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  • रिश्तों में कड़वाहट घोल देती हैं ये 5 गलतियां, चाणक्य की इन बातों को हमेशा रखें ध्यान..

    रिश्तों में कड़वाहट घोल देती हैं ये 5 गलतियां, चाणक्य की इन बातों को हमेशा रखें ध्यान..

    रिश्तों में कड़वाहट घोल देती हैं ये 5 गलतियां, चाणक्य की इन बातों को हमेशा रखें ध्यान..

    Chanakya Niti: रिश्ते जिंदगी का बेहद अहम हिस्सा होते हैं। परिवार और रिश्तेदारों के साथ अच्छे संबंध बने रहें, इसके लिए सिर्फ प्यार और सम्मान ही नहीं, बल्कि व्यवहार का भी ध्यान रखना जरूरी है। कई बार हमारी छोटी-छोटी आदतें ही सामने वाले को बुरी लग जाती हैं और धीरे-धीरे रिश्तों में दूरी बढ़ने लगती है।

    आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में व्यक्ति के व्यवहार और सामाजिक जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। उनके अनुसार, दूसरों के घर जाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसी 5 गलतियों के बारे में, जिनसे रिश्तों में कड़वाहट पैदा हो सकती है।

    1. बिना बताए किसी के घर न पहुंचें

    किसी रिश्तेदार या परिचित के घर जाने से पहले उन्हें इसकी जानकारी देना बेहतर माना जाता है। बिना बताए अचानक पहुंचने से सामने वाला असहज हो सकता है या उसकी दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।

    इसलिए अगर किसी के घर जाना हो तो पहले फोन या मैसेज करके बता देना चाहिए। इससे आपके रिश्ते में सम्मान और अपनापन बना रहता है।

    2. खाली हाथ जाने से बचें

    पुराने समय से ही किसी के घर जाते समय अपनी क्षमता के अनुसार कुछ लेकर जाने की परंपरा रही है। यह जरूरी नहीं कि उपहार महंगा ही हो। आप फल, मिठाई या घर में इस्तेमाल होने वाली कोई छोटी चीज भी ले जा सकते हैं।

    ऐसा व्यवहार सामने वाले के प्रति आपके सम्मान और अपनापन को दर्शाता है।

    3. दूसरों के निजी मामलों में दखल न दें

    रिश्तेदारों के घर जाकर उनके निजी मामलों में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। परिवार के आपसी संबंध, घरेलू खर्च या किसी व्यक्तिगत फैसले पर बिना पूछे अपनी राय देना कई बार परेशानी खड़ी कर सकता है।

    अगर कोई व्यक्ति खुद आपसे सलाह मांगे, तभी अपनी बात रखें। हर मामले में अपनी राय देना रिश्ते में तनाव पैदा कर सकता है।

    4. किसी के घर जरूरत से ज्यादा न रुकें

    रिश्तेदारों के यहां जाना और समय बिताना अच्छी बात है, लेकिन लंबे समय तक रुकने से बचना चाहिए, खासकर तब जब सामने वाले की दिनचर्या प्रभावित हो रही हो।

    किसी के घर जाते समय उनकी सुविधा का भी ध्यान रखना जरूरी है। समय पर वापस लौटने से आपका सम्मान भी बना रहता है और सामने वाले को असुविधा भी नहीं होती।

    5. दिखावे और चुगली से दूर रहें

    रिश्तों में सबसे ज्यादा दूरी पैदा करने वाली आदतों में दिखावा और दूसरों की बुराई करना भी शामिल है। अपनी संपत्ति, कमाई या उपलब्धियों का जरूरत से ज्यादा प्रदर्शन करने से सामने वाला असहज महसूस कर सकता है।

    इसी तरह किसी तीसरे रिश्तेदार की बुराई उसके सामने करने से भी बचना चाहिए। सामने वाला यह सोच सकता है कि आप उसकी गैरमौजूदगी में उसकी बातें भी दूसरों से साझा कर सकते हैं।

    रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है समझदारी

    रिश्ते सिर्फ बातचीत से नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार से भी मजबूत होते हैं। इसलिए दूसरों की भावनाओं, निजी जीवन और सुविधाओं का सम्मान करना चाहिए। चाणक्य की इन बातों को आज के समय में भी व्यवहार और सामाजिक संबंधों के संदर्भ में समझा जा सकता है।

    डिस्क्लेमर: चाणक्य नीति से जुड़ी ये बातें पारंपरिक मान्यताओं और उपलब्ध व्याख्याओं पर आधारित हैं। इन्हें सामान्य जानकारी के तौर पर पढ़ें।

  • टमाटर खाने से किडनी में पथरी होती है? डॉक्टर ने बताया किन चीजों से हो सकता है खतरा..

    टमाटर खाने से किडनी में पथरी होती है? डॉक्टर ने बताया किन चीजों से हो सकता है खतरा..

    टमाटर खाने से किडनी में पथरी होती है? डॉक्टर ने बताया किन चीजों से हो सकता है खतरा..

