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  • देहरादून: 300 रुपये की मजदूरी के विवाद में तिहरा हत्याकांड, प्लंबर पर बुजुर्ग दंपती और घरेलू सहायिका की हत्या का आरोप.

    देहरादून: 300 रुपये की मजदूरी के विवाद में तिहरा हत्याकांड, प्लंबर पर बुजुर्ग दंपती और घरेलू सहायिका की हत्या का आरोप.

    देहरादून: 300 रुपये की मजदूरी के विवाद में तिहरा हत्याकांड, प्लंबर पर बुजुर्ग दंपती और घरेलू सहायिका की हत्या का आरोप.

    देहरादून, उत्तराखंड: देहरादून की विष्णुलोक कॉलोनी में हुए तिहरे हत्याकांड ने इलाके को झकझोर दिया है। पुलिस के मुताबिक, करीब 300 रुपये की मजदूरी को लेकर हुए विवाद के बाद प्लंबर राजकुमार ने बुजुर्ग दंपती और उनके पड़ोस में काम करने वाली घरेलू सहायिका पर हमला कर दिया। घटना में तीनों की मौत हो गई।

    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी करीब दो साल से रमेश कपूर के घर प्लंबिंग का काम करता था और परिवार का उस पर भरोसा था। पुलिस अब आरोपी के बयान के साथ घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों का मिलान कर रही है।

    600 रुपये मांगने पर शुरू हुआ विवाद

    पुलिस के अनुसार, राजकुमार ने अपने काम के बदले 600 रुपये मजदूरी मांगी थी, जबकि बुजुर्ग दंपती कथित तौर पर 300 रुपये देने की बात कह रहे थे। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ।

    आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद राजकुमार ने पेचकस से रमेश कपूर और उनकी पत्नी रजनी कपूर पर हमला कर दिया। शोर सुनकर पड़ोस में काम कर रही घरेलू सहायिका तिलया देवी उर्फ शीला वहां पहुंची। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने उस पर भी हमला कर दिया।

    घटना के बाद आसपास के लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।

    आरोपी का पुराना रिकॉर्ड भी खंगाल रही पुलिस

    पुलिस अब राजकुमार के पुराने रिकॉर्ड और उसके आपराधिक इतिहास की जांच कर रही है। वह मूल रूप से बिजनौर का रहने वाला बताया गया है और करीब पांच साल से देहरादून के इंद्रेश नगर क्षेत्र में रह रहा था।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, वह लंबे समय तक एक ही जगह नहीं रहता था और कुछ महीनों के अंतराल पर अपना कमरा बदल लेता था। करीब दो महीने पहले भी किराया न देने को लेकर उसे एक मकान से निकाले जाने की बात सामने आई है।

    पुलिस उसके पुराने ठिकानों, कामकाज, संपर्कों और गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

    दीपावली पर बेटों के आने की थी तैयारी

    रमेश कपूर और रजनी कपूर के दोनों बेटे देहरादून से बाहर रहते हैं। बड़ा बेटा पुणे में नौकरी करता है, जबकि छोटा बेटा दिल्ली में रहता है। परिवार के अनुसार, दोनों बेटे दीपावली के मौके पर माता-पिता से मिलने आने वाले थे।

    घर में त्योहार को लेकर तैयारियां चल रही थीं और मरम्मत का काम भी कराया जा रहा था। इसी बीच हुई इस वारदात ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

    बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने बढ़ाई सक्रियता

    हत्याकांड के बाद अकेले रहने वाले बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर भी पुलिस ने सक्रियता बढ़ाई है। पुलिस अधिकारियों ने अलग-अलग इलाकों में रहने वाले एक हजार से अधिक बुजुर्गों से संपर्क कर उनकी समस्याएं जानीं और आपात स्थिति में पुलिस से संपर्क करने के लिए जरूरी नंबर उपलब्ध कराए।

    फास्ट ट्रैक पर मुकदमा चलाने की तैयारी

    पुलिस का कहना है कि मामले की जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। आरोपी के बयानों, घटनास्थल के साक्ष्यों और अन्य लोगों से मिली जानकारी का मिलान किया जा रहा है।

    पुलिस जल्द से जल्द जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। मामले को फास्ट ट्रैक पर चलाने की पैरवी किए जाने की भी बात कही गई है।

  • मकान में दिखें ये खतरनाक: संकेत तो तुरंत हो जाएं सावधान, घर खाली करने तक की आ सकती है नौबत.

    मकान में दिखें ये खतरनाक: संकेत तो तुरंत हो जाएं सावधान, घर खाली करने तक की आ सकती है नौबत.

    मकान में दिखें ये खतरनाक: संकेत तो तुरंत हो जाएं सावधान, घर खाली करने तक की आ सकती है नौबत.

