
देवास: मध्य प्रदेश में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं लोगों को आकर्षित करती हैं। इन्हीं में एक अनोखा मंदिर देवास की टेकरी पर स्थित है, जहां मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा की पूजा की जाती है। इन दोनों देवियों को लोकमान्यता में सगी बहनें माना जाता है। कहा जाता है कि किसी बात पर दोनों के बीच विवाद हो गया था, जिसके बाद वे एक-दूसरे से दूर जाने लगीं। इस घटना से जुड़ी कहानी आज भी श्रद्धालुओं के बीच प्रचलित है।
देवास की टेकरी पर विराजमान हैं दोनों माताएं
मध्य प्रदेश के देवास शहर में स्थित माता टेकरी एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। दोनों देवियों के दर्शन के लिए सालभर भक्त पहुंचते हैं, लेकिन नवरात्रि के दौरान यहां विशेष चहल-पहल देखने को मिलती है।
स्थानीय धार्मिक परंपरा में बड़ी माता के रूप में मां तुलजा भवानी और छोटी माता के रूप में मां चामुंडा की पूजा की जाती है। टेकरी पर दोनों देवियों के अलग-अलग स्थानों पर विराजमान होने के पीछे एक रोचक लोककथा सुनाई जाती है।
आखिर क्यों रूठ गई थीं दोनों बहनें?
लोककथा के अनुसार, मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा सगी बहनें थीं। एक दिन किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते नाराजगी इतनी बढ़ गई कि दोनों ने एक-दूसरे से अलग रहने का फैसला कर लिया।
कहानी के मुताबिक, बड़ी बहन मां तुलजा भवानी क्रोधित होकर धरती के भीतर जाने लगीं, जबकि छोटी बहन मां चामुंडा पहाड़ी से नीचे की ओर बढ़ने लगीं। दोनों को इस तरह अलग होते देखकर उनके भक्तों और देवी-देवताओं ने उन्हें रोकने का प्रयास किया।
हनुमान जी और भैरव बाबा ने की थी रोकने की प्रार्थना
प्रचलित मान्यता के अनुसार, जब दोनों बहनें एक-दूसरे से दूर जाने लगीं, तब हनुमान जी और भैरव बाबा ने उनसे वहीं रुकने की विनती की। कहा जाता है कि उस समय तक बड़ी माता धरती के भीतर काफी नीचे समा चुकी थीं, जबकि छोटी माता पहाड़ी से नीचे की ओर जा चुकी थीं।
इसी लोककथा के आधार पर मां तुलजा भवानी की प्रतिमा को धरती में धंसी हुई और मां चामुंडा को उनसे कुछ दूरी पर स्थित माना जाता है। श्रद्धालु इस अनोखी स्थिति को दोनों बहनों की नाराजगी से जुड़ी कथा के रूप में देखते हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि दोनों बहनों के विवाद और उनके अलग होने की कहानी धार्मिक लोकमान्यता है। इसे प्रमाणित ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
नवरात्रि में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
देवास की माता टेकरी पर नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। भक्त मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, दोनों माताओं के दर्शन से भक्तों को आशीर्वाद प्राप्त होता है। नवरात्रि के दिनों में पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों के कारण मंदिर परिसर में विशेष माहौल रहता है।
कैसे पहुंचें देवास के माता मंदिर?
देवास मध्य प्रदेश का प्रमुख शहर है और इंदौर के नजदीक स्थित है। यहां पहुंचने के लिए रेल और सड़क मार्ग दोनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- रेल मार्ग: देवास रेलवे स्टेशन तक ट्रेन से पहुंचा जा सकता है। इंदौर और उज्जैन से भी देवास के लिए यात्रा की योजना बनाई जा सकती है।
- सड़क मार्ग: इंदौर, उज्जैन और आसपास के शहरों से बस, टैक्सी या निजी वाहन के जरिए देवास पहुंचा जा सकता है।
- स्थानीय परिवहन: देवास शहर पहुंचने के बाद माता टेकरी तक जाने के लिए स्थानीय टैक्सी और अन्य साधन मिल सकते हैं। सीढ़ियों या रोपवे की उपलब्धता और संचालन की स्थिति यात्रा से पहले जांच लेना उचित है।
देवास का यह मंदिर धार्मिक आस्था और लोकपरंपरा का अनोखा संगम है। मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा से जुड़ी दो रूठी बहनों की कहानी इस स्थान को एक अलग पहचान देती है। यही वजह है कि यहां आने वाले श्रद्धालु दोनों माताओं के दर्शन के साथ इस रोचक लोककथा के बारे में जानने में भी दिलचस्पी रखते हैं।
डिस्क्लेमर: इस लेख में मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित लोककथा का वर्णन किया गया है। कथा के विवरणों की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट नहीं है।

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