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  • नारियल तेल असली है या मिलावटी? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान

    नारियल तेल असली है या मिलावटी? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान

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    नारियल तेल का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है, कोई इसे खाना बनाने के लिए रखता है, तो कोई बालों और त्वचा की देखभाल के लिए. लेकिन क्या जो नारियल तेल आप इस्तेमाल कर रहे हैं, वह वाकई शुद्ध है? बाजार में कई बार मिलावट वाला तेल भी मिल सकता है. तो चलिए आपको कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बताते हैं जिससे आप असली और नकली नारियल तेल की पहचान कर सकते हैं.

    फ्रिज टेस्ट से करें जांच
    नारियल तेल को आप फ्रिज टेस्ट कर सकते हैं. इसके लिए थोड़ा सा तेल साफ कांच की कटोरी में डालकर कुछ घंटों के लिए फ्रिज में रखें. शुद्ध नारियल तेल ठंडे तापमान में जमने लगता है और सफेद या ठोस दिखाई देता है. हालांकि, केवल इस टेस्ट से तेल की शुद्धता तय नहीं की जा सकती, क्योंकि तापमान और तेल की प्रोसेसिंग का भी असर पड़ता है.

    रंग और बनावट पर दें ध्यान
    नारियल तेल सामान्य तौर पर साफ और एक समान दिखाई देता है. ठंडे मौसम में यह सफेद और ठोस हो सकता है, जबकि गर्म वातावरण में पारदर्शी या हल्का पीला नजर आ सकता है. तेल को पारदर्शी कांच के बर्तन में डालकर रोशनी में देखें. अगर इसमें असामान्य कण, गंदगी या बहुत ज्यादा अलग-अलग परतें नजर आएं, तो सावधान रहें.

    खुशबू से भी मिल सकता है संकेत
    वर्जिन या अनरिफाइंड नारियल तेल में नारियल की प्राकृतिक खुशबू होती है. थोड़ी मात्रा हथेली पर लेकर हल्का गर्म करें और इसकी गंध महसूस करें. अगर तेल से तेज केमिकल जैसी गंध, बासीपन या कोई असामान्य महक आ रही है, तो इसकी क्वालिटी पर सवाल उठ सकता है. वहीं, रिफाइंड नारियल तेल की खुशबू काफी हल्की हो सकती है.

    कागज पर डालकर देखें
    एक साफ सफेद कागज पर नारियल तेल की कुछ बूंदें डालकर थोड़ी देर छोड़ दें. इसके फैलने और बचे हुए अवशेष को देखें. अगर असामान्य रंग या गंदा अवशेष नजर आए, तो यह गुणवत्ता को लेकर संकेत हो सकता है. हालांकि, यह भी केवल शुरुआती घरेलू जांच है.

    तेल खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
    नारियल तेल खरीदते समय पैकेट पर लिखे Ingredients जरूर पढ़ें. पैक की सील, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और FSSAI से जुड़ी जानकारी भी जांचें. सबसे जरूरी बात यह है कि घरेलू टेस्ट मिलावट की पक्की पुष्टि नहीं करते. अगर तेल की गंध, स्वाद या बनावट असामान्य लगे, तो खाने या त्वचा पर लगाने से बचें.

  • बहन की शादी के लिए कर्ज, मां बीमार, टीचर की नौकरी छोड़ी… नियुक्तियां रद्द होने से सड़क पर आने वालों का दर्द

    बहन की शादी के लिए कर्ज, मां बीमार, टीचर की नौकरी छोड़ी… नियुक्तियां रद्द होने से सड़क पर आने वालों का दर्द

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    रांची में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों के प्रदर्शन के बाद झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने TDPL समेत कई दूसरी परीक्षाओं को रद्द कर दिया. सरकार ने परीक्षाएं रद्द किए जाने की अधिसूचना भी जारी कर दी है. लेकिन अब परीक्षाओं में पास हुए अभ्यर्थी सड़क पर उतर गए हैं. झारखंड मंत्रालय के बाहर सरकार द्वारा TDPL समेत अन्य परीक्षाओं के रद्द किए जाने के अधिसूचना के बाद माहौल बिल्कुल गमगीन है.

    पास अभ्यर्थियों का रो रोहकर बुरा हाल
    एक उम्मीदवार मनीषा का रो रो कर बुरा हाल है. पहले स्टेशन मास्टर के पद पर रेलवे में नियुक्ति मिली थी. वहां से नौकरी छोड़कर आई. मनीषा हमारी टीम के कैमरे के सामने ही बेहोश होकर गिर पड़ी. उनको दोस्तों ने संभालने की कोशिश की. इनका महिला सुपरवाइजर में भी नियुक्ति मिली थी. फिलहाल ASO वित्त विभाग में हैं. मनीषा हजारीबाग की रहने वाली हैं. 15दिनों से तनाव में थी. कर्नाटक में नौकरी में थी. ट्रेनिंग कर रही हैं. मानसिक तनाव इसलिए भी कि आरोप गड़बड़ी के लगे थे. यानी कलंक लगे थे. ब उसे मिटाना है. इळ्जाम और कलंक को झेलने में मुश्किल है.

