Author: contact.satyareport@gmail.com

  • कौन है Jay Singh Rathore: जिसके फ्रॉड से हिला सोशल मीडिया? लोग जमकर उतार रहे गुस्सा

    कौन है Jay Singh Rathore: जिसके फ्रॉड से हिला सोशल मीडिया? लोग जमकर उतार रहे गुस्सा

    कौन है Jay Singh Rathore: जिसके फ्रॉड से हिला सोशल मीडिया? लोग जमकर उतार रहे गुस्सा

    जानिए कौन हैं जय सिंह राठौर और वे X (पहले ट्विटर) पर ट्रेंड क्यों कर रहे हैं? इंटरनेट यूजर्स जमकर उन पर गुस्सा निकाल रहे हैं. सोशल मीडिया पर विजय माल्या से जुड़े मीम्स की बाढ़ आ गई है.

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर इन दिनों जय सिंह राठौर (Jay Singh Rathore) नाम का शख्स चर्चा का केंद्र बना हुआ है. मदद की गुहार लगाकर लोगों की भावनाओं से खेलने और क्राउडफंडिंग के नाम पर ठगी करने का यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है. आइए जानते हैं कि आखिर पूरा विवाद क्या है और क्यों लोग इस आदमी पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं.

    कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

    इस पूरे मामले की शुरुआत X पर एक इमोशनल पोस्ट से हुई. जय सिंह राठौर नाम के यूजर ने अपनी बहन की आंखों की सर्जरी के लिए आर्थिक मदद की अपील की थी. लोगों ने भी दरियादिली दिखाते हुए दिल खोलकर दान दिया और उसने देखते ही देखते 1.5 लाख रुपए से ज्यादा की रकम जुटा ली. लेकिन कुछ ही समय बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उसके द्वारा शेयर किए गए मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन और दस्तावेजों में कई कमियां पकड़ लीं, जिससे शक गहराने लगा.

    अस्पताल का खुलासा: फर्जी हैं दस्तावेज

    जिस ‘श्राफ आई सेंटर’ (Shroff Eye Centre) अस्पताल के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा था, उस अस्पताल ने आगे आकर स्पष्ट किया कि उनके लेटरहेड और दस्तावेजों का दुरुपयोग करके फर्जी पर्चियां बनाई गई हैं. अस्पताल ने इंस्टाग्राम स्टोरी में साफ किया कि ऐसा कोई भी मरीज वहां इलाज नहीं करवा रहा है और यह लोगों को ठगने का एक सुनियोजित तरीका है.

    दबाव बढ़ने पर जय सिंह राठौर ने सफाई देने के लिए ‘एक्स स्पेसेस’ (X Spaces) का सहारा लिया. पूछताछ के दौरान वह रोता हुआ नजर आया और अपनी गलती कबूल की. उसने अजीबोगरीब सफाई देते हुए कहा कि पैसे उसकी बहन के लिए नहीं, बल्कि उसके बीमार पिता के इलाज के लिए थे.

    गुस्साए दानदाताओं ने जब उससे तुरंत पैसे वापस करने को कहा, तो उसने रिफंड के स्क्रीनशॉट साझा करने शुरू कर दिए. एक यूजर द्वारा शेयर किए गए बैंक स्क्रीनशॉट से यह भी सामने आया कि उसके खाते से कुछ पैसे कम हुए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि उसने कुछ रिफंड किए हैं.

    अब सुनिए क्या कह रहा है आरोपी जय सिंह राठौर

    अन्य यूजर पर भी उठे सवाल

    इस वायरल पोस्ट को प्रमोट करने वाली एक अन्य यूजर ‘@Raniisaa_’ पर भी इस घोटाले में मिलीभगत का शक जताया गया. हालांकि, उन्होंने तुरंत ट्वीट कर इस पूरे मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया और जय सिंह राठौर से किसी भी तरह के रिश्ते से साफ इनकार कर दिया.

  • भारत का इकलौता रेलवे : प्लेटफॉर्म, जिसमें 14 फुटबॉल मैदान समा सकते हैं; गिनीज बुक में भी दर्ज है नाम

    भारत का इकलौता रेलवे : प्लेटफॉर्म, जिसमें 14 फुटबॉल मैदान समा सकते हैं; गिनीज बुक में भी दर्ज है नाम

    भारत का इकलौता रेलवे : प्लेटफॉर्म, जिसमें 14 फुटबॉल मैदान समा सकते हैं; गिनीज बुक में भी दर्ज है नाम

    सोशल मीडिया पर आपने भारत के कई अनोखे रेलवे स्टेशनों के बारे में पढ़ा होगा। मगर, क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा रेलवे प्लेटफॉर्म भी है जिसमें फुटबॉल के 14 मैदान आराम से समा सकते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में:

    भारत में मौजूद लगभग हर रेलवे स्टेशन अपनी किसी न किसी खूबी के लिए जाना जाता है। कई रेलवे स्टेशन तो ऐसे भी हैं जो भारत के गौरवशाली इतिहास को विरासत के तौर पर संजोए हुए हैं। भारतीय रेलवे स्टेशनों की खूबियों के चलते ही कई लोग इनके रिकॉर्ड्स को जानने के बाद आश्चर्य व्यक्त करते हैं। यही वजह है कि विदेशी टूरिस्ट भी ऐसे रेलवे स्टेशनों को देखने के बाद दूसरे देशों से तुलना कर इनकी तारीफ करते हैं। क्या आप जानते हैं कि, भारत में एक ऐसा ही रेलवे प्लेटफॉर्म है जिसकी लंबाई इतनी ज्यादा है कि उस लंबाई में करीब फुटबॉल के 14 मैदान आसानी से समा सकते हैं। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात तो ये है कि, इस रेलवे स्टेशन की लंबाई का रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है।