    Kidney Stones Reasons: टमाटर भारतीय खाने में इस्तेमाल किया जाने वाला इंग्रीडिएंट है. इसका इस्तेमाल कई तरह से किया जाता है और सलाद से लेकर सब्जी, दाल और चटनी में स्वाद के लिए डाला जाता है. इसलिए कुछ लोग इसकी प्यूरी बनाकर स्टोर करके रख लेते हैं, लेकिन कुछ लोग खाने से परहेज करते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि उनका मानना है कि टमाटर खाने से पथरी की शिकायत हो सकती है. अगर जरूरत से ज्यादा कच्चा खाएंगे तो परेशानी बढ़ सकती है. इसलिए किडनी में पथरी की समस्या से जूझ रहे कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या टमाटर खाने से पथरी का खतरा बढ़ सकता है? अक्सर टमाटर को ऑक्सलेट से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन हर इंसान को टमाटर छोड़ने की जरूरत नहीं होती. इसको लेकर किम्स किम्स हॉस्पिटल के डॉक्टर विश्वास एम आर क्या कहते हैं और टमाटर खाने से किडनी स्टोन बनने पर असर पड़ता है या नहीं, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.

    क्या टमाटर खाने से किडनी में पथरी होती है?

    ऐसा साफ तौर पर कहना जरूरी नहीं है. टमाटर को किडनी स्टोन होने का असल कारण मानना सही नहीं है. किडनी स्टोन कई कारणों से बन सकते हैं और उनके प्रकार भी अलग-अलग होता है. हालांकि, कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन सबसे आम प्रकार के किडनी स्टोन हैं. ऐसे मामलों में डॉक्टर जरूरत के हिसाब से डाइट में ऑक्सलेट की मात्रा, नमक, कैल्शियम और दूसरे पोषक तत्वों पर ध्यान देने की सलाह दे सकते हैं.

    किन चीजों से बढ़ सकता है पथरी का खतरा?

    शरीर में पानी की कमी होना- किडनी स्टोन से बचने के लिए पानी पीना सबसे जरूरी टिप्स में से एक है. पानी कम पीने से पेशाब ज्यादा गाढ़ा हो सकता है और उसमें मौजूद कुछ मिनरल्स आपस में मिलकर क्रिस्टल बना सकते हैं.

    ज्यादा नमक खाना- खाने में बहुत ज्यादा नमक लेने से पेशाब में कैल्शियम की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे कुछ लोगों में कैल्शियम वाले किडनी स्टोन का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए आप चिप्स, पैकेज्ड फूड, इंस्टेंट नूडल्स, प्रोसेस्ड मीट और ज्यादा नमक वाले सॉस को खाना नुकसानदायक हो सकता है.

    बहुत ज्यादा ऑक्सालेट वाली चीजें- अगर किसी व्यक्ति को कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन की समस्या है तो डॉक्टर या डाइटिशियन कुछ ज्यादा ऑक्सलेट वाली चीजों से दूरी बना लें. आप पालक, चुकंदर, रूबर्ब, कुछ नट्स और चॉकलेट जैसी चीजों से परहेज करें.

    क्या पथरी होने पर टमाटर पूरी तरह बंद कर दें?

    अगर आपको किडनी स्टोन है तो अपनी मर्जी से टमाटर या किसी दूसरी सब्जी को पूरी तरह डाइट से हटाने के बजाय डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लें. किडनी स्टोन की डाइट इस बात पर डिपेंड करती है कि स्टोन किस प्रकार का है और आपके यूरिन या ब्लड टेस्ट में क्या सामने आया है.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें.

  • सोफे के पीछे दीवार पर न टांगें ये 3 तस्वीरें, बन सकती हैं कंगाली और डिप्रेशन का कारण..

    सोफे के पीछे दीवार पर न टांगें ये 3 तस्वीरें, बन सकती हैं कंगाली और डिप्रेशन का कारण..

    सोफे के पीछे दीवार पर न टांगें ये 3 तस्वीरें, बन सकती हैं कंगाली और डिप्रेशन का कारण..

    वास्तु शास्त्र में घर से जुड़ी हर चीज के लिए नियम बेहद स्पष्ट हैं, चाहे वह पूजा घर, किचन, बेडरूम, बालकनी हो या लिविंग रूम. लिविंग रूम के बारे में यह शास्त्र कहता है कि यह घर की वह जगह है, जहां ऊर्जा का सबसे अधिक आदान-प्रदान होता है. इस रूम में सोफे के पीछे की जगह को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. इसका कारण यह बताया जाता है कि यहां बैठने वाले लोगों और पूरे घर के माहौल पर इस दीवाल का डायरेक्ट असर पड़ता है. आइए वास्तु नियमों से जानते है कि लिविंग रूम में सोफे के पीछे वॉल पर कौन-सी 3 प्रकार की पेंटिंग भूल से भी नहीं टांगनी चाहिए?

    डूबता हुआ सूरज

    वास्तु शास्त्र में उगते हुए सूरज को नई शुरुआत, शुभ ऊर्जा, उत्थान और विकास का प्रतीक माना गया है. वहीं, डूबते सूरज को जीवन में पतन, ठहराव और निराश से जोड़ा गया है. डूबते सूरज वाली तस्वीरों में चीजों को अक्सर धुंधले और फीके पड़ते हुए प्रकाश और रंगों में दिखाया जाता है. ऐसी तस्वीरें सोफे के पीछे लगाने के घर मेम्बर का आपस में विश्वास कम हो सकता है. घर लोग बेवजह उदास या डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं. यह करियर और व्यापार में गिरावट का भी कारण भी बन सकता है.