    नई दिल्ली: मकान अचानक गिरने की घटनाएं बेहद खतरनाक होती हैं, लेकिन कई मामलों में इमारत ढहने से पहले उसके ढांचे में कुछ बदलाव नजर आने लगते हैं। दरवाजों का अचानक फंसना, फर्श का झुकना, बीम-पिलर में गंभीर दरारें, सरिया का बाहर दिखाई देना और लंबे समय तक बनी सीलन जैसे संकेतों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

    जरूरी नहीं कि केवल बहुत पुराने मकान ही कमजोर हों। निर्माण की खराब गुणवत्ता, नींव की समस्या, पानी का लगातार रिसाव, जमीन का धंसना या इमारत के ढांचे में बिना विशेषज्ञ सलाह के बदलाव भी भवन की मजबूती को प्रभावित कर सकते हैं।

    दरवाजे और खिड़कियां अचानक फंसने लगें

    अगर पहले आसानी से खुलने-बंद होने वाले दरवाजे अचानक चौखट में फंसने लगें या खिड़कियों के फ्रेम टेढ़े नजर आने लगें, तो इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि मौसम की नमी या लकड़ी के फूलने से भी ऐसी समस्या हो सकती है, लेकिन अगर इसके साथ दीवारों या फर्श में नई दरारें भी दिखाई दे रही हैं, तो भवन की तकनीकी जांच कराना जरूरी है।

    फर्श में झुकाव या टाइलों में बदलाव

    घर का फर्श अचानक एक तरफ झुका हुआ महसूस हो या टाइलें टूटकर ऊपर उठने लगें, तो इसे सामान्य समस्या मानकर छोड़ना ठीक नहीं है। खासकर अगर इसके साथ दीवारों में तिरछी दरारें या दरवाजों के फ्रेम में बदलाव भी दिखाई दे रहा हो, तो नींव और जमीन की स्थिति की जांच जरूरी हो सकती है।

    बीम-पिलर में गहरी दरार और सरिया दिखना

    बीम और पिलर इमारत के महत्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्से होते हैं। इनमें गहरी या बढ़ती हुई दरारें दिखाई दें, कंक्रीट टूटकर गिरने लगे या अंदर की सरिया बाहर नजर आने लगे तो विशेषज्ञ से तत्काल जांच करानी चाहिए।

    अगर सरिया में जंग दिखाई दे रही है या पिलर और दीवार के बीच असामान्य गैप बन गया है, तो केवल पुट्टी या सीमेंट लगाकर उसे छिपाना सही तरीका नहीं है। ऐसी स्थिति में स्ट्रक्चरल इंजीनियर से भवन की मजबूती का आकलन कराना चाहिए।

    नींव के आसपास जमीन धंसने लगे

    मकान की नींव के आसपास की जमीन अचानक बैठने लगे, बाउंड्री के पास मिट्टी धंसती दिखाई दे या नींव की दीवारों में नई दरारें बनने लगें, तो इसकी वजह पानी का रिसाव, खराब ड्रेनेज या जमीन से जुड़ी दूसरी समस्या हो सकती है।

    ऐसे बदलाव लगातार बढ़ रहे हों तो विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है, क्योंकि नींव की समस्या पूरे ढांचे की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।

    लगातार सीलन और कंक्रीट का टूटना

    दीवारों और छत में लंबे समय तक रहने वाली सीलन को सिर्फ खूबसूरती से जुड़ी समस्या समझना ठीक नहीं है। पानी का लगातार प्रवेश कंक्रीट और उसमें मौजूद स्टील को नुकसान पहुंचा सकता है। स्टील में जंग लगने से वह फैल सकता है और आसपास के कंक्रीट में दरारें पैदा हो सकती हैं।

    इसलिए छत से पानी टपकना, कंक्रीट का झड़ना, प्लास्टर का लगातार उखड़ना या सरिया दिखाई देना जैसी समस्याओं की वजह का पता लगाना जरूरी है।

    कब तुरंत मकान खाली करना चाहिए?

    अगर किसी इमारत में तेजी से बढ़ती संरचनात्मक दरारें, छत या फर्श का स्पष्ट झुकाव, पिलर या बीम का गंभीर क्षतिग्रस्त होना, कंक्रीट का बड़े हिस्से में गिरना या इमारत के एक तरफ झुकने जैसे स्पष्ट संकेत दिखाई दें, तो वहां रहना जोखिम भरा हो सकता है।

    ऐसी स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए और स्थानीय प्रशासन या योग्य स्ट्रक्चरल इंजीनियर से तत्काल संपर्क करना चाहिए। यदि इमारत अचानक अस्थिर लग रही हो, तो खुद जांच करने या क्षतिग्रस्त हिस्से के नीचे जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

    हर दरार का मतलब यह नहीं होता कि मकान तुरंत गिरने वाला है। लेकिन नई, बढ़ती हुई या संरचनात्मक हिस्सों में दिखाई देने वाली दरारों को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। समय पर विशेषज्ञ से जांच कराना किसी बड़े हादसे को रोकने में मदद कर सकता है।

  • पानीपत: कोर्ट की पार्किंग में दो पक्षों में बवाल, गंडासी-डंडों से युवकों पर हमला; कई वाहन क्षतिग्रस्त.

    पानीपत: कोर्ट की पार्किंग में दो पक्षों में बवाल, गंडासी-डंडों से युवकों पर हमला; कई वाहन क्षतिग्रस्त.

    पानीपत: कोर्ट की पार्किंग में दो पक्षों में बवाल, गंडासी-डंडों से युवकों पर हमला; कई वाहन क्षतिग्रस्त.

