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  • 200 साल बाद घर जन्मी बिटिया, रथ पर सवार होकर अस्पताल से घर पहुंची; 5 पीढ़ियों से था इंतजार

    200 साल बाद घर जन्मी बिटिया, रथ पर सवार होकर अस्पताल से घर पहुंची; 5 पीढ़ियों से था इंतजार

    200 साल बाद घर जन्मी बिटिया, रथ पर सवार होकर अस्पताल से घर पहुंची; 5 पीढ़ियों से था इंतजार

    महाराष्ट्र के बीड जिले से एक दिल छू लेने वाली एक अनोखी तस्वीर सामने आई है. जिले के परली के रहने वाले दहीफले परिवार में करीब 200 साल और पांच पीढ़ियों के लंबे इंतजार के बाद एक बेटी का जन्म हुआ है. दो सदियों बाद घर में कन्या पैदा होने की इस खुशी को परिवार ने एक राजकुमारी के स्वागत की तरह मनाया. अस्पताल से छुट्टी के बाद नवजात बच्ची और उसकी मां को फूलों से सजे एक भव्य रथ पर बैठाकर पूरे गाजे-बाजे के साथ घर लाया गया.

    ढोल-ताशे और शाही अंदाज में स्वागत

    सौभाग्यवती कल्पना ऋषिकेश दहीफले ने एक बच्ची को जन्म दिया. बच्ची का नाम परिवार ने गार्गी रखा है. परिवार के मुताबिक, उनके खानदान में पिछली पांच पीढ़ियों से किसी बेटी का जन्म नहीं हुआ था. अस्पताल से जब मां और बच्ची को छुट्टी मिली, तो परिवार ने फूलों का रथ तैयार करवाया. इसके साथ ही ढोल, ताशे बजाते हुए जुलूस निकाला गया.

    क्या बोला परिवार?

    इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, गार्गी के दादा लिंबाजी दहीफले पोती के जन्म की जानकारी मिलने के बाद बेहद भावुक हो गए. उन्होंने कहा, ‘परिवार में बेटी का जन्म होना बड़े सौभाग्य की बात है. इतने वर्षों से हमारे मन में घर में बेटी न होने का जो मलाल था, वह आज दूर हो गया है.’

    वहीं, बच्ची की दादी सुरेखा दहीफले ने खुशी जताते हुए कहा कि हम बेहद खुश हैं कि आज हमारे घर साक्षात लक्ष्मी पधारी हैं.

    गार्गी के पिता ऋषिकेश ने कहा, ‘अक्सर लोग बेटे की चाहत रखते हैं, लेकिन बेटी के पिता बनने का एहसास और उसकी खुशी सबसे अलग होती है. बेटियां अपने पिता से ज्यादा जुड़ी होती हैं. हम अपनी बेटी को एक फूल की तरह नाजों से पालेंगे.’

  • कोई भी इंसान पूरी तरह से परफेक्ट नहीं होता! कामयाबी पानी है तो तुरंत छोड़ दें ये आदतें, सफलता चूमेगी आपके कदम

    कोई भी इंसान पूरी तरह से परफेक्ट नहीं होता! कामयाबी पानी है तो तुरंत छोड़ दें ये आदतें, सफलता चूमेगी आपके कदम

    Success Tips: कोई भी इंसान पूरी तरह से परफेक्ट नहीं होता! कामयाबी पानी है तो तुरंत छोड़ दें ये आदतें, सफलता चूमेगी आपके कदम

    कई भी व्यक्ति सफल यूं ही नहीं हो जाता है. वह सफलता पानी के लिए कड़ी मेहनत करता है. चूंकि कोई भी व्यक्ति पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता है, ऐसे सफल होने के लिए व्यक्ति को अपनी बुरी आदतों को त्याग करना पड़ता है. यदि आप भी जीवन में सफल होना चाह रहे हैं तो हम आपको बता रहे हैं कि आपको तुरंत अपनी किन-किन आदतों को छोड़ देनी चाहिए. आपको मालूम हो कि कई बार हम अपनी कुछ आदतों की वजह से लक्ष्य पाने से पीछे रह जाते हैं. आपको यह मालूम होना चाहिए कि सिर्फ मेहनत ही नहीं बल्कि मानसिक तौर पर मजबूत रहने से सफलता आपके कदम चूमेगी.

