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  • 45 पार करते ही पेट में कम होने लगते हैं ‘गुड बैक्टीरिया; डॉक्टरों से समझिए बढ़ती उम्र में पाचन दुरुस्त रखने का फॉर्मूला..

    45 पार करते ही पेट में कम होने लगते हैं ‘गुड बैक्टीरिया; डॉक्टरों से समझिए बढ़ती उम्र में पाचन दुरुस्त रखने का फॉर्मूला..

    45 पार करते ही पेट में कम होने लगते हैं ‘गुड बैक्टीरिया; डॉक्टरों से समझिए बढ़ती उम्र में पाचन दुरुस्त रखने का फॉर्मूला..

    बढ़ती उम्र के साथ हमारे शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव आते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका एक बड़ा असर हमारे पेट की सेहत पर भी पड़ता है? हालिया वैज्ञानिक शोध और मेडिकल एक्सपर्ट्स बताते हैं कि 45 की उम्र पार करते ही हमारे पाचन तंत्र में मौजूद ‘गुड बैक्टीरिया’ (गट माइक्रोबायोम) की संख्या तेजी से कम होने लगती है। यही कारण है कि इस उम्र के बाद गैस, अपच, ब्लोटिंग और कब्ज जैसी समस्याएं अचानक बढ़ने लगती हैं। पेट को हमारे शरीर का दूसरा दिमाग कहा जाता है, इसलिए बढ़ती उम्र में पाचन क्रिया को दुरुस्त रखना बेहद जरूरी है। उम्र बढ़ने पर खराब खानपान की आदतें, शारीरिक गतिविधि, तनाव, दवाइयों का इस्तेमाल, सोने का तरीका और लंबे समय से चली आ रही बीमारियां भी पेट में मौजूद सूक्ष्मजीवों (माइक्रो ऑर्गेनिज्म) के संतुलन पर असर डाल सकती हैं।

    कंसल्टेंट डायटीशियन और सर्टिफाइड डायबिटीज एजुकेटर कनिका मल्होत्रा ने बताया, 45 साल की उम्र के बाद आंतों में खासतौर पर बदलाव आने लगते हैं। इस उम्र में सूक्ष्मजीवों की विविधता कम हो जाती है, फेकली बैक्टीरियम और अकरमेंसिया जैसे गुड बैक्टीरिया कम हो जाते हैं और खराब बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि आंतों में गुड बैक्टीरिया कम होने से पाचन पर कैसा असर होता है और इस परेशानी से कैसे निजात पाई जा सकती है।

    आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया कैसे हेल्थ के लिए जरूरी है?

    एक्सपर्ट के मुताबिक आंतों में मौजूद गुड बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्मजीव शरीर में पोषक तत्वों को अवशोषित करने, शॉर्ट-चेन फैटी एसिड बनाने, जो बड़ी आंत को ऊर्जा देते हैं और इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। एक्सपर्ट ने बताया जब आंतों में गुड बैक्टीरिया का बैलेंस बिगड़ जाता है तो पाचन क्रिया स्लो हो जाती है जिससे पाचन से जुड़ी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं। पाचन क्रिया धीमी होने पर पेट फूलने की समस्या, संक्रमणों से लड़ने की शरीर की क्षमता कमजोर पड़ सकती है। इतना ही नहीं गट माइक्रोबायोम का बैलेंस बिगड़ने पर मेटाबॉलिज्म भी प्रभावित होता है। इससे वजन कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, मल त्याग की आदतों और शरीर की ऊर्जा के स्तर में भी बदलाव महसूस हो सकता है।

    एक्सपर्ट ने बताया ऐसी स्थिति में आंतों की सुरक्षा परत यानी गट बैरियर भी कमजोर होने लगता है, जिससे बैक्टीरिया द्वारा बनने वाले हानिकारक तत्व ब्लड में पहुंच सकते हैं जिसे लीकी गट कहा जाता है। ऐसी स्थिति में शरीर में लगातार हल्की सूजन हो सकती है जिससे जोड़ों में दर्द, ब्रेन फॉग और मेटाबॉलिज्म स्लों होने जैसी दिक्कते होती हैं। उम्र बढ़ने के साथ पेट में बनने वाले हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl) और पाचक एंजाइम का उत्पादन कम हो जाता है, जिससे भोजन को टूटने में समय लगता है।

    गट माइक्रोबायोम में बदलाव के कारण होने वाली समस्याएं

    • पाचन धीमा होना
    • पेट फूलना (ब्लोटिंग)
    • बार-बार संक्रमण का खतरा बढ़ना
    • वजन कंट्रोल करने में मुश्किल होना
    • मल त्याग की आदतों में बदलाव
    • ऊर्जा की कमी महसूस होना शामिल है।

    गट माइक्रोबायोम के असंतुलन के लिए उम्र जिम्मेदार है या डाइट

    कनिका मल्होत्रा ने बताया गट माइक्रोबायोम में होने वाले बदलावों में लगभग 30 प्रतिशत भूमिका उम्र बढ़ने की होती है, जबकि करीब 70 प्रतिशत बदलाव लाइफस्टाइल से जुड़े होते हैं। डाइट में  प्रोसेस्ड फूड, कम फाइबर वाला खाना और अधिक चीनी का सेवन गट बैक्टीरिया का संतुलन बिगाड़ सकता हैं। आंतों में गुड बैक्टीरिया को बढ़ाने के लिए आप डाइट में सुधार करें। डाइट में साबुत अनाज, फल और सब्जियों का सेवन करें। संतुलित डाइट इस स्थिति को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। इसके अलावा नियमित व्यायाम कुछ ही हफ्तों में गुड बैक्टीरिया की संख्या बढ़ा सकता है। वहीं नींद की कमी, लगातार तनाव, एंटीबायोटिक दवाओं का अधिक इस्तेमाल डायबिटीज या इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज जैसी बीमारियां भी गट माइक्रोबायोम को प्रभावित करती हैं।

    45 के बाद गट हेल्थ को कैसे रखें दुरुस्त ?

