शादी का वादा करके कई महीनों तक शोषण का आरोप, इनकार के बाद कोर्ट पहुंची युवती; आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर.

शादी का वादा करके कई महीनों तक शोषण का आरोप, इनकार के बाद कोर्ट पहुंची युवती; आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर.
शादी का वादा करके कई महीनों तक शोषण का आरोप, इनकार के बाद कोर्ट पहुंची युवती; आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर.

नगराम, लखनऊ: प्यार में शादी का भरोसा, फिर महीनों तक रिश्ते में बने रहने और आखिर में शादी से इनकार करने का आरोप। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के नगराम क्षेत्र में एक युवती ने इसी तरह के मामले में न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। युवती का आरोप है कि एक युवक ने शादी का वादा करके उसका कई महीनों तक यौन शोषण किया। जब उसने शादी की बात उठाई, तो युवक कथित तौर पर टालमटोल करने लगा और बाद में साफ इनकार कर दिया।

शादी की बात पर बदल गया रवैया

शिकायत के मुताबिक, नगराम क्षेत्र के एक गांव की युवती की पहचान सुखलाल खेड़ा गांव निवासी युवक से हुई थी। युवती का आरोप है कि युवक ने उसे प्रेम संबंध में आने के बाद शादी करने का भरोसा दिया। इसी भरोसे के चलते दोनों के बीच संबंध बने।

पीड़िता के अनुसार, जब उसने युवक से शादी करने के लिए कहा, तो वह लगातार बात टालने लगा। आरोप है कि बाद में युवक ने शादी करने से इनकार कर दिया और उसके साथ गाली-गलौज भी की। इसके बाद युवती ने मामले में कानूनी कार्रवाई कराने का फैसला लिया।

पहले पुलिस से शिकायत, फिर अदालत का सहारा

युवती ने 29 अप्रैल को पुलिस के उच्चाधिकारियों से शिकायत की थी। हालांकि, उसके मुताबिक, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने अदालत में गुहार लगाई और मामले में कार्रवाई की मांग की।

अदालत के आदेश के बाद बृहस्पतिवार को संबंधित युवक के खिलाफ नगराम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जाएगी।

मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज होगा बयान

नगराम थाना पुलिस के अनुसार, पीड़िता का बयान जल्द ही मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया जाएगा। इसके बाद बयान और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई है। युवक पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्ट और शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। मामले में किसी की दोषसिद्धि नहीं हुई है और अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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