दिल्ली के एंटरप्रेन्योर ने Gen Z कैंडिडेट को दिया 120% सैलरी हाइक, पुरानी सैलरी बताने से किया था इनकार.

दिल्ली के एंटरप्रेन्योर ने Gen Z कैंडिडेट को दिया 120% सैलरी हाइक, पुरानी सैलरी बताने से किया था इनकार.
दिल्ली के एंटरप्रेन्योर ने Gen Z कैंडिडेट को दिया 120% सैलरी हाइक, पुरानी सैलरी बताने से किया था इनकार.

नौकरी के लिए आवेदन करते समय अक्सर कंपनियां उम्मीदवारों से उनकी मौजूदा सैलरी और अपेक्षित पैकेज पूछती हैं। कई बार इसी आधार पर नई नौकरी का ऑफर तय किया जाता है। लेकिन दिल्ली के एक एंटरप्रेन्योर ने इस परंपरा से हटकर फैसला लिया। उन्होंने एक ऐसे Gen Z उम्मीदवार को नौकरी दी, जिसने आवेदन फॉर्म में अपनी सैलरी का कॉलम खाली छोड़ दिया था। उम्मीदवार को उसकी पिछली कमाई के बजाय उसके काम और काबिलियत के आधार पर ऑफर दिया गया। दावा है कि उसे 120 प्रतिशत से भी ज्यादा का सैलरी हाइक मिला।

उम्मीदवार ने सैलरी बताने से क्यों किया इनकार?

दिल्ली के एंटरप्रेन्योर अभिषेक अग्रवाल ने लिंक्डइन पर इस भर्ती से जुड़ा अनुभव साझा किया। उनके मुताबिक, नौकरी के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास ऑपरेशन्स के क्षेत्र में चार साल का अनुभव था। इंटरव्यू के दौरान उसने पूछे गए सवालों के अच्छे जवाब दिए और अपनी क्षमता से प्रभावित भी किया।

हालांकि, जब उम्मीदवार को आवेदन फॉर्म दिया गया, तो उसने अपनी मौजूदा सैलरी और अपेक्षित वेतन से जुड़े कॉलम खाली छोड़ दिए। शुरुआत में यह बात अलग लगी, लेकिन जब उससे इसकी वजह पूछी गई, तो उसने अपनी बात स्पष्ट रूप से रखी।

उम्मीदवार का कहना था कि कंपनियां अक्सर उसकी वर्तमान सैलरी में कुछ प्रतिशत जोड़कर नया पैकेज तय करती हैं। इस प्रक्रिया में यह नहीं देखा जाता कि कर्मचारी वास्तव में कितना काम कर सकता है और उसके कौशल की बाजार में कितनी कीमत है। इसलिए वह चाहता था कि उसकी सैलरी का फैसला पिछली कमाई के बजाय उसकी योग्यता के आधार पर किया जाए।

4.5 लाख रुपये सालाना कमाता था उम्मीदवार

अभिषेक अग्रवाल के मुताबिक, बातचीत के दौरान उम्मीदवार ने बताया कि उसकी मौजूदा सालाना सैलरी 4.5 लाख रुपये यानी 4.5 LPA थी। उसका मानना था कि वह अपनी जिम्मेदारियों और काम के अनुभव के हिसाब से इससे ज्यादा वेतन पाने का हकदार है।

उम्मीदवार की बात सुनने के बाद एंटरप्रेन्योर ने एचआर से आवेदन फॉर्म में सैलरी वाला कॉलम खाली रहने देने को कहा। इसके बाद उन्होंने उम्मीदवार के काम, अनुभव और अब तक हासिल किए गए परिणामों पर ध्यान दिया।

पुराने काम ने दिलाया बड़ा ऑफर

इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवार ने अपने काम का एक अहम उदाहरण बताया। उसने अपनी पिछली कंपनी में वेंडर पेमेंट की प्रक्रिया को नए सिरे से व्यवस्थित किया था। इस बदलाव के बाद भुगतान में होने वाली देरी को 18 दिन से घटाकर छह दिन तक लाने में मदद मिली।