    डॉक्टर कनिका ने बताया अगर आप बढ़ती उम्र में अपनी गट हेल्थ में सुधार करना चाहते हैं तो आप

    • रोजाना डाइट में 30-35 ग्राम फाइबर को शामिल करें।
    • भोजन में सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और सीड्स का सेवन करें।
    • डाइट में दही, इडली, डोसा और किमची जैसे फर्मेंटेड फूड का सेवन करें।
    • बेरीज, ग्रीन टी और हल्दी जैसे पॉलीफेनॉल से भरपूर फूड्स का सेवन करें।
    • अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड आंतों की सेहत के लिए खतरा है उन्हें डाइट से निकाल दें।
    • रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलें। वॉक एक कम पावर की बेहद असरदार एक्सरसाइज है इसे रोज करें।
    • योग और मेडिटेशन से तनाव कम करें।
    • रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद जरूर लें।
    • एंटीबायोटिक लेने की जरूरत पड़े तो डॉक्टर से प्रोबायोटिक के बारे में सलाह लें।
    • लहसुन, प्याज और केला जैसे प्रीबायोटिक फूड को डाइट में शामिल करें।
    • डॉक्टर कनिका के मुताबिक अगर आप बढ़ती उम्र में ही डाइट और लाइफस्टाइल से जुड़ी इन आदतों को अपनाते हैं तो आपके गट माइक्रोबायोम में संतुलन बना रहेगा।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे किसी भी योग्य डॉक्टर, चिकित्सा विशेषज्ञ या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट के व्यक्तिगत परामर्श, रोग-निदान (Diagnosis) या सटीक इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यदि आप पेट, पाचन या स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी समस्या से जूझ रहे हैं, तो किसी भी घरेलू उपाय या डाइट प्लान को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • तुर्की में मिली टॉयलेट के नीचे मिली 1200 साल पुरानी कब्र, सामने आया ऐसा राज, जिसे देख हिल गए वैज्ञानिक

    तुर्की में मिली टॉयलेट के नीचे मिली 1200 साल पुरानी कब्र, सामने आया ऐसा राज, जिसे देख हिल गए वैज्ञानिक

    तुर्की के ऐतिहासिक शहर इफिसस में हुई एक पुरातात्विक खोज ने दुनियाभर के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है. इस जगह खुदाई के दौरान करीब 1200 साल पुरानी एक कब्र मिली, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात इसकी जगह थी. ये कब्र दुनिया के प्रसिद्ध आर्टेमिस मंदिर के पास एक पुराने और इस्तेमाल से बाहर हो चुके रोमन शौचालय के नीचे बनाई गई थी. जब पुरातत्वविदों ने पत्थरों से सावधानी से बनाई गई इस कब्र को खोला, तो अंदर दो बेहद छोटे कंकाल मिले. जांच में पता चला कि ये समय से पहले जन्मे जुड़वां बच्चों के अवशेष हैं. रिसर्चर की माने तो दोनों बच्चों का जन्म गर्भावस्था के लगभग सात से साढ़े सात महीने के बीच हुआ था. उनकी हड्डियों के आकार से ये अंदाजा लगाया गया कि वे बहुत कम समय तक ही धरती पर जिंदा रहे होंगे.

    इस खोज का अध्ययन ‘चाइल्डहुड इन द पास्ट’ नामक जर्नल में पब्लिश हुआ. ऑस्ट्रियन एकेडमी ऑफ साइंसेज की रिसर्चर कैरोलिन पार्टियोट और लिली जब्राना ने इन कंकालों का अच्छे से एग्जामिन किया और बताया कि दोनों बच्चों की उम्र लगभग समान थी, इसलिए माना जा रहा है कि वे जुड़वां थे. हालांकि इसका फाइनल रिजल्ट DNA की जांच के बाद ही पता लग पाएगा.

    क्यों वैज्ञानिकों को हैरान कर गई कब्र?

    इस रिसर्च के दौरान एक चीज और पता लगी कि दोनों में से एक बच्चे की गर्दन के पास एक एक्सट्रा पसली मिली. इस सिचुएशन को साइंटिफिक टर्म में सुपरन्यूमेरी सर्वाइकल रिब कहा जाता है. ये एक तरह का रेयर जेनेटिक बदलाव है, जो दुनिया की करीब एक प्रतिशत आबादी में ही देखने को मिलता है.

