क्या आपने कभी सोचा है कि जिस उम्र में बच्चे कार्टून देखने या पार्क में खेलने की जिद करते हैं, उस उम्र में कोई बच्चा कोडिंग सीखकर दुनिया का सबसे कम उम्र का प्रोफेशनल प्रोग्रामर बन जाए? जी हां, ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में रहने वाले 8 साल के नोआ विलियम्स (Noah Williams) ने कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है. उनकी यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है, जहां एक छोटी सी परेशानी ने एक बच्चे को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Records) तक पहुंचा दिया.
होमवर्क से बचने के लिए सीखी C++ जैसी खतरनाक कोडिंग
कहानी शुरू होती है जब नोआ सिर्फ 6 साल के थे. बाकी बच्चों की तरह नोआ को भी मैथ्स के लंबे-लंबे कैलकुलेशन और होमवर्क से चिढ़ थी. उन्हें मैथ्स के पैटर्न समझने में दिक्कत होती थी. लेकिन नोआ ने हार मानने के बजाय एक गजब का जुगाड़ निकाला. उन्होंने सोचा कि क्यों न एक ऐसा प्रोग्राम बनाया जाए जो उनका सारा मैथ्स का होमवर्क झटपट सॉल्व कर दे.
इस सोच के साथ उन्होंने दुनिया की सबसे टफ प्रोग्रामिंग लैंग्वेजों में से एक C++ को सीखना शुरू कर दिया. बड़े-बड़े सॉफ्टवेयर इंजीनियर जिस लैंग्वेज को सीखने में पसीना बहाते हैं, उसे इस नन्हे बच्चे ने खेल-खेल में सीख लिया.
सिर्फ 7 साल की उम्र में Mensa IQ टेस्ट में गाड़े झंडे
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, नोआ का दिमाग आम बच्चों से अलग और बेहद तेज है. जब वे महज 7 साल के थे, तब उन्होंने दुनिया की सबसे कठिन मानी जाने वाली IQ सोसाइटी मेंसा (Mensa) का टेस्ट दिया. नोआ ने इस टेस्ट में 99.9th परसेंटाइल स्कोर करके सबको हैरान कर दिया. उनकी इस जीनियस प्रतिभा ने यह साबित कर दिया था कि वह आने वाले समय में टेक वर्ल्ड में बड़ा धमाका करने वाले हैं.
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम
कोडिंग के बाद अब रोबोटिक्स और ड्रोन्स पर कब्जा!
नोआ सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन तक ही सीमित नहीं रहे. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, अब वे रोबोटिक्स और ड्रोन्स की दुनिया में भी नए-नए कारनामे कर रहे हैं. वर्चुअल कोडिंग से निकलकर वे फिजिकल वर्ल्ड की टेक्नोलॉजी को भी तेजी से सीख रहे हैं
टैटू बनवाना आज के दौर में युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है। लोग अपनी पसंद के डिजाइन, नाम या किसी खास याद को शरीर पर टैटू के रूप में बनवाते हैं। लेकिन कनाडा के जेरेमी ‘रेमी’ स्कोफील्ड का टैटू के प्रति जुनून सामान्य शौक से कहीं आगे निकल चुका है। उनके शरीर का ज्यादातर हिस्सा टैटू से ढका हुआ है और इसी वजह से उनका नाम Guinness World Records में दर्ज हो चुका है।
शरीर पर टैटू की करीब 40 परतें
जेरेमी सोशल मीडिया पर ‘@Ephemeral Remy’ के नाम से जाने जाते हैं। Guinness World Records ने उन्हें ‘Most Tattooed Person Living (Multiple Layers) – Male’ रिकॉर्ड से सम्मानित किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, उनके शरीर की करीब 90 फीसदी त्वचा टैटू से ढकी हुई है। खास बात यह है कि उनके शरीर के कई हिस्सों पर एक टैटू के ऊपर दोबारा और फिर उसके ऊपर भी टैटू बनवाया गया है। कुछ जगहों पर स्याही की करीब 40 परतें तक बताई जाती हैं। वहीं, शरीर के कुछ हिस्सों पर 100 से ज्यादा बार टैटू किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
बेटे के नाम से शुरू हुआ था सफर
रेमी ने कभी नहीं सोचा था कि टैटू बनवाने का उनका शौक एक दिन उन्हें वर्ल्ड रिकॉर्ड तक पहुंचा देगा। उनके टैटू सफर की शुरुआत साल 2005 में हुई थी। उस समय उन्होंने अपने बाएं हाथ के अंदरूनी हिस्से पर अपने बेटे का नाम टैटू के रूप में बनवाया था।
इसके बाद धीरे-धीरे उनका यह शौक बढ़ता गया। उन्होंने शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर टैटू बनवाने शुरू किए और समय के साथ यह उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया।
1000 घंटे से ज्यादा टैटू चेयर पर बैठे
रेमी पहले शेफ के तौर पर काम कर चुके हैं। अब वह टैटू शॉप्स और सोशल मीडिया से जुड़े काम संभालते हैं। वह बॉडी मॉडिफिकेशन के भी शौकीन हैं और उनके शरीर पर 100 से ज्यादा पियर्सिंग होने की बात कही जाती है।
टैटू बनवाने के इस लंबे सफर में रेमी ने 1000 घंटे से ज्यादा समय टैटू चेयर पर बिताया है। उनके शरीर पर अलग-अलग टैटू बनाने में 40 से ज्यादा कलाकारों ने भी योगदान दिया है।
रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं बनवाए थे टैटू
रेमी के मामले की सबसे दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के इरादे से टैटू बनवाना शुरू नहीं किया था। उनके मुताबिक, उन्हें टैटू और बॉडी आर्ट का शौक था और वह इसी जुनून के चलते लगातार आगे बढ़ते गए।
बाद में जब लोगों ने उनके टैटू की संख्या और शरीर पर बनी कई परतों के बारे में सवाल करना शुरू किया, तब उन्हें पता चला कि उनका नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए दर्ज किया जा सकता है। अब उनका नाम Guinness World Records में शामिल है।
ओडिशा में पांच बेबी ओरंगुटान मिलने की खबर ने सबका ध्यान खींचा है, लेकिन इनका असली घर भारत से हजारों किलोमीटर दूर है। अगर कभी इंडोनेशिया जाएं, तो सुमात्रा और बोर्नियो में ओरंगुटान देखने का अनुभव जरूर लें।
Orangutan, Wildlife Tourism:
ओडिशा के बालासोर में जंगल के बीच पांच नन्हे ओरंगुटान मिलने की खबर ने हर किसी को चौंका दिया। आखिर ये जानवर भारत के जंगलों में तो मिलते नहीं हैं! ओरंगुटान का असली घर दक्षिण-पूर्व एशिया के घने रेन फॉरेस्ट हैं, खासकर इंडोनेशिया के सुमात्रा और बोर्नियो द्वीप। इसलिए बालासोर की यह घटना एक दिलचस्प ट्रैवल कनेक्शन भी सामने लाती है।
अगर कभी आपकी विदेश यात्रा की सूची में इंडोनेशिया शामिल हो, तो सिर्फ समुद्र तट, द्वीप और खूबसूरत झरनों तक खुद को सीमित मत रखिए। यहां जंगल के बीच इन लाल-भूरे बालों वाले जानवरों को उनके प्राकृतिक माहौल में देखने का अलग ही रोमांच है। सुमात्रा में आप जंगल ट्रेक के दौरान ओरंगुटान की तलाश कर सकते हैं, जबकि बोर्नियो में नदी की नाव से जंगल घूमते हुए इन्हें देखने का मौका मिलता है। यानी जिस जानवर ने ओडिशा में अचानक सबको हैरान कर दिया, उसे देखने के लिए आप उसके असली घर तक पहुंच सकते हैं।
ओरंगुटान का असली घर कहां है?
ओरंगुटान दुनिया में बहुत सीमित जगहों पर पाए जाते हैं। इनके प्राकृतिक घर सुमात्रा और बोर्नियो के रेन फॉरेस्ट हैं। सुमात्रा इंडोनेशिया का हिस्सा है, जबकि बोर्नियो द्वीप इंडोनेशिया, मलेशिया और ब्रुनेई में बंटा हुआ है।
यही वजह है कि बालासोर में इनका मिलना सामान्य वन्यजीव घटना नहीं है। हाल की रिपोर्टों में ओडिशा में मिले पांच बेबी ओरंगुटान को लेकर वन्यजीव तस्करी की आशंका की जांच की जा रही है। लेकिन अगर आपका सवाल है कि ओरंगुटान को देखने के लिए घूमने कहां जाएं, तो कहानी यहीं से दिलचस्प होती है।
सुमात्रा का Bukit Lawang है जंगल प्रेमियों की पसंद
इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर स्थित Bukit Lawang ओरंगुटान देखने के लिए मशहूर जगह है। यह मेडन शहर से करीब 90 किलोमीटर दूर है और Gunung Leuser National Park के किनारे स्थित है।
यहां का अनुभव किसी सामान्य चिड़ियाघर जैसा नहीं है। जंगल की पगडंडियों पर ट्रेक करते हुए पेड़ों के बीच नजर दौड़ानी पड़ती है। अचानक ऊपर किसी डाल पर हलचल दिखे और लाल-भूरे बालों वाला ओरंगुटान नजर आ जाए, तो समझिए पूरी ट्रिप का सबसे खास पल मिल गया। Bukit Lawang में ओरंगुटान के साथ-साथ सुमात्रा के दूसरे वन्यजीव और घने रेन फॉरेस्ट भी इस यात्रा को खास बनाते हैं।
Tanjung Puting में नाव से जंगल की सैर
अगर आपको पैदल जंगल ट्रेक से ज्यादा नदी की यात्रा पसंद है, तो Tanjung Puting National Park आपके लिए ज्यादा दिलचस्प हो सकता है। इंडोनेशिया के बोर्नियो वाले हिस्से में स्थित यह राष्ट्रीय उद्यान ओरंगुटान के लिए प्रसिद्ध है। यहां जंगल के बीच नाव से सफर करना खुद में एक अनुभव है। पानी के दोनों तरफ घना जंगल और पेड़ों के बीच वन्यजीवों की तलाश—यही इस ट्रिप का मजा है।
सुमात्रा और बोर्नियो की खासियत सिर्फ ओरंगुटान नहीं है। ये दोनों द्वीप दुनिया के बेहद समृद्ध वर्षावन क्षेत्रों में गिने जाते हैं। सुमात्रा में एक ही क्षेत्र में ओरंगुटान के साथ बाघ, हाथी और गैंडे जैसे दुर्लभ जानवरों का प्राकृतिक आवास भी मिलता है।
डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिसमें ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए दवा के साथ-साथ सही खानपान भी अहम भूमिका निभाता है। अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या सुबह खाली पेट भीगे बादाम खाने से ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिलती है? कई लोग मानते हैं कि भीगे बादाम खाने से शरीर को ज्यादा पोषक तत्व मिलते हैं और डायबिटीज पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ता है।