    1. सही प्लान बनाएं कई बार हम अपने मन में यह सोच तो लेते हैं कि जीवन में सफल होने के लिए क्या करना है लेकिन इसके लिए कोई ठोस रणनीति नहीं बनाते हैं. इसके चलते हम कड़ी मेहनत करने पर भी सफल नहीं हो पाते हैं. यदि जीवन में सफल होना है, लक्ष्य को पाना है तो एक बेहतरीन प्लान बनाकर काम करना होगा. ऐसे में किसी भी काम को करने से पहले उसके बारे में ए टू जे जानकारी एकत्र कर लेनी चाहिए. फिर एक समय सीमा तय कर पूरी ईमानदारी से अपने लक्ष्य को पाने के लिए जुट जाना चाहिए. ऐसा करने से सफलता जरूर कदम चूमेगी.

    2. कल पर न टालें कोई भी काम यदि आप जीवन में सफल होना चाहते हैं तो किसी भी काम को कल पर न टालें. आप कोशिश करें हर दिन छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं और उन्हें पूरा करके ही दम लें. आपको मालूम हो कि कल पर काम टालने के कारण काम का बोझ इतना बढ़ जाता है कि फिर वह कभी पूरा ही नहीं होता है. आपको काम को टालने की आदत हमें लक्ष्य से बहुत दूर ले जाती है. ऐसे में किसी भी काम को टालने की बजाय उसे तुरंत करने की आदत डालें. आपको मालूम हो कि जो लोग सही समय का इंतजार किए बिना अपना काम करते हैं, ऐसे लोग जल्द ही सफलता प्राप्त कर लेते हैं.

    3. समय-समय पर काम की समीक्षा करते रहें यदि आपने जीवन में कोई लक्ष्य बना लिया है तो उसको प्राप्त करने के लिए जी जान से तुरंत जुट जाइए. इसके साथ ही अपने काम की समय-समय पर समीक्षा करते रहना चाहिए. इससे आपको पता चलेगा कि आप लक्ष्य की प्राप्ति में सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या नहीं. कई बार ऐसा होता है कि हम अपना लक्ष्य तो बना लेते हैं लेकिन लक्ष्य के प्रति हमारी कोई दिलचस्पी नहीं रहती है. अपने काम की समीक्षा करते रहने से यह पता चलता है कि कहीं हम अपने लक्ष्य से भटक तो नहीं रहे हैं.

    4. नकारात्मक नहीं सकारात्मक सोचें कई बार जब हमें किसी काम में मनचाहा परिणाम नहीं मिल पाता है तो हम चीजों को लेकर नकारात्मक हो जाते हैं. ये हमारी सोच का हिस्सा कब बन जाता है इसका हमें अंदाजा ही नहीं रहता है. ऐसे में हमेशा नकारात्मक नहीं सकारात्मक सोचें. सफलात अवश्य कदम चूमेगी.

    5. हर चीज में परफेक्ट बनने की चाहत छोड़ दें यह ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति हर चीज में परफेक्ट नहीं होता है. हर चीज में परफेक्ट बनने की चाहत हमें लाभ के बजाय हानि पहुंचाती है. ऐसे में हमें किसी दूसरे से अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए. बस कोशिश यह रहनी चाहिए कि किस तरह से हम अपने आप को बेहतर बनाएं और अपने लक्ष्य को प्राप्त करें.

    6. असफल होने पर हार नहीं मानें यदि आप एक-दो बार असफल होने पर हार मान लेते हैं तो ये करना तुरंत छोड़ दें. आप अपने फेलियर को कभी भी अपने रास्ते की रुकावट नहीं बनने दें. अपनी गलतियों से सीख लें और सफल होने के लिए पूरी मेहनत से फिर जुट जाएं. सफलता आपके कदम जरूर चूमेगी.

  • गणेश जी ने बिना दौड़े जीत ली थी ब्रह्मांड की रेस, जानें क्या है जीवन का असली तीर्थ..

    गणेश जी ने बिना दौड़े जीत ली थी ब्रह्मांड की रेस, जानें क्या है जीवन का असली तीर्थ..

    GANESH-JI

    Ganesha Story: भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था। वे हर मांगलिक कार्य और पूजा-पाठ में सभी देवताओं से सबसे पहले पूजे और आह्वान किए जाते हैं, क्योंकि वे देवों में ‘प्रथम पूज्य’ हैं। उनके अग्रपूज्य या प्रथम पूज्य बनने की कथा बहुत रोचक, शिक्षाप्रद और मोटिवेशनल है। इसके उन्हें सभी देवताओं के बीच ब्रह्मांड की रेस जीतनी पड़ी थी और उन्होंने बताया की जीवन का असली तीर्थ क्या है। आइए जानते हैं, यह पूरी कथा…

