सोते समय क्यों बढ़ता है ब्लड प्रेशर? मेडिकल रिसर्च में सामने आया हार्मोनल कारण; जानिए डॉक्टरों की राय.

सोते समय क्यों बढ़ता है ब्लड प्रेशर? मेडिकल रिसर्च में सामने आया हार्मोनल कारण; जानिए डॉक्टरों की राय.
सोते समय क्यों बढ़ता है ब्लड प्रेशर? मेडिकल रिसर्च में सामने आया हार्मोनल कारण; जानिए डॉक्टरों की राय.

क्या आप जानते हैं कि सोते समय भी आपका ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है? अक्सर हम हाई बीपी का कारण तनाव, खराब डाइट या खराब लाइफस्टाइल मानते हैं, लेकिन मेडिकल रिसर्च के मुताबिक शरीर में मौजूद कुछ हार्मोन का असंतुलन भी रात में बीपी बढ़ने की मुख्य वजह बन सकता है। खासकर एल्डोस्टेरोन (Aldosterone) या कोर्टिसोल (Cortisol) जैसे हार्मोन नींद के दौरान ब्लड प्रेशर के स्तर को प्रभावित करते हैं। वैज्ञानिकों ने हाई ब्लड प्रेशर के एक ऐसे कारण पर ध्यान दिया है, जो सामान्य जांच में कई बार पकड़ में नहीं आ पाता। यह कारण प्राइमरी एल्डोस्टेरोनिज्म (Primary Aldosteronism) नाम की हार्मोन संबंधी स्थिति है।

हमारा एड्रिनल ग्लैंड्स एल्डोस्टेरोन नाम का हार्मोन बनाता हैं। यह शरीर में नमक और पानी का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। लेकिन जब शरीर में एल्डोस्टेरोन जरूरत से ज्यादा बनने लगे, तो यह ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है और लंबे समय में दिल के रोग और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकता है।

रिसर्च में हुआ खुलासा, रात में बढ़ सकता है एल्डोस्टेरोन

Science Translational Medicine जर्नल में प्रकाशित इस रिसर्च में प्राइमरी एल्डोस्टेरोनिज्म नाम की एक हार्मोन संबंधी बीमारी पर ध्यान दिया गया है। यह स्थिति हाई ब्लड प्रेशर वाले हर पांच में से एक व्यक्ति तक को प्रभावित कर सकती है और इससे हृदय रोग, स्ट्रोक, डायबिटीज और दूसरी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इस रिसर्च में ब्रिटेन की University of Bristol और University of Manchester, नॉर्वे की University of Bergen तथा स्टॉकहोम और एथेंस के शोधकर्ता शामिल थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस बीमारी से जूझ रहे मरीजों में हार्मोन का उत्पादन दिन के साथ-साथ रात में सोते समय भी अचानक बढ़ सकता है, जबकि सामान्य ब्लड टेस्ट आमतौर पर रात में नहीं किए जाते।

घर पर 24 घंटे की गई हार्मोन की निगरानी

शोधकर्ताओं ने U-RHYTHM नाम के एक पोर्टेबल डिवाइस की मदद से मरीजों के हार्मोन स्तर की 24 घंटे तक निगरानी की। यह डिवाइस University of Bristol में विकसित किया गया है। मोबाइल फोन के आकार का यह हल्का उपकरण कमर पर लगाया जाता है और मरीज की स्किन से हर 20 मिनट में हार्मोन के स्तर की जानकारी लेने में मदद करता है। इससे मरीजों की निगरानी अस्पताल या रिसर्च सेंटर में रखने के बजाय उनके घर पर, उनकी नॉर्मल एक्टिविटी के दौरान की जा सकी। इसमें सोने का समय भी शामिल था। इस तरह हार्मोन में होने वाले ऐसे बदलावों को भी देखा जा सका, जो सामान्य जांच के दौरान छूट सकते हैं।

University of Bristol में Clinical Research Fellow और Bristol Hospitals NHS Foundation Trust में सीनियर क्लीनिकल फेलो, अध्ययन के सह-प्रमुख लेखक डॉ. थॉमस अप्टन ने बताया प्राइमरी एल्डोस्टेरोनिज्म हाई ब्लड प्रेशर का एक महत्वपूर्ण कारण है और सेकेंडरी हाइपरटेंशन के सबसे आम कारणों में से एक है। हार्मोन पूरे दिन बदलता रहता है और बीमारी की जांच की प्रक्रिया जटिल होने के कारण कई मामलों में इसका निदान देर से होता है या बीमारी की पहचान ही नहीं हो पाती।

सामान्य टेस्ट में क्यों छूट सकती है बीमारी?

रिसर्च के मुताबिक प्राइमरी एल्डोस्टेरोनिज्म वाले मरीजों में एल्डोस्टेरोन का स्तर हर समय बढ़ा हुआ नहीं रहता। यहां तक कि बीमारी के कुछ गंभीर मामलों में भी ऐसे समय आए, जब हार्मोन का स्तर बीमारी की पहचान के लिए इस्तेमाल की जाने वाली न्यूनतम सीमा से नीचे चला गया। इसके बजाय शोधकर्ताओं को हार्मोन के स्तर में बार-बार बढ़ोतरी के पैटर्न मिले। खास तौर पर रात में सोते समय हार्मोन के अचानक बढ़ने के मामले सामने आए, जबकि शरीर का सामान्य दिन-रात का हार्मोन रिदम बना रहा। रिसर्च के मुताबिक ये हार्मोन स्पाइक एड्रिनल ग्लैंड से निकल रहे थे और उन मरीजों में ज्यादा स्पष्ट थे, जिनकी बीमारी सिर्फ एक एड्रिनल ग्लैंड की समस्या के कारण थी। खास बात यह रही कि प्रभावित एड्रिनल ग्लैंड को सर्जरी से निकालने के बाद ये असामान्य हार्मोन पैटर्न गायब हो गए। इससे शोधकर्ताओं को इस बात का अतिरिक्त प्रमाण मिला कि ये हार्मोन स्पाइक बीमारी से सीधे जुड़े हुए थे।भविष्य में बदल सकता है हाई BP की जांच का तरीका

University of Bristol के Professor of Medicine और U-RHYTHM तकनीक के आविष्कारक प्रो. स्टैफर्ड लाइटमैन के अनुसार रिसर्च के निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि डॉक्टरों को प्राइमरी एल्डोस्टेरोनिज्म की पहचान करने के तरीके पर दोबारा विचार करने की जरूरत हो सकती है। भविष्य में केवल एक निश्चित समय पर किए जाने वाले ब्लड टेस्ट की जगह शरीर में हार्मोन के स्तर और उनके दिन-रात के बदलावों की लगातार निगरानी पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है। खासकर रात के समय होने वाले हार्मोन बदलाव बीमारी की पहचान के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस दिशा में और रिसर्च की जरूरत है। प्राइमरी एल्डोस्टेरोनिज्म हाई ब्लड प्रेशर का एक ऐसा कारण है, जिसका इलाज संभव है और कुछ मामलों में बीमारी के मूल कारण का इलाज करके इसे ठीक भी किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। U-RHYTHM या 24-घंटे हार्मोन निगरानी जैसी तकनीकों व जांचों के लिए हमेशा अपने हृदय रोग विशेषज्ञ या एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से संपर्क करें। स्वयं कोई डॉक्टरी निष्कर्ष न निकालें।

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