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  • कमर दर्द और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए 3 योगाभ्यास, बाबा रामदेव से जानें करते समय कौन सी सावधानियां रखें..

    कमर दर्द और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए 3 योगाभ्यास, बाबा रामदेव से जानें करते समय कौन सी सावधानियां रखें..

    कमर दर्द और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए 3 योगाभ्यास, बाबा रामदेव से जानें करते समय कौन सी सावधानियां रखें..

    गलत लाइफस्टाइल, घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण आजकल कमर दर्द और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं बेहद आम हो गई हैं। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या क्रोनिक पेन का रूप ले सकती है। योग और प्राणायाम के नियमित अभ्यास से न केवल कमर के निचले हिस्से की मांसपेशियों में खिंचाव और मजबूती आती है, बल्कि रीढ़ की हड्डी का लचीलापन भी बेहतर होता है। योग गुरु बाबा रामदेव के अनुसार, सही तकनीक और सावधानियों के साथ किए गए योगाभ्यास कमर दर्द से राहत दिलाने और हड्डियों की कार्यक्षमता को बनाए रखने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं। आइए बाबा रामदेव से जानते हैं ऐसे ही 3 प्रमुख योगासनों के बारे में और उन्हें करते समय कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए।

    कमर दर्द में भुजंगासन करें

    बाबा रामदेव ने बताया भुजंगासन (Cobra Pose) को कमर और रीढ़ के लिए उपयोगी योगासन माना जाता है। उनके अनुसार, नियमित रूप से सही तकनीक से भुजंगासन करने से कमर की मांसपेशियों में खिंचाव और मजबूती आने में मदद मिल सकती है। इस योगासन को करने से कमर की मांसपेशियों में खिंचाव आता है। भुजंगासन में धड़ को ऊपर उठाने से पीठ और कमर की मांसपेशियों में नियंत्रित स्ट्रेच आता है। यह योगासन रीढ़ को पीछे की ओर एक्सटेंशन देता है, जिससे उसकी गतिशीलता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। नियमित अभ्यास से बैक मसल्स की ताकत और सहनशीलता बेहतर हो सकती है और पोश्चर में सुधार होता है। इसे रोज करने से मांसपेशियों की जकड़न और stiffness को कम करने में मदद मिल सकती है।

    इस बात का रखें ध्यान: भुजंगासन हर तरह के कमर दर्द का इलाज नहीं है। अगर दर्द बहुत तेज है, पैर में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी है, दर्द पैर तक जाता है, या रीढ़ की कोई समस्या है, तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के यह आसन न करें। दर्द बढ़ने पर तुरंत रोक दें।

    बालासन कीजिए

    बाबा रामदेव के योग संबंधी अभ्यासों में बालासन (Child’s Pose) को कमर और पीठ की मांसपेशियों को आराम देने वाला आसन माना जाता है। उनके अनुसार, इसे नियमित और सही तरीके से करने से कमर की जकड़न कम होती है और रीढ़ और आसपास की मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद मिल सकती है। बालासन में शरीर आगे की ओर झुकता है, जिससे पीठ और कमर की मांसपेशियों को हल्का स्ट्रेच मिलता है।

    लंबे समय तक बैठने या गलत पोश्चर के कारण होने वाली stiffness में यह आराम दे सकता है। इस योगासन को करने से  रीढ़ पर कम दबाव पड़ता है और पीठ को आराम मिलता है। इसका हल्का स्ट्रेच रीढ़ और आसपास के soft tissues की मोबिलिटी बनाए रखने में मददगार हो सकता है। ये एक आरामदायक योग मुद्रा है, इसलिए इससे शरीर और मन को रिलैक्स करने में मदद मिल सकती है।

    ध्यान रखें: बालासन हर तरह के कमर दर्द का इलाज नहीं है। अगर कमर दर्द बहुत तेज है, पैर में दर्द,सुन्नपन या कमजोरी है, चोट लगी है या दर्द लगातार बना हुआ है, तो योगासन करने से पहले डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेना बेहतर है।

    मकरासन कीजिए

    बाबा रामदेव ने बताया मकरासन (Crocodile Pose) को कमर और पीठ को आराम देने वाला योगासन माना जाता है। इसमें शरीर को पेट के बल आराम की स्थिति में रखा जाता है, जिससे कमर और रीढ़ पर अनावश्यक तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। मकरासन में शरीर रिलैक्स रहता है, जिससे पीठ और कमर की मांसपेशियों के तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने से होने वाली stiffness को कम करने में यह योगासन मदद करता है।पेट के बल आराम की मुद्रा में रहने से पीठ को आराम मिलता है। मांसपेशियों की थकान कम होती है और शरीर रिलेक्स रहता है। धीमी और गहरी सांसों के साथ करने पर यह शरीर को शांत और तनाव मुक्त करने में सहायक हो सकता है।