    पानीपत, हरियाणा: पानीपत कोर्ट परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब वकीलों के चैंबर वाली बिल्डिंग के पीछे स्थित पार्किंग में दो पक्षों के बीच विवाद के दौरान मारपीट हो गई। आरोप है कि एक पक्ष के युवकों ने दूसरे पक्ष के लोगों पर गंडासी, लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। घटना में कई युवक घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए सिविल अस्पताल ले जाया गया।

    कोर्ट में तारीख के दौरान हुआ विवाद

    बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद चल रहा है और मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसी मामले में दोनों पक्ष तारीख पर कोर्ट पहुंचे थे। इसी दौरान चैंबर बिल्डिंग के पीछे पार्किंग में मौजूद युवकों के बीच कहासुनी के बाद मामला हिंसक हो गया।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एक पक्ष के दो युवक पार्किंग में मौजूद थे। इसी दौरान दूसरे पक्ष के कई युवक वहां पहुंचे और उनके साथ मारपीट शुरू हो गई। आरोप है कि हमलावरों ने धारदार हथियारों और डंडों से हमला किया।

    गाड़ियों में भी की गई तोड़फोड़

    हमले के दौरान पार्किंग में खड़े वाहनों को भी निशाना बनाया गया। आरोप है कि करीब पांच गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। अचानक हुई मारपीट के कारण कोर्ट परिसर में मौजूद लोगों के बीच भी हड़कंप मच गया।

    घटना में घायल युवकों को तत्काल सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार कराया जा रहा है।

    पुलिस ने शुरू की जांच

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम कोर्ट परिसर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस आसपास लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाल रही है और प्रत्यक्षदर्शियों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।

    फिलहाल पुलिस हमले में शामिल लोगों की पहचान और घटना के पीछे की पूरी वजह का पता लगाने में जुटी है। कोर्ट परिसर में हथियारों के साथ हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • दुनिया के सबसे लंबे: नाम वाले रेलवे स्टेशन का नाम बोलना भी मुश्किल, फिर लोग इसे याद कैसे रखते हैं?

    दुनिया के सबसे लंबे: नाम वाले रेलवे स्टेशन का नाम बोलना भी मुश्किल, फिर लोग इसे याद कैसे रखते हैं?

    दुनिया के सबसे लंबे: नाम वाले रेलवे स्टेशन का नाम बोलना भी मुश्किल, फिर लोग इसे याद कैसे रखते हैं?

    लंदन: दुनिया में कई रेलवे स्टेशन अपने इतिहास, वास्तुकला और अनोखी पहचान के लिए मशहूर हैं, लेकिन एक स्टेशन ऐसा भी है जिसका नाम इतना लंबा है कि उसे पहली बार पढ़ना और बोलना ही अपने आप में चुनौती जैसा लगता है। इसका नाम याद रखना भी आसान नहीं है, फिर भी स्थानीय लोग और पर्यटक इसे आसानी से पहचान लेते हैं।

    यह स्टेशन Llanfairpwllgwyngyll नाम के स्थान पर स्थित है, जो वेल्स के आइल ऑफ एंग्लेसी में है। इसका पूरा नाम Llanfair­pwllgwyngyll­gogery­chwyrn­drobwll­llan­tysilio­gogo­goch है। नाम में इतने अधिक अक्षर हैं कि इसे दुनिया के सबसे लंबे स्थान-नामों में गिना जाता है।

    नाम इतना लंबा क्यों है?

    दरअसल, यह नाम वेल्श भाषा का है और इसके पीछे एक पूरा अर्थ छिपा हुआ है। इसका विस्तृत नाम मोटे तौर पर एक ऐसे स्थान का वर्णन करता है जो एक खास भौगोलिक क्षेत्र और चर्च से जुड़ा है।

    नाम को अलग-अलग हिस्सों में समझने पर इसका उच्चारण और अर्थ समझना कुछ आसान हो जाता है। स्थानीय लोग भी इसे अक्सर छोटे रूप में Llanfairpwll कहकर बुलाते हैं।

    फिर लोगों को नाम याद कैसे रहता है?

    स्थानीय लोगों के लिए यह नाम कोई नई या असामान्य चीज नहीं है। वे बचपन से इसे सुनते और बोलते हुए बड़े होते हैं। इसके अलावा स्टेशन और शहर की पहचान के लिए अक्सर नाम का छोटा रूप इस्तेमाल किया जाता है।

    पर्यटकों के बीच भी यह जगह काफी लोकप्रिय है। यहां आने वाले लोग स्टेशन के नाम वाले बोर्ड के साथ तस्वीर खिंचवाना पसंद करते हैं। यही वजह है कि यह रेलवे स्टेशन सिर्फ परिवहन का साधन नहीं, बल्कि एक खास पर्यटन आकर्षण भी बन चुका है।

    क्या यह दुनिया का सबसे लंबा स्टेशन नाम है?

