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  • फाउंडर ने डिग्री और एक्सपीरियंस​​​​​ नहीं, हुनर पर किया भरोसा, टैक्सी ड्राइवर 10 साल में बना बड़ा अधिकारी

    फाउंडर ने डिग्री और एक्सपीरियंस​​​​​ नहीं, हुनर पर किया भरोसा, टैक्सी ड्राइवर 10 साल में बना बड़ा अधिकारी

    फाउंडर ने डिग्री और एक्सपीरियंस​​​​​ नहीं, हुनर पर किया भरोसा, टैक्सी ड्राइवर 10 साल में बना बड़ा अधिकारी

    किसी कंपनी में नौकरी पाने के लिए आमतौर पर अच्छी डिग्री, कॉर्पोरेट एक्सपीरियंस और एक मजबूत रिज्यूमे को काफी जरूरी माना जाता है, लेकिन हैदराबाद के एक स्टार्टअप फाउंडर ने करीब 10 साल पहले इन क्लासिक तरीकों से अलग जाकर एक ऐसा फैसला लिया, जिस पर उस समय कई लोगों ने सवाल उठाए थे. उन्होंने एक टैक्सी ड्राइवर को अपनी कंपनी का पहला कर्मचारी बनाया. आज एक दशक बाद वही व्यक्ति कंपनी में देशभर के प्रोक्योरमेंट यानी खरीदारी से जुड़े काम की जिम्मेदारी संभाल रहा है.

    यह कहानी Adonmo के को-फाउंडर Sravanth Gajula ने LinkedIn पर शेयर की. उन्होंने बताया कि जब वह कंपनी को शुरुआती दौर में खड़ा कर रहे थे, तब उन्होंने कर्मचारी चुनते समय सिर्फ डिग्री और अनुभव को आधार नहीं बनाया. उन्हें एक ऐसे व्यक्ति में क्षमता नजर आई, जिसे शायद कोई क्लासिक रिक्रूटर पहली नजर में नौकरी के लिए जरूरी नहीं मानते थे. गजुला के मुताबिक, उस व्यक्ति के पास कॉर्पोरेट सेक्टर का कोई अनुभव नहीं था. उसे अंग्रेजी भी नहीं आती थी और उसका रिज्यूमे भी ऐसा नहीं था, जिसे देखकर किसी बड़ी कंपनी का HR तुरंत प्रभावित हो जाए. लेकिन उसमें कुछ ऐसी खूबियां थीं, जो गजुला को ज्यादा महत्वपूर्ण लगीं. वह सीखने के लिए तैयार था, ईमानदार था और किसी समस्या का रास्ता निकालने की कोशिश करता था.

    क्यों खास है नौकरी की ये कहानी?

    यही वजह थी कि गजुला ने यह देखने के बजाय कि उम्मीदवार में क्या कमी है, इस बात पर भरोसा किया कि वह आगे क्या कर सकता है. जब वह कर्मचारी कंपनी से जुड़ा, तब Adonmo अपने शुरुआती चरण में थी. कंपनी ने भी उसे सिर्फ नौकरी देकर छोड़ नहीं दिया, बल्कि उसके विकास में निवेश किया. उसे spoken English की क्लास में भेजा गया, ताकि वह धीरे-धीरे अपने कम्युनिकेशन स्किल्स को बेहतर कर सके. इसके साथ ही उसे छोटे-मोटे या सिर्फ रूटीन कामों तक सीमित नहीं रखा गया. उसे जिम्मेदारियां दी गईं और यह भरोसा जताया गया कि वह समय के साथ बड़ी भूमिका निभा सकता है. यानी कंपनी ने उसकी मौजूदा कमियों को उसकी पूरी पहचान नहीं माना. इस फैसले का नतीजा 10 साल बाद सामने आया. कभी टैक्सी चलाने वाला वह कर्मचारी आज Adonmo में हेड ऑफ प्रोक्योरमेंट बन चुका है और पूरे भारत में कंपनी की खरीदारी से जुड़े काम संभालता है. गजुला ने उसे संगठन के सबसे भरोसेमंद लोगों में से एक बताया.

    इस कहानी के जरिए गजुला ने भर्ती और वर्कप्लेस कल्चर को लेकर भी एक अहम बात कही. उनके मुताबिक, कंपनियां अक्सर खुद को people-first बताती हैं, लेकिन असली फर्क तब दिखता है जब वे ऐसे लोगों को मौका देती हैं जिन्हें बाकी लोग नजरअंदाज कर चुके हों. उनका मानना है कि किसी व्यक्ति को पूरी तरह उसके रिज्यूमे से आंकना हमेशा सही नहीं होता. कई बार क्षमता कागज पर दिखाई नहीं देती. किसी को सीखने का मौका, सही ट्रेनिंग और जिम्मेदारी दी जाए तो वह अपनी उम्मीद से कहीं आगे जाकर प्रदर्शन कर सकता है.