    इस बात का रखें ध्यान: मकरासन को कमर दर्द का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। अगर दर्द बहुत तेज है, पैर तक फैल रहा है या पैर में सुन्नपन, झनझनाहट या कमजोरी है, तो योगासन करने के बजाय डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लें।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य और योग संबंधी जागरूकता के लिए है। योगासन कमर दर्द के कारण और गंभीरता के अनुसार अलग-अलग प्रभाव डाल सकते हैं। इन्हें सही तकनीक और विशेषज्ञ की सलाह से ही करें। तेज दर्द, चोट, पैर में सुन्नपन,झनझनाहट या कमजोरी जैसी समस्या होने पर डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से परामर्श लें। योग किसी चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं है।

  • घर के ये 4 आसान वास्तु उपाय बदल सकते हैं किस्मत, खुलेंगे तरक्की और समृद्धि के रास्ते..

    घर के ये 4 आसान वास्तु उपाय बदल सकते हैं किस्मत, खुलेंगे तरक्की और समृद्धि के रास्ते..

    घर के ये 4 आसान वास्तु उपाय बदल सकते हैं किस्मत, खुलेंगे तरक्की और समृद्धि के रास्ते..

    Vastu Upay: कई बार कड़ी मेहनत के बावजूद मनचाही सफलता नहीं मिलती या घर में तनाव और आर्थिक समस्याएं बनी रहती हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार इसके पीछे घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष भी एक कारण हो सकते हैं। मान्यता है कि कुछ सरल उपाय अपनाकर इन दोषों के प्रभाव को कम किया जा सकता है और सुख-समृद्धि के रास्ते खोले जा सकते हैं। यहां जानिए कुछ ऐसे ही आसान और असरदार उपायों के बारे में।

    मुख्य द्वार पर गणेश जी

    वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है। मान्यता है कि मुख्य दरवाजे पर भगवान गणेश की प्रतिमा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बाधाएं दूर होती हैं। इससे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

    बीम के नीचे न बैठें

    वास्तु शास्त्र के अनुसार बीम के ठीक नीचे बेड, सोफा या कार्यस्थल रखना उचित नहीं माना जाता। ऐसा करने से मानसिक तनाव और असहजता महसूस हो सकती है। यदि स्थान बदलना संभव न हो तो वास्तु उपायों की मदद ली जा सकती है।

    घर के कोने रखें साफ

    घर के कोनों में धूल, गंदगी या मकड़ी के जाले जमा होना शुभ नहीं माना जाता। इसलिए मुख्य द्वार, ब्रह्म स्थान और अन्य कोनों की नियमित सफाई करते रहें। घर की छत और सीढ़ियों को भी साफ-सुथरा रखें। टूटे-फूटे सामान, कबाड़ या सूखे पौधे नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं। वहीं, साफ और व्यवस्थित स्थान सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक होता है।

    लीकेज और सीलन करें दूर

    वास्तु शास्त्र में पानी को समृद्धि का प्रतीक माना गया है। घर में पानी का रिसाव या दीवारों में सीलन होना वास्तु की दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए घर में कहीं भी लीकेज दिखाई दे तो उसे जल्द ठीक कराना बेहतर माना जाता है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • Pithori Amavasya 2026: 10 या 11 सितंबर कब है पिठोरी अमावस्या, जानें सही तिथि, मुहूर्त और महत्व

    Pithori Amavasya 2026: 10 या 11 सितंबर कब है पिठोरी अमावस्या, जानें सही तिथि, मुहूर्त और महत्व

    Pithori Amavasya 2026: 10 या 11 सितंबर कब है पिठोरी अमावस्या, जानें सही तिथि, मुहूर्त और महत्व

    Pithori Amavasya 2026 (कब है पिठोरी अमावस्या 2026): हिंदू धर्म में हर मास में पड़ने वाली अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। ऐसे ही भाद्रपद मास में पड़ने वाली अमावस्या को पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने के साथ दान करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। पितर प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते सकते हैं। इस साल भादो अमावस्या तिथि दो दिन होने के कारण असमंसज की स्थिति बनी हुआ है कि किस दिन पिठोरी अमावस्या का व्रत रखें। इसे पिठोरी अमावस्या, भादो अमावस्या के अलावा कुशाग्रहणी और कुशोत्पाटिनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। बता दें कि इस साल पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर को मनाई जा रही है। जानिए पिठोरी अमावस्या की तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व…

    पिठोरी अमावस्या 2026 की तिथि और मुहूर्त (Pithori Amavasya 2026 Muhurat)

    द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद मास के  कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे से आरंभ हो रही है, जो 11 सितंबर को सुबह 8:56 बजे को समाप्त होगी। ऐसे में पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।

    पिठोरी अमावस्या पर पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त- सुबह 06.07 बजे से लेकर सुबह 09.18 बजे तक
    पितरों के तर्पण और पिंडदान का समय- 10 सितंबर दोपहर 11.45 बजे से लेकर दोपहर 01.30 बजे तक

