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  • Kuber Story: कुबेर कैसे बने धन के देवता, क्यों होती है धनतेरस पर उनकी पूजा, जानिए धन देवता की कथा

    Kuber Story: कुबेर कैसे बने धन के देवता, क्यों होती है धनतेरस पर उनकी पूजा, जानिए धन देवता की कथा

    Kuber Story: कुबेर कैसे बने धन के देवता, क्यों होती है धनतेरस पर उनकी पूजा, जानिए धन देवता की कथा

    Kuber Story: कुबेर का नाम सुनते ही धन-दौलत के स्वामी की एक छवि मन-मस्तिष्क में बन जाती है. हिन्दू धर्म के पौराणिक कहानियों में भी उनका कई जिक्र हुआ है. वे देवताओं के कोषाध्यक्ष या खजांची हैं, जिसे अंग्रेजी में ट्रेजरर कहते हैं. वे धन के स्वामी और मैनेजर यानी प्रबंधक माने जाते हैं. आइए जानते हैं, कुबेर कौन हैं, वे धन के देवता कैसे बने और धनतेरस-दीवाली पर उनकी पूजा क्यों होती है?

    रावण के सौतेले भाई हैं कुबेर

    धन समृद्धि के देवता कुबेर यक्षों के राजा भी है और उन्हें यक्षराज भी कहते हैं. पौराणिक कथाओं के मुताबिक, उनके पिता महर्षि विश्रवा थे, जो रावण, कुंभकरण और विभीषण के पिता भी थे. लेकिन रावण और कुबेर सौतेले भाई थे और दोनों ही महादेव शिव के महभक्त हैं. कहते हैं, सोने की नगरी लंका का निर्माण देवशिल्पी विश्वकर्मा ने कुबेर के लिए किया था, लेकिन रावण ने उनसे यह छीन लिया. इसके बाद, कुबेर ने भगवान शिव के आशीर्वाद से कैलाश के पास अलकापुरी नगरी को अपना घर बनाया.

    कुबेर कैसे बने धन के देवता?

    शिव पुराण की एक कथा के अनुसार, अपने पूर्वजन्म में कुबेर गुणानिधि नामक एक चोर थे। एक दिन वे अनजाने में शिवमंदिर में चोरी के लिए घुस गए। घनघोर अंधेरा होने से उन्होंने अपने धोती का एक टुकड़ा जलाकर कर मंदिर में प्रकाश फैला दिया। उस दिन महाशिवरात्रि थी। इससे भगवान शिव बेहद प्रसन्न हुए और अगले जन्म वे महर्षि विश्रवा के पुत्र बने।

    इस जन्म में उन्होंने हजारों सालों तक ब्रह्मा जी पूजा कर अपनी दृढ़ निष्ठा और अटूट भक्ति से उन्हें प्रसन्न कर लिया। ब्रह्माजी ने उन्हें उत्तर दिशा का रक्षक यानी दिक्पाल बनाया। साथ ही भगवान शिव के सुझाव से देवताओं का धनाध्यक्ष यानी खजाने का रक्षक नियुक्त किया।

    धनतेरस पर क्यों होती है कुबेर की पूजा?

    धनतेरस का पर्व प्रकाश और धन के त्योहार दीवाली की शुरूआत माना जाता है। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से कुबेर भगवान की पूजा की जाती है। इस दिन नई वस्तुओं, विशेषकर सोने-चांदी के आभूषण, जेवर, सिक्के और शुभ धातु के बर्तनों को कुबेर देव मानकर पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी चंचला हैं, लेकिन कुबेर संग उनकी पूजा करने से धन और समृद्धि का वास होता है। इसलिए धनतेरस और दीवाली के दिन उनकी पूजा होती है।

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • मंदिर में भगवान की परिक्रमा क्यों करते हैं? जानिए प्रदक्षिणा की परंपरा का धार्मिक महत्व और लाभ.

    मंदिर में भगवान की परिक्रमा क्यों करते हैं? जानिए प्रदक्षिणा की परंपरा का धार्मिक महत्व और लाभ.

    मंदिर में भगवान की परिक्रमा क्यों करते हैं? जानिए प्रदक्षिणा की परंपरा का धार्मिक महत्व और लाभ.

    हिन्दू धर्म में हजारों सालों से मंदिर जाने, भगवान के समक्ष सिर झुकाने और दंडवत प्रणाम करने के साथ मूर्ति के चारों ओर घूमकर परिक्रमा करने की परंपरा चली आ रही है. भगवान के पूजा-पाठ के इन नियमों में आज भी कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है. लेकिन क्या आपने ये कभी सोचा या गौर किया है कि मंदिर और भगवान की प्रदक्षिणा या परिक्रमा क्यों की जाती है. यदि इसे आप सिर्फ एक रस्म मानते हैं, तो आपको धर्म ग्रंथों की लॉजिक और भक्तों-श्रद्धालुओं की बात एक बार जरूर समझनी चाहिए. आइए जानते हैं, इस परंपरा का महत्व और लाभ क्या है?