    भीड़तंत्र में आगे झुक गई सरकार- उम्मीदवार
    एक उम्मीदवार का कहना है कि प्रतिभा रो रही है और भीड़तंत्र के दबाव में सरकार झुक रही है. गुड्डू कुमार राय साहेबगंज से हैं और पुलिस मुख्यालय में कार्यरत थे. सहायक प्रशाखा अधिकारी थे. लेकिन अब उसी दफ्तर में नहीं घुसने दिया जा रहा है. भारतीय रेल में सीनियर गुड्स ट्रेन मैनेजर की नौकरी छोड़कर आए थे. शादी हो गई है. कोर्ट ने कहा था, जिसके खिलाफ सबूत होंगे, उन्हीं को नौकरी से निकाला जाएगा. ये कोर्ट की अवमानना है.

    नौकरी छोड़कर बने थे अधिकारी- उम्मीदवार
    एक  उम्मीदवार पहले 2014 से ही  शिक्षक थे. लेकिन नौकरी छोड़कर ग्रामीण विकास विभाग में सहायक प्रशाखा अधिकारी बने थे. ये सोचकर कि ये नौकरी को मिनी IAS कहा जाता है. अब तक सड़क पर हैं.

    बहन की शादी के  लिए लिया कर्ज- उम्मीदवार
    श्याम सुंदर मंडल कहते है कि वो भी रेलवे में ऑफिस सुपरिंटेंडेंट थे. यहां एग्जाम दिया कि रांची में रहेंगे, लेकिन अब तो कहीं नहीं है. सबको नौकरी से निकाला जाएगा. शादी हुई है, लेकिन आगे पूरी जिंदगी है, पूरे परिवार का बोझ है, कैसे जीवन चलेगा, पता नहीं. बहन की शादी के लिए कर्ज भी ले रखा है. कोर्ट के शरण में जाएंगे.

    मां को नहीं बता सकता नौकरी चली गई- विकास
    हज़ारीबगा के विकास कुमार की भी कहानी मिलती जुलती है. ये लेबर इन्फोर्समेंट ऑफिसर थे. इनकी माँ की तबियत खराब रहती है. लिहाजा मां को नौकरी जाने की बात बताई ही नहीं है. अगर उन्हें पता चला तो सदमा लगेगा. हार्ट अटैक भी आ सकता है. उसकी जिम्मेवारी क्या सरकार लेगी?

  • फिल्मों में ताजमहल बिकता था, प्रयागराज में तो पूरा पहाड़ ही बेच दिया… जानिए कैसे हुआ करोड़ों की सरकारी जमीन का खेल..

    फिल्मों में ताजमहल बिकता था, प्रयागराज में तो पूरा पहाड़ ही बेच दिया… जानिए कैसे हुआ करोड़ों की सरकारी जमीन का खेल..

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    • सरकारी रिकॉर्ड में कैसे हुई हेराफेरी?

    • ‘पहाड़’ की जमीन इतनी खास क्यों होती है?

    बॉलीवुड फिल्मों में आपने कई बार सुना होगा कि जालसाजों ने ताजमहल, लाल किला तक बेच दिया. ऐसी बातें पर्दे पर मजेदार लगती हैं, लेकिन प्रयागराज में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हकीकत और फिल्मों के बीच की दूरी कम कर दी. यहां भू-माफियाओं ने राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी ‘पहाड़’ के नाम दर्ज करोड़ों रुपये की जमीन को पहले अपने नाम कराया और फिर उसे बेच भी दिया. मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस दोनों हरकत में आ गए हैं.

    क्या है पूरा मामला?
    यह मामला प्रयागराज की बारा तहसील के गोल्हैया गांव का है. यहां आराजी संख्या-1 की करीब 83 बीघा 19 बिस्वा (लगभग 19.16 हेक्टेयर) जमीन राजस्व रिकॉर्ड में ‘पहाड़’ यानी सार्वजनिक सरकारी भूमि के रूप में दर्ज थी. आरोप है कि कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर इस सरकारी जमीन को अपने नाम दर्ज करा लिया. इसके बाद जमीन की खरीद-फरोख्त भी शुरू कर दी गई.

