
गले में बलगम जमा होना, बार-बार गला साफ करने की जरूरत महसूस होना या सुबह उठते ही कफ की परेशानी होना कई लोगों के लिए असहज स्थिति बन जाती है। सर्दी-जुकाम, एलर्जी, साइनस की समस्या और सांस से जुड़ी कुछ बीमारियों के कारण शरीर में म्यूकस यानी बलगम की मात्रा बढ़ सकती है। ऐसे में लोग अक्सर अपनी डाइट में बदलाव करने की कोशिश करते हैं, लेकिन क्या सच में कुछ खास खाद्य पदार्थ बलगम बढ़ाते हैं?
आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा के विशेषज्ञ डॉ. सलीम जैदी ने खानपान और बलगम से जुड़ी कुछ बातों पर चर्चा की है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति में किसी खाद्य पदार्थ का असर एक जैसा नहीं होता। वैज्ञानिक प्रमाण भी इस बात का समर्थन नहीं करते कि दूध या चीनी जैसे सभी खाद्य पदार्थ सीधे तौर पर हर व्यक्ति में बलगम का उत्पादन बढ़ा देते हैं।
शरीर में बलगम क्यों बनता है?
बलगम यानी म्यूकस शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। यह नाक, गले और सांस की नलियों की अंदरूनी सतह को नम रखने के साथ धूल, छोटे कणों और रोगाणुओं को रोकने में मदद करता है।
सामान्य परिस्थितियों में बनने वाला म्यूकस अक्सर महसूस भी नहीं होता। लेकिन सर्दी-जुकाम, फ्लू, एलर्जी या साइनस में सूजन होने पर इसका उत्पादन बढ़ सकता है। कभी-कभी नाक से निकलने वाला म्यूकस गले के पीछे की ओर बहता है, जिसे पोस्ट-नेजल ड्रिप कहा जाता है। इससे बार-बार गला साफ करने, खांसी और गले में कुछ जमा होने जैसा एहसास हो सकता है।
अगर बलगम लंबे समय तक बना रहता है, तो केवल खानपान को इसका कारण मानना सही नहीं है। इसके पीछे एलर्जी, संक्रमण, अस्थमा, धूम्रपान या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
1. दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स
दूध, दही, पनीर और चीज जैसे डेयरी उत्पादों को अक्सर बलगम बढ़ाने वाला माना जाता है। हालांकि, उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण यह साबित नहीं करते कि दूध पीने से सभी लोगों में शरीर अधिक बलगम बनाने लगता है।
कुछ लोगों को दूध पीने के बाद मुंह या गले में चिकनाहट और गाढ़ेपन का एहसास हो सकता है। यह एहसास अपने आप में बलगम का उत्पादन बढ़ने का प्रमाण नहीं है।
अगर आपको लगता है कि किसी खास डेयरी उत्पाद के सेवन के बाद परेशानी बढ़ती है, तो कुछ समय तक अपने लक्षणों पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या डायटीशियन से सलाह लें। बिना किसी स्पष्ट कारण के सभी डेयरी उत्पाद बंद करने से पोषण पर असर पड़ सकता है।
2. ज्यादा चीनी और प्रोसेस्ड फूड
मिठाइयां, मीठे पेय, बिस्कुट और दूसरे अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन संतुलित आहार की जगह लेने पर सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए इनका सेवन सीमित रखना बेहतर है।
हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि चीनी खाने से हर व्यक्ति में सीधे बलगम बढ़ने लगता है। गले में कफ की परेशानी और ज्यादा चीनी के सेवन के बीच सीधा संबंध साबित करने वाले पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
अगर आपको लगातार बलगम या खांसी की समस्या है, तो केवल चीनी छोड़ने पर निर्भर न रहें। इसके साथ यह भी देखें कि कहीं एलर्जी, संक्रमण या कोई दूसरी स्वास्थ्य समस्या तो नहीं है।
3. रेड मीट और ज्यादा तले-भुने खाद्य पदार्थ
बीफ, पोर्क और लैम्ब जैसे रेड मीट तथा समोसे, पकौड़े और अन्य डीप फ्राइड खाद्य पदार्थों में वसा की मात्रा अधिक हो सकती है। इन्हें नियमित रूप से ज्यादा मात्रा में खाने के बजाय संतुलित डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए।