    इस नाम को दुनिया के सबसे लंबे स्थान-नामों में शामिल किया जाता है और रेलवे स्टेशन का बोर्ड भी अपनी लंबाई के कारण बेहद चर्चित है। हालांकि ‘दुनिया का सबसे लंबा स्टेशन नाम’ कहने की स्थिति इस बात पर निर्भर कर सकती है कि स्थान-नामों की गणना किस मानक से की जा रही है।

    इस स्टेशन की खासियत सिर्फ इसका लंबा नाम नहीं, बल्कि वेल्श भाषा और स्थानीय संस्कृति से इसका गहरा संबंध भी है। यही कारण है कि इतने मुश्किल नाम के बावजूद यह जगह दुनिया भर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

  • छतरपुर: अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच 65 वर्षीय शख्स के शरीर में हुई हलचल, परिजनों ने जिंदा होने का किया दावा.

    छतरपुर: अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच 65 वर्षीय शख्स के शरीर में हुई हलचल, परिजनों ने जिंदा होने का किया दावा.

    छतरपुर: अंतिम संस्कार की तैयारी के बीच 65 वर्षीय शख्स के शरीर में हुई हलचल, परिजनों ने जिंदा होने का किया दावा.

    छतरपुर, मध्य प्रदेश: बड़ामलहरा कस्बे में एक बुजुर्ग के कथित तौर पर मृत घोषित किए जाने के बाद फिर से जीवित होने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। करीब 65 वर्षीय शेख सलीम को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया था। परिजनों के मुताबिक, डॉक्टरों की ओर से उनकी हालत बेहद गंभीर बताई गई, जिसके बाद उन्हें घर लाया गया और अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी गई।

    हालांकि, रात करीब 1:30 बजे परिजनों ने उनके शरीर में हलचल महसूस होने और हिचकी आने का दावा किया। इसके बाद उन्होंने आंखें खोलीं और उठकर बैठ गए। परिवार का कहना है कि बाद में सलीम खड़े भी हुए।

    दोपहर में अस्पताल ले गए थे परिजन

    सलीम के पौत्र के मुताबिक, बुधवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोशी की हालत में चले गए। परिजन उन्हें दोपहर करीब 12 बजे जिला अस्पताल छतरपुर लेकर पहुंचे।

    परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने इलाज के बाद उनकी हालत गंभीर बताते हुए ग्वालियर रेफर करने की सलाह दी। इसके बाद परिवार शाम करीब 6:30 बजे उन्हें लेकर बड़ामलहरा के लिए रवाना हुआ।

    घर पहुंचते ही शुरू हो गई अंतिम संस्कार की तैयारी

    परिजन सलीम को घर लेकर पहुंचे और उन्हें एक कमरे में लिटा दिया। परिवार के मुताबिक, घर में दुआ-पाठ शुरू कर दिया गया और रिश्तेदारों को भी सूचना दे दी गई। कुछ रिश्तेदार घर पहुंच चुके थे और परिवार में शोक का माहौल था।

    रात में अचानक शरीर में हलचल का दावा

    परिजनों के अनुसार, रात करीब 1:30 बजे अचानक सलीम को हिचकी आई। इसके बाद उनके शरीर में हलचल महसूस हुई। परिवार का दावा है कि कुछ देर बाद उन्होंने आंखें खोलीं और उठकर बैठ गए। बाद में वह खड़े भी हुए।

    इस घटना के बाद घर में मौजूद परिजन हैरान रह गए। खबर फैलने पर आसपास के लोग भी सलीम को देखने के लिए पहुंचने लगे।

    धार्मिक आस्था से जोड़ रहा परिवार

    परिजनों का कहना है कि सलीम अब ठीक हैं और इबादत कर रहे हैं। परिवार ने इस घटना को अपनी धार्मिक आस्था से जोड़ते हुए इसे ईश्वर की कृपा बताया है।

    तीन बार मृत बताए जाने का परिजनों का दावा

    परिवार का दावा है कि सलीम को अलग-अलग मौकों पर डॉक्टरों ने तीन बार मृत बताया था। हालांकि, इस दावे की चिकित्सकीय पुष्टि अस्पताल के रिकॉर्ड और संबंधित डॉक्टरों की जानकारी के बाद ही हो सकेगी।

    फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अस्पताल में उस समय सलीम की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति क्या थी और उन्हें किस आधार पर मृत माना गया था। पूरे मामले में मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टरों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

    नोट: इस घटना से जुड़े “मृत घोषित” किए जाने और बाद में होश में आने के दावे फिलहाल परिजनों के बयान पर आधारित हैं। इसकी चिकित्सकीय पुष्टि संबंधित अस्पताल के रिकॉर्ड और डॉक्टरों की जांच से ही हो सकेगी।

  • मुगल काल में कैसे: मनाई जाती थी दिवाली और दशहरा? अकबर से लेकर बहादुर शाह जफर तक की क्या थी भूमिका.

    मुगल काल में कैसे: मनाई जाती थी दिवाली और दशहरा? अकबर से लेकर बहादुर शाह जफर तक की क्या थी भूमिका.

    मुगल काल में कैसे: मनाई जाती थी दिवाली और दशहरा? अकबर से लेकर बहादुर शाह जफर तक की क्या थी भूमिका.