    आमतौर पर ये एक्सट्रा पसली किसी बड़ी परेशानी की वजह नहीं बनती, लेकिन नवजात बच्चों में इसका संबंध भ्रूण (Embryo) के विकास को कंट्रोल करने वाले HOX जीन में गड़बड़ी से जोड़ा जाता है. अगर इस जीन में समस्या हो, तो गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर असर पड़ सकता है और कई बार समय से पहले मृत्यु भी हो सकती है. इस खोज का एक और पहलू वैज्ञानिकों को सोचने पर मजबूर करता है.

    इफिसस में पहले मिली ज्यादातर कब्रें मंदिर के बाहर बने नॉर्मल कब्रिस्तान में थीं, लेकिन इन दोनों बच्चों को वहां दफनाने के बजाय एक अलग जगह चुनी गई. रिसर्चर का मानना है कि ऐसा पॉसीबल हो सकता है कि इन बच्चों का जन्म समय से पहले हुआ हो और उनकी मृत्यु बपतिस्मा होने से पहले ही हो गई हो. उस दौर में ईसाई परंपराओं के अनुसार बपतिस्मा का विशेष महत्व था, इसलिए शायद उन्हें नॉर्मल कब्रिस्तान में दफनाने की परमिशन नहीं मिलती.

    इसके बावजूद जिस तरह पत्थरों से मजबूत और सुरक्षित कब्र बनाई गई, उससे साफ पता चलता है कि परिवार ने बच्चों को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी. ये कोई साधारण दफन नहीं था, बल्कि उनके प्रति प्रेम और सम्मान का प्रतीक था. वैज्ञानिकों को खुदाई के दौरान बच्चों की मां से जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला. इसलिए यह कहना मुश्किल है कि प्रसव के समय उनकी भी मौत हुई थी या वे जीवित बच गई थीं. उस समय माताओं और नवजात बच्चों की मृत्यु दर काफी अधिक थी, इसलिए किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना आसान नहीं है. फिर भी यह खोज हमें 1200 साल पहले के समाज की भावनाओं और परंपराओं की एक दुर्लभ झलक दिखाती है. इतने लंबे समय बाद भी सुरक्षित मिले ये छोटे कंकाल इस बात की गवाही देते हैं कि परिवार ने अपने बच्चों को सम्मानपूर्वक विदाई देने में कोई कमी नहीं छोड़ी.

  • Viral Video: बाल काटने से लेकर फेशियल-मसाज तक, AI को नाई का काम सिखाता दिखा बार्बर, वीडियो हुआ वायरल.

    Viral Video: बाल काटने से लेकर फेशियल-मसाज तक, AI को नाई का काम सिखाता दिखा बार्बर, वीडियो हुआ वायरल.

    Viral Video: बाल काटने से लेकर फेशियल-मसाज तक, AI को नाई का काम सिखाता दिखा बार्बर, वीडियो हुआ वायरल.

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब धीरे-धीरे जिंदगी के लगभग हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रहा है। पढ़ाई, ऑफिस के काम और बिजनेस से लेकर कई तरह के तकनीकी कामों में AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है। लेकिन क्या AI को एक बार्बर यानी नाई का काम भी सिखाया जा सकता है? सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो इसी वजह से लोगों का ध्यान खींच रहा है।

    AI बना बार्बर का नया शागिर्द

    वायरल वीडियो में एक बार्बर अपने माथे पर एक AI-सपोर्टेड कैमरा लगाए नजर आता है। उसके सामने एक ग्राहक बैठा है और बार्बर उसके बाल काट रहा है। कैमरा बार्बर की हर गतिविधि को रिकॉर्ड कर रहा है, ताकि AI उसके काम करने के तरीके को समझ सके।

    खास बात यह है कि बार्बर सिर्फ बाल काटने की प्रक्रिया ही नहीं दिखा रहा, बल्कि फेशियल और मसाज जैसे सैलून से जुड़े दूसरे कामों के बारे में भी AI को जानकारी देता नजर आ रहा है।

    यानी जिस तरह कोई अनुभवी व्यक्ति किसी नए शागिर्द को काम सिखाता है, उसी अंदाज में यह बार्बर अपनी रोजमर्रा की प्रोफेशनल गतिविधियों को कैमरे के जरिए रिकॉर्ड करता दिखाई दे रहा है।

    सोशल मीडिया पर लोगों की दिलचस्प प्रतिक्रियाएं

    यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @Rainmaker1973 नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। वीडियो सामने आने के बाद यूजर्स इसके भविष्य से जुड़े पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं।

    कुछ लोगों का कहना है कि आने वाले समय में AI और रोबोट कई ऐसे काम कर सकते हैं, जिनके बारे में अभी कल्पना करना भी मुश्किल है। वहीं कुछ यूजर्स ने मजाक में कहा कि भविष्य में सैलून में AI बार्बर भी नजर आ सकते हैं।

    हालांकि, तकनीक कितनी भी आगे क्यों न बढ़ जाए, किसी काम को सही तरीके से करने में इंसानी अनुभव, हाथों की सफाई और ग्राहक की जरूरत को समझने की क्षमता की अपनी अहमियत रहती है।

    फिलहाल यह वीडियो इसी वजह से चर्चा में है कि AI को रोजमर्रा के एक बिल्कुल अलग तरह के काम को सीखते हुए दिखाने का विचार लोगों के लिए काफी दिलचस्प है।

  • रील देख रही थी महिला, अचानक नेटवर्क हुआ गायब तो पी लिया जहर, जानिए क्यों….