    गजुला की यह कहानी इसी बात की मिसाल है कि सही अवसर और भरोसा मिलने पर इंसान अपनी पहचान और करियर दोनों बदल सकता है. उनके मुताबिक, नेताओं को सिर्फ यह नहीं देखना चाहिए कि कोई व्यक्ति आज क्या कर सकता है, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि सही मौके मिलने पर वह कल क्या बन सकता है.


    Sravanth Gajula

    Co-Founder @ AdOnMo | ISB | MIT | Microsoft1mo

    LinkedIn

    10 years ago, I hired a taxi driver as our first employee. Class 9 pass. No English. No corporate experience. No resume that would make any traditional hiring manager look twice. Everyone wondered why I did that. But something about his hunger, his honesty, his willingness to just figure it out, felt exactly like what we wanted to build in our company. So we bet on him. We enrolled him in spoken English classes. We gave him real, contributing, and impactful work. We treated him like someone who was going to grow, because we genuinely believed he would. He didn’t just grow. He flew. 10 years later, he now heads our Procurement at AdOnMo. Pan-India responsibility. One of the most trusted people in our organisation. People talk a lot about culture. About values. About people-first companies. But in practice, It looks like hiring someone the world would have overlooked. It looks like investing in them before they’re “ready.” It looks like giving them a seat at the table, and then watching them own the room. That’s it. That was our only job. If you’re a founder or a leader reading this, your team will become who you believe them to be. Believe bigger.

  • वोट मांगने का अनोखा अंदाज,​​​​​ मतदाता के घर पहुंचकर निर्दलीय उम्मीदवार ने धोए बर्तन.

    वोट मांगने का अनोखा अंदाज,​​​​​ मतदाता के घर पहुंचकर निर्दलीय उम्मीदवार ने धोए बर्तन.

    वोट मांगने का अनोखा अंदाज,​​​​​ मतदाता के घर पहुंचकर निर्दलीय उम्मीदवार ने धोए बर्तन.

    राजस्थान के कोटा में नगर निगम चुनाव के दौरान एक निर्दलीय उम्मीदवार का प्रचार करने का अनोखा तरीका लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। आमतौर पर चुनावी मौसम में उम्मीदवार रैलियों, जनसभाओं और घर-घर जाकर मतदाताओं से समर्थन मांगते नजर आते हैं, लेकिन इस उम्मीदवार ने प्रचार के दौरान कुछ अलग करने की कोशिश की। वोट मांगने के लिए वह एक मतदाता के घर पहुंचा और वहां परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत करने के बाद बर्तन धोने लगा।

    उम्मीदवार ने लोगों से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील करते हुए कहा कि वह आम जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना चाहता है। उसका कहना था कि जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय लोगों के घरों तक सीमित न रहें, बल्कि आम दिनों में भी जनता के सुख-दुख में शामिल हों। इसी संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए उसने घर के काम में हाथ बंटाया और बर्तन धोकर मतदाताओं का ध्यान आकर्षित किया।

    उम्मीदवार के इस अंदाज को देखकर घर में मौजूद लोग भी हैरान रह गए। कुछ लोगों ने इसे सादगी और आम जनता से जुड़ने की कोशिश बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे चुनावी प्रचार का अलग तरीका माना। मौके पर मौजूद लोगों ने उम्मीदवार से बातचीत की और स्थानीय समस्याओं के बारे में भी जानकारी दी। इस दौरान उम्मीदवार ने क्षेत्र में सफाई, सड़क, पानी और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता देने का भरोसा दिलाया।

    कोटा में इन दिनों नगर निकाय चुनाव को लेकर प्रचार अभियान तेज हो गया है। अलग-अलग उम्मीदवार मतदाताओं तक पहुंचने के लिए अपने-अपने तरीके अपना रहे हैं। कोई पदयात्रा कर रहा है, तो कोई छोटी सभाओं और जनसंपर्क अभियानों के जरिए लोगों से समर्थन मांग रहा है। ऐसे माहौल में निर्दलीय उम्मीदवार का मतदाता के घर पहुंचकर बर्तन धोना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

    उम्मीदवार का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद भी वह जनता से इसी तरह जुड़ा रहेगा और क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए काम करेगा। हालांकि, अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उसका यह अनोखा प्रचार अभियान मतदाताओं को कितना प्रभावित करता है और चुनाव में उसे इसका कितना लाभ मिलता है। फिलहाल, बर्तन धोकर वोट मांगने का यह अंदाज स्थानीय स्तर पर लोगों का ध्यान जरूर खींच रहा है।

  • AI की सलाह पर पहाड़​​​​​ चढ़ना पड़ा भारी, कम खाना-पानी लेकर निकले युवक रातभर घाटी में फंसे.

    AI की सलाह पर पहाड़​​​​​ चढ़ना पड़ा भारी, कम खाना-पानी लेकर निकले युवक रातभर घाटी में फंसे.

    AI की सलाह पर पहाड़​​​​​ चढ़ना पड़ा भारी, कम खाना-पानी लेकर निकले युवक रातभर घाटी में फंसे.