    सरकारी रिकॉर्ड में कैसे हुई हेराफेरी?
    जमीन किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि सरकारी खाते में दर्ज थी. लेकिन आरोपियों ने कथित तौर पर राजस्व अभिलेखों में बदलाव कर खुद को जमीन का मालिक दिखा दिया. जब रिकॉर्ड में नाम दर्ज हो गए, तो उसी आधार पर जमीन की रजिस्ट्री और बिक्री भी होती रही. यानी कागजों पर सरकारी पहाड़ निजी संपत्ति बन गया.

    मामला सामने कैसे आया?
    प्रशासन को जमीन में गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद जांच शुरू हुई. जांच में पाया गया कि जमीन को गलत तरीके से निजी खातों में दर्ज कराया गया था.इसके बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी फर्जी नाम निरस्त कर दिए और जमीन को दोबारा सरकारी खाते में दर्ज कर दिया.

    कितने लोगों पर केस दर्ज हुआ?
    लेखपाल प्राची सिंह परिहार की शिकायत पर लालापुर थाने में 19 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. इनमें पूर्व खाताधारक, जमीन खरीदने वाले लोग और एके ड्रीम सिटी प्राइवेट लिमिटेड नाम की निजी कंपनी के निदेशक भी शामिल हैं. पुलिस ने सभी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी संपत्ति से जुड़े गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया है.

    ‘पहाड़’ की जमीन इतनी खास क्यों होती है?
    राजस्व रिकॉर्ड में ‘पहाड़’ के रूप में दर्ज जमीन सार्वजनिक संपत्ति मानी जाती है. इसका इस्तेमाल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सार्वजनिक हित के लिए होता है. ऐसी जमीन को कोई व्यक्ति अपने नाम नहीं करा सकता और न ही उसकी खरीद-बिक्री की जा सकती है. इसलिए इस तरह की हेराफेरी को गंभीर अपराध माना जाता है.

    अब आगे क्या होगा?
    पुलिस का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है. जांच में राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण (म्यूटेशन), रजिस्ट्री, जमीन के हस्तांतरण और सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच होगी. यदि किसी सरकारी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है.

    पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
    देश के अलग-अलग राज्यों में पहले भी सरकारी जमीन, तालाब, चारागाह और ग्राम समाज की जमीन पर फर्जी तरीके से कब्जा करने या रिकॉर्ड बदलने के मामले सामने आते रहे हैं. हालांकि किसी ‘पहाड़’ को ही कागजों में निजी संपत्ति बनाकर बेचने का मामला बेहद दुर्लभ माना जा रहा है. यही वजह है कि प्रयागराज का यह मामला चर्चा में है.

  • प्राचीन काल की ईंटें, मिट्टी की सुराही, हैंडल वाली धूपदानी… रायबरेली में मिली रहस्यमयी सुरंग

    प्राचीन काल की ईंटें, मिट्टी की सुराही, हैंडल वाली धूपदानी… रायबरेली में मिली रहस्यमयी सुरंग

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    उत्तर प्रदेश में रायबरेली जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र के ओई गांव में मिली रहस्यमयी सुरंग और प्राचीन अवशेष मिले हैं. पिछले हफ्ते ओई गांव में बारिश के बाद अचानक जमीन धंस गई. जमीन धंसने से वहां एक रहस्यमयी सुरंग और पक्की दीवार जैसी संरचना दिखाई दी है. इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है.

    अचानक खेत में हो गया गड्ढा-
    मामला रायबरेली जिले के हरचंदपुर थाना क्षेत्र का है, यहां स्थित ओई गांव में एक निजी खेत के अंदर अचानक एक मीटर चौड़ा गड्ढा हो गया. जब लोगों ने पास जाकर देखा, तो वहां पक्की दीवार से बनी एक प्राचीन सुरंग जैसी आकृति नजर आई. इस अनोखी संरचना को देखने के लिए देखते ही देखते पूरे गांव की भीड़ जमा हो गई.

    कई ऐतिहासिक चीजें मिली-
    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन तुरंत एक्शन में आया. एसडीएम महराजगंज और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI लखनऊ मंडल की टीम मौके पर पहुंची. सहायक पुरातत्वविद डॉ. मनोज कुमार यादव के नेतृत्व में टीम सीढ़ी के सहारे इस रहस्यमयी सुरंग के अंदर उतरी. उन्हें बताया की सुरंग के अंदर जांच के दौरान पुरातत्व विभाग की टीम को कई ऐतिहासिक चीजें मिली हैं. यहां से प्राचीन काल की पुरानी ईंटें, मिट्टी की सुराही और एक हैंडल वाली धूपदानी बरामद की गई है.