    भारत में दिवाली और दशहरा सदियों से धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा रहे हैं। मुगल काल में भी इन त्योहारों से जुड़े कुछ आयोजन शाही दरबार और अलग-अलग क्षेत्रों में होते थे। हालांकि, अलग-अलग मुगल शासकों के समय इन उत्सवों को मिलने वाला शाही संरक्षण एक जैसा नहीं रहा। ऐतिहासिक विवरणों में अकबर के शासनकाल से लेकर बाद के मुगल दौर तक दिवाली और दशहरे से जुड़े कई आयोजनों का उल्लेख मिलता है।

    दिवाली को कहा जाता था ‘जश्न-ए-चिरागां’

    मुगल दरबार में दिवाली को रोशनी के पर्व के तौर पर मनाए जाने के उल्लेख मिलते हैं। इसे ‘जश्न-ए-चिरागां’ यानी रोशनी का उत्सव भी कहा जाता था। महलों और आसपास के क्षेत्रों में दीप जलाए जाते थे। बड़े दीपों और सजावट के कारण शाही परिसर रोशनी से जगमगा उठता था।

    कुछ ऐतिहासिक विवरणों में बड़े आकाश दीप का भी उल्लेख मिलता है। शाही परिसर में ऊंचे स्थान पर विशाल दीपक जलाने की परंपरा बताई गई है, जिसे लंबे समय तक तेल के जरिए रोशन रखा जाता था।

    आतिशबाजी और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते थे

    समय के साथ दिवाली के आयोजनों में आतिशबाजी भी शामिल हो गई। शाहजहां के दौर से जुड़े विवरणों में यमुना के आसपास और शाही परिसर के निकट आतिशबाजी के आयोजन का उल्लेख मिलता है।

    दिवाली केवल रोशनी और आतिशबाजी तक सीमित नहीं थी। शाही दरबार में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते थे। कुछ विवरणों के अनुसार रामायण से जुड़े पाठ और नाट्य प्रस्तुतियां भी होती थीं, जिनमें भगवान राम की अयोध्या वापसी की कथा को प्रस्तुत किया जाता था।

    शाही दावत और मिठाइयों की भी थी परंपरा

    त्योहारों के दौरान शाही रसोई में विशेष पकवान तैयार किए जाने के उल्लेख मिलते हैं। मिठाइयों और अन्य व्यंजनों को मेहमानों के बीच बांटा जाता था। घेवर, खीर, पेड़ा, जलेबी, फिरनी और शाही टुकड़ा जैसे पकवानों का उल्लेख कुछ विवरणों में मिलता है।

    मुगल दरबार से जुड़ी एक अन्य परंपरा तुलादान थी। इसमें शासक को वजन के बराबर सोना, चांदी या अन्य वस्तुओं से तौले जाने की रस्म होती थी। बाद में इन वस्तुओं को जरूरतमंदों के बीच बांटने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है।

    दशहरा भी मनाए जाने के उल्लेख

    दशहरे के अवसर पर शाही सेना के घोड़ों, हाथियों और हथियारों को सजाने की परंपरा का उल्लेख ऐतिहासिक विवरणों में मिलता है। जानवरों को सजावटी कपड़ों, घंटियों और अन्य साज-सज्जा से तैयार किया जाता था।

    रामायण से जुड़ी प्रस्तुतियां भी दशहरे के आयोजनों का हिस्सा बताई जाती हैं। कुछ विवरणों में कई दिनों तक रामायण और रामचरितमानस पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाने की बात सामने आती है।

    किस मुगल शासक ने शुरू की थी यह परंपरा?

    दिवाली और दशहरे को शाही स्तर पर संरक्षण देने के मामले में अकबर का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उनके शासनकाल में अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति दरबार में अपेक्षाकृत खुला रवैया दिखाई देता था। राजपूत परिवारों से वैवाहिक संबंध और उनके रीति-रिवाजों के प्रति सम्मान को भी इसके पीछे एक कारण माना जाता है।

    जहांगीर और शाहजहां के समय भी कई ऐसी परंपराएं जारी रहीं। शाहजहां के दौर में शाही समारोहों में रोशनी और आतिशबाजी का भव्य रूप देखने को मिलने के उल्लेख हैं।

    इसके बाद मुहम्मद शाह के शासनकाल में दिल्ली की दिवाली की अपनी अलग पहचान बनी। चांदनी चौक और उसके आसपास होने वाले उत्सवों का उल्लेख भी ऐतिहासिक विवरणों में मिलता है।

    औरंगजेब के समय क्या बदला?

    मुगल शासकों की नीतियां और धार्मिक दृष्टिकोण एक जैसे नहीं थे। औरंगजेब के शासनकाल में शाही स्तर पर कई हिंदू त्योहारों को मिलने वाला संरक्षण पहले के दौर की तुलना में कम हुआ। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि पूरे भारत में दिवाली और दशहरे के उत्सव समाप्त हो गए थे। स्थानीय समाज और अलग-अलग क्षेत्रों में इन त्योहारों की परंपराएं जारी रहीं।

    बाद के दौर में बहादुर शाह जफर के समय भी लाल किले और दिल्ली में हिंदू त्योहारों से जुड़े कुछ आयोजनों के उल्लेख मिलते हैं। इस तरह मुगल काल का इतिहास यह दिखाता है कि दिवाली और दशहरे का स्वरूप अलग-अलग शासकों और समय के साथ बदलता रहा, लेकिन इन त्योहारों की सांस्कृतिक मौजूदगी लंबे समय तक बनी रही।

  • लुधियाना: ऑस्ट्रेलिया भेजने का झांसा देकर महिला से 19.67 लाख की ठगी, सिंगापुर भेजकर किया गुमराह.

