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  • हजारों दीपों से जगमगाएगी रामनगरी, 7 नवंबर को अयोध्या में दिखेगा दीपोत्सव का भव्य और दिव्य नजारा

    हजारों दीपों से जगमगाएगी रामनगरी, 7 नवंबर को अयोध्या में दिखेगा दीपोत्सव का भव्य और दिव्य नजारा

    हजारों दीपों से जगमगाएगी रामनगरी, 7 नवंबर को अयोध्या में दिखेगा दीपोत्सव का भव्य और दिव्य नजारा

    रामनगरी अयोध्या में इस साल 7 नवंबर को होने वाला दीपोत्सव भव्यता और आध्यात्मिकता का खास संगम बनने जा रहा है. दीपोत्सव को यादगार बनाने के लिए प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं.

    एक ओर जहां दीपों के जरिए नया विश्व कीर्तिमान बनाने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर सरयू घाटों को भी बेहद खूबसूरत बनाने की योजना पर काम चल रहा है. शाम होते ही दीपों की रोशनी से सरयू तट का नजारा बेहद खास दिखाई देगा.एक किलोमीटर तक सजेंगे सरयू के घाट दीपोत्सव के दौरान सरयू नदी के पुल से लेकर लक्ष्मण घाट तक करीब एक किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र को आकर्षक तरीके से सजाया जाएगा. घाटों पर रंग-बिरंगी लाइटिंग के साथ फूलों की विशेष सजावट की जाएगी. दीप जलने के बाद पूरा सरयू तट रोशनी से जगमगा उठेगा. प्रशासन की कोशिश है कि यहां आने वाले

    श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक अलग और यादगार अनुभव मिले.महाआरती में दिखेगी अवध की संस्कृति मुख्य आयोजन के दिन सरयू घाटों पर भव्य महाआरती भी प्रस्तावित है. इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मां सरयू की आरती की जाएगी. हजारों दीपों की रोशनी और सरयू की लहरों का नजारा श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहेगा. महाआरती के जरिए अवध की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की खूबसूरत झलक भी देखने को मिलेगी.घाटों के रिनोवेशन का काम जारी दीपोत्सव को लेकर अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में अभी से उत्साह देखने को मिल रहा है. सरयू घाटों पर रिनोवेशन का काम भी जारी है. काम पूरा होने के बाद घाटों को और भव्य रूप देने की तैयारी है. इससे दीपोत्सव के दौरान सरयू तट की खूबसूरती और बढ़

    जाएगी.प्रशासन ने शुरू की तैयारियां जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी के मुताबिक, इस बार दीपोत्सव का आयोजन 7 नवंबर को किया जाना है. इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. अधिकारियों की बैठकें हो रही हैं और अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं. प्रशासन का लक्ष्य है कि इस बार अयोध्या का दीपोत्सव भव्य आयोजन के साथ श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक और यादगार अनुभव भी बने.

  • रगड़-रगड़कर हो गए परेशान, नहीं​​​​​ जा रहे सोफे से जिद्दी दाग… एक बार ट्राय करें ये क्लीनिंग सॉल्यूशन, सब सामान मिलेगा किचन में ही

    रगड़-रगड़कर हो गए परेशान, नहीं​​​​​ जा रहे सोफे से जिद्दी दाग… एक बार ट्राय करें ये क्लीनिंग सॉल्यूशन, सब सामान मिलेगा किचन में ही

    रगड़-रगड़कर हो गए परेशान, नहीं​​​​​ जा रहे सोफे से जिद्दी दाग… एक बार ट्राय करें ये क्लीनिंग सॉल्यूशन, सब सामान मिलेगा किचन में ही

    सोफा हर घर में इस्तेमाल होने वाली एक आम चीज़ है. इसका इस्तेमाल लगभग रोज होता है, इस वजह से यह गंदा भी काफी होता है. साफ करलो लेकिन कुछ समय बाद उस पर धूल, मिट्टी और खाने-पीने के दाग दिखने लगते हैं. कई बार सोफे को साफ करने के लिए महंगे क्लीनर खरीदने पड़ते हैं.

    क्या आप जानते हैं कि आप चाहें तो घर में मौजूद कुछ चीजों की मदद से भी सोफे को साफ कर सकते हैं. इसके लिए बेकिंग सोडा, सिरका, डिश सोप और पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसी ही एक आसान सफाई का तरीका है, जिसमें गर्म पानी, सिरका, डिश सोप और बेकिंग सोडा मिलाकर मिक्सचर तैयार किया जाता है.