    देवों में प्रथम पूजा का विवाद

    एक बार देवलोक में इंद्र समेत सभी देवताओं में यह विवाद शुरू हो गया कि देवताओं में सबसे पहले पूजा किसकी होगी। अग्नि, वायु, सूर्य, चंद्रमा सहित सभी देवताओं ने अपने अपने महत्व का बखान किया कि क्यों उनकी पूजा सबसे पहले होनी चाहिए। हर देवता स्वयं को श्रेष्ठ और प्रथम पूज्य होने का दावेदार बता रहे थे। बहुत विकट स्थिति थी।

    ब्रह्मांड के 3 चक्कर

    कहते जब विवाद का कोई हल नहीं निकला, तो वे सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी के पास पहुंचे। ब्रह्मा जी ने ही ब्रह्मांड और संसार के नियम बनाए थे। उन्होंने देवताओं से कहा कि आप सभी देवता अपने वाहनों पर सवार होकर इस पूरे ब्रह्मांड का 3 चक्कर लगाएं। जो देव सबसे पहले यह काम पूरा कर लेंगे, उसे देवों में अग्रगण्य और प्रथम पूज्य का अधिकार प्राप्त होगा।

    शुरू हुई देव प्रतियोगिता

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रथम पूज्य प्रतियोगिता की यह चुनौती प्राप्त होते ही सभी देवता आपने वाहनों और सवारियों पर ब्रह्मांड की दौड़ पर निकल पड़े। यह सृष्टि की पहली प्रतियोगिता थी। इंद्र अपने ऐरावत पर, वायुदेव अपने हिरण पर, कार्तिकेय अपने मोर और दूसरे देव अपनी-अपनी सवारियों पर भागे जा रहे थे।

    गणेश जी ने लगाई बुद्धि

    इधर गणेश जी के समक्ष भारी संकट उपस्थित हो गया। उनके पास मंदगामी छोटा मूषक वाहन था। दूसरे उनके शरीर का वजन अत्यधिक था। वे जानते थे, ब्रह्मांड की इस रेस में वे देवों पराजित नहीं कर पाएंगे। वे परमशास्त्र ज्ञानी थे। उन्होंने अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और विवेक का सहारा लिया।

    माता-पिता की परिक्रमा

    गणेश जी ने निवेदन कर अपने माता-पिता यानी माता पार्वती और पिता महादेव गणेश को आदरपूर्वक एक आसन पर बैठाया और वे अपने वाहन मूषकराज पर बैठ गए। और इसके बाद उन्होंने श्रद्धापूर्वक 3 चक्कर लगाकर पार्वती जी और शिव जी को नमन किया।

    देवताओं ने की आपत्ति

    पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, जब सभी देवगण पूरे ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर वापस लौटे तो थके-हारे देवताओं को गणेश जी वहां पहले से उपस्थित मिले। ब्रह्मा जी हर बात जानते थे। उन्होंने गणेश को विजेता घोषित कर दिया। इसपर देवताओं ने काफी आपत्ति जताई, विशेषकर कार्तिकेय जी ने जिन्होंने ब्रह्मांड के 3 चक्कर सबसे पहले लगाए थे।

    ब्रह्मा जी का न्याय

    देवताओं पर आपत्ति पर ब्रह्मा जी ने शास्त्रों का प्रमाण देते हुए कहा कि जो संतान अपने माता-पिता सेवा, पूजा और परिक्रमा करते हैं, उसे पूरे ब्रह्मांड और पृथ्वी की परिक्रमा का फल स्वतः मिल जाता है। माता-पिता की सेवा और पूजा ही असली तीर्थ है। इस अभिभाषण और तर्क के आगे सभी देवताओं का सिर झुक गया। तभी से गणेश जी हिन्दू संस्कृति के देव समूह में ‘प्रथम पूज्य देव’ हैं।

  • बड़ी आंत के कैंसर के क्या लक्षण होते हैं? ये 2 Symptoms दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी..

    बड़ी आंत के कैंसर के क्या लक्षण होते हैं? ये 2 Symptoms दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी..

    बड़ी आंत के कैंसर के क्या लक्षण होते हैं? ये 2 Symptoms दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी..

    Badi Aant Ka Cancer: बाउल कैंसर बड़ी आंत से रेक्टम तक के हिस्से में होता है. बड़ी आंत पाचन तंत्र का वो हिस्सा है जो भोजन से वॉटर एब्जॉर्ब करता है और शरीर से वेस्ट पदार्थ को बाहर निकालता है. बाउल कैंसर कितना गंभीर है यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह कैंसर कितना बड़ा है, कहां तक फैल गया है और मरीज की सेहत कैसी है. ऐसे में इस कैंसर के लक्षणों को जल्द से जल्द पहचानना और इलाज शुरू करना जरूरी होता है. नैशनल हेल्थ सर्विस (NHS) यूके ने बाउल कैंसर के ऐसे लक्षणों का जिक्र किया है जिन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए.