इसी विषय पर हमने कंसल्टेंट डाइटिशियन और डायबिटीज एजुकेटर कनिका मल्होत्रा से बात की। उनका कहना है कि प्री-डायबिटीज या टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में रोजाना भीगे या कच्चे बादाम खाने से, चाहे उन्हें खाली पेट ही क्यों न खाया जाए, फास्टिंग ब्लड शुगर या HbA1c में कोई खास कमी नहीं देखी गई है। हालांकि, यदि बादाम को कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन के साथ या उससे पहले खाया जाए तो भोजन के बाद ब्लड शुगर के तेजी से बढ़ने (पोस्टप्रांडियल ग्लूकोज स्पाइक) को कम करने में मदद मिल सकती है।
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कनिका मल्होत्रा बताती हैं कि नाश्ते में बादाम खाने से सेकंड मील इफेक्ट देखने को मिल सकता है। यानी अगला भोजन करने के बाद ब्लड शुगर का स्तर अपेक्षाकृत कम रह सकता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। हालांकि, लंबे समय से डायबिटीज से जूझ रहे लोगों में यह असर भी सीमित ही दिखता है।
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बादाम में मौजूद पोषक तत्व कैसे करते हैं मदद?
बादाम को पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है। इनमें हेल्दी फैट, प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, विटामिन ई और कई जरूरी मिनरल्स मौजूद होते हैं। मैग्नीशियम इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है, फाइबर कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण की गति को धीमा करता है, जबकि हेल्दी फैट लंबे समय तक पेट भरा रखने और दिल की सेहत को दुरुस्त करने में असरदार होता है। यही कारण है कि सीमित मात्रा में बादाम को संतुलित आहार का हिस्सा बनाने की सलाह दी जाती है।
बादाम मैग्नीशियम, फाइबर और हेल्दी अनसैचुरेटेड फैट का अच्छा स्रोत हैं। ये सभी पोषक तत्व इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने और ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। कनिका मल्होत्रा के अनुसार बादाम में मौजूद मैग्नीशियम शरीर की कोशिकाओं द्वारा ग्लूकोज के उपयोग में मदद करता है। इसकी कमी डायबिटीज को और गंभीर बना सकती है। वहीं फाइबर कार्बोहाइड्रेट के पाचन और अवशोषण की गति को धीमा करता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता। बादाम में मौजूद मोनोअनसैचुरेटेड फैट लंबे समय तक पेट भरा रखने के साथ-साथ इंसुलिन सेंसिटिविटी और दिल की सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता हैं।
डायबिटीज मरीज़ों के लिए रोज़ाना भीगे हुए बादाम खाना सुरक्षित है?
बादाम में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए। एक्सपर्ट के मुताबिक रोजाना लगभग 30–40 ग्राम यानी 5 से 10 भीगे बादाम का सेवन पर्याप्त हैं। एक्सपर्ट ने बताया जरूरत से ज्यादा बादाम का सेवन करने से कुल कैलोरी सेवन बढ़ सकता है, जिससे वजन बढ़ने का खतरा हो सकता है। बादाम का सेवन संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर ही करें तो बेहतर है। एक्सपर्ट ने बताया शुगर कंट्रोल करने वाली दवाओं के साथ बादाम का सेवन करने पर किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। जिन लोगों को नट्स से एलर्जी है, उन्हें बादाम खाने से बचना चाहिए।
एक्सपर्ट ने बताया हर किसी के लिए रोजाना बादाम का सेवन करना सुरक्षित है इससे डाइट की क्वालिटी में सुधार होता है। लेकिन ये मानना कि सिर्फ बादाम खाने से डायबिटीज कंट्रोल होती है, ये पूरी तरह गलत है। डायबिटीज को अगर आप कंट्रोल करना चाहते हैं तो आप रोजाना बैलेंस डाइट का सेवन करें, रेगुलर एक्सरसाइज करें, पर्याप्त 7-8 घंटों की नींद लें और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का सेवन करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञ की राय पर आधारित है। किसी भी नई डाइट या स्वास्थ्य संबंधी दिनचर्या को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
भगवान शिव की नगरी काशी में भगवान गणेश की लगातार 35 वर्षों से साधना करने वाले मूर्तिकार विजय की चर्चा हो रही है. विजय आंखों में पट्टी बांधकर महज 30 – 40 सेकंड में गणपति की आकृति उकेर देते हैं. कई बार एक चित्र तैयार करने में उन्हें एक मिनट का समय लग जाता है. विजय इसे 20 – 25 सेकेंड के अंदर करना चाहते है.