    पिठोरी व्रत प्रदोष मुहूर्त – 06:32 पी एम से 08:51 पी एम

    पिठोरी अमावस्या 2026 महत्व (Pithori Amavasya 2026 Significance)

    हिंदू धर्म में पिठोरी अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत, तप और जप करने से संतान को सुख-समृद्धि, लंबी आयु के साथ परिवार में खुशहाली बनी रहती हैं। अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करने के साथ भगवान शिव और पार्वती जी की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दिन आटे से64 योगिनियों/देवी-स्वरूपों की मूर्ति बनाकर पूजा करने का विधान है। इसी के कारण इसे पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। इसके अलावा इस दिन पितरों का तर्पण,स्मरण करने के साथ-साथ दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है।

    पिठोरी अमावस्या पर 64 देवियों की पूजा

    पिठोरी अमावस्या की एक विशेष लोक-परंपरा प्रचलित है। इस दिन 64 योगिनियों/देवी-स्वरूपों का पूजन किया जाता है। इसका मुख्य भाव संतान की रक्षा, संतान-सुख, परिवार की समृद्धि और मातृशक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करना है। इस दिन आटे से इन्हें देवी स्वरूपों को बनाया जाता है और विधिवत पूजा की जाती है।

    पिठोरी अमावस्या 2026 मंत्र

    सामान्य पितृ मंत्र: इस मंत्र का पिठोरी अमावस्या के दिन 108 बार जाप करें- ॐ पितृ देवतायै नमः
    पितृ गायत्री मंत्र : ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।
    तर्पण एवं स्वधा मंत्र: ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वाहा या ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।

    डिसक्लेमर- इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

  • महिला के सीने में उठा तेज दर्द… सर्जरी हुई तो पेट से निकले पेट से निकले 14 पेन, 5 चम्मच और एक मोमबत्ती.

    महिला के सीने में उठा तेज दर्द… सर्जरी हुई तो पेट से निकले पेट से निकले 14 पेन, 5 चम्मच और एक मोमबत्ती.

    महिला के सीने में उठा तेज दर्द… सर्जरी हुई तो पेट से निकले पेट से निकले 14 पेन, 5 चम्मच और एक मोमबत्ती.

    आंध्र प्रदेश के पलनाडु जिले के मुख्यालय नरसाराओपेट स्थित एक निजी अस्पताल से एक बेहद हैरान करने वाला और मेडिकल जगत को चकित कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां सीने में दर्द की शिकायत लेकर पहुंची 33 वर्षीय महिला की जब डॉक्टरों ने जांच की, तो उसके पेट के अंदर का नजारा देखकर सब हैरान रह गए. महिला के पेट में 14 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और एक मोमबत्ती मौजूद थी. डॉक्टरों की टीम ने तुरंत लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कर इन सभी चीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है.

    जानकारी के अनुसार, पेटलुरिवारीपलेनी मंडल की रहने वाली 33 वर्षीय विवाहित महिला को पिछले कुछ समय से सीने में तेज दर्द की शिकायत थी. शनिवार को जब दर्द असहनीय हो गया, तो परिजन उसे आनन-फानन में नरसाराओपेट स्थित माताश्री अस्पताल ले गए. वहां डॉक्टरों ने जब कई तरह के मेडिकल टेस्ट और स्कैन किए, तो महिला के पेट के अंदर असामान्य वस्तुएं होने की पुष्टि हुई.

    लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से निकाली गईं वस्तुएं

    मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने महिला का ऑपरेशन करने का फैसला लिया. पेट में एक छोटा सा छेद करके (लैप्रोस्कोपिक सर्जरी) 14 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और 1 मोमबत्ती को सफलता पूर्वक बाहर निकाला गया.

    डॉक्टरों ने बताया कि इनमें से एक पेन का ढक्कन नहीं था, जिसकी वजह से वह पेट की अंदरूनी सतह पर चुभ रहा था और महिला को अत्यधिक दर्द हो रहा था. डॉक्टरों का कहना है कि किसी इंसान का एक साथ इतनी सारी ठोस चीजें निगल लेना बेहद दुर्लभ और असामान्य बात है.

    10 साल से मानसिक बीमारी से पीड़ित है पीड़िता

    घटना के बाद पीड़िता के पिता नोमुला हनुमंथा राव ने बताया कि उनकी बेटी पिछले 10 वर्षों से गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित है, जिसके कारण उसके व्यवहार में असामान्य बदलाव आते रहते हैं. पिता ने यह भी बताया कि बीमारी और घरेलू तनाव की वजह से दो महीने पहले ही उसके पति ने उसे तलाक दे दिया था.

    सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने बताया कि महिला की स्थिति फिलहाल स्थिर है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रही है. डॉक्टरों ने सलाह दी है कि महिला को शारीरिक इलाज के साथ-साथ अब किसी वरिष्ठ मनोचिकित्सक की देखरेख और नियमित काउंसलिंग की सख्त जरूरत है.

  • दो साल बाद की दुनिया में फंस गया शख्स, 2028 में है 340 दिन से अटका..