    रील देख रही थी महिला, अचानक नेटवर्क हुआ गायब तो पी लिया जहर, जानिए क्यों….

    रील देख रही थी महिला, अचानक नेटवर्क हुआ गायब तो पी लिया जहर, जानिए क्यों….

    छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले करतला थाना क्षेत्र से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां के केराकछार गांव की रहने वाली एक महिला अपने मोबाइल पर रील्स देख रही थी, तभी उसे फोन का नेटवर्क गायब हो गया. महिला इस बात से नाराज हो गई और गुस्से में उसने अपना मोबाइल फोन उठाकर जोर से जमीन पर दे मारा, जिससे फोन टूटकर चकनाचूर हो गया. लेकिन महिला का गुस्सा इतने पर ही खत्म नहीं हुआ. फोन तोड़ने के कुछ देर बाद ही आवेश में आकर उसने घर में रखा जहरीला कीटनाशक पी लिया. परिजनों द्वारा आनन-फानन में अस्पताल ले जाने के बाद इलाज के दौरान रविवार रात उसकी दर्दनाक मौत हो गई. यह दुखद हादसा शनिवार दोपहर का है, जिसका खुलासा मंगलवार को हुआ. महिला का नाम मंगलो बाई है, जिसकी उम्र 52 साल थी.

    बताया जाता है कि घटना के समय घर में मंगलो बाई की छोटी बेटी मौजूद थी. रील बंद होने के गुस्से में फोन तोड़ने के बाद मंगलो अपने कमरे में चली गई और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया. वहीं, उसने कीटनाशक गटक लिया. बेटी को घटना की भनक तब लगी, जब कमरे के भीतर से मंगलो के उल्टी करने की आवाजें आने लगीं. जब परिजन कमरे में पहुंचे तो वहां कीटनाशक की खाली शीशी पड़ी मिली, जिसके बाद परिजनों में हड़कंप मच गया. हैरानी की बात यह रही कि घटना के तुरंत बाद परिजन महिला को डॉक्टर या अस्पताल ले जाने के बजाय खुद ही घरेलू नुस्खों से जहर बाहर निकालने के प्रयास में जुट गए. इस दौरान महिला की जान बचाने के अंधविश्वास और गलत तरीके के तहत पति द्वारा उसे गोबर मिला पानी भी पिलाया गया. घरेलू हथकंडों के चक्कर में काफी कीमती समय बर्बाद हो गया और जब महिला की स्थिति बिगड़ने लगी, तब जाकर डायल-112 की मदद से उसे करतला स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया.

    प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए उसे कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद महिला ने दम तोड़ दिया. इस मामले में दैनिक भास्कर से बात करते हुए मनोवैज्ञानिक डॉ कमलेश रात्रे ने सोशल मीडिया और रील की लत को लेकर गंभीर चेतावनियां दी हैं. उन्होंने बताया कि लगातार शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट देखने से मस्तिष्क का रिवॉर्ड सिस्टम अत्यधिक सक्रिय हो जाता है, जिसमें डोपामाइन न्यूरोट्रांसमीटर की मुख्य भूमिका होती है. ऐसी स्थिति में अचानक नेटवर्क चले जाने या फोन हटा लिए जाने जैसी रुकावट आने पर कुछ लोगों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा, घबराहट और बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं. मनोचिकित्सकों ने सलाह दी है कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल की समय-सीमा तय करना बेहद जरूरी है. भोजन के दौरान और सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल का प्रयोग बिल्कुल बंद कर देना चाहिए.

  • हरतालिका तीज का सामान लेकर लौट रही महिला के साथ हुई स्नेचिंग, बाइक सवार बदमाशों ने छीना पर्स, भागते समय लोगों ने दबोचा

    हरतालिका तीज का सामान लेकर लौट रही महिला के साथ हुई स्नेचिंग, बाइक सवार बदमाशों ने छीना पर्स, भागते समय लोगों ने दबोचा

    हरतालिका तीज का सामान लेकर लौट रही महिला के साथ हुई स्नेचिंग, बाइक सवार बदमाशों ने छीना पर्स, भागते समय लोगों ने दबोचा

    सतना शहर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के प्रेमनगर इलाके में सोमवार शाम दिनदहाड़े स्नेचिंग की वारदात से सनसनी फैल गई. हरतालिका तीज का सामान लेकर बाजार से घर लौट रही महिला के हाथ से बाइक सवार बदमाशों ने पर्स छीन लिया. बदमाश पर्स लेकर एमपीईबी पावर हाउस की तरफ भागने लगे, लेकिन स्थानीय लोगों की सतर्कता से दोनों को मौके पर ही पकड़ लिया गया.

    पर्स छीनते ही महिला ने मचाया शोर जानकारी के मुताबिक, प्रेमनगर निवासी महिला बाजार से हरतालिका तीज का सामान खरीदकर घर लौट रही थी. घर के पास पहुंचते ही बाइक पर सवार दो बदमाशों ने उसे निशाना बनाया. बाइक पर पीछे बैठे बदमाश ने महिला के हाथ से पर्स झपटा और दोनों भागने लगे. महिला ने तुरंत शोर मचाना शुरू कर दिया. आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए. लोगों ने भाग रहे बाइक सवार दोनों आरोपियों को घेर लिया और पकड़ लिया. इसके बाद 112 पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों आरोपियों को सिटी कोतवाली थाने ले गई.

