
एक युवती रोज शाम घर से निकलती थी। परिवार को बताया गया था कि वह कॉल सेंटर में काम करती है और उसकी ड्यूटी रात में होती है। सुबह होने से पहले वह घर लौट आती थी। परिवार को लंबे समय तक उसके साथ हो रही ज्यादती की भनक तक नहीं लगी।
दरअसल, युवती को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर एक ऐसे गिरोह के चंगुल में फंसा दिया गया था, जहां उससे जबरन देह व्यापार कराया जा रहा था। पीड़िता के मुताबिक, उसे रोज कई ग्राहकों के पास भेजा जाता था और मना करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती थी।
बताया गया कि करीब एक साल पहले उसकी एक परिचित युवती ने उसे ज्यादा पैसे कमाने का लालच दिया था। उसे भरोसा दिलाया गया कि एक व्यक्ति उसकी आर्थिक परेशानियां दूर कर सकता है। इसी भरोसे में वह उसके संपर्क में पहुंची, लेकिन बाद में उसे समझ आया कि वह एक खतरनाक जाल में फंस चुकी है।
पीड़िता ने बाहर निकलने की कोशिश की तो कथित तौर पर उसे रिकॉर्ड किए गए आपत्तिजनक वीडियो दिखाकर डराया गया। उसे धमकी दी गई कि अगर उसने विरोध किया या वहां से भागने की कोशिश की तो वीडियो सार्वजनिक कर दिए जाएंगे।
पीड़िता के मुताबिक, काम के दौरान तबीयत खराब होने और दर्द की शिकायत करने पर उसे दवाइयां दी जाती थीं और फिर दोबारा ग्राहकों के पास भेज दिया जाता था। उसे पैसों का लालच दिया गया था, लेकिन कथित तौर पर तय रकम भी नियमित रूप से नहीं दी जाती थी।
घर पर उसकी जिंदगी की दूसरी ही तस्वीर थी।
उसकी मां की पहले ही मौत हो चुकी थी और वह अपने पिता के साथ रहती थी। पिता को वह यही बताती थी कि वह कॉल सेंटर में नौकरी करती है। रोज शाम घर से निकलने और सुबह लौटने की वजह से परिवार को भी यही लगता रहा कि उसकी रात की नौकरी है।
लेकिन उसके पीछे चल रही सच्चाई बेहद अलग थी।
मामले की जानकारी मिलने के बाद एक संस्था की टीम ने गिरोह तक पहुंचने की कोशिश शुरू की। बताया गया कि टीम ने ग्राहक बनकर संपर्क किया और काफी समय तक भरोसा कायम करने की कोशिश की। इसके बाद एक ठिकाने की जानकारी मिली।
सूचना पुलिस तक पहुंचाई गई और टीम ने मौके पर कार्रवाई की।
वहां से शराब की खाली बोतलों के अलावा कई तरह की दवाइयां भी बरामद होने की बात सामने आई। कार्रवाई के दौरान एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर संकेत दिया कि इस पूरे मामले में वह अकेला नहीं है और इसके पीछे अन्य लोगों की भूमिका भी हो सकती है। इसके बाद पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े दूसरे संदिग्धों की तलाश और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी।
इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि नौकरी और आर्थिक मदद का झांसा देकर युवतियों को फंसाने वाले गिरोह किस तरह उनके भरोसे का फायदा उठा सकते हैं। पीड़िता को लंबे समय तक डर और धमकियों के बीच रखा गया, जबकि परिवार को उसकी असली स्थिति की जानकारी तक नहीं थी।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और इसके जरिए और कितने लोगों को निशाना बनाया गया।

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