    कुषाण कालीन अवशेष मिले-
    एक्सपर्ट्स के शुरुआती आकलन के मुताबिक, ये सभी अवशेष कुषाण कालीन बताए जा रहे हैं. इतना ही नहीं, इस मामले में आज एक बड़ा अपडेट सामने आया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लखनऊ मंडल की टीम ने आज गांव के ही निवासी अशोक प्रताप मौर्य के घर पहुंचकर उनके पास मौजूद प्राचीन अवशेषों का बारीकी से निरीक्षण किया. गौरतलब है कि अशोक प्रताप मौर्य 1985 से इन ऐतिहासिक अवशेषों को सहेज कर रख रहे हैं. उनके दावे के अनुसार, यह ओई भीट पुरातत्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज एक ऐतिहासिक स्थल है.

    फिलहाल, सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने पूरे इलाके को सील कर दिया है. मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और ग्रामीणों को गड्ढे के पास जाने से साफ मना किया गया है. एएसआई की विस्तृत वैज्ञानिक रिपोर्ट आने के बाद ही इस प्राचीन और ऐतिहासिक सुरंग का पूरा सच सामने आ सकेगा.


    डॉ कुमार ने बताया कि निरीक्षण के दौरान हम लोगों ने यहां पर देखा कि तकरीबन 15 से 20 फीट की जमीन धंसी हुई है. जिसके अंदर कुछ ईंटों के संरचना मिले, जिनका ओरियंटेशन उत्तर से लेकर दक्षिण की तरफ है और जब हम लोगों ने नीचे जाकर ईंटों को देखा तो उनकी साइज 40 /28 /8 सेंटीमीटर है, जो कुषाण कालीन संरचना से मिलती-जुलती है और बहुत सारे अवशेष देखने को मिले, जो सरफेस पर भी है और यहां के स्थानीय लोगों के द्वारा संग्रह भी किया गया है और इन्हें बनाने में जो ड्राइव है, जो मूर्तियां हैं, कुछ अवशेष हैं, जो यह सारी संरचनाओं हैं, कुषाण कल के समय जो बनती थी, यह उससे मिलती-जुलती हैं. यह 2000 साल पहले का है और अभी इसकी रिपोर्ट सबमिट की जाएगी. फिर उसके बाद जैसे शासन निर्देश करेगी, उसी हिसाब से कार्यवाही की जाएगी.

  • होटल और ट्रेन में हमेशा क्यों होती सफेद चादर… कोई दूसरे रंग से क्यों बचा जाता, जानिए इसके पीछे की असली वजह

    होटल और ट्रेन में हमेशा क्यों होती सफेद चादर… कोई दूसरे रंग से क्यों बचा जाता, जानिए इसके पीछे की असली वजह

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    अगर आपने कभी होटल में ठहरने या ट्रेन में सफर किया है, तो आपने एक बात जरूर नोटिस की होगी. ज्यादातर जगहों पर बिस्तर पर सफेद चादर ही बिछी होती है. रंगीन चादरें बहुत कम देखने को मिलती हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर सफेद चादर का ही इस्तेमाल क्यों किया जाता है. क्या यह सिर्फ देखने में अच्छी लगती है या इसके पीछे कोई और वजह भी है? सच यह है कि सफेद चादर चुनने के पीछे कई कारण होते हैं.

    तुरंत पता चल जाती है सफाई

    सफेद चादर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उस पर धूल, दाग या गंदगी तुरंत दिखाई देती है. इससे होटल और रेलवे के कर्मचारियों को भी आसानी से पता चल जाता है कि चादर पूरी तरह साफ है या नहीं. अगर उस पर हल्का सा भी दाग दिख जाए, तो उसे दोबारा धोया जाता है या नई चादर बिछा दी जाती है.

    धोने और साफ रखने में होती है आसानी

    होटलों और ट्रेनों में हर दिन बड़ी संख्या में चादरों की धुलाई होती है. सफेद चादरों को एक साथ मशीन में धोया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर उन पर ब्लीच का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे जिद्दी दाग आसानी से निकल जाते हैं. अगर रंगीन चादरों पर ब्लीच का इस्तेमाल किया जाए, तो उनका रंग फीका पड़ सकता है. यही वजह है कि सफेद चादरों को साफ रखना ज्यादा आसान और सस्ता पड़ता है.

    सफेद रंग देता है सुकून का एहसास

    रंगों का असर हमारे मन पर भी पड़ता है. सफेद रंग को साफ-सफाई, शांति और सादगी का प्रतीक माना जाता है. जब कोई व्यक्ति सफेद चादर वाला बिस्तर देखता है, तो उसे वह ज्यादा साफ और आरामदायक लगता है. इससे मन को सुकून मिलता है और ठहरने का अनुभव भी बेहतर बन जाता है. यही कारण है कि बड़े और लग्जरी होटल भी सफेद चादरों को ही पसंद करते हैं.