आंखों पर काली पट्टी बंधी है. सामने सफेद कैनवास रखा है और हाथों में रंग हैं. देखने वाले यही सोचते रह जाते हैं कि आखिर बिना देखे कोई तस्वीर कैसे बना सकता है. लेकिन कुछ ही सेकेंड में कैनवास पर भगवान गणेश की खूबसूरत आकृति उभर आती है. यह अनोखी कला है काशी के मूर्तिकार और चित्रकार विजय कुमार की. पिछले करीब 35 साल से कला की साधना कर रहे विजय आंखों पर पट्टी बांधकर महज 30 से 40 सेकेंड में गणपति की तस्वीर बना देते हैं. उनकी इस कला को देखने के लिए लोग खास तौर पर पहुंच रहे हैं. विजय कुमार के लिए यह सिर्फ चित्रकारी नहीं, बल्कि भगवान गणेश की साधना है. वह बताते हैं कि जब आंखों पर पट्टी बंधी होती है, तब उनका पूरा ध्यान अपने आराध्य गणपति पर रहता है.
उनके मन में गणेश की तस्वीर इतनी स्पष्ट होती है कि हाथ अपने आप कैनवास पर आकृति बनाने लगते हैं. कई बार विजय को एक तस्वीर बनाने में करीब एक मिनट का समय लगता है, लेकिन अब उनका लक्ष्य इसे 20 से 25 सेकेंड में पूरा करना है. बचपन से ही भगवान गणेश की पूजा करने वाले विजय रोज अपनी दुकान पर पहुंचने के बाद सबसे पहले गणपति की साधना और चित्र बनाने का अभ्यास करते हैं.भतीजे की चुनौती ने दिखाई नई राह विजय कुमार का परिवार कई पीढ़ियों से मूर्ति निर्माण के काम से जुड़ा रहा है. बचपन से ही उन्हें पत्थरों को तराशने और चित्र बनाने का शौक था. करीब 35 साल पहले उन्होंने कला को अपनी साधना बना लिया. आंखों पर पट्टी बांधकर चित्र बनाने की शुरुआत भी एक दिलचस्प घटना से हुई. विजय के भतीजे ने एक दिन मजाक में उन्हें आंखों पर पट्टी बांधकर तस्वीर बनाने की चुनौती दी.
विजय ने चुनौती स्वीकार की और धीरे-धीरे बिना देखे सही आकृति बनाने में माहिर हो गए. अब वह आंखें खोलकर और बंद करके, दोनों तरह से गणपति की तस्वीर बना लेते हैं.काशी के 56 विनायकों को भी कैनवास पर उतारा विजय कुमार की कला को देशभर में पहचान मिल चुकी है. उन्होंने काशी के प्रसिद्ध मंदिरों में चित्रकारी करने के साथ काशी के 56 विनायकों की तस्वीरें भी कैनवास पर उतारी हैं. देश के अलग-अलग हिस्सों में उनकी पेंटिंग की प्रदर्शनियां लग चुकी हैं. कला के क्षेत्र में उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं और उन्हें ‘काशी रत्न’ सम्मान से भी नवाजा गया है.
महाराष्ट्र के सिद्धिविनायक मंदिर में विजय ने 51 और 56 घंटे तक लगातार तस्वीर बनाने का रिकॉर्ड भी बनाया है. उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज होने की बात भी सामने आती है.बप्पा की इच्छा तक जारी रहेगी साधना विजय कहते हैं कि उन्होंने अपना जीवन कला को समर्पित कर दिया है. जब तक बप्पा की इच्छा होगी, उनकी यह साधना जारी रहेगी. वह तेजपत्ता, रुद्राक्ष जैसी छोटी-छोटी चीजों पर भी भगवान गणेश की आकृति उकेर चुके हैं. उनके लिए रंग और रेखाएं सिर्फ चित्रकारी के साधन नहीं, बल्कि गणपति के चरणों में अर्पित की जाने वाली कला-अंजलि हैं.
क्या आपने कभी सोचा है कि कोई कर्मचारी प्रमोशन ठुकरा सकता है? आमतौर पर कॉर्पोरेट वर्ल्ड में ऊंची कुर्सी और बड़ा पद पाना ही हर किसी के करियर का अल्टीमेट गोल माना जाता है. लेकिन आज की जनरेशन इस पुरानी धारणा को पूरी तरह बदल रही है. चीन से लेकर पूरी दुनिया तक युवा अब यह सोचने लगे हैं कि क्या थोड़ी सी एक्स्ट्रा सैलरी और ढेरों जिम्मेदारियां सचमुच उस मानसिक तनाव के लायक हैं? सोशल मीडिया पर आजकल एक महिला की कहानी वायरल हो रही है, जिसने अपने 10 साल के करियर में एक या दो नहीं बल्कि पूरे 3 बार प्रमोशन ठुकरा दिया. आइए जानते हैं इसके पीछे की असली वजह.
प्रमोशन क्यों ठुकराया जा रहा है?