    दो साल बाद की दुनिया में फंस गया शख्स, 2028 में है 340 दिन से अटका..

    दो साल बाद की दुनिया में फंस गया शख्स, 2028 में है 340 दिन से अटका..

    इन दिनों दुनिया भर में युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं और अशांति की खबरें आम हो गई हैं. नेपाल की आपदा हो या अंतरराष्ट्रीय तनाव, कई लोग भविष्य को लेकर चिंतित दिखते हैं. ऐसे में सोशल मीडिया पर एक नया दावा चर्चा में है. इसमें एक व्यक्ति जो खुद को टाइम ट्रैवलर बता रहा है ने कहा कि वह भविष्य यानी 2028 से लौटा है और वहां उसने पूरे लगभग एक साल अकेले बिताए है.

    2028 में उसे पूरी पृथ्वी पर एक भी इंसान नहीं मिला. यह शख्स टिकटॉक पर सक्रिय है और अपना खाता @unicosobreviviente चलाता है जिसका मतलब है “इकलौता जीवित बचा हुआ”. उसका नाम जेवियर बताया जा रहा है और वह स्पेन में होने का दावा करता है. उसने वैलेंसिया, बार्सिलोना, मैड्रिड और सेविले जैसे शहरों के वीडियो अपलोड किए हैं जिनमें सड़कें पूरी तरह सुनसान दिखती हैं. गाड़ियां खड़ी हैं, इमारतें जैसी की तैसी हैं लेकिन कोई इंसान नजर नहीं आता.

    वीडियो में दिखाता है भविष्य
    जेवियर के वीडियो में भविष्य की झलक दिखती है. एक वीडियो में वह म्यूजियम के अंदर घूम रहा है जो आम दिनों में लोगों से भरा रहता है. दूसरे में समुद्र तट पर अकेला खड़ा है और ड्रोन शॉट्स भी हैं. जेवियर का कहना है कि वह भविष्य में फंस गया है और वापस आने का रास्ता ढूंढ रहा है. हाल के पोस्ट में उसने लिखा कि अकेले 340 दिन पूरे हो चुके हैं. वह शहरों का दौरा कर चुका है लेकिन कहीं कोई मानव जीवन नहीं मिला. वह खाना ढूंढकर खा रहा है और उम्मीद खोता जा रहा है. कुछ वीडियो में वह फॉलोअर्स से मदद की अपील भी करता है. दिलचस्प बात यह है कि भविष्य में भी बिजली और इंटरनेट चल रहा है जिससे वह वीडियो बनाकर अपलोड कर पा रहा है. जब यूजर्स ने इस बारे में सवाल किया तो उसने कहा कि शायद 2021 से 2027 के बीच कोई कनेक्शन है. यह जवाब कई लोगों को और संदिग्ध लगा.

    बढ़ रहे फॉलोवर्स
    टिकटॉक पर उसके लाखों फॉलोअर्स हो गए हैं. कुछ लोग उसकी कहानी को रोमांचक मानकर देख रहे हैं तो कई उसे झूठा करार दे रहे हैं. आलोचक कहते हैं कि सुनसान सड़कों के वीडियो सुबह जल्दी या कम आबादी वाले इलाकों में आसानी से बनाए जा सकते हैं. सावधानी से एडिटिंग और कोण चुनकर पूरी तरह खाली शहर का अहसास दिया जा सकता है. पूर्ण तबाही में बिजली, इंटरनेट और काम करते उपकरण कैसे बचेंगे, यह सवाल भी लाजमी है. टाइम ट्रैवल के दावे सोशल मीडिया पर नए नहीं हैं. पहले भी कई लोग भविष्य या अतीत से आने का दावा कर चुके हैं और बाद में वे प्रदर्शन, प्रैंक या ध्यान खींचने के तरीके साबित हुए. जेवियर का केस भी इसी श्रेणी में रखा जा रहा है. फिर भी उसकी वीडियोस की बनावट और लगातार अपडेट्स ने लोगों का ध्यान खींचा है.

  • एक कप छिले हुए अनार के दाने खाने से बॉडी को क्या मिलता है?

    एक कप छिले हुए अनार के दाने खाने से बॉडी को क्या मिलता है?

    एक कप छिले हुए अनार के दाने खाने से बॉडी को क्या मिलता है?

