
दालचीनी केवल भारतीय रसोइयों में खाने का स्वाद और सुगंध बढ़ाने वाला मसाला भर नहीं है, बल्कि सदियों से इसका इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा में भी किया जाता रहा है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधारने और ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में मददगार माने जाते हैं। पारंपरिक चिकित्सा और शुरुआती वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, दालचीनी का इस्तेमाल खासतौर से टाइप-2 डायबिटीज, पाचन संबंधी समस्याओं जैसे गैस, अपच और पेट फूलने, हाई कोलेस्ट्रॉल और दिल के रोगों, सर्दी-जुकाम या श्वसन संबंधी संक्रमण का इलाज करने में किया जाता रहा है। इतना ही नहीं दालचीनी का सेवन जोड़ों के दर्द और सूजन जैसी स्थितियों में एक स्पोर्टिव रेमेडी के रूप में किया जाता है।
आदर्श आयुर्वेदिक फार्मेसी, कनखल, हरिद्वार में आयुर्वेद विशेषज्ञ, डॉ. दीपक कुमार (वैद्य) ने बताया दालचीनी को अक्सर लोग खाने के साथ, चाय और दूध के साथ खाते हैं। इस मसाले को मसालों की महारानी माना जाता है। इस मसाले के दो से तीन ही गुण नहीं है बल्कि इसके अनगिनत फायदे हैं। अगर आपके मुंह से बदबू आती है तो आप एक टुकड़ा दालचीनी का चबा लें। दालचीनी चूसने से मुंह की दुर्गंध कम होती है साथ ही दांतों और मसूड़ों की समस्या भी दूर होती है। दालचीनी की खुशबू और इसके कुछ प्राकृतिक यौगिक मुंह की गंध को कुछ समय के लिए कम कर सकते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि दालचीनी शरीर पर किस तरह असर करती है ।
पाचन से जुड़ी बीमारियों का करती है उपचार
वैद्य दीपक कुमार ने बताया कि मौसम बदलने या दूषित भोजन के कारण होने वाले दस्त में 1 से 2 ग्राम दालचीनी पाउडर पानी के साथ खाने से फायदा हो सकता है। इसके अलावा दालचीनी का सेवन कमजोर पाचन वाले लोगों के लिए भी असरदार साबित होता है।
डायबिटीज और इंसुलिन सेंसिटिविटी पर होता है असर
दालचीनी का सेवन ब्लड शुगर कंट्रोल करने और इंसुलिन सेंसिटिविटी पर भी असर करता है। दालचीनी में मौजूद पॉलीफेनॉल एक ऐसा यौगिक है जो इंसुलिन के काम करने की क्षमता को बेहतर करने में मदद कर सकता है। हालांकि, डायबिटीज के इलाज के लिए दालचीनी को डॉक्टर की ओर से दी गई दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
कोलेस्ट्रॉल करता है कंट्रोल और दिल के लिए है जरूरी
आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने बताया दालचीनी को हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। यह ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी समस्याओं में मदद कर सकती है। इसका सेवन करने से खराब कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है। ये मासाल ट्राइग्लिसराइड को कम करने और गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है। दालचीनी धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मददगार साबित हो सकती है।
एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन करते हैं कंट्रोल
दालचीनी में कुछ ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं जिनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी यानी सूजन कम करने वाले गुण मौजूद होते हैं। इसे गठिया और जोड़ों की सूजन में उपयोगी माना जाता है। जिन लोगों को जोड़ों के दर्द की शिकायत रहती है वो दालचीनी का सेवन करें तो फायदा होता है।
वेट लॉस में भी है असरदार
दालचीनी को वजन घटाने और पेट की चर्बी कंट्रोल करने के लिए भी असरदार माना गया है। यह मेटाबॉलिज्म बूस्ट करने और कैलोरी बर्न करने में भी असरदार साबित होती है। संतुलित डाइट, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और कैलोरी कंट्रोल करने के साथ ही इस मसाले का सेवन किया जाए तो तेजी से वजन को कंट्रोल किया जा सकता है।
सर्दी-जुकाम और गले की परेशानी में है असरदार
दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट और कुछ एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं अगर इसका सेवन तुलसी, अदरक, दालचीनी और शहद के साथ मिलाकर किया जाए तो ये सर्दी-जुकाम और गले की परेशानी में असरदार होता है। दालचीनी का टुकड़ा या चूर्ण चूसने से गले को आराम मिल सकता है, लेकिन यह वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण का इलाज नहीं है।
दालचीनी के एंटीऑक्सीडेंट गुण
दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट गुण वाले कई प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से जुड़े तंत्र पर प्रभाव डाल सकती हैं। दालचीनी का सेवन चाय के साथ और उसका काढ़ा बनाकर इस्तेमाल करना असरदार साबित होता है।
दालचीनी का सेवन कैसे और कितनी मात्रा में करें
रोजाना 1 से 2 ग्राम दालचीनी का सेवन सेहत के लिए पर्याप्त है। दालचीनी की सही मात्रा व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करताहै। कुछ लोगों को ज्यादा मात्रा में दालचीनी लेने से मुंह या पेट में जलन जैसी परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में दालचीनी का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
डिस्क्लेमर: दालचीनी किसी बीमारी का इलाज नहीं है। इसका सेवन डॉक्टर की सलाह और अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही करें। इसे किसी भी दवा या उपचार का विकल्प न मानें।

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