐसा गांव भी है जिसने लोगों की किस्मत बदल दी. यह गांव पड़ोसी देश चीन में है. इसका नाम जिसिकियाओ है. यह गांव स्नेक फार्मिंग के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है.
जिसिकियाओ गांव चीन में है. यहां के लोग पहले जैसे-तैसे गुजारा करते थे. अब हालात बदल गए हैं. गांव के लोग अब मोटा पैसा कमा रहे हैं. सांपों से झुर्रियां हटाने के लिए क्रीम, मर्दाना ताकत बढ़ाने वाला पाउडर और वाइन बना रहे हैं. इस गांव में हर साल तीस लाख सांप ब्रीड किए जाते हैं.
जिसिकियाओ गांव नहर के किनारे बसा हुआ है. यहां पर कभी बहुत गरीबी थी. यहां के लोग खेतीबाड़ी-मछली पकड़कर करके गुजारा करते थे. अब यहां सांपों से शराब बनाई जाती है. धूप में उन्हें सुखाकर सांपों से दवा तैयार करते हैं. चीन में इसे सांपों का गांव कहते हैं. इसी गांव के यांग होंग चांग बीते 40 साल से सांपों का कारोबार कर रहे हैं. यहां पर सांपों को शराब में डुबोकर भी रखा जाता है ताकि ड्रिंक बनाई जा सके. माना जाता है सापों से तैयार की गई शराब से जोड़ों का दर्द ठीक हो जाता है.
जिसिकियाओ गांव में सांपों की खेती 1980 के दशक में शुरू हुई. शुरुआत में जंगली सांपों का इस्तेमाल बीमारियों को ठीक करने में होता था. फिर गांव वालों ने इसे अपना पेशा बना लिया और सांपों की खेती करने लगे. अपनी किस्मत बदल ली. ये सांप इतने जहरीले हैं कि 10 मिनट की भी मोहलत नहीं देते. सांपों के बिजनेस की इतनी डिमांड है कि कंपनिया दोगुना मुनाफा कमा रही हैं.
स्नेक फार्म में लकड़ी और शीशे के छोटे-छोटे बक्सों में सांपों को पाला जाता है. जब वो बड़े हो जाते हैं तो सबसे पहले जहर निकालते हैं. जहर को सूखाते हैं. सूखे हुए जहर को दवा कंपनियां खरीदती हैं. इसके अलावा सांपों से स्नेक पाउडर, स्नेक क्रीम और स्नेक वाइन भी बनाई जाती है. ये चीजें बढ़ती उम्र के असर को रोकने, स्किन को बेहतर बनाने में इस्तेमाल होती हैं. कोरोना के समय यहां सांपों की फार्मिंग पर रोक लगा दी गई. पूरी दुनिया से डिमांड में भी कमी आई.

Leave a Reply