    अनार को सेहत के लिए सुपर फूड माना जाता है, जो विटामिन सी, पोटैशियम, आयरन और पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। डेली डाइट में इसे शामिल करने से न केवल शरीर का ब्लड सर्कुलेशन और हीमोग्लोबिन स्तर बेहतर होता है, बल्कि यह दिल की सेहत और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी काफी मददगार साबित होता है। हालांकि, किसी भी फल का पूरा फायदा तभी मिलता है जब उसका सेवन सही समय और सही मात्रा में किया जाए। अनार अपने चमकीले लाल रंग के जूस के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है, लेकिन यह फल सिर्फ स्वाद और रंग तक सीमित नहीं है। इसमें कई पोषक तत्व और जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जो संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

    क्लीनिकल डायटीशियन जी सुषमा ने बताया कि अनार में कई तरह के कंपाउंड जैसे कि एंटीऑक्सीडेंट्स और पॉलिफिनॉल्स होते हैं जो ब्रेन की हेल्थ को दुरुस्त करते हैं। स्वास्थ्य और आहार विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित रूप से सही तरीके से अनार का सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी में सुधार होता है। आइए जानते हैं रोजाना एक कप अनार खाने से शरीर को कौन-कौन से मुख्य पोषक तत्व और फायदे मिलते हैं।

    पोषक तत्वों से भरपूर होता है अनार

    हेल्थलाइन के मुताबिक अनार में कैलोरी और वसा की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि इसमें फाइबर, विटामिन और कई खनिज पाए जाते हैं। एक अनार में लगभग

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    कैलोरी: 234
    प्रोटीन: 4.7 ग्राम
    वसा: 3.3 ग्राम
    कार्बोहाइड्रेट: 52 ग्राम
    फाइबर: 11.3 ग्राम
    विटामिन C: दैनिक जरूरत का लगभग 32 प्रतिशत
    फोलेट: दैनिक जरूरत का लगभग 27 प्रतिशत
    मैग्नीशियम: दैनिक जरूरत का लगभग 8 प्रतिशत
    फॉस्फोरस: दैनिक जरूरत का लगभग 8 प्रतिशत
    पोटैशियम: दैनिक जरूरत का लगभग 13 प्रतिशत होता है।

    अनार के जूस में पूरे फल की तुलना में फाइबर बहुत कम होता है। पूरा अनार कम वसा वाला फाइबर, विटामिन और खनिजों से भरपूर फल है इसका सेवन दानों के रूप में करना फायदेमंद होता है।

    एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है अनार

    अनार में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और पॉली फेनोलिक यौगिक पाए जाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट ऐसे यौगिक हैं जो शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। अनार में प्यूनिकालाजिन्स (Punicalagins), एंथोसायनिन्स (Anthocyanins) और हाइड्रोलाइजेबल टैनिन्स (Hydrolyzable Tannins) जैसे जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। अनार को संतुलित डाइट का हिस्सा बनाना संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।

    सूजन कम करने में मदद कर सकता है

    शरीर में लंबे समय तक रहने वाली क्रोनिक इंफ्लेमेशन (Chronic Inflammation) कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है, जिनमें हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और कुछ प्रकार के कैंसर शामिल हैं। अनार में मौजूद प्यूनिकालाजिन्स में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए गए हैं। कुछ अध्ययनों में अनार के जूस के सेवन से शरीर में सूजन से जुड़े कुछ मार्क्स में कमी देखी गई है।

    कैंसर से बचाव में करता है मदद

    अनार में मौजूद कुछ जैव सक्रिय यौगिकों पर कैंसर से जुड़े संभावित प्रभावों को लेकर रिसर्च किया गया है। कुछ प्रयोगशाला और पशु अध्ययनों में अनार के यौगिकों में एंटी-कैंसर प्रभाव देखे गए हैं। कुछ शोधों में यह भी संकेत मिला है कि अनार के अर्क से कुछ कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि या ट्यूमर के विकास पर प्रभाव पड़ सकता है।

    दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है अनार

    अनार में पाए जाने वाले पॉलीफेनोलिक यौगिक दिल की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। कुछ अध्ययनों में अनार के जूस के सेवन के बाद ब्लड प्रेशर और हृदय स्वास्थ्य से जुड़े कुछ संकेतकों में सकारात्मक बदलाव देखे गए हैं। हृदय रोग से पीड़ित लोगों पर किए गए एक अध्ययन में अनार का जूस पीने से सीने में होने वाले दर्द और गंभीरता में कमी देखी गई।

    यूरिनरी और किडनी हेल्थ को कर सकता है सपोर्ट

    कुछ रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि अनार का जूस किडनी स्टोन (पथरी) बनने से रोकने में मददगार साबित होता है। एक अध्ययन में अनार के अर्क को बार-बार किडनी स्टोन बनने वाले लोगों में पथरी बनने से जुड़े एक तंत्र को प्रभावित करते हुए पाया गया। जानवरों पर की हई रिसर्च के मुताबिक अनार के अर्क का ऑक्सालेट, कैल्शियम और फॉस्फेट जैसे पदार्थों पर प्रभाव किडनी स्टोन के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

    दिमाग की सेहत के लिए भी हो सकता है फायदेमंद

    डायटीशियन जी सुषमा ने बताया कि अनार में कई तरह के कंपाउंड मौजूद होते हैं जो ब्रेन की हेल्थ को दुरुस्त करते हैं अनार में एलैजिटैनिन्स (Ellagitannins) नामक एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन को कम करने में संभावित भूमिका निभा सकते हैं।