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आज लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, काम से लेकर यात्रा की योजना बनाने तक लोग AI की मदद लेते हैं। लेकिन अमेरिका के कैलिफोर्निया में तीन पर्वतारोहियों को AI की सलाह पर भरोसा करना भारी पड़ गया।

    रिपोर्ट के मुताबिक, रोजविल, कैलिफोर्निया के तीन अनुभवहीन पर्वतारोही माउंट शास्ता की चढ़ाई के लिए निकले थे। यात्रा की तैयारी के दौरान उन्होंने गूगल के Gemini AI से कई तरह की जानकारी ली थी। उन्हें उम्मीद थी कि इससे उनकी यात्रा सुरक्षित और आसान हो जाएगी।

    AI की सलाह से कम रखा खाना-पानी

    अधिकारियों के मुताबिक, पर्वतारोहियों ने चढ़ाई के लिए जरूरी सामान के साथ खाने और पानी की मात्रा तय करने में भी Gemini की सलाह ली थी। AI की सिफारिश के आधार पर उन्होंने जरूरत से काफी कम खाना और पानी अपने साथ रखा।

    पहाड़ों पर मौसम और रास्ते की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं। ऐसे में पर्याप्त भोजन, पानी और जरूरी सुरक्षा सामान रखना बेहद जरूरी होता है।

    रात 3 बजे शुरू की चढ़ाई

    तीनों पर्वतारोहियों ने करीब 8,400 फीट की ऊंचाई पर अपना कैंप बनाया था। इसके बाद रविवार सुबह करीब 3 बजे उन्होंने माउंट शास्ता की चोटी की ओर बढ़ना शुरू किया।

    उन्हें दोपहर तक वापस लौटने की सलाह दी गई थी, लेकिन वे शाम करीब 7 बजे तक आगे बढ़ते रहे। जब उन्हें लगा कि चोटी तक पहुंचना संभव नहीं है, तो उन्होंने वापस लौटने का फैसला किया।

    अंधेरे में रास्ता भटके

    वापसी के दौरान अंधेरा हो जाने के कारण तीनों रास्ता भटक गए। पहाड़ी इलाके में रात के समय रास्ता ढूंढना उनके लिए मुश्किल हो गया। इसके बाद वे घाटी में फंस गए और रातभर वहीं रहने को मजबूर हुए।

    अगली सुबह राहत एवं बचाव दल ने तीनों पर्वतारोहियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि पहाड़ों जैसे जोखिम भरे इलाकों में सिर्फ AI की जानकारी के भरोसे तैयारी करना कितना खतरनाक हो सकता है।

    AI जानकारी जुटाने में मददगार हो सकता है, लेकिन पर्वतारोहण जैसे जोखिम वाले अभियानों में स्थानीय विशेषज्ञों, मौसम संबंधी आधिकारिक जानकारी और अनुभवी गाइड की सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है।

  • चीन में ‘ऑफिस एजिंग’ का​​​​​ डर, दफ्तर में छाता और सनस्क्रीन का ट्रेंड वायरल.

    चीन में ‘ऑफिस एजिंग’ का​​​​​ डर, दफ्तर में छाता और सनस्क्रीन का ट्रेंड वायरल.

    चीन में ‘ऑफिस एजिंग’ का​​​​​ डर, दफ्तर में छाता और सनस्क्रीन का ट्रेंड वायरल.

    Office Aging Fear in China: आमतौर पर लोग सनस्क्रीन और छतरी का इस्तेमाल तेज धूप या बारिश से बचने के लिए करते हैं, लेकिन चीन के कॉरपोरेट कल्चर में इन दिनों एक अलग तरह का ट्रेंड देखने को मिल रहा है।

    Office Aging Fear in China: आमतौर पर लोग सनस्क्रीन और छतरी का इस्तेमाल तेज धूप या बारिश से बचने के लिए करते हैं, लेकिन चीन के कॉरपोरेट कल्चर में इन दिनों एक अलग तरह का ट्रेंड देखने को मिल रहा है। यहां कुछ ऑफिस कर्मचारी धूप या बारिश न होने के बावजूद अपने वर्कप्लेस पर सनस्क्रीन, टोपी, ग्लव्स और यहां तक कि छाते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके पीछे वजह है त्वचा की देखभाल और कथित तौर पर ‘ऑफिस एजिंग’ से बचने की चिंता।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ ‘ऑफिस एजिंग’ ट्रेंड

    चीन के स्थानीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Xiaohongshu पर एक कर्मचारी ने ऑफिस के माहौल को लेकर अपना अनुभव साझा किया। इसके बाद कई अन्य कर्मचारियों ने भी अपनी परेशानियां और अनुभव बताए। कुछ लोगों का दावा है कि ऑफिस में काम शुरू करने के कुछ ही समय बाद उनकी त्वचा पहले की तुलना में फीकी नजर आने लगी और आंखों में थकान महसूस होने लगी।

    एक महिला ने यह भी बताया कि घर पर ज्यादा समय बिताने के दौरान उसे अपनी त्वचा में सुधार महसूस हुआ। इन अनुभवों के बाद कर्मचारियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि ऑफिस का वातावरण त्वचा और शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