    CCTV में कैद हुई पूरी वारदात दिनदहाड़े हुई स्नेचिंग की पूरी घटना आसपास लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई. फुटेज में बाइक सवार बदमाश महिला के पास पहुंचते और उसका पर्स छीनकर भागते दिखाई दे रहे हैं. वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है.

    151 के तहत कार्रवाई, पुलिस पर सवाल मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर महिला और उसके परिजनों ने नाराजगी जताई है. उनका आरोप है कि स्नेचिंग जैसे गंभीर मामले में पीड़िता का बयान दर्ज किए बिना आरोपियों के खिलाफ केवल धारा 151 के तहत कार्रवाई की गई और उन्हें जेल भेज दिया गया. परिजनों का कहना है कि जब CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर सामने आया, तब पुलिस ने आनन-फानन में बाइक सवार अज्ञात बदमाशों के खिलाफ 304 के तहत मामला दर्ज किया. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आरोपी मौके पर ही पकड़ लिए गए थे और पूरी घटना CCTV में कैद थी, तो शुरुआत में स्नेचिंग के मामले में उचित कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

    पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल मामले में अब पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है. पीड़ित महिला का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद भी पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया. वहीं, CCTV फुटेज सामने आने के बाद केस दर्ज किया गया. अब सवाल यह है कि पुलिस ने आरोपियों पर शुरुआत में सामान्य धारा के तहत कार्रवाई क्यों की और स्नेचिंग की घटना में तत्काल कानूनी प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई.

  • गणेश जी की सवारी मूषक ही क्यों? छोटी-सी सवारी के पीछे छिपा है बड़ा रहस्य, जानिए क्या है पौराणिक मान्यता

    गणेश जी की सवारी मूषक ही क्यों? छोटी-सी सवारी के पीछे छिपा है बड़ा रहस्य, जानिए क्या है पौराणिक मान्यता

    गणेश जी की सवारी मूषक ही क्यों? छोटी-सी सवारी के पीछे छिपा है बड़ा रहस्य, जानिए क्या है पौराणिक मान्यता

    एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, मूषक पहले एक गंधर्व था, जिसे श्राप के कारण मूषक बनना पड़ा. बाद में वह गणेश जी का वाहन बना. प्रतीकात्मक रूप से चूहा बहुत चंचल और चीजों को कुतरने वाला माना जाता है, इसलिए इसे मनुष्य की इच्छाओं, चंचल मन और अहंकार का प्रतीक भी माना गया.

    गणेशजी ने मूषक को बनाया अपना वाहन

    गणेशजी ने मूषक को बनाया अपना वाहन

    गणेशजी की सवारी मूषक ही क्यों?

    गणेशजी की सवारी मूषक ही क्यों?

    14 सितंबर से गणेश उत्सव की शुरुआत हो चुकी है. 10 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है. गणेशजी को विघ्नहर्ता और बुद्धि-विवेक का देवता माना जाता है. उनकी प्रतिमा में एक चीज खास तौर पर दिखाई देती है उनकी सवारी मूषक यानी चूहा. देखने में बेहद छोटा और साधारण लगने वाला यह जीव आखिर गणेशजी का वाहन क्यों बना? इसके पीछे सिर्फ पौराणिक कथा ही नहीं, बल्कि जीवन से जुड़े कई गहरे संदेश भी छिपे हैं.

    मूषक चंचल मन और इच्छाओं का प्रतीक धार्मिक मान्यताओं में मूषक को मनुष्य की चंचल इच्छाओं और वासनाओं का प्रतीक माना गया है. जिस तरह चूहा लगातार इधर-उधर भागता रहता है और किसी एक जगह स्थिर नहीं रहता, उसी तरह मनुष्य का मन भी इच्छाओं के पीछे लगातार दौड़ता रहता है. गणेशजी का मूषक पर सवार होना इस बात का प्रतीक माना जाता है कि बुद्धि और विवेक को इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए.

    छोटा है, लेकिन किसी भी जगह पहुंच सकता है मूषक का शरीर छोटा होता है और वह बहुत संकरी जगह में भी आसानी से पहुंच सकता है. इसी गुण को गणेशजी की बुद्धि से जोड़ा जाता है. भगवान गणेश को बुद्धि और विवेक का देवता माना जाता है. इसका संदेश है कि समझदार व्यक्ति के लिए कोई भी समस्या इतनी बड़ी नहीं होती कि उसका रास्ता न निकाला जा सके. जैसे मूषक छोटी से छोटी जगह में पहुंच जाता है, वैसे ही सच्ची बुद्धि जटिल से जटिल समस्या की गहराई तक पहुंचकर उसका समाधान खोज सकती है.

    कमजोर दिखने वाला मूषक देता है मेहनत का संदेश मूषक आकार में छोटा और कमजोर दिखाई देता है, लेकिन उसके दांत इतने मजबूत होते हैं कि वह कठोर चीजों को भी कुतर सकता है. यही गुण मनुष्य के लिए एक बड़ा संदेश देता है. जीवन में साधन कम होने के बावजूद अगर मेहनत, धैर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो बड़ी से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है. यानी सफलता के लिए हमेशा बड़े साधनों की जरूरत नहीं होती, बल्कि लगातार प्रयास और मजबूत इरादे ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं.