    बाउल कैंसर के क्या लक्षण होते हैं | Signs And Symptoms Of Bowel Cancer

    बाउल मूवमेंट्स में बदलाव होना, जैसे मल का अलग दिखना, लंबे समय तक डायरिया या कब्ज होना.

    अचानक से सामान्य से कम या ज्यादा बार मलत्याग करना भी आंत की किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है

    मल में खून नजर आना या मल का रंग लाल या काला दिखना

    मलद्वार से खून निकलना

    मलत्याग करने के तुरंत बाद ऐसा महसूस होना जैसे फिर से मलत्याग करने की जरूरत है

    पेट में दर्द होना

    पेट में गांठ बनना

    हमेशा पेट फूला हुआ रहना

    बिना कोशिश किए ही वजन का कम होना

    थका हुआ महसूस करना और सांस फूलना. यह बाउल कैंसर के कारण होने वाले अनीमिया का लक्षण हो सकता है.

    ये 2 लक्षण दिखें तो डॉक्टर से तुरंत मिलें

    अगर मल का रंग काला या गहरा लाल दिखे या फिर खून वाले दस्त होने लगें.

    अगर मलद्वार यानी रेक्टम से खून निकलने लगे या मल में बड़े खून के थक्के नजर आएं.

    इस बात का रखें खास ख्याल

    मल में खून या अन्य लक्षण किसी और समस्या के चलते भी हो सकते हैं. जब तक यह कंफर्म ना हो कि आपको बाउल कैंसर है पैनिक ना करें. डॉक्टर से मिलें और जांच कराकर समस्या की जड़ तक जाएं.

    बाउल कैंसर होने के क्या कारण होते हैं

    बाउल कैंसर होने के सटीक कारणों (Bowel Cancer Causes) का पता नहीं है लेकिन यह जेनेटिक चेंजेस, लाइफस्टाइल और एन्वायरमेंटल फैक्टर्स के चलते हो सकता है. इसके अलावा कुछ ऐसी कंडीशंस हैं जो आपको बाउल कैंसर का मरीज बना सकती हैं.

    जिन लोगों की उम्र 50 वर्ष से ज्यादा है, जो धूम्रपान करते हैं, जो मोटापे के शिकार हैं, जिनके करीबी रिश्तेदार को बाउल कैंसर हुआ है, जिन्हें बाउल पॉलीप्स की दिक्कत हो, जो इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज से पीड़ित हों उनमें बाउल कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें.

  • वराह जयंती कब है? भगवान विष्णु ने क्यों लिया जंगली सूअर का अवतार? जानें महत्व और पूजा विधि

    वराह जयंती कब है? भगवान विष्णु ने क्यों लिया जंगली सूअर का अवतार? जानें महत्व और पूजा विधि

    वराह जयंती कब है? भगवान विष्णु ने क्यों लिया जंगली सूअर का अवतार? जानें महत्व और पूजा विधि

    Varah Jayanti 2026: हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु ने पाप का नाश करने और धर्म की संस्थापना के लिए बहुत अनोखे-अनोखे काम किए और ऐसे-ऐसे अवतार लिए हैं, जिनके बारे में सोचकर हैरत होती है। जरा कल्पना कीजिए, पूरी सृष्टि जलमग्न हो जाती और पृथ्वी का अस्तित्व खतरे में होता है। तब भगवान विष्णु एक बेहद आक्रामक और अनूठा रूप धारण करते हैं।

    भगवान विष्णु का वराह अवतार एक ऐसा ही अवतार है, जो रहस्यमय और आश्चर्यजनक है। वराह का अर्थ होता है- ‘जंगली सूअर’। इस अवतार में भगवान विष्णु की अदम्य शक्ति और इच्छा सामने उभर कर आती है, जिसमें आक्रामकता के साथ संरक्षण का भाव है। आइए जानते हैं, वर्ष 2026 में उनके इस अवतार की जयंती कब है और पूजा विधि और अनुष्ठान क्या हैं?

    वराह जयंती 2026 कब है?

    वराह जयंती हर साल भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल यह तिथि रविवार 13 सितंबर 2026 को पड़ रही है। पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि की शुरुआत 13 तारीख की सुबह में 7 बजकर 8 मिनट पर हो रही है और इस तिथि का समापन 14 सितंबर को 7 बजकर 8 मिनट पर हो रही है।

    पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: द्रिक पंचांग के अनुसार, भगवान विष्णु के वराह रूप की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त मध्याह्न यानी दोपहर में है, जो 1 बजकर 30 मिनट से अपराह्न के 4 बजे तक है।

    भगवान ने क्यों लिया वराह अवतार?