    यद्ध, हिंसा या महाभारत की तस्वीर

    वास्तु शास्त्र में युद्ध और हिंसा को विनाश और क्रोध का प्रतीक माना गया है. मान्यता है कि इस प्रकार की तस्वीरें या पेंटिंग लगाने से घर के लोगों में अग्रेसिवनेस और नेगेटिविटी बढ़ सकती है. कलह और झगड़े हो सकते हैं. बेवजह तनाव रह सकता है, जो डिप्रेशन की ओर धकेल सकता है. महाभारत युद्ध की तस्वीर भी नहीं लगानी चाहिए, क्योंकि ये भी नकारात्मकता फैला सकती है.

    डूबते जहाज/नाव की तस्वीर

    किसी तूफान में फंसे नाव, पानी में डूबता जहाज, टाइटैनिक या टूटे हुए जहाज की फोटो को वास्तु शास्त्र में बेहद नेगेटिव असर वाला माना गया है. इस प्रकार को तस्वीरों और पेंटिंग को नुकसान, बर्बादी और बुरे वक्त का प्रतीक माना गया है. इसे सोफे के पीछे लगाने से मनःस्थिति और घर-परिवार की आर्थिक स्थति पर असर होता है. इससे घर में कंगाली भी आ सकती है. इस दीवाल पर मुरझाए फूल वाले चित्र, सूखे पेड़ और जंगल में आग लगने जैसे फोटो आदि भी नही लगाने चाहिए।

    ऐसी फोटो लाती है खुशहाली

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस प्रकार की फोटो का सही विकल्प है सकारात्मक तस्वीर और पेंटिंग, जैसे- दौड़ते हुए 7 सफेद घोड़े, हरे भरे जंगल, ऊंचे ऊंचे पर्वत, उगता हुआ सूर्य. मान्यता है कि ये सुख-समृद्धि को घर-परिवार की आकर्षित करती हैं.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • खाना खाते हुए मुंह में जलन क्यों होती है? सर्जन ने बताए सामान्य और गंभीर कारण

    खाना खाते हुए मुंह में जलन क्यों होती है? सर्जन ने बताए सामान्य और गंभीर कारण

    खाना खाते हुए मुंह में जलन क्यों होती है? सर्जन ने बताए सामान्य और गंभीर कारण

    Muh Me Jalan Hona: खाना खाते हुए कुछ बहुत तीखा या गर्म खा लिया जाए तो मुंह जलने लगता है और तकलीफ होती है. लेकिन, अगर सामान्य तामपान और कम तीखा खाना खाने पर भी मुंह में जलन महसूस हो और दर्द या असहजता होने लगे तो इसका क्या कारण हो सकता है? इस प्रश्न का जवाब दे रहे हैं फोर्टिस अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट और यूनिट हेड, हेड एंड नेक सर्जन डॉ. अंबेश सिंह. डॉक्टर बता रहे हैं कि कौन से सामान्य और गंभीर कारण हो सकते हैं जो मुंह की जलन की वजह बनते हैं. आइए डॉक्टर से ही जानते हैं खाता खाते हुए मुंह में जलन क्यों होती है.

    खाना खाते हुए मुंह में जलन क्यों होती है

    डॉक्टर बताते हैं कि ये दिक्कतें मुंह में जलन की वजह बन सकती हैं –

    मसालेदार या गर्म भोजन, तंबाकू-गुटखा खाना, मुंह के छाले या फंगल इंफेक्शन से जलन हो सकती है.लगातार जलन मुंह के सूखेपन, विटामिन या आयरन की कमी या अन्य मौखिक समस्याओं से भी जुड़ी हो सकती है.

    बर्निंग माउथ सिंड्रोम भी हो सकता है कारण

    हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की हार्वर्ड हेल्थ पब्लिशिंग में छपी रिपोर्ट के मुताबिक खाना खाते हुए मुंह में जलन की दिक्कत बर्निंग माउथ सिंड्रोम (Burning Mouth Syndrome) के चलते भी हो सकती है. इसमें खासकर एल्कोहल के सेवन से या कुछ चटपटा खाने से मुंह की जलन बढ़ जाती है. बर्निंग माउथ सिंड्रोम होंठ, जीभ, मसूड़ों, गाल के अंदरूनी हिस्से, मुंह के ऊपरी हिस्से और गले को भी प्रभावित करता है. लेकिन, रिपोर्ट में बताया गया है कि यह केवल 2 प्रतिशत लोगों को ही प्रभावित करता है और पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को मेनोपॉज की तरफ ट्रांजिशन के दौरान हो सकता है.

    बर्निंग माउथ सिंड्रोम किसे हो सकता है

    बर्निंग माउथ सिंड्रोम न्यूरोपैथिक दर्द का एक प्रकार है जिसमें फाइबर एब्नॉर्मली एक्ट करने लगते हैं और बिना किसी स्पष्ट ट्रिगर के दर्द का कारण बनते हैं. इसकी सटीक वजह अब तक पता नहीं हो पाई है. बताया जाता है कि यह मेनोपॉज के दौरान हो सकता है, स्ट्रेस या एंजाइटी से हो सकता है या हार्मोनल चेंजेस इसकी वजह हो सकते हैं.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें.