    किस देवी-देवता की कितनी परिक्रमा?

    हिन्दू धर्म के ग्रंथों में इसका स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि किस देवी और देवता की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए. नारद पुराण के एक श्लोक के मुताबिक, देवी चंडी यानी मां दुर्गा की एक, सूर्यदेव की सात, गणेश जी की तीन, भगवान विष्णु की चार और महादेव शिव की आधी परिक्रमा करनी चाहिए. आपको बता दें कि शिवलिंग के सोमसूत्र यानी जलहरी को नहीं लांघा जाता है. प्राचीन ऋषि-मुनियों ने इसे संचित कर्मों को काटने की विधि बताया है.

    प्रदक्षिणा का धार्मिक महत्व

    हिन्दू धर्म की मान्यता है कि मंदिर, पूजा स्थल या देवालय के गर्भगृह की सकारात्मक ऊर्जा के क्षेत्र में घूमने यानी परिक्रमा करने से व्यक्ति मात्र का आभामंडल शुद्ध होता है. ग्रंथों में उल्लेख है कि हमसे जाने-अनजाने इस जन्म या पिछले जन्मों में जो भी पाप या बुरे कर्म हुए हैं, वे प्रदक्षिणा के हर कदम के साथ नष्ट हो जाते हैं.

    परिक्रमा हमेशा दाईं ओर ही क्यों?

    ईश्वर की परिक्रमा को संस्कृत में ‘प्रदक्षिणा’ कहते हैं. यहां ‘प्र’ का अर्थ है- प्रमुख या मुख्य या प्रधान, वहीं ‘दक्षिणा’ का अर्थ है- दक्षिण दिशा और दाहिना भाग. दाहिनी ओर से परिक्रमा करने के कारण इसे ‘प्रदक्षिणा’ कहते हैं. दाहिनी ओर से परिक्रमा क्यों करनी चाहिए, इसके बारे में ऋग्वेद में कहा गया है कि हमारी दाहिनी ओर सकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय होती हैं. शास्त्रों में यह नियम भी मिलता है कि हमारे चलते समय भगवान को हमेशा दाहिनी ओर और हमें भगवान की बायीं ओर उनसे थोड़ा पीछे ही होना चाहिए.

    अश्वमेध यज्ञ जैसा फल

    स्कन्द पुराण के वैष्णव खंड के एक श्लोक में प्रदक्षिणा के महत्व और उसके लाभ को काफी अच्छे ढंग से समझाया गया है. इसके अनुसार, पदे पदे यानी परिक्रमा का हर कदम से भक्त को तत्काल अश्वमेध यज्ञ जैसा फल प्राप्त होता है. यह भी उल्लेख मिलता है कि इससे समस्त पापों का क्षय हो जाता है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है

  • मृत्यु से जुड़े अलग-अलग सपने आना देता है कई संकेत, स्वप्न शास्त्र से जानिए इसका मतलब

    मृत्यु से जुड़े अलग-अलग सपने आना देता है कई संकेत, स्वप्न शास्त्र से जानिए इसका मतलब

    मृत्यु से जुड़े अलग-अलग सपने आना देता है कई संकेत, स्वप्न शास्त्र से जानिए इसका मतलब

    Swapna Shastra: स्वप्न शास्त्र के अनुसार, नींद में आने वाले सपनों के संकेतों से भविष्य के बारे में जान सकते हैं. नींद में नजर आने वाले सपने भविष्य से जुड़े कई संकेत देते है. इसी प्रकार व्यक्ति को अगर मौत से जुड़े सपने आते हैं, तो यह शुभ-अशुभ घटनाओं की ओर इशारा करते हैं. मृत्यु से जुड़े अलग-अलग प्रकार के सपने देखने का क्या अर्थ होता है. आप इसके बारे में स्वप्न शास्त्र के अनुसार, विस्तार से जान सकते हैं.

    मृत व्यक्ति का सपने में दिखना

    आप किसी मृत पूर्वज को सपने में देखते हैं, तो यह इस ओर इशारा करता है कि आपकी कोई इच्छा पूरी होने वाली है. इस प्रकार का सपना आना उस व्यक्ति के साथ भावनात्मक जुड़ाव की ओर इशारा करता है. कई बार ऐसे सपने आना पुरानी यादों के कारण होता है. आपको ऐसे सपने आने पर शांत मन के लिए प्रार्थना और दान करना चाहिए.

    सपने में किसी की मृत्यु देखना

    जीवन में तनाव के कारण कई बार किसी व्यक्ति की मृत्यु का सपना आ सकता है. हालांकि, स्वप्न शास्त्र में किसी परिजन की मृत्यु का सपना देखना उनकी लंबी आयु या उनके जीवन में सुधार की ओर इशारा करता है. आप इस प्रकार के सपने आने से डरना नहीं चाहिए. यह सपना उस व्यक्ति के जीवन पर चल रहे संकट के टलने की ओर इशारा करता है.

