
कई बार हल्का बुखार आते ही शरीर में अचानक ठंड लगने लगती है और हाथ-पैर कांपने लगते हैं। कुछ लोगों को इतनी तेज कंपकंपी होती है कि दांत तक बजने लगते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब शरीर का तापमान बढ़ रहा होता है, तो फिर ठंड क्यों महसूस होती है?
दरअसल, बुखार के दौरान शरीर के तापमान को नियंत्रित करने वाली प्रक्रिया में बदलाव होता है। शरीर का यह प्राकृतिक सिस्टम संक्रमण से लड़ने के लिए तापमान बढ़ाने की कोशिश कर सकता है और इसी दौरान कंपकंपी महसूस होती है।
बुखार में शरीर का ‘सेट पॉइंट’ बदल सकता है
हमारे दिमाग में हाइपोथैलेमस शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सामान्य स्थिति में यह शरीर के तापमान को एक निश्चित सीमा में बनाए रखने में मदद करता है।
जब शरीर में संक्रमण होता है, तो प्रतिरक्षा तंत्र सक्रिय हो जाता है। कुछ रसायनों और सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं के कारण हाइपोथैलेमस शरीर का तापमान सामान्य से ऊपर करने का संकेत दे सकता है।
यहीं से ठंड लगने और कंपकंपी की शुरुआत हो सकती है।
तापमान बढ़ रहा होता है, फिर भी ठंड क्यों लगती है?
मान लीजिए शरीर का तापमान सामान्य से बढ़कर किसी नए स्तर तक पहुंचना चाहता है, लेकिन उस समय शरीर अभी उस तापमान तक नहीं पहुंचा है। दिमाग को शरीर अपेक्षाकृत ठंडा लग सकता है।
इसके बाद शरीर गर्मी पैदा करने के लिए कई प्रतिक्रियाएं शुरू करता है। त्वचा की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं, जिससे शरीर की गर्मी बाहर कम निकलती है। साथ ही मांसपेशियां तेजी से सिकुड़ने और ढीली होने लगती हैं।
इसी अनैच्छिक मांसपेशीय गतिविधि को हम कंपकंपी या शivering के रूप में महसूस करते हैं।
कांपने से शरीर गर्मी कैसे पैदा करता है?
मांसपेशियों के बार-बार तेजी से सिकुड़ने से ऊर्जा खर्च होती है और गर्मी पैदा होती है। यह शरीर का एक प्राकृतिक तरीका है, जिससे वह अपना तापमान बढ़ाने की कोशिश करता है।
इसलिए बुखार के शुरुआती दौर में व्यक्ति को एक साथ दो अलग-अलग चीजें महसूस हो सकती हैं—शरीर का तापमान बढ़ रहा होता है, लेकिन अंदर से ठंड लग रही होती है।
जब शरीर नया तापमान हासिल कर लेता है, तो कंपकंपी कम हो सकती है।
बुखार उतरते समय भी पसीना क्यों आता है?
बुखार के दौरान शरीर का तापमान बढ़ाने वाला ‘सेट पॉइंट’ बाद में सामान्य स्तर पर लौट सकता है। तब शरीर को अतिरिक्त गर्मी बाहर निकालने की जरूरत पड़ती है।
इसके लिए त्वचा की रक्त वाहिकाएं फैल सकती हैं और पसीना आ सकता है। यही वजह है कि कई लोगों को बुखार उतरने के दौरान अचानक बहुत पसीना आता है।
हर कंपकंपी सिर्फ बुखार की वजह से नहीं होती
यह समझना जरूरी है कि शरीर का कांपना हमेशा बुखार का संकेत नहीं होता। ठंडा वातावरण, डर या तनाव, लो ब्लड शुगर, कुछ दवाओं का असर और कई अन्य स्थितियों में भी कंपकंपी हो सकती है।
वहीं संक्रमण के दौरान होने वाली तेज कंपकंपी को कई बार चिल्स या रिगर्स कहा जाता है। यह सिर्फ शरीर का तापमान बढ़ने की सामान्य अनुभूति से अलग हो सकती है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर बुखार के साथ कंपकंपी बहुत तेज हो, बार-बार हो रही हो या व्यक्ति की हालत तेजी से बिगड़ रही हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
खास तौर पर सांस लेने में परेशानी, भ्रम या अत्यधिक कमजोरी, लगातार उल्टी, गर्दन अकड़ना, दौरा पड़ना, तेज सिरदर्द या गंभीर निर्जलीकरण जैसे लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।
बुखार खुद कोई अलग बीमारी नहीं, बल्कि कई बार शरीर में चल रही किसी समस्या या संक्रमण का लक्षण होता है। इसलिए सिर्फ तापमान कम करने के बजाय बुखार के कारण को समझना भी जरूरी है।

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