  • दंग कर देने वाले हैं 1920 से 30 के बीच नीम करोली बाबा के भेष, जानें तलैया बाबा और जटाधारी रूप की कहानी..

    दंग कर देने वाले हैं 1920 से 30 के बीच नीम करोली बाबा के भेष, जानें तलैया बाबा और जटाधारी रूप की कहानी..

    Neem-Karoli-Baba

    Neem Karoli Baba Story: नीम करोली बाबा एक ऐसा नाम हैं, जिनके दर्शन मात्र का पुण्य लाभ लेने के लिए दुनिया के अमीर से अमीर और शक्तिशाली लोग दौड़े चले आते हैं. हर कोई उनके चमत्कारों और उनकी तपस्या की ऊर्जा के आगे नतमस्तक हो जाता है. लेकिन आपको पता नहीं होगा, उनका एक समय, एक दौर ऐसा था, जब उनके भौतिक रूप कई प्रकार के थे. उस समय उनके भेष और साधन के तरीके को देख कर लोग दंग रह जाते थे.

    नीम करोली बाबा के जीवन की 1920 से 1030 तक की अवधि लगभग अज्ञातमय रही है, क्योंकि कहा जाता है कि संभवतः यह उनके जीवन का सबसे कठिन और चमत्कारी दौर भी था. आइए जानते है, इस दौरान बाबा किस भेष में थे और ‘तलैया बाबा’ से ‘जटाधारी’ रूप में कैसे और क्यों आए? आपको बता दें कि बाबा के जीवन के इस काल को बहुत लोग ‘लापता काल’ कह देते हैं, जो गलत है. यह काल उनकी तपस्या का वो समय था, जब वे जनता के बीच कम और ईश्वर के करीब अधिक थे.

    बबानिया के ‘लक्ष्मणदास’ और ‘तलैया बाबा’

    कहते हैं, नीम करोली बाबा ने 1911-12 में अपना घर-बार छोड़ दिया था. वे गृहस्थ जीवन से बाहर निकल आए थे. उन्होंने भारत के भिन्न-भिन्न हिस्सों का भ्रमण किया. उनके जीवनी लिखने वाले लेखक और साधक राम दास जी की ‘मिरैकल ऑफ लव’ और प्रेम प्रकाश जी की ‘नीम करोली बाबा: ही इज विथ अस हियर एंड नाउ’ नामक पुस्तकों में वर्णन मिलता है कि 1920 के दशक के शुरुआती समय वे गुजरात के मोरबी के पास बबानिया गांव में रहते थे. यहां वे एक वैष्णव संत के रूप में थे. लोग उनको ‘लक्ष्मण दास’ कहते थे.

    इसी गांव में एक छोटा सा तालाब था, जिसे बबानिया के लोकल लैंग्वेज में ‘तलैया’ कहा जाता था. बाबा लक्ष्मण दास इस तालाब के किनारे घंटों तक ध्यान लगाए रहते थे. उनकी इस आदत और तालाब के प्रति लगाव को देख स्थानीय लोगों ने उन्हें ‘तलैया बाबा’ कहना शुरू कर दिया.

    गुफा में रहने वाले बाबा का ‘जटाधारी रूप’

    कहते सन 1925 के आसपास बाबा उत्तर प्रदेश के फर्रूखाबाद जिले के ‘नीब करौरी’ गांव पहुंचे. ट्रेन वाली महाचमत्कार की घटना यहीं घटी थी, जहां उन्हें ट्रेन से उतार दिया गया था और इसके बाद ट्रेन एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी थी. कहते हैं, ट्रेन की घटना के बाद सम्मानपूर्वक उन्हें नीब करौरी गांव लाया गया. यहां बाबा का पूरा भेष बदल गया.

    कहते हैं, यहां उन्होंने साधना के लिए जमीन के अंदर एक गुफा तैयार करवाई थी. दिन में में वे इसी गुफा में रहते थे और केवल कभी-कभी रात को बाहर आते थे. इस समय बाबा केवल एक लंगोट धारण करते थे. कहते हैं, उनके बाल भयंकर रूप से उलझ गए थे, जटाएं काफी लंबी हो गई थीं. उनका यह रूप एक दिव्य रूप था, लोग देखकर विस्मित और चकित हो जाते थे.

    1930 में बदला बाबा का भेष

    कहते हैं, 1930 के आसपास बाबा ने नीब करौरी गांव में हनुमान जी का एक भव्य मंदिर बनवाया था. इसके बाद उन्होंने अपनी गुप्त साधना त्याग कर दिया. अपनी लंबी जटाओं का मुंडन करवा दिया. वे लंगोट की जगह सूती धोती पहनने लगे. यही वह समय था, जब लोगों ने उन्हीं नीब करोरी बाबा या ‘नीम करोली बाबा’ कहना शुरू और जो आजतक कहा जा रहा है. आपको बता दें कि इसी कालखंड में लोग उन्हें ‘हांडी वाले बाबा’ और ‘तिकोनिया वाले बाबा’ भी कहते थे.

  • डाइट सही फिर भी नहीं घट रही पेट की चर्बी? कहीं ‘कोर्टिसोल बेली’ तो नहीं बन रही वजह..

    डाइट सही फिर भी नहीं घट रही पेट की चर्बी? कहीं ‘कोर्टिसोल बेली’ तो नहीं बन रही वजह..