    सपने में खुद की मृत्यु देखना

    स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में खुद की मृत्यु देखना सेहत में सुधार और लंबी उम्र होने की ओर इशारा करता है. स्वप्न शास्त्र में इस प्रकार का सपना उल्टा माना जाता है. इस प्रकार का सपना आना जीवन में सकारात्मक बदलावों का संकेत होता है.

    सपने में अर्थी देखना

    सपने में अर्थी देखने पर लोग अक्सर डर जाते हैं. हालांकि, ऐसा सपना आना जीवन की मुश्किलों के खत्म होने की ओर इशारा करता है. किसी बीमार व्यक्ति को अर्थी पर देखना उसके जल्दी सही होने का संकेत हो सकता है. इसके अलावा आपको कोई मृत व्यक्ति बार-बार सपने में दिखता है, तो यह उसकी इच्छा अधूरी रहने की वजह से हो सकता है. आपको ऐसी स्थिति में दान करना चाहिए.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और स्वप्न शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • बेड के नीचे इन 5 चीजों को रखना माना जाता है अशुभ, जानिए वास्तु से जुड़े जरूरी नियम..

    बेड के नीचे इन 5 चीजों को रखना माना जाता है अशुभ, जानिए वास्तु से जुड़े जरूरी नियम..

    बेड के नीचे इन 5 चीजों को रखना माना जाता है अशुभ, जानिए वास्तु से जुड़े जरूरी नियम..

    Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में चीजों की दिशा और दशाओं को लेकर कई नियम बताए गए है. वास्तु के अनुसार, घर में चीजों को यहां-वहां रख देने से वास्तु दोष लगता है. इसके कारण जीवन में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. कुछ गलतियां घर में नकारात्मकता को बढ़ाने का कारण बन सकती है. वास्तु के अनुसार, बेड के नीचे कई चीजों को रखने से बचना चाहिए. अक्सर लोग घर में बिस्तर के नीचे सामान रख देते हैं. लेकिन आप ऐसी भूल न करें.

    इन चीजों को रखने से होगा नुकसान

    वास्तु की दृष्टि से बिस्तर के नीचे कई चीजों को रखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और वास्तु दोष लगता है. यह घर में अशांति और दुख का कारण बन सकती है. इसका सेहत के ऊपर भी बुरा असर पड़ सकता है. आप लोगों को किन चीजों को बेड के नीचे नहीं रखना चाहिए, इसके बारे में आप यहां विस्तार से जान सकते हैं.

    जूते-चप्पल – अक्सर घरों में जूते-चप्पलों को लोग बेड के नीचे रखते हैं. आपको ऐसी गलती करने से बचना चाहिए. इसके कारण तनाव बढ़ सकता है. वास्तु के अनुसार, यह अशुभ माना जाता है.

    खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान – बिजली के खराब हुए सामान को लोग घर में कहीं भी छोड़ देते हैं. कई बार लोग इसे बेड के नीचे रख देते हैं. ऐसा करने से बचना चाहिए. पुराने फोन, चार्जर या पंखा कोई भी बिजली का खराब सामान बिस्तर के नीचे न रखें.

    झाड़ू – आप घर में बेड के नीचे झाड़ू रखते हैं, तो इसके कारण घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. आपको ऐसी गलती करने से बचना चाहिए. यह अनिद्रा और व्यर्थ के खर्च का कारण बन सकता है. इसके कारण रिश्तों में तनाव भी आता है.

    नुकीली चीजें और औजार – बेड के नीचे लोहे के औजार, कांच, कीलें, कैंची आदि नहीं रखना चाहिए. इन चीजों को रखने से आप लोगों को रिश्तों में तनाव का सामना करना पड़ सकता है. इसके कारण परिवार का माहौल तनावपूर्ण बनता है.

    पूजा का सामान – बेड के नीचे या पलंग के अंदर देवी-देवताओं की मूर्तियां और पूजा की सामग्री नहीं रखनी चाहिए. इससे भगवान नाराज होते हैं. आपको अशुभ परिणााम झेलने पड़ सकते हैं.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • चीन-थाईलैंड समेत इन देशों में खाया जाता है मगरमच्छ का मांस, कई जगहों पर बाजार में मिलते हैं इसके व्यंजन.

    चीन-थाईलैंड समेत इन देशों में खाया जाता है मगरमच्छ का मांस, कई जगहों पर बाजार में मिलते हैं इसके व्यंजन.

    चीन-थाईलैंड समेत इन देशों में खाया जाता है मगरमच्छ का मांस, कई जगहों पर बाजार में मिलते हैं इसके व्यंजन.