    सबसे पहले सोफे की धूल करें साफ

    सोफा साफ करने से पहले उसकी धूल और गंदगी हटाना जरूरी है. इसके लिए वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें. अगर वैक्यूम क्लीनर नहीं है तो सूखे और साफ कपड़े से सोफे की सतह को अच्छी तरह पोंछ लें. इससे ऊपर जमी धूल निकल जाएगी और दाग साफ करना आसान होगा.

    घर पर ऐसे बनाएं सफाई का घोल

    एक स्प्रे बोतल लें. इसमें एक कप गुनगुना पानी डालें. अब इसमें एक बड़ा चम्मच सिरका और एक छोटा चम्मच डिश सोप मिलाएं. इसके बाद एक छोटा चम्मच बेकिंग सोडा डालें. सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं. बेकिंग सोडा डालने पर झाग बन सकता है, इसलिए घोल तैयार करते समय ध्यान रखें.

    गंदे स्पॉट्स पर ऐसे करें इस्तेमाल

    तैयार घोल को सीधे पूरे सोफे पर ज्यादा क्वांटिटी में न डालें. पहले इसे दाग वाली जगह पर हल्का स्प्रे करें. अब मुलायम कपड़े या सॉफ्ट ब्रश की मदद से उस जगह को धीरे-धीरे रगड़ें. बहुत ज्यादा जोर से रगड़ने से कपड़े का रंग या बनावट खराब हो सकती है. सफाई के बाद गीले कपड़े से उस जगह को पोंछ दें.

    सबसे पहले करें पैच टेस्ट

    हर सोफे का कपड़ा अलग होता है. इसलिए सफाई का घोल इस्तेमाल करने से पहले सोफे के किसी छिपे हुए छोटे हिस्से पर इसे लगाकर देखें. अगर कपड़े का रंग नहीं बदलता और कोई नुकसान नहीं होता, तभी इसे बाकी हिस्से पर इस्तेमाल करें. सोफा साफ करने के बाद उसे अच्छी तरह सूखने दें. गीले सोफे पर तुरंत न बैठें, क्योंकि इससे नमी और बदबू की समस्या हो सकती है.

  • झारखंड में छिपी है ‘मंगल​​​​​ ग्रह जैसी’ अनोखी जगह! लाल चट्टानों और गहरी घाटी का नजारा देख हैरान रह गए लोग.

    झारखंड में छिपी है ‘मंगल​​​​​ ग्रह जैसी’ अनोखी जगह! लाल चट्टानों और गहरी घाटी का नजारा देख हैरान रह गए लोग.

    झारखंड में छिपी है ‘मंगल​​​​​ ग्रह जैसी’ अनोखी जगह! लाल चट्टानों और गहरी घाटी का नजारा देख हैरान रह गए लोग.

    झारखंड को अक्सर अपनी हरियाली, पहाड़ों और झरनों के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां कुछ ऐसी जगहें भी हैं जिनका नजारा आपको धरती से कहीं दूर किसी दूसरे ग्रह की याद दिला सकता है। इन दिनों चतरा जिले की एक ऐसी ही खूबसूरत जगह का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग इसे ‘वैली ऑफ मार्स’ यानी मंगल ग्रह की घाटी कह रहे हैं।

    लाल रंग की चट्टानें, गहरी घाटियां और उनके बीच बहता पानी इस जगह को बेहद अनोखा रूप देते हैं। वायरल तस्वीरों और वीडियो में इसका नजारा इतना अलग दिखाई देता है कि पहली नजर में कई लोगों को यकीन करना मुश्किल हो रहा है कि यह जगह झारखंड में ही मौजूद है।

    चतरा की ‘वैली ऑफ मार्स’ ने खींचा लोगों का ध्यान

    जिस जगह की चर्चा हो रही है, उसका नाम बंदारू खैवा जलप्रपात बताया जाता है। इसे स्थानीय तौर पर खैवा पिकनिक स्पॉट के नाम से भी जाना जाता है। यह झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग क्षेत्र में स्थित है।

    यहां मौजूद लाल और खुरदरी चट्टानों का आकार बेहद अनोखा है। घाटी का पूरा दृश्य दूर से देखने पर किसी दूसरे ग्रह की सतह जैसा नजर आता है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर इसे ‘वैली ऑफ मार्स’ के नाम से भी जाना जाता है।