    डाइट सही फिर भी नहीं घट रही पेट की चर्बी? कहीं ‘कोर्टिसोल बेली’ तो नहीं बन रही वजह..

    मोटापा एक गंभीर समस्या है, जिससे देश व दुनिया में आज बड़ी संख्या में लोग परेशान है. मोटापा के कारण इंसानी शरीर कई गंभीर बीमारियों का घर बन जाता है, जो लंबी उम्र को भी प्रभावित करता है और व्यक्ति को जिंदगीभर दवाओं पर निर्भर रहने पर मजबूर कर देता है. लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत तब पैदा होती है, जब आप हेल्दी डाइट ले रहे हो और फिर भी पेट की चर्बी कम न हो रही हो. ऐसी स्थिति में न सिर्फ दिल घबराता है, बल्कि तनाव की स्थिति भी पैदा हो जाती है. हम आपको इस स्टोरी में ‘कोर्टिसोल बेली’ के बारे में बताएंगे, जिसके बारे में अक्सर लोगों को जानकारी नहीं होती है. इतना जान लीजिए कि अगर हेल्दी डाइट के बाद भी पेट पर चर्बी बन रही है, तो इसके पीछे ‘कोर्टिसोल’ भी कारण हो सकता है.

    क्या है ‘कोर्टिसोल’?

    अपोलो 24/7 की वेबसाइट पर दर्ज जानकारी के अनुसार, अच्छी डाइट और फिजिकल एक्टिविटी के कारण भी बढ़ रहे मोटापे के पीछे तनाव भी एक बड़ा कारण हो सकता है. दरअसल, कॉर्टिसोल, जिसे आम तौर पर ‘स्ट्रेस हार्मोन’ कहा जाता है, वजन बढ़ने, खासकर पेट के आसपास चर्बी जमा होने में अहम भूमिका निभाता है. अच्छी बात यह है कि तनाव को मैनेज करके और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके कॉर्टिसोल के लेवल को असरदार ढंग से कम कर सकते हैं, नतीजतन पेट की चर्बी भी कम की जा सकती है.

    कोर्टिसोल का क्या है पेट की चर्बी से कनेक्शन?

    कोर्टिसोल एक तरह का हार्मोन है, जो तनाव के कारण एड्रिनल ग्रंथियों द्वारा बनने लगता है. अपोलो के मुताबिक, कई मामलों में ये आपके शरीर को शॉर्ट-टर्म चुनौतियों (जैसे खतरे से भागना) से निपटने में मदद कर सकता है, लेकिन लंबे समय तक चलने वाला स्ट्रेस कोर्टिसोल लेवल को बढ़े रहने से कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती है, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. इनमें;

    पेट पर चर्बी का बढ़ना

    बाहर का अनहेल्दी खाने की क्रेविंग

    लंबे समय तक तनाव रहने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है और वजन कम करना मुश्किल हो सकता है.

    इतना ही नहीं, इस स्थिति को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इसके कारण दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बना रहता है और साथ ही, शुगर की समस्या आदि कई गंभीर बीमारियां आपकी सेहत बिगाड़ सकते हैं.

    कैसे दिखते हैं लक्षण और राहत पाने के उपाय?

    कोर्टिसोल के लेवल बढ़े होने पर कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, इसमें;

    डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद पेट की चर्बी कम न होना

    पूरी रात सोने के बाद भी थकान महसूस होना

    सोने में या नींद बनाए रखने में परेशानी

    अक्सर सिरदर्द या मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होना

    मूड बदलना, एंग्जायटी या चिड़चिड़ापन

    भूख बढ़ना, खासकर मीठा और कार्ब्स खाने की इच्छा होना आदि इसके लक्षणों में शामिल है.

    कोर्टिसोल को कम करने के लिए आप कुछ आसान टिप्स को अपना सकते हैं, जिसमें;

    तनाव को कम करना

    अच्छी नींद लेना

    कोर्टिसोल लेवल को बनाएं रखने वाली डाइट

    डॉक्टर से सलाह, जांच और उनके अनुसार दवाओं का सेवन.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें.

  • दुनिया का वो फल, जिसे खाने के बाद नींबू भी लगेगा मीठा,

    दुनिया का वो फल, जिसे खाने के बाद नींबू भी लगेगा मीठा,

    दुनिया का वो फल, जिसे खाने के बाद नींबू भी लगेगा मीठा,

    दुनिया में आपने कई तरह के फल खाए होंगे. कुछ मीठे होते हैं, कुछ खट्टे और कुछ स्वाद में बिल्कुल अलग. लेकिन क्या आपने कभी ऐसे फल के बारे में सुना है, जिसे खाने के बाद खट्टा नींबू भी आपको मीठा लगने लगे? सुनने में यह किसी जादू से कम नहीं लगता, लेकिन प्रकृति ने ऐसा फल सच में बनाया है. इसे खाने के बाद कुछ समय तक खट्टी चीजों का स्वाद भी मीठा महसूस हो सकता है. यही वजह है कि इसे ‘मिरेकल फ्रूट’ (Miracle Fruit) कहा जाता है. इस फल का वैज्ञानिक नाम Synsepalum dulcificum है. यह सपोटेसी फैमिली (Sapotaceae family) का पौधा है और पश्चिम अफ्रीका(West Africa) के घाना समेत कुछ अन्य इलाकों में पाया जाता है. इसके फल छोटे और लाल रंग के होते हैं और देखने में कुछ-कुछ बेरी जैसे लगते हैं. इस फल की सबसे खास बात इसका स्वाद नहीं, बल्कि इसका असर है. इसे खाने के बाद जब कोई व्यक्ति नींबू, सिरका या दूसरी खट्टी चीज भी खाता है तो उसका स्वाद कुछ समय के लिए मीठा लगता है.