    Amazing Facts: मगरमच्छ को आमतौर पर एक खतरनाक शिकारी के रूप में देखा जाता है, जिससे इंसान दूर रहना पसंद करते हैं। लेकिन दुनिया के कुछ हिस्सों में मगरमच्छ के मांस को खाने की परंपरा भी रही है। कुछ देशों में इसे खास व्यंजन के तौर पर परोसा जाता है, जबकि कुछ जगहों पर इसका मांस स्थानीय बाजारों और रेस्तरां में भी देखने को मिल सकता है।

    हालांकि, इसका सेवन हर देश में आम नहीं है और कई जगहों पर मगरमच्छों के शिकार, पालन और मांस की बिक्री को लेकर सख्त नियम भी लागू हैं।

    चीन में मगरमच्छ के मांस का इस्तेमाल

    चीन के कुछ क्षेत्रों में मगरमच्छ के मांस का इस्तेमाल पारंपरिक भोजन और स्थानीय व्यंजनों में किया जाता रहा है। यहां मगरमच्छों की कुछ प्रजातियों का व्यावसायिक पालन भी किया जाता है।

    कुछ जगहों पर इसके मांस को पकाकर परोसा जाता है। इसके अलावा मगरमच्छ के शरीर के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े पारंपरिक उपयोगों का भी उल्लेख मिलता है।

    थाईलैंड में भी मिलता है मगरमच्छ का मांस

    थाईलैंड में मगरमच्छ पालन एक जाना-पहचाना व्यवसाय है। कुछ स्थानों पर मगरमच्छ के मांस को ग्रिल करके या अलग-अलग मसालों के साथ पकाकर बेचा जाता है।

    कुछ पर्यटन क्षेत्रों और स्थानीय बाजारों में मगरमच्छ के मांस से बने व्यंजन देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, यह थाईलैंड के रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा नहीं है और हर व्यक्ति इसे नहीं खाता।

    कंबोडिया और आसपास के इलाकों में भी इस्तेमाल

    दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ अन्य हिस्सों में भी मगरमच्छ पालन और इसके मांस के इस्तेमाल की जानकारी मिलती है। कंबोडिया जैसे देशों में कुछ क्षेत्रों में मगरमच्छों का पालन व्यावसायिक स्तर पर किया जाता है और मांस का उपयोग स्थानीय बाजारों में किया जाता रहा है।

    मगरमच्छ का मांस कैसा होता है?

    मगरमच्छ के मांस को कई जगहों पर चिकन और मछली के बीच के स्वाद जैसा बताया जाता है। इसे आमतौर पर ग्रिल, फ्राई या मसालों के साथ पकाकर खाया जाता है।

    हाल

  • अभी से घर में लगा लें ये 5 पौधे, एयर प्यूरीफायर भी हो जाएगा फेल और प्रदूषित हवा को करेगा साफ.

    अभी से घर में लगा लें ये 5 पौधे, एयर प्यूरीफायर भी हो जाएगा फेल और प्रदूषित हवा को करेगा साफ.

    अभी से घर में लगा लें ये 5 पौधे, एयर प्यूरीफायर भी हो जाएगा फेल और प्रदूषित हवा को करेगा साफ.

    जैसे ही बरसात का मौसम खत्म होता है, वैसे ही वायु की गुणवत्ता फिर से प्रभावित होने लगती है. ऐसे समय में घर के अंदर या आसपास लगे पौधे काफी अहम भूमिका निभा सकते हैं. ये हवा में मौजूद कुछ दूषित कणों और प्रदूषकों को कम करने में मदद करते हैं, जिससे घर के अंदर साफ हवा का प्रवाह बेहतर हो सकता है. यही वजह है कि ये पौधे सिर्फ घर की खूबसूरती बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हवा को स्वच्छ रखने में भी मजबूत भूमिका निभाते हैं. आप इन्हें घर या अपने कमरे के अंदर भी लगा सकते हैं. इन पौधों को ज्यादा केयर की जरूरत नहीं पड़ती और ये कम रोशनी में भी अच्छे से ग्रो करते हैं.

    1. स्पाइडर प्लांट स्पाइडर प्लांट भले देखने में साधारण लगे, लेकिन इसकी पत्तियां चमत्कार की तरह काम करती हैं. अपने नाम के जैसा ही इस पौधे की पत्तियां हवा में मौजूद प्रदूषकों को खुद में सोख लेती है. न केवल पत्तियां बल्कि इसके जड़ें भी हवा में मौजूद फॉर्मल्डिहाइड जैसे प्रदूषकों को कम करने में मददगार साबित होती हैं और घर के अंदर साफ हवा लाने में मदद करती है.

    2. गोल्डन पोथोस गोल्डन पोथोस देखने में जितना खूबसूरत लगता है, हवा को साफ रखने में भी उतना ही मददगार माना जाता है. इसकी पत्तियां हवा में मौजूद हानिकारक प्रदूषकों को खुद में सोखने में मदद करती हैं. यह फॉर्मल्डिहाइड और बेंजीन जैसे प्रदूषकों को कम करने में मदद करता है और घर के अंदर की हवा को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है.

    3. पीस लिली पीस लिली सिर्फ अपने सफेद फूलों से घर की खूबसूरती नहीं बढ़ाती, बल्कि हवा को साफ रखने में भी मदद करती है. इसकी पत्तियां हवा में मौजूद कुछ VOCs को सोखने में मदद करती हैं. साथ ही यह फॉर्मल्डिहाइड जैसे प्रदूषकों को कम करने में भी मददगार हो सकती है, जिससे घर के अंदर की हवा बेहतर हो सकती है.