    लुधियाना: ऑस्ट्रेलिया भेजने का झांसा देकर महिला से 19.67 लाख की ठगी, सिंगापुर भेजकर किया गुमराह.

    लुधियाना: ऑस्ट्रेलिया भेजने का झांसा देकर महिला से 19.67 लाख की ठगी, सिंगापुर भेजकर किया गुमराह.

    लुधियाना, पंजाब: विदेश भेजने के नाम पर ठगी का एक और मामला सामने आया है। आरोप है कि एक ट्रैवल एजेंट ने महिला को ऑस्ट्रेलिया में नौकरी और बेहतर भविष्य का भरोसा देकर उससे 19 लाख 67 हजार रुपये ले लिए। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया भेजने के बजाय उसे सिंगापुर की फ्लाइट में बैठा दिया गया। महिला का आरोप है कि आरोपी ने उसका मूल पासपोर्ट भी वापस नहीं किया।

    ऑस्ट्रेलिया का वीजा दिलाने का दिया था भरोसा

    शिकायतकर्ता मोनिका रानी के मुताबिक, उसकी मुलाकात कथित ट्रैवल एजेंट मनदीप सिंह से हुई थी। आरोपी ने उसे ऑस्ट्रेलिया का वैध वीजा दिलाने और वहां सुरक्षित तरीके से बसाने का भरोसा दिया।

    आरोप है कि इस भरोसे में आकर महिला ने अलग-अलग तारीखों पर किस्तों में कुल 19,67,000 रुपये आरोपी को दे दिए। यात्रा और दस्तावेजी प्रक्रिया के लिए उसने अपना मूल पासपोर्ट भी उसे सौंप दिया।

    ऑस्ट्रेलिया की जगह सिंगापुर भेजने का आरोप

    महिला के अनुसार, पूरी रकम लेने के बाद आरोपी ने ऑस्ट्रेलिया का वीजा दिलाने के बजाय उसे कथित तौर पर सिंगापुर भेज दिया। वहां पहुंचने के बाद जब ऑस्ट्रेलिया का वैध वीजा और आगे की यात्रा से संबंधित दस्तावेज नहीं मिले, तो महिला को कथित धोखाधड़ी का पता चला।

    वापस लौटने के बाद उसने आरोपी से अपनी रकम और पासपोर्ट वापस मांगा। आरोप है कि आरोपी ने न तो पैसे लौटाए और न ही उसका मूल पासपोर्ट वापस किया।

    पुलिस जांच के बाद केस दर्ज

    महिला की शिकायत के बाद लुधियाना कमिश्नरेट पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की दस्तावेजी और तकनीकी जांच कराई। जांच के आधार पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

    पुलिस अब आरोपी की तलाश में उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि विदेश भेजने के नाम पर कथित तौर पर ठगी के इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका है या नहीं।

    नोट: मामले में लगाए गए आरोप शिकायत और पुलिस जांच पर आधारित हैं। आरोपी की दोषसिद्धि अदालत के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी।

  • क्या सच में आसमान: से होती है मछलियों की बारिश? जानिए इसके पीछे का हैरान करने वाला विज्ञान.

    क्या सच में आसमान: से होती है मछलियों की बारिश? जानिए इसके पीछे का हैरान करने वाला विज्ञान.

    क्या सच में आसमान: से होती है मछलियों की बारिश? जानिए इसके पीछे का हैरान करने वाला विज्ञान.

    नई दिल्ली: बारिश के दौरान अगर अचानक आसमान से पानी की जगह छोटी-छोटी मछलियां गिरने लगें तो यह नजारा किसी रहस्य से कम नहीं लगेगा। दुनिया के कुछ हिस्सों में ऐसी घटनाओं की खबरें सामने आती रही हैं, जिन्हें आम बोलचाल में ‘मछलियों की बारिश’ कहा जाता है। लेकिन क्या वाकई मछलियां आसमान में बनती हैं और फिर बारिश के साथ धरती पर गिरती हैं? इसका जवाब विज्ञान के पास है।

    दरअसल, कुछ खास मौसम संबंधी परिस्थितियों में तेज हवाएं और शक्तिशाली तूफानी सिस्टम पानी की सतह के बेहद करीब मौजूद छोटी मछलियों, मेंढकों या अन्य छोटे जलीय जीवों को पानी के साथ ऊपर उठा सकते हैं। इसके बाद तेज हवाएं उन्हें काफी दूर तक ले जा सकती हैं।

    कैसे आसमान तक पहुंचती हैं मछलियां?

    समुद्र, झील या नदी के ऊपर जब बहुत तेज हवाओं के साथ शक्तिशाली तूफान बनता है, तो पानी की सतह पर मौजूद छोटे जीव हवा के तेज दबाव और उठती जलधारा की चपेट में आ सकते हैं। कई बार ये जीव पानी के साथ ऊपर उठ जाते हैं।

    अगर हवा की रफ्तार और दिशा अनुकूल हो, तो ये जीव कुछ दूरी तक हवा में बह सकते हैं। जब तूफानी स्थिति कमजोर पड़ती है या बारिश शुरू होती है, तो ये जीव पानी की बूंदों के साथ नीचे गिर सकते हैं। इसी वजह से लोगों को ऐसा लगता है कि मछलियों की बारिश हो रही है।

    क्या यह घटना बहुत आम है?