    भारत ही नहीं दुनिया का सबसे लंबा प्लेटफॉर्म

    बता दें कि, कर्नाटक प्रांत का श्रीसिद्धारूढ़ स्वामीजी हुबली जंक्शन का प्लेटफॉर्म भारत का ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे लंबा प्लेटफॉर्म है। सबसे खास बात तो ये है कि, इस रेलवे स्टेशन की लंबाई 1507 मीटर है। इसने 2023 में गोरखपुर के स्टेशन को पीछे छोड़ते हुए रिकॉर्ड बनाया। इस रेलवे स्टेशन का उद्घाटन 2023 में किया गया था और प्रसिद्ध हिन्दू संत सिद्धारूढ़ स्वामीजी के नाम पर ‘श्री सिद्धारूढ़ स्वामीजी रेलवे स्टेशन हुब्बल्ली’ रखा गया है। इसे पश्चिम रेलवे का सबसे व्यस्त रेलवे जंक्शन भी कहा जाता है।

    क्या वाकई इसमें फुटबॉल के 14 मैदान समा सकते हैं?

    श्रीसिद्धारूढ़ स्वामीजी हुबली जंक्शन के प्लेटफॉर्म के बारे में सुनते ही कई लोगों के मन में प्रश्न आता है कि, क्या सच में इसमें फुटबॉल के 14 मैदान समा सकते हैं? तो जवाब है- हां!! चूंकि फुटबॉल के मैदान की लंबाई आमतौर पर 105 मीटर होती है और इस हिसाब से देखा जाए तो कर्नाटक के इस रेलवे स्टेशन की लंबाई में आराम से 14-15 फुटबॉल के मैदान समा सकते हैं।

    क्यों बना पड़ा इतना लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म

    हुबली स्टेशन दक्षिण भारत का काफी बड़ा रेलवे स्टेशन है। यहां पर उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम यानी चारों दिशाओं से ट्रेनों का आवागमन होता है। ऐसा माना जाता है कि, पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से कई बार बहुत से ट्रेन आउटर पर सिग्नल न मिलने के कारण रुक जाती थीं जिससे यात्रियों को लेटलतीफी सरीखी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इससे पूरे रूट की ट्रेनों बुरी तरह प्रभावित होती थीं।

    गिनीज बुक में भी दर्ज है नाम

    गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में ‘श्रीसिद्धारूढ़ स्वामीजी हुबली जंक्शन’ को लिस्टेड किया है। गिनीज बुक में इसके बारे में लिखा है कि, ‘सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म 1,507 मीटर है और इसे दक्षिण पश्चिम रेलवे हुबली डिवीजन (भारत) द्वारा हुबली रेलवे स्टेशन, कर्नाटक, भारत में 12 जनवरी 2023 को सत्यापित किया गया था। सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म का निर्माण हुबली रेलवे स्टेशन पर रेलवे यार्ड के पुनर्निर्माण परियोजना के हिस्से के रूप में किया गया था, जिसका उद्देश्य बेहतर परिचालन दक्षता, ट्रेन संचालन सुरक्षा और यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं और आराम प्रदान करना था।’

  • भाद्रपद पूर्णिमा स्नान और : व्रत क्या एक दिन हैं? यहां दूर करें कंफ्यूजन, जानें सही तारीख और स्नान-दान का मुहूर्त.

    भाद्रपद पूर्णिमा स्नान और : व्रत क्या एक दिन हैं? यहां दूर करें कंफ्यूजन, जानें सही तारीख और स्नान-दान का मुहूर्त.

    भाद्रपद पूर्णिमा स्नान और : व्रत क्या एक दिन हैं? यहां दूर करें कंफ्यूजन, जानें सही तारीख और स्नान-दान का मुहूर्त.

    हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन स्नान-दान करने से पुण्यकारी फलों की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन से पितृ पक्ष भी आरंभ हो रहे हैं। बता दें कि पितृ पक्ष के दौरान पितरों का तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किया जाता है। पितृ पक्ष में पूर्वजों को याद करने से पितृ दोष दूर होता है और पितरों की कृपा प्राप्त होती है। तो चलिए जानते हैं कि इस भाद्रपद पूर्णिमा कब मनाई जाएगी और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

    भाद्रपद पूर्णिमा 2026 व्रत और स्नान दान डेट

    पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 25 सितंबर को रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि का समापन 26 सितंबर को रात 10 बजकर 18 मिनट पर होगा। भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। इसी दिन स्नान-दान किया जाएगा। पूर्णिमा का व्रत भी 26 सितंबर को ही रखा जाएगा।

    भाद्रपद पूर्णिमा 2026 स्नान-दान मुहूर्त

    भाद्रपद पूर्णिमा के दिन स्नान दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 53 मिनट से सुबह 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। ये दोनों ही समय स्नान-दान के लिए उत्तम रहेगा। हालांकि पूर्णिमा का पूरा दिन स्नान-दान के लिए अच्छा माना जाता है।

    भाद्रपद पूर्णिमा 2026 के दिन चंद्रोदय का समय

    भाद्रपद पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम 6 बजकर 18 मिनट पर होगा। बता दें कि जो श्रद्धालु पूर्णिमा का व्रत करते है वो रात में चंद्र देव की पूजा करते हैं और अर्घ्य देते हैं। इसके बाद ही पूर्णिमा व्रत का पारण (व्रत खोलते हैं) करते हैं।

    भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व

    यह दिन धार्मिक दृष्टि से भाद्रपद पूर्णिमा को अत्यंत पवित्र माना जाता है। व्रत, पूजा, दान आदि कार्यों के लिए यह पूर्णिमा श्रेष्ठ माना गया है। भविष्यपुराण, स्कन्दपुराण और पद्मपुराण आदि धर्मग्रंथों में भाद्रपद पूर्णिमा के पुण्य महत्व का विस्तृत वर्णन किया गया है। इस दिन गंगा स्नान, दान, व्रत, पूर्णिमा कथा श्रवण और भगवान विष्णु का पूजन करने से कई गुना अधिक शुभ फल प्राप्त होता है। अगर आप कहीं गंगा स्नान के लिए नहीं जा पा रहे हैं तो घर पर ही नहाने वाले में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें। ऐसा करने से भी गंगा स्नान जितना पुण्य फल मिलता है।

  • तोहफा हो तो ऐसा! AI लव स्टोरी देखकर छलके दुल्हन के आंसू..?

    तोहफा हो तो ऐसा! AI लव स्टोरी देखकर छलके दुल्हन के आंसू..?

    तोहफा हो तो ऐसा! AI लव स्टोरी देखकर छलके दुल्हन के आंसू..?

    कजाकिस्तान की एक शादी इन दिनों इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोर रही है, और वजह है दूल्हे के दोस्तों का दिया एक अनोखा तोहफा. आमतौर पर शादियों में लोग महंगे गिफ्ट्स, ज्वेलरी या शगुन का लिफाफा देते हैं, लेकिन इन दोस्तों ने कुछ ऐसा सोचा जिसने शादी में मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया. दरअसल, दोस्तों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) की मदद से दूल्हा-दुल्हन की एक बेहद खूबसूरत एनिमेटेड लव स्टोरी बनाई, जिसकी चर्चा अब सोशल मीडिया के जरिए पूरी दुनिया हो रही है.

    टाइम-ट्रैवल करती एक अनोखी लव स्टोरी

    इस छोटी सी एनिमेटेड फिल्म में उनके प्यार को सदियों पुराना दिखाया गया था. वीडियो की शुरुआत एक पुराने युद्ध के मैदान से होती है, जहां दोनों योद्धा बनकर आमने-सामने खड़े होते हैं. अगले ही पल सीन बदलता है और दोनों पुराने दौर के काउबॉय लुक में नजर आते हैं. इसी तरह कई दौर और सदियां बदलती रहती हैं, लेकिन हर युग में किस्मत उन्हें फिर से मिला देती है. मैसेज एकदम क्लियर था कि यह रिश्ता सिर्फ आज का नहीं, बल्कि जन्मों-जन्मों का है.

    जब फंतासी से टकराई हकीकत

    सदियों के इस जादुई सफर के बाद वीडियो का अंत बेहद भावुक मोड़ पर होता है. फिल्म के आखिर में वह सीन दिखाया गया, जब दोनों असल जिंदगी में पहली बार मिले थे. इस एक सीन ने पूरी काल्पनिक कहानी को एकदम सच्चा और दिल के करीब बना दिया.

    दुल्हन के छलके आंसू

    शादी में जैसे ही बड़ी स्क्रीन पर यह वीडियो प्ले हुआ, दुल्हन का रिएक्शन देखने लायक था. वह इतनी सरप्राइज्ड और खुश हुई कि चेहरे पर हाथ रख लिया और उसकी आंखों से आंसू निकल आए. वीडियो खत्म होने पर दुल्हन ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह उसकी लाइफ का सबसे बेहतरीन वेडिंग गिफ्ट है.

  • सड़क पर भिड़े दो सांड, अचानक दौड़ते हुए स्कूटी से टकराया एक, पलभर में हुआ बड़ा हादसा.

    सड़क पर भिड़े दो सांड, अचानक दौड़ते हुए स्कूटी से टकराया एक, पलभर में हुआ बड़ा हादसा.

    सड़क पर भिड़े दो सांड, अचानक दौड़ते हुए स्कूटी से टकराया एक, पलभर में हुआ बड़ा हादसा.

    उत्तराखंड के ऋषिकेश से एक हैरान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें सड़क पर दो सांड आपस में भिड़ते दिखाई दे रहे हैं। दोनों के बीच चल रही लड़ाई अचानक उस वक्त खतरनाक हो जाती है, जब एक सांड तेजी से सड़क की ओर दौड़ता है और वहां से गुजर रही स्कूटी सवार महिला से टकरा जाता है।

    सड़क पर आपस में भिड़े सांड

    वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि सड़क किनारे दो सांड आमने-सामने खड़े हैं और उनके सींग आपस में उलझे हुए हैं। दोनों एक-दूसरे को पीछे धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। सड़क पर सांडों की लड़ाई देखकर आसपास मौजूद लोग भी दूरी बनाए हुए नजर आते हैं।

    इसी दौरान एक व्यक्ति दोनों सांडों को अलग करने की कोशिश करता है। वह उन्हें वहां से हटाने का प्रयास करता है, लेकिन तभी एक सांड अचानक दूसरी दिशा में भागने लगता है।

    अचानक स्कूटी से टकराया सांड

    सांड तेजी से सड़क की तरफ दौड़ता है। उसी समय एक महिला स्कूटी पर सवार होकर वहां से गुजर रही होती है। महिला को शायद अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही सेकंड में उसके साथ हादसा होने वाला है।