    कुछ अध्ययनों में यह संभावना सामने आई है कि अनार में मौजूद ये यौगिक मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं। एलैजिटैनिन्स से आंतों में यूरोलिथिन A (Urolithin A) नामक यौगिक बन सकता है, जिस पर मस्तिष्क में सूजन और उम्र से संबंधित संज्ञानात्मक समस्याओं के संदर्भ में शोध किया गया है। हालांकि, अल्जाइमर या पार्किंसन जैसी बीमारियों से बचाव या इलाज में अनार की भूमिका को साबित करने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जागरूकता के लिए है। अनार एक पौष्टिक फल है, लेकिन इसके सेवन से किसी बीमारी का इलाज या बचाव सुनिश्चित नहीं होता। किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या, एलर्जी या चिकित्सकीय स्थिति में डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लें।

  • पश्चिम मुखी घर में कहां बनाएं किचन? गलत दिशा बिगाड़ सकती है घर का वास्तु, रसोई बनवाने से पहले जान लें नियम..

    पश्चिम मुखी घर में कहां बनाएं किचन? गलत दिशा बिगाड़ सकती है घर का वास्तु, रसोई बनवाने से पहले जान लें नियम..

    पश्चिम मुखी घर में कहां बनाएं किचन? गलत दिशा बिगाड़ सकती है घर का वास्तु, रसोई बनवाने से पहले जान लें नियम..

    वास्तु शास्त्र में घर की हर दिशा और उसमें बने कमरों का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि घर में रसोई की सही दिशा परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति से जुड़ी होती है। अगर आपका घर पश्चिम मुखी (West Facing) है, तो रसोई बनवाते समय कुछ वास्तु नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं पश्चिम मुखी घर में किचन की सही दिशा और गलत स्थान पर रसोई होने से जुड़ी मान्यताएं।

    पश्चिम मुखी घर में कहां बनाएं रसोई?

    वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में रसोई की सही दिशा का चुनाव महत्वपूर्ण होता है। मान्यता है कि सही स्थान पर बनी रसोई घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में सहायक होती है । पश्चिम मुखी घर में रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा सबसे सही मानी जाती है। इसे आग्नेय कोण कहा जाता है और यह दिशा अग्नि तत्व से जुड़ी मानी गई है। मान्यता है कि इस दिशा में रसोई होने से घर में पॉजिटिविटी बनी रहती है और परिवार की सुख-समृद्धि बढ़ती है।

    इसके अलावा पश्चिम मुखी घर में उत्तर-पश्चिम दिशा यानी वायव्य कोण में भी रसोई बनाई जा सकती है। वास्तु में इस दिशा को भी किचन के लिए उपयुक्त माना गया है। मान्यता है कि चंद्रमा से जुड़ी इस दिशा में रसोई होने से स्वास्थ्य संबंधी लाभ मिल सकते हैं।

    आर्थिक परेशानियां

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार अगर रसोई सही दिशा में न हो तो इसका असर घर की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है । ऐसी स्थिति में धन से जुड़ी परेशानियां बढ़ने की बात कही जाती है। नौकरी और व्यापार में भी रुकावट आने की मान्यता है।

    सेहत पर असर

    वास्तु के अनुसार रसोई की गलत दिशा का प्रभाव परिवार के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। मान्यता है कि ऐसी स्थिति में घर के सदस्यों को बार-बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

    पारिवारिक तनाव का कारण

    रसोई को परिवार की ऊर्जा से जोड़कर भी देखा जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार गलत दिशा में बनी रसोई घर में तनाव और मतभेद का कारण बन सकती है। कई बार परिवार के सदस्यों के बीच दूरी बढ़ने की बात भी कही जाती है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • सफेद फॉर्च्यूनर से चलता है ये सफाईकर्मी! स्वैग देख पब्लिक बोली- भाई ने सिस्टम ही हिला दिया!.

    सफेद फॉर्च्यूनर से चलता है ये सफाईकर्मी! स्वैग देख पब्लिक बोली- भाई ने सिस्टम ही हिला दिया!.

    सफेद फॉर्च्यूनर से चलता है ये सफाईकर्मी! स्वैग देख पब्लिक बोली- भाई ने सिस्टम ही हिला दिया!.

    सोशल मीडिया पर इन दिनों कर्नाटक के बंटवाल से आई एक ऐसी खबर छाई हुई है, जो दिल को छू लेने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर कर देती है. बीसी रोड पर जब एक चमचमाती सफेद रंग की टोयोटा फॉर्च्यूनर आकर रुकी, तो सबको लगा कि कोई बड़ा अफसर या नेता उतरा होगा. लेकिन गाड़ी का दरवाजा खुला, तो हाथ में झाड़ू थामे और चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान लिए सेसप्पा बाहर निकले.