    अहंकारी गंधर्व से बना मूषक मूषक को गणेशजी का वाहन बनने की एक पौराणिक कथा भी है. मान्यता के अनुसार, मूषक पहले क्रोंच नाम का एक गंधर्व था. एक बार वह देवराज इंद्र के दरबार में अप्सराओं के साथ हास-परिहास कर रहा था. इसी दौरान उसका पैर ऋषि वामदेव पर पड़ गया. ऋषि इससे क्रोधित हो गए और उन्होंने क्रोंच को चूहा बनने का श्राप दे दिया. श्राप के कारण क्रोंच मूषक बन गया. इसके बाद वह पराशर ऋषि के आश्रम में पहुंचा और वहां उत्पात मचाने लगा. उसने अनाज खा लिया, वस्त्रों को नुकसान पहुंचाया और आश्रम के ग्रंथों तक को कुतर डाला.

    गणेशजी ने मूषक को बनाया अपना वाहन मूषक के उत्पात से परेशान होकर ऋषियों ने भगवान गणेश से सहायता मांगी. गणेशजी ने अपना पाश फेंककर मूषक को पकड़ लिया. मूषक ने अपनी गलती स्वीकार की और गणेशजी से क्षमा मांगी. इसके बाद गणेशजी ने उसे अपना वाहन बना लिया. इस कथा को अहंकार और शक्ति के सही इस्तेमाल से जोड़कर देखा जाता है.

    मूषक से मिलता है जीवन का बड़ा संदेश गणेशजी और मूषक का संबंध केवल भगवान और उनके वाहन का संबंध नहीं माना जाता. इसमें मनुष्य के जीवन का दर्शन भी छिपा है. मूषक चंचल मन, इच्छाओं, अहंकार और छोटी-छोटी बाधाओं का प्रतीक है, जबकि गणेशजी बुद्धि, विवेक और ज्ञान के प्रतीक हैं. इसलिए गणेशजी का मूषक पर विराजमान होना यह संदेश देता है कि जब बुद्धि और विवेक मन की चंचलता, इच्छाओं और अहंकार पर नियंत्रण पा लेते हैं, तब जीवन की बाधाएं भी छोटी लगने लगती हैं.

  • खरीदते हैं तो पैकेट के पीछे लिखी ये 6 बातें कभी न करें नजरअंदाज!

    खरीदते हैं तो पैकेट के पीछे लिखी ये 6 बातें कभी न करें नजरअंदाज!

    खरीदते हैं तो पैकेट के पीछे लिखी ये 6 बातें कभी न करें नजरअंदाज!

    Unknown Fact : आजकल बाजार में बिस्किट, नमकीन, चिप्स, इंस्टेंट फूड, सॉस और दूसरे कई तरह के पैकेज्ड फूड आसानी से मिल जाते हैं. आकर्षक पैकिंग और बड़े-बड़े हेल्थ क्लेम देखकर हम अक्सर सामान खरीद लेते हैं, लेकिन पैकेट के पीछे लिखी जानकारी को पढ़ना उतना ही जरूरी है. FSSAI के अनुसार फूड लेबल पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाती हैं, जो उपभोक्ता को सही चुनाव करने में मदद करती हैं.

    सामग्री की लिस्ट

    सबसे पहले पैकेट पर Ingredients जरूर पढ़ें. इसमें इस्तेमाल की गई सामग्री वजन या मात्रा के हिसाब से घटते क्रम में लिखी जाती है. यानी जो चीज ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल हुई है, वह आमतौर पर लिस्ट में पहले आती है. इससे आपको अंदाजा हो सकता है कि प्रोडक्ट में मुख्य रूप से क्या मौजूद है.

    नूट्रिशन पर दें ध्यान

    इसके बाद नूट्रिशन देखें, इसमें ऊर्जा यानी कैलोरी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट और अन्य पोषक तत्वों की जानकारी दी जाती है. FSSAI की उपभोक्ता जागरूकता सामग्री में पैकेज्ड फूड खरीदते समय पोषण संबंधी जानकारी देखने और खासकर फैट, शुगर और सोडियम पर ध्यान देने की सलाह दी गई है.

    Sugar, Salt और Fat की मात्रा

    किसी प्रोडक्ट को सिर्फ इसलिए हेल्दी न मानें क्योंकि उसके पैकेट पर ‘Healthy’, ‘Natural’ या दूसरे आकर्षक दावे लिखे हैं. कुल शुगर, नमक और फैट की मात्रा भी देखें. FSSAI ने पैकेज्ड फूड की न्यूट्रिशन जानकारी को ज्यादा स्पष्ट तरीके से दिखाने पर भी जोर दिया है.

    डेट जरूर चेक करें

    पैकेट खरीदते समय Manufacturing/Packing Date और Expiry/Use By या Best Before जरूर देखें. खासकर जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों में तारीख की जांच करना बेहद जरूरी है. कुछ उत्पादों पर सही स्टोरेज कंडीशन की जानकारी भी दी जाती है.

    निर्माता की जानकारी

    पैकेट पर FSSAI का लोगो और लाइसेंस नंबर, निर्माता या पैकर का नाम और पता जैसी जानकारी भी महत्वपूर्ण होती है. इससे प्रोडक्ट और उसे बनाने वाली कंपनी की पहचान से जुड़ी जानकारी मिलती है.