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों लोग प्रमोशन को विनम्रता से अस्वीकार करने के तरीके शेयर कर रहे हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि नई जिम्मेदारियों के साथ मिलने वाला वेतन बहुत मामूली होता है, जबकि काम का बोझ और मानसिक दबाव कई गुना बढ़ जाता है.
जून नाम की एक महिला कर्मचारी ने अपने 10 साल के करियर में तीन बार प्रमोशन को ना कहा. उसने बताया कि एक बार जब उसे अंतरिम टीम लीडर बनाया गया, तो सैलरी में केवल नाममात्र की बढ़ोतरी हुई, लेकिन जरा सी गलती पर गाज उसी पर गिरती थी. युवाओं का मानना है कि मिडिल मैनेजमेंट की नौकरी में इंसान ऊपर के अधिकारियों और नीचे के कर्मचारियों के बीच पिसकर रह जाता है.
कॉन्शस अनबॉसिंग’…एक नया ग्लोबल ट्रेंड
कंपनी कल्चर पर खड़े होते सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं का यह रुख कंपनियों के लिए चेतावनी है. अगर कॉर्पोरेट सेक्टर अपने कर्मचारियों को बेहतर इंसेंटिव, काम की आजादी और सही तरीके से उनके काम का सम्मान नहीं देगा, तो आने वाले समय में लीडरशिप के लिए लोग मि
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में एक गाय मुसीबत में फंसी नजर आ रही है। गाय का सिर लोहे की रेलिंग के बीच अटक गया था और वह खुद को बाहर निकालने के लिए लगातार कोशिश कर रही थी। काफी प्रयास के बावजूद जब गाय बाहर नहीं निकल पाई, तो मौके पर मौजूद CISF जवान ने उसकी मदद करने का फैसला किया।
बताया जा रहा है कि गाय ने किसी वजह से अपना सिर लोहे के गेट की सलाखों के बीच डाल दिया था। बाहर निकलने की कोशिश में उसका सिर वहीं फंस गया। परेशानी बढ़ने पर गाय घबराने लगी और बार-बार खुद को छुड़ाने का प्रयास करने लगी।
CISF जवान ने स्थिति को समझते हुए बिना जल्दबाजी किए गाय को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। उसने गाय को जोर से खींचने के बजाय उसके सिर और सींगों को सावधानी से संभाला, ताकि उसे किसी तरह की चोट न पहुंचे।
धैर्य और सूझबूझ से गाय को कराया आजाद
पोस्ट में दिखाई दे रहा है कि जवान जमीन पर बैठकर बेहद सावधानी से गाय के सिर को सही दिशा में मोड़ने की कोशिश कर रहा है। वह लगातार धैर्य बनाए रखता है और धीरे-धीरे गाय के सिर को सलाखों के बीच से बाहर निकाल देता है।
कुछ देर की मेहनत के बाद गाय पूरी तरह आजाद हो जाती है और वहां से आगे बढ़ जाती है। जवान ने इस दौरान खास ध्यान रखा कि घबराई हुई गाय को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
CISF जवान की इस संवेदनशीलता की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। लोगों का कहना है कि ड्यूटी निभाने के साथ-साथ बेजुबान जानवर की मदद करना इंसानियत और जिम्मेदारी की मिसाल है।
इस घटना से यह भी सीख मिलती है कि मुसीबत में फंसे जानवर को बचाते समय जल्दबाजी के बजाय धैर्य और सावधानी से काम लेना चाहिए। CISF जवान की सूझबूझ से गाय सुरक्षित बाहर निकल सकी।
फंसी थी एक जिंदगी, जवान ने दिल से निभाई जिम्मेदारी !
A cow found itself helpless, its head trapped between the railings of a wall. Frightened and struggling to break free, the animal caught the attention of a CISF jawan.
दुनिया घूमने का सपना बहुत से लोग देखते हैं, लेकिन उसे पूरा करने के लिए सालों तक लगातार सफर करते रहना हर किसी के बस की बात नहीं होती. चीन के 53 वर्षीय चेन जिनवेई ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. उन्होंने 33 साल तक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा की और हाल ही में पेरू से लौटने के साथ 233 देशों, क्षेत्रों और इलाकों की अपनी यात्रा पूरी कर ली.
चेन चीन के झेजियांग प्रांत के झूजी शहर के रहने वाले हैं और एक मशीनरी कंपनी चलाते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में अब तक करीब 70 लोग ही 233 देशों और क्षेत्रों की यात्रा कर पाए हैं. अपने इस लंबे सफर पर चेन ने करीब 10 मिलियन युआन यानी लगभग 15 लाख अमेरिकी डॉलर खर्च किए. उनकी दुनिया घूमने की शुरुआत साल 1993 में हुई थी. सबसे पहले उन्होंने सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड की यात्रा की. उस दौर में इंटरनेट आज की तरह आम नहीं था. चेन बताते हैं कि उनके मन में हमेशा यह जानने की इच्छा थी कि दुनिया के दूसरे हिस्से में असल जिंदगी कैसी है. वह किताबों या दूसरों की बातों के बजाय खुद वहां जाकर चीजों को देखना चाहते थे.