इतना महत्वपूर्ण सुधार करने के बावजूद, उसके मुताबिक पिछली कंपनी ने उसे केवल तीन प्रतिशत की वेतन वृद्धि दी थी। इस उदाहरण से एंटरप्रेन्योर को लगा कि उम्मीदवार ने अपने काम से वास्तविक फायदा पहुंचाया था, लेकिन उसकी सैलरी में उस योगदान के अनुरूप बढ़ोतरी नहीं हुई।

अभिषेक अग्रवाल ने अपनी पोस्ट में कहा कि उम्मीदवार की पिछली सैलरी को ही उसकी नई सैलरी तय करने का आधार बनाना सही तरीका नहीं है। किसी कर्मचारी ने पहले कितना कमाया, इससे ज्यादा जरूरी यह है कि वह नई कंपनी के लिए कितना उपयोगी साबित हो सकता है।

4.5 लाख से सीधे 10 लाख रुपये सालाना का ऑफर

अभिषेक अग्रवाल के अनुसार, उन्होंने उम्मीदवार को सालाना 10 लाख रुपये यानी 10 LPA का ऑफर दिया। उसकी पुरानी सैलरी 4.5 लाख रुपये थी। इस हिसाब से नई पेशकश में सालाना 5.5 लाख रुपये की बढ़ोतरी हुई, जो लगभग 122 प्रतिशत का इजाफा है।

इस तरह उम्मीदवार को उसकी पुरानी कमाई से दोगुने से भी अधिक का पैकेज देने की पेशकश की गई। एंटरप्रेन्योर ने इसे अपनी साल की सबसे अच्छी नियुक्तियों में से एक बताया और कहा कि उम्मीदवार ने अपने काम से उनके फैसले को सही साबित किया।

हालांकि, यह अनुभव अभिषेक अग्रवाल की ओर से साझा किया गया व्यक्तिगत मामला है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर उम्मीदवार को पुरानी सैलरी बताने से इनकार करने पर इतना ही बड़ा हाइक मिल जाएगा।

कंपनियों में पुरानी सैलरी के आधार पर पैकेज तय करने पर सवाल

इस घटना ने भर्ती प्रक्रिया में मौजूदा सैलरी को आधार बनाने की परंपरा पर चर्चा छेड़ दी है। कई बार उम्मीदवार का नया वेतन उसकी पिछली कमाई में कुछ प्रतिशत जोड़कर तय किया जाता है। ऐसी स्थिति में, अगर किसी कर्मचारी को पिछली कंपनी में उसकी योग्यता के मुकाबले कम वेतन मिला हो, तो नई नौकरी में भी उसका पैकेज अपेक्षाकृत कम रह सकता है।

इसके उलट, उम्मीदवार के अनुभव, कौशल, जिम्मेदारियों और काम से मिलने वाले परिणामों को ध्यान में रखकर वेतन तय करने से उसकी वास्तविक क्षमता का बेहतर आकलन किया जा सकता है।

अग्रवाल ने अपनी पोस्ट में अमेरिका के कुछ राज्यों और क्षेत्रों में नौकरी के दौरान उम्मीदवार की वेतन संबंधी जानकारी पूछने पर लागू प्रतिबंधों का भी जिक्र किया। हालांकि, वहां के नियम स्थान के अनुसार अलग-अलग हैं और हर जगह एक जैसे नहीं हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने एंटरप्रेन्योर के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि भर्ती के दौरान उम्मीदवार की काबिलियत को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, न कि केवल उसकी पुरानी सैलरी को।

वहीं, कुछ यूजर्स ने अपने अनुभव साझा किए। एक यूजर ने बताया कि आवेदन फॉर्म में मौजूदा और अपेक्षित सैलरी का विवरण नहीं भरने पर उसे नौकरी के लिए अस्वीकार कर दिया गया था। एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि उम्मीदवार ने पहले सैलरी बताने से इनकार किया, लेकिन बातचीत के दौरान खुद ही अपनी कमाई का आंकड़ा साझा कर दिया।

इस पूरे मामले से एक बात साफ होती है कि नौकरी बदलते समय केवल पुराने पैकेज को आधार मानना उम्मीदवार की क्षमता का पूरा आकलन नहीं करता। अनुभव, कौशल, जिम्मेदारियों और काम से मिलने वाले नतीजों को महत्व देना भी जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध रिपोर्ट और एंटरप्रेन्योर की ओर से साझा किए गए दावों पर आधारित है। सैलरी और नियुक्ति से जुड़ी जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *