
नई दिल्ली। ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में शामिल डार्क मैटर को समझने की दिशा में वैज्ञानिकों को एक दिलचस्प संकेत मिला है। अमेरिका में जमीन के करीब एक मील नीचे स्थापित एक बेहद संवेदनशील डिटेक्टर ने एक ऐसी घटना रिकॉर्ड की है, जिसने वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने साफ किया है कि इसे डार्क मैटर की सीधी खोज कहना अभी जल्दबाजी होगी।
LZ डिटेक्टर ने दर्ज किया खास संकेत
यह संकेत LUX-ZEPLIN (LZ) नाम के डिटेक्टर से मिला है। इसे दुनिया के सबसे संवेदनशील डार्क मैटर डिटेक्टरों में माना जाता है। वैज्ञानिक लंबे समय से इसके जरिए ऐसे कणों की तलाश कर रहे हैं, जो डार्क मैटर के रहस्य को समझने में मदद कर सकें।
करीब 250 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम ने लगभग दो साल तक डिटेक्टर से मिले डेटा का विश्लेषण किया। इस टीम में छह देशों के 39 संस्थानों से जुड़े शोधकर्ता शामिल हैं।
विश्लेषण के दौरान वैज्ञानिकों को एक ऐसी घटना दिखाई दी, जिसमें किसी कण के एक परमाणु से टकराने के संकेत मिले। यही घटना अब वैज्ञानिकों के लिए खास दिलचस्पी का विषय बनी हुई है।
क्या यह WIMP कण हो सकता है?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस घटना के पीछे WIMP यानी Weakly Interacting Massive Particle की भूमिका हो सकती है। WIMP को डार्क मैटर के संभावित कणों में से एक माना जाता है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर डार्क मैटर का कोई कण सामान्य पदार्थ के परमाणु से टकराता है, तो उससे बेहद कमजोर संकेत पैदा हो सकता है। LZ जैसे डिटेक्टरों को इसी तरह के बेहद सूक्ष्म संकेतों को पकड़ने के लिए तैयार किया गया है।
हालांकि, सिर्फ एक घटना के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वैज्ञानिकों ने वास्तव में डार्क मैटर का कण पकड़ लिया है।
2.6 सिग्मा का संकेत कितना महत्वपूर्ण?
इस घटना को वैज्ञानिकों की ओर से 2.6 सिग्मा का महत्व दिया गया है। विज्ञान में सिग्मा का इस्तेमाल किसी परिणाम की सांख्यिकीय मजबूती को समझने के लिए किया जाता है।
आमतौर पर किसी नई वैज्ञानिक खोज को बेहद मजबूत प्रमाण मानने के लिए करीब 5 सिग्मा का स्तर महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में 2.6 सिग्मा का परिणाम दिलचस्प तो है, लेकिन इसे अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
ब्राउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिक गैटस्कैल ने भी स्पष्ट किया है कि टीम यह दावा नहीं कर रही कि उसने डार्क मैटर की खोज कर ली है। उनके मुताबिक, वैज्ञानिकों ने जरूर कुछ असामान्य और दिलचस्प देखा है, लेकिन इसकी सही व्याख्या के लिए अभी और अध्ययन की जरूरत है।
आखिर क्या है डार्क मैटर?
डार्क मैटर ब्रह्मांड के उन रहस्यमयी घटकों में से है, जिन्हें सीधे देखा नहीं जा सकता। यह सामान्य पदार्थ की तरह प्रकाश को उत्सर्जित या परावर्तित नहीं करता, इसलिए इसे सीधे पहचानना बेहद मुश्किल है।
फिर भी वैज्ञानिकों को इसके अस्तित्व के मजबूत संकेत मिलते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण इसका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव है, जो आकाशगंगाओं और ब्रह्मांड में मौजूद दूसरी वस्तुओं की गति को प्रभावित करता है।
वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार, ब्रह्मांड के कुल पदार्थ का लगभग 85 फीसदी हिस्सा डार्क मैटर हो सकता है। यही वजह है कि इसके वास्तविक स्वरूप और कणों की पहचान करना आधुनिक भौतिकी के सबसे बड़े सवालों में से एक बना हुआ है।
LZ डिटेक्टर से मिला नया संकेत इस रहस्य को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुराग जरूर हो सकता है, लेकिन वैज्ञानिकों को इसे पुख्ता खोज मानने के लिए अभी और डेटा तथा स्वतंत्र प्रमाणों की जरूरत होगी।

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