    लाल चट्टानों के बीच बहती है फल्गु नदी

    इस जगह की खूबसूरती सिर्फ चट्टानों तक सीमित नहीं है। घाटी के बीच से फल्गु नदी बहती है, जो पूरे इलाके के प्राकृतिक सौंदर्य को और बढ़ा देती है।

    लाल रंग की चट्टानों और पानी के बीच बना यह प्राकृतिक दृश्य खासकर प्रकृति और एडवेंचर पसंद करने वाले लोगों को आकर्षित कर सकता है। स्थानीय मान्यताओं में यहां की चट्टानों को लेकर अलग-अलग बातें भी कही जाती हैं और कुछ लोग इन्हें भगवान विश्वकर्मा की अद्भुत रचना से जोड़कर देखते हैं।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ नजारा

    इस जगह का वीडियो ट्रैवल क्रिएटर फहाद हैदर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया था। इसके बाद यह क्लिप तेजी से लोगों का ध्यान खींचने लगी।

    वीडियो देखने के बाद कई यूजर्स ने हैरानी जताई कि झारखंड में इतनी अनोखी जगह मौजूद है, जिसके बारे में उन्हें जानकारी ही नहीं थी। कुछ लोगों ने चट्टानों की बनावट को देखकर इसे मंगल ग्रह की सतह जैसा बताया।

    हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो की तरह इसके जरिए दिखाई गई जगह और दावों को साझा करने से पहले स्थानीय जानकारी और आधिकारिक पर्यटन स्रोतों से पुष्टि करना बेहतर है।

    चतरा से कितनी दूर है यह जगह?

    जानकारी के मुताबिक, बंदारू खैवा जलप्रपात चतरा जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर बताया जाता है। वहीं राजधानी रांची से इसकी दूरी लगभग 150 किलोमीटर बताई गई है।

    इलाके तक पहुंचने वाला रास्ता कुछ हिस्सों में कच्चा और मुश्किल हो सकता है। खासकर बारिश के मौसम में सड़क और आसपास का इलाका फिसलन भरा हो सकता है। इसलिए यहां जाने वाले पर्यटकों को मौसम, सड़क की स्थिति और स्थानीय लोगों की सलाह का ध्यान रखना चाहिए।

    झारखंड में छिपा है प्रकृति का ये अनोखा नजारा

    झारखंड के जंगलों, पहाड़ों और झरनों के बीच ऐसी कई प्राकृतिक जगहें मौजूद हैं, जो अभी भी आम पर्यटकों की नजरों से दूर हैं। बंदारू खैवा का यह अनोखा भू-दृश्य भी इसी प्राकृतिक खूबसूरती की एक झलक पेश करता है।

    वायरल वीडियो ने एक बार फिर झारखंड के इस हिस्से को सोशल मीडिया पर चर्चा में ला दिया है। लाल चट्टानों और घाटी का अनोखा नजारा देखकर लोग इसे ‘धरती का मंगल ग्रह’ कह रहे हैं।

     

     

     

  • शाम होते ही लाइट के​​​​​ पास जमा हो जाते हैं कीड़े? इन उपायों से पाएं मच्छर-मक्खियों और कीड़ों से छुटकारा..

    शाम होते ही लाइट के​​​​​ पास जमा हो जाते हैं कीड़े? इन उपायों से पाएं मच्छर-मक्खियों और कीड़ों से छुटकारा..

    शाम होते ही लाइट के​​​​​ पास जमा हो जाते हैं कीड़े? इन उपायों से पाएं मच्छर-मक्खियों और कीड़ों से छुटकारा..

    मानसून का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इस दौरान घर में छोटे-छोटे कीड़ों की परेशानी बढ़ जाती है. शाम होते ही लाइट के आसपास मच्छर, छोटी मक्खियां और दूसरे उड़ने वाले कीड़े मंडराने लगते हैं. कई बार ये कीड़े घर के अंदर भी पहुंच जाते हैं और खाने-पीने की चीजों पर बैठकर गंदगी के साथ बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं.

    हालांकि, कुछ आसान उपायों की मदद से इनकी परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है. चलिए जानते हैं कैसे…ऐसी लाइट का इस्तेमाल करें उड़ने वाले कीड़े रात के समय तेज रोशनी की ओर आकर्षित होते हैं. खासकर तेज सफेद रोशनी के आसपास इनकी संख्या ज्यादा दिखाई दे सकती है. ऐसे में बालकनी, दरवाजे या गार्डन में कम UV वाली LED लाइट लगाना बेहतर विकल्प हो सकता है. इसके अलावा, बाहर की जगहों पर वॉर्म या पीली रोशनी वाली LED का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.नेचुरल रिपेलेंट आजमाएं कुछ पौधों और एसेंशियल ऑयल की तेज खुशबू कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है. लैवेंडर, पेपरमिंट, सिट्रोनेला और यूकेलिप्टस जैसे ऑयल का इस्तेमाल किया जा सकता है.