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिरण्याक्ष नामक असुर ने अपनी प्रचंड शक्ति से तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था और देवताओं को भी स्वर्ग से निकाल दिया था। केवल इतना ही नहीं, उसने पृथ्वी को भी चुरा लिया था और उसे समुद्र के गर्भ में छिपा दिया था। इससे पूरी धरती पर भी त्राहि-त्राहि मची हुई थी। सृष्टि का संतुलन बिगड़ गया था।

    तब देवताओं के आह्वान पर भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष के अंत के लिए वराह अवतार लिया था। कहते हैं, हिरण्याक्ष ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा था कि वह किसी ज्ञात जीवों और पशुओं से नहीं मारा जाएगा, लेकिन वह वराह यानी जंगली शूकर या सूअर का नाम लेना भूल गया था। इसी का लाभ लेकर विष्णु जी ने एक विशाल और भयंकर वराह का अवतार लिया और हिरण्याक्ष का अंत कर पृथ्वी की रक्षा की।

    वराह जयंती पूजा विधि

    • वराह जयंती के दिन यानी 13 सितंबर 2026 को सुबह जल्दी उठकर स्नान-आचमन कर व्रत का संकल्प लें.
    • पूजा के समय जल से भरे एक कलश पर भगवान वराह की मूर्ति या फोटो स्थापित करें.
    • फिर, पंचामृत से वराह रूप भगवान विष्णु का अभिषेक करें.
    • भगवान को पीले वस्त्र, पीले पुष्प, मिष्टान्न और नैवेद्य चढ़ाएं.
    • पूजा के दौरान,’ॐ वाराहाय नमः’ मंत्र का जाप करें.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. 

  • हर 30-60 मिनट में उठना क्यों जरूरी? लंबे समय तक बैठने पर शरीर में क्या होता है, NIH की रिसर्च से जानिए..?

    हर 30-60 मिनट में उठना क्यों जरूरी? लंबे समय तक बैठने पर शरीर में क्या होता है, NIH की रिसर्च से जानिए..?

    हर 30-60 मिनट में उठना क्यों जरूरी? लंबे समय तक बैठने पर शरीर में क्या होता है, NIH की रिसर्च से जानिए..?

    आजकल ऑफिस का काम, पढ़ाई, मोबाइल और टीवी की वजह से कई लोग दिन का बड़ा हिस्सा बैठे-बैठे गुजार देते हैं. समस्या सिर्फ यह नहीं है कि हम कितना व्यायाम करते हैं, बल्कि यह भी है कि हम लगातार कितनी देर तक बैठे रहते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन और नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कोई लंबे वक्त तक बैठा रहता है तो उसे कई तरह की दिक्कतें होने लगती हैं. रिसर्च में बताया गया है कि दिल की बीमारी, टाइप 2 डायबिटीज और हेल्थ से जुड़ी परेशानियां होने लगती हैं. लगातार बैठे रहने से शरीर का सर्कुलेशन कम होने लगता है और फैट जमने लगता है. इसलिए डॉक्टर्स हर 30 मिनट में उठने की सलाह देते हैं.

    लंबे समय तक लगातार बैठने पर शरीर में क्या होता है?

    जब हम लंबे समय तक बिना उठे बैठे रहते हैं तो पैरों और शरीर का मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है. फिजिकल एक्टिविटी न होने की वजह से फैट और कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है. इससे ब्लड सर्कुलेशन इफेक्ट होता है, जिससे आगे चलकर दिल की बीमारी होने का खतरा दोगुना बढ़ जाता है.

    ब्लड शुगर पर असर होना

    रिसर्च में पाया गया है कि लंबे समय तक बैठने और हर 30 मिनट में उठने का तरीका अलग अलग था. लगातार बैठने की वजह से भूख कम लगती है और वजन बढ़ने लगता है. इससे ब्लड शुगर का लेवल ऊपर नीचे होता रहता है.

    पैरों के ब्लड सर्कुलेशन में बदलाव

    लगातार बैठे रहने से पैरों का ब्लड सर्कुलेशन कम हो सकता है. रिसर्च में पाया गया है कि 4 घंटे लगातार बैठने के दौरान पैरों की सुपरफिशियल फेमोरल आर्टरी में ब्लड सर्कुलेशन कम हुआ, जबकि ब्रेक लेने वालों में कमी देखी गई.

    कितनी देर में उठना चाहिए?