    डेस्क पर छाता, चेहरे पर सनस्क्रीन

    त्वचा को कथित नुकसान से बचाने के लिए कुछ कर्मचारियों ने अपने वर्कस्टेशन को ही ‘सेफ जोन’ बना लिया है। कोई डेस्क पर छोटा छाता लगाकर बैठ रहा है तो कोई टोपी और ग्लव्स पहनकर काम कर रहा है। कई कर्मचारी नियमित रूप से सनस्क्रीन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस ट्रेंड को लेकर एक कर्मचारी की टिप्पणी भी चर्चा में है कि कंपनी उसे काम करने के पैसे देती है, लेकिन उसकी त्वचा की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

    क्या कंप्यूटर और ऑफिस लाइट से सच में बढ़ती है उम्र?

    हालांकि, ‘ऑफिस एजिंग’ को वैज्ञानिक रूप से स्थापित तथ्य मानना सही नहीं होगा। अभी तक ऐसा ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि सामान्य ऑफिस लाइट, कंप्यूटर स्क्रीन या एयर कंडीशनर के कारण इंसान की उम्र तेजी से बढ़ने लगती है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, सूखापन और असहजता जरूर हो सकती है। इसी तरह लगातार बैठे रहने, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और पर्याप्त नींद न लेने से शरीर में थकान नजर आ सकती है, जिसका असर चेहरे पर भी दिखाई दे सकता है।

    असली चिंता शायद लाइफस्टाइल की है

    दरअसल, ऑफिस एजिंग की चर्चा को केवल कंप्यूटर स्क्रीन या नीली रोशनी से जोड़ना अधूरा हो सकता है। लंबे समय तक काम करना, तनाव, नींद की कमी, कम एक्सरसाइज और खराब लाइफस्टाइल त्वचा और शरीर की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए ऑफिस में छाता लगाने का यह ट्रेंड भले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा हो, लेकिन त्वचा की देखभाल के लिए संतुलित लाइफस्टाइल, पर्याप्त नींद, हाइड्रेशन और जरूरत के अनुसार सनस्क्रीन का इस्तेमाल ज्यादा महत्वपूर्ण है।

  • क्या समंदर से निकले एलियंस?​​​​​ ब्रिटेन के समुद्री तटों पर बहकर आए सैकड़ों नीले रहस्यमयी जीव..

    क्या समंदर से निकले एलियंस?​​​​​ ब्रिटेन के समुद्री तटों पर बहकर आए सैकड़ों नीले रहस्यमयी जीव..

    क्या समंदर से निकले एलियंस?​​​​​ ब्रिटेन के समुद्री तटों पर बहकर आए सैकड़ों नीले रहस्यमयी जीव..

    अगर आप समंदर किनारे घूम रहे हों और अचानक रेत पर नीले रंग के सैकड़ों अजीब से जीव बिखरे दिखें, तो एक पल को तो लगेगा ही कि शायद कोई एलियन उतर आया है. कुछ ऐसा ही नजारा आजकल ब्रिटेन के खूबसूरत समुद्र तटों पर देखने को मिल रहा है. कम्ब्रिया के सेंट बीज बीच और वेल्स के तटों पर अचानक से सैकड़ों चमकीले नीले जीव पानी के साथ बहकर किनारे पर आ गए हैं. पहली नजर में लोग इन्हें जेलीफिश समझ रहे थे, लेकिन जब असलियत सामने आई तो हर कोई हैरान रह गया.

    जेलीफिश नहीं, तो फिर क्या हैं ये?

    वैज्ञानिक भाषा में इन्हें ‘वेलेला वेलेला’ (Velella Velella) और आम भाषा में ‘बाय-द-विंड सेलर्स’ (By The Wind Sailors) कहा जाता है. देखने में यह भले ही एक अकेला जीव लगे, लेकिन असल में यह छोटे-छोटे कई जीवों का एक समूह होता है, जो मिलकर एक साथ काम करते हैं.

    इनका आकार लगभग 2 इंच होता है. इनके शरीर के ऊपर एक छोटा सा पारदर्शी पाल (Sail) बना होता है. हवा जब इस पाल से टकराती है, तो ये किसी छोटी नाव की तरह पानी की सतह पर तैरते रहते हैं. चूंकि ये हवा के सहारे तैरते हैं, इसलिए तेज हवाएं इन्हें किनारे की तरफ धकेल देती हैं.

    अचानक समुद्र किनारे क्यों आ रहे हैं ये जीव?

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह नजारा एक दशक से भी ज्यादा समय बाद इतने बड़े पैमाने पर देखा गया है. इसके पीछे दो मुख्य वजहें हैं. पहला है तेज पश्चिमी हवाएं. समंदर में उठे तूफानों के बाद बहने वाली हवाएं इन्हें खींचकर किनारे ले आईं. दूसरा ब्रिटेन में भीषण गर्मी. ब्रिटेन में इन दिनों कई इलाकों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. असामान्य रूप से गर्म मौसम के कारण इन जीवों की संख्या बढ़ी है.