    4. एरेका पाम एरेका पाम घर के अंदर हरियाली बढ़ाने के साथ हवा की गुणवत्ता बेहतर करने में भी मदद कर सकता है. इसकी पत्तियां और पौधे की प्राकृतिक प्रक्रियाएं indoor हवा में मौजूद कुछ प्रदूषकों और गैसों के स्तर को कम करने में सहायक होती हैं. यानी यह पौधा घर को खूबसूरत बनाने के साथ हवा को बेहतर रखने में भी अपनी भूमिका निभाता है.

    5. स्नेक प्लांट स्नेक प्लांट देखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन घर के अंदर की हवा के लिए यह काफी काम का पौधा है. इसकी पत्तियां हवा में मौजूद कुछ प्रदूषकों को सोखने में मदद करती हैं. यह फॉर्मल्डिहाइड जैसे प्रदूषकों को कम करने में भी सहायक हो सकता है और कमरे की हवा को बेहतर बनाने में मदद करता है.

  • मनी प्लांट के अलावा ये 5 पौधे घर में बढ़ाते हैं सुख-शांति, सोख लेती है नेगेटिव एनर्जी..

    मनी प्लांट के अलावा ये 5 पौधे घर में बढ़ाते हैं सुख-शांति, सोख लेती है नेगेटिव एनर्जी..

    मनी प्लांट के अलावा ये 5 पौधे घर में बढ़ाते हैं सुख-शांति, सोख लेती है नेगेटिव एनर्जी..

    Indoor Plant Vastu: जब भी घर के अंदर इंडोर प्लांट से सजावट, सुख-शांति और धन बढ़ाने की बात आती है, तो सबसे पहले ‘मनी प्लांट’ का नाम सामने आता है. लेकिन प्रकृति की गोद में कुछ ऐसे बेमिसाल पौधे भी हैं, जो मनी प्लांट से कई गुना तेजी में घर की नेगेटिव एनर्जी को सोख लेते हैं. आइए जानते हैं, ऐसे 5 जादुई इंडोर प्लांट के बारे में, जो न केवल घर को एक मॉडर्न लुक देते हैं, बल्कि जीवन में सुख, शांति और धन की आमद का रास्ता भी सुगम बनाने में मदद करते हैं.

    स्नेक प्लांट

    स्नेक प्लांट की खासियत यह है कि यह पौधा पीपल की तरह रात में भी ऑक्सीजन छोड़ता है. साथ ही यह हवा में व्याप्त टॉक्सिक यानी हानिकारक कणों को सबसे अधिक जल्दी से सोखता है. इससे घर में पाजिटिव एनर्जी बनी रहती है. मान्यता है कि इसे घर के पूर्वी, दक्षिणी और दक्षिणी-पूर्वी कोने में रखने से तनाव कम होता है.

    पीस लिली

    पीस लिली के बारे में कहा जाता है कि यह कार्बन डाइऑक्साइड के अलावा बेंजीन, फॉर्मेल्डिहाइड और जाइलीन के हानिकारक कणों को भी सोख लेता है. साथ ही यह भी रात में ऑक्सीजन बनाता है. कहते हैं, घर में पॉजिटिव झगड़ा-क्लेश दूर कर शांति के लिए पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना चाहिए.

    जेड प्लांट

    जेड प्लांट को ‘धन का पौधा’ और ‘फ्रेंडशिप ट्री’ भी कहा जाता है. इसके बारे में मान्यता है कि यह वातावरण में ‘फ्रेशनेस’ बनाए रखता है. साथ ही यह मानसिक तनाव को पास फटकने भी नहीं देता है. लोग अपने घर में सुख-समृद्धि और धन की आमद बढ़ाने के लिए मुख्य द्वार के पास या उत्तर-पूर्व दिशा में रखते हैं.

    स्पाइडर प्लांट

    स्पाइडर प्लांट के बारे में कहा है कि यह 24 घंटे में हवा की 95 फीसदी नेगेटिव वाइब्स यानी अशुद्धियों को सोख लेता है. इस प्रकार हवा को शुद्ध बनाने में यह पौधा लाजवाब है. तनाव और नेगेटिव थॉट्स को दूर करने और रिश्तों में सुधार के लिए इस पौधे को घर उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व कोने में रखते हैं.

    लकी बैम्बू

    यह पौधा केवल पानी में उगाया जाता है, जो घर के भीतर की हवा को साफ कर वातावरण को सकारात्मक बनाता है. यह एक डंठल वाला पौधा है, जिसकी संख्या के आधार पर फल अलग-अलग होते हैं. कहते हैं, सुख-शांति के लिए 3 डंठल और धन-संपत्ति के लिए 5 डंठल वाले बैम्बू सबसे अधिक लकी होते हैं. कहते हैं, इसे घर की पूर्व या दक्षिण दिशा में रखने घर के सदस्यों की सेहत भी अच्छी रहती है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • यहां डस्टबिन से बातें करते हैं लोग! आवाज सुनकर समझता है बात, फिर अपने आप खोल देता है ढक्कन.