    चिन्ह

    अगर आपको किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी है तो Allergen Declaration जरूर पढ़ें. FSSAI की गाइडलाइन में दूध, अंडा, मछली, मूंगफली, सोया, ग्लूटेन वाले अनाज और कुछ अन्य एलर्जेंस की जानकारी घोषित करने का प्रावधान है. साथ ही Veg/Non-Veg चिन्ह भी देखकर ही खरीदारी करें. यानी अगली बार पैकेज्ड फूड खरीदते समय सिर्फ सामने की तस्वीर या ऑफर देखकर फैसला न लें. पैकेट के पीछे मौजूद जानकारी को पढ़ने में कुछ सेकंड लगेंगे, लेकिन यही छोटी सी आदत आपको ज्यादा समझदारी से खाना चुनने में मदद कर सकती है. यह खबर भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है. न्यूज18 इस वीडियो से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है.

  • 35 लाख साल से जमीन में सोया था यह ‘जल-दानव’! जापान में मिली 3 हड्डियों ने उड़ाए वैज्ञानिकों के होश.

    35 लाख साल से जमीन में सोया था यह ‘जल-दानव’! जापान में मिली 3 हड्डियों ने उड़ाए वैज्ञानिकों के होश.

    35 लाख साल से जमीन में सोया था यह ‘जल-दानव’! जापान में मिली 3 हड्डियों ने उड़ाए वैज्ञानिकों के होश.

    35 लाख साल से जमीन के नीचे दफन था एक ऐसा रहस्य, जिसने वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है. क्या आप जानते हैं कि जिस जापान को हम आज देखते हैं, लाखों साल पहले वहां खौफनाक और विशालकाय ‘जल-दानव’ राज करते थे? लगभग 30 साल पहले मिली 3 हड्डियों के विश्लेषण से अब एक ऐसा सच सामने आया है, जिसने जीव विज्ञान के इतिहास को बदल कर रख दिया है. आइए जानते हैं इस 35 लाख साल पुराने रहस्यमयी जीव की पूरी कहानी.

    30 साल पुराना रहस्य और अजिमू क्षेत्र का चमत्कार

    जापान के अजिमू (Ajimu) इलाके में 1995 से 1997 के बीच खुदाई के दौरान 3 दुर्लभ हड्डियां पाई गई थीं. ये अवशेष त्सुबुसुगावा फॉर्मेशन (Tsubusugawa Formation) नाम की प्राचीन झील की परतों में मिले थे. उस समय वैज्ञानिकों को अंदाजा नहीं था कि ये हड्डियां किसकी हैं, इसलिए इन्हें अस्थायी रूप से एंड्रियास जीनस (Andrias Genus) में रख दिया गया था. ये सैलामैंडर (Giant Salamanders) की एक बहुत बड़ी प्रजाति है. इसमें दुनिया के सबसे बड़े जीवित उभयचर शामिल हैं.

    रीढ़ की हड्डी से खुला नई प्रजाति का राज

    हाल ही में क्योटो यूनिवर्सिटी (Kyoto University) के शोधकर्ताओं ने आधुनिक तकनीक और व्यापक अध्ययनों की मदद से इन जीवाश्मों की बारीकी से जांच की. जांच में पता चला कि इस सैलामैंडर की बीच वाले शरीर की रीढ़ की हड्डी यानी Mid-Trunk Vertebra की बनावट अब तक मिले किसी भी विशाल सैलामैंडर से पूरी तरह अलग थी. इसी वजह से वैज्ञानिकों ने इसे एक बिल्कुल नई प्रजाति और जीनस घोषित किया और नाम दिया- ‘लिम्नोस्पोंडिलस अजिमुएन्सिस’ (Limnospondylus Ajimuensis).

    3.6 फीट लंबा विशालकाय उभयचर

    शोधकर्ताओं के अनुसार, यह रहस्यमयी जीव बहती नदियों की जगह शांत झीलों और दलदली इलाकों में रहता था. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जीव करीब 3.6 फीट यानी 1.1 मीटर तक लंबा रहा होगा. ये खोज एशिया के जीवाश्म रिकॉर्ड में पिछले 2 करोड़ सालों से चली आ रही कमी को पूरा करती है.

  • 1.5 करोड़ की नौकरी को मारी लात, अब महीने में कमा रही है सिर्फ ₹500! वायरल हुई स्टोरी…

    1.5 करोड़ की नौकरी को मारी लात, अब महीने में कमा रही है सिर्फ ₹500! वायरल हुई स्टोरी…

    1.5 करोड़ की नौकरी को मारी लात, अब महीने में कमा रही है सिर्फ ₹500! वायरल हुई स्टोरी…

    टोरंटो की प्रोडक्ट डिजाइनर हेइगी जियोंग ने 1.5 करोड़ की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर कंटेंट क्रिएशन चुना. जानिए क्यों एक साल के इस जोखिम भरे फैसले की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है.

    क्या आप अपनी 1.5 करोड़ रुपए सालाना की आरामदायक नौकरी सिर्फ अपने शौक और क्रिएटिविटी के लिए छोड़ सकते हैं? ज्यादातर लोग ऐसा करने से पहले हजार बार सोचेंगे. लेकिन टोरंटो में रहने वाली एक प्रोडक्ट डिजाइनर हेइगी जियोंग (Heigi Jeong) ने बिना एक पल गंवाए यह बड़ा कदम उठा लिया.