    रखरखाव में होती है समय और खर्च की बचत

    अगर होटल या रेलवे अलग-अलग रंगों की चादरें इस्तेमाल करें, तो उन्हें अलग-अलग धोना पड़ेगा. इससे समय, मेहनत और खर्च तीनों बढ़ जाएंगे. सफेद चादरों के साथ यह परेशानी नहीं होती. सभी चादरों को एक साथ धोया जा सकता है, जिससे काम आसान हो जाता है. इसके अलावा सफेद रंग रोशनी को अच्छी तरह लौटाता है, जिससे होटल का कमरा या ट्रेन का केबिन ज्यादा उजला और साफ दिखाई देता है.

  • Aadhaar Bometric Lock: कर लें इस सेटिंग को ऑन… नहीं कर पाएगा कोई आधार का गलत इस्तेमाल, बायोमेट्रिक रहेंगे पूरी तरह सेफ

    Aadhaar Bometric Lock: कर लें इस सेटिंग को ऑन… नहीं कर पाएगा कोई आधार का गलत इस्तेमाल, बायोमेट्रिक रहेंगे पूरी तरह सेफ

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    आधार कार्ड आज बैंक, सरकारी स्कीम, सिम कार्ड खरीदने और कई जरूरी कामों में इस्तेमाल होता है. ऐसे में अगर आपके आधार का गलत इस्तेमाल हो जाए तो बड़ी परेशानी हो सकती है. इसी खतरे को कम करने के लिए नए Aadhaar App में एक खास फीचर दिया गया है. अब यूजर अपने फिंगरप्रिंट और आइरिस (आंखों की पहचान) को जब चाहें लॉक और जरूरत पड़ने पर अनलॉक कर सकते हैं. इससे आपकी बायोमेट्रिक जानकारी ज्यादा सेफ रहती है.

    बायोमेट्रिक लॉक क्यों जरूरी है?

    आधार से जुड़ी बायोमेट्रिक जानकारी में आपके फिंगरप्रिंट और आइरिस की जानकारी होती है. अगर यह जानकारी लॉक रहती है, तो कोई भी व्यक्ति आपकी पर्मिशन के बिना बायोमेट्रिक से आधार का इस्तेमाल नहीं कर सकता. इससे धोखाधड़ी की आशंका काफी कम हो जाती है.

    नए Aadhaar App से कैसे करें लॉक?

    अगर आप अपने फिंगरप्रिंट और आइरिस को लॉक करना चाहते हैं, तो सबसे पहले नया Aadhaar App खोलें. इसके बाद अपने आधार खाते में लॉग इन करें. ऐप के होम पेज पर आपको Biometric Lock का ऑप्शन दिखाई देगा. इस पर टैप करें और स्क्रीन पर दी गई जानकारी को पूरा करें. प्रोसेस पूरा होते ही आपका बायोमेट्रिक डेटा लॉक हो जाएगा. इसके बाद किसी भी बायोमेट्रिक जांच के लिए पहले इसे अनलॉक करना जरूरी होगा.

    जरूरत पड़ने पर ऐसे करें अनलॉक

    जब आपको बैंक, आधार सेवा केंद्र या किसी अन्य जगह फिंगरप्रिंट या आइरिस से पहचान करानी हो, तब Aadhaar App खोलें. फिर Biometric Unlock ऑप्शन चुनें और पहचान की प्रोसेस पूरी करें. आपका बायोमेट्रिक कुछ समय के लिए अनलॉक हो जाएगा. काम पूरा होने के बाद आप इसे दोबारा लॉक भी कर सकते हैं.

    किनके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद?

    अगर आपका आधार कई सेवाओं से जुड़ा है, आप अक्सर बैंक या सरकारी काम करते हैं या आपको आधार के गलत इस्तेमाल की चिंता रहती है, तो यह सुविधा आपके लिए काफी फायदेमंद है. जरूरत न होने पर बायोमेट्रिक लॉक रखने से सेफ्टी बढ़ जाती है और आपकी निजी जानकारी सेफ रहती है. नए Aadhaar App में यह सुविधा अब पहले से ज्यादा आसान और तेज तरीके से होती है.

  • AI कैमरों को भी कर सकते हैं कन्फ्यूज ये खास कपड़े! आखिर क्यों बढ़ रही है इनकी चर्चा?

    AI कैमरों को भी कर सकते हैं कन्फ्यूज ये खास कपड़े! आखिर क्यों बढ़ रही है इनकी चर्चा?

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    सोचिए, आपने एक ऐसी टी-शर्ट या जैकेट पहन रखी हो जिसे देखकर AI कैमरे आपकी पहचान करने में मुश्किल महसूस करें. सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन अब ऐसे खास कपड़ों की चर्चा हो रही है. इन्हें Adversarial Clothing कहा जाता है. इन कपड़ों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि कुछ फेस रिकग्निशन सिस्टम के लिए किसी व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल हो सकता है.