    सांड सीधे स्कूटी से जा टकराता है। अचानक हुई टक्कर से महिला का संतुलन बिगड़ जाता है और वह स्कूटी समेत सड़क पर गिर जाती है। इसके बाद स्कूटी सड़क किनारे खड़ी एक कैब से भी टकरा जाती है।

    पूरी घटना कुछ ही सेकंड में कैमरे में रिकॉर्ड हो जाती है। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोग महिला की मदद के लिए आगे आते दिखाई देते हैं।

    सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स महिला की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं। कई लोगों ने सड़क पर खुले घूम रहे पशुओं और ऐसी घटनाओं से जुड़े खतरे पर सवाल उठाए हैं।

    यह घटना दिखाती है कि सड़क पर जानवरों के बीच अचानक होने वाली लड़ाई कितनी तेजी से राहगीरों के लिए खतरा बन सकती है। खासकर दो बड़े सांडों के बीच चल रही लड़ाई से दूरी बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि उनके अचानक दौड़ने की दिशा का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है।

    फिलहाल इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे देखकर लोग हादसे की गंभीरता पर चर्चा कर रहे हैं।

     

     

     

     

  • ‘नौकरी गई तो तुरंत छोड़ें अमेरिका:’ अब नहीं मिलेंगे 60 दिन, ट्रंप का H-1B वीजा होल्डर्स को बड़ा झटका!

    ‘नौकरी गई तो तुरंत छोड़ें अमेरिका:’ अब नहीं मिलेंगे 60 दिन, ट्रंप का H-1B वीजा होल्डर्स को बड़ा झटका!

    अमेरिका में नौकरी की तलाश कर रहे और वहां आईटी या अन्य क्षेत्रों में कार्यरत विदेशी नागरिकों, खासकर भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद से अमेरिकी आव्रजन नीतियों (immigration policies) में लगातार कड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसी कड़ी में अब एच-1बी (H-1B) वीजा धारकों को लेकर एक बड़ा और सख्त फैसला लिया जाने की तैयारी है, जिसके तहत नौकरी छूटने पर मिलने वाली राहत की अवधि को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।

    अब तक के नियमों के मुताबिक, अगर किसी एच-1बी वीजा धारक की नौकरी अचानक चली जाती थी, तो उसे देश छोड़ने या नई नौकरी तलाशने के लिए ‘ग्रेस पीरियड’ के रूप में पूरे 60 दिनों का समय मिलता था। लेकिन नए प्रस्तावित नियमों के तहत इस ग्रेस पीरियड को या तो पूरी तरह हटाया जा सकता है या फिर इसे बेहद कम किया जा सकता है, जिससे अमेरिका में रह रहे प्रवासियों की मुश्किलें अचानक कई गुना बढ़ गई हैं।

    किस पर पड़ेगा ज्यादा असर?

    इस बदलाव का सबसे बुरा और सीधा असर भारत से अमेरिका गए उन लाखों टेक प्रोफेशनल्स, इंजीनियरों और कॉर्पोरेट कर्मचारियों पर पड़ेगा जो सिलिकॉन वैली या अन्य तकनीकी केंद्रों में बड़ी कंपनियों के साथ काम कर रहे हैं। वर्तमान समय में जब अमेरिकी टेक सेक्टर में छंटनी (layoffs) का दौर रुकने का नाम नहीं ले रहा है, ऐसे में 60 दिन की समयसीमा का हटना किसी बड़े झटके से कम नहीं है। पहले जब किसी कर्मचारी की नौकरी जाती थी, तो उसे दो महीने का वक्त मिल जाता था जिसके भीतर वह या तो किसी दूसरी अमेरिकी कंपनी से स्पॉन्सरशिप हासिल कर लेता था या कानूनी रूप से अपने परिवार के साथ भारत लौट सकता था। लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद अगर नौकरी गई, तो वीजा धारक को बिना किसी अतिरिक्त समय के तुरंत अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है, जिससे उनके करियर और अमेरिका में बसाए गए आशियाने के लिए एक गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

    अमेरिका फर्स्ट एजेंडा मजबूत हो

    विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की यह नीतियां ‘अमेरिका फर्स्ट’ के एजेंडे को मजबूत करने और स्थानीय अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसरों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से बनाई जा रही हैं। इस तरह के कड़े प्रावधानों से अमेरिकी कंपनियों के लिए भी विदेशी प्रतिभाओं को नियुक्त करना और उन्हें बनाए रखना अधिक जटिल हो जाएगा। कई आव्रजन वकीलों का यह भी कहना है कि इस प्रकार के अचानक और सख्त निर्णयों से न केवल कर्मचारियों बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के तकनीकी विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर कुशल कामगारों का आना-जाना प्रभावित होता है। इसके बावजूद, नीतिगत स्तर पर हो रहे इन बदलावों को देखते हुए अमेरिका में काम कर रहे प्रवासियों के लिए अब वित्तीय सुरक्षा और बैकअप प्लान तैयार रखना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।

    परिस्थितियों की गंभीरता को भांपते हुए अमेरिका में मौजूद एच-1बी वीजा धारकों और वहां जाने की योजना बना रहे लोगों को अब अपनी रणनीतियों में बदलाव करने की जरूरत है। अगर आप भी इस वीजा श्रेणी के अंतर्गत अमेरिका में कार्यरत हैं, तो किसी भी संभावित छंटनी या अनिश्चितता से निपटने के लिए अपने कानूनी विकल्पों और बचत को मजबूत रखना समझदारी होगी। हालांकि अभी इन नए नियमों के पूर्ण क्रियान्वयन को लेकर आधिकारिक और अंतिम रूप से दिशा-निर्देश आने बाकी हैं, लेकिन इस तरह की चर्चाओं ने ही प्रवासी समुदाय के बीच खलबली मचा दी है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि अमेरिकी प्रशासन इस नियम को किस रूप में लागू करता है और इसका भारतीय टेक समुदाय पर दीर्घकालिक रूप से कितना गहरा प्रभाव पड़ता है।

  • क्या हर 45 मिनट बाद 3 मिनट की हल्की कसरत से कंट्रोल रह सकता है ब्लड शुगर? एक्सपर्ट्स से जानिए इसके पीछे का विज्ञान..?