    हर 60 मिनट में उठने से कई तरह के फायदे मिल सकते हैं. यह हर इंसान के ब्रेक लेने का तरीका अलग हो सकता है. इसलिए वक्त 60 से बढ़कर ज्यादा भी हो सकता है. बस आपको लगातार कुछ घंटों तक नहीं बैठना है. उठने के लिए आप चाय या पानी पीने के लिए ब्रेक ले सकते हैं. बाहर जाकर कुछ खा सकते हैं या अपने दोस्त के साथ टहलने का प्लान बना सकते हैं.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें

  • भारत के इन मंदिरों में कंकड़-पत्थर अर्पित करने से पूरा होता अपना घर पाने का सपना..

    भारत के इन मंदिरों में कंकड़-पत्थर अर्पित करने से पूरा होता अपना घर पाने का सपना..

    भारत के इन मंदिरों में कंकड़-पत्थर अर्पित करने से पूरा होता अपना घर पाने का सपना..

    भारत में खुद का आशियाना बनाना हर व्यक्ति का एक सबसे बड़ा सपना होता है. देश में कुछ ऐसे अनोखे और पवित्र धार्मिक स्थल भी हैं, जहां ‘घर की मन्नत’ के लिए भारी भरकम दान या महंगे भोग की जरूरत नहीं पड़ती है? यहां सिर्फ कंकड़ पत्थर अर्पित करने से ही खुद के घर का सपना पूरा हो जाता है. आइए जानते हैं, इस देवस्थलों के बारे में विस्तार से

    Temples of India: आज की तेज-रफ्तार जिंदगी में भी परिवार और घर वह जगह है, जहां सुकून के दो पल मिल जाते हैं. भारतीय परिवेश में अपना घर होना हर व्यक्ति का सपना है. हर कोई चाहता है कि उसका खुद का अपना आशियाना हो, जहां वे सपरिवार रह सकें. इसके लोग अपनी जिंदगी भर की कमाई लगा देते हैं. लेकिन आप नहीं जानते होंगे कि भारत की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत में कुछ स्थल ऐसे हैं, जहां ‘ईश्वर की इच्छा’ मायने रखती है. आइए यहां जानते हैं, देश के उन तीन मंदिरों के बारे में जहां जहां भारी-भरकम दान, प्रसाद या महंगे भोग नहीं, बल्कि स्वयं का घर बनाने का सपना कंकड़-पत्थर अर्पित करने से पूरा होता है. आइए जानते हैं, इन विशेष मंदिरों से जुड़ी प्रथाएं…

    बंगारु तिरुपति मंदिर

    यह मंदिर कर्नाटक के कोलार जिले में में एक पहाड़ी पर स्थित है. इसे ‘चिन्न तिरुपति’ भी कहते हैं, जिसका अर्थ है ‘छोटे तिरुपति’. भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित इस मंदिर में भक्त और श्रद्धालु मंदिर परिसर में छोटे-छोटे कंकड़-पत्थर चुनकर एक निश्चित जगह पर सजाकर कर रखते हैं. कहते हैं, श्रद्धा और विश्वासपूर्वक की गई इस प्रक्रिया से अपना खुद का पक्का मकान पाने का सपना पूरा होता है.

    मां महामाया मंदिर

    मां महामाया मंदिर काफी एतिहासिक मंदिर है, जो छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के रतनपुर में स्थित है. इसे एक शक्तिपीठ भी माना जाता है. यहां 3 देवियों के रूप वाली मा दुर्गा की पूजा होती है. यहां की प्रथा बेहद खास है. कहते हैं कि जो भक्त-श्रद्धालु यहां की जमीन पर बिखरे पत्थरों को इकट्ठा कर 3 से 5 पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर सटीकता से संतुलन बनाकर एक घर या छोटी मीनार बना लेते हैं. उनका अपना घर पाने का सपना पूरा हो जाता है.

    हिमाचल प्रदेश के देवस्थान

    हिमाचल प्रदेश की कुल्लू, शिमला, मंडी आदि जगहों पर स्थापित हिडिंबा देवी मंदिर, बिजली महादेव जैसे स्थानीय मंदिरों और देवस्थलों में एक प्रथा काफी लोकप्रिय है. वह है, पहाड़ों में मिलने वाले चपटे पत्थरों से एक छोटा-सा कमरा या दो-तीन मंजिला घर तैयार करना. कहते हैं आस्था और विश्वास से बनाई गई पत्थर की यह आकृति अपने घर के सपने को जल्द पूरा करती है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. .