33 साल में घूम डाली पूरी दुनिया
हालांकि, बिजनेस और परिवार की जिम्मेदारियां भी उनके साथ थीं. इसलिए उन्होंने अपने सफर का एक अलग तरीका बनाया. वह करीब एक महीना घर पर रहते और अगले महीने यात्रा पर निकल जाते. इस तरह उन्होंने धीरे-धीरे अपने काम, परिवार और दुनिया घूमने के सपने के बीच संतुलन बनाए रखा. चेन ने जानबूझकर कई मुश्किल जगहों को शुरुआत में ही अपनी लिस्ट में शामिल किया. इनमें ध्रुवीय इलाके भी थे. अंटार्कटिका पहुंचने की उनकी पहली कोशिश नवंबर 2015 में नाकाम हो गई.
जिस फ्रांसीसी अभियान क्रूज जहाज से वह जा रहे थे, उसमें तीसरे दिन बिजली की समस्या आ गई और जहाज से काला धुआं निकलने लगा. उन्हें यात्रा बीच में ही छोड़नी पड़ी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. जनवरी 2016 में वह दोबारा निकले और इस बार सफलतापूर्वक अंटार्कटिका पहुंच गए. चेन के मुताबिक, न्यूजीलैंड का छोटा सा द्वीप क्षेत्र टोकेलाउ उनकी सबसे मुश्किल मंजिलों में से एक था. 2019 में तमाम तैयारियों और जरूरी प्रक्रियाओं के बावजूद उन्हें वहां की यात्रा रद्द करनी पड़ी. इस साल उन्होंने फिर कोशिश की और आखिरकार टोकेलाउ के एटोल पर कदम रख दिया. वहां पहुंचकर उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह बेहद उत्साहित थे.
इस लंबे सफर के दौरान चेन को कई मुश्किल हालातों का भी सामना करना पड़ा. अफ्रीका में उन्हें मलेरिया हो गया, जबकि ग्रीस में उन्होंने भूकंप तक झेला. उनका कहना है कि ऐसे अनुभवों ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में खुद को संभालना सिखाया. वह कहते हैं कि किसी समस्या के सामने आने पर पहले शांत रहना चाहिए और फिर उसका हल सोचना चाहिए. चेन के लिए दुनिया घूमना सिर्फ मशहूर जगहों पर जाकर फोटो खिंचवाना नहीं था. वह जहां भी जाते, वहां की संस्कृति और लोगों को करीब से समझने की कोशिश करते और ज्यादा से ज्यादा समय बिताते. उन्होंने 198 देशों की मुद्राएं भी इकट्ठी कीं, जिन्हें बाद में शू शियाके मेमोरियल हॉल को दान कर दिया.
चीन के मशहूर भूगोलवेत्ता और यात्री शू शियाके को चीन का शुरुआती ट्रैवल ब्लॉगर भी कहा जा सकता है. चेन खुद भी मानते हैं कि यात्रा और बिजनेस में काफी समानताएं हैं. उनके मुताबिक, जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन जो काम शुरू किया है, उसमें लगातार लगे रहना जरूरी है. दुनिया घूमने की इच्छा रखने वाले उन लोगों के लिए, जो अक्सर समय या पैसे की कमी का बहाना बनाते हैं, चेन की सलाह सीधी है कि इंतजार मत करो. समय किसी का इंतजार नहीं करता.
अब 33 साल के इस सफर के बाद चेन अपने बच्चों और माता-पिता के साथ ज्यादा वक्त बिताना चाहते हैं. इसके अलावा उनकी योजना पर्यटन और आउटडोर इंडस्ट्री से जुड़े 100 प्रमुख लोगों का इंटरव्यू करने और उनकी जिंदगी की कहानियां दर्ज करने की भी है. हालांकि, इंटरनेट पर कुछ लोगों ने यह भी कहा कि चेन जैसा सफर पूरा करने के लिए समय और पैसा दोनों चाहिए, जो आम लोगों के लिए बड़ी सुविधाएं हैं.