    आखिर खट्टी चीज मीठी कैसे लगती है?
    इस फल में मिराकुलिन (Miraculin) नाम का एक ग्लाइकोप्रोटीन पाया जाता है. यही इस पूरे ‘चमत्कार’ के पीछे की वजह है. मिराकुलिन हमारी जीभ पर मौजूद स्वाद रिसेप्टर्स के साथ काम करता है. मिरैकल फ्रूट खाने के बाद जब हम कोई खट्टी चीज खाते हैं, तो उस खट्टी चीज की अम्लीयता(Acidity) मिराकुलिन के काम करने के तरीके को बदल देती है. इसके कारण दिमाग तक पहुंचने वाला स्वाद मीठा महसूस होने लगता है. यानी नींबू वही रहता है, लेकिन उसे खाने पर मिलने वाला स्वाद बदल जाता है.

    करीब एक घंटे तक महसूस हो सकता है असर
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिरैकल फ्रूट खाने के बाद इसका असर करीब 30 मिनट से एक घंटे या उससे कुछ ज्यादा समय तक रह सकता है. इस दौरान नींबू, सिरका जैसी खट्टी चीजें सामान्य से काफी मीठी लग सकती हैं. हालांकि इसका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है. यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि यह फल किसी खट्टी चीज की अम्लीयता को खत्म नहीं करता, बल्कि स्वाद महसूस होने के तरीके को बदलता है.

    फल को लंबे समय तक रखना है मुश्किल
    मिरैकल फ्रूट की एक बड़ी परेशानी यह है कि इसे लंबे समय तक ताजा रखना आसान नहीं होता. फल जल्दी खराब हो सकता है, इसलिए इसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण है. इसी वजह से मिराकुलिन को दूसरे रूपों में इस्तेमाल करने पर भी रिसर्च और काम किया गया है. मिरैकल फ्रूट से बने उत्पादों का इस्तेमाल कम चीनी वाले खाद्य पदार्थों में मीठा स्वाद महसूस कराने के लिए किया जा सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इसे किसी बीमारी का इलाज या वजन घटाने का आसान तरीका माना जाए.

    कैंसर मरीजों के लिए भी मददगार साबित हो रहा फल
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिन्सेपलम डुलसिफिकम (Synsepalum dulcificum) कैंसर के मरीजों के लिए खाने का अनुभव बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. इलाज के दौरान कई मरीजों को खाने का स्वाद अच्छा नहीं लगता. ऐसे में यह छोटा-सा लाल फल उनके लिए काफी दिलचस्प साबित हो रहा है. इसे खाने के बाद करीब 30 से 60 मिनट तक खट्टी और कुछ कड़वी चीजों का स्वाद मीठा महसूस हो सकता है. यानी मिरेकल फ्रूट खाने के बाद नींबू या दूसरे खट्टे फलों का स्वाद भी मीठा और स्वादिष्ट लगने लगता है. इससे मरीजों के लिए खाना कुछ हद तक ज्यादा स्वादिष्ट हो सकता है और खाने में उनकी रुचि बनी रह सकती है. इस तरह जरूरी पोषण लेने में भी मदद मिल सकती है.

    अफ्रीका से अमेरिका तक उगाया जाता है यह फल
    सिन्सेपलम डुलसिफिकम मूल रूप से पश्चिम अफ्रीका का फल है, लेकिन अब इसकी खेती अमेरिका के मियामी में भी की जाती है. इसके फल या जूस का सेवन करने के बाद नींबू जैसी खट्टी चीजों का स्वाद काफी अलग महसूस हो सकता है. यही अनोखी खासियत इसे दूसरे फलों से अलग बनाती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका में कुछ कैंसर अस्पतालों में भी मिरेकल बेरीज मरीजों को उपलब्ध कराई जाती हैं. फल जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए फ्रीज करके भी बेचा जाता है. हालांकि, इसे कैंसर का इलाज नहीं माना जाता, बल्कि इसका इस्तेमाल मरीजों के खाने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है.

     



  • पहली बार डेट पर जा रहे हैं? फर्स्ट डेट पर प्यार से पहले ये 5 चीजें नोटिस करता है सामने वाला, जरा सी गलती हुई तो रिश्ता जुड़ने से पहले ही हो जाएगा खत्म..

    पहली बार डेट पर जा रहे हैं? फर्स्ट डेट पर प्यार से पहले ये 5 चीजें नोटिस करता है सामने वाला, जरा सी गलती हुई तो रिश्ता जुड़ने से पहले ही हो जाएगा खत्म..

    पहली बार डेट पर जा रहे हैं? फर्स्ट डेट पर प्यार से पहले ये 5 चीजें नोटिस करता है सामने वाला, जरा सी गलती हुई तो रिश्ता जुड़ने से पहले ही हो जाएगा खत्म..