    इन्हें इस्तेमाल करने से पहले लेबल के निर्देश जरूर पढ़ें और त्वचा या पालतू जानवरों के संपर्क से बचाएं. बालकनी या गार्डन में तुलसी, रोजमेरी और लेमनग्रास जैसे पौधे लगाना भी एक आसान विकल्प है.पानी जमा न होने दें मानसून में घर के आसपास पानी जमा न होने दें. गमलों की प्लेट, बाल्टी, कूलर और पुराने डिब्बों में जमा पानी मच्छरों के लिए पनपने की जगह बन सकता है. इसलिए इन्हें नियमित रूप से खाली और साफ करते रहें.खिड़की-दरवाजों के गैप करें सील खिड़की, दरवाजे, दीवार या छत में छोटे गैप दिखाई दें तो उन्हें सील कर दें. साथ ही लाइट, खिड़की और आसपास की जगह को साफ रखें. इन आसान उपायों से मानसून में घर को साफ रखने के साथ कीड़ों की परेशानी भी कम की जा सकती है.

  • नदी में आराम कर रहा​​​​​ था बच्चा, तभी पास आ गया विशाल मगरमच्छ; आगे जो हुआ उसे देखकर हैरान रह गए लोग

    नदी में आराम कर रहा​​​​​ था बच्चा, तभी पास आ गया विशाल मगरमच्छ; आगे जो हुआ उसे देखकर हैरान रह गए लोग

    नदी में आराम कर रहा​​​​​ था बच्चा, तभी पास आ गया विशाल मगरमच्छ; आगे जो हुआ उसे देखकर हैरान रह गए लोग

    Viral Video: सोशल मीडिया पर एक हैरान करने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें एक बच्चा नदी के पानी में एक छोटे फ्लोटिंग बोर्ड पर आराम करता नजर आ रहा है। इसी दौरान एक मगरमच्छ तैरता हुआ उसके बेहद करीब पहुंच जाता है। इसके बाद बच्चे की प्रतिक्रिया देखकर लोग हैरान रह गए।

    पानी में आराम कर रहा था बच्चा, तभी पहुंचा मगरमच्छ

    वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि बच्चा नदी के पानी में एक छोटी नाव के पास बने फ्लोटिंग बोर्ड पर लेटा हुआ है। वह बिल्कुल आराम से नजर आ रहा है और आसपास का माहौल भी शांत दिखाई देता है।

    तभी पानी में हलचल होती है और एक मगरमच्छ धीरे-धीरे तैरते हुए बच्चे की ओर बढ़ने लगता है। जैसे-जैसे मगरमच्छ बच्चे के करीब आता है, यह दृश्य देखने वालों के लिए काफी डरावना हो जाता है।

    मगरमच्छ के बेहद करीब पहुंच गया बच्चा

    वीडियो के अगले हिस्से में बच्चा मगरमच्छ के साथ बेहद सहज नजर आता है। वह उसके करीब जाता हुआ दिखाई देता है और मगरमच्छ भी कुछ समय तक शांत रहता है। इसी वजह से वीडियो देखने वाले लोग हैरान रह गए।

    हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली स्थिति को देखकर इसे सुरक्षित व्यवहार नहीं माना जा सकता। मगरमच्छ जंगली और बेहद ताकतवर शिकारी होते हैं। उनका शांत दिखाई देना इस बात की गारंटी नहीं है कि वे इंसानों के लिए सुरक्षित हैं।

    सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए अलग-अलग रिएक्शन

    वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने बच्चे के आत्मविश्वास को देखकर हैरानी जताई, जबकि कई यूजर्स ने उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की।

    लोगों का कहना है कि मगरमच्छ के साथ इस तरह करीब जाना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे जंगली जानवरों से हमेशा सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है।

    वायरल वीडियो देखकर न करें ऐसी गलती

    सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो में अक्सर पूरी परिस्थिति दिखाई नहीं देती। इसलिए किसी वीडियो को देखकर उसी तरह का स्टंट या प्रयोग करना खतरनाक हो सकता है।

    खासकर बच्चों को मगरमच्छ जैसे जंगली जानवरों से दूर रखना बेहद जरूरी है। जानवर शांत नजर आए, तब भी उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आ सकता है।

     

     

     

    डिस्क्लेमर: यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और उससे जुड़ी प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। वीडियो में दिखाई देने वाली घटना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

  • नारियल तेल असली है या​​​​​ मिलावटी? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान..