    एक वक्त ऐसा भी था, जब कफन तक के पैसे नहीं थे

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आज फॉर्च्यूनर में घूमने वाले सेसप्पा की जिंदगी हमेशा ऐसी नहीं थी. उनका अतीत बहुत दर्दनाक और संघर्षों से भरा रहा है. साल 1996 में जब उन्होंने बंटवाल नगर परिषद में नौकरी शुरू की थी, तब उन्हें रोजाना सिर्फ 50 रुपए दिहाड़ी मिलती थी.

    महज तीसरी क्लास तक पढ़े सेसप्पा का परिवार इतनी गरीबी में था कि कई बार भूखे पेट सोना पड़ता था. उनके जीवन का सबसे काला दिन तब आया, जब उनके पिता का निधन हो गया. परिवार के पास अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे. मजबूरी में उन्हें अपने पिता के पार्थिव शरीर को नेत्रावती नदी के किनारे ले जाकर खुद विसर्जन करना पड़ा था. उस दिन उन्होंने ठान लिया कि हालात चाहे जैसे हों, वे अपने परिवार को इस लाचारी से बाहर निकालकर रहेंगे.

    एक पुलिसवाले की सलाह ने बदल दी तकदीर

    गरीबी और तनाव की वजह से एक वक्त सेसप्पा को शराब की लत लग गई थी. लेकिन साल 2005 में बंटवाल के तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर के.यू. बेलियप्पा की एक बात ने उनकी जिंदगी पलट दी. उन्होंने तुरंत शराब छोड़ दी और अपनी पूरी ताकत मेहनत करने में झोंक दी.

    नगर निगम की ड्यूटी के बाद वे खाली नहीं बैठते थे. उन्होंने खेती की, दूध बेचने का काम किया और पंचायत में पानी सप्लाई का जिम्मा भी उठाया. वे अपनी छोटी-छोटी बचत और लोन के जरिए धीरे-धीरे आगे बढ़े. उन्होंने पहले मारुति 800 और फिर स्कॉर्पियो जैसी गाड़ियां चलाईं और आखिरकार मेहनत के दम पर एक सेकंड हैंड फॉर्च्यूनर खरीद ही ली.

    ‘काम कोई छोटा नहीं होता’

    नगर निगम के अधिकारी भी सेसप्पा की सादगी और मेहनत के कायल हैं. सुबह-सुबह अपनी लग्जरी गाड़ी से आने के बाद भी वे बिना किसी अहंकार के झाड़ू उठाते हैं और पूरी ईमानदारी से अपनी सफाई की ड्यूटी निभाते हैं.

  • Vishwakarma Puja 2026: सितंबर में कब है विश्वकर्मा पूजा, नोट कर लें सही डेट और पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

    Vishwakarma Puja 2026: सितंबर में कब है विश्वकर्मा पूजा, नोट कर लें सही डेट और पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

    Vishwakarma Puja 2026: सितंबर में कब है विश्वकर्मा पूजा, नोट कर लें सही डेट और पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

    Vishwakarma Jayanti 2026: हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के शिल्पकार, वास्तुकार और निर्माण कला के जनक के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए भव्य महलों, अस्त्र-शस्त्रों और दिव्य नगरों का निर्माण किया था। इसलिए विश्वकर्मा पूजा के दिन विशेष रूप से कारखानों, मशीनों, औजारों, दुकानों और कार्यस्थलों में पूजा-अर्चना की जाती है। यह पर्व कारीगरों, इंजीनियरों, शिल्पकारों, तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों और व्यवसायियों के लिए विशेष महत्व रखता है। हर वर्ष कन्या संक्रांति के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है। आइए जानते हैं इस साल कब है विश्वकर्मा पूजा और शुभ मुहूर्त…

    विश्वकर्मा पूजा 2026 तारीख और शुभ मुहूर्त

    फ्यूचर पंचांग के अनुसार विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। पूजा के लिए शुभ समय सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा, जिसे पूजा के लिए विशेष शुभ माना जाता है।

    विश्वाकर्मा पूजा- विधि

    पूजा स्थल की सफाई करें और चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
    कलश स्थापना करें और भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें।
    भगवान को जल, अक्षत, रोली, चंदन, फूल और माला अर्पित करें।
    धूप और दीपक जलाएं तथा भगवान विश्वकर्मा को फल, मिठाई और अन्य नैवेद्य अर्पित करें।
    भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ औजारों, मशीनों, वाहन और काम में आने वाले उपकरणों की भी पूजा करें।
    विश्वकर्मा भगवान की कथा सुनें या पढ़ें और उनके मंत्रों का जाप करें।
    अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती करें और परिवार के सदस्यों या कर्मचारियों के साथ प्रसाद बांटें।