    यहां डस्टबिन से बातें करते हैं लोग! आवाज सुनकर समझता है बात, फिर अपने आप खोल देता है ढक्कन.

    यहां डस्टबिन से बातें करते हैं लोग! आवाज सुनकर समझता है बात, फिर अपने आप खोल देता है ढक्कन.

    डस्टबिन का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में ऐसी साधारण चीज की तस्वीर आती है, जिसमें कूड़ा डालने के बाद उसे सफाईकर्मी उठा ले जाते हैं। लेकिन तकनीक के इस दौर में अब डस्टबिन भी स्मार्ट हो रहे हैं। चीन से जुड़ी स्मार्ट टेक्नोलॉजी में ऐसे डस्टबिन का कॉन्सेप्ट सामने आया है, जो इंसान की आवाज को समझकर उसके निर्देश के मुताबिक काम कर सकता है।

    यानी अगर कोई व्यक्ति कूड़ा लेकर डस्टबिन के पास पहुंचे और उसे ढक्कन खोलने के लिए कहे, तो सिस्टम आवाज को पहचानकर ढक्कन खोलने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। यही वजह है कि स्मार्ट डस्टबिन का यह कॉन्सेप्ट लोगों के बीच काफी दिलचस्प बना हुआ है।

    आखिर स्मार्ट डस्टबिन में ऐसा क्या लगा होता है?

    स्मार्ट डस्टबिन सामान्य कूड़ेदान से काफी अलग होता है। इसमें कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक और तकनीकी उपकरण लगाए जा सकते हैं।

    इनमें माइक्रोफोन, सेंसर, कंट्रोल सिस्टम, मोटर और सॉफ्टवेयर जैसे हिस्से शामिल हो सकते हैं। जब कोई व्यक्ति डस्टबिन के पास बोलता है, तो माइक्रोफोन उसकी आवाज को कैप्चर करता है।

    इसके बाद सिस्टम आवाज में दिए गए निर्देश को समझने की कोशिश करता है। अगर कमांड ढक्कन खोलने की है, तो कंट्रोल यूनिट मोटर को सक्रिय कर सकती है। मोटर ढक्कन को ऊपर उठाती है और कचरा डालने के बाद ढक्कन दोबारा बंद हो सकता है।

    यानी डस्टबिन खुद से इंसानों की तरह नहीं सोचता, बल्कि कई तकनीकी सिस्टम मिलकर उसके निर्देशों को पूरा करते हैं।

    सिर्फ आवाज सुनना ही नहीं, कचरे को पहचानने की भी कोशिश

    स्मार्ट डस्टबिन की खासियत केवल वॉयस कमांड तक सीमित नहीं है। कुछ आधुनिक सिस्टम कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की दिशा में भी काम कर सकते हैं।

    कचरे को आमतौर पर रिसाइकिल होने वाली चीजों, खाने के कचरे और दूसरे सामान्य कचरे में अलग करना जरूरी होता है। ऐसे में कुछ स्मार्ट डस्टबिन में अलग-अलग कम्पार्टमेंट दिए जा सकते हैं और सेंसर या सॉफ्टवेयर की मदद से सही हिस्से का चुनाव किया जा सकता है।

    हालांकि हर स्मार्ट डस्टबिन में ये सभी सुविधाएं मौजूद हों, यह जरूरी नहीं है। किसी मॉडल में केवल ऑटोमैटिक ढक्कन हो सकता है, जबकि दूसरे में आवाज पहचानने, सेंसर या कचरे की पहचान जैसी अतिरिक्त सुविधाएं मिल सकती हैं।

    चीन में तेजी से बढ़ रहा स्मार्ट सिटी का कॉन्सेप्ट

    चीन में पिछले कुछ वर्षों में स्मार्ट सिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और रोबोटिक्स से जुड़ी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ा है।

    शहरी इलाकों में स्मार्ट कैमरे, ऑटोमेटेड मशीनें, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और AI आधारित सेवाओं का इस्तेमाल देखने को मिलता है। अब इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल कचरा प्रबंधन को बेहतर और ज्यादा ऑटोमेटेड बनाने की दिशा में भी किया जा रहा है।

    रोजमर्रा की चीजें भी बन रही हैं स्मार्ट

    स्मार्ट डस्टबिन का कॉन्सेप्ट यह दिखाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल सिर्फ मोबाइल फोन, चैटबॉट या कैमरा सिस्टम तक सीमित नहीं है।

    अब रोजमर्रा की बेहद साधारण चीजों में भी सेंसर, सॉफ्टवेयर और ऑटोमेशन जोड़े जा रहे हैं। आने वाले समय में कचरा प्रबंधन जैसे कामों में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल और बढ़ सकता है।