    नारियल तेल असली है या​​​​​ मिलावटी? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान..

    नारियल तेल असली है या​​​​​ मिलावटी? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान..

    नारियल तेल का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है, कोई इसे खाना बनाने के लिए रखता है, तो कोई बालों और त्वचा की देखभाल के लिए. लेकिन क्या जो नारियल तेल आप इस्तेमाल कर रहे हैं, वह वाकई शुद्ध है?

    बाजार में कई बार मिलावट वाला तेल भी मिल सकता है. तो चलिए आपको कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बताते हैं जिससे आप असली और नकली नारियल तेल की पहचान कर सकते हैं.फ्रिज टेस्ट से करें जांच नारियल तेल को आप फ्रिज टेस्ट कर सकते हैं. इसके लिए थोड़ा सा तेल साफ कांच की कटोरी में डालकर कुछ घंटों के लिए फ्रिज में रखें. शुद्ध नारियल तेल ठंडे तापमान में जमने लगता है और सफेद या ठोस दिखाई देता है. हालांकि, केवल इस टेस्ट से तेल की शुद्धता तय नहीं की जा सकती,

    क्योंकि तापमान और तेल की प्रोसेसिंग का भी असर पड़ता है.रंग और बनावट पर दें ध्यान नारियल तेल सामान्य तौर पर साफ और एक समान दिखाई देता है. ठंडे मौसम में यह सफेद और ठोस हो सकता है, जबकि गर्म वातावरण में पारदर्शी या हल्का पीला नजर आ सकता है. तेल को पारदर्शी कांच के बर्तन में डालकर रोशनी में देखें. अगर इसमें असामान्य कण, गंदगी या बहुत ज्यादा अलग-अलग परतें नजर आएं, तो सावधान रहें.खुशबू से भी मिल सकता है संकेत वर्जिन या अनरिफाइंड नारियल तेल में नारियल की प्राकृतिक खुशबू होती है. थोड़ी मात्रा हथेली पर लेकर हल्का गर्म करें और इसकी गंध महसूस करें. अगर तेल से तेज केमिकल जैसी गंध, बासीपन या कोई असामान्य महक आ रही है, तो इसकी क्वालिटी पर सवाल उठ सकता है.

    वहीं, रिफाइंड नारियल तेल की खुशबू काफी हल्की हो सकती है.कागज पर डालकर देखें एक साफ सफेद कागज पर नारियल तेल की कुछ बूंदें डालकर थोड़ी देर छोड़ दें. इसके फैलने और बचे हुए अवशेष को देखें. अगर असामान्य रंग या गंदा अवशेष नजर आए, तो यह गुणवत्ता को लेकर संकेत हो सकता है. हालांकि, यह भी केवल शुरुआती घरेलू जांच है.तेल खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान नारियल तेल खरीदते समय पैकेट पर लिखे Ingredients जरूर पढ़ें. पैक की सील, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और FSSAI से जुड़ी जानकारी भी जांचें. सबसे जरूरी बात यह है कि घरेलू टेस्ट मिलावट की पक्की पुष्टि नहीं करते. अगर तेल की गंध, स्वाद या बनावट असामान्य लगे, तो खाने या त्वचा पर लगाने से बचें.

  • घर पर बनाएं कोका-कोला, डायबिटीज​​​​​ मरीज़ों के लिए भी सेफ.. जानें कैसे करें तैयार..

    घर पर बनाएं कोका-कोला, डायबिटीज​​​​​ मरीज़ों के लिए भी सेफ.. जानें कैसे करें तैयार..

    घर पर बनाएं कोका-कोला, डायबिटीज​​​​​ मरीज़ों के लिए भी सेफ.. जानें कैसे करें तैयार..

    गर्मी के मौसम लोग जहां तपिश से तप रहे होते हैं और पसीने से चू रहे होते हैं. ऐसे में वह ऐसी ड्रिंक्स की तलाश करते हैं, जो उनके शरीर तो ठंडक पहुंचा सकें. इसमें जूस, ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक जैसी ड्रिंक शामिल होती हैं. सबसे आम ड्रिंक की बात करें तो वह कोल्ड ड्रिंक होती है. घर पर मेहमान आ जाएं तो फौरन मार्केट से एक कोल्ड ड्रिंक की बोतल आ जाती है. या फिर कहीं बाहर से आप आएं तो कोल्ड ड्रिंक पीने का मन करता है.

