
नई दिल्ली: गर्भावस्था और डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस दौरान वजन बढ़ना, थकान, पाचन संबंधी परेशानी और कब्ज जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। कई बार इन्हें सामान्य बदलाव मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन लगातार परेशानी रहने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
ऐसा ही एक मामला 34 वर्षीय एक महिला का सामने आया, जिनका डिलीवरी के बाद वजन बढ़ गया था और उन्हें थकान, ब्लोटिंग व कब्ज की शिकायत रहने लगी। जांच के बाद उन्हें फैटी लिवर का पता चला। इसके बाद उन्होंने अपनी स्नैकिंग आदतों और पूरी डाइट में बदलाव किया। उनकी डाइट में मखाना, भुना चना, बिना चीनी वाला ग्रीक योगर्ट, सीड्स और ताजे फल जैसे विकल्प शामिल हुए।
हालांकि, यह एक व्यक्तिगत अनुभव है और केवल इन खाद्य पदार्थों के सेवन से फैटी लिवर ठीक होने का दावा नहीं किया जा सकता। फैटी लिवर में वजन, शारीरिक गतिविधि, ब्लड शुगर, खानपान और अन्य मेटाबॉलिक कारकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
फैटी लिवर में डाइट क्यों है महत्वपूर्ण?
फैटी लिवर का संबंध कई बार अधिक वजन, इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और असंतुलित खानपान जैसी स्थितियों से होता है। इसलिए डाइट में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करना उपयोगी हो सकता है जिनमें फाइबर, प्रोटीन और पोषक तत्व अच्छी मात्रा में हों।
इसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और वजन को स्वस्थ सीमा में रखना भी महत्वपूर्ण है।
1. भुना मखाना बना हेल्दी स्नैक
रात में भूख लगने पर तले-भुने या मीठे स्नैक्स खाने की आदत वजन बढ़ाने में योगदान दे सकती है। ऐसे में भुना हुआ मखाना अपेक्षाकृत हल्का स्नैक विकल्प हो सकता है।
मखाने में कार्बोहाइड्रेट के साथ कुछ प्रोटीन और फाइबर भी मिलता है। इसे कम तेल और कम नमक के साथ तैयार करके स्नैक के तौर पर लिया जा सकता है।
हालांकि, केवल मखाना खाने से फैटी लिवर कम होने की गारंटी नहीं है। इसकी मात्रा और पूरी डाइट को ध्यान में रखना जरूरी है।
2. भुना चना रख सकता है पेट भरा हुआ
पैकेज्ड नमकीन और तले हुए स्नैक्स की जगह भुना चना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें प्रोटीन और फाइबर पाए जाते हैं, जो लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकते हैं।
फाइबर युक्त भोजन वजन को नियंत्रित रखने और बेहतर मेटाबॉलिक हेल्थ में मदद कर सकता है, जो फैटी लिवर के प्रबंधन में महत्वपूर्ण है।
3. ग्रीक योगर्ट और सीड्स
शाम के समय बिना चीनी वाला ग्रीक योगर्ट, चिया सीड्स और फ्लैक्स सीड्स को डाइट में शामिल किया जा सकता है। ग्रीक योगर्ट प्रोटीन का अच्छा स्रोत हो सकता है, जबकि चिया और फ्लैक्स सीड्स में फाइबर और हेल्दी फैट पाए जाते हैं।
कुछ डेयरी उत्पादों में प्रोबायोटिक बैक्टीरिया भी हो सकते हैं, लेकिन हर ग्रीक योगर्ट प्रोबायोटिक हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए पैकेट पर दी गई जानकारी देखना बेहतर है।
4. पैकेज्ड मिठाइयों की जगह ताजे फल
मीठा खाने की इच्छा होने पर पैकेज्ड डेजर्ट, कुकीज और ज्यादा चीनी वाले स्नैक्स की जगह साबुत फल बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
सेब, अमरूद और बेरीज जैसे फलों में फाइबर और विभिन्न पौधों से मिलने वाले एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। साबुत फल खाने से जूस की तुलना में फाइबर भी मिलता है और अतिरिक्त शुगर का सेवन कम रखा जा सकता है।
5. चिप्स की जगह ह्यूमस और सब्जियां
चिप्स और अन्य अल्ट्रा-प्रोसेस्ड स्नैक्स की जगह खीरा, गाजर और शिमला मिर्च जैसी सब्जियों को ह्यूमस के साथ लिया जा सकता है।
सब्जियों से फाइबर और ह्यूमस से प्लांट प्रोटीन व कुछ हेल्दी फैट मिल सकते हैं। हालांकि, ह्यूमस की मात्रा और उसमें मौजूद तेल व नमक को भी ध्यान में रखना चाहिए।
6. ओट्स और पीनट बटर
ओट्स में बीटा-ग्लूकान नामक घुलनशील फाइबर पाया जाता है। यह पेट भरा रखने और ब्लड शुगर व कोलेस्ट्रॉल के बेहतर प्रबंधन में मदद कर सकता है।
ओट्स के साथ पीनट बटर लिया जा सकता है, लेकिन ऐसा पीनट बटर चुनना बेहतर है जिसमें अतिरिक्त चीनी और बहुत ज्यादा नमक न हो। कैलोरी अधिक होने के कारण इसकी मात्रा भी सीमित रखना जरूरी है।
डिलीवरी के बाद फैटी लिवर में किन बातों का रखें ध्यान?
फैटी लिवर को केवल किसी एक खाद्य पदार्थ से नियंत्रित नहीं किया जा सकता। डाइट में बदलाव के साथ पूरी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना जरूरी है।
- डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह के अनुसार संतुलित डाइट लें।
- तले हुए और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को सीमित करें।
- मीठे पेय और ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थ कम करें।
- पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर वाली डाइट लें।
- डॉक्टर की अनुमति के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि शुरू करें।
- वजन ज्यादा है तो धीरे-धीरे स्वस्थ तरीके से वजन कम करने पर ध्यान दें।
- ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं।
- पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश करें।
एक जरूरी बात: डिलीवरी के बाद महिलाओं को बिना सलाह के बहुत कम कैलोरी वाली डाइट या तेजी से वजन घटाने वाली डाइट नहीं अपनानी चाहिए, खासकर अगर वे स्तनपान करा रही हों। इस स्थिति में पोषण की जरूरत अलग हो सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख एक व्यक्तिगत अनुभव और सामान्य पोषण संबंधी जानकारी पर आधारित है। मखाना, चना, सीड्स या किसी अन्य खाद्य पदार्थ को फैटी लिवर का इलाज न समझें। फैटी लिवर की पुष्टि होने पर डॉक्टर या योग्य डायटीशियन से व्यक्तिगत डाइट और उपचार संबंधी सलाह लें।

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