Red Fruits Benefits in Hindi: खराब लाइफस्टाइल, अनहेल्दी खानपान और प्रदूषण के कारण आजकल शरीर में टॉक्सिन्स जमा होना एक आम समस्या बन चुका है। इसका सीधा बुरा असर हमारे शरीर के दो सबसे महत्वपूर्ण अंगों किडनी और लिवर पर पड़ता है। लिवर हमारे शरीर का सबसे बड़ा ठोस आंतरिक अंग है, जो अकेले 500 से ज्यादा जरूरी काम संभालता है। वहीं, किडनी हमारे शरीर की ‘छन्नी’ यानी फिल्टर है, जो पोषक तत्वों को रोककर बेकार लिक्विड को शरीर से बाहर निकालती है। जब इन दोनों अंगों पर गंदगी या टॉक्सिन्स का बोझ बढ़ता है, तो शरीर से एक्स्ट्रा केमिकल्स, सोडियम, कैल्शियम और पानी बाहर नहीं निकल पाते। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी प्रकृति में कुछ ऐसे चमत्कारी और पोषक तत्वों से भरपूर फल मौजूद हैं, जो शरीर को अंदर से डिटॉक्स में मदद कर सकते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और कई रिसर्च के मुताबिक, लाल रंग के फलों जैसे अनार, सेब, और स्ट्रॉबेरी में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और आयरन पाए जाते हैं। ये फल न केवल किडनी और लिवर के फंक्शन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि नसों में खून की कमी (Anemia) को दूर करने में भी बेहद मददगार साबित होते हैं। आइए जानते हैं कि वो कौन से 5 लाल फल हैं जिन्हें डाइट में शामिल कर आप एक हेल्दी और एक्टिव लाइफ जी सकते हैं।
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अनार
गहरे लाल दानों वाला अनार हर जरूरी पोषक तत्व से भरपूर होता है। इसमें अच्छी मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है, जो किडनी को फिल्टर करने और उसकी गहराई से सफाई करने के लिए जाना जाता है। रोजाना अनार खाने से किडनी में स्टोन (पथरी) होने का खतरा टलता है और लिवर में जमा गंदगी आसानी से फ्लश आउट हो जाती है। Journal of Ethnopharmacology और U.S. National Institutes of Health (NIH) में प्रकाशित क्लिनिकल स्टडी के अनुसार, अनार का अर्क शरीर में मैक्रोफेज (Immunological Cells) को सक्रिय करता है जो लिवर की सूजन को घटाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि नेफ्रोलॉजी की रिसर्च साबित करती है कि अनार किडनी में कैल्शियम ऑक्सालेट को आपस में चिपक कर क्रिस्टल बनने से रोकता है। इसका हाई-पोटैशियम खून से सोडियम के टॉक्सिक लेवल को यूरिन के रास्ते बाहर फ्लश आउट कर देता है।
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लाल अंगूर
हेल्थ रिपोर्ट्स के मुताबिक, गहरे लाल या रक्ताभ रंग के अंगूर किडनी को डिटॉक्स करने में बेहद असरदार हैं। इनमें खास तरह का ‘फ्लेवेनॉइड’ और कई ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो किडनी की सूजन को कम करते हैं और लिवर को अंदर से साफ रखकर उसे सुचारू रूप से काम करने में मदद करते हैं। Food and Chemical Toxicology Journal और World Journal of Gastroenterology के मुताबिक लाल और गहरे रंग के अंगूरों के छिलके में ‘रेस्वेराट्रोल’ (Resveratrol) नामक एक चमत्कारी एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। क्लिनिकल ट्रायल्स में यह साबित हुआ है कि रेसवेराट्रॉल लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया (Fatty Liver Disease) को रोकता है। किडनी के स्तर पर, यह फ्री-रेडिकल्स को नष्ट कर रीनल टिश्यूज के डैमेज को रिवर्स करने की क्षमता रखता है।
बेरीज
बेरीज परिवार के फल जैसे स्ट्रॉबेरी, क्रैनबेरी और रस्पबेरी अपने चटक लाल रंग और बेमिसाल फायदों के लिए जाने जाते हैं। इनके एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोकेमिकल्स लिवर-किडनी की कोशिकाओं की सूजन और तनाव को दूर करते हैं। स्ट्रॉबेरी को तो नेचुरल डिटॉक्स ड्रिंक माना जाता है, जबकि न्यूट्रिशन जर्नल के अनुसार, रोजाना क्रैनबेरी जूस पीने से यूरिन इन्फेक्शन (UTI) का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाता है। The Journal of Nutrition और American Journal of Clinical Nutrition के मुताबिक क्रैनबेरी और स्ट्रॉबेरी पर की गई रिसर्च दर्शाती है कि इनमें ‘प्रोएन्थोसायनिडिन्स’ पाए जाते हैं। यह तत्व यूरिनरी ट्रैक्ट (मूत्र मार्ग) की दीवारों पर हानिकारक बैक्टीरिया (E. coli) को चिपकने नहीं देता, जिससे UTI (यूरिन इन्फेक्शन) का खतरा 40% तक कम हो जाता है। इसके अलावा, बेरीज का नियमित सेवन लिवर के एंटीऑक्सीडेंट एंजाइम ‘ग्लूटाथियोन’ (Glutathione) के स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ा देता है।
सिट्रस और हाइड्रेटिंग फ्रूट जूस