    हालांकि किसी खास स्मार्ट डस्टबिन की वास्तविक क्षमता उसके मॉडल और तकनीकी सिस्टम पर निर्भर करती है। सभी स्मार्ट डस्टबिन इंसानी बातचीत को पूरी तरह समझने या हर तरह के कचरे की पहचान करने में सक्षम हों, ऐसा जरूरी नहीं है।

     

     
  • इस मंदिर में स्टाम्प पेपर पर मनोकामना लिख टांगते हैं भक्त, मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं ये चीज

    इस मंदिर में स्टाम्प पेपर पर मनोकामना लिख टांगते हैं भक्त, मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं ये चीज

    Temples-of-India

    भारत को मदिरों और आश्रमों का देश कहा जाता है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक, पूरब से लेकर पश्चिम विविध प्रकार के देवता और उनके अनोखे मंदिर और उससे जुड़ी लाखों रहस्यमय कथा-कहानियां हैं, जहां के रीति-रिवाज और नियम भी अनूठे हैं। ऐसा ही एक मंदिर लोककथाओं और प्राकृतिक सुंदरता की नगरी अल्मोड़ा की घाटियों में है।

    चितई गोलू देवता मंदिर

    हिमालय की गोद में बसे इस मंदिर का नाम है चितई गोलू देवता मंदिर, जिसमें स्थानीय लोगों की जबरदस्त आस्था और विश्वास है। कुमाऊं क्षेत्र में चितई गोलू देवता को ‘न्याय का देवता और परम न्यायाधीश’ के रूप में इनकी पूजा की जाती हैं। कहते हैं, जब लोग हर जगह निराश हो जाते हैं, कोर्ट-कचहरी आदि से सब कुछ हार जाते हैं, तब लोग यहां आखिरी उम्मीद लेकर आते हैं।

    कौन थे चितई गोलू देवता?

    अल्मोड़ा के चंपावत (धूमाकोट) के इतिहासे के अनुसार, चितई गोलू देवता कत्यूरी राजवंश के राजकुमार थे, जो महादेव शिव के ‘गौर भैरव’ रूप के अवतार थे। उन्होंने न्यायप्रिय कत्यूरी राजा झाल राय की आठवीं रानी कालिंका के गर्भ से जन्म लिया था। लेकिन सात अन्य रानियों ने उसे षडयंत्र कर एक सन्दूक में बंद कर काली नदी की धारा में बहा दिया और राजा से कहा कि रानी ने पत्थर के सिलबट्टे को जन्म दिया है।

    मछुआरे ने किया पालन-पोषण

    नदी में बहता वह सन्दूक भाना नाम के मछुआरे को मिला, जिसने बालक का पालन-पोषण किया और नाम रखा गोलू। यह बालक विलक्षण था। बड़े होने पर एक दिन गोलू एक लकड़ी का घोड़ा लेकर राजा के घाट पर उसे पानी पिलाने पहुंचा। रानियों ने उपहास किया लकड़ी का घोड़ा पानी कैसे पी सकता है। तब गोलू ने पलट कर जवाब दिया, ‘जब एक रानी सिलबट्टे को जनम दे सकती है, तो लकड़ी घोड़ा पानी क्यों नहीं पी सकता है?’

    ऑन द स्पॉट निष्पक्ष न्याय

    जब यह बात राजा के पास पहुंची, तो राजा ने गहन जांच करवाई और अपनी भूल सुधारते हुए रानी कालिंका और उसके पुत्र गोलू को अपनाया। बाद में गोलू चंपावत के राजा बने और गोलू दरबार लगाकर लोगों को न्याय देते थे। कहते हैं, आज के फास्ट ट्रैक कोर्ट से अधिक फास्ट थे। वे ऑन द स्पॉट निष्पक्ष निर्णय करते थी और सही और सटीक न्याय देते थे। प्रजा-प्रेम और उनकी न्यायप्रियता से वे जन-जन के राजा बन गए और ‘न्याय के देवता’ के रूप में पूजे जानए लगे।

    क्या है स्टांप पर अर्जी लिखने का रहस्य

    कुमाऊं क्षेत्र के लोग गोलू देवता को अपना राजा और न्याय देने वाले देवता मानते हैं। कहते हैं, जब कोई आदमी अदालत का दरवाजा खट-खटा के परेशान और निराश हो जाता है, तो वह आखिरी उम्मीद लेकर इस ‘दिव्य न्यायालय’ में हाजिरी भरता है। मान्यता है कि लोगों की लिखित अर्जी सीधी के देवता का पहुंचती है। यह अर्जी स्टांप पेपर और सादे कागज पर भी लिखी जा सकती है।

    लाखों घंटियों का मंदिर

    चितई गोलू देवता का मंदिर का परिसर अर्जियों और घंटियों से भरा पड़ा है, जिसे आभार और न्याय की गूंज माना जाता है। मंदिर में प्रवेश करते ही छोटी-बड़ी लाखों घंटिया देख हृदय विस्मित हो जाता है। कहते हैं, ये घंटियां उन लोगों ने अर्पित की हैं, जिनकी अर्जियां और मनोकामनाएं पूरी हो गई थी।

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. 