    बेशक कोल्ड ड्रिंक ठंडक देती है, लेकिन एक बात यह भी सच है कि कोल्ड ड्रिंक हमारी सेहत के लिए फायदेमंद नहीं. दरअसल इसमें केमिकल्स होते हैं और काफी ज्यादा मात्रा में शुगर होती है, जो हमारी सेहत पर एक बड़ा हथौड़ा मारती है. खासतौर पर डायबिटीज के पेशेंट्स के लिए यह बिलकुल भी फायदे का सौदा नहीं. ऐसे में आप घर पर खुद सेफ तरीके से कोल्ड ड्रिंक बना सकते हैं.

    किन इंग्रीडिएंट्स की है जरूरत

    घर पर कोल्ड ड्रिंक बनाने के लिए आपको 1 गिलास ठंडा पानी या सोडा, 1 छोटा चम्मच कॉफी, आधा छोटा चम्मच कोको पाउडर, 1 छोटा चम्मच शहद या स्टेविया, आधा छोटा चम्मच नींबू का रस, चुटकी भर काला नमक और कुछ बर्फ के टुकड़े चाहिए होंगे.

    कैसे आएगा कोला जैसा कलर

    सबसे पहले एक गिलास में कॉफी और कोको पाउडर डालें. अब इसमें थोड़ा सा गर्म पानी मिलाकर अच्छे से घोल लें. ध्यान रखें कि मिक्चर स्मूद और हल्का गाढ़ा हो जाए. यही बेस आपके ड्रिंक को कोला जैसा रंग और गहराई देता है. अब इस तैयार मिक्सचर में शहद या स्टेविया डालें और अच्छी तरह से मिक्स करें. यह ड्रिंक को हल्की और बैलेंस्ड मिठास देता है. आप अपनी पसंद के अनुसार मिठास को एडजस्ट कर सकते हैं.

    नींबू से ड्रिंक बनेगी रिफ्रेशिंग

    इसके बाद इसमें नींबू का रस और एक चुटकी काला नमक डालें. यह स्टेप ड्रिंक के फ्लेवर को पूरी तरह बराबर करता है और इसे और ज्यादा रिफ्रेशिंग बनाता है. अब धीरे-धीरे इसमें ठंडा सोडा डालें और हल्के हाथों से मिलाएं. ध्यान रखें कि ज्यादा जोर से न चलाएं, वरना सोडा की फिज खत्म हो सकती है.

    कैसे करें इसे सर्व

    आखिर में बर्फ के टुकड़े डालें और चाहें तो नींबू स्लाइस या पुदीने की पत्तियों से गार्निश करें. आपकी टेस्टी और हेल्दी देसी कोल्ड ड्रिंक तैयार है. आप इसे फौरन सर्व करें जिससे यह फ्रेश रहे और आप पूरा टेस्ट लें सकें.

  • 15 फुट के विशाल अजगर​​​​​ के साथ खेलती दिखी छोटी बच्ची, मुंह पर किया किस! वीडियो देख लोगों की बढ़ी चिंता.

    15 फुट के विशाल अजगर​​​​​ के साथ खेलती दिखी छोटी बच्ची, मुंह पर किया किस! वीडियो देख लोगों की बढ़ी चिंता.

    15 फुट के विशाल अजगर​​​​​ के साथ खेलती दिखी छोटी बच्ची, मुंह पर किया किस! वीडियो देख लोगों की बढ़ी चिंता.

    Viral Video: सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो तेजी से चर्चा में है, जिसे देखकर लोग हैरान भी हैं और बच्ची की सुरक्षा को लेकर चिंतित भी। वायरल क्लिप में एक छोटी बच्ची एक विशालकाय अजगर के बेहद करीब नजर आ रही है। बच्ची सांप के साथ इस तरह खेलती दिखाई देती है, जैसे वह किसी खिलौने के साथ खेल रही हो।

    वीडियो में बच्ची घर के लिविंग रूम में सोफे पर बैठी दिखाई देती है। उसके सामने करीब 15 फुट लंबा अजगर नजर आता है। बच्ची कभी उसके शरीर पर लेटती है तो कभी उसके आसपास लिपटती हुई दिखाई देती है। एक जगह वह अजगर के सिर और मुंह के पास जाती हुई भी नजर आती है।

    विशाल अजगर के साथ बच्ची का खतरनाक खेल

    अजगर जहरीला सांप नहीं होता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह इंसानों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। अजगर अपने मजबूत शरीर और मांसपेशियों की मदद से शिकार को जकड़ सकता है।

    ऐसे में इतनी छोटी बच्ची का बिना किसी स्पष्ट सुरक्षा व्यवस्था के इतने बड़े सांप के बेहद करीब जाना जोखिम भरा हो सकता है। वीडियो में भले ही अजगर शांत दिखाई दे रहा हो, लेकिन जंगली या बड़े जानवरों के व्यवहार का अनुमान हमेशा पहले से नहीं लगाया जा सकता।

    किसने शेयर किया वीडियो?

