मक्खन का स्पर्श और शिवलिंग का चमत्कार! इस मंदिर की अनोखी परंपरा जानकर रह जाएंगे दंग..

मक्खन का स्पर्श और शिवलिंग का चमत्कार! इस मंदिर की अनोखी परंपरा जानकर रह जाएंगे दंग..
मक्खन का स्पर्श और शिवलिंग का चमत्कार! इस मंदिर की अनोखी परंपरा जानकर रह जाएंगे दंग..

हमारे देश में देवी देवताओं के कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपने चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं. ऐसा ही एक बेहद रहस्यमयी और अनोखा मंदिर देवभूमि हिमाचल प्रदेश में स्थित है. कुल्लू घाटी में पहाड़ों के ऊंचे शिखर पर बने इस मंदिर को बिजली महादेव के नाम से पुकारा जाता है.

ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यहां का नजारा बेहद खूबसूरत है. लेकिन इस मंदिर की सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि यहां हर 12 साल में आसमान से भयंकर बिजली गिरती है.

ये बिजली सीधे मंदिर के भीतर स्थापित शिवलिंग पर आकर गिरती है, जिसके बाद का नजारा किसी को भी हैरत में डाल सकता है.

हर 12 साल में आसमान से बरसती है शिव पर आकाशीय बिजली

जब इस मंदिर पर आकाशीय बिजली गिरती है, तो जोरदार धमाका होता है. बिजली के इस तगड़े झटके को झेलते ही गर्भगृह में मौजूद शिवलिंग पूरी तरह से चकनाचूर हो जाता है.

शिवलिंग के टुकड़े टुकड़े होकर पूरे मंदिर में बिखर जाते हैं. आम तौर पर अगर किसी पत्थर पर इतनी भारी बिजली गिरे, तो वह नामोनिशान खो देता है. लेकिन यहां भगवान शिव का ऐसा अनूठा चमत्कार होता है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी कोई नुकसान नहीं होता.

स्थानीय लोगों का मानना है कि महादेव अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए इस आकाशीय बिजली के झटके को खुद अपने ऊपर झेल लेते हैं.

मक्खन का लेप लगते ही चमत्कारी रूप से जुड़ जाते हैं टुकड़े

शिवलिंग के टूटने के बाद मंदिर के पुजारी एक खास परंपरा को निभाते हैं. वो बिखरे हुए शिवलिंग के सभी टुकड़ों को इकट्ठा करते हैं. इसके बाद एक अनोखा मरहम तैयार किया जाता है, जो पूरी तरह से मक्खन, सत्तू और अनसाल्टेड बटर से बनता है.

पुजारी इन टुकड़ों को आपस में मिलाकर उस पर मक्खन का गाढ़ा लेप लगाते हैं. जैसे ही ये लेप शिवलिंग पर लगाया जाता है, चमत्कार देखना शुरू हो जाता है. कुछ ही दिनों के भीतर वह टूटा हुआ शिवलिंग वापस अपने पुराने और ठोस रूप में आ जाता है.

ये देखकर डॉक्टर और वैज्ञानिक भी हैरान रह जाते हैं कि बिना किसी सीमेंट या गोंद के पत्थर आपस में कैसे पक्के जुड़ जाते हैं.

दैत्य कुलांत का वध करने के लिए शिव ने बनाया ये स्थान

इस अनोखे चमत्कार के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प पौराणिक कहानी जुड़ी हुई है. कहते हैं कि बहुत समय पहले इस घाटी में कुलांत नाम का एक भयंकर राक्षस रहता था.

वो राक्षस बहुत विशाल था और अजगर का रूप धारण कर सकता था. एक बार उसने पूरी घाटी को पानी में डुबोकर यहां के जीव जंतुओं को मारने की साजिश रची. भगवान शिव ने जब उसका यह रूप देखा, तो उन्होंने राक्षस का वध कर दिया.

राक्षस का विशाल शरीर एक बड़े पहाड़ में बदल गया, जिसे आज हम कुल्लू घाटी के नाम से जानते हैं. दैत्य के मरने के बाद शिव ने इंद्र देव से कहा कि वे हर 12 साल में यहां बिजली गिराया करें ताकि धरती पर कोई और संकट न आए.

विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया इस रहस्यमयी चुंबकीय पहाड़ी की गुत्थी

बिजली महादेव का यह रहस्य आज के आधुनिक विज्ञान के लिए भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. वैज्ञानिकों ने कई बार इस जगह की जांच की है. उनका कहना है कि इस ऊंचे पहाड़ के नीचे भारी मात्रा में चुंबकीय तत्व यानी आयरन ओर्स मौजूद हो सकते हैं.

इस वजह से जब भी आसमान में बिजली कड़कती है, तो वह इस पहाड़ी की तरफ तेजी से खिंची चली आती है. लेकिन विज्ञान के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि बिजली हमेशा सिर्फ शिवलिंग पर ही क्यों गिरती है.

साथ ही मक्खन लगाने से पत्थर का खुद ब खुद जुड़ जाना किसी दैवीय शक्ति से कम नहीं लगता. यही वजह है कि हर साल हजारों श्रद्धालु इस अद्भुत चमत्कार को देखने यहां खींचे चले आते हैं.

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