    नहीं। ऐसी घटनाएं बेहद दुर्लभ मानी जाती हैं और हर जगह नहीं होतीं। आमतौर पर इनके लिए विशेष मौसम परिस्थितियों की जरूरत होती है। यही कारण है कि जब किसी इलाके में अचानक बड़ी संख्या में छोटी मछलियां जमीन पर दिखाई देती हैं, तो यह लोगों के लिए हैरानी का विषय बन जाता है।

    क्या मछलियां बादलों में पैदा होती हैं?

    ऐसा बिल्कुल नहीं है। मछलियां बादलों के अंदर पैदा नहीं होतीं और न ही वे सामान्य बारिश का हिस्सा होती हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से यह घटना तेज हवाओं, तूफानी गतिविधियों और जलस्रोतों से छोटे जीवों के ऊपर उठने से जुड़ी मानी जाती है।

    इसलिए ‘आसमान से मछलियों की बारिश’ सुनने में भले ही किसी रहस्यमयी घटना जैसी लगे, लेकिन इसके पीछे मौसम और वायुमंडलीय गतिविधियों से जुड़ा एक प्राकृतिक वैज्ञानिक कारण हो सकता है।

  • लुधियाना: महिला डॉक्टर से 75 लाख की कथित ठगी, सोने-चांदी के कारोबार में भारी मुनाफे का दिया था झांसा.

    लुधियाना: महिला डॉक्टर से 75 लाख की कथित ठगी, सोने-चांदी के कारोबार में भारी मुनाफे का दिया था झांसा.

    लुधियाना: महिला डॉक्टर से 75 लाख की कथित ठगी, सोने-चांदी के कारोबार में भारी मुनाफे का दिया था झांसा.

    लुधियाना, पंजाब: सोने-चांदी के कारोबार में कम समय में बड़ा मुनाफा कमाने का भरोसा देकर एक महिला डॉक्टर से कथित तौर पर 75 लाख रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने डॉक्टर से 40 लाख रुपये नकद और बैंक खातों के जरिए लिए, जबकि करीब 35 लाख रुपये मूल्य का सोना भी हासिल किया। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

    कारोबार में निवेश के नाम पर बढ़ाया भरोसा

    शिकायत के मुताबिक, आरोपी वरुण वर्मा ने पहले महिला डॉक्टर से मेलजोल बढ़ाया और खुद को सोने-चांदी के कारोबार से जुड़ा हुआ बताया। इसके बाद उसने कथित तौर पर डॉक्टर को कारोबार में पैसा लगाने पर कम समय में अच्छा मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया।

    आरोप है कि आरोपी की बातों पर विश्वास करके डॉक्टर ने अलग-अलग किस्तों में कुल 40 लाख रुपये नकद और बैंक खातों के माध्यम से उसे दे दिए।

    35 लाख रुपये का सोना भी लेने का आरोप

    शिकायत के अनुसार, पैसों के अलावा आरोपी ने सोने के कारोबार के नाम पर डॉक्टर से करीब 35 लाख रुपये मूल्य का सोना भी ले लिया। इस तरह शिकायतकर्ता के मुताबिक कुल 75 लाख रुपये की रकम और संपत्ति आरोपी के पास पहुंच गई।

    काफी समय बीतने के बाद जब कथित तौर पर न तो मुनाफे की रकम मिली और न ही निवेश का हिसाब दिया गया, तो डॉक्टर ने अपने पैसे और सोना वापस मांगना शुरू किया।

    पैसे और सोना लौटाने से किया इनकार

    शिकायतकर्ता का आरोप है कि शुरुआत में आरोपी टालमटोल करता रहा और बाद में रकम तथा सोना वापस करने से कथित तौर पर इनकार कर दिया। इसके बाद महिला डॉक्टर ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष शिकायत दी।

    पुलिस की जांच में बैंक लेन-देन और संबंधित लोगों के बयानों समेत अन्य तथ्यों की पड़ताल की गई। इसके बाद थाना डिविजन नंबर 8 में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी से संबंधित मामला दर्ज किया गया।

    आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस

    पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों और लेन-देन की जानकारी खंगाल रही है। साथ ही उसके संभावित ठिकानों पर दबिश देने की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद कथित तौर पर ठगी गई रकम और सोने की बरामदगी के प्रयास किए जाएंगे।

    मामले की जांच जारी है और पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित ठगी में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

    नोट: मामले में लगाए गए आरोप शिकायत और पुलिस जांच पर आधारित हैं। आरोपी की दोषसिद्धि अदालत के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी।

  • बिना स्पेस सूट ‘अंतरिक्ष’ में चला जाए इंसान तो क्या होगा? शरीर फटेगा या जम जाएगा, जानें पूरा सच.

    बिना स्पेस सूट ‘अंतरिक्ष’ में चला जाए इंसान तो क्या होगा? शरीर फटेगा या जम जाएगा, जानें पूरा सच.