    बताया जा रहा है कि इस वीडियो को अमेरिकी इन्फ्लुएंसर माइक होल्स्टन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है। माइक होल्स्टन वन्यजीवों और खतरनाक जानवरों से जुड़े कंटेंट के लिए जाने जाते हैं।

    वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर होते ही तेजी से वायरल हो गया और इसे देखने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    बच्ची की सुरक्षा को लेकर चिंतित हुए लोग

    वीडियो देखने वाले कई यूजर्स ने बच्ची की सुरक्षा पर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर व्यूज और मनोरंजन के लिए बच्चों को खतरनाक जानवरों के इतने करीब ले जाना उचित नहीं है।

    कुछ लोगों ने यह भी कहा कि सांप शांत दिखाई दे रहा हो, तब भी उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आ सकता है। इसलिए बच्चों को बड़े या संभावित रूप से खतरनाक जानवरों से हमेशा सुरक्षित दूरी पर रखना जरूरी है।

    यह वीडियो भले ही सोशल मीडिया पर मनोरंजन या हैरानी का विषय बना हुआ है, लेकिन इसे देखकर ऐसे खतरनाक स्टंट को दोहराना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।

     

     

     

     

  • क्या सच में पूरा Golden​​​​​ Temple सोने का बना है? कीमत सुनकर उड़ जाएंगे होश! जानिए पूरी कहानी..

    क्या सच में पूरा Golden​​​​​ Temple सोने का बना है? कीमत सुनकर उड़ जाएंगे होश! जानिए पूरी कहानी..

    क्या सच में पूरा Golden​​​​​ Temple सोने का बना है? कीमत सुनकर उड़ जाएंगे होश! जानिए पूरी कहानी..

    भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल अमृतसर का Golden Temple अपनी खूबसूरती और आध्यात्मिक महत्व के लिए दुनियाभर में जाना जाता है. इसे श्री हरमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है. हर साल लाखों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं. मंदिर की सुनहरी चमक देखकर अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या पूरा Golden Temple असली सोने से बना है? चलिए आपको बताते हैं इसका सही जवाब…महाराजा रणजीत सिंह ने कराई थी सोने की सजावट Golden Temple के स्वर्णीकरण में सिख साम्राज्य के संस्थापक महाराजा रणजीत सिंह की अहम भूमिका मानी जाती है. साल 1830 के आसपास उन्होंने मंदिर के प्रमुख हिस्सों को सोने से सजाने की पहल की थी. उस समय करीब 150 से 162 किलोग्राम 24 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया गया था. उस दौर में इस सोने की कीमत करीब 65 लाख रुपये बताई जाती है. खास बात यह है कि उस समय इस्तेमाल किया गया सोना 24 कैरेट था, जो सामान्य गहने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने से ज्यादा शुद्ध होता है.

    बाद में फिर चढ़ाया गया सैकड़ों किलो सोना समय के साथ मंदिर की मरम्मत और सजावट का काम भी किया गया. साल 1995 से 1999 के बीच Golden Temple के नवीनीकरण के दौरान करीब 500 किलोग्राम अतिरिक्त 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई गई. यह सोना मंदिर के गुंबद, दरवाजों, दीवारों और अंदर की छत जैसे कई हिस्सों पर लगाया गया.पूरा मंदिर सोने का है? Golden Temple की पूरी इमारत सोने से नहीं बनी है. इसमें संगमरमर और तांबे का भी इस्तेमाल हुआ है.

    सोने की परत इसकी सुंदरता और भव्यता को बढ़ाती है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार मंदिर में कुल मिलाकर करीब 662 से 750 किलोग्राम तक 24 कैरेट सोने के इस्तेमाल का अनुमान लगाया जाता है. आज के समय में इसकी कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये हो सकती है. यही सुनहरी आभा Golden Temple को दुनिया के सबसे आकर्षक और आध्यात्मिक धार्मिक स्थलों में खास पहचान देती है.

