कैंसर से जुड़े खतरनाक: माइक्रोब्स पर असर दिखाने वाली खास च्युइंग गम, लैब स्टडी में मिले चौंकाने वाले नतीजे

कैंसर से जुड़े खतरनाक: माइक्रोब्स पर असर दिखाने वाली खास च्युइंग गम, लैब स्टडी में मिले चौंकाने वाले नतीजे
कैंसर से जुड़े खतरनाक: माइक्रोब्स पर असर दिखाने वाली खास च्युइंग गम, लैब स्टडी में मिले चौंकाने वाले नतीजे

क्या च्युइंग गम चबाने से मुंह और गले के कैंसर से जुड़े कुछ हानिकारक माइक्रोब्स का स्तर कम किया जा सकता है? अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया के शोधकर्ताओं ने बायोइंजीनियर्ड च्युइंग गम पर एक अध्ययन किया है, जिसके नतीजे इस दिशा में नई संभावनाएं दिखाते हैं। शोध में इस्तेमाल की गई खास गम से मिले तत्वों ने कैंसर से जुड़े कुछ वायरस और बैक्टीरिया के स्तर को कम करने में असर दिखाया।

हालांकि, इसे कैंसर का इलाज या बीमारी से बचाव का प्रमाणित तरीका मानना अभी सही नहीं होगा। यह शोध शुरुआती स्तर का है और इसके नतीजों को समझने के लिए आगे और अध्ययन की जरूरत है। फिलहाल इस खोज का महत्व इस बात में है कि वैज्ञानिक मुंह में मौजूद कुछ हानिकारक सूक्ष्मजीवों को निशाना बनाने के नए तरीके तलाश रहे हैं।

क्या है बायोइंजीनियर्ड च्युइंग गम?

यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया के स्कूल ऑफ डेंटल मेडिसिन से जुड़े शोधकर्ताओं ने एक विशेष च्युइंग गम विकसित की है। इसे लैबलैब बीन्स नामक फलियों से प्राप्त प्रोटीन की मदद से तैयार किया गया। इस प्रोटीन को FRIL कहा जाता है, जिसमें कुछ वायरस से जुड़ने और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता का अध्ययन किया गया है।

शोधकर्ताओं का उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो मुंह में मौजूद कुछ हानिकारक सूक्ष्मजीवों की मात्रा कम करने में मदद कर सके और सामान्य रूप से मौजूद उपयोगी बैक्टीरिया को यथासंभव सुरक्षित रखे।

यह सामान्य बाजार में मिलने वाली च्युइंग गम जैसी कोई प्रमाणित कैंसर-रोधी वस्तु नहीं है। इसका इस्तेमाल अभी कैंसर के नियमित इलाज की जगह नहीं किया जा सकता।

मुंह और गले के कैंसर से जुड़े किन माइक्रोब्स पर हुआ अध्ययन?

शोध में सिर और गर्दन के कैंसर, यानी हेड एंड नेक स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (HNSCC) से जुड़े कुछ सूक्ष्मजीवों पर ध्यान दिया गया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV): HPV के कुछ प्रकार मुंह के पिछले हिस्से और गले के ऊपरी भाग के कैंसर से जुड़े होते हैं।
  • Porphyromonas gingivalis (Pg): यह बैक्टीरिया मसूड़ों की बीमारी से जुड़ा है। कैंसर के साथ इसके संभावित संबंधों पर भी शोध किया जा रहा है।
  • Fusobacterium nucleatum (Fn): यह बैक्टीरिया मुंह में पाया जा सकता है और कुछ कैंसर संबंधी अध्ययनों में इसकी भूमिका की जांच की गई है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी वायरस या बैक्टीरिया का कैंसर से संबंध पाया जाना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह हर व्यक्ति में कैंसर पैदा करेगा। कैंसर के विकास में कई जैविक और पर्यावरणीय कारकों की भूमिका हो सकती है।

लैब स्टडी में क्या सामने आया?