    किसी नए इंसान से पहली बार मिलते वक्त हम अक्सर सोचते हैं कि सामने वाला हमारे लुक्स और बातों से प्रभावित होगा या नहीं. लेकिन असल में पहली मुलाकात में कई ऐसी छोटी चीजें भी सामने वाले की नजर में आ जाती हैं, जिन पर हमारा ध्यान नहीं जाता. आपका व्यवहार, बातचीत और छोटी परेशानियों पर रिएक्शन रिश्ते की शुरुआत के बारे में काफी कुछ बता सकता है.

    1. दूसरों के साथ आपका व्यवहार कैसा है आप सिर्फ डेट पर सामने वाले के साथ अच्छा व्यवहार करें, इतना काफी नहीं. वह यह भी देख सकता है कि आप आसपास मौजूद लोगों से कैसे बात करते हैं. किसी वेटर या स्टाफ से रूखा व्यवहार आपके बारे में उतना ही बता सकता है, जितना सामने वाले से की गई मीठी बातें.

    2. क्या आप सामने वाले को बोलने देते हैं? अगर बातचीत में हर बार आप ही अपनी कहानी सुनाते रहें, तो यह आसानी से नोटिस हो जाता है. सामने वाला यह देख सकता है कि आप उसकी बात सुनते हैं या सिर्फ अपनी बारी का इंतजार करते हैं.

    3. खुद को लेकर आपका रवैया क्या है बहुत ज्यादा खुद की तारीफ करना और हर बात में खुद को साबित करना भी ध्यान खींच सकता है. वहीं अपनी कमियों को लेकर सहज रहना और बिना दिखावे के बात करना आत्मविश्वास का संकेत माना जा सकता है. असली कॉन्फिडेंस अक्सर शांत व्यवहार में नजर आता है.

    4. छोटी गड़बड़ी पर आप कैसे रिएक्ट करते हैं डेट के दौरान कोई चीज प्लान के मुताबिक न हो तो आपका असली मूड सामने आ सकता है. खाना देर से आया, रास्ते में परेशानी हुई या कोई छोटी गलती हो गई. ऐसे समय में आप गुस्सा करते हैं, चिढ़ते हैं या आराम से स्थिति संभाल लेते हैं, यह सामने वाला जरूर नोटिस कर सकता है.

    5. क्या आपकी दिलचस्पी सिर्फ डेट में है या इंसान में भी सिर्फ बातचीत चलाने के लिए सवाल पूछना और किसी को सच में जानने की कोशिश करना अलग बात है. सामने वाला यह महसूस कर सकता है कि आप उसकी बातों को याद रख रहे हैं, उसके अनुभवों में दिलचस्पी ले रहे हैं या बस अपनी पसंद-नापसंद बता रहे हैं.

  •  मेटल या लकड़ी किस प्रकार की नेमप्लेट चमकाती है किस्मत, जानें क्या कहता है वास्तु शास्त्र..

     मेटल या लकड़ी किस प्रकार की नेमप्लेट चमकाती है किस्मत, जानें क्या कहता है वास्तु शास्त्र..

     मेटल या लकड़ी किस प्रकार की नेमप्लेट चमकाती है किस्मत, जानें क्या कहता है वास्तु शास्त्र..

    Nameplate Vastu Tips: हम-आप में से बहुत लोग घर के मेन गेट और दहलीज के पास की दीवाल पर ‘नेमप्लेट’ लगाते हैं, जो भांति-भांति के होते हैं. ये लकड़ी, पत्थर, धातु, कांच, प्लास्टिक आदि में बने भिन्न-भिन्न शेप और साइज के दिखते हैं. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर की नेमप्लेट केवल इंसान की पहचान की जरिया नहीं है, बल्कि यह घर का भाग्य जगाने वाली एक चाबी या युक्ति भी है. कहते हैं, यह ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा और मां लक्ष्मी का ध्यान आपके घर की खींचती है. लेकिन इसमें दोष होने से यह घर की खुशियों में रुकावट भी बन सकती है. आइए जानते हैं, घर के नेमप्लेट से जुड़ा वास्तु नियम क्या है? मेटल, लकड़ी या पत्थर, कौन-सा नेमप्लेट भाग्य चमका सकती है.

    लकड़ी की नेमप्लेट

    वास्तु शास्त्र में लकड़ी की नेमप्लेट को स्थिरता और तरक्की का प्रतीक माना गया है. लकड़ी जो कि एक काष्ठ तत्व है, यह विकास, स्वास्थ्य और समृद्धि की वृद्धि का प्रतिनिधि है. नेमप्लेट के लिए हमेशा मजबूत और शुभ लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जैसे- सागवान, शीशम, महोगनी, आम। प्लाइबोर्ड, एमडीएफ मैटेरियल, प्लास्टिक आदि से बनी नकली लकड़ी की फील देने वाली नेमप्लेट लगाने से बचना चाहिए.

    मेटल की नेमप्लेट

    मेटल की नेमप्लेट को वास्तुशास्त्र में धन और नए अवसरों का द्वार कहा गया है. धातु की नेमप्लेट बनवाने के लिए पीतल, तांबा, स्टील, लोहे आदि का उपयोग किया जाता है. इनकी कलात्मक प्लेट काफी उपयोगी सिद्ध होती है.