  • क्या नॉन शुगर स्वीटनर्स से डायबिटीज का खतरा कम होता है? जानिए WHO की गाइडलाइंस क्या कहती हैं

    क्या नॉन शुगर स्वीटनर्स से डायबिटीज का खतरा कम होता है? जानिए WHO की गाइडलाइंस क्या कहती हैं

    क्या नॉन शुगर स्वीटनर्स से डायबिटीज का खतरा कम होता है? जानिए WHO की गाइडलाइंस क्या कहती हैं

    Non Sugar Sweeteners And Diabetes: खानपान में चीनी को कम करने के लिए लेकिन फिर भी मीठा खाने की तलब के चलते नॉन शुगर स्वीटनर्स जैसे नेचुरल स्वीटनर्स और आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन, क्या सचमुच ये स्वीटनर्स हेल्दी होते हैं और क्या इनसे डायबिटीज का खतरा कम होता है? इसका जवाब दे रहा है विश्व स्वास्थ्य संगंठन (WHO). WHO से जानिए नॉन शुगर स्वीटनर्स का वेट कंट्रोल करने से लेकर डायबिटीज तक पर क्या असर होता है.

    नॉन शुगर स्वीटनर्स और डायबिटीज

    WHO का कहना है कि नॉन शुगर स्वीटनर्स (NSS) टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) के खतरे को बढ़ा सकते हैं. डायबिटीज के मरीजों के लिए WHO की सलाह है कि वे डायबिटीज को बिना नॉन शुगर स्वीटनर्स का सेवन किए ही मैनेज कर सकते हैं.

    नॉन शुगर स्वीटनर्स के बारे में क्या कहता है WHO

    नॉन शुगर स्वीटनर्स लॉन्ग-टर्म वेट कंट्रोल में मदद नहीं करता है.

    आप नॉन-शुगर स्वीटनर्स का सेवन किए बिना ही खानपान से मिठास को कम करके भी शुगर का सेवन कंट्रोल कर सकते हैं

    नेचुरल शुगर स्वीटनर्स आर्टिफिशियल शुगर स्वीटनर्स से बेहतर नहीं होते हैं.

    डाइट में कितनी होनी चाहिए शुगर

    खानपान में कितनी शुगर लें और शुगर के सेवन में किन बातों का ध्यान रखें इसपर डबल्यूएचओ ने विशेष गाइडलाइंस जारी की हैं –

    फ्री शुगर्स का सेवन रोज के डेली एनर्जी इंटेक का 10 प्रतिशत ही होना चाहिए जोकि 50 ग्राम के करीब है. अगर शुगर को डाइट में 5% तक ही रखा जाए तो इससे सेहत को एक्स्ट्रा फायदे मिलते हैं.

    फ्री शुगर के सेवन से खासतौर से परहेज करना चाहिए. फ्री शुगर यानी सुक्रोज, फ्रुक्टोज और ग्लूकोज. इन्हें खाना या ड्रिंक्स बनाते हुए डाला जाता है. शहद, शुगर सिरप, फलों के जूस और फलों के जूस के कॉन्सन्ट्रेट्स में शुगर नेचुरली होती है.

    अगर फ्री शुगर के सेवन से बचना है तो नॉन शुगर का सेवन किए बिना इसे अपनी डाइट से हटाएं.

    ज्यादा शुगर खाने से क्या होता है

    अगर खानपान में जरूरत से ज्यादा शुगर शामिल की जाए तो इससे लॉन्ग टर्म हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं, जैसे वजन बढ़ना, टाइप 2 डायबिटीज और दिल की बीमारियां. इससे एनर्जी स्पाइक और एनर्जी क्रैश हो सकता है. ब्लड शुगर बढ़ना और एकदम से गिर जाना समस्या का सबब बन जाता है. डाइजेस्टिव सिस्टम पर भी इसका बुरा असर दिखता है और ज्यादा स्किन ब्रेकआउट्स हो सकते हैं.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें.

  • गुरुग्राम में कामवाली बाई निकली मालकिन से ज्यादा अमीर! महीने में कमाती है ₹60,000, बेटी पढ़ रही बड़े स्कूल में;

    गुरुग्राम में कामवाली बाई निकली मालकिन से ज्यादा अमीर! महीने में कमाती है ₹60,000, बेटी पढ़ रही बड़े स्कूल में;

    गुरुग्राम में कामवाली बाई निकली मालकिन से ज्यादा अमीर! महीने में कमाती है ₹60,000, बेटी पढ़ रही बड़े स्कूल में;

    गुरुग्राम से एक ऐसी दिलचस्प कहानी सामने आई है, जिसे पढ़कर बड़े-बड़े ऑफिस वाले भी सोचने पर मजबूर हो गए हैं. यहां एक घर में काम करने वाली महिला हर महीने 60 हजार रुपए कमा रही है. ये खुलासा गुरुग्राम के रहने वाले शिव मित्तल ने किया है. उन्होंने लिंक्डइन पर अपनी पोस्ट में बताया कि उनकी हाउस हेल्प ने उन्हें पैसों का असली मतलब समझा दिया. उनकी पोस्ट अब खूब वायरल हो रही है.