  • फल-फूल नहीं, इस मंदिर में​​​​​ देवी को चढ़ाए जाते हैं 5 पत्थर, जानें पूरी कहानी और इतिहास..

    फल-फूल नहीं, इस मंदिर में​​​​​ देवी को चढ़ाए जाते हैं 5 पत्थर, जानें पूरी कहानी और इतिहास..

    फल-फूल नहीं, इस मंदिर में​​​​​ देवी को चढ़ाए जाते हैं 5 पत्थर, जानें पूरी कहानी और इतिहास..

    छत्तीसगढ़ के मां बगदाई वनदेवी मंदिर में फल-फूल नहीं, बल्कि 5 पत्थर अर्पित कर मन्नत मांगी जाती है. सदियों पुरानी यह अनोखी परंपरा आज भी लोगों की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र है. आइए जानते हैं, यह परंपरा कैसे शुरू हुई, कथा और इतिहास क्या है?

    लोग मंदिर में क्या-क्या नहीं चढ़ाते हैं, सोने-चांदी के आभूषण, छत्र, छप्पन भोग, लेकिन क्या आपने ये देखा और सुना है केवल 5 पत्थर अर्पित करने से लोगों की मुराद पूरी हो जाती है. जी हां, छत्तीसगढ़ में के ऐसा मंदिर है, जहां ऐसी ही अनोखी परंपरा निभाई जाती है, भक्ति विधान के लिए अलबेला है. आइए जानते हैं, छत्तीसगढ़ में में यह मंदिर कहां है, किस देवी को समर्पित है और सदियों पुरानी इस परंपरा के पीछे कहानी और इतिहास क्या है, जो आज भी आस्था का एक सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है?

    मां बगदाई वनदेवी मंदिर

    छत्तीसगढ़ का यह मंदिर खमतराई के घने जंगलों में है, जो बिलासपुर जिले में स्थित है. जहां देश के बाकी मंदिरों और पूजा स्थलों पर फूल, पान, मिठाई, फल, नारियल और आभूषण आदि चढ़ाएं जाते हैं, वहीं मां बगदाई वनदेवी को समर्पित इस मंदिर में 5 पत्थर चढ़ाने की अनूठी परंपरा है, जिसे लोग वहां ‘गोटा’ और ‘कंकड़’ कहते हैं.

    साधारण नहीं हैं ‘गोटा पत्थर’

    मां बगदाई वनदेवी के मंदिर में चढ़ाए जाने वाले ये पत्थर साधारण नहीं हैं. ये पत्थर खेतों में मिलते हैं, जिसे भक्तों को विशेष ध्यान से खोजना पड़ता है. ये चिकने और गोल होते हैं, जिसे ‘गोटा’ या ‘गोल कंकड़’ कहा जाता है. मान्यता है कि वनदेवी मां बगदाई को चुने हुए ये बेहद प्रिय हैं.

    मन्नत पूरी होने पर भी चढ़ाते हैं 5 पत्थर

    मां बगदाई वनदेवी के इस मंदिर में श्रद्धालुओं के मन्नत पूरी करने की प्रक्रिया 2 चरणों में होती है. पहला यह कि पहली बार मन्नत मांगते समय भक्त मन में अपनी मनोकामना दोहराते हु 5 पत्थर और एक फूल चढ़ाते हैं. दूसरी बार, मन्नत पूरी होने पर भी श्रद्धालु आभार व्यक्त करते हुए मंदिर में माता को 5 गोटा पत्थर चढ़ाते हैं.

    कैसे शुरू हुई यह परंपरा?

    कहते हैं, प्राचीन काल में लोग जब खमतराई के घने जंगलों से गुजरते थे तो वे हिंसक वन्य पशुओं और डाकुओं से रक्षा के लिए वे वनदेवी मां की प्रार्थना करते थे. कुछ पास न होने पर वे माता को 5 पत्थर ही चढ़ा देते थे. एक दूसरी कथा एक चरवाहे की है. कहते हैं, एक चरवाहे को जंगल वनदेवी की मूर्ति मिली थी. उसके पास भोग लगाने को कुछ नहीं था. तब देवी मां ने उसे दर्शन देकर कहा कि वह कीमती वस्तुओं की नहीं सच्ची श्रद्धा और प्रेम भूखी है, वह बस 5 पत्थर ही अर्पित कर दें. कहते हैं, तभी से ये परंपरा बदस्तूर चली आ राय रही है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है