    बिना स्पेस सूट ‘अंतरिक्ष’ में चला जाए इंसान तो क्या होगा? शरीर फटेगा या जम जाएगा, जानें पूरा सच.

    नई दिल्ली: अंतरिक्ष को दूर से देखने पर यह बेहद खूबसूरत और रहस्यमयी नजर आता है, लेकिन इंसान के लिए वहां का वातावरण बेहद खतरनाक है। अगर कोई व्यक्ति बिना स्पेस सूट के सीधे अंतरिक्ष के निर्वात में पहुंच जाए, तो क्या उसका शरीर तुरंत फट जाएगा? क्या वह कुछ ही सेकंड में जम जाएगा? हकीकत फिल्मों में दिखाई जाने वाली तस्वीर से काफी अलग है।

    कुछ ही सेकंड में होश खो सकता है इंसान

    अंतरिक्ष में सांस लेने के लिए हवा नहीं होती और बाहरी वायुमंडलीय दबाव भी लगभग शून्य होता है। ऐसे वातावरण में पहुंचते ही शरीर तेजी से ऑक्सीजन की कमी का सामना करने लगता है।

    दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचने के कारण व्यक्ति करीब 10 से 15 सेकंड के भीतर बेहोश हो सकता है। अगर उसे तुरंत सुरक्षित वातावरण और ऑक्सीजन उपलब्ध न कराई जाए तो कुछ ही समय में स्थिति जानलेवा हो जाती है।

    सांस रोकना बन सकता है खतरनाक

    अगर कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति में अपनी सांस रोकने की कोशिश करे तो यह बेहद नुकसानदायक हो सकता है। कम दबाव वाले वातावरण में फेफड़ों के अंदर मौजूद हवा फैल सकती है और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

    इसी वजह से अंतरिक्ष के निर्वात के संपर्क में आने पर सांस रोकने के बजाय फेफड़ों से हवा बाहर निकलने देना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।

    शरीर फूल सकता है, लेकिन फटेगा नहीं

    अंतरिक्ष के बेहद कम दबाव के कारण शरीर के कुछ तरल पदार्थों में बदलाव आने लगता है। कम दबाव की वजह से शरीर के सतही हिस्सों में मौजूद नमी वाष्प बनने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। इससे शरीर में सूजन आ सकती है। इस स्थिति को वैज्ञानिक तौर पर इबुलिज्म से जोड़ा जाता है।

    हालांकि, इंसान का शरीर गुब्बारे की तरह फट नहीं जाता। त्वचा और शरीर के ऊतक कुछ हद तक आंतरिक दबाव को संभाल सकते हैं।

    क्या इंसान तुरंत जम जाएगा?

    यह भी फिल्मों में दिखाई जाने वाली आम गलतफहमी है कि अंतरिक्ष में जाते ही शरीर बर्फ में बदल जाएगा। वास्तव में ऐसा तुरंत नहीं होता।

    अंतरिक्ष में तापमान की स्थिति इस बात पर निर्भर करती है कि शरीर सीधे सूर्य के प्रकाश में है या छाया में। शरीर की गर्मी के बाहर निकलने की प्रक्रिया भी पृथ्वी के वातावरण जैसी नहीं होती। इसलिए व्यक्ति कुछ ही सेकंड में बर्फ की तरह नहीं जमता।

    सूर्य की किरणें भी बन सकती हैं खतरा

    अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसा वातावरण और ओजोन परत मौजूद नहीं होती, जो सूर्य की कुछ हानिकारक विकिरणों को रोकती है। सीधे सूर्य के संपर्क में आने पर त्वचा को तेज पराबैंगनी विकिरण का नुकसान हो सकता है।

    लेकिन तत्काल सबसे बड़ा खतरा यूवी किरणें नहीं, बल्कि ऑक्सीजन की कमी और बेहद कम दबाव होता है।

    बचने के लिए कितना समय मिलेगा?

    बिना सुरक्षा के अंतरिक्ष के निर्वात में इंसान के पास बेहद कम समय होता है। कुछ सेकंड में चेतना जा सकती है और लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी रहने पर शरीर के महत्वपूर्ण अंग गंभीर रूप से प्रभावित होने लगते हैं।

    अगर व्यक्ति को बहुत जल्दी दबाव वाले वातावरण में वापस लाया जाए और ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जाए, तो बचने की संभावना हो सकती है। इसलिए यह कहना कि हर स्थिति में 1-2 मिनट में निश्चित रूप से मौत हो जाएगी, बहुत ज्यादा निश्चित दावा होगा।

    फिल्मों जैसा नहीं होता शरीर का हाल

    साइंस फिक्शन फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि अंतरिक्ष में पहुंचते ही इंसान का शरीर धमाके के साथ फट जाता है या वह तुरंत बर्फ की मूर्ति बन जाता है। वास्तविकता इससे अलग है।

    बिना स्पेस सूट के अंतरिक्ष में जाना निश्चित रूप से जानलेवा स्थिति है, लेकिन शरीर तुरंत टुकड़ों में नहीं बिखरता। असली खतरा वैक्यूम, ऑक्सीजन की कमी और शरीर पर पड़ने वाले कम दबाव के प्रभाव से पैदा होता है।