    खूबसूरत हैं, लेकिन छूने की गलती न करें!

    रेत पर बिखरी इन नीली सुंदर आकृतियों को देखकर लोग तस्वीरें लेने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं. स्थानीय पर्यटक लुईस निकोलसन ने बताया, वहां सैकड़ों नीले जीव बिखरे थे, जो बेहद खूबसूरत लग रहे थे. इतनी धूप भरे दिन में यह एक अद्भुत नजारा था.

  • 80s AI Photo Trend: Instagram​​​​​ पर छाया 80s का रेट्रो अंदाज, ऐसे बनाएं अपनी तस्वीर.

    80s AI Photo Trend: Instagram​​​​​ पर छाया 80s का रेट्रो अंदाज, ऐसे बनाएं अपनी तस्वीर.

    80s AI Photo Trend: Instagram​​​​​ पर छाया 80s का रेट्रो अंदाज, ऐसे बनाएं अपनी तस्वीर.

    सोशल मीडिया पर इन दिनों 1980 के दशक का रेट्रो अंदाज एक बार फिर चर्चा में है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार पुराने फोटो नहीं, बल्कि AI इस ट्रेंड को वायरल बना रहा है। लोग अपनी सामान्य तस्वीरों को AI की मदद से ऐसा लुक दे रहे हैं, जैसे वह 1980 के दशक के किसी फिल्मी स्टूडियो, मैगजीन शूट या पुराने फोटो एल्बम में खींची गई हो।

    Instagram पर ऐसी तस्वीरें तेजी से देखने को मिल रही हैं, जिनमें लोग 80s के हेयरस्टाइल, फैशन, ज्वेलरी और पुराने कैमरे जैसी तस्वीरों के अंदाज में नजर आ रहे हैं।

    क्या है 80s AI Photo Trend?

    इस ट्रेंड में लोग अपनी सामान्य फोटो को AI की मदद से 1980 के दशक के रेट्रो पोर्ट्रेट में बदल रहे हैं। इसके लिए ChatGPT में अपनी तस्वीर अपलोड करके उसे 80s स्टाइल में बदलने के लिए कहा जाता है।

    AI तस्वीर में चेहरे की पहचान और प्राकृतिक स्किन टोन को बरकरार रखते हुए बड़े और घने बाल, पुराने जमाने के कपड़े, स्टाइलिश ज्वेलरी, गर्म रोशनी और हल्का फिल्म ग्रेन जैसा इफेक्ट जोड़ सकता है।

    आप चाहें तो तस्वीर के बैकग्राउंड को पुराने फिल्मी स्टूडियो, डिस्को, मैगजीन शूट या पुराने फोटो एल्बम जैसा भी रख सकते हैं।

    क्यों पसंद आ रहा है यह ट्रेंड?

    इस ट्रेंड की सबसे बड़ी खासियत इसका नॉस्टैल्जिक लुक है। 80s का फैशन, पुराने बॉलीवुड फिल्मों जैसा अंदाज और पुराने कैमरे से खींची गई तस्वीरों जैसा टेक्सचर लोगों को आकर्षित कर रहा है।

    AI की मदद से कुछ ही समय में अपनी मौजूदा तस्वीर को बिल्कुल अलग दौर का लुक दिया जा सकता है। यही वजह है कि लोग अपनी बनाई हुई तस्वीरों को सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं और यह ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    ऐसे बनाएं अपनी 80s वाली तस्वीर

    इसके लिए ChatGPT में नया चैट खोलें और अपनी साफ तस्वीर अपलोड करें। कोशिश करें कि फोटो में चेहरा स्पष्ट हो और रोशनी अच्छी हो।

    इसके बाद AI को बताएं कि आप किस तरह का 80s लुक चाहते हैं। उदाहरण के लिए कपड़े, हेयरस्टाइल, बैकग्राउंड, लाइटिंग और फोटो का मूड पहले से स्पष्ट कर सकते हैं।

    प्रॉम्प्ट में यह भी लिखें कि चेहरे की पहचान और प्राकृतिक स्किन टोन को बदला न जाए। इससे तस्वीर को ज्यादा नैचुरल रखने में मदद मिल सकती है।

    अगर पहली तस्वीर आपकी पसंद के मुताबिक नहीं आती है तो दोबारा पूरी प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत नहीं है। उसी तस्वीर में छोटे बदलाव बताकर हेयरस्टाइल, कपड़े, बैकग्राउंड या लाइटिंग को बदला जा सकता है।

    यह Prompt कर सकते हैं ट्राई

    “Reimagine this image as a glamorous 1980s Indian film portrait. Retain the subject’s recognisable facial features and natural skin tone. Add voluminous, softly curled hair, a bold and colourful outfit, statement jewellery, warm studio-style lighting, rich cinematic tones and a subtle vintage film grain. Ensure the final image looks realistic, polished and elegant.”

    तस्वीर को और खास कैसे बनाएं?

