हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा: सकते हैं ये 9 जोखिम कारक, जानिए बचाव के लिए किन बातों का रखें ध्यान

हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा: सकते हैं ये 9 जोखिम कारक, जानिए बचाव के लिए किन बातों का रखें ध्यान
हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा: सकते हैं ये 9 जोखिम कारक, जानिए बचाव के लिए किन बातों का रखें ध्यान

नई दिल्ली: हार्ट अटैक को अक्सर उम्र बढ़ने से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन दिल की बीमारी का जोखिम सिर्फ उम्र पर निर्भर नहीं करता। धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, खराब कोलेस्ट्रॉल, पेट के आसपास बढ़ती चर्बी और लंबे समय तक रहने वाला तनाव जैसे कई कारक हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।

INTERHEART अध्ययन में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हार्ट अटैक से जुड़े ऐसे जोखिम कारकों का अध्ययन किया गया था, जिनमें से कई को लाइफस्टाइल और उचित चिकित्सा देखभाल के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है।

INTERHEART रिसर्च में क्या सामने आया?

INTERHEART एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय केस-कंट्रोल स्टडी थी, जिसमें 52 देशों के प्रतिभागियों को शामिल किया गया था। इसका उद्देश्य यह समझना था कि किन बदले जा सकने वाले जोखिम कारकों का संबंध हार्ट अटैक यानी मायोकार्डियल इन्फार्क्शन से है।

इस अध्ययन में 15,000 से ज्यादा हार्ट अटैक के मरीजों और करीब 14,800 कंट्रोल प्रतिभागियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था। यह अध्ययन 2004 में The Lancet में प्रकाशित हुआ था।

रिसर्च में सामने आए प्रमुख जोखिम कारकों में ये शामिल हैं:

1. धूम्रपान और तंबाकू

सिगरेट, बीड़ी और अन्य तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल हृदय और रक्त वाहिकाओं के लिए नुकसानदायक हो सकता है। धूम्रपान छोड़ना हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

2. खून में असामान्य लिपिड्स

खून में मौजूद कुछ लिपिड्स का असंतुलन हार्ट अटैक के जोखिम से जुड़ा पाया गया। INTERHEART अध्ययन में ApoB/ApoA1 ratio का मायोकार्डियल इन्फार्क्शन के साथ मजबूत संबंध देखा गया था।

इसलिए समय-समय पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार कोलेस्ट्रॉल और अन्य लिपिड्स की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।

3. हाई ब्लड प्रेशर

लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन दिल और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालता है। लंबे समय तक हाई बीपी रहने से हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है।

ब्लड प्रेशर की नियमित जांच और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा व लाइफस्टाइल बदलावों का पालन करना जरूरी है।

4. डायबिटीज और हाई ब्लड शुगर

लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर ज्यादा रहने से रक्त वाहिकाओं और हृदय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। डायबिटीज वाले लोगों में हृदय रोग का जोखिम सामान्य आबादी की तुलना में अधिक हो सकता है।

इसलिए ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच कराना महत्वपूर्ण है।

5. पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी

कमर और पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी सिर्फ वजन बढ़ने की समस्या नहीं है। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ी हो सकती है, जो आगे चलकर हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।

संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि वजन तथा कमर की चर्बी को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है।

6. तनाव और मनोवैज्ञानिक कारक

लंबे समय तक रहने वाला तनाव भी हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। INTERHEART अध्ययन में मनोवैज्ञानिक कारकों का संबंध हार्ट अटैक के जोखिम से देखा गया था।

तनाव को कम करने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, योग या ध्यान जैसी स्वस्थ आदतें मददगार हो सकती हैं।

7. खानपान की खराब आदतें

दिल को स्वस्थ रखने के लिए डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। वहीं अत्यधिक प्रोसेस्ड और असंतुलित भोजन का सेवन सीमित करना बेहतर है।

सिर्फ किसी एक खाद्य पदार्थ को खाने से हार्ट अटैक का खतरा खत्म नहीं होता। पूरे

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