  • सेहत का मतलब सिर्फ अच्छा खाना नहीं, हेल्दी रहने के लिए इन आदतों पर भी दें ध्यान..

    सेहत का मतलब सिर्फ अच्छा खाना नहीं, हेल्दी रहने के लिए इन आदतों पर भी दें ध्यान..

    सेहत का मतलब सिर्फ अच्छा खाना नहीं, हेल्दी रहने के लिए इन आदतों पर भी दें ध्यान..

    आज के समय में ज्यादातर लोग स्वस्थ रहने के लिए अपने खानपान पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं। फल, सब्जियां, प्रोटीन और साबुत अनाज जैसी चीजों को डाइट में शामिल करना अच्छी आदत है, लेकिन सिर्फ अच्छा खाना ही पूरी सेहत की गारंटी नहीं देता।

    एक स्वस्थ शरीर के लिए आपकी पूरी लाइफस्टाइल का संतुलित होना जरूरी है। रोजाना की शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, पानी पीने की आदत, तनाव को नियंत्रित करना और साफ-सफाई जैसी चीजें भी स्वास्थ्य पर असर डालती हैं।

    सिर्फ हेल्दी खाना काफी नहीं

    अगर कोई व्यक्ति पौष्टिक खाना खाता है, लेकिन दिनभर बैठा रहता है, नींद पूरी नहीं करता या लगातार तनाव में रहता है, तो उसकी लाइफस्टाइल को पूरी तरह हेल्दी नहीं कहा जा सकता।

    इसलिए अच्छी सेहत के लिए खानपान के साथ-साथ रोजमर्रा की आदतों में भी सुधार करना जरूरी है।

    रोजाना शरीर को एक्टिव रखें

    लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना शरीर के लिए अच्छा नहीं माना जाता। इसलिए अपनी क्षमता और दिनचर्या के अनुसार रोजाना कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए जरूर निकालें।

    आप तेज चाल से पैदल चल सकते हैं, योग कर सकते हैं, साइकिल चला सकते हैं या अपनी पसंद की कोई दूसरी एक्सरसाइज कर सकते हैं। नियमित रूप से एक्टिव रहने से शरीर को फिट रखने में मदद मिलती है।

    पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी

    शरीर के सामान्य कामकाज के लिए पानी बेहद जरूरी है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की आदत बनानी चाहिए।

    हालांकि, हर व्यक्ति की पानी की जरूरत एक जैसी नहीं होती। मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य जैसी परिस्थितियों के अनुसार इसकी जरूरत बदल सकती है। इसलिए पूरे दिन नियमित रूप से पानी लेते रहना बेहतर आदत है।

    नींद से समझौता न करें

    हेल्दी लाइफस्टाइल में नींद की भी बड़ी भूमिका होती है। देर रात तक मोबाइल या दूसरी स्क्रीन देखते रहना, रोज अलग-अलग समय पर सोना और लगातार कम नींद लेना आपकी दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है।

    कोशिश करें कि सोने और जागने का समय लगभग तय रहे। रात में सोने से पहले मोबाइल, टीवी या दूसरी स्क्रीन का इस्तेमाल कम करने से भी नींद की आदत बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

    तनाव को नियंत्रित करना सीखें

    लगातार तनाव में रहना भी अच्छी लाइफस्टाइल का हिस्सा नहीं है। इसलिए दिनभर की व्यस्तता के बीच अपने लिए थोड़ा समय निकालना जरूरी है।

    पैदल चलना, योग, ध्यान, पसंदीदा गतिविधियां करना या कुछ समय आराम करना तनाव को मैनेज करने में मदद कर सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि भी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है।

    साफ-सफाई और फूड हाइजीन का रखें ध्यान

    पौष्टिक खाना तभी फायदेमंद हो सकता है जब उसे साफ-सफाई के साथ तैयार और सुरक्षित तरीके से रखा गया हो।

    खाना बनाने से पहले हाथ धोना, कच्चे और पके भोजन को अलग रखना, भोजन को अच्छी तरह पकाना और साफ बर्तनों का इस्तेमाल करना जरूरी है। खाने की गुणवत्ता के साथ यह भी मायने रखता है कि भोजन किस तरह तैयार और स्टोर किया गया है।

    हेल्दी रहने का मतलब सिर्फ वजन कम करना नहीं

    अच्छी सेहत का मतलब केवल वजन कम करना या पतला दिखना नहीं है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित खानपान के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, सही मात्रा में पानी, तनाव पर नियंत्रण और साफ-सफाई जैसी आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

    इसलिए अगर आप अपनी सेहत बेहतर रखना चाहते हैं, तो केवल डाइट बदलने के बजाय अपनी पूरी दिनचर्या को धीरे-धीरे बेहतर बनाने की कोशिश करें।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या के संबंध में डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।