डायबिटीज में दोपहर बाद आती है सुस्ती? ब्लड शुगर कंट्रोल रखने के लिए डायटीशियन से जानें 5 हेल्दी ड्रिंक्स..

डायबिटीज में दोपहर बाद आती है सुस्ती? ब्लड शुगर कंट्रोल रखने के लिए डायटीशियन से जानें 5 हेल्दी ड्रिंक्स..
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डायबिटीज मरीजों के लिए ब्लड शुगर को कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। डायबिटीज मरीजों की ब्लड शुगर अक्सर खाने के बाद बढ़ने लगती है और दोपहर 3 बजे तक शरीर में कमजोरी और थकान महसूस होने लगती है। डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति आमतौर पर ब्लड शुगर के स्तर में अचानक उतार-चढ़ाव के कारण होती है। ऐसे में कई बार मरीज बिना सोचे-समझे चाय, कॉफी या पैक्ड जूस का सहारा ले लेते हैं, जो शुगर लेवल को और अधिक बिगाड़ सकता है।

रजिस्टर डाइटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट, इंटीग्रेटेड एवं फंक्शनल गट-हेल्थ विशेषज्ञ और हर्बलिस्ट जेना वोल्पे ने इटिंग वेल में छपे एक आर्टिकल में बताया है कि अगर आप डायबिटीज के शिकार हैं और दोपहर बाद आपकी शुगर बढ़ने लगती है तो आप अपनी डाइट में कुछ हेल्दी और असरदार ड्रिंक का सेवन करें। कुछ ड्रिंक का सेवन करने से गट हेल्थ में सुधार होता है, इंसुलिन का नेचुरल तरीके से निर्माण होता है और ब्लड शुगर का स्तर भी नॉर्मल रहता है।  डाइटिशियन के अनुसार, दोपहर के समय कम या बिना चीनी वाले कुछ ड्रिंक ब्लड शुगर को मैनेज करने वाली डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि कौन-कौन से ऐसे ड्रिंक है जिनका सेवन करके डायबिटीज मरीज दोपहर में होने वाली कमजोरी और थकान का इलाज कर सकते हैं और शुगर भी नॉर्मल रख सकते हैं।

बिना चीनी वाला स्पार्कलिंग वॉटर पिएं

बिना चीनी वाला स्पार्कलिंग वॉटर दोपहर के समय एक अच्छा ड्रिंक साबित हो सकता है। इसमें नींबू या लाइम का ताजा रस मिलाया जा सकता है। यह मीठा सोडा या शुगर वाले ड्रिंक्स की तुलना में कम चीनी और कार्बोहाइड्रेट वाला विकल्प है। डायबिटीज मरीजों की बॉडी को हाइड्रेट रखने में ये ड्रिंक असरदार साबित होता है। हेल्थलाइन के मुताबिक प्लेन स्पार्कलिंग वॉटर में 0 कैलोरी और 0 कार्बोहाइड्रेट होता हैं। मीठे सोडा की जगह इसे पीने से शरीर में अचानक इंसुलिन और ब्लड शुगर स्पाइक होने का जोखिम नहीं रहता। याद रखें कि बाजार से स्पार्कलिंग वॉटर खरीदते समय न्यूट्रिशन लेबल जरूर जांचें कि उसमें ‘No Added Sugar’ या ‘Zero Carbs’ लिखा हो। यदि आपको एसिडिटी या पेट फूलने की समस्या है, तो सादा पानी पीने को ही प्राथमिकता दें।

ग्रीन टी का करें सेवन

ग्रीन टी न सिर्फ कैलोरी और चीनी से फ्री ड्रिंक है बल्कि इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं। 2024 की एक समीक्षा में ग्रीन टी के सेवन से फास्टिंग ब्लड शुगर, इंसुलिन रेजिस्टेंस और HbA1c में मामूली सुधार देखा गया। Diabetes & Metabolism Journal में छपी खबर के मुताबिक ग्रीन टी में मौजूद मुख्य पॉलीफेनोल और एंटीऑक्सीडेंट EGCG (Epigallocatechin Gallate) इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है। इससे कोशिकाएं ग्लूकोज को सही तरीके से अवशोषित कर पाती हैं और इंसुलिन रेजिस्टेंस कम होता है।

प्रोटीन और फाइबर से भरपूर स्मूदी पिएं

स्मूदी को अक्सर ज्यादा शुगर वाला पेय माना जाता है, लेकिन सही सामग्री के साथ बनाई गई स्मूदी दोपहर के समय बेहतर विकल्प हो सकती है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट का संतुलन होता है। डाइटिशियन के अनुसार, इसमें हरी सब्जियां, ताजे फल, बिना चीनी वाला सोया मिल्क या डेयरी मिल्क, दही या केफिर और थोड़े नट्स, सीड्स या नट बटर शामिल कर उसका सेवन करें। साबुत फलों का इस्तेमाल जूस की तुलना में बेहतर विकल्प हो सकता है।

हर्बल टी का करें सेवन

कैमोमाइल, मिंट और अदरक जैसी हर्बल टी बिना कैफीन वाले ड्रिंक हैं और इनमें चीनी न मिलाई जाए तो ये दोपहर के समय पिया जा सकता हैं। कुछ अध्ययनों में कुछ हर्बल टी को हेल्दी तरीके से ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाले ड्रिंक के रूप में देखा जा सकता है। दालचीनी वाली चाय भी ब्लड शुगर मैनेजमेंट में मददगार साबित होती है।  हालांकि, दालचीनी या किसी भी हर्बल ड्रिंक को डायबिटीज की दवा का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

कम चीनी वाला प्रीबायोटिक सोडा

कम चीनी वाले प्रीबायोटिक सोडा में प्रीबायोटिक फाइबर मिलाया जाता है और आम सोडा की तुलना में इनमें कार्बोहाइड्रेट कम हो सकते हैं। फाइबर भोजन से कार्बोहाइड्रेट के पाचन और अवशोषण को प्रभावित कर सकता है, जिससे ब्लड शुगर में तेज बढ़ोतरी को सीमित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इनका सेवन भी सीमित मात्रा में करना चाहिए। ज्यादा प्रीबायोटिक फाइबर कुछ लोगों में गैस और पेट फूलने की समस्या पैदा कर सकता है।

ब्लड शुगर के लिए ड्रिंक चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • बिना चीनी या कम चीनी वाले ड्रिंक का करें चुनाव।
  • चाय-कॉफी में अतिरिक्त चीनी या शहद डालने से बचें।
  • फलों के जूस की जगह साबुत फल या संतुलित स्मूदी बेहतर विकल्प हो सकती है।
  • सिर्फ किसी एक ड्रिंक पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित डाइट और नियमित शारीरिक गतिविधि पर ध्यान दें।
  • डायबिटीज की दवा लेने वाले लोग अपनी दवा बिना डॉक्टर की सलाह के बंद या कम न करें।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। डायबिटीज या ब्लड शुगर से जुड़ी समस्या होने पर अपनी डाइट और दवाओं में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या रजिस्टर्ड डाइटिशियन की सलाह लें।

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