    क्या हर 45 मिनट बाद 3 मिनट की हल्की कसरत से कंट्रोल रह सकता है ब्लड शुगर? एक्सपर्ट्स से जानिए इसके पीछे का विज्ञान..?

    क्या हर 45 मिनट बाद 3 मिनट की हल्की कसरत से कंट्रोल रह सकता है ब्लड शुगर? एक्सपर्ट्स से जानिए इसके पीछे का विज्ञान..?

    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, डेस्क जॉब, खराब डाइट, बिगड़ता लाइफस्टाइल और निष्क्रिय जीवनशैली कम उम्र में ही लोगों को डायबिटीज का शिकार बना रही है। खराब डाइट का सेवन तेजी से ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ाता है। आमतौर पर माना जाता है कि ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए बॉडी को एक्टिव रखना, घंटों जिम में पसीना बहाना जरूरी है। वॉक को खासतौर पर शुगर कंट्रोल करने के लिए जरूरी माना जाता है। अक्सर लोग सीटिंग जॉब, वक्त की कमी और आलस की वजह से वॉक नहीं कर पाते और उनका शुगर का स्तर बढ़ने लगता है।

    बोर्ड-प्रमाणित इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. ऑस्टिन पर्ल मटर ने इंस्टाग्राम पोस्ट में डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि अगर हर 45 मिनट में सिर्फ 3 मिनट तक ये खास एक्सरसाइज की जाए तो आसानी से ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल किया जा सकता है। इस स्टडी में अधिक वजन वाले पुरुषों पर 8.5 घंटे तक बैठे रहने की स्थिति में अलग-अलग तरह की शारीरिक गतिविधियों के असर की तुलना की गई।

    डॉ. पर्ल मटर के मुताबिक हर 45 मिनट में बॉडी-वेट स्क्वाट्स (Body weight Squats) करने वाले लोगों में ब्लड शुगर का स्तर, उन लोगों की तुलना में बेहतर रहा जो 30 मिनट तक वॉक करते थे। एक्सपर्ट ने बताया इस एक्सरसाइज का असर सिर्फ ब्लड शुगर कंट्रोल  तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिमाग और ओवर ऑल हेल्थ के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

    3 मिनट की एक्सरसाइज कैसे असर करती है, रिसर्च से समझें

    शोध में प्रतिभागियों को चार समूहों में बांटा गया। पहला समूह पूरे समय बैठा रहा जबकि दूसरे समूह ने एक बार 30 मिनट की वॉक की। तीसरे समूह ने हर 45 मिनट में 3 मिनट तक वॉक की। चौथे समूह ने हर 45 मिनट में लगभग 10 बॉडी-वेट स्क्वाट्स किए। डॉ. पर्ल मटर ने रिसर्च के निष्कर्ष का हवाला देते हुए बताया जिन लोगों ने हर 45 मिनट में थोड़ी-थोड़ी एक्सरसाइज, चाहे स्क्वाट्स हों या छोटी वॉक हो, की उनका ब्लड शुगर बेहतर तरीके से नॉर्मल रहा। एक्सपर्ट ने बताया साढ़े 8 घंटे बैठकर काम करने के बाद सिर्फ 30 मिनट की वॉक करने से बेहतर हर 45 मिनट में 3 मिनट की एक्सरसाइज है।

    अध्ययन में यह भी पाया गया कि ब्लड शुगर कंट्रोल का संबंध ग्लूटियस मैक्सिमस (कूल्हों की बड़ी मांसपेशी) और क्वाड्रिसेप्स (जांघ की आगे की मांसपेशियां) के सक्रिय होने से था। इससे पता चलता है कि शरीर की ये बड़ी मांसपेशियां मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाए रखने में अहम किरदार निभाती हैं। डॉ. पर्ल मटर ने कहा हर किसी के लिए हर 45 मिनट में एक्सरसाइज करना संभव नहीं हो सकता। लेकिन इस स्टडी की खास बात यह है कि इसमें अलग-अलग तरह की छोटी-छोटी एक्सरसाइज को देखा गया। चाहे कुछ लोग स्क्वाट्स करें या थोड़ी देर टहलें, शरीर को इससे मेटाबॉलिक फायदे मिलते हैं। इसका सकारात्मक असर दिमाग की सेहत पर भी पड़ सकता है, क्योंकि मेटाबॉलिज्म और ब्रेन हेल्थ एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

    बार-बार थोड़ा चलना-फिरना क्यों है जरूरी?

    एलीट केयर क्लिनिक के कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. पल्लेटी शिवा कार्तिक रेड्डी (MBBS, MD, FAIG) ने बताया हर आधा से एक घंटे में थोड़ी देर चलना-फिरना लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के नुकसान को कम करता है। लगातार बैठे रहने से मांसपेशियां ब्लड से  ग्लूकोज कम मात्रा में ले पाती हैं। जब स्क्वाट्स, तेज चाल से चलना या सीढ़ियां चढ़ने जैसी एक्टिविटी की जाती है तो शरीर की बड़ी मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, तो वे खून में मौजूद ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करती हैं। यह प्रक्रिया कुछ हद तक इंसुलिन पर निर्भर नहीं होती।

    एक्सपर्ट ने बताया अगर कोई इंसान पूरा दिन 10 से 12 घंटे सिर्फ बैठा रहता है और फिर एक बार आधा घंटे वॉक कर लेता है तो ऐसे लोगों में ब्लड शुगर में उतार चढ़ाव बना रहता है।  इसके विपरीत, दिनभर में बार-बार छोटे-छोटे मूवमेंट ब्रेक लेने से शरीर को लगातार मेटाबॉलिक फायदा मिलता है, जिससे ब्लड शुगर बेहतर तरीके से कंट्रोल रहता है और समय के साथ इंसुलिन सेंसिटिविटी भी सुधरती है।

    शुगर कंट्रोल करने के लिए कौन-कौन सी एक्सरसाइज करें?

    डॉ. रेड्डी के अनुसार बॉडी-वेट स्क्वाट्स इसलिए प्रभावी हैं क्योंकि ये पैरों की बड़ी मांसपेशियों को एक्टिव करती है, जो अधिक मात्रा में ग्लूकोज का उपयोग कर सकती हैं। एक्सपर्ट ने बताया हालांकि एक्सरसाइज करना सभी के लिए उपयुक्त नहीं है खासकर जिन बुजुर्गों को संतुलन बनाने में परेशानी होती है, घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित लोगों, गंभीर मोटापे से ग्रस्त लोगों या जिन्हें पहले से ही जोड़ों के दर्द की समस्या है उनके लिए एक्सरसाइज करना परेशानी का सबब बन सकता है। एक्सपर्ट ने बताया एक्सरसाइज हमेशा व्यक्ति की उम्र, फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

    सिटिंग जॉब करते हैं तो इस तरह रखें बॉडी को एक्टिव

    • फोन पर बात करते समय कुछ कदम टहलें इस तरह आपकी बॉडी एक्टिविटी बढ़ेगी और मसल्स की स्टिफनेस कम होगी और शुगर नॉर्मल रखने में भी मदद मिलेगी।
    • अगर आप ज्यादा मीटिंग करते हैं या सीटिंग जॉब करते हैं तो एक मीटिंग खत्म होने और दूसरी शुरू होने के बीच 2–3 मिनट चलें। इस तरह 2 से तीन मिनट की वॉक आपकी बॉडी के लिए असरदार साबित होगी।
    • हर 45–60 मिनट में उठकर थोड़ी देर चलें या कुछ स्क्वाट्स करें। नियमित रूप से ऐसा करने पर समय के साथ ब्लड शुगर कंट्रोल और मेटाबॉलिक हेल्थ में सुधार देखा जा सकता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है।

  • पीएम से मिले और हो गया काम! बीजेपी विधायक ने जमीन पर छोड़ा कब्जा, शिकायत लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे बचपन के दोस्त असगर अली वोरा..

    पीएम से मिले और हो गया काम! बीजेपी विधायक ने जमीन पर छोड़ा कब्जा, शिकायत लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे बचपन के दोस्त असगर अली वोरा..

    पीएम से मिले और हो गया काम! बीजेपी विधायक ने जमीन पर छोड़ा कब्जा, शिकायत लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे बचपन के दोस्त असगर अली वोरा..

    पीएम मोदी के स्कूली दोस्त असगर अली वोरा को बड़ी राहत मिली है. भायंदर में उनकी 2810 स्क्वायर मीटर जमीन पर कब्जा करने के आरोपों के बाद, बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता की कंपनी ने जमीन से कब्जा छोड़ने और वोरा के खिलाफ दर्ज शिकायत वापस लेने का फैसला किया है. आपको मालूम हो कि असगर अली वोरा ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पढ़ाई कर चुके असगर अली वोरा की पीएम संग हुई एक मुलाकात ने सालों पुराने जमीन विवाद का रुख पूरी तरह बदल दिया. मीरा रोड के रहने वाले 81 वर्षीय असगर अली वोरा को अपनी भायंदर स्थित जमीन पर कब्जा वापस मिल गया है. बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता की कंस्ट्रक्शन कंपनी ‘सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स’ ने विवादित प्लॉट से अपना कब्जा छोड़ने और कंस्ट्रक्शन परमिशन वापस लेने का औपचारिक ऐलान कर दिया है.

    जमीन पर अवैध कब्जा का लगाया था आरोप गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पढ़ाई कर चुके असगर अली वोरा बीते 8 सितंबर को पीएम से मिलने पहुंचे थे. उन्होंने पीएम मोदी को बताया था कि 1989 में उन्होंने भायंदर (ईस्ट) के नवघर इलाके में करीब 2810 स्क्वायर मीटर जमीन खरीदी थी. आरोप था कि 2011 में ‘स्वयं बिल्डर्स’ और बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता की ‘सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स’ ने उनकी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया. वोरा पिछले 15 सालों से प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे. पीएम मोदी ने मुलाकात के दौरान उन्हें जल्द न्याय का भरोसा दिया था.

    पीएम से मिला था पॉजिटिव जवाब वोरा ने कहा कि वह पिछले 15 सालों से अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के साथ इस मामले को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि मीटिंग के दौरान उन्हें प्रधानमंत्री से पॉजिटिव जवाब मिला. इस मीटिंग के बाद, सरकारी अधिकारियों ने इस मामले को उठाया. मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीकर परदेशी ने मंत्रालय में एक मीटिंग की. मीटिंग में वोरा, मेहता, मीरा-भायंदर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन कमिश्नर राधा विनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे शामिल हुए.