    शुभ दिशा: वास्तु शास्त्र के अनुसार मेटल नेमप्लेट के लिए घर के मुख्यद्वार की उत्तर और पश्चिम दिशा सर्वोत्तम है। ये दिशा मेटल नेमप्लेट के लिय वरदान हैं. उत्तर दिशा कुबेर की है. इस दिशा में ब्रास यानी पीतल की नेम प्लेट पैसों की तंगी खत्म सकती है.

    पत्थर की नेमप्लेट

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, पत्थर का संबंध पृथ्वी तत्व है, जो सुरक्षा और मजबूती का परम प्रतीक है. यह देखा गया है कि लोग संगमरमर, ग्रेनाइट और अन्य रंगीन पत्थरों के खूबसूरत नेमप्लेट बनवाते हैं, जो बेहद शुभ माने गए हैं। ये बुरी नजर की नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेती है.

    शुभ दिशा: पत्थर के नेमप्लेट के लिए दक्षिण पश्चिम और उत्तर पश्चिम दिशा शुभ होते हैं. दक्षिण पश्चिम के स्वामी पृथ्वी तत्व है. यहां नेमप्लेट लगाने से घर के मुखिया का समाज और परिवार में दबदबा रहता है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी वास्तु शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • कम उम्र में फैटी लिवर? बिना शराब पिए भी लिवर क्यों हो रहा है डैमेज, जानिए शुरुआती संकेत.

    कम उम्र में फैटी लिवर? बिना शराब पिए भी लिवर क्यों हो रहा है डैमेज, जानिए शुरुआती संकेत.

    कम उम्र में फैटी लिवर? बिना शराब पिए भी लिवर क्यों हो रहा है डैमेज, जानिए शुरुआती संकेत.

    आज के वक्त में लोगों ने अपनी लाइफस्टाइल को इतना खराब कर लिया है कि शरीर अंगों का घर कम बीमारियों को अड्डा बनता चला जा रहा है. आप गौर करेंगे कि आज के वक्त में किसी फिट आदमी को ढूंढना रेगिस्तान में पानी मिलना जितना मुश्किल हो गया है. बड़ी संख्या में लोग ऐसे हैं, जो दिल की बीमारी, मोटापा, शुगर की समस्या से पीड़ित है. इसी में एक समस्या जो सबसे ज्यादा लोगों को परेशान करती है और अपना शिकार बना रही है, वह है फैटी लिवर की समस्या. इस समस्या को लेकर माना जाता रहा है कि फैटी लिवर उन्हीं को होता, जो शराब का सेवन करते हैं, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है, शराब को हाथ तक नहीं लगाने वाले युवा जिनकी उम्र भी कम होती है, वह भी इस समस्या का तेजी से शिकार हो रहे हैं. आइए जानते हैं क्यों.

    क्या है नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर?

    नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर Non-Alcoholic Fatty Liver Disease (NAFLD) एक ऐसी स्थिति है जिसमें शराब का सेवन न करने के बावजूद लिवर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा हो जाती है. इस स्थिति की सबसे खतरनाक बात ये होती है कि, इसके शुरुआती चरण में आमतौर पर कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते, साथ ही अक्सर लोगों को मालूम ही नहीं चलता है कि उनके लिवर पर फैट जमा हो रही है, जिसके बाद समस्या गंभीर होती जाती है और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है.

    युवाओं में किन-किन कारणों से हो सकता है फैटी लिवर?

    ILBS द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, फैटी लिवर बीमारी के आम जोखिम कारण हो सकते हैं, इनमें;

    डायबिटीज

    ज्यादा वजन/ मोटापा

    हाई ब्लड प्रेशर की समस्या

    डिस्लिपिडेमिया

    मेटाबोलिक सिंड्रोम (नीचे दी गई सूची में से कोई भी 3 स्थितियां: इंसुलिन रेजिस्टेंस/डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, पेट का मोटापा, हाई ट्राइग्लिसराइड लेवल और कम HDL-कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ा सकती है).

    जेनेटिक कारण

    अस्वस्थ खानपान

    सुस्त जीवनशैली यानी फिजिकल एक्टिविटी की कमी

    फैटी लिवर की समस्या में ऐसे दिखते हैं संकेत

    शुरुआती स्टेज में ज्यादातर लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते, लेकिन कुछ लोगों में नीचे दिए गए स्थितियों में दिखाई दे सकते हैं.

    पेट में दर्द का बना रहना

    बहुत ज्यादा थकान

    भूख न लगना

    जी मिचलाना

    कैसे खुद को रखें फैटी लिवर की समस्या से दूर

    फैटी लिवर की बीमारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका है अपनी सेहत का ध्यान रखें, इसके लिए वजन सही बनाए रखें. अगर वजन ज्यादा है या मोटापा है, तो धीरे-धीरे वजन कम करने की कोशिश करें. इसके साथ ही, हेल्दी डाइट लें, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें, शराब का सेवन बंद करें, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें. हालांकि, अगर को फैटी लिवर हो गया है, तो आपको क्या करना चाहिए इसके बारे में भी ILBS ने जानकारी दी है. ILBS के अनुसार, वजन कम करें, हेल्दी खाना खाएं जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, सलाद और ज्यादा फाइबर वाला खाना खाएं. इसके साथ ही, फिजिकल एक्सरसाइज करें, शराब से दूर रहें और फैटी खाना खाने से बचें.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें.