धरती पर मौजूद है मिट्टी से रचा देवलोक, इतिहास और अध्यात्म का है अद्भुत संगम.

धरती पर मौजूद है मिट्टी से रचा देवलोक, इतिहास और अध्यात्म का है अद्भुत संगम.
धरती पर मौजूद है मिट्टी से रचा देवलोक, इतिहास और अध्यात्म का है अद्भुत संगम

धरती पर कश्मीर को स्वर्ग कहा जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि धरती पर प्राकृतिक देवलोक भी मौजूद है। हम बात कर रहे हैं पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में स्थित बिष्णुपुर शहर की, जो बंगाल की समृद्ध विरासत का प्रतीक है।

यहां के मंदिर सिर्फ अध्यात्म और आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि खुद में एक इतिहास को समेटे हैं। यह छोटा सा शहर अपने प्रसिद्ध उत्कृष्ट शिल्प कौशल के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें सिर्फ मिट्टी का इस्तेमाल होता है। पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में स्थित बिष्णुपुर शहर अपने आप में अनोखा है।

बिष्णुपुर शहर में कई मंदिर बने हैं जो प्राचीन होने के साथ-साथ पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इस कला को देखने के लिए न सिर्फ देश के अलग-अलग राज्यों से बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं। इस शहर में बने सभी मंदिरों को सिर्फ मिट्टी से बनाया गया है और किसी तरह के सीमेंट और पत्थर का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

मंदिर का बनाव बंगाल की समृद्ध विरासत की गवाही देता है।पक्की मिट्टी से तैयार इन मंदिरों की दीवारों पर महाभारत और रामायण काल की कहानियों को प्रतिमा के जरिए उकेरा गया है। यही कारण है कि यहां की मिट्टी की प्रतिमाओं में आस्था के साथ कला की छठा भी दिखती है। इन मंदिरों पर की गई जटिल मिट्टी की नक्काशी धार्मिक और सांस्कृतिक कहानियों का एक समृद्ध ताना-बाना बुनती है,

जो इन्हें भारत की स्थापत्य और ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न अंग बनाती है।यूनेस्को ने इन मंदिरों को बेहतरीन नमूनों की अस्थायी सूची में शामिल किया है और हर साल इन मंदिरों को देखने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां आपको रासमंच मंदिर, जोड़ बांग्ला मंदिर, मदन मोहन मंदिर, रघुनाथ जीऊ मंदिर, नूतन महल, विष्णुपुर हवा महल जैसे कई मंदिर देखने को मिल जाएंगे और मुख्यत: वैष्णव धर्म का प्रतिनिधित्व करते हैं।

यहां घूमने का सही समय सितंबर से दिसंबर और फरवरी-मार्च रहता है। इस समय मौसम का तापमान कम रहता है और यह घूमने के लिए सही तापमान है। इस वक्त सबसे ज्यादा संख्या में पर्यटक घूमने के लिए बिष्णुपुर शहर पहुंचते हैं।

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