    और शिकायत ले ली वापस मीटिंग के दौरान, मेहता ने टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट को एक लेटर दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि वह विवादित जमीन का कब्जा छोड़ रहे हैं और उन्हें दी गई कंस्ट्रक्शन की परमिशन भी वापस कर रहे हैं. मेहता ने लेटर में यह भी कहा कि जमीन 2019 में मर्विन फर्नांडिस से खरीदी गई थी. पुलिस कमिश्नर को लिखे एक अलग लेटर में, विधायक ने कहा कि वे वोरा के खिलाफ अपनी पिछली शिकायत वापस ले रहे हैं क्योंकि दोनों पार्टियों के बीच समझौता हो गया है.

  • वृंदावन जा रहे हैं तो भूलकर भी न करें ये 8 गलतियां, वरना…

    वृंदावन जा रहे हैं तो भूलकर भी न करें ये 8 गलतियां, वरना…

    वृंदावन जा रहे हैं तो भूलकर भी न करें ये 8 गलतियां, वरना…

    वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की नगरी के रूप में दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर समेत कई धार्मिक स्थलों पर दर्शन करने पहुंचते हैं. वीकेंड और त्योहारों के दौरान यहां भीड़ कई गुना बढ़ जाती है. ऐसे में अगर आप भी वृंदावन जाने की तैयारी कर रहे हैं तो कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है. छोटी सी लापरवाही आपकी यात्रा का मजा खराब कर सकती है. आइए जानते हैं वृंदावन जाते समय किन 8 गलतियों से बचना चाहिए.बंदरों के सामने सामान न दिखाएं वृंदावन की गलियों और मंदिरों के आसपास बंदर बड़ी संख्या में नजर आते हैं. उनके सामने मोबाइल, चश्मा, प्रसाद या खाने की चीजें दिखाने से बचें.

    बंदर सामान छीनने की कोशिश कर सकते हैं. उन्हें छेड़ें नहीं और न ही उनके पास जाकर खाना खिलाएं.कीमती सामान लेकर न घूमें भीड़भाड़ वाली जगहों पर मोबाइल, पर्स और दूसरे कीमती सामान को संभालकर रखें. जरूरत से ज्यादा कैश लेकर जाने से बचें. जरूरी सामान को बैग में रखें और उसकी चेन बंद रखें. मोबाइल को भी हाथ में लेकर चलते रहने के बजाय सुरक्षित जगह पर रखें.मंदिरों के नियमों को नजरअंदाज न करें हर मंदिर के अपने अलग नियम हो सकते हैं. कहीं फोटोग्राफी की अनुमति नहीं होती तो कहीं मोबाइल ले जाने पर रोक रहती है. मंदिर प्रशासन के निर्देशों का पालन करें. पूजा के दौरान तेज आवाज में बात करने या अनुशासन बिगाड़ने से बचें.

    मंदिर में धक्का-मुक्की न करें वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में दर्शन के लिए काफी भीड़ रहती है. लाइन तोड़कर आगे बढ़ने या धक्का-मुक्की करने से बचें. इससे आपको या दूसरे श्रद्धालुओं को चोट लग सकती है. मंदिर की लाइन में ही खड़े रहें और सुरक्षाकर्मियों के निर्देशों का पालन करें. बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें.खुले में रखा खाना खाने से बचें वृंदावन में कई जगह स्ट्रीट फूड और प्रसाद की दुकानें मिलती हैं. कुछ भी खाने से पहले साफ-सफाई जरूर देखें. काफी देर से खुले में रखा खाना खाने से बचें. यात्रा के दौरान साफ पानी पिएं और संभव हो तो अपनी पानी की बोतल साथ रखें.बच्चों को भीड़ में अकेला न छोड़ें वीकेंड और त्योहारों पर भीड़ काफी बढ़ जाती है. ऐसे में बच्चों का हाथ पकड़कर रखें और उन्हें अकेले कहीं न जाने दें. परिवार के सभी सदस्यों के साथ पहले से एक मिलने की जगह तय कर लें. जरूरी संपर्क नंबर मोबाइल में सेव रखें.संकरी गलियों में सावधानी से चलें वृंदावन की कई गलियां काफी संकरी हैं, जहां पैदल लोगों के साथ ऑटो और ई-रिक्शा भी चलते हैं. सड़क या गली पार करते समय जल्दबाजी न करें. वाहनों से दूरी बनाकर चलें और भीड़ में अपने आसपास नजर रखें.

    जल्दी दर्शन के नाम पर किसी पर भरोसा न करें वृंदावन में कुछ लोग जल्दी दर्शन, पूजा या दूसरी धार्मिक सेवाएं कराने के नाम पर श्रद्धालुओं से संपर्क कर सकते हैं. ऐसे लोगों पर तुरंत भरोसा करके पैसे न दें. किसी भी सेवा के लिए भुगतान करने से पहले शुल्क और व्यवस्था की पूरी जानकारी लें.

  • AI की वजह से टेक इंडस्ट्री में बदल गया काम का तरीका, Reddit पर छलका डेवलपर का दर्द

    AI की वजह से टेक इंडस्ट्री में बदल गया काम का तरीका, Reddit पर छलका डेवलपर का दर्द

    AI की वजह से टेक इंडस्ट्री में बदल गया काम का तरीका, Reddit पर छलका डेवलपर का दर्द

    AI को लेकर अक्सर कहा जाता है कि इससे लोगों का काम आसान हो जाएगा और समय की बचत होगी, लेकिन हर किसी का एक्सपीरियंस ऐसा नहीं है. एक सॉफ्टवेयर डेवलपर ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती शेयर करते हुए बताया कि AI ने उसका काम कम करने के बजाय उल्टा और बढ़ा दिया है. उसका कहना है कि अब कंपनियां पहले से कहीं ज्यादा काम की उम्मीद करने लगी हैं, जबकि सैलरी में कोई खास चेंज नहीं आया है.