    सिर्फ “इसे 80s जैसा बना दो” लिखने के बजाय आप अपनी पसंद का पूरा स्टाइल बता सकते हैं।

    जैसे—

    • 80s बॉलीवुड स्टूडियो पोर्ट्रेट
    • पुराना फैमिली एल्बम
    • रेट्रो डिस्को लुक
    • विंटेज वेडिंग फोटो
    • पुराने मैगजीन कवर जैसा अंदाज

    इसके अलावा साड़ी, बौफैंट हेयरस्टाइल, फ्लेयर्ड पैंट, प्रिंटेड शर्ट, बड़ी ज्वेलरी, पुराने स्टूडियो बैकग्राउंड और विंटेज कैमरा इफेक्ट जैसी डिटेल भी जोड़ी जा सकती हैं।

    जितनी स्पष्ट जानकारी आप प्रॉम्प्ट में देंगे, तस्वीर का लुक उतना ही आपकी पसंद के मुताबिक तैयार किया जा सकता है।

  • चीते की रफ्तार से खाया​​​​​ खाना! महज 30 सेकेंड में पूरा बरीटो चट कर गई महिला, बन गया वर्ल्ड रिकॉर्ड..

    चीते की रफ्तार से खाया​​​​​ खाना! महज 30 सेकेंड में पूरा बरीटो चट कर गई महिला, बन गया वर्ल्ड रिकॉर्ड..

    चीते की रफ्तार से खाया​​​​​ खाना! महज 30 सेकेंड में पूरा बरीटो चट कर गई महिला, बन गया वर्ल्ड रिकॉर्ड..

    Viral Video: जब खाने की बात आती है, तो अधिकतर लोग सुकून से स्वाद लेकर खाना पसंद करते हैं। लेकिन, दुनिया में कुछ ऐसे महारथी भी हैं, जिनके लिए खाना किसी हाई-स्पीड रेस जैसा होता है। ब्रिटेन की मशहूर कॉम्पिटिटिव ईटर लीया शटकीवर ने एक बार फिर ऐसा ही कारनामा करके पूरी दुनिया को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया है। लीया ने प्लेट में रखा भारी-भरकम बरीटो महज 30.75 सेकेंड में चट कर एक नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (GWR) अपने नाम कर लिया है।

    गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा जारी किए गए आधिकारिक वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही टाइमर शुरू होता है, लीया बिना एक पल गंवाए बरीटो पर टूट पड़ती हैं। लगभग 613 ग्राम भारी मेक्सिकन बरीटो को वह इतनी बड़ी-बड़ी बाइट्स के साथ गटकती हैं कि देखने वालों की सांसें थम जाती हैं। चैलेंज के दौरान सबसे खास बात यह रही कि इतनी तेजी से खाने के बावजूद लीया ने प्लेट या आसपास जरा सा भी खाना नहीं गिराया। घड़ी का कांटा जैसे ही 30.75 सेकेंड पर पहुंचा, लीया ने आखिरी निवाला मुंह में डाला और जजों को यह दिखाने के लिए अपनी जीभ बाहर निकाली कि उनका मुंह पूरी तरह खाली हो चुका है। उनकी इस गजब की स्पीड और सफाई को देखकर वहां मौजूद ऑफिशियल जज भी हैरान रह गए। देखें वीडियो…

    इंसान या ईटिंग मशीन…

    यह पहला मौका नहीं है जब लीया ने यह कारनामा किया हो। दरअसल, इससे पहले भी यह रिकॉर्ड लीया के ही नाम था। हालांकि, साल 2022 में अमेरिका की कॉम्पिटिटिव ईटर मिकी सुडो ने 31.47 सेकेंड में बरीटो खाकर लीया का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। लेकिन, लीया ने हार नहीं मानी और इस बार करीब 2 सेकेंड का समय घटाकर अपना खोया हुआ ताज दोबारा हासिल कर लिया। आपको बता दें कि लीया के नाम खाने से जुड़े 40 से भी ज्यादा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स दर्ज हैं, जिनमें 1 मिनट में 8 चुरोस खाना और 1 मिनट में 613 ग्राम स्ट्रॉबेरी खाना शामिल है। वहीं, इस वायरल वीडियो पर यूजर्स जमकर कमेंट कर रहे हैं। एक यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा कि इतने समय में तो हम सिर्फ यह तय कर पाते हैं कि खाने की शुरुआत किस तरफ से करनी है। एक अन्य यूजर ने लिखा कि इतनी जल्दी तो हम एक घूंट पानी भी नहीं पी पाते, इन्होंने पूरा 600 ग्राम का बरीटो कैसे गटक लिया? तो इस वीडियो पर आपकी क्या राय है जरूर बताएं।

  • साढ़े 3 घंटे चला हाई-वोल्टेज​​​​​ ड्रामा! मोबाइल टावर पर चढ़ा 25 साल का युवक, एक महीने से थी नेटवर्क की दिक्कत..