    Adversarial Clothing ऐसे कपड़े होते हैं जिन पर खास तरह के पैटर्न और डिजाइन बनाए जाते हैं. इनका मकसद कुछ AI कैमरों और फेस रिकग्निशन सिस्टम को भ्रम में डालना है. कुछ डिजाइनर ऐसे जैकेट भी बना रहे हैं जिनमें इंफ्रारेड LED का इस्तेमाल किया जाता है. दावा है कि इससे कुछ कैमरों के लिए चेहरा साफ पहचानना कठिन हो सकता है. लेकिन, यह तकनीक हर जगह एक जैसी असरदार नहीं मानी जाती.

    आखिर लोग क्यों खरीदना चाहते हैं ऐसे कपड़े?

    आज दुनिया के कई शहरों में AI कैमरों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मॉल और दूसरी सार्वजनिक जगहों पर फेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में कई लोग अपनी प्राइवेसी को लेकर चिंता जताते हैं. इसी वजह से कुछ लोग ऐसे कपड़ों को सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि अपनी निजता से जोड़कर भी देख रहे हैं.

    क्या सच में AI कैमरों को धोखा दे सकते हैं?

    इस सवाल का जवाब पूरी तरह ‘हां’ नहीं है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक अलग-अलग कंपनियों के कैमरे और AI सिस्टम अलग तरीके से काम करते हैं. इसलिए कोई भी कपड़ा हर जगह या हर सिस्टम को चकमा दे देगा, ऐसा कहना सही नहीं होगा. कई बार कैमरे फिर भी व्यक्ति की पहचान कर सकते हैं.

    क्या आगे बढ़ेगा यह ट्रेंड?

    फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर बड़े फैशन ब्रांड और मशहूर लोग ऐसे डिजाइन अपनाते हैं, तो यह ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो सकता है. वहीं, अगर भविष्य में ऐसे कपड़े निगरानी तकनीक को बड़े स्तर पर प्रभावित करने लगते हैं, तो सरकारें इनके इस्तेमाल को लेकर नए नियम भी बना सकती हैं.

  • शादी के दो साल बाद तक संबंध बनाने से कतराता रहा पति, स्पर्म जांच कराने ले गई पत्नी तो घर से पीट कर निकाला, सैंपल भी नहीं दिया,,?

    शादी के दो साल बाद तक संबंध बनाने से कतराता रहा पति, स्पर्म जांच कराने ले गई पत्नी तो घर से पीट कर निकाला, सैंपल भी नहीं दिया,,?

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    गोरखपुर में 30 वर्षीय महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई है. महिला का आरोप है कि शादी के बाद से उसके पति ने कभी भी उसके साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाए. जब भी उसने इसकी वजह पूछी, पति हर बार यह कहकर बात टाल देता था कि उसका दवा का कोर्स चल रहा है और कोर्स पूरा होने के बाद सब सामान्य हो जाएगा. महिला का कहना है कि इसी भरोसे में दो साल बीत गए, लेकिन पति का व्यवहार नहीं बदला.

    जांच कराने ले गई, पति ने सैंपल देने से किया इनकार
    शिकायत के मुताबिक, पति के व्यवहार पर शक होने के बाद महिला उसे एक निजी अस्पताल लेकर गई. वहां डॉक्टर ने जांच के लिए स्पर्म सैंपल देने को कहा, लेकिन पति ने सैंपल देने से साफ इनकार कर दिया. इसके बाद महिला ने दोबारा इलाज कराने की बात कही तो मामला और बिगड़ गया. महिला का आरोप है कि इसके बाद पति और ससुराल के अन्य लोगों ने मिलकर उससे 5 लाख लाने की मांग की. कहा गया कि इलाज तभी कराया जाएगा और अगर पैसे नहीं लाई तो घर में रहने की अनुमति भी नहीं मिलेगी.

    शादी में 15 लाख खर्च होने का भी दावा
    महिला ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी दो साल पहले नगर क्षेत्र निवासी युवक से हुई थी. शादी में उसके परिवार ने करीब 15 लाख रुपए खर्च किए थे. इसके बावजूद शादी के पहले दिन से ही उसे अनदेखा किया गया. आरोप है कि उसे जरूरत की चीजें तक नहीं दी जाती थीं और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था.

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  • धनबाद की दो बहनों ने गीता के श्लोक पाठ से बनाया विश्व रिकॉर्ड, Guinness World Records में नाम हुआ दर्ज..

    धनबाद की दो बहनों ने गीता के श्लोक पाठ से बनाया विश्व रिकॉर्ड, Guinness World Records में नाम हुआ दर्ज..

