
क्या आपने कभी महसूस किया है कि सुबह-सुबह बिस्तर से उठते ही आपके दिल की धड़कन तेज चलने लगती है और ऐसा महसूस होता है कि जैसे दिल सीने से बाहर निकल रहा है? हालांकि ये थोड़ा डरावना अनुभव हो सकता है। आमतौर पर इस तरह की परेशानी कभी-कभी होने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे अचानक से सुबह झटके से उठ जाना या फिर डिहाइड्रेशन होने की वजह से कभी-कभी ये परेशानी हो सकती है। अगर आपको दिल धड़कने की ये समस्या अक्सर रहती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करें। अक्सर धड़कन अनियंत्रित महसूस होना ‘हार्ट रिदम विकार’ (Arrhythmia) का संकेत भी हो सकती है। कार्डियोलॉजिस्ट के मुताबिक सही समय पर इसके संकेतों को पहचानना और सामान्य घबराहट से इसका अंतर समझना दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी है।
बिस्तर से उठने के बाद दिल की धड़कन बढ़ने का कारण
ISIC मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, कार्डियक साइंसेज में डायरेक्टर एवं एचओडी, डॉ. असीम ढल्ल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया नींद से जागने के तुरंत बाद थोड़े समय के लिए दिल की धड़कन तेज होना काफी नॉर्मल है जिसके लिए परेशान होने की बात नहीं है। जागने के बाद कुछ देर के लिए इस तरह दिल का धड़कना नींद से जागने की प्रक्रिया में शरीर में होने वाला अचानक बदलाव है। जब शरीर नींद की अवस्था से जागने और सतर्क रहने की स्थिति में जाता है, तो एड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन रिलीज हो सकते हैं। इससे कुछ समय के लिए दिल की धड़कन बढ़ सकती है।
अगर नींद अचानक खुल जाए तो नर्वस सिस्टम शरीर में ‘फाइट या फ्लाइट’ रिस्पॉन्स को सक्रिय कर सकता है। इससे थोड़े समय के लिए हार्ट रेट बढ़ जाता है। हार्ट रेट बढ़ने के लिए और भी कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे बहुत ज्यादा जीवंत सपना, डरावना सपना, अचानक नींद खुलना, चिंता, भावनात्मक तनाव, शरीर में पानी की कमी, कैफीन का सेवन, नींद पूरी न होना, एड्रेनालिन का बढ़ना और नींद से जुड़ी कुछ समस्याएं भी दिल की धड़कन तेज होने की वजह बन सकती हैं। नींद के दौरान भी शरीर का नर्वस सिस्टम सक्रिय रहता है। इस दौरान आने वाले तेज या डरावने सपने शरीर में वैसी ही शारीरिक प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं, जैसी वास्तविक स्थिति में होती है। हालांकि, कई लोगों में दिल की धड़कन कुछ ही सेकंड में सामान्य हो जाती है। ऐसे मामलों में यह जरूरी नहीं कि यह किसी गंभीर दिल की बीमारी का संकेत हो।
कब तेज धड़कन हार्ट रिदम की समस्या का संकेत हो सकती है?
अगर दिल की धड़कन कुछ सेकंड के लिए तेज होती है और उसके बाद अपने आप नॉर्मल हो जाती है है और ऐसा कभी-कभार ही होता है, तो आमतौर पर यह गंभीर समस्या का संकेत नहीं होता। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो, बिना किसी कारण के कई मिनट तक बनी रहे तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। कुछ मामलों में एट्रियल फिब्रिलेशन (Atrial Fibrillation), सुप्रो वेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया (Supraventricular Tachycardia) या दिल की धड़कन की अन्य अनियमितताएं भी इस तरह के लक्षण पैदा कर सकती हैं। अगर दिल के अनियमित धड़कने की घटना बार-बार या लगातार बनी रहे तो तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट से जांच करानी चाहिए।
दिल की तेज धड़कन के साथ इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
अगर दिल की धड़कन तेज होने के साथ सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना, बेहोशी, बहुत ज्यादा कमजोरी, अत्यधिक पसीना, भ्रम की स्थिति या बेहोश होने जैसी समस्याएं महसूस होती है तो आप इसे नजरअंदाज नहीं करें। दिल की धड़कन का लगातार धड़कना इस बात का संकेत है कि दिल शरीर में पर्याप्त मात्रा में खून पंप नहीं कर पा रहा है या कोई गंभीर हृदय संबंधी समस्या मौजूद हो सकती है। खासकर बुजुर्गों या पहले से हृदय रोग से जूझ रहे लोगों में अगर धड़कन अनियमित महसूस हो तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
बार-बार ऐसा हो तो कौन-से टेस्ट कराए जा सकते हैं?
अगर नींद से जागने के बाद दिल की धड़कन तेज होने की समस्या बार-बार बनी रहे तो आप कुछ जरूरी जांच जैसे ECG कराएं जिसके जरिए दिल की धड़कन की जांच। होल्टर मॉनिटर या एम्बुलेटरी ECG के जरिए 24 घंटे या उससे ज्यादा समय तक हार्ट रिदम रिकॉर्ड करना, थायरॉइड और इलेक्ट्रोलाइट लेवल की जांच के लिए ब्लड टेस्ट तथा दिल की संरचना और कामकाज देखने के लिए इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram) शामिल हो सकते हैं। लक्षणों के आधार पर डॉक्टर स्लीप स्टडी की सलाह भी दे सकते हैं, ताकि स्लीप एपनिया जैसी समस्या का पता लगाया जा सके। स्लीप एपनिया भी रात में या नींद के दौरान दिल की धड़कन बढ़ने में भूमिका निभा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

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