    साढ़े 3 घंटे चला हाई-वोल्टेज​​​​​ ड्रामा! मोबाइल टावर पर चढ़ा 25 साल का युवक, एक महीने से थी नेटवर्क की दिक्कत..

    साढ़े 3 घंटे चला हाई-वोल्टेज​​​​​ ड्रामा! मोबाइल टावर पर चढ़ा 25 साल का युवक, एक महीने से थी नेटवर्क की दिक्कत..

    राजस्थान के डीग जिले के बेढ़म गांव में मोबाइल नेटवर्क की समस्या से परेशान एक 25 वर्षीय युवक जियो कंपनी के मोबाइल टावर पर चढ़ गया. युवक ने नेटवर्क समस्या का समाधान नहीं होने पर टावर से कूदने की धमकी दी. मामले की जानकारी मिलती बड़ी संख्या में ग्रामीण व लोग मौके पर इकट्ठा हो गए.

    टावर पर साढ़े 3 घंटे तक हाई वोल्टेज ड्रामा- लोगों में हड़कंप मच गया. लोगों ने मामले की जानकारी पुलिस पर प्रशासन को दी पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और करीब साढ़े तीन घंटे तक समझाने के बाद युवक को नीचे उतर गया. इस दौरान मौके पर हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला.

    एक महीने से नेटवर्क में दिक्कत- डीग जिले के बीदाम गांव में बीते 1 महीने से मोबाइल नेटवर्क की समस्या के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में बेढ़म निवासी युवक पुष्कर गांव के एक मोबाइल टावर पर चढ़ गया. युवक के टावर पर चढ़ने की सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस ने मौके पर पहुंची. पुलिस ने मामले की सूचना प्रशासन व जिओ कंपनी के कर्मचारियों को दी.

    नेटवर्क की दिक्कत की गई दूर- पुलिस और प्रशासन की समझाने के बाद युवक की मांग को गंभीरता से लेते हुए मौके पर कंपनी के तकनीकी कर्मचारियों को बुलाया गया. तकनीकी कर्मचारियों ने टावर पर चल रही नेटवर्क संबंधी कमियों की जांच कर उन्हें दुरुस्त किया. उसके बाद करीब साढ़े तीन घंटे बाद युवक नीचे उतरा. इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने युवक के वीडियो बनाए और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए. साथ ही टावर पर चढ़ने के बाद युवक ने भी अपनी समस्या बताते हुए एक वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल किया.

    मांग पूरी हुई तो नीचे उतरा युवक- पुलिस एसएचओ वीरेंद्र ने बताया की करीब साढ़े तीन घंटे तक पुलिस ने युवक से बातचीत कर उसे सुरक्षित नीचे उतरने के लिए समझाया. करीब एक महीने से नेटवर्क बेहद कमजोर चल रहा है. नेटवर्क की समस्या के कारण मोबाइल कॉल, इंटरनेट और ऑनलाइन काम प्रभावित हो रहे हैं. युवक ने महंगे रिचार्ज के बावजूद पर्याप्त नेटवर्क सुविधा नहीं मिलने की बात भी उठाई.

    युवक की मांग पूरी होने के बाद वो नीचे उतरा. कंपनी के कर्मचारियों द्वारा नेटवर्क की समस्या को दूर करने के लिए तकनीकी टीम द्वारा काम शुरू किया गया है. इस सम्बन्ध में पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ ने बताया कि युवक नेटवर्क संबंधी समस्या को लेकर युवक टावर पर चढ़ा था. उसकी सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस को मौके पर भेजा गया. मामले की जानकारी मिलने के बाद मौके पर मोबाइल कंपनी के अधिकारी पहुंचे और उनके आश्वासन के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतर गया.

  • सड़क पर निकला ‘चलता-फिरता घर’,​​​​​ नजारा देखकर दंग रह गए लोग, देखें अतरंगी..

    सड़क पर निकला ‘चलता-फिरता घर’,​​​​​ नजारा देखकर दंग रह गए लोग, देखें अतरंगी..

    सड़क पर निकला ‘चलता-फिरता घर’, नजारा देखकर दंग रह गए लोग, देखें अतरंगी Viral Video

    Viral Video: सोशल मीडिया की दुनिया में रोजाना एक से एक अनोखे वीडियो वायरल होते रहते हैं। कुछ वीडियो तो ऐसे होते हैं, जिन्हें देखकर अच्छे-अच्छों की बोलती बंद हो जाती है। जबकि, कुछ वीडियो को देखकर लोगों को अपनी आंखों पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। जबकि, कुछ मामले सोचने पर मजबूर कर देते हैं। ये तो हम सब जानते हैं सड़क पर रोजाना तरह-तरह के वाहन दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ नजारे ऐसे होते हैं जो कैमरे में कैद होते ही वायरल होने लगते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प नजारा इस वीडियो में देखने को मिलता है। क्योंकि, इस वीडियो में ऐसा जुगाड़ (Jugaad Video) भिड़ाया गया है, जिसे देखकर लोग दंग रह गए।

    वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं एक वाहन पर सामान इस अंदाज में लदा हुआ दिखाई देता है कि पहली नजर में लगता है जैसे कोई छोटा-मोटा घर ही सड़क पर सफर कर रहा हो। ऊपर तक पहुंचा सामान, चारों तरफ बंधी चीजें और वाहन का अजीबोगरीब लुक इसे आम ट्रैफिक से बिल्कुल अलग बना देता है। सबसे मजेदार बात यह है कि वाहन आराम से सड़क पर आगे बढ़ता नजर आता है। इतना ही नहीं जिस अंदाज में शख्स स्कूटी को चला रहा है, उसे देखकर लोग और भी हैरान हो गए। कई लोगों को तो इस जुगाड़ को देखकर अपनी आंखों पर यकीन करना मुश्किल हो रहा था। आखिर, किस तरह का नजारा था आप खुद इस वीडियो में देख लें…

    सड़क पर दिखा अतरंगी जुगाड़

    इस अनोखा जुगाड़ को देखकर एक पल के लिए आप भी जरूर चौंक गए होंगे। सोच रहे होंगे कि भाई ने तो अलग ही लेवल का माहौल बना दिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को voidx.exee नाम के पेज से शेयर किया गया है। इस जुगाड़ को अब तक हजारों लोग देख चुके हैं। इसे देखकर सोशल मीडिया यूजर्स के मन में एक ही सवाल आ सकता है कि भाई, इसमें सामान खत्म हुआ था या घर का पूरा स्टोर ही उठा लाए। तो इस वीडियो पर आपकी क्या राय है जरूर बताएं।

     

     

     

     

  • इस दुल्हन ने की तीन​​​​​ शादियां, अब चौथी बार शादीशुदा प्रेमी संग रहने की जिद पर अड़ी… गोरखपुर का गजब मामला

    इस दुल्हन ने की तीन​​​​​ शादियां, अब चौथी बार शादीशुदा प्रेमी संग रहने की जिद पर अड़ी… गोरखपुर का गजब मामला

    इस दुल्हन ने की तीन​​​​​ शादियां, अब चौथी बार शादीशुदा प्रेमी संग रहने की जिद पर अड़ी… गोरखपुर का गजब मामला

    उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से अजीबोगरीब और हाई वोल्टेज ड्रामे के दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं. पीपीगंज पुलिस स्टेशन में जहां तीन शादियों के बाद एक 30 वर्षीय महिला अपने चौथे प्रेमी के साथ रहने की जिद पर अड़ गई, वहीं दूसरी तरफ गुलरिहा इलाके में शादी का दबाव बनाए जाने से नाराज एक युवक मोबाइल टावर पर चढ़ गया और जान देने की धमकी देने लगा.

    पीपीगंज नगर के एक वार्ड की रहने वाली 30 वर्षीय महिला की जिंदगी में प्यार और शादियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. करीब दो साल पहले महिला के पहले पति की मौत हो गई थी. इसके बाद उसने दूसरी शादी की, लेकिन कुछ ही समय बाद दूसरे पति का भी निधन हो गया. इसके बाद महिला ने संतकबीरनगर जिले में तीसरी शादी की. शादी के 4 महीने बाद वह मायके आई और फिर ससुराल जाने के बहाने लापता हो गई. मां की तहरीर पर पीपीगंज पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की. पुलिस ने करीब 6 महीने बाद महिला को उसके चौथे प्रेमी के साथ बरामद कर पीपीगंज थाने पहुंचाया.

    पीड़ित पत्नी ने किया जमकर हंगामा

    महिला का चौथा प्रेमी पहले से ही शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं. जब प्रेमी की पत्नी को इस बात की खबर लगी, तो वह अपने दो छोटे बच्चों और परिवार के साथ थाने पहुंच गई. थाने में प्रेमी की पत्नी रो-रोकर बच्चों की दुहाई देती रही और महिला से अपने पति को छोड़ने की मिन्नतें करती रही. लेकिन महिला और उसका शादीशुदा प्रेमी दोनों एक-दूसरे के साथ रहने की जिद पर अड़े रहे. वहीं महिला का तीसरा पति उसे वापस अपनाने को तैयार नहीं हुआ. पीपीगंज चौकी इंचार्ज आदित्य सिंह ने बताया कि महिला प्रेमी संग जाना चाहती है और तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है.

    शादी के दबाव से तंग आकर मोबाइल टावर पर चढ़ा युवक

    वहीं, गोरखपुर के ही गुलरिहा थाना क्षेत्र से एक और सनसनीखेज मामला सामने आया, जहां शादी का लगातार दबाव बनाए जाने से नाराज एक युवक गुरुवार शाम गांव के पास स्थित ऊंचे मोबाइल फोन टावर पर चढ़ गया. युवक को टावर पर चढ़कर आत्महत्या की धमकी देते देख गांव में भारी भीड़ जमा हो गई. सूचना पाकर पहुंची डायल 112 पुलिस और ग्रामीणों ने करीब आधे घंटे तक समझा-बुझाकर काफी मशक्कत के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतारा. गुलरिहा पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है.