    जून 2026 में जब हेइगी ने अपनी टेक कंपनी की सुरक्षित नौकरी छोड़ी, तो हर कोई हैरान रह गया. उनके पास 9 से 5 की एक बेहतरीन जॉब थी, जिसमें शानदार सैलरी 1,73,000 डॉलर (यानी करीब 1.5 करोड़ रुपए) मिलती थी, लाइफस्टाइल अच्छा था और छुट्टियों में घूमने की पूरी आजादी भी थी. फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने कॉर्पोरेट दुनिया को अलविदा कह दिया?

    क्यों छोड़ी 1.5 करोड़ की शानदार नौकरी?

    हेइगी को अपनी नौकरी से कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन उनकी लाइफ में काम बहुत ज्यादा बढ़ गया था. एक तरफ फुल-टाइम प्रोडक्ट डिजाइनर की नौकरी, दूसरी तरफ सोशल मीडिया के लिए कंटेंट बनाना और साथ में एक किताब लिखने का बड़ा प्रोजेक्ट भी चल रहा था.

    इन तीनों चीजों को एक साथ संभालना उनके लिए किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं था. उन्होंने खुद माना कि यह स्थिति तीन फुल-टाइम नौकरियां एक साथ करने जैसी हो गई थी. इसलिए उन्होंने अपने करियर के सबसे सुरक्षित हिस्से यानी कॉर्पोरेट जॉब को छोड़ने का फैसला किया.

    अब महीने में कमा रही हैं सिर्फ 500 रुपए!

    नौकरी छोड़ने के बाद हेइगी की जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है. कॉर्पोरेट के फिक्स और भारी-भरकम वेतन के उलट अब उनकी कमाई अनिश्चित हो गई है. जुलाई महीने में कंटेंट क्रिएशन से उन्हें सिर्फ 6 डॉलर (लगभग 500 रुपए) ही मिल पाए. हालांकि किताब के एडवांस पैसों से उन्हें थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन हर महीने मिलने वाले पैसों में भारी उतार-चढ़ाव रहता है. कभी कमाई शून्य होती है, तो कभी उम्मीद से ज्यादा. इसके बावजूद वह इसे अपनी नाकामी नहीं मानतीं.

    खुद को दिया है 1 साल का समय

    बिना किसी फिक्स सैलरी के रहना आसान नहीं है. इस्तीफे से पहले हेइगी को भी काफी घबराहट और चिंता हुई थी कि क्या उनका यह फैसला गलत साबित होगा. इस डर को कम करने के लिए उन्होंने खुद को एक साल की समय सीमा दी है.

     

     

     
     
  • Viral Video: रील बनाने के चक्कर में नदी में उतार दी SUV, तेज बहाव के बीच फंसी कार, ऐसे बची लोगों की जान..

    Viral Video: रील बनाने के चक्कर में नदी में उतार दी SUV, तेज बहाव के बीच फंसी कार, ऐसे बची लोगों की जान..

    Viral Video: रील बनाने के चक्कर में नदी में उतार दी SUV, तेज बहाव के बीच फंसी कार, ऐसे बची लोगों की जान..

    सोशल मीडिया पर वायरल होने और कुछ लाइक्स पाने के चक्कर में लोग कई बार ऐसी लापरवाही कर बैठते हैं, जो उनके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग से सामने आया एक ऐसा ही मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है। यहां कुछ युवकों ने कथित तौर पर रील बनाने के लिए अपनी SUV को सिंध नदी के तेज बहाव में उतार दिया। कुछ ही देर में गाड़ी पानी के बीच फंस गई और उसमें सवार लोग खुद मुश्किल में घिर गए।

    तेज बहाव में फंस गई SUV

    वायरल वीडियो में एक महिंद्रा स्कॉर्पियो नदी के पानी के बीच फंसी हुई दिखाई दे रही है। आसपास पानी का बहाव काफी तेज नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि यह घटना होटल सिंध रिसॉर्ट्स के पास हुई।

    जानकारी के मुताबिक, युवक सोशल मीडिया के लिए कंटेंट बनाने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने SUV को नदी के तल में उतार दिया। लेकिन पानी का बहाव उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज था। देखते ही देखते वाहन नदी के बीच फंस गया और उसमें मौजूद लोग भी परेशानी में पड़ गए।

    हालात बिगड़ने के बाद घटना की जानकारी पुलिस को दी गई।

    पुलिस और स्थानीय लोगों ने शुरू किया रेस्क्यू

    सूचना मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया और SUV में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

    राहत की बात यह रही कि घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। बाद में SUV को भी नदी से बाहर निकाल लिया गया।

    वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने जताई नाराजगी

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यूजर्स ने युवकों के इस कदम पर सवाल उठाए। कई लोगों ने इसे खतरनाक लापरवाही बताया। यूजर्स का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए इस तरह अपनी और दूसरों की सुरक्षा को खतरे में डालना भारी पड़ सकता है।

    नदी और पहाड़ी इलाकों में पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है। ऐसे में किसी वाहन को नदी के भीतर उतारना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। यह घटना भी इसी बात की याद दिलाती है