    कैसे करती है इतनी कमाई?

    शिव मित्तल ने बताया कि वो महिला दिन में 5 से 6 घरों में काम करती है. महीने में सिर्फ 3 से 4 दिन की छुट्टी लेती है. इसी मेहनत से वो हर महीने करीब 60 हजार रुपए कमा लेती है.

    पैसे को करती है ऐसे मैनेज

    वायरल पोस्ट के मुताबिक, कामवाली बाई 60 हजार में से 10 हजार रुपए किराए पर देती है. वह अपनी बेटी को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रही है. इसके अलावा उसने अपने गांव में 6 लाख की जमीन ली है, जिसकी EMI भी वो इसी कमाई से भर रही है.

    बड़े-बड़े प्रोफेशनल्स फेल!

    शिव मित्तल ने लिखा, हम लोग महंगे फोन, कार और ब्रांडेड कपड़ों के लिए EMI भरते रहते हैं. वहीं इस महिला की कोई फिजूलखर्ची नहीं है. न PF है, न इंश्योरेंस, फिर भी उसे पता है कि पैसा कहां लगाना है. उसका एक ही सपना है, बस बेटी का भविष्य सुरक्षित करना.

    इस पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. कई लोग बोल रहे हैं कि ये महिला तो हमसे ज्यादा समझदार है, हम दिखावे में पैसा उड़ाते हैं. वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि कॉर्पोरेट नौकरी जैसी मेडिकल सिक्योरिटी इन मेहनतकश लोगों के पास नहीं होती, एक बीमारी इनकी सारी बचत खा जाएगी, इसलिए दोनों की तुलना करना पूरी तरह सही नहीं है.

  • घर में ऐसे लगाएं एलोवेरा का पौधा, हमेशा मिलेगा ताजा जेल, जानें सही देखभाल का तरीका.

    घर में ऐसे लगाएं एलोवेरा का पौधा, हमेशा मिलेगा ताजा जेल, जानें सही देखभाल का तरीका.

    घर में ऐसे लगाएं एलोवेरा का पौधा, हमेशा मिलेगा ताजा जेल, जानें सही देखभाल का तरीका.

    एलोवेरा एक ऐसा पौधा है जिसे घर में आसानी से उगाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल कई तरह के कॉस्मेटिक और घरेलू उत्पादों में किया जाता है। एलोवेरा का पौधा देखने में भी आकर्षक लगता है और इसकी पत्तियों में मौजूद जेल का इस्तेमाल त्वचा और बालों की देखभाल के लिए किया जाता है।

    अगर आप घर पर एलोवेरा का पौधा लगाना चाहते हैं तो इसके लिए बहुत ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती। बस मिट्टी, गमले और पानी की सही व्यवस्था का ध्यान रखना जरूरी है।

    कब लगाएं एलोवेरा का पौधा?

    एलोवेरा गर्म मौसम में अच्छी तरह बढ़ता है। इसे फरवरी से लेकर अक्टूबर-नवंबर तक लगाया जा सकता है। घर में इसे गमले, छत, बालकनी या आंगन में आसानी से उगाया जा सकता है।

    एलोवेरा की कई किस्में होती हैं। बार्बाडेन्सिस किस्म भी काफी लोकप्रिय है और इसकी पत्तियां अपेक्षाकृत बड़ी होती हैं।

    कैसी होनी चाहिए मिट्टी?

    एलोवेरा के लिए ऐसी मिट्टी बेहतर होती है जिसमें पानी ज्यादा देर तक जमा न रहे। इसके लिए सामान्य मिट्टी में थोड़ी रेत या बालू मिलाई जा सकती है।

    गमले में पानी की निकासी अच्छी होनी चाहिए, क्योंकि जड़ों में लगातार पानी जमा रहने से पौधा खराब हो सकता है।

    ऐसे लगाएं एलोवेरा

    सबसे पहले स्वस्थ और हरे रंग का छोटा एलोवेरा पौधा लें। ऐसा गमला चुनें जिसके नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर हो।

    अब गमले में मिट्टी भरकर बीच में छोटा गड्ढा बनाएं और पौधे को सीधा लगा दें। इसके बाद जड़ों के आसपास मिट्टी डालकर हल्के हाथ से दबा दें। पौधा लगाने के बाद थोड़ी मात्रा में पानी दें।

    एलोवेरा की देखभाल कैसे करें?

    एलोवेरा को रोशनी पसंद है, लेकिन बहुत तेज और लगातार धूप में रखने से इसकी पत्तियां प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए पौधे को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त रोशनी मिले और जरूरत के मुताबिक धूप भी मिलती रहे।

    इस पौधे को रोज पानी देने की जरूरत