शोध में बीन गम से प्राप्त तत्वों का इस्तेमाल करके नमूनों में HPV के स्तर पर असर का आकलन किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, लार के नमूनों में HPV का स्तर 93 प्रतिशत तक और मुंह को धोने के बाद लिए गए नमूनों में इसका स्तर 80 प्रतिशत तक कम हुआ।

शोधकर्ताओं ने प्रोटेग्रिन नामक एक एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड का भी अध्ययन किया। रिपोर्ट में बताया गया कि इसके इस्तेमाल से Pg और Fn बैक्टीरिया का स्तर बहुत कम, कुछ परीक्षणों में लगभग शून्य तक पहुंच गया।

हालांकि, इन परिणामों को सावधानी से समझना जरूरी है। नमूनों में किसी सूक्ष्मजीव का स्तर कम होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि च्युइंग गम इंसान के शरीर में कैंसर को खत्म कर सकती है, कैंसर होने से रोक सकती है या मरीज की जीवन प्रत्याशा बढ़ा सकती है। इसके लिए मरीजों पर किए जाने वाले व्यवस्थित क्लिनिकल ट्रायल और दीर्घकालिक परिणामों का अध्ययन जरूरी होगा।

मुंह के अच्छे बैक्टीरिया को सुरक्षित रखने की बात क्यों अहम है?

मुंह में कई तरह के बैक्टीरिया रहते हैं। इनमें से अनेक सामान्य मौखिक स्वास्थ्य और मुंह के प्राकृतिक माइक्रोबायोम का हिस्सा होते हैं। इसलिए ऐसी तकनीक विकसित करना महत्वपूर्ण हो सकता है, जो हानिकारक सूक्ष्मजीवों पर असर डाले और उपयोगी बैक्टीरिया को कम से कम नुकसान पहुंचाए।

शोधकर्ताओं ने इस दिशा में चुनिंदा सूक्ष्मजीवों को निशाना बनाने की संभावना का अध्ययन किया है। लेकिन यह दावा करने के लिए कि यह तरीका हर परिस्थिति में अच्छे बैक्टीरिया को सुरक्षित रखता है और कैंसर के इलाज में बेहतर परिणाम देता है, अतिरिक्त शोध की जरूरत है।

क्या इस च्युइंग गम से कैंसर का इलाज हो सकता है?

फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। शोध में सामने आए परिणाम भविष्य के उपचार संबंधी अध्ययनों के लिए उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन किसी लैब स्टडी के नतीजे और मरीजों पर सफल उपचार के बीच महत्वपूर्ण अंतर होता है।

आगे के क्लिनिकल ट्रायल में यह देखना होगा कि यह तरीका इंसानों में कितना सुरक्षित और प्रभावी है, इसका असर कितने समय तक रहता है और क्या इससे कैंसर की रोकथाम या इलाज के परिणामों में वास्तविक सुधार होता है। यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि इसका इस्तेमाल किसी मौजूदा उपचार के साथ किया जा सकता है या नहीं।

इसलिए फिलहाल इस च्युइंग गम को कैंसर का इलाज, प्रमाणित बचाव का उपाय या डॉक्टरों द्वारा सुझाए जाने वाले उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

मुंह के कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए क्या करें?

मुंह और गले के कैंसर से बचाव के लिए फिलहाल स्थापित स्वास्थ्य उपायों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।

  • तंबाकू, गुटखा, खैनी और सुपारी से बचें।
  • धूम्रपान न करें और अल्कोहल का सेवन न करना बेहतर है।
  • मुंह में लंबे समय तक रहने वाले छाले, लाल या सफेद धब्बे, गांठ या निगलने में परेशानी होने पर डॉक्टर से जांच कराएं।
  • HPV टीकाकरण के बारे में डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि कुछ HPV संक्रमणों से जुड़े कैंसर का जोखिम टीकाकरण से कम किया जा सकता है।
  • नियमित दंत जांच कराएं और मुंह की साफ-सफाई का ध्यान रखें।

अगर मुंह में कोई घाव दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे या आवाज में बदलाव, लगातार गले में दर्द अथवा निगलने में कठिनाई हो, तो जांच कराने में देरी न करें।

डिस्क्लेमर: यह लेख वैज्ञानिक शोध से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के आधार पर सामान्य जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। बायोइंजीनियर्ड च्युइंग गम पर हुए शोध के नतीजों को कैंसर के प्रमाणित इलाज या रोकथाम का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। कैंसर से जुड़ी किसी भी समस्या में योग्य डॉक्टर से सलाह लें और निर्धारित उपचार बंद न करें।

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