एशियन गेम्स में देश को गोल्ड दिलाने वाली सलीमा टेटे के गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं, पिता टावर के लिए जमीन देने को तैयार.

एशियन गेम्स में देश को गोल्ड दिलाने वाली सलीमा टेटे के गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं, पिता टावर के लिए जमीन देने को तैयार.
एशियन गेम्स में देश को गोल्ड दिलाने वाली सलीमा टेटे के गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं, पिता टावर के लिए जमीन देने को तैयार.

भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे ने अंतरराष्ट्रीय मैदान पर भारत का नाम रोशन किया, लेकिन उनके अपने गांव में आज भी मोबाइल नेटवर्क और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की समस्या बनी हुई है। झारखंड के सिमडेगा जिले के बड़की छप्पर गांव में नेटवर्क नहीं मिलने के कारण सलीमा को अक्सर लोगों को पहले से बताना पड़ता है कि वह फोन पर उपलब्ध नहीं रहेंगी। हैरानी की बात यह है कि उनके पिता मोबाइल टावर लगाने के लिए जमीन देने की पेशकश भी कर चुके हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

सलीमा ने इस परेशानी को लेकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि गांव में नेटवर्क नहीं होने से जरूरी फोन कॉल, ईमेल और संदेश छूट जाते हैं। राष्ट्रीय टीम की कप्तान होने के नाते उन्हें अधिकारियों, खेल संगठनों और अन्य लोगों के संपर्क में रहना पड़ता है, लेकिन अपने ही गांव में यह काम मुश्किल हो जाता है।

गांव पहुंचते ही फोन से टूट जाता है संपर्क

सलीमा टेटे जब अपने गांव बड़की छप्पर जाती हैं, तो उन्हें पहले ही परिचितों और जरूरी लोगों को सूचित करना पड़ता है कि मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो सकेगा। यह समस्या उनके लिए खास तौर पर तब परेशानी पैदा करती है, जब उन्हें किसी जरूरी काम के सिलसिले में फोन या इंटरनेट की जरूरत होती है।

सलीमा के मुताबिक, देश के लिए इतने बड़े स्तर पर खेलने के बावजूद अपने गांव में बुनियादी डिजिटल सुविधा का अभाव उन्हें दुख पहुंचाता है। कई बार जरूरी ईमेल और संदेश समय पर नहीं मिल पाते, जिससे संपर्क बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।

आज के समय में मोबाइल नेटवर्क केवल बातचीत का माध्यम नहीं है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी योजनाओं, डिजिटल भुगतान और आपातकालीन सहायता तक पहुंच भी जुड़ी हुई है। ऐसे में किसी गांव में नेटवर्क की कमी वहां रहने वाले लोगों के लिए कई तरह की परेशानियां पैदा कर सकती है।

पीने के पानी की सुविधा की मांग भी उठाई

सलीमा ने 12 अक्टूबर को सिमडेगा की उपायुक्त कंचन सिंह को पत्र सौंपकर गांव में मोबाइल नेटवर्क और पीने के पानी की व्यवस्था बेहतर करने की मांग की। उन्होंने गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई।

सलीमा का मामला इसलिए भी चर्चा में आया है, क्योंकि वह भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसके बावजूद उनके गांव के लोगों को रोजमर्रा की आवश्यक सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

हालांकि, इन समस्याओं का समाधान केवल किसी एक व्यक्ति की शिकायत तक सीमित नहीं होना चाहिए। गांव में रहने वाले सभी लोगों के लिए विश्वसनीय मोबाइल कनेक्टिविटी और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता जरूरी है।

मुखिया ने भी मानी नेटवर्क की समस्या

पिथरा ग्राम पंचायत के मुखिया अनिल उरांव ने गांव में सुविधाओं की कमी को गंभीर चिंता का विषय बताया। उनके मुताबिक, सलीमा अपने गांव, पंचायत, जिले, राज्य और देश का नाम रोशन कर रही हैं, लेकिन उनके गांव में मोबाइल नेटवर्क की समस्या बनी हुई है।

मुखिया ने बताया कि पंचायत क्षेत्र में मोबाइल टावर मौजूद है, लेकिन उसका सिग्नल बड़की छप्पर तक नहीं पहुंचता। इसके कारण गांव के लोग ठीक से फोन कॉल नहीं कर पाते और इंटरनेट का इस्तेमाल भी

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