हालांकि, इन खाद्य पदार्थों को सीधे बलगम बढ़ाने वाला मानने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। कुछ लोगों में भारी या अधिक वसा वाला भोजन एसिड रिफ्लक्स की समस्या को बढ़ा सकता है। एसिड रिफ्लक्स में पेट का एसिड ऊपर गले की ओर आने से खांसी, गले में जलन या बार-बार गला साफ करने जैसी परेशानी हो सकती है।
यदि आपको भोजन के बाद खांसी या गले में जलन महसूस होती है, तो भोजन की मात्रा कम रखना और खाने के तुरंत बाद न लेटना मददगार हो सकता है।
4. चाय, कॉफी और अल्कोहल का सेवन
चाय और कॉफी में कैफीन होता है, जबकि अल्कोहल शरीर पर अलग-अलग तरह से असर डाल सकता है। सामान्य मात्रा में चाय या कॉफी पीने से हर व्यक्ति में डिहाइड्रेशन होने या बलगम गाढ़ा हो जाने की बात सही नहीं है।
फिर भी, अगर कैफीन वाले पेय या अल्कोहल लेने के बाद आपकी खांसी, गले में जलन या एसिड रिफ्लक्स बढ़ता है, तो इनकी मात्रा कम करना उपयोगी हो सकता है। अल्कोहल का सेवन सीमित रखना या उससे बचना स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर है।
बलगम को सामान्य रूप से पतला रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना महत्वपूर्ण है। पानी की जरूरत उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
बलगम से राहत पाने के लिए क्या करें?
पर्याप्त पानी पिएं
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर में पानी की कमी से बचने और म्यूकस को बाहर निकालने में मदद मिल सकती है। गले में खराश या जुकाम होने पर कुछ लोगों को गुनगुने पानी से आराम महसूस होता है।
गर्म पेय का सहारा लें
गुनगुना पानी या बिना ज्यादा चीनी वाली गर्म चाय गले को आराम दे सकती है। अदरक या पुदीने से बने पेय भी कुछ लोगों को अच्छा महसूस करा सकते हैं, लेकिन इन्हें बलगम का प्रमाणित इलाज नहीं समझना चाहिए।
भाप लेते समय सावधानी बरतें
नाक बंद होने पर नम हवा या गर्म शॉवर से कुछ लोगों को अस्थायी राहत मिल सकती है। लेकिन उबलते पानी के बर्तन से सीधे भाप लेना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे चेहरे और सांस की नलियों में जलने का जोखिम रहता है। भाप में एसेंशियल ऑयल मिलाना भी जरूरी नहीं है और कुछ लोगों में इससे जलन या एलर्जी बढ़ सकती है।
धुएं और धूल से बचें
सिगरेट का धुआं, प्रदूषण, धूल और दूसरे उत्तेजक पदार्थ सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकते हैं। अगर आपको बार-बार बलगम बनता है, तो धूम्रपान से बचें और धूल या एलर्जी पैदा करने वाले कारकों से संपर्क कम करने की कोशिश करें।
घरेलू उपायों पर पूरी तरह निर्भर न रहें
शहद गले की खराश और खांसी में कुछ राहत दे सकता है, लेकिन यह बलगम बनने के मूल कारण का इलाज नहीं करता। एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए। हल्दी, तुलसी या दूसरे घरेलू नुस्खों को भी डॉक्टर द्वारा बताए गए इलाज का विकल्प न बनाएं।
कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
अगर बलगम लंबे समय तक बना रहता है, बार-बार लौटता है या उसके साथ लगातार खांसी, बुखार अथवा सीने में परेशानी होती है, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
बलगम में खून आने, सीने में तेज दर्द या सांस लेने में गंभीर कठिनाई होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें। सांस की गंभीर परेशानी को घरेलू नुस्खों से ठीक करने की कोशिश न करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। दूध, चीनी, डेयरी उत्पादों या अन्य खाद्य पदार्थों का असर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है और इनके सीधे तौर पर बलगम बढ़ाने के प्रमाण सीमित हैं। लंबे समय तक बलगम, खांसी या सांस संबंधी परेशानी रहने पर डॉक्टर से सलाह लें। यह लेख चिकित्सकीय जांच, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है।

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