    इस डेवलपर ने Reddit के r/developersIndia फोरम पर Anyone else feel we’re having to work more due to AI? टाइटल से अपनी बात लिखी. देखते ही देखते उसकी पोस्ट वायरल हो गई. डेवलपर ने बताया कि 2021 से 2024 के बीच सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार काफी अलग थी. उस समय किसी साधारण CRUD API को तैयार करना भी कई चरणों से होकर गुजरता था. पहले जरूरतों को समझा जाता, फिर टेक्निकल स्पेसिफिकेशन तैयार होते, उनका रिव्यू होता था, उसके बाद कोडिंग शुरू होती. फिर टेस्टिंग, पुल रिक्वेस्ट रिव्यू और आखिर में प्रोडक्शन पर डिप्लॉयमेंट किया जाता.

    क्यों आसान से मुश्किल हो गया है AI?

    इन सभी स्टेज में कई दिन निकल जाते थे और यही नॉर्मल प्रोसेस मानी जाती थी. उसने ये भी बताया कि उस दौरान वह चार इंटर्न की टीम संभालता था. जिसमें उनको गाइड करना, उनकी गलतियां सुधारना और उन्हें समझाना ही उसके समय का बड़ा हिस्सा ले लेता था. इसी वजह से उसे खुद ज्यादा कोड लिखने का मौका नहीं मिलता था, लेकिन उस समय किसी को इससे परेशानी नहीं होती थी क्योंकि पूरे प्रोजेक्ट की टाइमलाइन उसी हिसाब से बनाई जाती थी. डेवलपर का कहना है कि 2025 के बाद हालात तेजी से बदल गए.

    AI टूल्स के आने के बाद पहले जिन कामों में कई दिन लगते थे, अब वही एक या दो दिन में पूरे करने की उम्मीद की जाती है. कंपनियों का मानना है कि जब AI उपलब्ध है तो डेवलपर्स को पहले से कहीं ज्यादा तेजी से काम करना चाहिए. उसने लिखा कि अब जूनियर डेवलपर्स और इंटर्न भी AI की मदद से बहुत तेजी से कोड तैयार कर लेते हैं. सुनने में यह अच्छी बात लगती है, लेकिन इसके साथ एक नई चुनौती भी सामने आई है. पहले जहां जूनियर डेवलपर्स को काम पूरा करने में समय लगता था, अब वे जल्दी-जल्दी कोड जमा कर देते हैं. ऐसे में सीनियर डेवलपर्स को उनके काम की समीक्षा करने में पहले से कहीं ज्यादा समय देना पड़ता है. यानी अब जिम्मेदारियां कम होने के बजाय बढ़ गई हैं. एक तरफ टीम के बाकी सदस्यों के काम की जांच करनी होती है और दूसरी तरफ खुद भी पहले से कहीं ज्यादा कोड लिखना पड़ता है. कुल मिलाकर काम का दबाव बढ़ गया है, लेकिन इसके बदले मिलने वाला वेतन लगभग वही है.

    डेवलपर ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि AI ने टेक इंडस्ट्री की उन आरामदायक धीमी प्रोसेस को खत्म कर दिया है, जो पहले काम को थोड़ा सहज बना देती थीं. अब हर चीज इतनी तेज हो गई है कि ऐसा लगता है जैसे हर समय किसी दौड़ में शामिल हों. उसकी यह बात कई लोगों को अपनी कहानी जैसी लगी. पोस्ट पर कमेंट करने वाले कई डेवलपर्स ने कहा कि उन्होंने भी पिछले कुछ समय में यही बदलाव महसूस किया है. उनके मुताबिक AI ने काम को आसान जरूर बनाया है, लेकिन कंपनियों ने उसी अनुपात में डेडलाइन भी छोटी कर दी है.

    कुछ लोगों ने कहा कि AI कोड लिखने में मदद जरूर करता है, लेकिन उस कोड की क्वालिटी, सेफ्टी और भरोसेमंद होने की जिम्मेदारी आखिरकार इंसानों पर ही रहती है. अगर AI से तैयार किए गए कोड में कोई गलती रह जाए तो उसका असर पूरे प्रोजेक्ट पर पड़ सकता है. इसलिए हर लाइन की जांच करना अभी भी जरूरी है. कई डेवलपर्स ने यह भी कहा कि अब काम का माहौल पहले से ज्यादा थकाने वाला हो गया है. एक प्रोजेक्ट खत्म होते ही दूसरा सामने आ जाता है. ऐसा महसूस होता है कि बिना रुके लगातार काम करना पड़ रहा है और आराम करने का मौका लगभग नहीं मिलता.

    इस पूरी चर्चा ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या AI सच में कर्मचारियों की जिंदगी आसान बना रहा है, या फिर इससे सिर्फ काम की रफ्तार बढ़ी है और अपेक्षाएं भी कई गुना बढ़ गई हैं? फिलहाल टेक इंडस्ट्री में काम करने वाले कई लोगों का एक्सपीरियंस यही बताता है कि AI ने सिर्फ काम करने का तरीका नहीं बदला, बल्कि काम का दबाव भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा दिया है.