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    आज के दौर में बच्चों का काफी समय मोबाइल और सोशल मीडिया पर गुजर रहा है लेकिन धनबाद के धैय्या की रहने वाली दो बहनों ने अपनी प्रतिभा और संस्कारों के दम पर एक खास पहचान बनाई है. प्रांजल मित्तल और आन्या मित्तल ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का नियमित पाठ करते हुए विश्व स्तर पर अपनी पहचान कायम की है. दोनों बहनों की इस उपलब्धि को Guinness World Records में दर्ज किया गया है. इस खास सफलता के लिए उन्हें आधिकारिक प्रमाण पत्र के साथ गोल्ड मेडल भी प्रदान किया गया है. इस उपलब्धि के पीछे परिवार के संस्कार और उनकी मां प्रीति अग्रवाल की अहम भूमिका रही है.

    किया गया सम्मानित
    प्रांजल मित्तल और आन्या मित्तल ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों के नियमित पाठ को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया और इसी साधना ने उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाई. गीता के श्लोकों के पाठ में उनकी निरंतरता और लगन का परिणाम है कि दोनों बहनों की भागीदारी Guinness World Records में दर्ज हुई है. इस उपलब्धि के लिए उन्हें आधिकारिक प्रमाण पत्र और गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया है.

    सिर्फ 5 मिनट में पूरा किया पाठ
    प्रांजल और आन्या की इस सफलता में उनके परिवार के संस्कारों की बड़ी भूमिका रही है. खास तौर पर उनकी मां प्रीति अग्रवाल ने दोनों बेटियों को नियमित रूप से गीता पाठ के लिए प्रेरित किया और उनका हौसला बढ़ाया. आज दोनों बहनों की यह उपलब्धि सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि धनबाद के लिए भी गर्व का विषय है. आधुनिक दौर में जहां बच्चों का रुझान तेजी से दूसरी चीजों की ओर बढ़ रहा है, वहीं इन दोनों बहनों ने भारतीय संस्कृति, संस्कार और श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति अपनी आस्था को अपनी पहचान बनाया है. प्रांजल और आन्या की कहानी यह संदेश देती है कि अगर संस्कार, अनुशासन और निरंतर मेहनत साथ हों, तो छोटी-सी शुरुआत भी दुनिया के मंच तक पहुंच सकती है. प्रांजल मित्तल और प्रांजल मित्तल ने बताया कि उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय का पाठ करीब पांच मिनट में पूरा किया. गीता के श्लोकों का सही उच्चारण हो, इसके लिए उन्होंने लगातार अभ्यास किया. प्रांजल अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देती हैं. उनका कहना है कि मां बचपन से ही उन्हें गीता का पाठ सिखाती थीं. घर में गीता के श्लोकों की ऑडियो रिकॉर्डिंग चलती रहती थी और वह लगातार उन्हें सुनती थीं. इसी तरह सुनते-सुनते श्लोक याद होते चले गए.

    श्रीमद्भगवद्गीता सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं
    आन्या मित्तल ने कहा कि गीता का पाठ उनके लिए कोई नई चीज नहीं है. उन्होंने बचपन से ही अपनी मां से गीता के श्लोक सीखना शुरू कर दिया था. मां को देखकर उनमें भी गीता पढ़ने और उसके श्लोकों का सही उच्चारण करने की रुचि पैदा हुई.आज यही अभ्यास उनकी पहचान बन चुका है. प्रीति अग्रवाल का कहना है कि श्रीमद्भगवद्गीता में 700 श्लोक हैं और यह सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की सीख भी देती है. उनका मानना है कि बच्चों को गीता से जोड़ने से उनमें अनुशासन, संस्कार और अपनी संस्कृति के प्रति समझ विकसित होती है.पिता सुनील अग्रवाल के कहते हैं कि प्रांजल और आन्या की उपलब्धि आज उन अभिभावकों के लिए भी एक उदाहरण है, जो अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना चाहते हैं. मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में इन दोनों बहनों ने गीता के श्लोकों को अपना साथी बनाया और अपनी मेहनत के दम पर विश्व स्तर पर पहचान बनाई. धैय्या की गलियों से शुरू हुई यह यात्रा अब Guinness World Records तक पहुंच चुकी है.

  • रिश्ते में खुद को कम समझना छोड़ें, सीखें अपनी वैल्यू कराना दोबारा नहीं टूटेगा दिल, रिलेशनशिप वाले जरूर पढ़ें..?

    रिश्ते में खुद को कम समझना छोड़ें, सीखें अपनी वैल्यू कराना दोबारा नहीं टूटेगा दिल, रिलेशनशिप वाले जरूर पढ़ें..?

