
अमेरिका के एक किसान ने बिना सिंचाई के 40 साल तक टमाटर, आलू, लहसुन और बीन्स उगाईं. उनकी ड्राई फार्मिंग तकनीक मिट्टी की नमी बचाकर कम पानी में खेती का रास्ता दिखाती है.
हम अक्सर बाजार में टमाटर, आलू या दूसरी सब्जियों की बढ़ी हुई कीमत देखकर परेशान हो जाते हैं. लेकिन इन सब्जियों को खेत से हमारी रसोई तक पहुंचाने के पीछे किसान की कितनी मेहनत होती है, इसका अंदाजा शायद ही हमें होता है. बदलते मौसम और पानी की कमी के बीच खेती करना आसान नहीं है. ऐसे में अमेरिका के एक किसान ने खेती का ऐसा तरीका अपनाया है, जो खासा दिलचस्प है. उन्होंने बिना सिंचाई के टमाटर, आलू, लहसुन और बीन्स जैसी फसलें उगाकर दिखा दी हैं. इस तरीके को ड्राई फार्मिंग कहा जाता है.
अमेरिका के ऑरिगन राज्य में रहने वाले इस किसान के लिए ड्राई फार्मिंग कोई नया प्रयोग नहीं है. वह करीब 40 साल से इस तरीके से खेती कर रहे हैं. उनका अनुभव बताता है कि अगर मिट्टी को सही तरीके से तैयार किया जाए और फसल का चुनाव सोच-समझकर किया जाए, तो कम पानी में भी खेती की जा सकती है.
पानी नहीं फिर भी फसल तैयार!
ड्राई फार्मिंग में सबसे ज्यादा ध्यान मिट्टी की तैयारी पर दिया जाता है. खेत की मिट्टी को इस तरह तैयार किया जाता है कि उसमें मौजूद नमी लंबे समय तक बनी रहे. किसान ने वसंत के मौसम में खेत की जुताई की थी. उस समय मिट्टी में इतनी नमी थी कि वह आपस में जुड़ी रह सके, लेकिन इतनी सूखी भी थी कि आसानी से बिखर रही थी. जुताई के बाद खेत को करीब तीन हफ्तों तक छोड़ दिया गया. इससे मिट्टी बीज बोने के लिए बेहतर स्थिति में आ गई और उसमें मौजूद नमी भी संरक्षित रही.
इस खेती में मिट्टी का प्रकार भी काफी मायने रखता है. किसान ने ऐसी चिकनी मिट्टी का इस्तेमाल किया, जो पानी को ज्यादा समय तक अपने भीतर रोककर रख सकती है. इसके अलावा मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए दलहन जैसी फसलों को भी खेती का हिस्सा बनाया गया. किसान ने शुरुआत में ड्राई फार्मिंग कैलिफोर्निया में की थी. बाद में साल 2007 में वह ऑरिगन चले गए और करीब 9.6 एकड़ जमीन पर खेती शुरू की. यहां सबसे बड़ी चुनौती पानी की थी, क्योंकि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं था. इसके बावजूद उन्होंने खेती जारी रखी और सफल भी रहे.
ऑरिगन यूनिवर्सिटी की 2014 में प्रकाशित एक स्टडी में भी उनके लंबे अनुभव का जिक्र किया गया था. इसके मुताबिक, 1974 से 2014 तक उन्होंने बिना सिंचाई के ऑर्गेनिक टमाटर, आलू, लहसुन और बीन्स जैसी कई फसलें उगाईं. ड्राई फार्मिंग में बीज बोने का तरीका भी काफी अहम है. बीजों को मिट्टी में इस तरह रखा जाता है कि वे जमीन की नमी के ज्यादा करीब रहें. पौधों के आसपास की मिट्टी को कुछ इंच तक ढीला रखा जाता है, ताकि जड़ों को फैलने की जगह मिले. पौधों के बीच उचित दूरी भी रखी जाती है, जिससे सीमित पानी और पोषक तत्वों के लिए उनके बीच ज्यादा प्रतिस्पर्धा न हो.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ड्राई फार्मिंग हर जगह आसानी से की जा सकती है. फसल का चुनाव, मिट्टी, मौसम और बारिश का पैटर्न इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं. तेज बारिश या ऊपर से लगातार पानी डालना इस सिस्टम को बिगाड़ सकता है. फिर भी, जहां पानी की कमी है या सिंचाई का खर्च बहुत ज्यादा है, वहां ड्राई फार्मिंग खेती का एक उपयोगी विकल्प जरूर बन सकती है.

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