    विश्वकर्मा पूजा का धार्मिक महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा सृजन, निर्माण और तकनीकी कौशल के प्रतीक हैं। कहा जाता है कि उन्होंने इंद्रपुरी, द्वारका और लंका जैसे दिव्य नगरों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से कार्यक्षेत्र में सफलता, उन्नति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। मशीनों और उपकरणों की पूजा करने से काम में आने वाली बाधाएं दूर होने और व्यवसाय में तरक्की होने की भी धार्मिक मान्यता है।मेष राशि का वर्षफल 2026वृष राशि का वर्षफल 2026मिथुन राशि का वर्षफल 2026कर्क राशि का वर्षफल 2026सिंह राशि का वर्षफल 2026कन्या राशि का वर्षफल 2026तुला राशि का वर्षफल 2026वृश्चिक राशि का वर्षफल 2026धनु राशि का वर्षफल 2026मकर राशि का वर्षफल 2026कुंभ राशि का वर्षफल 2026मीन राशि का वर्षफल 2026

    डिसक्लेमर- इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

  • मोहल्ले की चुगली कर खड़े कर लिए दो आलीशान मकान, 67 साल की महिला का अनोखा बिजनेस देख लोग हैरान

    मोहल्ले की चुगली कर खड़े कर लिए दो आलीशान मकान, 67 साल की महिला का अनोखा बिजनेस देख लोग हैरान

    कोलंबिया की एक महिला ने मोहल्ले की गॉसिप बेचकर खड़ा किया अनोखा बिजनेस. चुगली और पड़ोसियों के राज बेचकर खरीद लिए दो-दो मकान; पढ़ें दिलचस्प खबर.

    मोहल्ले की चुगली कर खड़े कर लिए दो आलीशान मकान, 67 साल की महिला का अनोखा बिजनेस देख लोग हैरान

    क्या आपने कभी सोचा है कि दूसरों के घरों की खबरें रखना या मोहल्ले की चुगली करना कभी किसी का बिजनेस बन सकता है? आमतौर पर लोग इसे वक्त की बर्बादी या सिर्फ फालतू टाइमपास मानते हैं, लेकिन कोलंबिया की एक 67 साल की दादी ने इस काम को ऐसा गजब का स्टार्टअप बना दिया कि अच्छे-अच्छे बिजनेसमैन भी हैरान रह जाएं. जी हां, इन्होंने दूसरों के सीक्रेट्स और चुगलियों का ऐसा बाजार सजाया कि कमाई के पैसों से दो-दो मकान खड़े कर लिए.

    कान लगाकर सुनती हैं दूसरों के राज

    गल्फ टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोलंबिया के आर्मेनिया शहर में रहने वाली 67 वर्षीय मिरियम (Miryam) ने साबित कर दिया है कि दिमाग हो तो किसी भी चीज से पैसा कमाया जा सकता है. मिरियम का यह अनोखा कारोबार इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. उनका काम बस इतना है कि वे अपने घर के बाहर कुर्सी डालकर बैठ जाती हैं और पूरे मोहल्ले की हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखती हैं. किसके घर में क्या पक रहा है, किसका किससे झगड़ा हुआ और कौन किससे छिपाकर मिल रहा है, इनकी पल-पल की खबर मिरियम के पास होती है.

    चुगली बेचने का अनोखा बिजनेस मॉडल

    मिरियम ने अपनी इस आदत को एक प्रोफेशनल बिजनेस में बदल दिया है. वे खुद को गर्व से पेशेवर चिस्मोसा यानी गॉसिप क्वीन कहती हैं. मोहल्ले के लोगों को जब भी किसी दूसरे पड़ोसी के बारे में कोई चटपटी खबर जाननी होती है, वे सीधे मिरियम के पास दौड़कर आते हैं. मिरियम भी मुफ्त में एक पत्ता तक नहीं हिलने देतीं. छोटी-मोटी खबरों के लिए वे 5,000 से 10,000 कोलंबियन पेसो (करीब 150 रुपए से 300 रुपए) वसूलती हैं और अगर मामला किसी बड़े राज का हो, तो उसकी कीमत भी उसी हिसाब से भारी-भरकम होती है. अपनी सबसे महंगी चुगली के बारे में बताते हुए मिरियम ने कहा कि एक आदमी अपनी पत्नी के बाहर जाने पर उसे धोखा देता था, इस राज को छिपाने के लिए उन्होंने उससे 7 लाख कोलंबियन पेसो (लगभग 21,000 रुपए) लिए थे.

    पक्की सबूतों वाली नोटबुक और गॉसिप बोर्ड

    मिरियम का काम सिर्फ हवा में तीर चलाना नहीं है, बल्कि वे पत्रकारों के अंदाज में काम करती हैं. उनके पास एक खास नोटबुक होती है, जिसमें वे हर तारीख और समय के साथ गॉसिप नोट करती हैं. इतना ही नहीं, उनके घर के अंदर एक बकायदा गॉसिप बोर्ड भी लगा है, जिस पर तस्वीरों, कागजों और धागों के जरिए पड़ोसियों के सीक्रेट्स जोड़े गए हैं. हालांकि, इस हरकत की वजह से कई पड़ोसी उनसे खफा रहते हैं, लेकिन मजाल है कि कोई अपनी जिज्ञासा रोक पाए, खबर लेने हर कोई उन्हीं के दरवाजे पर पहुंचता है