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    कुछ लोग बार-बार लोगों को माफ कर देते हैं, जो सबसे बड़ा कारण होता अपनी वैल्यू कम करवाने का. कई बार ऐसा भी होता है कि लोग आपकी माफी की इज्जत करते हैं, लेकिन कई बार ऐसा देखा गया है कि कुछ लोग इसे अपना हक समझकर आपको बार-बार परेशान करते हैं. वहीं बार-बार दिल टूटना सिर्फ रिश्ते को कमजोर नहीं करता, बल्कि इंसान का आत्मविश्वास और भरोसा भी कमजोर कर देता है. अगर आप चाहते हैं कि कोई आपको हल्के में न ले और आपकी भावनाओं से खिलवाड़ भी न करे, तो सबसे पहले आपको खुद की अहमियत समझनी होगी. रिश्ते तभी मजबूत रहते हैं, जब सामने वाला आपकी इज्जत करे और आप अपनी सीमाएं तय करना जानते हों.


    किसी भी रिश्ते में इतना भी मत खो जाइए कि सामने वाले को लगे आप उसके बिना नहीं रह सकते. अपनी भावना, समय और निजी जिंदगी की एक सीमा तय करें. जब लोग समझते हैं कि आप खुद की कद्र करते हैं, तो वे भी आपको हल्के में नहीं लेते.


    किसी दूसरे या तीसरे इंसान में भी अपनी खुशी ढूंढना बंद कर दें. जब दिल टूटता है तो दिल किसी और से वेलिडेशन चाहता है, ऐसे में आप फिर से गलत इंसान को चुन सकते हैं. जिससे बाहर के लोग ऐसे मौके का फायदा उठाते हैं. पहले खुद को वक्त दें. खुद को कभी भी किसी एक इंसान पर निर्भर मत होने दीजिए. जब आपकी दुनिया सिर्फ एक रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमने लगती है, तब दिल टूटने का असर सबसे ज्यादा होता है. अपनी फैमिली, दोस्तों, काम और खुद के साथ भी उतना ही जुड़ाव बनाए रखें.


    अगर किसी ने आपका भरोसा तोड़ा है, तो बार-बार उसे समझाने या मनाने की बजाय खुद को समय दें. कम से कम 30 दिनों तक उससे कोई संपर्क न रखें. फोन, मैसेज और सोशल मीडिया से दूरी बनाएं. इससे आपका मन भी शांत होगा और सामने वाले को आपकी अहमियत का एहसास भी होगा.

    दर्द को दबाएं नहीं, बाहर आने दें
    दिल टूटने के बाद मजबूत बनने का मतलब यह नहीं कि आप रोएं ही नहीं. अगर रोना आता है तो रोइए, गुस्सा है तो उसे स्वस्थ तरीके से बाहर निकालिए. भावनाओं को दबाने से दर्द समय के साथ बढ़ता है, जबकि उन्हें स्वीकार करना आगे बढ़ने की पहली सीढ़ी होती है.

    खुद पर समय और मेहनत लगाइए
    ब्रेकअप या रिश्ते की तकलीफ को अपनी जिंदगी का अंत मत मानिए. अपना फोकस करियर, पढ़ाई, फिटनेस और नई स्किल सीखने पर लगाइए. जिम जाएं, किताबें पढ़ें, यात्रा करें या कोई नया शौक अपनाएं. जब आप खुद को बेहतर बनाने में जुटते हैं, तो आपका आत्मविश्वास अपने आप लौट आता है.

    अपनी कीमत पहचानिए
    याद रखिए, आपकी पहचान किसी रिश्ते से नहीं, बल्कि आपके व्यक्तित्व से बनती है. अगर कोई आपको बार-बार नजरअंदाज करता है, आपकी भावनाओं की कद्र नहीं करता या सिर्फ जरूरत पड़ने पर याद करता है, तो ऐसे लोगों से दूरी बनाना ही बेहतर है. जो इंसान आपकी इज्जत नहीं कर सकता, उसे अपनी जिंदगी में जगह देने की जरूरत नहीं है.

    मजबूत बनिए, बदला लेना नहीं है
    किसी को उसकी औकात दिखाने का सबसे अच्छा तरीका लड़ाई या बदला नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाना है. जब आप खुद को महत्व देना शुरू कर देते हैं, तब वही लोग आपकी अहमियत समझने लगते हैं जिन्होंने कभी आपको हल्के में लिया था. सबसे बड़ा जवाब आपकी चुप्पी, सफलता, आत्मसम्मान और सुकून भरी जिंदगी होती है. एक बार ये ट्राय करें, आप खुश रहना सिख जाएंगे और खुद को जिम्मेदार मानना बंद कर देंगे.