हेल्थलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, नींबू, संतरे और तरबूज का जूस किडनी और लिवर की सर्विसिंग के लिए बेस्ट है। इन रसीले फलों का जूस शरीर में लिक्विड बैलेंस (फ्लूइड) को बनाए रखता है। इसके नियमित सेवन से यूरिन के रास्ते टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं, जिससे किडनी में पथरी जमने का रिस्क न के बराबर हो जाता है। Nutrients Journal और European Urology की रिपोर्ट के मुताबिक नींबू, संतरे और मौसमी जैसे खट्टे फलों में ‘साइट्रिक एसिड’ (Citric Acid) उच्च मात्रा में होता है। मेडिकल साइंस के अनुसार, यूरिन में साइट्रेट का स्तर बढ़ने से यह किडनी में पहले से मौजूद छोटी पथरी को तोड़ देता है और नई पथरी बनने की प्रक्रिया को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है। इसके अलावा, विटामिन-सी लिवर के डिटॉक्स की प्रक्रिया को तेज करता है।
तरबूज
अंदर से एकदम लाल दिखने वाला तरबूज पानी, मिनरल्स और खास एंटीऑक्सीडेंट्स का खजाना है। यह लिवर और किडनी की अंदरूनी सूजन को शांत करता है। तरबूज का सेवन किडनी में फॉस्फेट, ऑक्ज़ेलेट, साइट्रेट और कैल्शियम के स्तर को संतुलित रखता है, जिससे शरीर का पूरा फिल्टर सिस्टम दुरुस्त रहता है। International Journal of Food Sciences and Nutrition के मुताबिक तरबूज में प्रचुर मात्रा में पानी के साथ ‘एल-सिट्रूलीन’ (L-Citrulline) नामक एक महत्वपूर्ण अमीनो एसिड होता है। यह रिसर्च साबित करती है कि साइट्रुलिन शरीर में प्रोटीन के पाचन से बनने वाले खतरनाक ‘अमोनिया’ को यूरिक एसिड और यूरिया में बदलकर शरीर से सुरक्षित बाहर निकालने में लिवर की मदद करते है। यह किडनी पर बिना अतिरिक्त दबाव डाले यूरिन के फ्लो (Diuretic Effect) को बढ़ाता है, जिससे शरीर का पूरा फिल्टर सिस्टम साफ हो जाता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वैज्ञानिक शोधों (Scientific Research) पर आधारित है। यह किसी भी प्रकार से योग्य डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं है। लिवर और किडनी शरीर के बेहद संवेदनशील अंग हैं। यदि आप पहले से ही किडनी स्टोन, क्रोनिक किडनी डिसीज (CKD), फैटी लिवर, हाई पोटैशियम या किसी अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, तो अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या इन फलों, जूस का नियमित सेवन शुरू करने से पहले अपने विशेषज्ञ डॉक्टर या क्लीनिकल डायटीशियन से सलाह अवश्य लें।
इंडोनेशिया की दुर्लभ आयाम सेमानी मुर्गी अपनी काली त्वचा और अनोखे रूप के लिए मशहूर है. चलिए आपको बताते हैं इसके अंडे की खासियत, कीमत और सेहत से जुड़े दावों के बारे में.
अंडा सुनते ही आमतौर पर हमारे दिमाग में प्रोटीन और हेल्दी डाइट का ख्याल आता है. लेकिन क्या आपने कभी ऐसी मुर्गी के बारे में सुना है, जिसकी कीमत एक अच्छी मोटरसाइकिल या कार जितनी हो सकती है? जी हां, इंडोनेशिया की आयाम सेमानी (Ayam Cemani) ऐसी ही दुर्लभ मुर्गी है. इसे दुनिया की सबसे अनोखी नस्लों में गिना जाता है और इसकी खासियत के कारण इसे ‘लैंबोर्गिनी ऑफ चिकन’ भी कहा जाता है.
इसकी कीमत और अंडों की खासियत इसे आम मुर्गियों से बिल्कुल अलग बनाती है.पूरी तरह काले रंग की होती है यह मुर्गी आयाम सेमानी मुर्गी को देखकर पहली नजर में ही इसकी अलग पहचान हो जाती है. इसके पंख, त्वचा, पैर, मांस और यहां तक कि हड्डियां और अंदरूनी अंग भी गहरे काले रंग के होते हैं.
इसके पीछे फाइब्रोमेलानोसिस नाम का जेनेटिक बदलाव जिम्मेदार है. इसकी वजह से शरीर में मेलेनिन पिगमेंट का उत्पादन बहुत ज्यादा होता है, जिससे इसका शरीर काला दिखाई देता है. आयाम सेमानी को लेकर एक दिलचस्प बात यह है कि इसके अंडे मुर्गी की तरह काले नहीं होते. इनके अंडे आमतौर पर हल्के क्रीम या ऑफ-व्हाइट रंग के होते हैं. हालांकि, यह नस्ल दुर्लभ होने के कारण इसके अंडों की कीमत सामान्य अंडों की तुलना में काफी ज्यादा हो सकती है.क्या इसका अंडा ज्यादा पौष्टिक है?
आयाम सेमानी के अंडे को लेकर कई जगहों पर इसे ज्यादा प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट वाला सुपरफूड बताया जाता है. हालांकि, इन दावों को लेकर मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं. इसलिए इसे सामान्य अंडे से कई गुना ज्यादा हेल्दी मानना सही नहीं होगा. अंडे में प्रोटीन, विटामिन और कई जरूरी पोषक तत्व जरूर पाए जाते हैं.शौकीनों के लिए है लग्जरी ब्रीड आयाम सेमानी मुर्गी कम संख्या में अंडे देती है और इसकी ब्रीडिंग भी आसान नहीं मानी जाती. इसकी दुर्लभता और अनोखे रूप के कारण दुनिया के कई हिस्सों में इसे शौक के तौर पर पाला जाता है. बड़े फार्म हाउस और ब्रीडिंग के शौकीन लोगों के बीच इसकी खास मांग है. यही वजह है कि इसे सिर्फ मुर्गी नहीं, बल्कि लग्जरी और स्टेटस सिंबल के तौर पर भी देखा जाता है.